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इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले हैं, तो जानिए आपकी कमाई पर कितना बनेगा टैक्स?

ITR Filing 2026: फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की अंतिम तारीख अब ज्यादा दूर नहीं है. ऐसे में लाखों नौकरीपेशा के मन में एक सवाल है कि आखिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उनकी टैक्स देनदारी (Tax Liability) कैसे तय करता है. रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि टैक्स की गणना किन चरणों में होती है और किन बातों का ध्यान रखा जाता है.

सबसे पहले क्या देखा जाता है?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सबसे पहले यह तय करता है कि करदाता (Taxpayer) हिंदुस्तान का निवासी (Resident) है या अनिवासी (Non-Resident).

  • निवासी व्यक्ति की वैश्विक आय (Global Income) पर टैक्स लागू हो सकता है.
  • अनिवासी व्यक्ति पर केवल हिंदुस्तान में प्राप्त या अर्जित आय पर टैक्स लगता है.

यही आधार आगे की पूरी टैक्स गणना को प्रभावित करता है.

कुल इनकम कैसे निकाली जाती है?

टैक्स डिपार्टमेंट आपकी इनकम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर गणना करता है. इसमें मुख्य रूप से 5 स्रोत शामिल होते हैं.

इनकम का स्रोत उदाहरण
वेतन (Salary) नौकरी से मिलने वाली इनकम 
हाउस प्रॉपर्टी किराए की इनकम 
बिजनेस या प्रोफेशन व्यापार या पेशे से कमाई
कैपिटल गेन शेयर, प्रॉपर्टी आदि बेचने से लाभ
अन्य स्रोत ब्याज, एफडी, डिविडेंड आदि

इसके बाद विभाग कुछ अन्य जरूरी कदम उठाता है:

  • जरूरत होने पर क्लबिंग ऑफ इनकम लागू की जाती है.
  • पुराने नुकसान (Losses) का सेट-ऑफ और कैरी फॉरवर्ड किया जाता है.
  • धारा 80C, 80D जैसी योग्य कटौतियां (Deductions) घटाई जाती हैं.
  • इसके बाद कुल कर योग्य आय (Total Income) तय होती है.

टैक्स देनदारी कैसे तय होती है?

कुल इनकम तय होने के बाद उसे दो हिस्सों में बांटा जाता है:

  • सामान्य आय (Normal Income)
  • विशेष दर वाली आय (Special Income)

सामान्य इनकम पर चुने गए टैक्स रिजीम और स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, जबकि कुछ विशेष इनकम पर अलग दरें लागू हो सकती हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि कृषि आय (Agricultural Income) टैक्स मुक्त रहती है, हालांकि कुछ मामलों में टैक्स दर तय करने के लिए इसे गणना में शामिल किया जाता है.

अंतिम टैक्स कितना देना होगा?

अंतिम टैक्स देनदारी निकालते समय विभाग पहले कुल टैक्स की गणना करता है और फिर पहले से जमा टैक्स को घटाता है.

इसमें शामिल हैं:

  • एडवांस टैक्स
  • TDS (Tax Deducted at Source)
  • TCS (Tax Collected at Source)
  • सेल्फ असेसमेंट टैक्स

अगर रिटर्न देर से भरा गया है या टैक्स समय पर जमा नहीं किया गया है तो ब्याज और लेट फीस भी जोड़ी जा सकती है. आखिर में सरचार्ज और हेल्थ-एंड-एजुकेशन सेस जोड़कर अंतिम देनदारी तय की जाती है.

क्या है आपके लिए जरूरी?

ITR भरने से पहले अपनी इनकम, कटौतियों और पहले से कटे हुए TDS का मिलान जरूर कर लें. इससे रिटर्न दाखिल करते समय किसी तरह की गलती या अतिरिक्त टैक्स भुगतान से बचा जा सकता है. सही जानकारी के साथ रिटर्न भरना न सिर्फ आसान होता है, बल्कि भविष्य में नोटिस जैसी परेशानियों की संभावना भी कम हो जाती है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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