Hot News

Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

‘तारक मेहता…’ में काम करना था सपना, स्कूल जाने के नाम पर घर से निकला 16 साल का लड़का, 900 KM दूर पहुंच गया मुंबई

मुंबई: टीवी पर दिखने वाली चमक-दमक और कलाकारों की दुनिया का आकर्षण कई बार बच्चों को भी अपने सपनों के पीछे दूर तक जाने के लिए प्रेरित कर देता है. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में रहने वाले 16 साल के एक नाबालिग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसे मशहूर टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में काम करने का सपना था. इसी सपने को पूरा करने के लिए वह घर से निकला और करीब 900 किलोमीटर का सफर तय कर मुंबई पहुंच गया. स्कूल जाने की बात कहकर निकला था घर से नाबालिग गुरुवार को घर से स्कूल जाने की बात कहकर निकला था. लेकिन वह स्कूल नहीं पहुंचा. वह छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन गया और वहां से ट्रेन पकड़कर नागपुर पहुंचा. इसके बाद दूसरी ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हो गया. परिवार को जब उसके घर नहीं लौटने की जानकारी हुई तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी. गोरेगांव पहुंचते ही फिल्म सिटी की ओर बढ़ा मुंबई पहुंचने के बाद भी लड़के का इरादा बदला नहीं. वह गोरेगांव स्टेशन पहुंचा और वहां से फिल्म सिटी की तरफ निकल गया. करीब 900 किलोमीटर का सफर अकेले तय करने के बाद वह मुंबई की फिल्मी दुनिया के उस हिस्से तक पहुंच चुका था, जहां से उसे अपने सपने की शुरुआत होने की उम्मीद थी. पुलिस को फिल्म सिटी में मिला नाबालिग फिल्म सिटी में नाबालिग को अकेले घूमते हुए देखकर पुलिस को इसकी जानकारी दी गई. पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित अपने साथ आरे पुलिस स्टेशन ले गई. पूछताछ में उसकी पहचान सामने आई. पुलिस को पता चला कि वह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा का रहने वाला है और घर से लापता है. ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में करना चाहता था काम पूछताछ में नाबालिग ने पुलिस को बताया कि वह ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अभिनय करना चाहता था. टीवी पर शो देखने के बाद उसके मन में उसमें काम करने की इच्छा पैदा हुई थी. इसी चाहत में उसने मुंबई आने का फैसला किया. उसने अकेले ही ट्रेन से करीब 900 किलोमीटर का सफर तय कर लिया. पुलिस ने पिता को दी जानकारी नाबालिग के मुंबई पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसके पिता से संपर्क किया. पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा गुरुवार से घर से लापता था. बेटे के सुरक्षित मिलने की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली. बताया गया है कि पिता उसे वापस ले जाने के लिए मुंबई आ रहे हैं. सपने के पीछे 900 किलोमीटर का सफर 16 साल की उम्र में घर से इतनी दूर अकेले पहुंच जाना इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू है. एक टीवी शो में अभिनेता बनने की इच्छा ने नाबालिग को छिंदवाड़ा से मुंबई तक पहुंचा दिया. हालांकि उसकी यह कोशिश परिवार के लिए चिंता का कारण बन गई. राहत की बात यह है कि पुलिस ने उसे सुरक्षित खोज लिया. The post ‘तारक मेहता…’ में काम करना था सपना, स्कूल जाने के नाम पर घर से निकला 16 साल का लड़का, 900 KM दूर पहुंच गया मुंबई appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

IND vs SL Test: श्रीलंका दौरे पर साई सुदर्शन बाहर, सरफराज खान की एंट्री की संभावना तेज

