Medicine Label Information: अक्सर हम दवा खरीदते ही सबसे पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखते हैं, लेकिन क्या सिर्फ इतना काफी है? नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दवा के पैकेट पर उसका नाम, कंपोजिशन, पैक का आकार, निर्माता का पता, लाइसेंस नंबर, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) जैसी जानकारियां दी जाती हैं. आइए जानते हैं कि दवा खरीदते और इस्तेमाल करते समय किन 7 जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.
दवा का नाम और कंपोजिशन जरूर देखें
दवा का नाम और उसमें मौजूद असरदार तत्वों (कंपोजिशन) की जानकारी पैकेट पर दी जाती है. कई बार एक जैसे नाम वाली दवाओं में मौजूद तत्व या उनकी मात्रा अलग हो सकती है. इसलिए सिर्फ ब्रांड के नाम पर भरोसा न करें. डॉक्टर ने जिस दवा और जितनी मात्रा की सलाह दी है, उसका पैकेट पर लिखी जानकारी से मिलान जरूर करें.
बैच नंबर से दवा की पहचान होती है
हर दवा के पैकेट पर एक बैच या लॉट नंबर होता है. इस नंबर से दवा के किसी खास बैच की पहचान की जाती है. अगर किसी बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठता है या उसे बाजार से वापस मंगाया जाता है, तो यह नंबर काम आता है. अगर आपको दवा की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो पैकेट फेंकने के बजाय उसे संभालकर रखें और फार्मासिस्ट या दवा नियंत्रण अधिकारी से संपर्क करें.
मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट में अंतर समझें
मैन्युफैक्चरिंग डेट यानी निर्माण की तारीख बताती है कि दवा कब बनाई गई थी, जबकि एक्सपायरी डेट बताती है कि निर्माता की तय शर्तों के अनुसार दवा की गुणवत्ता और असर की अवधि कब तक है. हिंदुस्तान के ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत दवाओं पर निर्माण और एक्सपायरी की तारीख से जुड़े नियम हैं. अगर एक्सपायरी डेट में केवल महीना और साल दिया गया है, तो सामान्य तौर पर दवा की उपयोग अवधि उस महीने के आखिरी दिन तक मानी जाती है. एक्सपायरी के बाद दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
दवा रखने का सही तरीका जानना भी जरूरी
हर दवा को एक ही तरह से नहीं रखा जा सकता. कुछ दवाओं को सामान्य तापमान पर रखा जाता है, जबकि कुछ को फ्रिज में रखना जरूरी होता है. इसलिए पैकेट पर लिखे स्टोरेज निर्देश यानी दवा रखने के तरीके को ध्यान से पढ़ें. ध्यान रहे कि हर दवा को फ्रिज में रखना सही नहीं होता. दवाओं को नमी, तेज गर्मी और सीधी धूप से बचाकर रखें और निर्माता के निर्देशों का पालन करें.
MRP और पैक का आकार जांचें
दवा खरीदते समय पैकेट पर लिखी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और उसमें मौजूद टैबलेट, कैप्सूल या दवा की मात्रा जरूर देखें. NPPA की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दवा के लेबल पर कीमत से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होती है. दवा खरीदने के बाद बिल जरूर लें और पैकेट पर लिखी कीमत से उसका मिलान करें.
दवा बनाने वाली कंपनी का नाम और लाइसेंस देखें
दवा के पैकेट पर निर्माता यानी दवा बनाने वाली कंपनी का नाम, पता और लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी देखें. इससे कंपनी की पहचान करने में मदद मिलती है. अगर पैकेट पर लिखी जानकारी अधूरी है, छपाई साफ नहीं है या कुछ संदिग्ध लगता है, तो दवा इस्तेमाल करने से पहले फार्मासिस्ट से सलाह लें. जरूरत पड़ने पर राज्य के दवा नियंत्रण विभाग से भी संपर्क किया जा सकता है.
पैकेट की सील और चेतावनी पर भी दें ध्यान
अगर दवा का पैकेट फटा हुआ है, सील टूटी है या स्ट्रिप से टैबलेट बाहर निकली हुई है, तो उसे न खरीदें. अगर दवा के रंग, गंध या बनावट में असामान्य बदलाव दिखे, तो उसका इस्तेमाल करने से पहले फार्मासिस्ट से सलाह लें. साथ ही, पैकेट पर लिखी चेतावनियों और डॉक्टर के निर्देशों को भी गंभीरता से लें. खासकर उन दवाओं के मामले में सावधानी बरतें, जिन पर लाल रेखा या विशेष निर्देश दिए गए हों.
इन बातों का भी रखें ध्यान
घर में दवाओं को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें. अगर दवा की गुणवत्ता या पैकेट पर लिखी जानकारी को लेकर कोई सवाल हो, तो खुद फैसला लेने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना ही समझदारी है.
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