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बच्ची की मार्मिक अपील पर पसीजा डीसी का दिल, दिव्यांग दंपति को मिला अंबेडकर आवास का तोहफा

पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले के सुदूरवर्ती चैनपुर प्रखंड स्थित अवसाने गांव की एक छोटी बच्ची की मार्मिक अपील ने प्रशासन का दिल छू लिया. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ललिता कुमारी ने अपने परिवार के लिए आवास और अन्य प्रशासनी सहायता उपलब्ध कराने की गुहार लगाई थी. बच्ची की इस अपील को गंभीरता से लेते हुए पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत शनिवार को स्वयं उसके घर पहुंचे और परिवार को कई महत्वपूर्ण प्रशासनी सुविधाओं का लाभ दिलाया.

डीसी को अपने घर देखकर खुश हुआ परिवार

उपायुक्त के गांव पहुंचने पर परिवार के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. ललिता कुमारी के माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं और लंबे समय से आर्थिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे थे. डीसी ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और बच्ची की अभिव्यक्ति क्षमता तथा उसकी बोलने की कला की सराहना की. उन्होंने ललिता कुमारी से बातचीत की और उसके भविष्य के सपनों के बारे में भी जानकारी ली. उपायुक्त ने बच्ची को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करते हुए शिक्षा के महत्व को समझाया.

छोटे भाई को गोद में लेकर सौंपा जन्म प्रमाण पत्र

इस दौरान एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला. उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने ललिता कुमारी के छोटे भाई को गोद में लेकर उसे जन्म प्रमाण पत्र सौंपा. इसके अलावा परिवार के अन्य तीन भाई-बहनों को भी जन्म प्रमाण पत्र प्रदान किया गया. इन प्रमाण पत्रों के मिलने से बच्चों को भविष्य में विभिन्न प्रशासनी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी. अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी दस्तावेजों के अभाव में कई परिवार योजनाओं से वंचित रह जाते हैं और फिर प्रशासनी फाइलें नागरिकों से ज्यादा धैर्यवान साबित होती हैं.

दिव्यांग दंपति को मिला अंबेडकर आवास

उपायुक्त ने दिव्यांग दंपति को “बाबा साहब भीमराव अंबेडकर आवास योजना” के तहत आवास की स्वीकृति प्रदान की. इसके साथ ही उनकी सुविधा के लिए ट्राई साइकिल भी उपलब्ध कराई गई. डीसी के इस कदम से परिवार को स्थायी आवास मिलने की उम्मीद जगी है. लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजार रहे इस परिवार के लिए यह सहायता किसी बड़ी राहत से कम नहीं है.

बच्चों का कराया आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकन

उपायुक्त ने ललिता कुमारी के भाई आशिक कुमार और बहन आरती कुमारी का नामांकन नव निर्मित और नव उद्घाटित अवसाने-3, बरेवा टोला आंगनबाड़ी केंद्र में कराया. इतना ही नहीं, उन्होंने स्वयं उपस्थिति रजिस्टर में बच्चों की उपस्थिति दर्ज की. गांव की एक अन्य बच्ची सुहानी कुमारी का नामांकन भी उपायुक्त ने अपने हाथों से कराया. इस पहल को क्षेत्र के अन्य बच्चों को आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ने के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है.

ललिता के साथ किया नए आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन

डीसी ने ललिता कुमारी के साथ मिलकर अवसाने-3 के नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने केंद्र में मौजूद बच्चों के बीच स्लेट, कॉपी, पेंसिल, शार्पनर, इरेजर सेट और फलों का वितरण किया. उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उन्हें नियमित रूप से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम के दौरान बच्चों में भी उत्साह देखने को मिला.

अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश

उपायुक्त ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को निर्देश दिया कि संबंधित परिवार को सभी पात्र जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रशासनी योजनाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए. साथ ही अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर जरूरतमंद लोगों की पहचान करने और उन्हें योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए. बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने का भी निर्देश दिया गया.

सोशल मीडिया की भूमिका की सराहना

उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने उस इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर के प्रयासों की भी सराहना की, जिसके माध्यम से यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया. उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया भी जनहित के मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग का एक सशक्त उदाहरण है, जिसकी वजह से एक जरूरतमंद परिवार तक प्रशासनी सहायता पहुंच सकी.

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संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बना यह मामला

अवसाने गांव की छोटी बच्ची ललिता कुमारी की अपील और उस पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया कि यदि समस्याएं सही माध्यम से सामने आएं तो समाधान भी संभव है. एक दिव्यांग परिवार को आवास, बच्चों को पहचान और शिक्षा से जोड़ने की पहल तथा प्रशासनी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में उठाया गया यह कदम संवेदनशील प्रशासन की एक मिसाल बनकर सामने आया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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