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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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Video : पिता के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, वीडियो कॉल पर हुईं शामिल, भेजे 5,100 रुपये

हरियाणा के सोनीपत में एक ऐसे पिता की दर्दभरी कहानी सामने आई है, जिन्होंने पूरी जिंदगी अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और उनका सहारा बने रहे. लेकिन उनकी मौत के बाद कोई भी बेटी अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सकी. नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई में मौजूद तीनों बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता को अंतिम विदाई दी. मुंबई के रहने वाले और कपड़ा कारोबारी रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता पिछले करीब दो साल से हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. वह अपनी पत्नी मीना के साथ वहां आए थे, लेकिन कुछ समय पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था. इसके बाद वह अकेले ही वृद्धाश्रम में रह रहे थे. वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तुरंत तीनों बेटियों को निधन की सूचना दी लंबी बीमारी के बाद मंगलवार (4 अगस्त) तड़के करीब साढ़े तीन बजे शिवचरण रामरतन गुप्ता का निधन हो गया. उनकी मौत के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी तीनों बेटियों को इसकी सूचना दी और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए संपर्क किया. हालांकि बेटियां नहीं पहुंचीं. अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर शिवचरण रामरतन गुप्ता का अंतिम संस्कार कराया. वृद्धाश्रम संचालक ने कहा- 20 दिन पहले बताया था पिता की तबीयत खराब है इंडिया टुडे से बात करते हुए वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि शिवचरण गुप्ता के पास अपना फोन था, जिससे वह अपनी बेटियों से अक्सर बात करते थे. लेकिन जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो बेटियों के फोन आने भी कम हो गए. आनंद कुमार के मुताबिक, गुप्ता की बिगड़ती हालत की जानकारी करीब 20 दिन पहले ही उनकी बेटियों को दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वे उनसे मिलने नहीं आईं. The post Video : पिता के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, वीडियो कॉल पर हुईं शामिल, भेजे 5,100 रुपये appeared first on Naya Vichar.

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मौत से मेरा पुराना हिसाब है… 19 साल बाद लौटा शिवम पंडित, आवारापन 2 के ट्रेलर ने बढ़ाई एक्साइटमेंट

Awaarapan 2 Trailer: करीब 19 साल बाद शिवम पंडित एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर चुका है. इस बार वह पहले से ज्यादा टूटा हुआ, ज्यादा गुस्से में और अपने अधूरे हिसाब चुकता करने के इरादे के साथ लौटा है. विशेष फिल्म्स ने ‘आवारापन 2’ का दमदार ट्रेलर रिलीज कर दिया है. वीडियो में शबाना आजमी का दमदार डायलॉग सुनने को मिलता है, जिसमें वह कहती हैं, इतनी हसीन शक्ल है.. मौत से मिलने का शौक है तुम्हें. फिर इमरान हाशमी कहते हैं, मौत… उससे मेरा पुराना रिश्ता है, एक कर्ज है, जो मुझे चुकाना है. आवारापन 2 में शिवम की दिखेगी अंधेरी दुनिया, चुकाएंगे पुराना हिसाब आवारापन 2 के ट्रेलर में एक्शन, इमोशन्स और सस्पेंस का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो सीधे शिवम की अंधेरी दुनिया में ले जाता है. बदला, मुक्ति और मुश्किल फैसलों से भरी यह कहानी शुरू से आखिर तक बांधे रखती है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और म्यूजिक भी पुराने ‘आवारापन’ की याद ताजा कर देता है. दिशा पाटनी, जारा के रोल में फिल्म की कहानी में नया इमोशनल एंगल जोड़ती नजर आती हैं. शबाना आजमी भी नफीसा के किरदार में विलेन बनी हुई है. ट्रेलर में कई नए किरदारों की झलक भी देखने को मिलती है, जिनमें पूरन गब्बी (ज़ोरावर), अनिरुद्ध रावल (सिकंदर), सुरेंद्र विक्की (जयदीप), विजयंत कोहली (महमूद) और अतुल कुमार (समर्थ) शामिल हैं. आवारापन 2 के सॉन्ग्स मचा रहे हैं धमाल ट्रेलर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है ‘तेरा मेरा रिश्ता’, जिसे मिथून ने कंपोज किया है और साज भट्ट और सुबोध शर्मा ने अपनी आवाज दी है. आवारापन 2 का म्यूजिक भी काफी दमदार माना जा रहा है. मिथून, जीत गांगुली, अमाल मलिक, अखिल सचदेवा और वासिफ अहमद ने एल्बम को संगीत दिया है, जबकि गीत सईद कादरी, रश्मि विराग, अखिल सचदेवा और सचिन सिंह चंदेल ने लिरिक्स लिखे हैं, फिल्म के गाने ‘वे जुनून’, ‘ये आवारापन’ और ‘तो फिर आओ’ पहले ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा रहा है. आवारापन 2 कब होगी रिलीज मुकेश भट्ट और विशेष फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण विशेष भट्ट ने किया है. फिल्म का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है, जबकि इसकी कहानी बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है. ‘आवारापन 2’ 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी. ये भी पढ़ें: सनी देओल Vs इमरान हाशमी की होगी बॉक्स ऑफिस भिड़ंत, नहीं टलेगी ‘आवारापन 2’ की रिलीज, इस दिन आएगा ट्रेलर The post मौत से मेरा पुराना हिसाब है… 19 साल बाद लौटा शिवम पंडित, आवारापन 2 के ट्रेलर ने बढ़ाई एक्साइटमेंट appeared first on Naya Vichar.

