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खेल में भारत की ताकत का पर्याय है आइपीएल, पढ़ें अभिषेक दुबे का आलेख

IPL: हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स के विराट आयोजनों में से एक आइपीएल, 2026 की शुरुआत होना हो चुकी है. आने वाले दो महीनों में क्रिकेट के इस सबसे बड़े आयोजन में खिलाड़ी जहां एक दूसरे से टकरायेंगे, वहीं दर्शक मैदानों में और टेलीविजन सेट्स के सामने मनोरंजन से लबरेज रहेंगे. ऐसे ही, इन दो महीनों में हिंदुस्तानीय क्रिकेट, कोच और चयनकर्ता किसी नये धोनी, बुमराह, सूर्य और रोहित की तलाश में जुट जायेंगे. एआइ यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक ग्लोबल ऑर्डर के मौजूदा दौर में एक बेहद प्रासंगिक सवाल यह उठता है कि स्वतंत्र हिंदुस्तान का सबसे नायाब और कामयाब वैश्विक टैंपलेट यानी खाका क्या है. इस देश के कामयाब टैंपलेट कई हो सकते हैं. लेकिन जिसकी चर्चा सबसे स्वाभाविक है, वह है इंडियन प्रीमियर लीग. अगर थोड़ा पीछे जायें, तो स्पष्ट होगा कि हिंदुस्तान 2007 में टी-20 विश्व कप चैंपियन बना और उसके एक साल बाद 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग यानी आइपीएल की नीव रखी गयी.

यह अद्भुत संयोग है कि इस साल हिंदुस्तान जब तीसरी बार टी-20 विश्व कप का चैंपियन बना है, तब इंडियन प्रीमियर लीग दुनिया का सबसे अमीर, सबसे असरदार और जबरदस्त क्रिकेट लीग के रूप में सामने है. आइपीएल ने लगभग बीस वर्षों में हिंदुस्तानीय क्रिकेट को वह मजबूती दी है, जिसका दुनियाभर में डंका बज रहा है. सवाल यह है कि वह क्या अहम बात है, जिसने आइपीएल को वैश्विक स्तर पर इतना ताकतवर स्पोर्ट्स लीग बना दिया है. इंडियन प्रीमियर लीग के बेंगलुरु फ्रेंचाइजी को विजय माल्या की कंपनी ने जब 450 करोड़ रुपये में खरीदा था, तब जानकारों ने इसे पागलपन बताया था. लेकिन अट्ठारह साल बाद जब इसी टीम को आदित्य बिरला ग्रुप, द टाइम्स ऑफ इंडिया, ब्लैकस्टोन और बोल्ड वेंचर्स की समूह ने 1.78 अरब डॉलर यानी लगभग 16,706 करोड़ रुपये में खरीदा, तो किसी को हैरानी नहीं हुई.

ठीक इसी तरह से राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी को अमेरिकी कारोबारी काल सोमानी के समूह ने इसी महीने 1.63 अरब डॉलर यानी लगभग 15,290 करोड़ रुपये में खरीदा है. इन दो टीमों की जबरदस्त छलांग के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आइपीएल की शेष टीमों का मौजूदा वैल्यू और इंडियन प्रीमियर लीग का ब्रांड वैल्यू कहां तक पहुंच चुका है. गौर करने की बात यह भी है कि आइपीएल की इन दो टीमों की रिकॉर्ड खरीदारी तब हुई है, जब युद्ध और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण दुनियाभर में आर्थिक संकट की आशंका बढ़ी है.

जाहिर है कि इंडियन प्रीमियर लीग की जबरदस्त कीमत ने हिंदुस्तानीय क्रिकेट को आज शिखर पर पहुंचा दिया है. हिंदुस्तानीय क्रिकेट के मौजूदा खिलाड़ी विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, संजू सैम्सन, अभिषेक शर्मा ग्लोबल क्रिकेट रॉकस्टार हैं. हिंदुस्तान टी-20 क्रिकेट का बादशाह है और दुनिया के बड़े क्रिकेट दिग्गजों का यह मानना है कि आज हिंदुस्तानीय क्रिकेट इतनी मजबूत स्थिति में है कि वह विश्व स्तर की कम से कम तीन टी-20 टीमें मैदान में उतार सकता है. हिंदुस्तान के टैलेंट पूल की स्थिति यह है कि रणजी से लेकर दिलीप ट्रॉफी स्पोर्ट्सने वाले और अंडर-19 से लेकर जूनियर क्रिकेटर तक-हर किसी का भविष्य सुरक्षित है. हिंदुस्तान के पास क्रिकेट के आधुनिकतम स्टेडियम, अकादमी, कोच और सपोर्ट स्टाफ हैं.

ऐसे ही, गुजरात के अहमदाबाद में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम से लेकर बेंगलुरु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक-हर तरफ क्रिकेट में वैश्विक सुविधाओं का डंका बज रहा है. मौका सिर्फ युवा क्रिकेटरों को ही नहीं मिल रहा है, पूर्व क्रिकेटरों के सामने भी कमेंटरी से लेकर कोचिंग तक जबरदस्त अवसर हैं. बीते दौर के क्रिकेटरों को पेंशन के तौर पर बड़ी धनराशि मिलती है, जिससे कि वे अपना जीवन सम्मान और गरिमा के साथ गुजार सकते हैं. उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि हिंदुस्तानीय फ्रेंचाइजी मालिक अन्य क्रिकेट लीगों में भी बड़े हिस्सेदार बन चुके हैं. इसका सुखद परिणाम यह हुआ है कि विश्व क्रिकेट में हिंदुस्तान की आज वह मजबूत पकड़ बन चुकी है, जो एक जमाने में इंग्लैंड की थी.

इससे हालांकि नयी चुनौतियां भी सामने आयी हैं. हिंदुस्तानीय टीम के मौजूदा क्रिकेटर के अन्य लीगों में भाग न लेने से कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं. हिंदुस्तानीय उद्योगपतियों ने दुनिया की अन्य लीगों में बड़ी हिस्सेदारी ले रखी हैं और वे भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की तरह अपने टीम का वैल्युएशन बढ़ता देखना चाहते हैं. और यह तभी हो सकता है, जब हिंदुस्तानीय रॉकस्टार दुनिया की दूसरी लीगों में भी जाकर स्पोर्ट्सें.
ऐसे ही, आइपीएल में दुनियाभर के खिलाड़ियों के स्पोर्ट्सने का नतीजा यह दिख रहा है कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी हिंदुस्तानीय विकेट पर स्पिन के खिलाफ अब बेहतर स्पोर्ट्सने लगे हैं, जो टीम इंडिया के लिए बहुत अच्छी स्थिति नहीं है.

ऐसे में सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या आइपीएल में अधिक से अधिक विदेशी खिलाड़ियों को शामिल करने की परंपरा आने वाले समय में बरकरार रहेगी. लेकिन सच्चाई यही है कि हिंदुस्तानीय क्रिकेट आज अगर इतनी मजबूत स्थिति में है, तो इसमें आइपीएल का योगदान सबसे अधिक है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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