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Author name: Vinod Jha

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Video : जिनपिंग को डरते देख मुस्कुराने लगे ट्रंप! कैमरे में कैद हुआ रिएक्शन; US दौरे पर पुतिन के साथ भी हुआ था ऐसा

11 साल बाद अमेरिका पहुंचे शी जिनपिंग का स्वागत इस बार बेहद खास अंदाज में हुआ. हिंदुस्तानीय समय के मुताबिक 23-24 सितंबर की रात 2:30 बजे वॉशिंगटन डीसी के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर उनका विमान उतरा. मिलिट्री बैंड की धुन, भव्य सैन्य सलामी और आसमान में बी-1 बॉम्बर के फ्लाईओवर के बीच हुए इस स्वागत समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. वायरल वीडियो में क्या है मैरीलैंड के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर शी जिनपिंग के स्वागत समारोह के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग साथ खड़े थे, उसी दौरान अमेरिकी वायुसेना के दो बी-1 बॉम्बर विमानों ने उनके ऊपर से फ्लाईओवर किया. उस वक्त समारोह में अमेरिकी राष्ट्रगान बज रहा था. विमानों की तेज आवाज के बीच कैमरे में जिनपिंग कुछ पल के लिए ऊपर की ओर देखते और आंखें सिकोड़ते नजर आए. इसके उलट ट्रंप चेहरे पर मुस्कान के साथ खड़े दिखाई दिए. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है. दिलचस्प बात यह है कि ऐसा दृश्य ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान भी देखने को मिला था। देखिए वीडियो जिनपिंग को लेने प्रोटोकॉल तोड़ एयरपोर्ट पहुंचे ट्रंप शी जिनपिंग 11 साल बाद तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर पहुंचे हैं. उनके विमान के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर उतरने के बाद डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने खुद उनका और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया. स्वागत समारोह को खास बनाने के लिए करीब 100 फीट लंबा लाल कालीन बिछाया गया था. 21 सदस्यीय ऑनर कॉर्डन मौजूद था और अमेरिकी वायुसेना का बैंड दोनों देशों के राष्ट्रगान बजा रहा था. समारोह के दौरान तोपों की सलामी भी दी गई. इस दौरान दो बी-1 बॉम्बर विमानों ने एयरबेस के ऊपर से फ्लाईओवर किया. अमेरिकी राष्ट्रपति का किसी विदेशी नेता का एयरपोर्ट पर खुद स्वागत करना भी इस समारोह की खास बात रही. ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात से दुनिया को ₹580 लाख करोड़ का नुकसान! जानिए हिंदुस्तान पर क्या होगा असर? जिनपिंग-ट्रंप बातचीत में किन मुद्दों पर होगी चर्चा? जिनपिंग और ट्रंप की बातचीत ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और रणनीतिक मुद्दों पर तनाव बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत में व्यापार संबंध, दुर्लभ खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी पाबंदियों जैसे मुद्दे अहम रह सकते हैं. दोनों देशों के रिश्तों में आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है. ताइवान और दूसरे सुरक्षा मुद्दे भी बातचीत के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हो सकते हैं, हालांकि, किसी मुद्दे पर अंतिम सहमति क्या बनेगी, यह बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा. पुतिन के स्वागत में भी हुआ था ऐसा फ्लाईओवर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ऐसा सैन्य फ्लाईओवर पहले भी सुर्खियां बटोर चुका है. 15 अगस्त 2025 को अलास्का के ज्वाइंट बेस एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन में ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया था. उस दौरान एक बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर के साथ चार एफ-35 लड़ाकू विमान आसमान से गुजरे थे. एयरबेस पर एफ-22 विमान भी तैनात थे. अमेरिकी अधिकारियों ने उस फ्लाईओवर की पुष्टि की थी. पुतिन के उस स्वागत समारोह में भी आसमान से गुजरते विमानों ने लोगों का ध्यान खींचा था. हालांकि, उस फ्लाईओवर के पीछे ट्रंप का व्यक्तिगत आदेश था या यह समारोह की सैन्य योजना का हिस्सा था. ये भी पढ़ें: AI की इस गलती से हो सकती थी अमेरिका-चीन में जंग…फिर ऐसे टला संकट, समझिए क्यों जरूरी है ह्यूमन इंटेलिजेंस The post Video : जिनपिंग को डरते देख मुस्कुराने लगे ट्रंप! कैमरे में कैद हुआ रिएक्शन; US दौरे पर पुतिन के साथ भी हुआ था ऐसा appeared first on Naya Vichar.

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जमशेदपुर में भीषण सड़क हादसा: ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय की बेटी की मौत, मंत्री इरफान अंसारी ने जताया दुख

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट जमशेदपुर: झारखंड से बड़ी समाचार सामने आ रही है. राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी का जमशेदपुर में हुए एक भीषण सड़क हादसे में असामयिक निधन हो गया है. बताया जा रहा है कि यह दर्दनाक दुर्घटना गुरुवार की सुबह जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग (NH Highway) पर हुई. घटना की समाचार फैलते ही मंत्री के परिजनों, शुभचिंतकों और नेतृत्वक हलकों में गहरा शोक व्याप्त है. इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया के जरिये से मंत्री दीपिका पांडे सिंह और उनके परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की. डॉ. अंसारी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए दिवंगत आत्मा को अपनी ‘छोटी बहन’ के रूप में याद किया और दुर्घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताया. The post जमशेदपुर में भीषण सड़क हादसा: ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय की बेटी की मौत, मंत्री इरफान अंसारी ने जताया दुख appeared first on Naya Vichar.

