Murshidabad Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण में मुर्शिदाबाद जिला सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बन गया है. दो-तिहाई मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में इस बार हार-जीत का फैसला केवल विकास के दावों पर नहीं, वोटर लिस्ट से कटे नामों और पिछले एक साल में हुई सांप्रदायिक हिंसा की कड़वाहट पर होगा. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जिले के करीब 11 लाख मतदाताओं का भविष्य अधर में है, जिसने नेतृत्वक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
वोटर लिस्ट का 20 प्रतिशत वाला पेच
मुर्शिदाबाद के कुल 55 लाख मतदाताओं में से लगभग 20 प्रतिशत यानी 11 लाख से अधिक लोगों को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में डाल दिया गया है. ताज्जुब की बात यह है कि शमशेरगंज से टीएमसी के उम्मीदवार नूर आलम का नाम भी इसी लिस्ट में है. नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए चुनौती तो है ही, लेकिन यह अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने का जरिया भी बन सकता है.
हिंसा के जख्म और राम नवमी का तनाव
मुर्शिदाबाद की सियासत पर 2025 की हिंसा का साया साफ दिख रहा है.
- शमशेरगंज कांड : अप्रैल 2025 में वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में हुई हिंसा और हरगोविंद दास एवं उनके बेटे की हत्या की घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है.
- ताजा तनाव : 27 मार्च 2026 को रघुनाथगंज में राम नवमी शोभा यात्रा के दौरान हुई आगजनी ने आग में घी डालने का काम किया है. भाजपा इसे ‘तुष्टीकरण’ के खिलाफ सुशासन का मुद्दा बना रही है, जबकि टीएमसी इसे ध्रुवीकरण की साजिश करार दे रही है.
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दांव पर दिग्गजों की साख
- जंगीपुर के भाजपा विधायक पर आरोप : टीएमसी के कद्दावर नेता और 2 बार के विधायक जाकिर हुसैन का मुकाबला भाजपा के वकील चित्तो मुखर्जी से है. जाकिर हुसैन भाजपा पर सांप्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप लगा रहे हैं.
- शमशेरगंज और सूती : टीएमसी ने यहां नये और पुराने चेहरों का संतुलन बनाया है. शमशेरगंज में उद्यमी नूर आलम और सूती में इमानी विश्वास पर भरोसा जताया गया है. भाजपा के षष्ठी चरण घोष और महावीर घोष भ्रष्टाचार, गंगा कटाव और बेरोजगारी को हथियार बनाकर घेराबंदी कर रहे हैं.
पलायन और बेरोजगारी का मुद्दा
सांप्रदायिकता के शोर के बीच गंगा के कटाव से होने वाला पलायन और बेरोजगारी मुर्शिदाबाद की कड़वी सच्चाई है. भाजपा का दावा है कि टीएमसी प्रशासन ने बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की है, जिससे युवा पलायन को मजबूर हैं.
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