लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि अगर विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए फिर से नोटिस देता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए भी एक तय प्रक्रिया है, जिस तरह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए प्रक्रिया अपनाई जाती है.
संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय और विचार रखने का अधिकार है. उन्होंने कहा, “जब प्रस्ताव लाएंगे, तब प्रक्रिया अपनाएंगे. उसकी एक प्रक्रिया है.”
संसद में नोटिस आने पर होगी कार्रवाई
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाने की संभावित कोशिश से जुड़े सवाल पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद में प्रस्ताव आने के बाद ही नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले से निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.
बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपने विचार रखने का अधिकार है. संसद में जब इस विषय को उठाया जाएगा, तब नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.
किन आधारों पर हटाये जा सकते हैं CEC?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल साबित कदाचार (Proved Misbehaviour) या अक्षमता (Incapacity) के आधार पर पद से हटाया जा सकता है.
नोटिस देने के लिए कितने सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है. लोकसभा में इसके लिए कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस जरूरी है.
नोटिस आने पर स्पीकर क्या करेंगे?
लोकसभा में नोटिस मिलने के बाद स्पीकर उसे स्वीकार करने या खारिज करने का फैसला कर सकते हैं. इसी तरह राज्यसभा में यह अधिकार सभापति के पास होता है. नोटिस पर फैसला करते समय संबंधित पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव और उससे जुड़े तथ्यों पर विचार करते हैं.
नोटिस स्वीकार होने के बाद क्या होगा?
नोटिस स्वीकार होने पर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है.
- सुप्रीम कोर्ट का एक न्यायाधीश
- किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता
समिति आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच करती है. संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलता है.
समिति की रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
समिति अगर आरोपों को साबित नहीं पाती है, तो प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई नहीं होती. अगर समिति कदाचार या अक्षमता के आरोप साबित पाती है, तो प्रस्ताव संबंधित सदन में आगे की प्रक्रिया के लिए लिया जाता है.
CEC को हटाने के लिए कितने वोट जरूरी हैं?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है.
- सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत होना चाहिए.
- उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में कम से कम दो-तिहाई सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में वोट दें.
- दोनों सदनों में निर्धारित बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति पद से हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं.
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