Lata Mangeshkar की आवाज में दर्द सुनकर करोड़ों लोग रोए होंगे. उन्होंने मोहब्बत के ऐसे नगमे गाए, जिनमें बिछड़ना था, इंतजार था, तड़प थी और किसी अपने के खो जाने का दर्द था. लेकिन उनकी अपनी जिंदगी में भी शायद एक ऐसी कहानी थी, जिसे उन्होंने कभी पूरा शब्द नहीं दिया.
एक ऐसी कहानी, जिसमें शादी नहीं थी, लेकिन मांग में सिंदूर था. एक ऐसा रिश्ता था, जिसका नाम दुनिया जानती थी, लेकिन उसकी पूरी सच्चाई शायद सिर्फ दो दिल जानते थे. और एक ऐसा करियर था, जिसने धीरे-धीरे उनकी पूरी जिंदगी को अपने नाम कर लिया.
बिना शादी के मांग में सिंदूर, उठने लगे सवाल
लता मंगेशकर की मांग में सिंदूर देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता था- आखिर वह किसके नाम का सिंदूर लगाती हैं? शादी तो उन्होंने कभी की नहीं.
फिर एक दिन अभिनेत्री तबस्सुम ने सीधे उनसे यही सवाल पूछ लिया. लता जी ने सवाल सुना, मुस्कुराईं और तबस्सुम को प्यार से चपत लगाई. फिर ऐसा जवाब दिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी का राज जैसे एक ही वाक्य में खोल दिया.
उनके लिए संगीत ही परमेश्वर था, भगवान था, गॉड था. यानी उनकी मांग का सिंदूर किसी पति के नाम का नहीं, संगीत के नाम का था.
जब सिंदूर को संगीत से जोड़ दिया
जिस समाज में किसी स्त्री की मांग में सिंदूर देखते ही लोग उसके पति का नाम तलाशने लगते हैं, वहां लता मंगेशकर ने अपने सिंदूर का रिश्ता किसी इंसान से नहीं, अपने संगीत से जोड़ दिया.
लेकिन क्या सचमुच उनकी जिंदगी में प्रेम नहीं था?
यह सवाल यहीं से और दिलचस्प हो जाता है.
वो नाम, जिसे दुनिया प्यार से जोड़ती रही
लता मंगेशकर की जिंदगी में राज सिंह डूंगरपुर का नाम लंबे समय तक जुड़ा रहा. राज सिंह डूंगरपुर राजस्थान के राजघराने से थे और हिंदुस्तानीय क्रिकेट से भी उनका गहरा रिश्ता रहा. दोनों की नजदीकियों की चर्चा 1960 के दशक से होती रही.
कहा गया कि दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे. शादी की बातें भी हुईं. लेकिन शादी नहीं हुई.
अधूरे रिश्ते की वजह क्या थी, सच्चाई कभी सामने नहीं आई
इस रिश्ते को लेकर वर्षों तक कई कहानियां सामने आती रहीं. सबसे ज्यादा चर्चित कहानी यही थी कि राज सिंह के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. लेकिन इस दावे पर सार्वजनिक स्रोतों में पूरी तरह एकमत तस्वीर नहीं मिलती.
शायद इसलिए लता जी ने भी कभी इस रिश्ते की पूरी कहानी दुनिया के सामने नहीं रखी.
‘कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है’
जब उनसे प्यार के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने एक ऐसी बात कही, जो उनके व्यक्तित्व के बिल्कुल मुताबिक थी.
दिल की कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है.
बस.
इतना कहकर उन्होंने उस दरवाजे को फिर बंद कर दिया.
न कोई शिकायत. न किसी पर आरोप. न कोई सफाई. सिर्फ एक अधूरा सा जवाब.
राज सिंह ने भी माना था- वो चीज बस हो नहीं पाई
राज सिंह डूंगरपुर ने भी 2004 में अपने रिश्ते को लेकर बात की थी. उन्होंने कहा था कि दोनों अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आते थे और दोनों अपने-अपने परिवारों से बहुत जुड़े हुए थे. उनके शब्दों में, वह चीज बस हो नहीं पाई.
शायद यही इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा है.
कुछ रिश्ते टूटते नहीं हैं.
बस पूरे नहीं हो पाते.
लेकिन लता की कहानी सिर्फ अधूरे प्यार की कहानी नहीं थी
लता मंगेशकर की कहानी को सिर्फ एक अधूरी प्रेम कहानी कहना भी उनके साथ नाइंसाफी होगी. क्योंकि उनकी जिंदगी में जिम्मेदारियां प्यार से बहुत पहले आ गई थीं.
जब वह सिर्फ 13 साल की थीं, उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया. घर में परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई.