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Cyclone Arnab : आधा भारत नहीं जानता कैसे रखे जाते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम? ऐसे हुई थी इस सिलसिले की शुरुआत

Cyclone Arnab : क्या आप जानते हैं कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवात का नाम कैसे तय होता है? तितली, गाजा, गुलाब तो कभी अम्फान – ये नाम किसी लॉटरी के तहत नहीं रखे जाते. बल्कि इसे एशिया और मिडिल ईस्ट के 13 देशों के ग्रुप द्वारा बारी-बारी से रखा जाता है. आइए समझते हैं कि कैसे किया है चक्रवातों का नामकरण? इन देशों के ग्रुप को क्या कहते हैं? वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से इस ग्रुप को WMO/ESCAP (विश्व मौसम विज्ञान संगठन और एशिया-प्रशांत का आर्थिक व सामाजिक आयोग) का पैनल कहा जाता है. इस ग्रुप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उत्तरी हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों से जिन भी देशों की समुद्री सीमाएं या मौसम प्रभावित होता है, उन सभी को इसमें शामिल किया जाए. पिछले 10 सालों में उठे चक्रवाती तूफान और इसे नाम देने वाले देश वर्ष (Year) चक्रवात का नाम (Cyclone Name) नाम देने वाला देश (Naming Country) प्रभावित मुख्य हिंदुस्तानीय क्षेत्र / देश 2026 अर्नब (Arnab) बांग्लादेश ओडिशा, आंध्र प्रदेश (वर्तमान में सक्रिय/अलर्ट) 2025 मोंथा (Montha) थाईलैंड आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना 2024 रेमल (Remal) ओमान पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश 2024 मिचांग (Michaung) म्यांमार आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु 2023 मिधिली (Midhili) मालदीव पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश 2023 हामून (Hamoon) ईरान बांग्लादेश, हिंदुस्तान के उत्तर-पूर्वी राज्य 2023 मोचा (Mocha) यमन म्यांमार, बांग्लादेश (अंडमान पर आंशिक असर) 2022 मांडूस (Mandous) UAE तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी 2022 सितरंग (Sitrang) थाईलैंड बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल 2022 आसानी (Asani) श्रीलंका आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु 2021 जवाद (Jawad) सऊदी अरब ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल 2021 गुलाब (Gulab) पाकिस्तान आंध्र प्रदेश, ओडिशा 2021 यास (Yaas) ओमान ओडिशा, पश्चिम बंगाल 2020 निवार (Nivar) ईरान तमिलनाडु, पुडुचेरी 2020 अम्फान (Amphan) थाईलैंड पश्चिम बंगाल, ओडिशा (सुपर साइक्लोन) 2019 बुलबुल (Bulbul) पाकिस्तान पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बांग्लादेश 2019 फानी (Fani) बांग्लादेश ओडिशा, पश्चिम बंगाल 2018 गाजा (Gaja) श्रीलंका तमिलनाडु 2018 तितली (Titli) पाकिस्तान ओडिशा, आंध्र प्रदेश 2017 ओखी (Ockhi) बांग्लादेश कन्याकुमारी, केरल, लक्षद्वीप (खाड़ी से अरब सागर गया) 2016 वरदा (Vardah) पाकिस्तान तमिलनाडु (चेन्नई), आंध्र प्रदेश 2016 रोनू (Roanu) मालदीव ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बांग्लादेश कौन-कौन से देश हैं शामिल इस 13 देशों के समूह में हिंदुस्तान और उसके पड़ोसी देशों के साथ-साथ मध्य-पूर्व (खाड़ी) के देश भी शामिल हैं. भौगोलिक दृष्टि से देखें तो इसमें दक्षिण एशिया से हिंदुस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव आते हैं, जबकि दक्षिण-पूर्वी एशिया से म्यांमार और थाईलैंड को शामिल किया गया है. इसके अलावा, अरब सागर और हिंद महासागर से जुड़े पश्चिम एशिया (Middle East) के छह प्रमुख देश- ओमान, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन भी इस पैनल का हिस्सा हैं. ये सभी देश मिलकर उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में उठने वाले चक्रवातों की निगरानी और उनके नामकरण का काम करते हैं. एडवांस में बनती है नामों की ‘बैंक’ चक्रवाती तूफानों के नाम तूफान आने के बाद नहीं रखे जाते. साल 2020 में सभी 13 देशों ने मिलकर 13-13 नाम सौंपे थे. इस तरह कुल 169 नामों की एक एडवांस लिस्ट (बैंक) तैयार कर ली गई, जो मौसम विभाग के पास सुरक्षित है. कब से हुई नामकरण की शुरुआत? चक्रवातों के नाम देने का सिलसिला साल 2004 से शुरू हुआ था. इन सभी देशों ने मिलकर जब ग्रुप बनाया इसके बाद से तूफानों के नाम तय किए जाने लगे. इसके पहले इनके नाम नहीं रखे जाते थे. मुख्य भूमिका अदा करता है हिंदुस्तान इस पूरी प्रक्रिया में हिंदुस्तान की भूमिका एक ‘सुपरबॉस’ की तरह है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल, नई दिल्ली स्थित हिंदुस्तानीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) दुनिया के उन चुनिंदा छह विशेष क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों में से एक है, जिसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है. इसका मतलब यह है कि नाम भले ही अलग-अलग देश सुझाते हैं, लेकिन समुद्र में तूफान उठने के बाद उसे आधिकारिक रूप से नाम देने और उसकी निगरानी करने का मुख्य काम हिंदुस्तान का मौसम विभाग ही करता है. इसके साथ ही, हिंदुस्तान ही इन बाकी 12 देशों को चक्रवात की रफ्तार, उसके रास्ते और उससे होने वाले नुकसान को लेकर समय-समय पर आधिकारिक चेतावनी और निर्देश जारी करता है. नामों के पीछे का अनोखे अर्थ चक्रवातों को दिए जाने वाले इन नामों के पीछे बड़े ही दिलचस्प और अनोखे अर्थ छिपे होते हैं, जो आम पाठकों को बहुत ज्यादा आकर्षित करते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ समय पहले आए ‘बिपरजॉय’ तूफान का नाम बांग्लादेश ने रखा था, जिसका बांग्ला भाषा में अर्थ ‘आपदा’ या ‘विपत्ति’ होता है. वहीं, हिंदुस्तान द्वारा दिए गए ‘तेज’ नाम का सीधा संबंध रफ्तार से था. इसी तरह, यमन ने एक चक्रवात का नाम ‘मोचा’ रखा था, जो वहां के एक मशहूर कॉफी उत्पादक शहर के नाम पर आधारित था, जबकि पाकिस्तान द्वारा दिए गए ‘गुलाब’ नाम के पीछे का उद्देश्य प्रकृति की खूबसूरती को दर्शाना था. ये नाम केवल पहचान के लिए नहीं, बल्कि इन देशों की संस्कृति और भाषा की झलक भी होते हैं. ‘रिटायर’ हो जाते हैं भारी तबाही मचाने वाले चक्रवातों के नाम इस नामकरण व्यवस्था का एक सबसे हैरान करने वाला नियम यह है कि तूफानों के नामों का भी ‘रिटायरमेंट’ होता है. अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, यदि कोई चक्रवात असाधारण रूप से भयानक तबाही मचाता है और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान करता है, तो उस नाम को हमेशा के लिए सूची से हटा यानी रिटायर कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि भविष्य में जब भी उस नाम का जिक्र हो, तो लोग केवल उसी ऐतिहासिक आपदा को याद कर सकें और मौसम संबंधी रिकॉर्ड्स में कोई भ्रम न पैदा हो. एक बार रिटायर होने के बाद उस नाम को दोबारा कभी भी दुनिया के किसी भी नए तूफान को नहीं दिया जाता. ये भी पढ़ें: Odisha Cyclone Arnab : बंगाल की खाड़ी के ‘डीप डिप्रेशन’ ने तट पर दी दस्तक, ओडिशा में आज और कल आफत की बारिश; कई जिलों में स्कूल बंद ये भी पढ़ें: Cyclone Arnab: डीप डिप्रेशन का असर, ओडिशा-झारखंड समेत 10 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, लैंडफॉल की स्थिति जानें The post Cyclone Arnab : आधा हिंदुस्तान नहीं जानता कैसे

