रांचीः झारखंड समेत देश के अन्य राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की. इस दौरान झारखंड प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि एक स्त्री अधिकारी को डीजीपी बनने का अवसर देने के लिए नियुक्ति से जुड़े नियम में संशोधन किया गया है.
कपिल सिब्बल ने रखा राज्य प्रशासन का पक्ष
याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील पूरी होने के बाद झारखंड प्रशासन की ओर से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप झारखंड प्रशासन ने डीजीपी की नियुक्ति को लेकर नियमावली तैयार की है. उन्होंने कहा कि एमिकस क्यूरी की ओर से केवल नियम पांच में किए गए संशोधन पर आपत्ति जताई गई है.
ये भी पढ़ें- MS Dhoni की Mercedes का 6 महीने पहले कटा था चालान, जुर्माना सितंबर में जमा
तदाशा मिश्रा को डीजीपी रैंक में प्रोन्नति का हवाला
राज्य प्रशासन की ओर से नियम में किए गए संशोधन को उचित ठहराते हुए कहा गया कि तदाशा मिश्रा डीजीपी रैंक में प्रोन्नत होने वाली एकमात्र स्त्री आइपीएस अधिकारी हैं. प्रशासन की ओर से उनके नक्सलवाद और अपराध के क्षेत्र में किए गए प्रभावी कार्यों का भी हवाला दिया गया. इसी आधार पर स्त्री अधिकारी को डीजीपी बनने का अवसर देने के लिए नियम में संशोधन किए जाने की बात अदालत के समक्ष रखी गई.
24 सितंबर को अगली सुनवाई
वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर राज्य प्रशासन गुरुवार को अपना पक्ष रखेगी. इसके बाद पीठ झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर यानी कि आज होगी. इससे पहले याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील दी गई कि झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति में मनमानी होती रही है.
ये भी पढ़ें– JTET Exam 2026: 4.5 लाख अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट, 11 अक्टूबर को नहीं होगी JTET एग्जाम!
The post स्त्री अधिकारी को DGP बनाने के लिए बदला नियम, सुप्रीम कोर्ट में झारखंड प्रशासन ने रखा पक्ष appeared first on Naya Vichar.