Sarfaraz Khan Test Team: श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं और अब युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन के भी सीरीज से बाहर होने की आशंका है. हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सूत्रों के मुताबिक, सुदर्शन के स्थान पर सरफराज खान को हिंदुस्तानीय टेस्ट टीम में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला बीसीसीआई की चयन समिति द्वारा लिया जाना बाकी है. बीसीसीआई सूत्र ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि चोटिल साई सुदर्शन की जगह सरफराज खान को टीम में शामिल किए जाने की संभावना है. सुदर्शन फिलहाल बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे हैं. उन्होंने बल्लेबाजी और फील्डिंग ड्रिल्स में हिस्सा भी लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि वह 15 अगस्त से गाले में शुरू होने वाले पहले टेस्ट तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाएंगे. श्रीलंका नहीं पहुंचे साई सुदर्शन साई सुदर्शन हिंदुस्तानीय टीम के साथ श्रीलंका के लिए रवाना नहीं हुए. इसी वजह से वह कोलंबो में श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के खिलाफ चल रहे तीन दिवसीय अभ्यास मैच में भी हिस्सा नहीं ले सके. यह अभ्यास मुकाबला 8 अगस्त से शुरू हुआ है और टेस्ट सीरीज से पहले हिंदुस्तानीय टीम के लिए तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सुदर्शन की अनुपस्थिति ने टीम मैनेजमेंट के सामने मध्यक्रम को लेकर विकल्प तलाशने की चुनौती बढ़ा दी है. ऐसे में सरफराज खान को मौका मिलने की संभावना मजबूत हुई है. सरफराज पहले भी हिंदुस्तानीय टेस्ट टीम का हिस्सा रह चुके हैं और घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय टीम में जगह बना चुके हैं. कप्तान शुभमन गिल की उंगली में चोट हिंदुस्तानीय टीम की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई है। कप्तान शुभमन गिल भी चोटिल हो गए हैं. अभ्यास सत्र के दौरान उनके दाहिने हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी. बीसीसीआई ने बताया कि एहतियात के तौर पर गिल को श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतारा गया. बीसीसीआई ने कहा कि मेडिकल टीम गिल की चोट पर लगातार नजर बनाए हुए है. उनकी गैरमौजूदगी में अभ्यास मैच के दौरान केएल राहुल ने टीम की कप्तानी संभाली. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गिल पहले टेस्ट तक पूरी तरह फिट हो पाएंगे या नहीं. हिंदुस्तान के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गिल टेस्ट टीम के कप्तान हैं और श्रीलंका के खिलाफ सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र का हिस्सा है. जसप्रीत बुमराह भी सीरीज से बाहर हिंदुस्तानीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को भी बड़ा झटका लगा है. स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बाएं घुटने की चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और इसी कारण उन्हें श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर रखा गया है. बुमराह को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान चोट लगी थी. उनकी गैरमौजूदगी में हिंदुस्तानीय गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी दूसरे तेज गेंदबाजों पर होगी. बुमराह की जगह पुरुष चयन समिति ने अकीब नबी को टीम में शामिल किया है. कई और खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर हिंदुस्तानीय टीम इस समय चोटों की समस्या से जूझ रही है. तेज गेंदबाज हर्षित राणा हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण उपलब्ध नहीं हैं, जबकि नीतीश कुमार रेड्डी क्वाड्रिसेप्स (जांघ के आगे की मांसपेशी में खिंचाव या फटना) की चोट से परेशान हैं. ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर भी हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं. वहीं, तेज गेंदबाज आकाश दीप पीठ में हुए स्ट्रेस रिएक्शन से उबर रहे हैं और अभी टीम के लिए उपलब्ध नहीं हैं. इस तरह श्रीलंका दौरे से पहले हिंदुस्तानीय टीम को लगातार चोटों के कारण अपने संयोजन में बदलाव करना पड़ रहा है. 15 अगस्त से गाले में पहला टेस्ट हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गाले में शुरू होगा. यह सीरीज आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र का हिस्सा है. शुभमन गिल की कप्तानी में हिंदुस्तान इस समय वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है. हिंदुस्तान ने अब तक नौ टेस्ट मैच स्पोर्ट्से हैं, जिसमें चार में जीत और चार में हार मिली है। टीम का पॉइंट्स प्रतिशत (PCT) 48.15 है. श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया का लक्ष्य न केवल सीरीज में मजबूत शुरुआत करना होगा, बल्कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में अपनी स्थिति बेहतर करना भी होगा. हालांकि, लगातार चोटों के कारण टीम संयोजन में हो रहे बदलावों ने सीरीज शुरू होने से पहले ही हिंदुस्तानीय टीम की चुनौती बढ़ा दी है. इसे भी पढ़े- पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों से बढ़ा तनाव, क्या रद्द हो जाएगी हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीरीज? The post IND vs SL Test: श्रीलंका दौरे पर साई सुदर्शन बाहर, सरफराज खान की एंट्री की संभावना तेज appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

रोहतास चंदेश्वर हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव, तस्वीरों में देखिए पूरी कहानी

रोहतास जिले के दिनारा थाना क्षेत्र के जोगिया गांव में मजदूरी मांगने पर हुई चंदेश्वर चौधरी की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. इस मामले ने अब नेतृत्वक रूप भी ले लिया है. शनिवार को बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे. उन्होंने मृतक की पत्नी और बच्चों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि इस दुख की घड़ी में वे परिवार के साथ खड़े हैं. The post रोहतास चंदेश्वर हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव, तस्वीरों में देखिए पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

VIDEO : बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन का दावा-आखिरी सांस ले रही है RJD, तेजस्वी को लेकर क्या कहा, सुनिए