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CEC Appointment Law: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून क्यों है विवाद में, सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और निर्वाचन आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से जुड़ा 2023 का कानून एक बार फिर चर्चा में है. इस कानून में CEC और EC की नियुक्ति करने वाली चयन समिति से हिंदुस्तान के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटा दिया गया है. इसी प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खंडित फैसला सुनाया. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ इस बात पर एकमत नहीं थी कि मामले को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं. हालांकि, दोनों जज इस बात पर सहमत हुए कि मामले को CJI सूर्यकांत के समक्ष रखा जाए, ताकि उचित संख्या वाली बड़ी पीठ के गठन पर फैसला हो सके. पहले समझिए, 2023 में क्या बदला? CEC और EC की नियुक्ति से जुड़ा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 संसद ने दिसंबर 2023 में बनाया था. इस कानून के तहत तीन सदस्यीय चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं. यानी चयन समिति में प्रशासन के दो सदस्य होते हैं. पहले इस समिति में CJI को शामिल करने की व्यवस्था थी. 2023 के कानून में CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया. CJI को हटाने पर सवाल क्यों उठा? इस विवाद की पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के अनूप बरनवाल बनाम हिंदुस्तान प्रशासन फैसले से जुड़ी है. उस समय पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि जब तक संसद निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कानून नहीं बनाती, तब तक चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे. अदालत ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना था और कहा था कि चुनाव कराने वाली संस्था को कार्यपालिका के प्रभाव से सुरक्षित रखना जरूरी है. इसके कुछ महीने बाद संसद ने नया कानून बनाया और CJI की जगह प्रधानमंत्री के नामित मंत्री को समिति में शामिल कर दिया. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ता है और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को क्या हुआ? मामले की सुनवाई पांच दिनों तक हुई. इसके बाद दो सदस्यीय पीठ ने अलग-अलग राय दी. जस्टिस दीपांकर दत्ता का मानना था कि मामले को संविधान पीठ में भेजना जरूरी नहीं है. उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सिद्धांत तय कर चुका है. अब सवाल यह है कि 2023 का कानून उन तय सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं. जस्टिस दत्ता के मुताबिक, इस सवाल का फैसला मौजूदा पीठ भी कर सकती है. वहीं, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की राय अलग थी. उन्होंने कहा कि 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का कोई आधिकारिक फैसला अभी नहीं आया है. उनके मुताबिक, यह पहली बार है जब अदालत को यह तय करना है कि CJI की जगह प्रधानमंत्री के नामित कैबिनेट मंत्री को चयन समिति में शामिल करना संविधान के अनुरूप है या नहीं. इसलिए इस सवाल पर संविधान पीठ का फैसला जरूरी है. जस्टिस दत्ता ने चयन समिति पर क्या सवाल उठाए? जस्टिस दत्ता ने 2023 के कानून के तहत बनी चयन समिति की संरचना पर गंभीर सवाल उठाए, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रथम दृष्टया टिप्पणियां हैं और कानून की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हैं. उन्होंने कहा कि समिति में प्रधानमंत्री और उनके द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री होने के कारण कार्यपालिका के दो सदस्य हो जाते हैं. उनके अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा नामित मंत्री से यह उम्मीद करना मुश्किल है कि वह अपने नामित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ जाकर फैसला करेगा. उन्होंने सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में चयन समिति में मंत्री से स्वतंत्र संतुलनकारी भूमिका निभाने की उम्मीद करना मुश्किल है. क्या इससे फैसला 2:1 हो सकता है? जस्टिस दत्ता ने कहा कि चयन समिति में कार्यपालिका के दो सदस्य होने के कारण कागज पर फैसला 2:1 के अनुपात में प्रशासन के पक्ष में जा सकता है. उन्होंने कहा कि इससे कार्यपालिका के पास प्रभावी रूप से ‘वीटो’ जैसी स्थिति बन सकती है. उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में विपक्ष के नेता की मौजूदगी का उद्देश्य भी कमजोर पड़ सकता है. ‘आयोग स्वतंत्र हो, लेकिन स्वतंत्र दिखे भी’ जस्टिस दत्ता ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को लेकर एक और अहम बात कही. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग का स्वतंत्र होना ही पर्याप्त नहीं है. उसे स्वतंत्र तरीके से काम करते हुए दिखना भी चाहिए. उन्होंने इसे समझाने के लिए क्रिकेट का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि अगर किसी क्रिकेट मैच में अंपायर को किसी एक टीम का कप्तान चुनता है और बाद में उसी टीम की जीत होती है, तो अंपायर के सही फैसलों के बावजूद उस पर संदेह की गुंजाइश बनी रहती है. न्यायिक नियुक्तियों पर भी टिप्पणी सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने न्यायिक नियुक्तियों को लेकर प्रशासन की दलीलों पर भी टिप्पणी की. उन्होंने उस आम धारणा को गलत बताया कि हिंदुस्तानीय न्यायपालिका में ‘न्यायाधीश ही न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं.’ उन्होंने कहा कि यह एक मिथक है और न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में कार्यपालिका की भी भूमिका होती है. उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की नियुक्ति प्रक्रिया की तुलना निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से करके चयन समिति में स्वतंत्र सदस्य की जरूरत को नकारा नहीं जा सकता. अब आगे क्या होगा? दोनों जजों की राय अलग होने के बाद मामला CJI सूर्यकांत के पास भेजा गया है. अब CJI यह तय करेंगे कि मामले की सुनवाई के लिए कितने सदस्यों वाली पीठ गठित की जाए. पीठ ने संविधान से जुड़े मामलों में लगातार हो रही देरी पर भी चिंता जताई और CJI से स्थायी पांच सदस्यीय संविधान पीठ बनाने की संभावना पर विचार करने का अनुरोध किया है. इस मामले में फिलहाल 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. अगली सुनवाई बड़ी पीठ के गठन और उसके बाद कानून की वैधता से जुड़े सवालों पर होगी. ये भी पढ़ें: SIR पर घमासान:

