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चतरा में हर घर नल जल योजना पर करोड़ों खर्च, पर प्यासे हैं गांव और शहर के लोग

चतरा से दीनबंधू की रिपोर्ट

Chatra Water Crisis: झारखंड के चतरा जिले में जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल जल योजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए. मगर, इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. जिले के शहर और गांव के लोग प्यासे के प्यासे हैं. आलम यह कि जिले के गांव और टोलों में लगे अधिकतर जलमीनार या तो खराब हो गए हैं या फिर वे बेकार पड़े हैं. कहीं स्टार्टर खराब है, तो कहीं सोलर प्लेट की चोरी हो गई है. कहीं मोटर खराब होने के कारण ये बेकार पड़ी हैं.

पाइपलाइन बिछी, मगर नहीं मिल रहा पानी

जरा ठहरिए. अभी चतरा के प्यासे लोगों की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है. प्रशासन की योजना के तहत घरों तक पानी पहुंचाने के लिए बिछाई गई पाइपलाइन भी कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई है. इस कारण घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है. कई जगहों पर जलमीनार से पानी आपूर्ति शुरू नहीं की गई है. ठेकेदार ने राशि की निकासी भी कर ली है.

नदी-नाले और कुएं का पानी पी रहे लोग

गर्मी के मौसम की शुरुआत हो गई है और चतरा जिले के कस्बों, गांवों और टोलों में पेयजल संकट शुरू हो गया है. लोग जहां-तहां से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं. कई जगहों पर लोग नदी, नाला और कुआं के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

मयूरहंड के दो दर्जन गांवों में जलमीनार से पेयजलापूर्ति ठप

मयूरहंड प्रखंड के दो दर्जन से अधिक गांवों में जलमीनार से जलापूर्ति पिछले एक माह से ठप है. जलापूर्ति ठप रहने का मुख्य कारण चतरा-हजारीबाग की सीमा पर स्थित बड़ाकर नदी में जिस स्थान पर डीप बोरिंग कर पाइप बिछाया गया है, वह बोरिंग नदी के जल व जमीन से ऊपर होने का बताया जा रहा है. जलापूर्ति ठप रहने के बाद भी लाभुकों से पेयजल की निर्धारित राशि भुगतान की मांग की जा रही है.

सोकी में बना ट्रीटमेंट प्लांट के साथ गुरवाडीह, पंदनी व मयूरहंड में बनी जलमीनार बेकार पड़ी है. सोकी पंचायत के सोकी, चेरी, ढेबादेरी, नवडीहा, अलकडीहा, पंदनी पंचायत के पंदनी, अंबातरी, मौना, सनपुरा, मायापुर, बेलखोरी पंचायत के खैरा, शालेय, बेलखोरी, कनौदवा, उपरौंध व मयूरहंड पंचायत के मयूरहंड प्रखंड मुख्यालय के साथ परोरिया, परसावां, बेला समेत कई अन्य गांवों में जलापूर्ति एक माह से ठप है.

सिमरिया के एदला पंचायत में 14 जलमीनार खराब

सिमरिया प्रखंड की एदला पंचायत में 19 में से 14 जलमीनार खराब पड़े हुए हैं. कई जगहों पर जलमीनार लगाने के बाद शुरू के एक-दो महीने तक जलापूर्ति हुई. इसके बाद से खराब पड़ा हुआ है. एदला गांव में मीनू महतो, खिरोधर महतो और यूनुस राय के घर के समीप, पंचायत भवन, खुटेरवा में वासुदेव साव, राजू भुईयां के घर के पास, मानव महुआ स्थल के पास लगी जलमीनार खराब पड़े हैं.

पत्थलगड्डा के कई गांवों में जलमीनार बेकार

पत्थलगड्डा प्रखंड के कई गांवों में लगी जलमीनार बेकार पड़े हैं, जिससे लोगों के समक्ष पेयजल संकट पैदा हो गया है. प्रखंड के दुंबी, कोदवारी, शीतलपुर, मेराल, खैरा, चौथा, नावाडीह गांव में लगी जलमीनार खराब पड़े हैं. स्थानीय लोगों की मानें, तो ठेकेदार की लापरवाही के कारण लोगों को हर घर नल जल योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. नावाडीह के मरंगा व पुरू पोखर के पास लगी जलमीनार का स्टार्टर खराब होने के कारण खराब पड़ा है.

क्या कहते हैं लोग

मयूरहंड के अश्विनी कुमार ने कहा कि गांव में लगी जलमीनार एक महीने से खराब पड़ा है, जिससे आरओ का पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है. मरंगा गांव के सूर्यदेव गंझू ने कहा कि जलमीनार खराब होने की सूचना पीएचइडी को दी गयी है, लेकिन मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. कुआं का पानी पीने को विवश हैं. नावाडीह के त्रिभुवन प्रसाद ने कहा कि जलमीनार का स्टार्टर खराब हो गया है. पूर्व में कई बार स्टार्टर की मरम्मत निजी खर्च से कर चुके हैं.

लावालौंग प्रखंड के हांहे गांव निवासी रमेश गंझू ने कहा कि जलमीनार खराब होने से नाला का पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. सिमरिया प्रखंड के एदला गांव के जागेश्वर प्रसाद कुशवाहा, मीनू महतो ने कहा कि जलमीनार खराब रहने से पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है.

जलमीनार लगाने में कितना होता है खर्च

एक जलमीनार लगाने की लागत सात से आठ लाख रुपये है. संवेदक की लापरवाही व विभाग की अनदेखी के कारण लोगों को जलमीनार का लाभ नहीं मिल पा रहा है. सबसे अधिक परेशानी कुंदा, लावालौंग, प्रतापपुर, सिमरिया प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हो रही है.

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क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता

पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार मुंडारी ने कहा कि हर घर नल जल योजना के तहत जिले में अब तक 64 प्रतिशत काम हुआ. दो साल से फंड के अभाव में योजना का कार्य थोड़ी धीमी गति से हो रहा है. जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 से बढ़ कर 2028 हो गया है. जलमीनार खराब होने की जानकारी मिलने पर दुरुस्त किया जा रहा है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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