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जिस साड़ी को कभी रानियां पहनती थीं, उसकी दीवानगी आज भी बरकरार है, जानिए चंदेरी सिल्क की सदियों पुरानी विरासत

Chanderi Saree History: मध्य प्रदेश के छोटे-से ऐतिहासिक शहर चंदेरी का नाम लेते ही सबसे पहले जिस चीज का ख्याल आता है, वह है यहां की खूबसूरत चंदेरी सिल्क साड़ी. हल्की बुनावट, महीन कपड़ा और जरी की बारीक कारीगरी इसे दूसरी साड़ियों से अलग पहचान दिलाती है. कभी यह साड़ी राजघरानों और रानियों की शान मानी जाती थी, लेकिन आज इसकी खूबसूरती और शालीनता ने इसे देश ही नहीं, दुनिया भर की स्त्रीओं की पसंद बना दिया है. फिल्म ‘स्त्री’ की वजह से चंदेरी शहर एक बार फिर चर्चा में आया. हालांकि, इस फिल्म का चंदेरी सिल्क साड़ी के इतिहास से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इसने लोगों की दिलचस्पी इस ऐतिहासिक शहर और इसकी समृद्ध हथकरघा परंपरा की ओर जरूर बढ़ाई. आइए जानते हैं कि आखिर चंदेरी सिल्क साड़ी की शुरुआत कैसे हुई और सदियों बाद भी इसकी लोकप्रियता क्यों बरकरार है. चंदेरी सिल्क साड़ी का इतिहास PC: AI Image फैशन के बदलते दौर में भी चंदेरी सिल्क साड़ी का आकर्षण कम नहीं हुआ है. शादी, त्योहार और खास मौकों पर यह आज भी स्त्रीओं की पहली पसंद बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह हल्की होने के बावजूद बेहद रॉयल और एलिगेंट लुक देती है. The post जिस साड़ी को कभी रानियां पहनती थीं, उसकी दीवानगी आज भी बरकरार है, जानिए चंदेरी सिल्क की सदियों पुरानी विरासत appeared first on Naya Vichar.

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क्या रावण था दुनिया का पहला कांवड़िया? जानें कांवड़ यात्रा से जुड़े चौंकाने वाले रहस्य

Kanwar Yatra: सावन (श्रावण) का पवित्र महीना शुरू होते ही सड़कें ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठती हैं. केसरिया वस्त्र धारण किए लाखों कांवड़िए गंगाजल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करने के लिए मीलों पैदल यात्रा करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कांवड़ यात्रा की शुरुआत कब हुई और सबसे पहले कांवड़ यात्रा किसने की थी? हिंदुस्तानीय लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर अक्षत गुप्ता ने इस विषय पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कांवड़ यात्रा की परंपरा से जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा बताई. कौन था दुनिया का पहला कांवड़िया? एक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम को भी पहला कांवड़िया माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, सहस्त्रबाहु का वध करने के बाद उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने उन्हें प्रायश्चित करने और भगवान शिव की आराधना करने का निर्देश दिया. इसके बाद भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर (ब्रजघाट) से पवित्र गंगाजल लेकर उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित पुरा महादेव मंदिर पहुंचे और वहां शिवलिंग का जलाभिषेक किया. मान्यता है कि सावन के महीने में गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा यहीं से प्रारंभ हुई. यह भी पढ़ें: सावन सोम प्रदोष व्रत 2026: जानें शुभ मुहूर्त यह भी पढ़ें: हरियाली अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि The post क्या रावण था दुनिया का पहला कांवड़िया? जानें कांवड़ यात्रा से जुड़े चौंकाने वाले रहस्य appeared first on Naya Vichar.