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पिलखुवा की आशना चौधरी ने UPSC में AIR 116 किया हासिल, बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर बनीं IPS अधिकारी

Success Story: अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो असफलता भी सफलता की राह का हिस्सा बन जाती है. IPS आशना चौधरी की UPSC जर्नी भी कुछ ऐसी ही है. दो बार असफल होने के बाद उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों को समझा, रणनीति बदली और तीसरे प्रयास में UPSC पास कर अपने सपने को पूरा किया. अब उनकी कहानी कई युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. The post पिलखुवा की आशना चौधरी ने UPSC में AIR 116 किया हासिल, बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर बनीं IPS अधिकारी appeared first on Naya Vichar.

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प्यार किया तो डरना क्या… मेधा शंकर को ड्रॉप करने पहुंचे समय रैना, कैमरे देखते ही मुंह छुपाकर भागीं ’12th Fail’ एक्ट्रेस

Medha Shankr Samay Raina video: इंटरनेट पर आजकल बस एक ही गॉसिप चल रही है, क्या कॉमेडी किंग समय रैना और ’12th फेल’ की स्वीटहार्ट मेधा शंकर गुपचुप तरीके से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं? पूरा सीन किसी बॉलीवुड रोम-कॉम जैसा सेट है, जहां दोनों एक-दूसरे पर ‘जस्ट फ्रेंड्स’ होने का टैग लगा रहे हैं, पर पब्लिक सब जानती है. पैपराजी के कैमरे और इंटरनेट के जासूस इनकी ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री पर पूरा फोकस करके बैठे हैं. मेधा को ड्रॉप करने पहुंचे समय रैना मेधा शंकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें समय रैना अपनी गाड़ी में मेधा को उनके वर्कप्लेस पर ड्रॉप करने आए थे. जैसे ही मेधा कार से बाहर निकलीं, पप्स ने उन्हें घेर लिया. मेधा कैमरे देखकर एकदम शॉक रह गईं और बिना कोई पोज दिए घबराहट में बिल्डिंग के अंदर भाग गईं. उनका ये ‘रंगे हाथों पकड़े जाने’ वाला रिएक्शन देखकर इंटरनेट स्क्वॉड और भी श्योर हो गई है कि यहां पक्का कुछ तो पक रहा है. View on Instagram समय और मेधा की शादी को लेकर उड़ी थी अफवाह कुछ समय पहले Reddit पर एक रूमर फैली थी. जिसमें दावा किया जा रहा था कि समय और मेधा की दिसंबर में शादी फिक्स हो गई है. हालांकि इस गॉसिप को तुरंत शट डाउन कर दिया गया. समय ने इंस्टा स्टोरी पर अपने सिग्नेचर सैवेज स्टाइल में लिखा, “दिसंबर में तो मेरा इंडिया टूर है @medhashankr सॉरी, पोस्टपोन करना पड़ेगा.” मेधा ने भी इस अफवाह को सीधे ‘बेसलेस’ बोलकर खारिज कर दिया. समय रैना और मेधा शंकर, फोटो- इंस्टाग्राम कौन हैं मेधा शंकर? अगर आपको नहीं पता, तो मेधा ने 2023 की ब्लॉकबस्टर ’12th फेल’ में श्रद्धा जोशी का आइकॉनिक रोल प्ले किया था. मूवी में उन्होंने आईपीएस मनोज कुमार शर्मा को उनके स्ट्रगलिंग फेज में हर कदम पर सपोर्ट किया था और पूरे देश का दिल जीत लिया था. इसके बाद वो अविनाश तिवारी के साथ ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ में नजर आईं. समय रैना का सीन क्या है? समय स्टैंड-अप कॉमेडी और डार्क ह्यूमर के असली बॉस (OG) हैं. इनका शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ हमेशा जबरदस्त हाइप में रहता है. मेधा इसके सीजन 2 में ही आई थीं, जहां से इनके रोमांस की बातें शुरू हुईं. फरवरी 2025 में स्टेज पर एक कॉमेडियन से बात करते हुए रणवीर अल्लाहबादिया ने पेरेंट्स को लेकर कुछ ऑफेंसिव कमेंट्स पास कर दिए थे. इस वजह से तन्मय भट, रणवीर और बाकी पैनल पर एफआईआर (FIR) हो गई थी और यूट्यूब से वो सीजन ही हट गया था. एक साल के भारी लीगल ड्रामा और कोर्ट केस के बाद जाकर समय को अपना शो वापस लाने की परमिशन मिली थी. ये भी पढ़ें: क्या चुपके-चुपके शादी की तैयारी में हैं Samay Raina और Medha Shankr? स्विट्जरलैंड वेकेशन के बाद अब सामने आई शादी की पोस्ट The post प्यार किया तो डरना क्या… मेधा शंकर को ड्रॉप करने पहुंचे समय रैना, कैमरे देखते ही मुंह छुपाकर भागीं ’12th Fail’ एक्ट्रेस appeared first on Naya Vichar.

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पटना में पार्षद पति पर फायरिंग का CCTV फुटेज देखिए, बाइक से पहुंचे तीन शूटर, बेसमेंट में घुसकर मारीं पांच गोलियां

