हिंदुस्तान रूस से कच्चा तेल खरीदता है, तो उसे युद्ध को आर्थिक मदद देने वाला बताया जाता है. लेकिन जब अमेरिका खुद रूस से डीजल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देता है, तो तर्क सामने आता है- ईंधन की कीमतें नियंत्रित करना और अमेरिकी हितों की रक्षा करना.
यही है अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व का वह विरोधाभास, जहां नैतिकता की कसौटी अक्सर देश की अपनी जरूरत के हिसाब से बदलती दिखाई देती है.
Read more:
The post Diesel Deal: हिंदुस्तान पर दबाव, अमेरिका को छूट! ये रिश्ता क्या कहलाता है? appeared first on Naya Vichar.