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20 दिन से किस हाल में जी रहे हैं 400 परिवार.. विकसित नोएडा की यह तस्वीर सोचने पर मजबूर करेगी

UP News: उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-78 स्थित वाल्मीकि बस्ती में पिछले 20 दिनों से बिजली और पानी की आपूर्ति ठप होने से करीब 400 परिवार गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं. तकनीकी खराबी के कारण बस्ती के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. हालात ऐसे हैं कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को खुद पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है. टूटी पाइपलाइन से भरना पड़ रहा पानी बस्ती में पानी की नियमित आपूर्ति बंद होने के कारण स्त्रीएं और पुरुष गंदगी के बीच से गुजर रही टूटी पाइपलाइन से पानी भरने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से यही स्थिति बनी हुई है, जिससे पेयजल के साथ-साथ दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है. तकनीकी खराबी से बढ़ी परेशानी स्थानीय लोगों के अनुसार, तकनीकी खराबी के चलते बस्ती में पिछले 20 दिनों से बिजली और पानी दोनों की आपूर्ति बाधित है. बिजली नहीं होने से लोगों को अन्य आवश्यक कार्यों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. करीब 400 परिवार इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं. स्थायी समाधान की मांग बस्ती के निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से मूलभूत सुविधाएं बाधित रहने से जीवन मुश्किल हो गया है. लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द तकनीकी खराबी दूर कर बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करेगा. Must Read- “चीखने तक का मौका नहीं मिला”, प्रतापगढ़ में 100 साल पुराना मकान ढहा, मासूमों समेत परिवार के 6 लोगों की मौत The post 20 दिन से किस हाल में जी रहे हैं 400 परिवार.. विकसित नोएडा की यह तस्वीर सोचने पर मजबूर करेगी appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO : मंत्री दीपक प्रकाश के MLC बनने पर क्या बोले उपेंद्र कुशवाहा, सुनिए

Mantri Deepak Prakash : बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं. राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें बीजेपी नेता देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर मनोनीत किया है. बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह आज शाम 5 बजे मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी पद की शपथ दिलायेंगे. बता दें कि, पिछले 8 महीने से वह किसी सदन के सदस्य रहे बिना ही मंत्री पद पर बने हुए थे. ऐसे में मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया था. बेटे के एमएलसी बनने पर उपेंद्र कुशवाहा की प्रतिक्रिया बेटे के एमएलसी बनने पर आरएलएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह पहले से ही तय था और जो तय था वही हुआ है. इसके साथ ही हाईकोर्ट में मामले के जाने औ विपक्ष के सवालों पर भी उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी बात रखी है. सुनिए वीडियो में उपेंद्र कुशवाहा क्या कह रहे हैं? The post VIDEO : मंत्री दीपक प्रकाश के MLC बनने पर क्या बोले उपेंद्र कुशवाहा, सुनिए appeared first on Naya Vichar.

