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खतरे में TV इंडस्ट्री! सास-बहू के घिसे-पिटे ड्रामे छोड़ AI बहुओं पर आया दर्शकों का दिल, एक साल में 6,200 करोड़ घटी कमाई

पटना की रोहिणी को कभी टीवी सीरियल की चलती-फिरती डायरी कहा जा सकता था. कौन-सा शो किस चैनल पर आता है, किस किरदार की शादी हुई, किसकी मौत हुई और कौन-सा कलाकार किस रोल में है, सब उन्हें जुबानी याद रहता था. शाम होते ही टीवी के सामने बैठना उनकी रोज की आदत थी. लेकिन अब कहानी बदल गई है.

रोहिणी की नजर टीवी से हटकर फेसबुक पर टिकने लगी है. यहां उन्हें छोटे-छोटे वीडियो सीरियल मिलते हैं. इनमें AI से बने किरदार भी हैं, जो उन्हें असली कलाकारों से ज्यादा दिलचस्प लगते हैं. किसी कहानी का एक हिस्सा खत्म होता है, तो वह अगला देखने लगती हैं.

यह सिर्फ मनोरंजन का जरिया बदलने की बात नहीं है. सवाल यह भी है कि क्या टीवी के लंबे और एक जैसी कहानी वाले सीरियल अब दर्शकों को पहले की तरह बांध नहीं पा रहे हैं? इसी बीच FICCI-EY की रिपोर्ट में सामने आया है कि 2025 में हिंदुस्तानीय टीवी इंडस्ट्री की कमाई घटकर 61,700 करोड़ रुपये रह गई. यानी एक साल में 6,200 करोड़ रुपये कम. हालांकि, इस गिरावट को सीधे AI वीडियो से जोड़ने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, लेकिन दर्शकों के सामने अब मनोरंजन के कई नए विकल्प जरूर हैं.

रिमोट के लिए होती थी लड़ाई, अब मोबाइल पर मिल रहा मनोरंजन

रांची की 35 साल की पूजा का उदाहरण भी कुछ ऐसा ही है. पहले रात के खाने के बाद उनका पसंदीदा सीरियल देखने का समय तय रहता था. घर में रिमोट को लेकर बहस तक हो जाती थी. लेकिन अब फेसबुक और यूट्यूब पर कुछ मिनट के वीडियो में ही उन्हें पूरी कहानी या उसका दिलचस्प हिस्सा देखने को मिल जाता है.

मुजफ्फरपुर की 28 साल की नेहा को सोशल मीडिया पर प्रेम कहानियां और पारिवारिक ड्रामा पसंद हैं. AI से तैयार कुछ किरदार इतने असली दिखाई देते हैं कि पहली नजर में फर्क करना मुश्किल हो सकता है. वहीं, जमशेदपुर की 42 साल की सीमा का उदाहरण थोड़ा अलग है. उनके घर में टीवी अब भी चलता है, लेकिन उनका ध्यान अक्सर मोबाइल पर रहता है.

पूजा, नेहा और सीमा के ये उदाहरण फिलहाल काल्पनिक हैं. हालांकि, इनके जरिए दर्शकों की बदलती आदत से जुड़े तीन सवाल सामने आते हैं. क्या लोग अब तय समय पर सीरियल नहीं देखना चाहते? क्या उन्हें छोटे एपिसोड ज्यादा पसंद आने लगे हैं? और क्या टीवी चलते रहने के बावजूद दर्शकों का ध्यान मोबाइल पर बंट रहा है?

सोशल मीडिया पर AI किरदार, क्या अब बड़े स्टार्स की जरूरत नहीं?

फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर छोटे वीडियो सीरियल और माइक्रो ड्रामा का चलन बढ़ रहा है. इनमें प्यार, धोखा, बदला, सास-बहू की लड़ाई और परिवार की कहानियां दिखाई जाती हैं.

कुछ वीडियो AI की मदद से तैयार किए जाते हैं. इनमें किरदार, उनकी आवाज और कई बार पूरा माहौल डिजिटल तरीके से बनाया जा सकता है. हालांकि, हर माइक्रो ड्रामा AI से नहीं बनता.

इस नए फॉर्मेट की खास बात है कि दर्शक जब चाहें, जहां चाहें कहानी देख सकते हैं. उन्हें किसी शो के टीवी पर आने का इंतजार नहीं करना पड़ता. छोटे एपिसोड और तेजी से बदलती कहानी दर्शकों को अगला वीडियो देखने के लिए उत्सुक रख सकती है.

क्या घिसे-पिटे टीवी सीरियल का फॉर्मूला अब कमजोर पड़ रहा है?

सालों से टीवी पर कई सीरियल एक जैसे फॉर्मूले पर चलते रहे हैं. कभी सास-बहू की लड़ाई, कभी घर में साजिश, कभी शादी टूटना और कभी मर चुके किरदार का वापस लौट आना. कई बार एक कहानी महीनों तक खिंचती रहती है.

अब दर्शकों के पास विकल्प हैं. अगर कोई कहानी पसंद नहीं आती, तो वे तुरंत दूसरी कहानी देखने लगते हैं. यही बात टीवी चैनलों के लिए चुनौती बन सकती है.

हालांकि, टीवी की कमाई घटने का मतलब यह नहीं कि दर्शक सिर्फ घिसी-पिटी कहानियों से ऊबकर जा रहे हैं. विज्ञापन बाजार, सब्सक्रिप्शन की कीमत और डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती पहुंच जैसे कई कारण इस बदलाव के पीछे हैं.

क्या AI सीरियल टीवी का भविष्य बदल देंगे?

AI की मदद से वीडियो बनाना पहले के मुकाबले आसान हो रहा है. इसके लिए हर बार बड़े सेट, महंगे कैमरे और कलाकारों की लंबी शूटिंग की जरूरत नहीं पड़ती. इससे कम बजट में भी नई कहानियां तैयार करने के रास्ते खुल रहे हैं.

लेकिन फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है, जिससे यह साबित हो कि AI सीरियल की वजह से ही टीवी इंडस्ट्री की कमाई में 6,200 करोड़ रुपये की गिरावट आई.

फिर भी रोहिणी जैसे दर्शकों की बदलती पसंद एक दिलचस्प सवाल खड़ा करती है. क्या आने वाले समय में दर्शकों को किसी बड़े टीवी स्टार के चेहरे से ज्यादा कहानी और उसे देखने की सुविधा आकर्षित करेगी?

टीवी अभी खत्म नहीं हो रहा है. लेकिन अब उसे सिर्फ दूसरे चैनलों से नहीं, बल्कि दर्शकों की जेब में रखे मोबाइल से भी मुकाबला करना पड़ रहा है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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