Sonam Wangchuk : लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने रिहाई के बाद कहा कि मैं आज बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं. मैं अपनी आवाज वापस पाने, अपने छोटे पंख फैलाने और खुद को नयी दिशा देने की ओर अग्रसर हूं.
सोनम वांगचुक ने कहा कि मेरे साथ और मेरी पत्नी के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ उसकी डरावनी कहानी बताने को मैं तैयार था. कैसे अचानक मेरे घर से मुझे, आप जानते हैं, कपड़े लपेटकर इस जेल में डाल दिया गया, बिना अपने परिवार या अपने वकीलों को कई दिनों तक फोन भी नहीं करने दिया गया. हालांकि जेल में सबकुछ अनुशासित था.
प्रशासन ने बातचीत के लिए हाथ बढ़ाया
170 दिनों तक जेल में रहने के बाद सोनम वांगचुक ने मीडिया के सामने कहा कि मैं थोड़ा लालची इंसान हूं. मेरे लिए एक जीत काफी नहीं है. मैं हमेशा एक विन–विन यानी जीत की तलाश में रहता हूं. सोनम ने कहा कि मेरी जीत का कोई मतलब नहीं है अगर जिन वजहों को वो रिप्रेजेंट करते हैं, वे नहीं जीतते हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने भरोसा बनाने और मतलब की बातचीत को आसान बनाने के लिए हाल ही में हाथ बढ़ाया है. यह बहुत अच्छी बात है क्योंकि इस तरह लद्दाख भी जीतेगा और हमारी वजह भी जीतेगी. उन्होंने कहा कि एनएसए का दुरुपयोग ना हो इसपर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए.
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटाने पर हुई सोनम वांगचुक की रिहाई
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 मार्च को सोनम वांगचुक पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटा लिया, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी. सोनम वांगचुक पूरे 170 दिनों तक जोधपुर जेल में रहे. उनपर आरोप यह था कि उन्होंने आंदोलन के दौरान स्थानीय लोगों को हिंसा के लिए प्रेरित किया.
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