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Author name: Vinod Jha

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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर हमला- मेरी सारी शक्तियां छीन ली, मालदा कांड राष्ट्रपति शासन की साजिश

President Rule Conspiracy in Bengal: विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान तेज हो गया है. मुर्शिदाबाद के सागरदीघी में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग (ECI) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मालदा में जजों (न्यायिक अधिकारियों) को बंधक बनाये जाने की घटना के लिए सीधे तौर पर चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया बंगाल में कानून-व्यवस्था बनाये रखने में पूरी तरह विफल रहा है. ऐसा चुनाव आयोग पहले कभी नहीं देखा : ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने भारी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव की घोषणा के बाद से राज्य का प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से इलेक्शन कमीशन के नियंत्रण में है. उन्होंने कहा- मेरी सारी शक्तियां छीन ली गयीं हैं. मैंने अपने नेतृत्वक जीवन में ऐसा निर्वाचन आयोग पहले कभी नहीं देखा, जो अधिकारियों की सुरक्षा तक नहीं कर पा रहा है. मैं मालदा की घटना की निंदा करती हूं, लेकिन इसके लिए आयोग ही दोषी है. राष्ट्रपति शासन लगाने का ब्लूप्रिंट : ममता बनर्जी बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने आशंका जतायी कि मालदा जैसी घटनाओं के पीछे भाजपा का बड़ा ‘गेम प्लान’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) जान-बूझकर राज्य में ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रही है, जिससे विधानसभा चुनाव रद्द कराये जा सकें और बंगाल में राष्ट्रपति शासन थोपा जा सके. ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को आगाह किया कि वे किसी भी उकसावे में न आयें और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करें. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें हैदराबाद वाली पार्टी पर भी साधा निशाना रैली में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बिना नाम लिये असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM पर भी प्रहार किया. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग भाजपा से पैसे लेकर हैदराबाद से आये हैं, ताकि राज्य में मुस्लिम वोटों का बंटवारा किया जा सके और भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके. उन्होंने जनता से ‘वोट कटवा’ ताकतों से सावधान रहने की अपील की. इसे भी पढ़ें : 50 साल, 3 दुश्मन और शून्य पर सिमटा ‘हाथ’, पढ़ें बंगाल में कांग्रेस के वनवास की पूरी कहानी वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने पर जतायी चिंता ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिलों में जान-बूझकर वोटर लिस्ट से नाम हटाये जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में भी हजारों नाम काटे गये हैं. उन्होंने इसे जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया. इसे भी पढ़ें चुनावी शोर के बीच ‘काले खजाने’ का स्पोर्ट्स! बंगाल में 274 करोड़ का माल जब्त, शराब, ड्रग्स और फ्री गिफ्ट्स की बाढ़ ममता राज में बंगाल में कुपोषण काल, कोलकाता में बढ़ी चाइल्ड वेस्टिंग, 5000 करोड़ का हिसाब नहीं : भाजपा बंगाल में ओवैसी की दहाड़- ममता दीदी को लगेगा करारा झटका, मुसलमानों को वोट बैंक समझा, इंसान नहीं ममता बनर्जी ने TMC उम्मीदवारों को किया अलर्ट, कहा- नामांकन रद्द करने की रची जा रही साजिश The post ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर हमला- मेरी सारी शक्तियां छीन ली, मालदा कांड राष्ट्रपति शासन की साजिश appeared first on Naya Vichar.

