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बेहद करीब… अमेरिका-ईरान के बीच हो सकती है पीस डील! शरीफ, अराघची और ट्रंप ने दिया हिंट

US Iran Peace Deal: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते का अंतिम और सहमतिपूर्ण मसौदा तैयार हो चुका है. हालांकि अब तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान ने आधिकारिक तौर पर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि की है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री ने जरूर कहा कि हम इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के काफी करीब हैं. उनके इस सोशल पोस्ट मीडिया पोस्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शेयर किया. 

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल रहा है. उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर की वार्ताओं से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था, जिसके बाद कतर और अन्य मध्य-पूर्वी देशों ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

शहबाज शरीफ ने ‘भ्रामक प्रचार’ का भी किया जिक्र

अपने बयान में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ ताकतें इस संभावित समझौते को विफल करने की कोशिश कर रही हैं और इसके लिए लगातार गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं. उन्होंने लिखा, ‘पाकिस्तान की ओर से जारी गहन मध्यस्थता प्रयासों के बीच हम उन भ्रामक अभियानों से पूरी तरह अवगत हैं जिनका उद्देश्य शांति समझौते को नुकसान पहुंचाना है. इन अफवाहों और शोर-शराबे से अलग हटकर हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि समझौते का अंतिम और दोनों पक्षों द्वारा स्वीकार्य मसौदा तैयार हो चुका है. अब पाकिस्तान दोनों देशों के साथ मिलकर अगले कदमों को अंतिम रूप देने में जुटा है. शांति पहले कभी इतनी करीब नहीं थी जितनी आज है.’

ईरानी विदेश मंत्री बोले- अटकलों से बचें

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मीडिया से संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ अपने अंतिम चरण के बेहद करीब पहुंच चुका है, लेकिन इसके औपचारिक रूप से पूरा होने से पहले इसकी शर्तों को लेकर अटकलें लगाना उचित नहीं होगा.

अराघची ने कहा, ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पहले कभी इतना करीब नहीं था. अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया पूरी होने तक मीडिया को इसके विषय-वस्तु पर अनुमान लगाने से बचना चाहिए. हमारी पारदर्शी और जिम्मेदार नीति के तहत समझौते की सभी जानकारियां उचित समय पर सार्वजनिक की जाएंगी.’ अब्बास अराघची की इस पोस्ट को डोनाल्ड ट्रंप ने भी शेयर किया.

जिनेवा में हस्ताक्षर की समाचारें आईं सामने

इससे पहले सीएनएन ने कई राजनयिक सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि अमेरिका और ईरान के बीच तैयार किया गया ज्ञापन स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हस्ताक्षर के लिए रखा जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में हस्ताक्षर होते ही लेबनान समेत सभी मोर्चों पर 60 दिनों का युद्धविराम लागू करने का प्रावधान है. इसके अलावा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल शुल्क नहीं लगाया जाएगा.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऊर्जा आपूर्ति, व्यावसायिक जहाजों और समुद्री यातायात की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी तथा समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर समुद्री गतिविधियां धीरे-धीरे संघर्ष से पहले के स्तर पर लौट आएंगी.

प्रतिबंधों में राहत और बंदरगाहों पर ढील का भी प्रस्ताव

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील और सीमित आर्थिक राहत का भी प्रावधान शामिल है. एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि यह राहत समझौते की प्रगति और दोनों पक्षों की सकारात्मक भागीदारी के आधार पर दी जाएगी. हालांकि इसके लिए अभी तक कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है.

ईरान ने अंतिम समझौते की समाचारों को बताया गलत

हालांकि, जहां पाकिस्तान समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की बात कर रहा है, वहीं ईरान ने ऐसी समाचारों से इनकार किया है. ईरानी प्रशासनी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष समाप्त करने को लेकर अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है. उन्होंने साफ किया कि वार्ता जारी है और समझौते के पूरा होने संबंधी समाचारें सही नहीं हैं.

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ट्रंप ने भी रिपोर्टों को किया खारिज

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर उन समाचारों को खारिज किया, जिनमें समझौता तय हो जाने की बात कही गई थी. ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने प्रस्तावित समझौते की शर्तों को गलत तरीके से पेश किया है और बातचीत के दौरान ईमानदारी नहीं दिखाई.

उन्होंने लिखा, ‘ईरान ने जो बातें मीडिया में लीक की हैं, उनका लिखित रूप से तय हुई शर्तों से कोई संबंध नहीं है. उनकी ओर से जारी बयान और समझौते को लेकर किए गए दावे सच्चाई से बिल्कुल मेल नहीं खाते. ऐसे लोगों के साथ बातचीत करना बेहद कठिन है क्योंकि वे सद्भावना के साथ व्यवहार नहीं करते.’

फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान की ओर से सामने आए अलग-अलग बयानों के बीच स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. पाकिस्तान जहां समझौते के अंतिम मसौदे के तैयार होने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान और अमेरिका की ओर से अभी तक औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है. ऐसे में दुनिया की निगाहें अब उन संभावित अगले कदमों पर टिकी हैं, जो पश्चिम एशिया में शांति की दिशा तय कर सकते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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