Shahnawaz Hussain Attack on RJD : बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन शनिवार को पटना पहुंचे. पटना एयरपोर्ट पर उन्होंने राजद और तेजस्वी यादव को लेकर कई दावें किए. उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू यादव को सलाह दिया कि वो अब राजद को खत्म कर दें. राजद अब आखिरी सांस ले रही है और सभी कार्यकर्ता एक दूसरे के साथ गाली-गलौज पर उतार आए हैं. वीडियो में सुनिए शाहनवाज हुसैन क्या कह रहे हैं? ‘आखिरी सांस ले रही है राजद’ बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि, लालू जी को आरजेडी को खत्म कर देनी चाहिए. राजद की हालत यह हो गई है कि पार्टी के लोग एक दूसरे को गाली-गलौज कर रहे हैं. राष्ट्रीय जनता दल अपनी आखिरी सांस ले रहा है. MY समीकरण भी टूट गया है. तेजस्वी यादव का भी यहां मन नहीं लग रहा है यहां. इसलिए जो काम अच्छा ना लगे नहीं करना चाहिए. राजद वीरचंद मार्ग के ऑफिस से लालू यादव के घर तक सीमित हो गई है. Also Read : PHOTOS : सावन में महाकाल के भस्म आरती स्वरूप में सजे बाबा औघड़दानी, तस्वीरों में करें अद्भुत दर्शन The post VIDEO : बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन का दावा-आखिरी सांस ले रही है RJD, तेजस्वी को लेकर क्या कहा, सुनिए appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सीएम योगी बोले- फालतू घूमने वाले नौजवान की शादी भी नहीं होती, अखिलेश ने पूछा—‘बता रहे हैं या आत्मकथा सुना रहे हैं?

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. सीएम योगी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह युवाओं और शादी को लेकर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री पर तंज कसा है. योगी बोले- रखना एक बड़ी ताकत है वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते सुनाई दे रहे हैं, “रखना एक बड़ी, बड़ी ताकत बोल रहा हूं मैं. नहीं तो आज के समय में है क्या?” उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई नौजवान लड़का फालतू घूम रहा है, तो आज के समय में कोई उससे पूछता भी नहीं है और उसकी शादी भी नहीं होती. सीएम योगी के मुताबिक, ऐसा युवक इधर-उधर भटकता रहता है और उसे कोई पूछने वाला नहीं होता. अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर कर कसा तंज मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर अखिलेश यादव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर वीडियो पोस्ट किया. वीडियो के साथ उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “बता रहे हैं या आत्मकथा सुना रहे हैं.” अखिलेश यादव की इस टिप्पणी के बाद नेतृत्वक गलियारों में बयान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज योगी आदित्यनाथ के बयान और उस पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है. दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने नजरिये से इसे लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. Also Read : यूपी में मौसम ने बदली करवट, रविवार को 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, पूर्वांचल समेत इन इलाकों में बरसेंगे बदरा The post सीएम योगी बोले- फालतू घूमने वाले नौजवान की शादी भी नहीं होती, अखिलेश ने पूछा—‘बता रहे हैं या आत्मकथा सुना रहे हैं? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

JPSC-JSSC विवाद: CM से बैठक के बाद मंत्रियों ने छात्रों को बातचीत के लिए फिर बुलाया, आज होगी तीसरे दौर की वार्ता