Patna Crime News: पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र का चकारम इलाका बुधवार शाम गोलियों की आवाज से दहल उठा. समय था करीब 7.35 बजे. मां सुखिया महल अपार्टमेंट के बेसमेंट में वार्ड 24 की पार्षद ज्ञानवती देवी के पति अनिल कुमार यादव अपने कार्यालय में बैठे थे. उनके साथ कुछ लोग भी मौजूद थे. इसी दौरान एक बाइक पर तीन बदमाश पहुंचे. बाइक से उतरकर दो शूटर बेसमेंट के अंदर चले गए. तीसरा बाहर ही खड़ा रहा. कुछ ही पल बाद अंदर से ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं. अनिल यादव को संभलने का मौका तक नहीं मिला. बदमाशों ने उन पर बेहद करीब से फायरिंग की. गोलियां लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े. फायरिंग के बाद तीनों बदमाश हथियार लहराते हुए वहां से भाग निकले. CCTV में दिखा पूरा घटनाक्रम वारदात के बाद सामने आए CCTV फुटेज ने हमलावरों की तस्वीर सामने ला दी है. फुटेज में एक बाइक पर तीन लोग आते दिखाई दे रहे हैं. बाइक रुकने के बाद दो बदमाश बेसमेंट की तरफ जाते हैं. एक बदमाश बाहर ही रुक जाता है. फुटेज में दो लोगों के हाथ में पिस्टल भी दिखाई दे रही है. पुलिस अब इसी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान में जुटी है. आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि फायरिंग के बाद बदमाश किस रास्ते से भागे और आगे किस दिशा में गए. View on Instagram ‘मैंने शूटरों पर कुर्सी फेंककर मारी’ घटना के वक्त अनिल यादव के निजी गार्ड बृज मोहन पांडेय भी बेसमेंट में मौजूद थे. उन्होंने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी. बृज मोहन ने बताया कि अनिल यादव बेसमेंट में बैठे थे. रमेश और सुधीर भी वहां आकर बैठे थे. इसी दौरान तीन शूटर वहां पहुंचे. दो अंदर घुसे और अचानक गोलियां चलाने लगे. गार्ड के मुताबिक, उस वक्त उनके पास राइफल नहीं थी. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाई और शूटरों पर कुर्सी फेंककर मारी. इसके बाद हमलावर अपार्टमेंट के पास दाईं तरफ भाग निकले. उन्होंने बताया कि दो शूटरों ने चेहरे ढक रखे थे. वहीं, एक बदमाश ने टोपी पहन रखी थी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें फायरिंग के बाद हथियार लहराते भागे बेसमेंट में गोलियां चलने के बाद वहां अफरातफरी मच गई. बदमाशों ने अनिल यादव को निशाना बनाया और फिर हथियार लहराते हुए बाहर निकले. अपार्टमेंट के आसपास का इलाका काफी रिहायशी है. यहां फर्स्ट फ्लोर पर गर्ल्स हॉस्टल भी है. अचानक हुई फायरिंग से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई. पुलिस के मुताबिक, वारदात में करीब 14 राउंड फायरिंग की गई. मौके से आठ खोखे बरामद किए गए हैं. हालांकि, शुरुआती जानकारी में सात खोखे मिलने की बात भी सामने आई थी. पांच गोलियां लगीं, अस्पताल में भर्ती फायरिंग में अनिल कुमार यादव को पांच गोलियां लगी हैं. दो गोली हाथ में लगी. दो पैर में और एक गोली कमर में लगी है. घायल अनिल को सबसे पहले उदयन अस्पताल ले जाया गया. हालत गंभीर होने के बाद उन्हें मेदांता रेफर किया गया. सेंट्रल एसपी ममता कल्याणी ने बताया कि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और इलाज चल रहा है. जमीन विवाद और वर्चस्व का एंगल फायरिंग की वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं है. शुरुआती जांच में जमीन विवाद और आपसी वर्चस्व का एंगल सामने आया है. पुलिस इन दोनों बिंदुओं पर जांच कर रही है. अनिल कुमार यादव पटना नगर निगम के वार्ड 24 के पूर्व पार्षद रह चुके हैं. उनकी पत्नी ज्ञानवती देवी वर्तमान में वार्ड 24 की पार्षद हैं. अस्पताल पहुंचे प्रशांत किशोर और तेजस्वी फायरिंग की समाचार मिलते ही अस्पताल में समर्थकों की भीड़ जुट गई. बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अनिल यादव का हाल जानने अस्पताल पहुंचे. प्रशांत किशोर ने बिहार में अपराध की स्थिति को लेकर प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बाइक से लोग आए, गोली मारी और भाग गए. उन्होंने अनिल यादव को जनसुराज से जुड़ा बताया. Also Read: पांच राज्यों से बिहार के लिए चलेंगी 100 से ज्यादा स्पेशल बसें, जानें किराया और रूट The post पटना में पार्षद पति पर फायरिंग का CCTV फुटेज देखिए, बाइक से पहुंचे तीन शूटर, बेसमेंट में घुसकर मारीं पांच गोलियां appeared first on Naya Vichar.

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रात में बाल खोलकर सोना चाहिए या चोटी बनाकर? जानें बालों के लिए क्या है सही

