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UP में गुजरात मॉडल पर टिकट का फॉर्मूला: 40-50% मौजूदा विधायकों के टिकट पर संकट, सर्वे तय करेगा चेहरा

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने संगठन और उम्मीदवार चयन की तैयारी तेज कर दी है. पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक इस बार टिकट वितरण में सिर्फ पुराने प्रदर्शन या नेतृत्वक कद को आधार बनाने के बजाय ‘जीतने की क्षमता’ को अहम पैमाना बनाया जा सकता है. TV9 UP की रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 से 50 फीसदी मौजूदा विधायकों के टिकट पर दोबारा विचार किए जाने की चर्चा है. हालांकि, इसे लेकर बीजेपी की ओर से अभी कोई अंतिम आधिकारिक सूची या फैसला सामने नहीं आया है.

इंटरनल सर्वे और जमीनी फीडबैक पर नजर

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने हाल में इंटरनल सर्वे कराया है. इसमें मौजूदा विधायकों की क्षेत्र में पकड़, जनता के बीच स्थिति, स्थानीय कार्यकर्ताओं का फीडबैक और संगठन के साथ तालमेल जैसे पहलुओं को देखा गया है. पार्टी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कई विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी के संकेत मिलने की बात कही गयी है. टिकट के फैसले में सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि किसी विधायक ने पिछला चुनाव जीता था या नहीं. पार्टी की संभावित रणनीति में यह भी शामिल है कि संबंधित चेहरा अगले चुनाव में संगठन और जनता के बीच कितना प्रभावी साबित हो सकता है.

सिफारिश से ज्यादा फीडबैक पर जोर

बीजेपी की संभावित रणनीति का सबसे अहम हिस्सा सिस्टम आधारित फीडबैक बताया जा रहा है. इसमें सर्वे, बूथ स्तर की रिपोर्ट, स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय और क्षेत्र में विधायक की सक्रियता जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी एक नेता की पसंद या व्यक्तिगत सिफारिश के बजाय अलग-अलग स्तर से मिले फीडबैक को टिकट चयन में महत्व देने की तैयारी है.

2024 के अनुभव से सबक?

उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गयी थीं. इसके बाद पार्टी संगठन और उम्मीदवारों के प्रदर्शन की समीक्षा करती रही है. आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट चयन इसी व्यापक समीक्षा का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, किसी राज्य की रणनीति को दूसरे राज्य में हूबहू लागू करना आसान नहीं होता. नेतृत्वक विश्लेषकों ने भी गुजरात के संगठनात्मक मॉडल को यूपी की अलग सामाजिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार ढालने की जरूरत बतायी है.

सहयोगी दलों की सीटों पर भी नजर

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी की रणनीति केवल अपने विधायकों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है. गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों की सीटों पर भी उम्मीदवार की स्वीकार्यता और चुनावी क्षमता जैसे पहलुओं को महत्व दिए जाने की चर्चा है.

किन सवालों से तय होगा टिकट?

संभावित चयन प्रक्रिया में पार्टी के सामने कई सवाल होंगे—

  • क्षेत्र में विधायक की सक्रियता कितनी है?
  • जनता और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ कैसी है?
  • संगठन के साथ तालमेल कैसा है?
  • स्थानीय स्तर पर नाराजगी कितनी है?
  • इंटरनल सर्वे में क्या फीडबैक मिला?
  • क्या संबंधित चेहरा अगले चुनाव में पार्टी के लिए प्रभावी उम्मीदवार हो सकता है?

इन सवालों के जवाब टिकट वितरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. फिलहाल 40-50 फीसदी टिकटों में बदलाव की चर्चा रिपोर्ट और सूत्रों पर आधारित है, अंतिम निर्णय बीजेपी के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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