Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है. इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने, चंद्रमा को अर्घ्य देने और खीर का भोग लगाने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की पूजा विधि, शुभ परंपराएं और मां लक्ष्मी की आरती.
पूजा विधि और आरती
शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी रात्रि में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इस दिन चंद्रमा की पूजा करने और खीर का भोग लगाने की भी परंपरा है.
शरद पूर्णिमा की पूजा विधि
- सुबह स्नान करें: ब्रह्म मुहूर्त में या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें.
- पूजा स्थल तैयार करें: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- दीपक जलाएं: भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें.
- संकल्प लें: हाथ में जल और फूल लेकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए पूजा का संकल्प लें.
- मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें: उन्हें रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद लक्ष्मी चालीसा, विष्णु मंत्र या अपनी श्रद्धा के अनुसार स्तुति करें.
- खीर का भोग लगाएं: दूध, चावल और चीनी से खीर बनाकर भगवान को अर्पित करें. कई परिवारों में खीर को रात में चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है.
- चंद्रमा को अर्घ्य दें: रात में चंद्रमा के दर्शन करके जल अर्पित करें. इसके बाद चंद्रमा की पूजा करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें.
- मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करें. अंत में प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों को दान दें.
मां लक्ष्मी की आरती
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता.
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता.
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता.
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता.
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
जिस घर तुम रहती हो, तहां सद्गुण आता.
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता.
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता.
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता.
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता.
ऊं जय लक्ष्मी माता
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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है. इसके लिए एक लोटे में जल लें और चंद्रमा के दर्शन करके श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें. इसके बाद चंद्र देव से मन की शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें.चंद्रमा की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं.
“ॐ सोमाय नमः”
शरद पूर्णिमा 2026 कब है?
इस वर्ष शरद पूर्णिमा का मुख्य व्रत और रात्रि पूजन 25 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा. पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. ध्यान रखें कि पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं. अपने शहर के पंचांग के अनुसार चंद्रोदय और पूजा का समय देखना उचित रहेगा.
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डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. पूजा के समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें.
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