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युवराज सिंह ने MS Dhoni और कपिल पाजी को कहा सॉरी, पिता योगराज की टिप्पणियों पर शर्मिंदा

MS Dhoni: हिंदुस्तान के दो बार के विश्व कप विजेता युवराज सिंह ने अपने पिता की टिप्पणियों के लिए देश के वनडे वर्ल्ड कप विजेता कप्तानों, कपिल देव और एमएस धोनी से माफी मांगी है. युवराज के पिता योगराज सिंह वर्षों से धोनी को निशाना बनाते रहे हैं और उन पर अपने बेटे को हिंदुस्तानीय टीम से बाहर करने का आरोप लगाते रहे हैं. धोनी पर योगराज की टिप्पणियां एक ही बात को बार-बार दोहराने जैसी हैं, बस अलग-अलग तरीकों और टिप्पणियों में. युवराज ज्यादातर ऐसे विवादास्पद बयानों से दूर रहे हैं और अपने पिता की बातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं. जल्द जारी होगा युवराज सिंह का पॉडकास्ट अब पूर्व हिंदुस्तानीय ऑलराउंडर ने आखिरकार इस मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वह कपिल देव और अपने पूर्व कप्तान और साथी खिलाड़ी धोनी से वर्षों से उन्हें निशाना बनाने के लिए माफी मांगना चाहते हैं. स्पोर्ट्स तक द्वारा जारी एक टीजर वीडियो में युवराज ने कहा, ‘मैं कपिल देव और एमएस धोनी से माफी मांगना चाहता हूं.’ जल्द ही रिलीज होने वाला यह एपिसोड लंबे समय बाद युवराज का पहला पॉडकास्ट होगा, जिसमें वे विराट कोहली, रोहित शर्मा, संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ऋषभ पंत और युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी सहित क्रिकेट से जुड़े कई विषयों पर चर्चा करेंगे. दो मिनट के टीजर वीडियो में युवराज को इस सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए दिखाया गया है कि क्या उनके पिता के बेबाक शब्द और स्वभाव उन्हें आहत करते हैं, जिस पर वे कहते हैं, ‘मैंने पापा से कहा है कि यह ठीक नहीं है.’ संभवतः वे योगराज की उन बेतुकी टिप्पणियों का जिक्र कर रहे हैं जो वे हर बात पर करते हैं. Vikrant Gupta: Does it ever hurt you when you hear your father’s interviews? Yuvraj Singh: Yes and I have told my dad that’s not right and I would like to apologise to Kapil Dev and MS Dhoni. How can someone hate Yuvi paa? Yes, his father talks out of line sometimes… but Yuvi… pic.twitter.com/LfXboBbmaX — Rohan💫 (@rohann__45) April 2, 2026 योगराज ने कपिल के बारे में क्या कहा योगराज की धोनी के प्रति नापसंदगी काफी समय से जगजाहिर है, लेकिन पिछले साल अचानक तब वे सुर्खियों में आए जब उन्होंने कपिल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पूर्व हिंदुस्तानीय कप्तान को धमकी दी थी. योगराज को आज भी कपिल से इस बात का मलाल है कि 1980 के दशक की शुरुआत में उन्हें हिंदुस्तानीय टीम से बाहर कर दिया गया था. योगराज ने कपिल पर अपना करियर बर्बाद करने का आरोप लगाया और यहां तक ​​​​कि यह भी खुलासा किया कि एक बार वह उनसे भिड़ने के लिए पिस्तौल लेकर कपिल के घर पहुंच गए थे. कपिल शांत रहे और उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए पूछा, ‘योगराज सिंह कौन है?’, लेकिन सनसनीखेज आरोप अभी भी बरकरार हैं. योगराज ने अभी तक अपने बयानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. योगराज ने धोनी पर कई बार साधा निशाना धोनी के प्रति भी योगराज की शत्रुता जगजाहिर है. हालांकि हाल ही में एक अप्रत्याशित मोड़ आया, जब योगराज ने कहा कि वह चाहते हैं कि धोनी जितना संभव हो उतना स्पोर्ट्सते रहें और वह पूर्व हिंदुस्तानीय कप्तान की प्रशंसा करते हैं. उनके इस बदले हुए रुख का कारण संभवतः यह है कि हाल ही में बीसीसीआई के पूर्व चयन समिति के अध्यक्ष संदीप पाटिल ने स्पष्ट किया कि युवराज को हिंदुस्तानीय टीम से बाहर करने का निर्णय धोनी की मांग पर नहीं लिया गया था, बल्कि इसलिए लिया गया था क्योंकि चयनकर्ताओं को लगा कि अब उनमें वे गुण नहीं रह गए हैं जिन्होंने युवराज सिंह को विश्व क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाया था. दरअसल, युवराज ने एक बार खुलासा किया था कि धोनी ने ही उन्हें 2017 में उनकी भूमिका के बारे में स्पष्टता दी थी, जब उन्होंने हिंदुस्तानीय टीम में अपनी आखिरी वापसी की थी. उन्हें यह बताते हुए कि टीम प्रबंधन उन्हें अपनी भविष्य की योजनाओं के हिस्से के रूप में नहीं देख रहा था. इस बात ने युवराज के लिए 2019 में संन्यास की घोषणा करने का निर्णय आसान बना दिया. ये भी पढ़ें… पंत और संजीव गोयनका का वीडियो वायरल, क्या लखनऊ सुपर जायंट्‌स में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा? मोहम्मद शमी ने IPL में रचा इतिहास, पहली गेंद पर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने The post युवराज सिंह ने MS Dhoni और कपिल पाजी को कहा सॉरी, पिता योगराज की टिप्पणियों पर शर्मिंदा appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