How to Sleep with Hair: रात को सोते समय बालों को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि उन्हें खुला छोड़कर सोना चाहिए या फिर चोटी बनाकर. कुछ लोगों को खुले बालों में सोना आरामदायक लगता है, तो कुछ बालों को बांधकर सोना पसंद करते हैं. लेकिन बालों की सेहत के लिए सही तरीका क्या है. इसका जवाब आपके बालों की लंबाई, टेक्सचर और उन्हें कितनी आसानी से उलझने की आदत है, इस पर निर्भर करता है.  How to Sleep with Hair: खुले बालों में सोने से क्या होता है? अगर आपके बाल छोटे हैं या आसानी से नहीं उलझते, तो आप उन्हें खुला छोड़कर भी सो सकती हैं. इससे बालों पर किसी तरह का खिंचाव नहीं पड़ता और स्कैल्प पर टाइट हेयरस्टाइल का दबाव भी नहीं रहता.  वहीं लंबे और घने बालों में रातभर करवट बदलने से बाल तकिए से रगड़ खा सकते हैं. इससे बाल आपस में उलझ सकते हैं और सुबह उन्हें सुलझाते समय ज्यादा टूटने की समस्या हो सकती है. इसलिए लंबे बालों को पूरी तरह खुला छोड़कर सोना हर किसी के लिए सुविधाजनक नहीं होता.  चोटी बनाकर सोना क्यों हो सकता है बेहतर? अगर आपके बाल लंबे हैं और रात में बार-बार उलझ जाते हैं, तो सोने से पहले ढीली चोटी बनाना एक आसान तरीका (How to Sleep with Hair) हो सकता है. इससे बाल एक जगह रहते हैं और करवट बदलते समय उनके ज्यादा उलझने की संभावना कम हो सकती है.  ध्यान रखें कि चोटी बहुत ज्यादा टाइट न हो. कसकर बांधी गई चोटी बालों की जड़ों पर खिंचाव डाल सकती है. इससे बालों में तनाव और टूटने की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए सोते समय ढीली चोटी या हल्की ढीली पोनीटेल जैसे विकल्प रखे जा सकते हैं.  PC: AI Generated रबर बैंड भी सोच-समझकर चुनें सोते समय बाल बांधने के लिए बहुत टाइट रबर बैंड का इस्तेमाल न (How to Sleep with Hair) करें. इससे बालों पर लगातार खिंचाव पड़ सकता है और जिस जगह बैंड लगाया जाता है, वहां बाल टूट सकते हैं. बाल बांधने के लिए मुलायम और ढीले हेयर टाई का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे इतना टाइट न बांधें कि सिर में खिंचाव या असहजता महसूस होने लगे.  यह भी पढ़ें: घुटने और कोहनी काले पड़ गए हैं? घर पर ऐसे बनाएं आसान होममेड स्क्रब The post रात में बाल खोलकर सोना चाहिए या चोटी बनाकर? जानें बालों के लिए क्या है सही appeared first on Naya Vichar.

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Ri Name Love Life: ‘ऋ’ नाम वालों का दिल जीतना है तो समझें उनकी पर्सनालिटी का ये अनोखा पैटर्न

Ri Name Love Life: नया विचार डिजिटल की हिंदी नेम एस्ट्रोलॉजी सीरीज में आज चर्चा ‘ऋ’ यानी ‘Ri’ अक्षर से नाम शुरू होने वाले लोगों की होगी. माना जाता है कि ये लोग रिश्तों को लेकर काफी गंभीर रहते हैं और भरोसे को खास महत्व देते हैं. प्यार में ये कैसे होते हैं और पार्टनर से क्या उम्मीद रखते हैं, जानिए इस लेख में.  ‘ऋ’ से नाम शुरू होने वाले लोग पहली मुलाकात में थोड़े शांत और गंभीर नजर आ सकते हैं. वे हर किसी के सामने जल्दी खुलना पसंद नहीं करते. किसी व्यक्ति पर भरोसा बनाने में उन्हें थोड़ा समय लग सकता है. हालांकि, जब सामने वाले पर विश्वास हो जाता है तो वे रिश्ते को दिल से निभाने की कोशिश करते हैं.   प्यार में दिखावे से ज्यादा भरोसा ऋ नाम वालों के लिए प्यार सिर्फ रोमांटिक बातें या महंगे तोहफों तक सीमित नहीं माना जाता.  