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तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार, हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने दोषी करार दिया है. हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को सभी आरोपों से बरी किया गया था. न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की पीठ ने तेजपाल को बलात्कार, यौन उत्पीड़न और स्त्री की गरिमा भंग करने से जुड़ी हिंदुस्तानीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दोषी माना. अदालत अब उन्हें दी जाने वाली सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी. किन धाराओं में दोषी पाए गए तेजपाल? हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को हिंदुस्तानीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं, जिनमें दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और अवैध कारावास शामिल हैं, के तहत आरोप लगाए थे. मामले के प्रमुख बिंदु निचली अदालत का बरी करने वाला फैसला रद्द तरुण तेजपाल को कई गंभीर धाराओं में दोषी करार सजा की अवधि पर अलग से होगी सुनवाई तेजपाल ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही गोवा प्रशासन ने वर्ष 2021 में मिली रिहाई को चुनौती दी थी क्या है पूरा मामला? यह मामला तेजपाल की एक पूर्व सहयोगी की शिकायत से जुड़ा है. स्त्री ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित तहलका के थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था. इस मामले में तेजपाल को नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी. गोवा की सत्र अदालत ने मई 2021 में सबूतों को पर्याप्त नहीं मानते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था. गोवा प्रशासन ने दी थी फैसले को चुनौती निचली अदालत के फैसले के बाद गोवा प्रशासन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. प्रशासन की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सत्र अदालत ने शिकायतकर्ता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर मामले का आकलन किया. उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के बाद हर पीड़िता की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं हो सकती. किसी व्यक्ति का व्यवहार उसकी शिक्षा, स्वभाव, सामाजिक स्थिति और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है. छोटे विरोधाभासों को ज्यादा महत्व देने का आरोप गोवा प्रशासन ने कहा था कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मौजूद छोटी-मोटी असमानताओं को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया. अभियोजन पक्ष का तर्क था कि अदालत को यह देखना चाहिए था कि घटना से जुड़े मुख्य आरोपों में शिकायतकर्ता लगातार एक ही बात कहती रही या नहीं. प्रशासन ने शिकायतकर्ता के संदेशों, ईमेल और दूसरे रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि उसके आरोप शुरू से एक जैसे थे. बचाव पक्ष ने क्या कहा था? तेजपाल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने दावा किया था कि मामला झूठा और नेतृत्वक कारणों से बनाया गया. उन्होंने शिकायतकर्ता के ईमेल, व्हाट्सऐप संदेशों, व्यवहार और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए थे. बचाव पक्ष ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को भी अपराध की स्वीकारोक्ति मानने का विरोध किया था. वकील का कहना था कि यह ईमेल संस्थागत दबाव में लिखा गया था और इसे अकेले अपराध कबूल करने वाला बयान नहीं माना जा सकता. हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने छह अगस्त को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत की रिहाई को रद्द कर तेजपाल को दोषी करार दिया. फैसले के बाद तेजपाल ने कहा कि वह इसके खिलाफ अपील कर सकते हैं. उनके वकील ने सजा तय करते समय अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध करने की बात कही है. Also Read: प्राथमिक शिक्षकों के तबादले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगायी रोक, जानें नयी एसओपी पर कब होगी सुनवाई The post तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार, हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा appeared first on Naya Vichar.

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इंस्टाग्राम अकाउंट पर रोक का दावा, केजरीवाल बोले- PM के दबाव में न झुके Meta

अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार (6 अगस्त) को दावा किया कि हिंदुस्तान में उनके इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच (रिस्ट्रिक्ट) कर दी गई है. उन्होंने कहा कि Meta ने बिना कोई वजह बताए यह कदम उठाया है. केजरीवाल का आरोप है कि उन्होंने कई बार कंपनी से इसका कारण पूछा, लेकिन Meta की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने Meta से सवाल पूछा कि आखिर उनके इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच क्यों सीमित की गई. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि Meta को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे “झुकना” नहीं चाहिए. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केंद्र प्रशासन के दबाव में की गई हो सकती है. ये भी पढ़ें: AAP का पीएम मोदी पर वार,अरविंद केजरीवाल बोल – ट्रंप के दबाव में नहीं देशहित में फैसला लीजिए स्क्रीनशॉट शेयर किया केजरीवाल ने हालांकि, समाचार लिखे जाने तक हिंदुस्तान में अरविंद केजरीवाल के इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट सामान्य रूप से देखे जा सकते थे. केजरीवाल ने अपने अकाउंट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें लिखा था कि उनका अकाउंट “कुछ स्थानों पर उपलब्ध नहीं है” (Unavailable in some locations). इससे संकेत मिलता है कि यह प्रतिबंध हर जगह नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित हो सकता है. “मेरा अकाउंट आखिर क्यों सीमित (रिस्ट्रिक्ट) किया गया? हिंदुस्तान में आपके ऑफिस से मौखिक रूप से पता चला कि मेरा इंस्टाग्राम अकाउंट हिंदुस्तान में प्रतिबंधित कर दिया गया है और यहां उपलब्ध नहीं है. इसकी वजह क्या है?– अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि Meta के हिंदुस्तान ऑफिस में भी कोई यह नहीं बता सका कि उनके अकाउंट पर यह रोक क्यों लगाई गई और इसे कैसे हटाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कंपनी को कई ईमेल भेजे गए, लेकिन हर बार सिर्फ औपचारिक जवाब मिला. उनकी शिकायत का कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया. केजरीवाल ने इसे Meta की “बहुत खराब सर्विस” बताया. The post इंस्टाग्राम अकाउंट पर रोक का दावा, केजरीवाल बोले- PM के दबाव में न झुके Meta appeared first on Naya Vichar.