JPSC-JSSC Protest:  जेपीएससी-जेएसएससी प्रकरण में शनिवार को प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में चार मंत्रियों ने आंदोलन समाप्त कराने की दिशा में स्टेट गेस्ट हाउस में दूसरे दिन पहले देवेंद्र महतो गुट से वार्ता की. इसके बाद वार्ता में एनएसयूआई, झारखंड मुक्ति मोर्चा की छात्र इकाई झारखंड छात्र मोर्चा (जेसीएम) और आदिवासी छात्र संघ की भी इंट्री हुई. प्रशासन के प्रतिनिधियों ने लगभग साढ़े तीन घंटे तक चारों संगठनों से अलग अलग बातचीत की. इसके बाद चारो मंत्री मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने गये. वहां लगभग साढ़े तीन घंटे की मैराथन बैठक हुई. बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा ने छात्र प्रतिनिधियों की मांगों की जानकारी सीएम को दी.  छात्र प्रतिनिधियों के साथ रविवार को एक बार फिर बातचीत बैठक में 14वीं जेपीएससी से लेकर बैकलॉग परीक्षा तक के मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक में सीएम ने कहा कि सभी छात्र प्रतिनिधियों के साथ रविवार को एक बार फिर बातचीत की जाये. मंत्री सुदिव्य कुमार और दीपिका पांडेय ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि रविवार को दोपहर 12 बजे से स्टेट गेस्ट हाउस में छात्र प्रतिनिधियों के साथ पुनः बैठक होगी. उनकी मांगों पर एक-एक कर चर्चा की जायेगी. इसी दिन प्रशासन की मंशा क्या है, इसकी भी जानकारी दी जायेगी. अंतिम फैसला छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद लिया जायेगा. इससे कयास लगाया जा रहा है कि रविवार को प्रशासन इस मामले में कोई बड़ा घोषणा कर सकती है.  वार्ता का दूसरा दिन देवेंद्र महतो गुट ने धरना जारी रखने की घोषणा पहली बैठक देवेंद्र महतो गुट के छात्रों के साथ हुई. ये छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे हैं और देवेंद्र महतो समेत कई लोग अनशन पर हैं. इस बैठक में भी छात्रों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी. हालांकि दोनों पक्षों ने वार्ता को सकारात्मक बताया है. छात्रों के प्रतिनिधि चंदन ने कहा कि जब तक पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं मानी जाती, तब तक धरना जारी रहेगा. 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम भी होगा.   एनएसयूआई ने दिया 90 दिनों का अल्टीमेटम एनएसयूआई के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने किया. बैठक में परीक्षा प्रणाली में सुधार, लंबित जांच और आगामी परीक्षाओं के लिए कैलेंडर जारी करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. कुमार राजा ने कहा कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा को तत्काल रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया में सामने आयी अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गयी है. सीआइडी जांच 90 दिनों में पूरी करने की मांग भी रखी गयी.  जेसीएम पार्टी मर्माहत, 14वीं जेपीएससी रद्द हो  झारखंड छात्र मोर्चा की बैठक के बाद मोर्चा के संयोजक तारकेश्वर महतो और अमन तिवारी ने बताया कि जेपीएससी और जेएसएससी को लेकर उनकी पार्टी झामुमो मर्माहत है. इसे देखते हुए पार्टी की सहमति से पांच सूत्री मांगें रखी गयी है. इनमें 14वीं जेपीएससी और वर्ष 2023-24 की बैकलॉग परीक्षाएं रद्द करने की मांग शामिल है. निष्पक्ष तरीके से परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए और सभी परीक्षाओं का संचालन हो. परिणाम प्रकाशित किए जाएं और नियुक्तिया की जायें.  एसीएस: बाहरी लोग आंदोलन कर रहे हैं आदिवासी छात्र संघ के कार्तिक उरांव ने कहा कि जेएसएससी सीजीएल में काफी धांधली हुई है. इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाये. जेपीएससी में जो भी गड़बड़ियां हुई है, उनकी जांच की जाये. तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाये. आदिवासी छात्र संघ के संयोजक सुशील कुमार मिंज ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जो लोग आंदोलन कर रहे हैं, वे बाहरी और भाजपा से जुड़े छात्र हैं. ये भी पढ़ें- बाइक पार्किंग के विवाद में गुमला में मारपीट, पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी का आरोप छात्रों से आंदोलन खत्म करने की अपील  शनिवार को छात्र संगठनों के साथ बैठक के बाद मंत्रियों ने कहा कि अन्य छात्र संगठनों के साथ भी बैठक होगी और उनके सुझाव लिए जायेंगे. प्रशासन द्वारा एक ई-मेल आईडी jpsc.jssc.feedback@gmail.com भी जारी की गयी है, जिस पर छात्र, अभिभावक और अन्य लोग फीडबैक भेज सकते हैं. इसके आधार पर सुधार नीति बनायी जायेगी, मंत्री ने कहा कि प्रशासन छात्रों के साथ है. उनकी मांगों के प्रति प्रशासन गंभीर है. इसलिए छात्र अपना आंदोलन समाप्त करें.  शनिवार को हुई वार्ता में सभी छात्र संगठनों की मांगों में जो साझा मांग उभरकर सामने आयी है, उसमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा रेगुलर पीटी सहित सिविल सेवा बैकलॉग-2023, सिविल सेवा बैकलॉग-2025 की पीटी और लिखित परीक्षाएं रद्द करने बात शामिल है. सीआइडी-एसआइटी द्वारा इस मामले में की जा रही जांच 90 दिनों में पूरी कर दोषियों को सजा दिलाने की मांग भी की गयी. उक्त मांगों के अलावा संगठनों ने जेपीएससी और जेएसएससी से नियमित रूप से परीक्षा कैलेंडर जारी करने तथा परीक्षा और मूल्यांकन कार्य में पारदर्शिता लाने की मांग भी रखी.  प्रशासन ने छात्रों की बात गंभीरता से सुनी है, होगा समाधान: दीपिका मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि प्रशासन ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना है. विभिन्न छात्र संगठनों के साथ सकारात्मक संवाद हुआ. सभी सुझावों और चिंताओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जायेगा. छात्रों की मांगें जायज हैं और प्रशासन उनके समाधान के लिए गंभीरता से काम कर रही है. संवाद, जांच और सुधार के माध्यम से प्रशासन समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है.  हम सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं: चमरा लिंडा आदिवासी छात्र संघ की भी बातें सुनी गयी हैं. जो भी त्रुटियां हैं, उनकी जानकारी सभी संगठनों ने दी है. बैकलॉग का मुद्दा भी उठाया गया है. छात्रों ने अपनी भाषाओं को सुरक्षित रखने की मांग भी की है. हम सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को लेकर भी कई बातें सामने आयी हैं. झारखंड के लोगों की अधिक से अधिक नियुक्तियां हों, इस दिशा में काम करने की मांग रखी गयी है.  सभी की बातें सुनी गयी हैं: संजय प्रसाद यादव मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि सभी पक्षों की बातें सुनी गई हैं. मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी जायेगी. जल्द ही कोई निष्कर्ष निकलेगा.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Tribalpedia: औपनिवेशिक जनजातीय नीतियां… अलगाव से एकीकरण तक, कैसे बदली आदिवासी दुनिया?