वे रिश्ते में भरोसा, सम्मान और समझदारी को ज्यादा महत्व दे सकते हैं. पार्टनर उनकी बात सुने और उनकी भावनाओं को समझे, यह उनके लिए काफी मायने रखता है.  दिल जीतने के लिए जल्दबाजी न करें अगर किसी ऋ नाम वाले का दिल जीतना चाहते हैं तो उनके साथ रिश्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ाना बेहतर माना जाता है. बार-बार दबाव बनाना या तुरंत जवाब की उम्मीद करना उन्हें पसंद नहीं आ सकता. सहज बातचीत, ईमानदारी और सम्मान उनके करीब आने में मदद कर सकते हैं.   चैल्डियन न्यूमेरोलॉजी में क्या संकेत मिलते हैं? चैल्डियन न्यूमेरोलॉजी में नाम के अक्षरों को निश्चित संख्यात्मक मान दिए जाते हैं और नाम के कुल योग से व्यक्तित्व व जीवन से जुड़े संकेतों की व्याख्या की जाती है. लेकिन ‘ऋ’ का चैल्डियन मान अलग-अलग आधुनिक तालिकाओं में एक जैसा नहीं मिलता. इसलिए केवल ‘ऋ’ अक्षर के आधार पर किसी एक अंक को निश्चित बताना उचित नहीं होगा. पूरे नाम के अंग्रेजी स्पेलिंग के आधार पर गणना करने पर ज्यादा सटीक संख्या निकाली जा सकती है.  नेम एस्ट्रोलॉजी में नाम का महत्व नेम एस्ट्रोलॉजी की मान्यताओं के अनुसार नाम का पहला अक्षर व्यक्ति के स्वभाव और व्यवहार के कुछ संकेत दे सकता है. ‘ऋ’ से जुड़े नामों के बारे में सामान्य नाम-ज्योतिषीय व्याख्याओं में आत्मसम्मान, सोच-समझकर फैसला लेने और अपनी बात पर टिके रहने जैसे गुण बताए जाते हैं। हालांकि, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता.  रिश्ते में कैसी होती है इनकी सोच? ऋ नाम वाले प्रेम संबंध में पार्टनर से भावनात्मक जुड़ाव चाहते हैं, लेकिन अपनी निजी जगह भी बनाए रखना पसंद कर सकते हैं. अगर उन्हें भरोसा और सम्मान मिले तो वे रिश्ते को लंबे समय तक निभाने की कोशिश कर सकते हैं. वहीं, लगातार शक या जरूरत से ज्यादा रोक-टोक रिश्ते में दूरी पैदा कर सकती है.  ये भी पढ़ें: U Name Love Life: ‘ऊ’ नाम वालों का स्वभाव होता है खास, प्यार में दिल की सुनते हैं या दिमाग की? दिल जीतने का आसान तरीका इनका दिल जीतने के लिए सबसे जरूरी है कि आप उनके साथ ईमानदार रहें. उनकी बात ध्यान से सुनें, फैसलों का सम्मान करें और मुश्किल समय में उनका साथ दें. प्यार में छोटी-छोटी कोशिशें और भरोसा इनके लिए किसी बड़े दिखावे से ज्यादा मायने रख सकते हैं. ‘ऋ’ शब्द से लड़कों के नाम ऋषि – ज्ञानी, मुनि ऋत्विक  – यज्ञ कराने वाला पुरोहित ऋतुराज – ऋतुओं का राजा, वसंत ऋषभ- श्रेष्ठ, उत्कृष्ट ऋजु – सरल, सीधा, निष्कपट ऋदान – उदार, दान देने वाला ऋतेश- सत्य का स्वामी ऋषित- बुद्धिमान, ज्ञानी ऋग्वेद- पवित्र वेदों में से एक ‘ऋ’ शब्द से लड़कियों के नाम ऋचा – वैदिक मंत्र, स्तुति ऋद्धि – समृद्धि, सफलता ऋतु – मौसम, समय का चरण ऋतिका – सत्य और सुंदरता से जुड़ा नाम ऋषिका – विदुषी, ज्ञानी ऋजुता – सरलता, विनम्रता ऋत्विका – धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ा नाम ऋतंभरा – सत्य को धारण करने वाली ऋतवी – प्रकृति और ऋतु से जुड़ा नाम डिस्क्लेमर: दिए गए कंटेंट में अंक ज्योतिष से जुड़ी मान्यताएं हैं. नया विचार इन मान्यताओं और दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है. The post Ri Name Love Life: ‘ऋ’ नाम वालों का दिल जीतना है तो समझें उनकी पर्सनालिटी का ये अनोखा पैटर्न appeared first on Naya Vichar.

