18वीं लोकसभा का आठवां सत्र 46 दिनों से स्थगित है. इसके साथ ही यह संसद के इतिहास में किसी सत्र के स्थगित रहने का तीसरा सबसे लंबा अंतराल बन गया है. इससे पहले 1987 में 76 दिन और 1989 में 61 दिन तक लोकसभा की बैठक नहीं हुई थी. दोनों मामले आठवीं लोकसभा के दौरान हुए थे.
इस बार मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. हालांकि, सत्र को अभी तक औपचारिक रूप से समाप्त यानी प्रोरोग नहीं किया गया है. इसी वजह से सदन तकनीकी रूप से उसी सत्र का हिस्सा बना हुआ है.
मोदी प्रशासन के दौर में सबसे लंबा अंतराल
2014 में नरेंद्र मोदी प्रशासन के सत्ता में आने के बाद यह लोकसभा का अब तक का सबसे लंबा ऐसा अंतराल है, जब सदन को साइन डाई स्थगित करने के बाद प्रोरोग नहीं किया गया.
इससे पहले 2015 में लोकसभा 28 दिनों और 2021 में करीब 20 दिनों तक स्थगित रहने के बाद प्रोरोग हुई थी.
स्थगन और प्रोरोगेशन में क्या अंतर है?
लोकसभा को ‘साइन डाई’ स्थगित करने का मतलब है कि सदन की बैठक खत्म हो गई, लेकिन अगली बैठक की तारीख तय नहीं हुई. इससे सत्र अपने आप खत्म नहीं होता.
वहीं, प्रोरोगेशन के जरिए राष्ट्रपति संसद के सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करते हैं. संविधान के अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति यह कदम उठाते हैं और आम तौर पर यह प्रधानमंत्री की सलाह पर होता है.
इसका मतलब यह है कि लोकसभा को साइन डाई स्थगित किए जाने के बावजूद स्पीकर जरूरत पड़ने पर सदन की बैठक दोबारा बुला सकते हैं.
1987 में 76 दिन तक नहीं हुई थी बैठक
लोकसभा के इतिहास में सबसे लंबा ऐसा अंतराल 1987 में रहा. आठवीं लोकसभा के आठवें सत्र को 12 मई 1987 को साइन डाई स्थगित किया गया था. इसके बाद 27 जुलाई को सदन की बैठक दोबारा बुलाई गई. इस तरह दोनों बैठकों के बीच 76 दिनों का अंतर रहा.
उस समय बोफोर्स सौदे को लेकर संसद में भारी नेतृत्वक टकराव चल रहा था. बाद में लोकसभा में बोफोर्स सौदे की जांच के लिए 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC बनाने का प्रस्ताव भी पारित हुआ. सत्र को अंततः 3 सितंबर 1987 को प्रोरोग किया गया.
1989 में 61 दिन का अंतराल
दूसरा सबसे लंबा अंतराल 1989 में रहा. आठवीं लोकसभा के 14वें सत्र को 18 अगस्त को साइन डाई स्थगित किया गया और 11 अक्टूबर को दोबारा बैठक हुई. यानी 61 दिनों तक सदन की बैठक नहीं हुई.
उस समय भी बोफोर्स मुद्दे को लेकर प्रशासन और विपक्ष के बीच तीखा टकराव था. करीब 100 विपक्षी सांसदों ने CAG की रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने के बाद सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था. इसके कुछ ही समय बाद राजीव गांधी प्रशासन सत्ता से बाहर हो गई और वीपी सिंह के नेतृत्व में नेशनल फ्रंट प्रशासन बनी.
अक्टूबर में फिर बैठक की अटकलें
मौजूदा स्थिति में लोकसभा के प्रोरोग न होने के कारण अक्टूबर में सदन की बैठक बुलाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. हालांकि, प्रशासन की ओर से ऐसी किसी बैठक को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है.
रिपोर्ट के अनुसार, नेतृत्वक चर्चा में परिसीमन और स्त्री आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी संख्या को लेकर भी अटकलें हैं. इन चर्चाओं को फिलहाल स्थापित संसदीय फैसले के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
ये भी पढ़ें: अभिजीत दिपके ने दी जेल भरो आंदोलन की चेतावनी, मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को नहीं दी अनुमति
The post लोकसभा 46 दिन से स्थगित, 1987-89 के बाद मोदी प्रशासन में सबसे लंबा ब्रेक appeared first on Naya Vichar.

