Maa Skandmata Puja Vastu Tips: शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को सुख-शांति और संतान सुख प्राप्त होने की मान्यता है. नवरात्र के इस खास अवसर पर कई लोग घर के मंदिर में मां की तस्वीर स्थापित करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि मां स्कंदमाता की तस्वीर किस दिशा में लगाना शुभ माना जाता है और पूजा स्थल से जुड़े वास्तु के किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए.
किस दिशा में लगाएं मां स्कंदमाता की तस्वीर?
वास्तु शास्त्र की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को शुभ माना जाता है. मान्यता है कि यह दिशा पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त होती है. इसलिए घर में मां स्कंदमाता की तस्वीर लगाने के लिए इस दिशा को प्राथमिकता दी जा सकती है. अगर ईशान कोण में मंदिर बनाना संभव न हो, तो घर की पूर्व या उत्तर दिशा में भी साफ-सुथरा पूजा स्थल बनाया जा सकता है.
तस्वीर लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे. हालांकि, घर की बनावट और उपलब्ध जगह के अनुसार व्यवस्था अलग हो सकती है.
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा बताते हैं कि देवी माहात्म्य और मार्कण्डेय पुराण का उल्लेख देवी की महिमा के संदर्भ में किया गया है. मां स्कंदमाता की तस्वीर को घर की किसी खास दिशा में लगाने के नियम को इन ग्रंथों का सीधा उद्धरण बताने से बचें. वास्तु में ईशान कोण को पूजा स्थल के लिए प्राथमिकता देने की मान्यता प्रचलित है.
पुराणों में क्या है मां स्कंदमाता का महत्व?
धार्मिक ग्रंथों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की महिमा का वर्णन मिलता है. देवी माहात्म् , जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है और जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है, उसमें देवी की शक्ति और महिषासुर सहित दुष्ट शक्तियों पर उनकी विजय का वर्णन किया गया है. वहीं, नवरात्र के नौ स्वरूपों की पूजा की परंपरा में मां स्कंदमाता का विशेष स्थान है.
मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता के रूप में पूजा जाता है. उनकी गोद में बाल स्वरूप स्कंद विराजमान रहते हैं. मां का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है. ध्यान रहे कि तस्वीर लगाने की दिशा से जुड़े सभी नियमों को सीधे पुराणों का निर्देश नहीं माना जाना चाहिए. दिशा संबंधी सलाह मुख्य रूप से वास्तु की प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है.
पूजा स्थल बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
घर में मां स्कंदमाता की तस्वीर ऐसी जगह लगाएं, जहां नियमित रूप से पूजा करना आसान हो. तस्वीर को सीधे जमीन पर रखने के बजाय साफ चौकी या मंदिर में स्थापित करें. पूजा स्थल के आसपास सफाई रखें और वहां बेकार सामान जमा न होने दें. तस्वीर के पास दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का भी ध्यान रखें.
अगर घर में पहले से मंदिर बना हुआ है, तो केवल दिशा बदलने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है. श्रद्धा के साथ पूजा करना और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना अधिक महत्वपूर्ण है. वास्तु संबंधी मान्यताओं को धार्मिक परंपरा का हिस्सा समझें, न कि सुख-समृद्धि की गारंटी.
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