Lalu Family Inside Story सिंगापुर से मायके लौटने के बाद लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य परिवारोहिणी को क्या RJD में मिलने जा रही बड़ी जिम्मेदारी? राबड़ी के प्रस्ताव के बाद अब तेजस्वी की सहमति का इंतजार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पुराने नेताओं व कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश में जुटी हैं.इस बीच, रोहिणी की नेतृत्वक वापसी को लेकर उनकी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से पार्टी में नयी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखे जाने की चर्चा है.
इसको लेकर लालू परिवार के भीतर सहमति बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है. रोहिणी के मामा साधु यादव भी दावा कर चुके हैं कि वह छपरा से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी. इसके बाद रोहिणी के जल्द ही सक्रिय नेतृत्व में लौटने को लेकर कयास लगाया जाने लगा है.
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रोहिणी की एंट्री की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक, राबड़ी देवी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद छोड़कर अपनी जगह रोहिणी आचार्य को यह जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव परिवार के भीतर रखा है. इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच चर्चा होने की बात सामने आ रही है. हालांकि, इस प्रस्ताव पर तेजस्वी यादव के रुख पर सबकी नजर है. उनकी सहमति के बाद ही इस संबंध में कोई औपचारिक फैसला सामने आ सकता है.
पुराने नेताओं से बढ़ा संपर्क
रोहिणी आचार्य 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से राजद की उम्मीदवार थीं. हालांकि, उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद परिवार में मतभेद की समाचारों के बीच उन्होंने सक्रिय नेतृत्व से दूरी बना ली थी. अब सिंगापुर से लौटने के बाद उनकी नेतृत्वक गतिविधियां फिर चर्चा में हैं.
रोहिणी के अपने मामा और लालू प्रसाद के शासनकाल में प्रभावशाली नेतृत्वक चेहरा रहे साधु यादव से मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. इसके साथ ही लालू प्रसाद के दौर के पुराने और निष्ठावान नेताओं व कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की उनकी कोशिशों की चर्चा है. इन गतिविधियों के बीच राजद के भीतर रोहिणी की भावी भूमिका और नेतृत्वक कद को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं.
राजद में नयी जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग चर्चाएं
राबड़ी देवी की ओर से रोहिणी को पार्टी में जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखे जाने की चर्चा के बीच राजद के भीतर संभावित नेतृत्वक समीकरणों को लेकर भी तरह-तरह की बातें हो रही हैं. पार्टी से जुड़े कुछ लोगों के बीच यह आशंका जतायी जा रही है कि इससे संगठन में अलग-अलग धड़े उभर सकते हैं. हालांकि, इस तरह की किसी गुटबाजी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
वहीं, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि रोहिणी को संगठन में अहम भूमिका मिलने से लालू प्रसाद के पुराने समर्थकों को फिर से सक्रिय करने में मदद मिल सकती है. दूसरी ओर, कुछ लोगों के बीच इस संभावित बदलाव को लालू परिवार और राजद के सामने मौजूद कानूनी तथा सांगठनिक चुनौतियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
प्रचार की कमान और जनता से जुड़ाव पर नजर
रोहिणी आचार्य की संभावित नेतृत्वक वापसी के साथ उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है. कहा जा रहा है कि यदि उन्हें पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी मिलती है, तो वह चुनाव प्रचार और पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. केंद्र प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शनों में उनकी भागीदारी और सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता पहले भी चर्चा में रही है.
पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने के बाद रोहिणी की पहचान परिवार के प्रति समर्पण के उदाहरण के रूप में भी बनी. राजद के भीतर कुछ लोगों का मानना है कि इस छवि से उन्हें जनता के बीच संवाद स्थापित करने में मदद मिल सकती है.
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