Sugar Export Ban: हिंदुस्तान प्रशासन ने देश में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए इसके एक्सपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना और महंगाई को रोकना है.
क्यों यह फैसला अचानक लिया गया?
इस साल मानसून और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण गन्ने की पैदावार कम होने की आशंका है. अनुमान है कि 2025-26 के सीजन में चीनी का उत्पादन घटकर 275 लाख टन रह सकता है, जबकि देश की खपत लगभग 280 लाख टन है. ऐसे में अगर एक्सपोर्ट जारी रहता, तो देश में चीनी की भारी कमी हो सकती थी और कीमतें आसमान छूने लगतीं.
किन शिपमेंट्स पर रोक नहीं लगेगी?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पाबंदी उन शिपमेंट्स पर लागू नहीं होगी जिनकी लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो चुकी थी या जो कस्टम अधिकारियों को सौंपे जा चुके थे. इसके अलावा, दूसरे देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए प्रशासन विशेष अनुमति पर एक्सपोर्ट की इजाजत दे सकती है. यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को कोटा के तहत होने वाला एक्सपोर्ट भी जारी रहेगा.
व्यापारियों और मिलों पर क्या असर होगा?
इस फैसले से चीनी मिलें और व्यापारी थोड़े परेशान हैं क्योंकि उन्होंने पहले ही लगभग 8 लाख टन चीनी के एक्सपोर्ट के डील्स कर लिए थे. अचानक लगी रोक से इन कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करना मुश्किल हो गया है. हालांकि, प्रशासन का मानना है कि मिडिल ईस्ट के युद्ध और खाद की कमी जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश का स्टॉक बचाना ज्यादा जरूरी है.
दुनिया भर में क्या मचेगी हलचल?
हिंदुस्तान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. हिंदुस्तान के इस फैसले से वैश्विक बाजार में चीनी की सप्लाई कम हो गई है, जिससे न्यूयॉर्क और लंदन के बाजारों में चीनी की कीमतों में 2 से 3 प्रतिशत का उछाल आया है. अब एशियाई और अफ्रीकी देशों को चीनी के लिए ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों पर निर्भर रहना होगा.
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