समस्तीपुर मंडल के इंजीनियरिंग विभाग की वर्ष 2025-26 की उपलब्धियाँ

सुरक्षा सुदृढ़ीकरण के तहत राधोपुर यार्ड तथा कपरपूरा यार्ड पर रोड ओवर ब्रिज (ROB) एवं सहरसा यार्ड एवं लहेरियासराय यार्ड में लाइट ROB का निर्माण किया गया नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर: समस्तीपुर मंडल ने वर्ष 2025-26 में रेल संरक्षा, आधारभूत संरचना विकास, परिचालन दक्षता एवं यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। “समस्तीपुर मंडल की यह उपलब्धि सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। मंडल का मुख्य लक्ष्य सुरक्षित, सुगम एवं समयबद्ध रेल परिचालन सुनिश्चित करना है, जिसके लिए मंडल निरंतर कार्यरत है।” वर्ष 2025-26 में स्क्रैप निपटान के क्षेत्र में मंडल ने 9020 मीट्रिक टन की ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इसी प्रकार, इंजीनियरिंग विभाग द्वारा पूर्ण ट्रैक नवीनीकरण (P+S) के अंतर्गत 85.22 किलोमीटर कार्य पूरा किया गया। ट्रैक की गुणवत्ता एवं संरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग में 227.76 किलोमीटर कार्य संपन्न किया गया, जबकि टर्नआउट्स के नवीनीकरण (TBTR) (Through Bridge Timber Renewal) में 1998 इकाइयों का कार्य कर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। इंजीनियरिंग विभाग के नेतृत्व में संरक्षा उन्नयन के विभिन्न लक्ष्यों को भी पार किया गया। थिक वेब स्विच की स्थापना में 15 के लक्ष्य के विरुद्ध 29 कार्य पूर्ण किए गए। प्लेन ट्रैक टैम्पिंग में 1910 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 2116.73 किलोमीटर कार्य किया गया। थ्रू फिटिंग रिन्यूअल में 100 किलोमीटर के लक्ष्य के विरुद्ध 125.121 किलोमीटर तथा लेवल क्रॉसिंग बंद करने में 15 के लक्ष्य के विरुद्ध 17 कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। परिचालन को और अधिक सुगम एवं आधुनिक बनाने हेतु समस्तीपुर में विश्वस्तरीय, अत्याधुनिक, केंद्रीकृत वातानुकूलित ट्रैफिक कंट्रोल भवन का निर्माण किया गया, जो रेल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्मिक विभाग एवं इंजीनियरिंग विभाग के समन्वय से कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए 10 शैय्या वाली स्त्री बैरक, मंडल का पहला स्टाफ रेस्ट हाउस तथा 50,000 गैलन क्षमता का RCC जल टैंक का निर्माण कराया गया। इसके अतिरिक्त रेलवे कॉलोनी में आवासीय क्वार्टर, ट्रांजिट हाउस एवं सड़कों का व्यापक सुधार कार्य भी किया गया। सुरक्षा सुदृढ़ीकरण के तहत राधोपुर यार्ड तथा कपरपूरा यार्ड पर रोड ओवर ब्रिज (ROB) एवं सहरसा यार्ड एवं लहेरियासराय यार्ड में लाइट ROB का निर्माण किया गया। साथ ही, जुब्बासह्नी एवं परमजीवर ताराजिवर के मध्य लेवल क्रॉसिंग को बंद कर LHS (Limited Height Subway) का निर्माण किया गया, जिससे रेल एवं सड़क यातायात दोनों की सुरक्षा में वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य एवं यात्री सुविधाओं में सुधार हेतु मंडल अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर एवं स्त्री वार्ड का नवीनीकरण किया गया। इसके अतिरिक्त मरेप्र भवन, वीआईपी लाउंज, स्टाफ कैंटीन, सामुदायिक भवन, लालित उद्यान एवं अन्य परिसरों का सौंदर्यीकरण एवं उन्नयन किया गया। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मंडल ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए समस्तीपुर में जल पुनर्चक्रण संयंत्र (Water Recycling Plant) का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया है। मंडल रेल प्रबंधक श्री ज्योति प्रकाश मिश्र ने विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की। समस्तीपुर मंडल के इंजीनियरिंग विभाग की ये उपलब्धियाँ न केवल रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाती हैं, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