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Parliament LIVE : 3 मिनट में ही स्थगित हुई लोकसभा, अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष का हंगामा

Parliament LIVE : संसद के मानसून सत्र में हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार (6 अगस्त) को भी राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने सदन में जोरदार विरोध किया. संसद के हर अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ. The post Parliament LIVE : 3 मिनट में ही स्थगित हुई लोकसभा, अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष का हंगामा appeared first on Naya Vichar.

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छात्र राजनीति से बसपा के इकलौते विधायक तक… ऐसा रहा उमाशंकर सिंह का सियासी सफर

UP News: उत्तर प्रदेश की नेतृत्व में अपनी सादगी, संघर्ष और जनसेवा के दम पर अलग पहचान बनाने वाले रसड़ा से तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनके निधन के साथ एक ऐसे जननेता का नेतृत्वक सफर थम गया, जिसने छात्र नेतृत्व से शुरुआत कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सबसे मजबूत चेहरों में अपनी जगह बनाई. 2022 के विधानसभा चुनाव में जब बसपा पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी, तब उमाशंकर सिंह ही पार्टी के इकलौते विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे और विपक्ष की मुखर आवाज बने. छात्र नेतृत्व से मिली सियासत की पहली पहचान बलिया जिले के खनवर गांव में जन्मे उमाशंकर सिंह ने नेतृत्व की पहली सीढ़ी छात्र जीवन में चढ़ी. सतीश चंद्र कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में जीत ने उन्हें क्षेत्र की नेतृत्व में पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने सामाजिक सरोकारों को अपनी ताकत बनाया और धीरे-धीरे क्षेत्र के प्रभावशाली जननेता के रूप में उभरते गए. तीन बार लगातार जीता जनता का भरोसा वर्ष 2012 में उन्होंने पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा का सफर शुरू किया. इसके बाद 2017 और 2022 में भी लगातार जीत हासिल कर हैट्रिक बनाई. तीन चुनावों में लगातार मिली जीत ने साबित किया कि रसड़ा की जनता का भरोसा उनके साथ मजबूती से जुड़ा रहा. 2022 में बसपा की अकेली उम्मीद बने 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और पार्टी पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी. ऐसे समय में उमाशंकर सिंह ही बसपा के इकलौते विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे. उन्होंने सदन में क्षेत्रीय समस्याओं, किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया और पार्टी की आवाज बने रहे. गरीबों के मसीहा के रूप में बनाई अलग पहचान उमाशंकर सिंह को उनके समर्थक सिर्फ विधायक नहीं, बल्कि गरीबों का मसीहा मानते थे. जरूरतमंदों की मदद, सामूहिक विवाह, शिक्षा और सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें जनता के बीच खास पहचान दिलाई. उनके दरवाजे पर पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था, यही वजह थी कि वे नेतृत्वक सीमाओं से ऊपर उठकर भी सम्मान पाते रहे. बीमारी से लड़ते रहे, जनसेवा नहीं छोड़ी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों से दूरी नहीं बनाई. स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के बाद भी क्षेत्र के लोगों से उनका संपर्क बना रहा. यही समर्पण उन्हें आम नेताओं से अलग पहचान दिलाता है. एक ऐसा जननेता, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस होगी उमाशंकर सिंह का नेतृत्वक जीवन इस बात का उदाहरण है कि जनता का भरोसा केवल चुनावी वादों से नहीं, बल्कि लगातार जनसेवा और जमीनी जुड़ाव से जीता जाता है. छात्र नेतृत्व से शुरू हुआ उनका सफर तीन बार विधायक बनने तक पहुंचा और उन्हें पूर्वांचल की नेतृत्व का एक मजबूत चेहरा बना गया. उनके निधन के बाद भले ही एक जननेता का सफर थम गया हो, लेकिन जनसेवा और संघर्ष की उनकी विरासत लंबे समय तक लोगों के बीच याद की जाती रहेगी. यह भी पढ़ें: बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह नहीं रहे, उत्तर प्रदेश की नेतृत्व में शोक की लहर The post छात्र नेतृत्व से बसपा के इकलौते विधायक तक… ऐसा रहा उमाशंकर सिंह का सियासी सफर appeared first on Naya Vichar.

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