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देश में आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुईं महिलाएं, लेकिन 22.3% अभी भी पतियों से पिट रहीं

NFHS-6 : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6, 2023-24) का आंकड़ा प्रशासन ने 29 मई को जारी कर दिया है. इन आंकड़ों को देखें तो हम पाते हैं कि देशभर में स्त्रीओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी बदलाव आया है. अब वे काफी मजबूती से अपनी बातों को रख रही हैं, बावजूद इसके एक आंकड़ा चौंकाने वाला है, जो यह बताता है कि देश की 22.3% प्रतिशत स्त्रीएं अपने पतियों से पिट रही हैं.

क्या कहता है NFHS-6 का आंकड़ा

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों पर नजर डालें तो वह कहता है कि वैसी विवाहित स्त्रीएं, जो अपने घरेलू फैसलों में निर्णय लेने की भूमिका में हैं, उनकी संख्या शहरी इलाकों में 91.4% है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 88% का है. शहरी और ग्रामीण दोनों स्त्रीओं को मिला दें तो यह आंकड़ा 89% हो जाता है. NFHS-5 पर अगर नजर डालें तो यह आंकड़ा महज .3% प्रतिशत वृद्धि की बात करता है, जहां यह आंकड़ा 88.7% का है.बिहार में यह आंकड़ा 85.1 प्रतिशत है, झारखंड में यह 92.9 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. वहीं अगर बात 12 महीने काम करने के बाद उन्हें कैश वेतनमान देने की बात आती है, तो आंकड़े सुखद है और NFHS-5 से 5% वृद्धि की बात कहते हैं. NFHS-5 में जहां 25.4 प्रतिशत स्त्रीओं को कैश पेमेंट मिल रहा था, वह अब 30.8 प्रतिशत हो गया है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि ग्रामीण स्त्रीएं इस मामले में शहरी स्त्रीओं से आगे हैं, उन्हें 31.2 प्रतिशत कैश भुगतान हो रहा है, जबकि शहरी स्त्रीओं को 29.8 प्रतिशत.

बैंक एकाउंट और मोबाइल रखने के मामले में भी स्त्रीएं आगे

बैंक एकाउंट की अगर बात करें तो स्त्रीएं इसमें भी सशक्त होती नजर आ रही हैं. NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार 89 प्रतिशत स्त्रीएं ऐसी हैं, जो अपने बैंक एकाउंट का इस्तेमाल खुद कर रही हैं, इनमें 88.3 प्रतिशत शहरी और 89.3 प्रतिशत शहरी हैं. NFHS-5 की तुलना में बड़ा बदलाव हमें देखने को मिल रहा है. मोबाइल फोन रखने के मामले में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि दिख रही है. NFHS-5 में जहां 53.9 प्रतिशत स्त्रीओं के पास फोन था वह अब बढ़कर 63.6 प्रतिशत हो गया है. यहां शहरी स्त्रीओं की भागीदारी 77.6 प्रतिशत की है, जबकि ग्रामीण स्त्रीओं की भागीदारी 57.4 प्रतिशत की है.बिहार में बचत खाते वाली स्त्रीओं की हिस्सेदारी 76.7 प्रतिशत से बढ़कर 90.9 प्रतिशत हो गई है. इसी तरह मोबाइल फोन का स्वयं उपयोग करने वाली स्त्रीओं का प्रतिशत 51.4 से बढ़कर 62.8 हो गया. झारखंड में यह सुधार और भी अधिक दिखाई देता है. वहां बैंक खाते वाली स्त्रीओं की हिस्सेदारी 78.2 प्रतिशत से बढ़कर 91.2 प्रतिशत पहुंच गई है, जबकि मोबाइल फोन का स्वयं उपयोग करने वाली स्त्रीओं का प्रतिशत 76.4 से बढ़कर 90.3 हो गया है.

पतियों से पिटने का मामला अभी भी चौंका रहा

देश भर में 22.3 प्रतिशत स्त्रीएं ऐसी हैं, जो अपने पतियों से पिटती है. इन स्त्रीओं में 24.4 प्रतिशत ग्रामीण और 17.5 प्रतिशत शहरी स्त्रीएं हैं. बेशक पिछले सर्वे के अनुपात में पतियों से पिटने वाली स्त्रीओं की संख्या कम हुई है और इसमें लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट दिख रही है. लेकिन राज्यों में अभी भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.बिहार में पति द्वारा हिंसा का अनुभव करने वाली विवाहित स्त्रीओं का प्रतिशत 40.1 से घटकर 36.1 प्रतिशत हुआ है. इनमें ग्रामीण इलाकों की स्त्रीएं 37 प्रतिशत और शहरी 31.2 प्रतिशत हैं.यह आंकड़ों में सुधार को बताता है, लेकिन यह भी बताता है कि समाज में अभी भी वैवाहिक हिंसा जारी है. झारखंड में कुल 27 प्रतिशत स्त्रीएं अपने पतियों से पिट रही हैं, जिनमें 29.2 प्रतिशत ग्रामीण और 18.2 प्रतिशत शहरी स्त्रीएं हैं. NFHS-5 में यह आंकड़ा 31.4 प्रतिशत का था, यानी 4.4 प्रतिशत की कमी पिटने की घटनाओं में आई है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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