Pakistan Spying Case: पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में असम में गिरफ्तार अभिषेक कुमार सिंह के मामले में अब हनीट्रैप का एंगल भी चर्चा में है. बताया जा रहा है कि अभिषेक को पहले एक स्त्री ने न्यूड वीडियो कॉल के जरिए जाल में फंसाया.
इसके बाद कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा और इसी दबाव में उससे देश विरोधी गतिविधियां करायी गयीं. हालांकि, हनीट्रैप के इस एंगल की अभी असम एसटीएफ या एनआईए की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है.
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अभिषेक के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और पाकिस्तान तक कथित तौर पर किस तरह की जानकारी पहुंचायी गयी.
न्यूड वीडियो कॉल के बाद ब्लैकमेलिंग की चर्चा
सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि अभिषेक के मोबाइल पर एक स्त्री की ओर से न्यूड वीडियो कॉल आया था. इसके बाद कथित तौर पर वीडियो के आधार पर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा. आरोप है कि इसी दबाव का इस्तेमाल कर उससे धीरे-धीरे देश विरोधी गतिविधियां करायी गयीं.
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि स्त्री कौन थी, उसका अभिषेक से संपर्क कैसे हुआ और वीडियो कॉल के बाद वास्तव में क्या-क्या हुआ. इन बिंदुओं की जांच एजेंसियों की ओर से अभी सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आयी है. इसलिए हनीट्रैप वाले एंगल को फिलहाल जांच का हिस्सा या संभावित कड़ी के तौर पर ही देखा जा रहा है.
पाकिस्तान तक क्या जानकारी पहुंची, जांच जारी
अभिषेक कुमार सिंह पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने का आरोप है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने कथित तौर पर पाकिस्तान तक देश और सेना से जुड़ी कौन-कौन सी जानकारी पहुंचायी.
असम एसटीएफ के साथ एनआईए भी मामले से जुड़े संपर्कों, मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है. जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि अभिषेक को किसी संगठित नेटवर्क ने इस्तेमाल किया या वह किसी व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद इस गतिविधि में शामिल हुआ.
मुजफ्फरपुर के घर तक पहुंच सकती है जांच
अभिषेक का मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के चकमोहब्बत स्थित प्रगति नगर में आलीशान मकान है. मकान पर ‘गीता कॉम्पलेक्स’ का बोर्ड लगा हुआ है. अभिषेक के असम में पकड़े जाने के बाद खुफिया विभाग की टीम उसके घर के आसपास पहुंचकर जानकारी जुटा चुकी है.
परिवार के सदस्यों के अनुसार, अभिषेक करीब डेढ़ साल से घर नहीं आया था. वह कभी-कभार ही परिवार से बात करता था और काम का हवाला देकर फोन काट देता था. बताया जाता है कि वह पहले एमटीएस के मरीन में काम करता था. इसके बाद बैंगलोर और फिर असम चला गया.
सेना से रहा है परिवार का पुराना नाता
अभिषेक के पिता सुरेंद्र प्रसाद सिंह हिंदुस्तानीय सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. बड़ा भाई विवेक सिंह भी सेना में सेवा दे चुका है. अभिषेक तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर है, जबकि छोटा भाई आदित्य सिंह है.
परिवार मूल रूप से पूर्वी चंपारण के राजेपुर थाना क्षेत्र के सेमराहां गांव का रहने वाला है. चचेरे भाई टुनटुन सिंह के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले जमीन विवाद के बाद अभिषेक का गांव आना-जाना बंद हो गया था. परिवार ने गांव की जमीन बटाई पर दे रखी है.
रितेश कुमार से भी जुड़ रहा नाम
बताया जा रहा है कि अभिषेक पहले बैंगलोर और बाद में असम गया था, जहां उसकी पहचान बेगूसराय के रितेश कुमार से हुई. दोनों के पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी नेटवर्क से जुड़े होने की जांच की जा रही है.
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अभिषेक को हनीट्रैप के जरिए फंसाया गया था या नहीं, उसे किसने ब्लैकमेल किया और कथित तौर पर उससे कौन-कौन सी संवेदनशील जानकारी साझा करायी गयी. हनीट्रैप वाले एंगल की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
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