Adobe का नाम सुनते ही Photoshop, Acrobat और कई दूसरे क्रिएटिव सॉफ्टवेयर याद आते हैं. लेकिन इस बड़ी टेक कंपनी को लंबे समय तक संभालने वाले शख्स की कहानी किसी टेक्नोलॉजी के साथ नहीं, बल्कि एक अलग सपने से शुरू हुई थी. शंतनु नारायण बचपन में इंजीनियर नहीं, बल्कि पत्रकार बनना चाहते थे. उनके माता-पिता चाहते थे कि वह इंजीनियरिंग पढ़ें और आखिरकार उन्होंने वही किया. आगे चलकर यही शख्स Adobe का CEO बना और कंपनी के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव लेकर आया.
‘टेक टाइकून्स की कहानी’ की इस कड़ी में आइए जानते हैं शंतनु नारायण के बारे में, उनके बचपन से लेकर Adobe के CEO बनने तक के सफर में छिपे उन किस्सों के बारे में, जिन्हें शायद बहुत कम लोग जानते हैं.
जिस कंपनी ने Pictra को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई, वहीं पहुंच गए
Pictra की कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ यहीं आता है. Adobe ने भी कभी Pictra को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, हालांकि बाद में यह सौदा नहीं हुआ. इसके बाद शंतनु ने सोचा कि अगर वह Adobe के साथ काम करें तो उन्हें एक बड़ी कंपनी के साथ काम करने और कुछ बड़ा सीखने का मौका मिलेगा. आखिरकार 1998 में वह Adobe में शामिल हो गए. यह फैसला आगे चलकर उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.
Adobe में तेजी से बढ़ती गई जिम्मेदारी
Adobe में शंतनु ने Vice President और General Manager के तौर पर शुरुआत की. इसके बाद वह अलग-अलग बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचे.
- 1998 में Adobe से जुड़े
- 2005 में President और COO बने
- 2007 में CEO बने
- 2017 में कंपनी के Chairman बने.
यानी जिस कंपनी में वह नौकरी करने आए थे, कुछ ही वर्षों बाद उसी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनके पास थी.
Adobe को डेस्कटॉप से क्लाउड तक ले जाने में बड़ी भूमिका
शंतनु के CEO बनने के समय टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही थी. Adobe का पुराना मॉडल मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर को डेस्कटॉप पर बेचने से जुड़ा था. शंतनु के नेतृत्व में कंपनी ने अपने क्रिएटिव प्रोडक्ट्स को क्लाउड-बेस्ड सब्सक्रिप्शन मॉडल की तरफ ले जाने पर बड़ा दांव लगाया.
यह बदलाव आसान नहीं था, क्योंकि कस्टमर्स को भी नए तरीके से सॉफ्टवेयर यूज करने की आदत डालनी थी. Adobe की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, शंतनु के नेतृत्व में कंपनी ने अपने क्रिएटिव सॉफ्टवेयर बिजनेस को क्लाउड-बेस्ड सब्सक्रिप्शन मॉडल में बदला और डिजिटल एक्सपीरियंस बिजनेस को भी तेजी से आगे बढ़ाया.
यही वजह है कि उनकी कहानी सिर्फ एक हिंदुस्तानीय के बड़ी विदेशी कंपनी का CEO बनने की कहानी नहीं है. यह उस इंसान की कहानी भी है जिसने अपने करियर में कई बार बदलती टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को बदला.
आज भी रोज माता-पिता को फोन करते हैं
शंतनु की जिंदगी का एक छोटा लेकिन बेहद दिलचस्प किस्सा उनके एक इंटरव्यू में सामने आया. उन्होंने बताया कि वह दुनिया में कहीं भी हों, अपने दिन की शुरुआत अपने माता-पिता को फोन करके करते हैं. आज वीडियो कॉल की वजह से यह और आसान हो गया है. उन्होंने बताया कि वह इस आदत को लेकर काफी नियमित हैं और यह उन्हें उन लोगों की याद दिलाती है जिन्होंने उनकी जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डाला.
18 साल बाद CEO पद से ट्रांजीशन का फैसला
शंतनु नारायण करीब 18 साल तक Adobe के CEO रहे. मार्च 2026 में Adobe ने घोषणा की कि वह नए CEO की नियुक्ति के बाद CEO पद से ट्रांजीशन करेंगे और इसके बाद चेयरमैन के रूप में कंपनी से जुड़े रहेंगे. कंपनी ने उनके कार्यकाल के दौरान Adobe के ट्रासंफॉर्मशन और AI के दौर के लिए कंपनी को तैयार करने में उनके योगदान का भी उल्लेख किया.
नोट: यह लेख नया विचार की ‘टेक टायकून्स की कहानी’ सीरीज का हिस्सा है. इस सीरीज के जरिए हम टेक जगत की अलग-अलग दिग्गज हस्तियों की कहानी आपके सामने ला रहे हैं. जानेंगे कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की, किन चुनौतियों का सामना किया और किस तरह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम 30 सितंबर को टेक इंडस्ट्री के एक और बड़े नाम की कहानी आपके सामने लेकर आएंगे. तब तक जुड़े रहिए हमारे साथ.
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