इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय सबसे ज्यादा ध्यान रेंज, बैटरी क्षमता और चार्जिंग टाइम पर दिया जाता है. कंपनियां अपनी गाड़ियों की एक क्लेम्ड रेंज बताती हैं, लेकिन वास्तविक इस्तेमाल में मिलने वाली रेंज इससे अलग हो सकती है. एक्सपर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज कई चीजों पर निर्भर करती है, जिसमें स्पीड, रोड कंडीशन, राइडर का वजन, टायर प्रेशर और राइडिंग पैटर्न शामिल हैं. इन्हीं बातों को लेकर नया विचार ने ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट सुवासित श्रीवास्तव से बातचीत की और जाना कि आखिर इसकी सच्चाई क्या है?
क्लेम्ड रेंज और रियल वर्ल्ड रेंज में क्यों होता है अंतर?
कंपनियों की ओर से बताई जाने वाली इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज स्टैंडर्डाइज्ड टेस्ट कंडीशन में तय की जाती है. इन परिस्थितियों में कई चीजों को नियंत्रित रखा जाता है. वहीं रियल वर्ल्ड में स्कूटर अलग-अलग तरह की सड़कों, ट्रैफिक, स्पीड और मौसम की परिस्थितियों में चलता है.
एक्सपर्ट सुवासित श्रीवास्तव के मुताबिक, स्कूटर की रेंज पर राइडिंग स्पीड का काफी असर पड़ता है. इसके अलावा राइडर का वजन, टायर प्रेशर और सड़क की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है. पहाड़ी रास्तों, चढ़ाई या अलग-अलग रोड कंडीशन में रेंज बदल सकती है. इसलिए कंपनी की क्लेम्ड-रेंज को वास्तविक परिस्थितियों में मिलने वाली रेंज के बराबर मानना सही नहीं है.
ज्यादा kWh वाली बैटरी का मतलब हमेशा ज्यादा रेंज नहीं
इलेक्ट्रिक स्कूटर में बैटरी की क्षमता को kWh में बताया जाता है. ज्यादा kWh का मतलब बैटरी में ज्यादा एनर्जी स्टोर करने की क्षमता है, लेकिन इससे अकेले यह तय नहीं होता कि स्कूटर की रेंज भी ज्यादा होगी.
रेंज पर बैटरी के साथ मोटर और पूरे पावरट्रेन की एफिशिएंसी का भी असर पड़ता है. उदाहरण के लिए ज्यादा क्षमता वाली बैटरी किसी ज्यादा पावरफुल मोटर के साथ इस्तेमाल हो सकती है, जिससे उसका एनर्जी कंजम्पशन भी ज्यादा हो सकता है. दूसरी ओर कम क्षमता वाली बैटरी और ज्यादा एफिशिएंट पावरट्रेन वाला स्कूटर बेहतर रेंज दे सकता है.
इसलिए सिर्फ बैटरी की kWh क्षमता देखकर इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए.
इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी कितने साल चलती है?
सुवासित के मुताबिक, इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी की लाइफ के लिए कोई एक तय चार्जिंग साइकिल या निश्चित अवधि बताना सही नहीं है. बैटरी की लाइफ उसकी केमिस्ट्री, चार्जिंग पैटर्न और वाहन के इस्तेमाल पर निर्भर करती है.
बैटरी में इस्तेमाल होने वाली केमिस्ट्री जैसे NMC या LFP भी महत्वपूर्ण होती है. इसके अलावा फास्ट चार्जिंग कितनी बार की जाती है, बैटरी को कितनी बार डीप डिस्चार्ज किया जाता है और वाहन का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, इन सभी चीजों का बैटरी की लाइफ पर असर पड़ता है.
हालांकि, आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां कई सालों तक इस्तेमाल के लिए डिजाइन की जाती हैं और कंपनियां अपने मॉडल के हिसाब से बैटरी पर कई वर्षों की वारंटी भी देती हैं.
क्या हर बार बैटरी को 100% चार्ज करना चाहिए?
डेली इस्तेमाल के लिए बैटरी को 20 से 80% के बीच चार्ज रखना एक सामान्य जेंटल चार्जिंग रेंज माना जाता है. इससे बैटरी को बहुत ज्यादा ओवरचार्ज या डीप डिस्चार्ज की स्थिति में रखने से बचा जा सकता है.
अगर स्कूटर का इस्तेमाल रोजाना शहर में करना है और अगले दिन लंबी दूरी तय नहीं करनी है, तो हर बार 100% चार्ज करने की जरूरत नहीं है. वहीं लंबी यात्रा पर जाने से पहले 100% चार्ज करना उपयोगी हो सकता है, ताकि रास्ते में बार-बार चार्जिंग की जरूरत कम हो. एक्सपर्ट के मुताबिक रोजाना के इस्तेमाल में 20 से 80% के बीच चार्जिंग रखना बेहतर तरीका है.
रातभर चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना कितना सही?
अगर स्कूटर को लंबे समय तक चार्जिंग पर लगाकर रखा जाता है, तो इससे बचना चाहिए. खासकर अगर रोजाना जरूरत से ज्यादा चार्ज करके वाहन को लंबे समय तक पार्क करके रखा जा रहा है. डेली यूज में जरूरत के मुताबिक बैटरी चार्ज करना बेहतर है. वहीं, लंबी यात्रा के लिए जरूरत पड़ने पर 100% चार्ज किया जा सकता है.
