Hot News

JTET में भोजपुरी-मगही पर रार: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने खोला मोर्चा, दिया ये तर्क

रांची से अरविंद सिंह की रिपोर्ट

JTET Language Dispute, रांची: झारखंड में आयोजित होने जा रहे शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का मामला गहराता जा रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भले ही इस विवाद को दूर करने के लिए वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के नेतृत्व में कमेटी का गठन कर दिया, लेकिन उस दल में शामिल सदस्यों की राय में ही मतभिन्नता नजर आ रही है. कमेटी में शामिल मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इसका खुला विरोध किया है. उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य का गठन बिहार से अलग यहां की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था. पिछले दो दशकों में हुए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों या प्रवासन को आधार बनाकर पड़ोसी राज्यों की भाषाओं (जैसे भोजपुरी, मगही और अंगिका) को JTET में शामिल करना न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि जब इन भाषाओं को स्वयं बिहार लोक सेवा आयोग की सभी भर्तियों में अनिवार्य या आधिकारिक दर्जा प्राप्त नहीं है, तो इन्हें झारखंड के युवाओं पर थोपना और पात्रता का आधार बनाना राज्य के मूल निवासियों के रोजगार अवसरों और स्थानीय हितों के साथ समझौता करना होगा.

शिक्षक पात्रता परीक्षा सामान्य परीक्षा नहीं: शिल्पी नेहा तिर्की

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) केवल एक सामान्य प्रतियोगी परीक्षा नहीं है, बल्कि यह एक अनिवार्य अर्हता परीक्षा है. यह सुनिश्चित करती है कि शिक्षक स्थानीय बच्चों की भाषाई, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझकर उन्हें प्रभावी ढंग से शिक्षा दे सकें.

भाषा केवल संवाद नहीं, बल्कि शिक्षण का आधार है

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि झारखंड जैसे बहुभाषी राज्य में भाषा केवल बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपकरण (Pedagogical Tool) है. उन्होंने वर्ष 1981 में तत्कालीन आयुक्त डॉ. कुमार सुरेश सिंह की अनुशंसा और डॉ. रामदयाल मुंडा द्वारा रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्य की 5 जनजातीय भाषाओं (कुड़ुख, मुंडारी, संथाली, खड़िया, हो) और 4 क्षेत्रीय भाषाओं (खोरठा, कुरमाली, नागपुरी, पंचपरगनिया) को शैक्षणिक व्यवस्था का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए क्योंकि छात्र इन्हीं भाषाओं में शिक्षा ग्रहण करते आ रहे हैं.

Also Read: Chatra: आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि बरी

स्थापित शैक्षणिक सिद्धांत और भाषाई न्याय

दस्तावेजों का हवाला देते हुए मंत्री ने एक स्थापित शैक्षणिक सिद्धांत को रेखांकित किया कि “जिन भाषाओं के माध्यम से विद्यार्थियों का अध्ययन-अध्यापन होता है, शिक्षण एवं संबंधित सेवाओं की पात्रता परीक्षाओं में भी उन्हीं भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.” इससे पूरी शिक्षा व्यवस्था स्थानीय आवश्यकताओं, सामाजिक वास्तविकताओं एवं विद्यार्थियों की भाषायी पृष्ठभूमि के अनुरूप अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और न्यायसंगत बनती है.

शैक्षिक हितों की रक्षा हेतु आवश्यक : मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने यह भी स्पष्ट किया कि “JTET में राज्य की प्रमुख एवं व्यापक रूप से प्रचलित भाषाओं को शामिल करना किसी वर्ग को बाहर करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के शैक्षिक हितों की रक्षा हेतु एक आवश्यक व्यवस्था है.” इसका एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालयों में नियुक्त होने वाला प्रत्येक शिक्षक छोटे बच्चों से उनकी परिचित भाषा में न्यूनतम स्तर पर संवाद स्थापित करने में पूर्णतः सक्षम हो.

वर्ष 2023 के गजट के आधार पर हो भाषा का निर्धारण

श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने प्रशासन और भाषा कमेटी से पुरजोर मांग की है कि JTET में भाषा संबंधी नीति का निर्धारण कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा 13 मार्च 2023 को अधिसूचित राजपत्र (गजट संख्या 147/148) के आधार पर ही किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्पष्ट स्थानीय नीति के अभाव में परीक्षा का पाठ्यक्रम और भाषा ही स्थानीय युवाओं को अवसर देने का एकमात्र माध्यम हैं. अतः राज्य के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए केवल यहां की अधिसूचित क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को ही परीक्षा में अधिमानता दी जाए.

Also Read: आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि बरी, 12 साल पुराना है मामला

The post JTET में भोजपुरी-मगही पर रार: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने खोला मोर्चा, दिया ये तर्क appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top