ब्रिटिश शासन के विस्तार के साथ हिंदुस्तान के उन इलाकों पर भी औपनिवेशिक नियंत्रण बढ़ा, जहां आदिवासी समुदाय लंबे समय से अपनी सामाजिक व्यवस्था, परंपराओं और संसाधनों के साथ अपेक्षाकृत स्वतंत्र जीवन जी रहे थे. खासकर पूर्वी हिंदुस्तान और उत्तर-पूर्व के जनजातीय क्षेत्रों में अंग्रेजों के सामने सवाल था- इन इलाकों को अपने प्रशासन में कैसे शामिल किया जाए? इसका जवाब समय के साथ बदलता गया. ब्रिटिश नीति मोटे तौर पर अलगाव (Segregation/Isolation), आत्मसात्करण (Assimilation) और फिर प्रशासनिक एकीकरण (Integration) के अलग-अलग चरणों से गुजरी. Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 2 पहले रास्ता था- अलग रखो औपनिवेशिक शासन के शुरुआती दौर में कई जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा के प्रशासन से अलग रखने की नीति अपनाई गई. विचार यह था कि इन इलाकों को उपमहाद्वीप के बाकी हिस्सों से काफी हद तक अलग रखा जाए. इसका अर्थ था- कम संपर्क, सीमित संचार और अलग प्रशासनिक व्यवस्था. उत्तर-पूर्व हिंदुस्तान इसका प्रमुख उदाहरण बना. बाद में Inner Line Permit जैसी व्यवस्थाओं के जरिए भी कुछ क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया. इस नीति का एक परिणाम यह हुआ कि जनजातीय इलाकों और शेष हिंदुस्तान के बीच एक तरह की प्रशासनिक और सामाजिक दूरी बनी रही. अलगाव का असर केवल प्रशासन तक सीमित नहीं था. इससे कई इलाकों में seclusion यानी अलगाव की भावना और कुछ परिस्थितियों में अलग पहचान की भावना भी मजबूत हुई. फिर आया आत्मसात्करण का दौर ब्रिटिश नीति का दूसरा पहलू था Assimilation यानी आत्मसात्करण. इस दौर में मिशनरियों और ईसाई संस्थाओं की गतिविधियां भी बढ़ीं. दिए गए स्रोत के अनुसार, 1813 में खासी, 1845 में झारखंड के उरांव और 1880 में मध्य प्रदेश के भील क्षेत्रों में ईसाई मिशनरी गतिविधियों का उल्लेख मिलता है. शिक्षा, धर्म और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय समाज के साथ नए प्रकार का संपर्क स्थापित हुआ. यह प्रक्रिया केवल धार्मिक परिवर्तन तक सीमित नहीं थी. औपनिवेशिक प्रशासन के लिए ईसाई बने आदिवासी समुदायों को प्रशासनिक ढांचे में शामिल करना अपेक्षाकृत आसान माना गया. स्रोत में इसकी तुलना Eurasians को प्रशासनिक व्यवस्था में समाहित करने से की गई है. इस तरह धर्म, शिक्षा और प्रशासन- तीनों एक-दूसरे से जुड़ने लगे. अलगाव से प्रशासनिक सुधार तक समय के साथ ब्रिटिश प्रशासन को यह महसूस हुआ कि केवल अलग रखकर इन क्षेत्रों को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है. इसके बाद Integration और Reforms की दिशा में कदम बढ़े. Government of India Act, 1870 के तहत Scheduled Tracts की अवधारणा सामने आई. इन क्षेत्रों में हिमालयी इलाकों के साथ असम, दार्जिलिंग, कुमाऊं, गढ़वाल और नीलगिरि जैसे क्षेत्र शामिल किए गए. इसके बाद Scheduled Districts Act, 1874 आया. आगे चलकर Government of India Act, 1919 में इन क्षेत्रों के लिए Backward Tracts जैसी प्रशासनिक श्रेणियां विकसित हुईं. फिर Government of India Act, 1935 के तहत व्यवस्था और स्पष्ट हुई. इसमें जनजातीय क्षेत्रों को Excluded Areas और Partially Excluded Areas जैसी श्रेणियों में बांटा गया. इसका आदिवासी समाज पर क्या असर पड़ा? इन नीतियों ने आदिवासी समाज को केवल प्रशासनिक रूप से नहीं बदला, बल्कि उसके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रभावित किया. एक तरफ अलगाव ने पारंपरिक संस्थाओं और जीवन-पद्धतियों को कुछ हद तक बाहरी हस्तक्षेप से बचाए रखा, तो दूसरी तरफ इसने मुख्यधारा से दूरी भी पैदा की. वहीं आत्मसात्करण और प्रशासनिक एकीकरण ने मिशनरी शिक्षा, नए प्रशासनिक ढांचे और बाहरी संस्थाओं के लिए रास्ता खोला. इसलिए औपनिवेशिक जनजातीय नीति को केवल ‘अलगाव’ या केवल ‘विकास’ की कहानी के रूप में देखना अधूरा होगा. असल कहानी यह है कि ब्रिटिश शासन ने पहले जनजातीय क्षेत्रों को दूर रखा, फिर उन्हें अपने तरीके से बदलने की कोशिश की और अंततः विशेष प्रशासनिक व्यवस्थाओं के जरिए उन्हें औपनिवेशिक राज्य में समाहित किया. यही नीतियां आगे चलकर स्वतंत्र हिंदुस्तान की जनजातीय प्रशासन, अनुसूचित क्षेत्रों और विशेष संवैधानिक सुरक्षा पर होने वाली बहसों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी बनीं. Read more: हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -4: जब नेता जेल गए… लेकिन ‘हिंदुस्तान छोड़ो’ आंदोलन सड़कों पर उतर आया! The post Tribalpedia: औपनिवेशिक जनजातीय नीतियां… अलगाव से एकीकरण तक, कैसे बदली आदिवासी दुनिया? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ट्रेन में बेडशीट-कंबल नहीं मिला तो घबराइए नहीं, रेलवे देगा रिफंड

