8 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे या नहीं, यह कौन तय करेगा? ज्ञानेश कुमार खुद यह तय करेंगे या देश का कानून? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील सलमान खुर्शीद से बात की. जानिए, उन्होंने इन सवालों के जवाब में क्या कहा है…
{“type”:”faq”,”question”:”क्या संविधान या कानून में CEC के इस्तीफे को लेकर कोई जिक्र है?”,”answer”:”नहीं, संविधान में CEC के इस्तीफे की प्रक्रिया को लेकर सीधे-सीधे कोई उल्लेख नहीं है, हालांकि, अनुच्छेद 324 में चुनाव आयोग, CEC की नियुक्ति, कार्यकाल और उन्हें हटाने का जिक्र जरूर किया गया है. CEC को हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया महाभियोग के जरिए अपनाई जाती है.nnमुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त स्वैच्छिक तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. 2020 में अशोक लवासा और 2024 में अरुण गोयल ने अलग-अलग वजहों से इस्तीफा दिया था. यह इसका उदाहरण है. कोई जबरदस्ती उनसे इस्तीफा नहीं ले सकता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”अगर कानूनन कोई इस्तीफा नहीं ले सकता है तो यह प्रदर्शन क्यों?”,”answer”:”ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन इसलिए हो रहा है, ताकि वह नैतिक तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे दें. अगर देखा जाए तो विवेक के आधार पर ज्ञानेश कुमार को पहले ही इस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. वह लोकतंत्र के सबसे ताकतवर पदों में से एक पर बैठे हैं. अगर उनको लेकर ही लोगों के मन में संदेह होगा तो फिर पूरी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा होने लगेगा.”}{“type”:”faq”,”question”:”क्या कोई ठोस सबूत ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है, नहीं तो बिना सबूत इतना बड़ा प्रदर्शन क्यों?”,”answer”:”सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दर्ज हैं. सभी याचिकाओं में SIR प्रक्रिया और ज्ञानेश कुमार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. अब कोर्ट की यह जिम्मेदारी है कि वह इसकी जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी नियुक्त करे. एक ऐसी कमेटी, जो लोगों और नेतृत्वक दलों के संदेह की जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दे.nnअगर जांच नहीं होती है और वह पद पर बने रहते हैं तो इससे लोकतंत्र को लेकर संदेह और गहरा जाएगा। इसलिए जितनी जल्दी इसकी ठोस जांच हो जाए, उतना अच्छा है.”}{“type”:”faq”,”question”:”अगर मुद्दा इतना ही महत्वपूर्ण है तो विपक्षी दल एकजुट क्यों नहीं हैं?”,”answer”:”सभी दल एकजुट हैं. आप जिस आम आदमी पार्टी की बात कर रहे हैं, वह भी हमारे मुद्दे पर साथ है. भले ही वह हमारे प्रदर्शन में किसी नेतृत्वक वजह से शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर सभी दल एकजुट हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”मुख्य चुनाव आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है?”,”answer”:”संविधान के अनुच्छेद 324(5) में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान तरीके से और समान आधारों पर पद से हटाया जा सकता है. nnयह प्रावधान 2023 अधिनियम की धारा 11(2) में भी पाया जा सकता है. अनुच्छेद में आगे कहा गया है कि किसी अन्य चुनाव आयुक्त या क्षेत्रीय आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जाएगा.nnचुनाव आयोग को नेतृत्वक दबावों से बचाने के उद्देश्य से, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का मानदंड जानबूझकर बहुत कठिन रखा गया है. nnसंविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया बताई गई है, किसी न्यायाधीश को केवल प्रमाणित दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है.nnदुर्व्यवहार में किसी भी प्रकार की भ्रष्ट गतिविधियां या पद का दुरुपयोग शामिल हो सकता है. वर्षों से, न्यायालयों ने इसकी व्याख्या इस प्रकार की है कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के लिए अनुपयुक्त कार्य या मुख्य चुनाव आयुक्त के जरिए अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफलता भी शामिल है. अक्षमता से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने में असमर्थ हो.”}
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