AI के ‘Godfather’ कहे जाने वाले Geoffrey Hinton ने अपनी एक चर्चित lecture की शुरुआत ही ऐसी बात से की थी, जो सुनने वाले को असहज कर दे. उनका कहना था कि अगर आप यह सब सुनने के बाद भी रात को चैन से सोते हैं, तो शायद आपने मेरी बात को समझा नहीं है. यह टिप्पणी मूल रूप से उनकी 2025 की Royal Institution lecture में कही गई थी, जिसे 2026 में फिर से खूब चर्चा मिली. लेकिन Hinton सिर्फ डराने वाली बात नहीं कर रहे थे. उनकी चिंता के पीछे एक सीधा सवाल है- अगर किसी दिन AI की बुद्धिमत्ता इंसानों से बहुत आगे निकल गई, तो उसे अपने नियंत्रण में कौन रखेगा?
‘इंसान और मुर्गी’ का उदाहरण देकर समझाया सबसे बड़ा डर
Hinton ने इस खतरे को समझाने के लिए एक बेहद साधारण तुलना की. अगर इंसानों से कहीं ज्यादा बुद्धिमान कोई जीव हमें खत्म करना चाहे, तो हमारे पास उसे रोकने के कितने रास्ते होंगे? उनके मुताबिक यह वैसा ही अंतर हो सकता है जैसा इंसान और मुर्गी के बीच है. मुर्गी यह नहीं समझ सकती कि इंसान उसके साथ क्या करने वाला है.
यही वजह है कि Hinton के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI इंसानों को नुकसान पहुंचा सकता है या नहीं. असली सवाल है कि अगर AI हमसे ज्यादा बुद्धिमान हो गया, तो हम उसे इंसानों को नुकसान न पहुंचाने के लिए कैसे तैयार करेंगे? यहीं कहानी और डरावनी हो जाती है.
Hinton ने 2026 में कहा कि ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान AI अगले एक दशक में आ सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कोई नहीं जानता कि ऐसी AI को नियंत्रण में रखा जा सकेगा या नहीं. उन्होंने इस समस्या का समाधान मिलने तक ऐसी तकनीक विकसित करने की रफ्तार को लेकर सावधानी बरतने की बात कही.
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AI को रोकने की बात नहीं, उसे ‘इंसानों की परवाह’ करना सिखाने की चिंता
Hinton की चिंता का एक और हिस्सा ज्यादा दिलचस्प है. उनका कहना है कि हम AI को लगातार ज्यादा बुद्धिमान बनाने पर काम कर रहे हैं, लेकिन उतना काम इस बात पर नहीं हो रहा कि वह इंसानों की परवाह करने वाला सिस्टम कैसे बने. उन्होंने हाल की बातचीत में कहा कि हमें ऐसी AI चाहिए जो अपने फायदे से ज्यादा इंसानों के हित को महत्व दे.
यानी डर यह नहीं कि AI अचानक फिल्म के किसी रोबोट की तरह बंदूक उठाकर हमारे पीछे दौड़ पड़ेगा. डर इससे कहीं ज्यादा जटिल है. सोचिए क्या होगा अगर वह अपने लक्ष्य खुद तय करने लगे और हम उसके रास्ते में आ जाएं?
यही वजह है कि AI Safety आज सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रह गया है. दुनिया के कई AI विशेषज्ञ विकास की रफ्तार के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कर रहे हैं.
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बेंगलुरु के प्रोफेसर ने डर की दिशा ही बदल दी
IISc Bengaluru के Assistant Professor और AI researcher Prathosh AP ने AI को लेकर सवाल को थोड़ा अलग तरीके से रखा है. उनका कहना है कि समस्या सिर्फ यह नहीं है कि मशीनें हमसे ज्यादा बुद्धिमान हो जाएंगी. असली संकट शायद यह है कि हमने इंसान की कीमत को ही उसकी बुद्धिमत्ता से जोड़ रखा है.
उन्होंने कहा कि वह जब छात्रों से भरे lecture hall को देखते हैं तो खुद से सवाल पूछते हैं- ये छात्र यहां क्यों बैठे हैं?
क्योंकि मशीन अब reasoning कर सकती है, code लिख सकती है और जानकारी को इंसानों की तुलना में बेहद तेजी से जोड़ सकती है. ऐसे में अगर मशीन ज्ञान और तर्क का काम करने लगेगी, तो इंसान की खासियत आखिर बचेगी क्या?
Prathosh के मुताबिक जवाब शायद वहीं है जिसे हम आज सबसे कम महत्व देते हैं- care, love, empathy और community.
मशीन जानकारी दे सकती है. लेकिन इंसान दूसरे इंसान के पास सिर्फ जानकारी लेने नहीं जाता. वह भरोसा करने, जुड़ने और साथ महसूस करने भी जाता है. इसी वजह से उनके मुताबिक AI का दौर सिर्फ टेक्नोलॉजी का संकट नहीं, बल्कि मानव पहचान का संकट भी है.
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क्या सच में AI इंसानों को खत्म कर देगा?
इसका जवाब आज किसी के पास निश्चित रूप से नहीं है. Hinton खुद मानते हैं कि AI से मानवता के अस्तित्व को होने वाले खतरे की सटीक संभावना बताना मुश्किल है. उन्होंने 10 फीसदी जैसे अनुमान को भी निश्चित वैज्ञानिक आंकड़ा नहीं माना, बल्कि विशेषज्ञों के अनुमान को मूलतः उनके gut feeling पर आधारित बताया.
इसलिए कहानी का अंत यह नहीं है कि AI इंसानों को खत्म करने वाला है. असल कहानी इससे ज्यादा दिलचस्प है. हमने एक ऐसी मशीन बनाई है जो हर साल पहले से ज्यादा तेज, ज्यादा सक्षम और ज्यादा स्वायत्त होती जा रही है. अब उसके सामने खड़ा सबसे बड़ा सवाल शायद यह नहीं कि AI इंसान जैसा बनेगा या नहीं. सवाल यह है- जब AI इंसान से ज्यादा समझदार हो जाएगा, तब इंसान अपनी सबसे बड़ी ताकत किसे मानेगा?
शायद यही वह सवाल है कि यदि AI आने वाले भविष्य में हमें नुकसान पहुंचाने लगे, तो क्या हम इंसान उसे रोक पाएंगे. जिसकी वजह से AI की दुनिया को समझने के बाद रात की नींद थोड़ी देर के लिए उड़ सकती है.
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