ट्रेन में सफर के दौरान अगर आप एसी कोच में हैं और आपको बेडशीट, तकिया, तौलिया या कंबल नहीं मिला, तो इसे सिर्फ असुविधा समझकर छोड़ने की जरूरत नहीं है. कुछ स्थितियों में यात्री इसके लिए ₹20 का रिफंड क्लेम कर सकते हैं. हालांकि, इसके लिए रेलवे की शिकायत प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है. किन एसी कोच में मिलती है बेडरोल सुविधा? एसी कोच में सफर करने वाले कई यात्रियों को शायद पता न हो कि बेडरोल की सुविधा टिकट में ही शामिल होती है. इसमें आम तौर पर ये चीजें दी जाती हैं: बेडशीट तकिया तौलिया कंबल यह सुविधा 1 एसी, 2 एसी और 3 एसी कोच के यात्रियों के लिए लागू होती है. यानी इसके लिए अलग से पैसे देने की जरूरत नहीं होती. इसलिए अगर सफर के दौरान इनमें से कोई जरूरी सामान नहीं मिलता है, तो यात्री इसकी शिकायत कर सकते हैं. बेडशीट या कंबल नहीं मिले तो क्या करें? अगर एसी कोच में आपको बेडरोल नहीं मिला है, तो सबसे पहले कोच अटेंडेंट से संपर्क करना चाहिए. कई बार सामान की कमी या वितरण में हुई गलती वहीं से ठीक हो जाती है. अगर शिकायत करने के बाद भी समस्या दूर नहीं होती है, तो यात्री को इसकी शिकायत दर्ज करानी होगी. यही शिकायत आगे रिफंड क्लेम के लिए जरूरी मानी जाती है. ध्यान रखें कि शिकायत करने में देरी न करें. इस सुविधा से जुड़े रिफंड के लिए तय समय-सीमा और शिकायत की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. ₹20 का रिफंड कब मिल सकता है? अगर यात्री को तय बेडरोल सुविधा नहीं मिली और उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत भी की, तो गंतव्य स्टेशन पर ₹20 का रिफंड क्लेम किया जा सकता है.यह रकम भले ही कम लगे, लेकिन यात्रियों के लिए यह जानना जरूरी है कि टिकट में शामिल सुविधा नहीं मिलने पर शिकायत का रास्ता मौजूद है. स्लीपर कोच में क्या है अलग? यह नियम सभी कोच में एक जैसा नहीं है. स्लीपर कोच में बेडरोल की व्यवस्था एसी कोच से अलग हो सकती है. कुछ ट्रेनों में यात्रियों को बेडरोल के लिए अलग से अनुरोध करने और भुगतान करने की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि एसी और स्लीपर दोनों कोच में बेडरोल की सुविधा एक जैसी होती है. सफर से पहले अपनी ट्रेन और कोच के हिसाब से सुविधा की जानकारी रखना बेहतर है. ये भी पढ़ें: MSME Bill 2026: छोटे कारोबारियों को राहत, 6 महीने तक मामला अटका तो अदालत दिला सकती है आधा पैसा The post ट्रेन में बेडशीट-कंबल नहीं मिला तो घबराइए नहीं, रेलवे देगा रिफंड appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

