नीट पेपर लीक के खिलाफ किए गए प्रदर्शन से दिल्ली पुलिस ने जिस तरह निपटा था, उससे उनकी छवि बिगड़ी थी. इतना ही नहीं प्रशासन को भी बैकफुट पर आना पड़ा था, लेकिन इस बार दिल्ली पुलिस ने पहले से ही तैयारी कर ली थी, ताकि नौबत लाठीचार्ज जैसी सख्ती तक ना पहुंचे और पुलिस की छवि के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी ना बिगड़े.
1. प्रोटेस्ट की नहीं दी इजाजत
दिल्ली पुलिस ने इस बार जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट की इजाजत नहीं दी. दिल्ली पुलिस ने प्रोटेस्ट की इजाजत देने में कोई नरमी नहीं दिखाई और पूरी सख्ती से यह बात कही कि प्रोटेस्ट के लिए 10 दिन पहले इजाजत लेनी होती है. कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से प्रोटेस्ट के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को आया था. दिल्ली पुलिस की ज्वाइंट कमिश्नर नुपूर प्रसाद ने 9 अक्टूबर को कहा कि पिछले प्रदर्शन में उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया था, उसे देखते हुए भी उन्हें प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई. उन्होंने बताया कि पिछली बार प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपने अंडरटेकिंग का पालन नहीं किया और पुलिस की ओर से बताए गए कानूनी दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन किया था.
2. सीजेपी के तमाम नेताओं को किया डिटेन
दिल्ली पुलिस ने इस बार यह तय कर लिया था कि वह प्रोटेस्ट नहीं होने देगी. इसी वजह से उनकी तैयारी भी पूरी थी. दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के तीनों बड़े चेहरे अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली घुसते ही प्लेन से ही उठा लिया. उन्हें इस बात का मौका ही नहीं दिया कि वे किसी भी तरह प्रदर्शन कर सकें. हालांकि प्लाइट से अभिजीत दीपके ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें स्त्री पुलिसकर्मी उन्हें यह कहती हुई नजर आ रही हैं कि यह गिरफ्तारी नहीं है. इन तीनों के अलावा उन तमाम लोगों को भी डिटेन कर लिया गया है, जो प्रदर्शन स्थल जाकर कुछ हंगामा खड़ा कर सकते थे. इनमें यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की लीगल हेड भी शामिल है. इतना ही नहीं सीजेपी प्रोटेस्ट के समर्थकों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है और उनके घरों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया है.
3. 57 मेट्रो स्टेशन को किया बंद
पुलिस ने इसकी पूरी तैयारी की थी कि जंतर-मंतर तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने नहीं दिया जाएगा. इसके लिए पुलिस ने दिल्ली की लाइफ लाइन यानी मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया, ताकि प्रदर्शनकारी मेट्रो स्टेशन तक ना पहुंच सकें. इसकी तैयारी एक दिन पहले से ही कर ली गई थी.
4. दिल्ली पहुंचने के तमाम रास्तों को किया गया बंद
ऐसी संभावना भी थी कि सड़क और रेल मार्ग से प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं. इस संभावना को खत्म करने के लिए कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं. इतना ही नहीं दिल्ली से जिन राज्यों की सीमाएं जुड़ती हैं वहां भी बैरिकेडिंग कर दी गई, ताकि प्रदर्शनकारी वहां से दिल्ली में प्रवेश ना कर पाएं. खासकर उत्तर प्रदेश के इलाके में सख्ती की गई.
5. प्रदर्शनकारियों की धरपकड़, उन्हें जमा होने नहीं दिया
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को जमा नहीं होने देने की प्लानिंग की थी, इसके तहत वहां निषेधाज्ञा लागू कर दिया था ताकि भीड़ ना जमा हो पाए. इतना ही नहीं पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को रोका, ताकि वे एकजुट होकर प्रदर्शन स्थल तक न पहुंच सकें. इस कार्रवाई के तहत 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया. पुलिस की इस कार्रवाई का असर सीजेपी के उस अभियान पर पड़ा, जिसके तहत समर्थकों से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई थी. प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर रोक, नेताओं की हिरासत और प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में आई बाधाओं ने समर्थकों को एकजुट होने से रोकने में भूमिका निभाई.
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