बैटरी को डीप डिस्चार्ज करने से बचें
बैटरी को बार-बार बहुत कम स्तर तक ले जाना भी सही नहीं माना जाता. अगर स्कूटर लो बैटरी वार्निंग दे रहा है और बैटरी लगातार कम हो रही है, तो उसे बहुत लंबे समय तक उसी स्थिति में चलाने या चार्जिंग टालने से बचना चाहिए.
एक्सपर्ट ने सलाह दी कि वाहन निर्माता की ओर से दिए गए चार्जिंग और स्टोरेज प्रोटोकॉल को जरूर फॉलो करना चाहिए. हर कंपनी अपने वाहन की बैटरी और सिस्टम के हिसाब से जरूरी निर्देश देती है.
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बैटरी खराब होने से पहले कौन-से संकेत मिलते हैं?
बैटरी की क्षमता कम होने पर सबसे पहले रेंज में बदलाव दिखाई दे सकता है. उदाहरण के लिए अगर समान राइडिंग पैटर्न और परिस्थितियों में स्कूटर पहले 100 किलोमीटर चलता था और अब करीब 80 किलोमीटर ही चल रहा है, तो बैटरी की क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है. इसके अलावा कुछ अन्य संकेत भी नजर आ सकते हैं.
- बैटरी प्रतिशत पहले की तुलना में तेजी से कम होना.
- फुल चार्ज के बाद पहले जैसी रेंज नहीं मिलना.
- रेंज एस्टीमेटर में लगातार गिरावट दिखाई देना.
- बार-बार लो बैटरी वार्निंग आना.
- चार्जिंग में पहले की तुलना में ज्यादा समय लगना.
हालांकि, इन संकेतों के आधार पर सीधे बैटरी बदलने का फैसला नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में कंपनी के सर्विस सेंटर पर बैटरी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच कराना जरूरी है.
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क्या फास्ट चार्जिंग से बैटरी की लाइफ कम होती है?
फास्ट चार्जिंग में ज्यादा करंट फ्लो होता है, जिससे बैटरी में ज्यादा हीट पैदा हो सकती है. लगातार और अनावश्यक रूप से फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल बैटरी के लॉन्ग टर्म डिग्रेडेशन को प्रभावित कर सकता है.
इसलिए रोजाना घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के इस्तेमाल के लिए सामान्य होम चार्जिंग का इस्तेमाल करना बेहतर है. फास्ट चार्जिंग को जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है.
उदाहरण के लिए अगर लंबी यात्रा के दौरान बैटरी कम हो जाती है और कई घंटे सामान्य चार्जिंग के लिए इंतजार करना संभव नहीं है, तो फास्ट चार्जिंग उपयोगी हो सकती है. यानी फास्ट चार्जिंग को जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करना ज्यादा प्रैक्टिकल है.
रेंज के दावे में स्टार मार्क का मतलब क्यों समझना जरूरी है?
इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज से जुड़े दावों के साथ कई बार शर्तें भी लागू होती हैं. उदाहरण के लिए किसी स्कूटर की रेंज किसी खास टेस्ट कंडीशन में हासिल की गई हो सकती है.
वास्तविक रेंज राइडिंग स्किल, स्पीड, रोड कंडीशन, राइडर के वजन, टायर प्रेशर और अन्य परिस्थितियों के आधार पर बदल सकती है. इसलिए कंपनी की ओर से दिए गए रेंज दावे को वास्तविक सड़क पर मिलने वाली फिक्स रेंज नहीं मानना चाहिए.
रिमूवेबल और नॉन-रिमूवेबल बैटरी में क्या अंतर है?
रिमूवेबल बैटरी का सबसे बड़ा फायदा चार्जिंग की सुविधा है. खासकर उन लोगों के लिए जो अपार्टमेंट या ऐसी सोसाइटी में रहते हैं जहां स्कूटर को घर के पास चार्ज करना आसान नहीं है.
रिमूवेबल बैटरी को स्कूटर से निकालकर घर के अंदर ले जाकर चार्ज किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर एक चार्ज बैटरी को दूसरी बैटरी से बदलकर स्कूटर को चलाया भी जा सकता है.
वहीं, नॉन-रिमूवेबल बैटरी वाहन में ही लगी रहती है और उसे चार्ज करने के लिए वाहन को चार्जिंग पॉइंट तक ले जाना पड़ता है. दोनों सिस्टम के अपने उपयोग हैं और रिमूवेबल बैटरी का विकास मुख्य रूप से चार्जिंग को ज्यादा सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किया गया है.
इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी के लिए क्या रखें ध्यान
एक्सपर्ट के मुताबिक, बैटरी की देखभाल के लिए सबसे जरूरी है कि कंपनी की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन किया जाए. रोजाना इस्तेमाल में बैटरी को जरूरत के मुताबिक चार्ज करें, अनावश्यक डीप डिस्चार्ज से बचें और फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करें.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज और बैटरी लाइफ सिर्फ बैटरी की क्षमता पर निर्भर नहीं करती. राइडिंग पैटर्न, पावरट्रेन की एफिशिएंसी, रोड कंडीशन और चार्जिंग की आदतें भी इसकी परफॉर्मेंस पर असर डालती हैं.
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