विराट कोहली नंबर-1, सचिन तेंदुलकर दूसरे नंबर पर, जानें किसकी कितनी ब्रांड वैल्यू

Sachin Tendulkar Brand Value: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहे सचिन तेंदुलकर को एक दशक से ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन उनकी ब्रांड वैल्यू और कमाई का दबदबा आज भी कायम है. सेलिब्रिटी ब्रांड वैल्यूएशन रिपोर्ट 2025 में सचिन 125.9 मिलियन डॉलर की ब्रांड वैल्यू के साथ सबसे अमीर क्रिकेटरों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं. क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. ‘मास्टर ब्लास्टर’ ने अपने लंबे क्रिकेट करियर में ऐसे कई रिकॉर्ड बनाए, जिन्हें हासिल करना आज भी दुनिया के तमाम बल्लेबाजों का सपना है. हालांकि, सचिन तेंदुलकर ने 16 नवंबर 2013 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. उनके संन्यास को अब एक दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन मैदान से दूर होने के बावजूद उनकी लोकप्रियता और ब्रांड वैल्यू लगातार मजबूत बनी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि कमाई और ब्रांड वैल्यू के मामले में सचिन तेंदुलकर आज भी क्रिकेट की मौजूदा पीढ़ी के बड़े नामों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. विराट कोहली सबसे आगे, सचिन दूसरे नंबर पर सबसे अमीर क्रिकेटरों की इस सूची में हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों का दबदबा साफ नजर आता है. विराट कोहली 158.4 मिलियन डॉलर की ब्रांड वैल्यू के साथ पहले स्थान पर हैं. इसके बाद सचिन तेंदुलकर का नंबर आता है, जबकि पूर्व हिंदुस्तानीय कप्तान एमएस धोनी 115.3 मिलियन डॉलर की ब्रांड वैल्यू के साथ तीसरे स्थान पर हैं. इस तरह इन तीनों हिंदुस्तानीय क्रिकेटरों की ब्रांड वैल्यू 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है. सबसे ज्यादा ब्रांड वैल्यू वाले हिंदुस्तानीय क्रिकेटर: विराट कोहली — 158.4 मिलियन डॉलर सचिन तेंदुलकर — 125.9 मिलियन डॉलर एमएस धोनी — 115.3 मिलियन डॉलर विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर के बीच ब्रांड वैल्यू का अंतर करीब 32.5 मिलियन डॉलर है. वहीं सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू एमएस धोनी से करीब 10.6 मिलियन डॉलर अधिक बताई गई है. 13 साल बाद भी बरकरार है सचिन का ब्रांड सचिन तेंदुलकर की खासियत यह है कि उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी अपनी ब्रांड पहचान को कमजोर नहीं पड़ने दिया. आमतौर पर किसी खिलाड़ी के सक्रिय स्पोर्ट्स से बाहर होने के बाद उसके विज्ञापन और ब्रांड एंडोर्समेंट में कमी आने लगती है, लेकिन सचिन के मामले में स्थिति अलग रही. क्रिकेट के मैदान पर उनके प्रदर्शन, दशकों तक कायम रही लोकप्रियता और देश-दुनिया में उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग ने उन्हें एक भरोसेमंद ब्रांड बना दिया है. यही वजह है कि क्रिकेट से संन्यास लेने के वर्षों बाद भी बड़ी कंपनियां उन्हें अपने ब्रांड से जोड़ना पसंद करती हैं. ब्रांड एंडोर्समेंट से करोड़ों की कमाई सचिन तेंदुलकर की पोस्ट-रिटायरमेंट कमाई में ब्रांड एंडोर्समेंट की बड़ी भूमिका है. वह कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में नजर आ चुके हैं। इनमें ल्यूमिनस टेक्नोलॉजी, जिलेट और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे नाम शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए सालाना करीब 18 से 20 करोड़ रुपये तक की कमाई करते हैं. हालांकि, अलग-अलग ब्रांड डील, कॉन्ट्रैक्ट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के कारण वास्तविक सालाना आय इससे अलग हो सकती है. इसे भी पढ़े- साई सुदर्शन के बाहर होने पर शेख रशीद को मिल सकता है मौका, जानें कौन हैं ये युवा बल्लेबाज SRT स्पोर्ट्स मैनेजमेंट भी कमाई का बड़ा जरिया सचिन तेंदुलकर ने अपने स्पोर्ट्स अनुभव और ब्रांड वैल्यू को बिजनेस में भी सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है. उन्होंने अगस्त 2015 में SRT स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की शुरुआत की थी. यह कंपनी सचिन तेंदुलकर से जुड़े व्यावसायिक और ब्रांड मैनेजमेंट से जुड़े कामों को संभालती है. इस तरह सचिन की कमाई सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके बिजनेस और निवेश भी उनकी संपत्ति और आर्थिक मजबूती में योगदान देते हैं. मौजूदा क्रिकेटरों को भी दे रहे हैं टक्कर सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि वह सक्रिय क्रिकेट से पूरी तरह दूर होने के बावजूद मौजूदा दौर के बड़े क्रिकेटरों के साथ मजबूती से खड़े हैं. विराट कोहली अभी वनडे क्रिकेट और आईपीएल में सक्रिय हैं, जबकि एमएस धोनी आईपीएल में स्पोर्ट्सते नजर आते हैं। इसके बावजूद सचिन की ब्रांड वैल्यू इन दोनों के बीच तीसरे स्थान पर नहीं, बल्कि दूसरे स्थान पर है. यह आंकड़ा बताता है कि सचिन तेंदुलकर की लोकप्रियता सिर्फ उनके क्रिकेट करियर तक सीमित नहीं रही. उनके रिकॉर्ड, व्यक्तित्व, लंबे करियर और हिंदुस्तानीय क्रिकेट में योगदान ने उन्हें ऐसा ब्रांड बना दिया है, जिसकी पहचान मैदान से बाहर भी कायम है. सचिन की कमाई में क्रिकेट से ज्यादा ‘ब्रांड सचिन’ का योगदान सचिन तेंदुलकर ने 24 साल से ज्यादा लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद जब क्रिकेट को अलविदा कहा, तब उनके नाम कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड थे। लेकिन संन्यास के बाद भी उन्होंने खुद को सिर्फ पूर्व क्रिकेटर की पहचान तक सीमित नहीं रखा. विज्ञापन, बिजनेस, निवेश और ब्रांड पार्टनरशिप के जरिए उन्होंने अपनी कमाई के कई रास्ते बनाए. यही वजह है कि क्रिकेट से संन्यास के करीब 13 साल बाद भी सचिन तेंदुलकर दुनिया के सबसे प्रभावशाली और मूल्यवान क्रिकेट ब्रांड्स में शामिल हैं. इसे भी पढ़े- रवींद्र जडेजा ने की कुलदीप यादव की नकल, गंभीर भी नहीं रोक पाए हंसी The post विराट कोहली नंबर-1, सचिन तेंदुलकर दूसरे नंबर पर, जानें किसकी कितनी ब्रांड वैल्यू appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

