नंदन नीलेकणि ने 1981 में एनआर नारायण मूर्ति और अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इन्फोसिस (Infosys) कंपनी की नींव रखी थी. इस कंपनी ने हिंदुस्तान को दुनिया भर में ‘आईटी हब’ के रूप में पहचान दिलाई. नीलेकणि 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के सीईओ रहे और 2009 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया.
आधार और डिजिटल पेमेंट की क्रांति
साल 2009 में डॉ. मनमोहन सिंह प्रशासन ने नीलेकणि को ‘आधार’ (Aadhaar) परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी. उनके कुशल नेतृत्व में ही देश के 130 करोड़ से अधिक लोगों को 12 अंकों की डिजिटल पहचान मिली. इसके अलावा, हिंदुस्तान में आज घर-घर इस्तेमाल होने वाले UPI और FASTag जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को विकसित करने और बढ़ावा देने में भी उनकी बेहद अहम भूमिका रही है.
पद्म भूषण से सम्मानित
देश और समाज के विकास में तकनीक के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए हिंदुस्तान प्रशासन ने साल 2006 में उन्हें ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया था.
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