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महिला अधिकारी को DGP बनाने के लिए बदला नियम, सुप्रीम कोर्ट में झारखंड सरकार ने रखा पक्ष

रांचीः झारखंड समेत देश के अन्य राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की. इस दौरान झारखंड प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि एक स्त्री अधिकारी को डीजीपी बनने का अवसर देने के लिए नियुक्ति से जुड़े नियम में संशोधन किया गया है. कपिल सिब्बल ने रखा राज्य प्रशासन का पक्ष याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील पूरी होने के बाद झारखंड प्रशासन की ओर से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप झारखंड प्रशासन ने डीजीपी की नियुक्ति को लेकर नियमावली तैयार की है. उन्होंने कहा कि एमिकस क्यूरी की ओर से केवल नियम पांच में किए गए संशोधन पर आपत्ति जताई गई है. ये भी पढ़ें- MS Dhoni की Mercedes का 6 महीने पहले कटा था चालान, जुर्माना सितंबर में जमा तदाशा मिश्रा को डीजीपी रैंक में प्रोन्नति का हवाला राज्य प्रशासन की ओर से नियम में किए गए संशोधन को उचित ठहराते हुए कहा गया कि तदाशा मिश्रा डीजीपी रैंक में प्रोन्नत होने वाली एकमात्र स्त्री आइपीएस अधिकारी हैं. प्रशासन की ओर से उनके नक्सलवाद और अपराध के क्षेत्र में किए गए प्रभावी कार्यों का भी हवाला दिया गया. इसी आधार पर स्त्री अधिकारी को डीजीपी बनने का अवसर देने के लिए नियम में संशोधन किए जाने की बात अदालत के समक्ष रखी गई. 24 सितंबर को अगली सुनवाई वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर राज्य प्रशासन गुरुवार को अपना पक्ष रखेगी. इसके बाद पीठ झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर यानी कि आज होगी. इससे पहले याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील दी गई कि झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति में मनमानी होती रही है. ये भी पढ़ें– JTET Exam 2026: 4.5 लाख अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट, 11 अक्टूबर को नहीं होगी JTET एग्जाम! The post स्त्री अधिकारी को DGP बनाने के लिए बदला नियम, सुप्रीम कोर्ट में झारखंड प्रशासन ने रखा पक्ष appeared first on Naya Vichar.

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