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बंगाल: फालता में कड़ी सुरक्षा के बीच पड़े 88 फीसदी वोट, मैदान से गायब रहे ‘पुष्पा’

मुख्य बातें

Falta Re-Polling: कोलकाता. दक्षिण 24 परगना के फालता विधानसभा केंद्र में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच 285 बूथों पर पुनर्मतदान हुआ. सुबह सात बजे से शुरू हुए मतदान के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा के कड़े घेरे में रखा गया. चुनाव आयोग की ओर से 35 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती रही, जबकि हर बूथ पर वेब कास्टिंग के जरिये नजर रखी गयी. किसी भी अप्रिय स्थिति से निबटने के लिए 35 क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैयार रखी गयी थी. शाम सात बजे तक के आंकड़ों के अनुसार यहां 87.85 फीसदी मतदान हुआ.

जहांगीर पूरी तरह रहे नदारद

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान उर्फ ‘पुष्पा’ को लेकर ही रही. पुनर्मतदान से ठीक 48 घंटे पहले जहांगीर ने चुनावी मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था. हालांकि नामांकन वापसी की समय-सीमा गुजर जाने के कारण इवीएम में उनका नाम और तृणमूल का चुनाव चिन्ह बना रहा. लेकिन प्रचार से लेकर मतदान के दिन भी जहांगीर पूरी तरह नदारद रहे. उनके घर और पार्टी कार्यालय पर ताला लटका मिला.

जगह-जगह दिखे केंद्रीय बल के जवान

मतदान के दौरान कुछ संवेदनशील इलाकों में युवकों के अनावश्यक रूप से जमा होने की शिकायत मिली. इसके बाद केंद्रीय बल के जवानों को सक्रिय होते देखा गया. जवानों ने भीड़ हटाकर लोगों को मतदान केंद्रों के आसपास से खदेड़ा और स्थिति को नियंत्रित किया. सुरक्षा बल लगातार इलाके में फ्लैग मार्च और पेट्रोलिंग कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव की स्थिति पैदा न हो सके.

आखिर क्यों दोबारा चुनाव कराना पड़ा

29 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के दौरान फालता के कई बूथों में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे थे. चुनाव आयोग को इवीएम में टेप और स्याही लगाने जैसी शिकायतें मिली थीं. विपक्ष ने बूथ कैप्चरिंग और वोटरों को प्रभावित करने के आरोप लगाये थे. भाजपा नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद चुनाव आयोग से दोबारा मतदान कराने की मांग की थी. आयोग ने वेब कास्टिंग और रिपोर्ट की जांच के बाद पूरे विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया.

स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप

पुनर्मतदान के दौरान कई स्थानीय मतदाताओं ने दावा किया कि पिछले चुनावों में उन्हें स्वतंत्र रूप से वोट नहीं डालने दिया जाता था. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जहांगीर खान और उनके समर्थक बूथों पर दबाव बनाते थे. एक मतदाता ने कहा कि पहले लाइन से लोगों को खींचकर बाहर निकाल दिया जाता था और धमकी दी जाती थी. कुछ लोगों का दावा था कि उंगली पर स्याही लगाने के बावजूद उन्हें वोट डाले बिना लौटना पड़ता था. इस बार केंद्रीय बलों की मौजूदगी के कारण कई मतदाताओं ने खुलकर मतदान करने की बात कही. बूथों के बाहर सुबह से लंबी कतारें देखी गयीं.

जहांगीर के पीछे हटने से बदल गया चुनावी माहौल

जहांगीर खान लंबे समय से फालता और डायमंड हार्बर इलाके में तृणमूल के प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से अभिषेक बनर्जी को बड़ी बढ़त दिलाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी. लेकिन पुनर्मतदान से पहले अचानक उनका पीछे हटना नेतृत्वक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया. जहांगीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वह फलता के विकास और शांति के लिए चुनावी लड़ाई से खुद को अलग कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा फालता के लिए घोषित विशेष पैकेज का भी जिक्र किया. हालांकि, नेतृत्वक गलियारों में इसे तृणमूल की अंदरूनी कमजोरी और दबाव की नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है. तृणमूल ने भी साफ कर दिया कि चुनाव से हटने का फैसला जहांगीर का व्यक्तिगत निर्णय है.

भाजपा ने इसे बताया ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की हार

भाजपा लगातार दावा कर रही है कि फलता का पुनर्मतदान तृणमूल की चुनावी रणनीति और कथित दबाव की नेतृत्व पर जनता का जवाब है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रोड शो कर लोगों से 100 प्रतिशत मतदान की अपील की थी. भाजपा नेताओं का कहना है कि जिस इलाके को कभी अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ कहा जाता था, वहीं अब तृणमूल उम्मीदवार चुनाव मैदान छोड़ने को मजबूर हो गये.

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पूरे इलाके में सुरक्षा का रहा अभूतपूर्व इंतजाम

35 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनात–सभी 285 बूथों पर वेब कास्टिंग–हर बूथ पर केंद्रीय जवानों की मौजूदगी–35 क्विक रिस्पॉन्स टीम सक्रिय–संवेदनशील इलाकों में लगातार फ्लैग मार्चचुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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