TVS Jupiter 125 हुआ महंगा, खरीदने से पहले जानें किस वेरिएंट पर कितनी बढ़ी कीमत

यदि आपने हाल ही में टीवीएस जुपिटर 125 खरीदने का प्लान बनाया है, तो यह समाचार आपके लिए ही है. कंपनी की ओर से जुपिटर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. TVS Jupiter 125 रेंज की कीमतों में अब 24 हजार रुपये तक का इजाफा किया गया है. इस स्कूटर की फिलहाल शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 81,100 रुपये है. ऐसे में इस महीने नया स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे कस्टमर्स के लिए यह बढ़ोतरी सभी वेरिएंट्स पर लागू होती है, चाहे आप कोई भी वेरिएंट चुने, उसकी ऑन-रोड कीमत बढ़ जाएगी. इस अपडेट में मैकेनिकल रूप से किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है. Jupiter 125 DT SCX के नए कलर ऑप्शन मई, 2026 में लॉन्च होने के बाद यह दूसरी बार है, जब इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. आइए जानते हैं कि किस वेरिएंट पर कितना प्राइस बढ़ा है. TVS Jupiter 125: किस वेरिएंट पर कितनी कीमत बढ़ी? ड्रम अलॉय: टीवीएस जुपिटर 125 ड्रम अलॉय की कीमत 78,700 रुपये से बढ़कर 80,100 रुपये हो गई है. इसके दामों में 2,400 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. यह इस लाइनअप की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.  डिस्क: डिस्क वेरिएंट की कीमत में 2,210 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. पहले इसकी कीमत 83,900 रुपये थी, जो अब बढ़कर 88,950 रुपये हो चुकी है. डीटी डीएक्ससी (DT SXC): इस वेरिएंट की कीमत 86,750 रुपये से बढ़कर 88,950 रुपये हो गई है. पहले से यह 2,200 रुपये महंगा हुआ है. स्मार्टएक्सकनेक्ट (SmartXconnect): स्मार्टएक्सकनेक्ट की कीमत अब पहले से 875 रुपये ज्यादा हो गई है. पहले इसकी कीमत 89,060 रुपये थी, जो अब बढ़कर 89,935 रुपये हुई है. ये भी पढ़ें: Honda Dio 110 vs TVS Jupiter 110: डेली अप-डाउन वालों के लिए कौन-सा स्कूटर नंबर-1? खरीदने से पहले जानें Jupiter 125 के स्पेसिफिकेशन में कोई बदलाव नहीं  TVS Jupiter 125 के मौजूद मॉडल में 124.8 सीसी का एयर-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन और CVT ऑटो ट्रांसमिशन बरकरार है. इस नए रिवीजन में कोई नया फीचर, कलर या हार्डवेयर नहीं जोड़ा गया है. इससे यह साबित होता है कि यह बढ़ोतरी टीवीएस द्वारा किए गए सीधे लागत एडजस्टमेंट के चलते हुई है, न की एक्स्ट्रा फीचर्स के कारण.  ये भी पढ़ें: TVS Raider, Hunter 350 या Yamaha FZS-Fi V4: कम हाइट वालों के लिए तीनों में से कौन है सबसे बेस्ट ऑप्शन? खरीदारों के लिए इसका मतलब क्या है?  वर्तमान में जो भी जुपिटर 125 सीसी ऑटोमैटिक स्कूटरों की तुलना कर रहा है, उसे यह पता चलेगा कि होंडा 125 जैसे कंपटिटर की तुलना में इस जुपिटर 125 में कोई बदलाव नहीं हुआ है. खरीदारों को खरीदने से पहले नई कीमतों को ध्यान में रखना चाहिए, खासकर उन शहरों में जहां RTO और इंश्योरेंस लागत फाइनल प्राइस को यहां बताई गई एक्स शोरूम कीमत से भी ऊपर लेकर जाती है. जो कस्टमर्स किसी वेरिएंट, मुख्य रूप से ड्रम और डिस्क ट्रिम्स खरीदने का मन बना चुके हैं, जहां कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, उन्हें बुकिंग करने से पहले नजीदीकी डीलरों से अपडेटेड ऑन-रोड प्राइसों की जानकारी लेनी चाहिए. The post TVS Jupiter 125 हुआ महंगा, खरीदने से पहले जानें किस वेरिएंट पर कितनी बढ़ी कीमत appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top