13 की उम्र से ही कंधे पर आया परिवार का बोझ
लता ने काम शुरू किया. फिल्मों में अभिनय किया. गाने गाए. स्टूडियो के चक्कर लगाए. और उस उम्र में काम किया, जिस उम्र में बाकी शिशु स्कूल और स्पोर्ट्स की दुनिया में होते हैं.
उनकी शुरुआती जिंदगी में पैसे की इतनी कमी थी कि उन्होंने खुद बताया था कि वह बस का किराया बचाने के लिए पैदल चलती थीं.
जिंदगी का पहला गाना ही फिल्म से कट गया था
जिस आवाज ने आगे चलकर दुनिया को मंत्रमुग्ध किया, उसकी पहली playback recording तक फिल्म से काट दी गई थी.
यानी जिस आवाज को बाद में लोग देवी का स्वर कहेंगे, उसे शुरुआत में खुद अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा.
शायद इसी संघर्ष ने उनकी जिंदगी का रास्ता तय कर दिया.
एक तरफ परिवार, दूसरी तरफ संगीत बीच में आया प्यार
एक तरफ परिवार था. दूसरी तरफ संगीत. और बीच में शायद प्यार भी आया.
लेकिन जिंदगी ने किसी एक चीज को चुनने का आसान विकल्प नहीं दिया.
लता मंगेशकर ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने 13 साल की उम्र से काम शुरू कर दिया था और परिवार की जिम्मेदारी इतनी बड़ी थी कि शादी के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें अकेले रहने का अफसोस नहीं था.
शादी क्यों नहीं की? लता ने खुद दिया था जवाब
दुनिया उनकी जिंदगी में इस सवाल का जवाब तलाशती रही- लता जी ने शादी क्यों नहीं की?
लेकिन शायद लता जी के लिए सवाल कुछ और था-
क्या हर जिंदगी को पूरा होने के लिए शादी जरूरी है?
उन्होंने इस सवाल का जवाब अपने तरीके से दिया.
उन्होंने शादी नहीं की. लेकिन उन्होंने करोड़ों लोगों के दिल में ऐसी जगह बनाई, जिसे शायद कोई रिश्ता छीन नहीं सकता था.
जिन गानों में दुनिया ने अपना प्यार खोजा, उनमें लता की कहानी भी थी
उन्होंने मोहब्बत के हजारों गीत गाए.
“अजीब दास्तां है ये…”
“लग जा गले…”
“आपकी नजरों ने समझा…”
“कहीं दीप जले कहीं दिल…”
दुनिया ने इन गीतों में अपना प्यार खोजा.
लेकिन शायद बहुत कम लोगों ने यह सोचा कि इन गीतों को गाने वाली औरत अपने भीतर क्या लेकर गा रही थी.
अधूरी कहानी थी या संगीत ही उनका सबसे बड़ा प्रेम?
क्या कोई अधूरी कहानी थी?
क्या कोई ऐसा नाम था जिसे उन्होंने कभी सार्वजनिक नहीं किया?
या फिर सचमुच संगीत ही उनका सबसे बड़ा प्रेम था?
इसका अंतिम जवाब शायद कभी नहीं मिलेगा.
और शायद यही इस कहानी की खूबसूरती भी है.
अपनी जिंदगी की सबसे निजी किताब के पन्ने लता ने हमेशा बंद रखे
लता मंगेशकर ने अपनी जिंदगी की सबसे निजी किताब के कुछ पन्ने दुनिया को पढ़ने ही नहीं दिए.
उन्होंने अपनी मांग में सिंदूर लगाया तो उसका नाम संगीत रखा.
उन्होंने प्रेम पर सवाल पूछा गया तो कहा- कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है.
और जब जिंदगी ने उनसे शादी का रास्ता पूछा, तो उन्होंने शायद अपनी पूरी जिंदगी से जवाब दिया-
मुझे अपना रास्ता मिल चुका है.
उनका रास्ता स्टूडियो से होकर संगीत तक पहुंचा
वह रास्ता स्टूडियो से होकर गुजरता था. रियाज से होकर गुजरता था. परिवार से होकर गुजरता था. और आखिर में संगीत तक पहुंचता था.
इसलिए लता मंगेशकर की कहानी सिर्फ उस स्त्री की कहानी नहीं है जिसने शादी नहीं की.
यह उस स्त्री की कहानी है जिसने अपनी पूरी जिंदगी एक ऐसी चीज के नाम कर दी, जिससे दुनिया आज भी प्यार करती है.
उनकी मांग का सिंदूर शायद उनके सबसे बड़े प्रेम का नाम था
शायद उनकी मांग का सिंदूर किसी इंसान के नाम का नहीं था.
लेकिन वह झूठ भी नहीं था.
वह उनके सबसे बड़े प्रेम का नाम था-
संगीत.
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