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कौन है भीम राम, जिसने भगताइन के कहने पर विष्णुगढ़ की बच्ची का सिर कुचला

Hazaribagh Murder Case: भीम राम एक नाम है. एक असाधारण आदमी का नाम है. यह नाम उसी आदमी का है, जिसने हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंभा गांव में 12 साल की मासूम की हत्या का मुख्य आरोपी है. यही वह आदमी है, जिसने तथाकथित तंत्र-मंत्र के चक्कर में भगताइन के कहने पर बच्ची के सिर पर पत्थर मारा था. भीम राम ने पहले बच्ची का गला दबाया और छटपटाने पर उसकी मां शांति देवी ने उसका पैर पकड़ा. बच्ची जब अचेत हो गई, तब इसी भीम राम ने बच्ची के सिर पर पत्थर मारकर सिर से खून निकाला था. उसी खून से भगताइन ने जमीन को लीपा था. भीम राम का चेहरा कुछ, हकीकत कुछ और भीम राम का नाम पहले एक आम व्यक्ति की तरह सामने आया था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, उसकी असली सच्चाई सामने आने लगी. यही वह व्यक्ति है जिसने तंत्र-मंत्र के नाम पर एक मासूम की हत्या करने में मुख्य भूमिका निभाई. विडंबना यह है कि गिरफ्तारी से पहले भीम राम कई इंटरव्यू में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता नजर आया था. उसने प्रशासन को सलाह देते हुए कहा था कि अपराधियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए और स्त्रीओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. लेकिन जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो उसका यह दोहरा चेहरा उजागर हो गया. अब उसका वही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसकी “नैतिकता” की बातें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं. भीम राम ने की थी फांसी की मांग भीम राम ने कई इंटरव्यू में प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा था, ‘अपराधियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो. झारखंड में अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं. मैं हेमंत सोरेन प्रशासन से यही कहना चाहूंगा कि यहां की बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं है. इस घटना का जो भी आरोपी है, उसे फांसी के फंदे पर चढ़ाना चाहिए.’ पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद अब उसके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और उसकी एक्टिंग खूब चर्चा हो रही है. पुलिस और जांच एजेंसियों का कर था गुमराह कुछ समाचारिया लोकल यूट्यूब चैनलों पर कहा जा रहा है कि भीम राम का बच्ची की मां रेशमी देवी के साथ पिछले 10 सालों से अवैध संबंध था. भीम राम कई तरीकों से पुलिस और झारखंड के नेताओं को गुमराह कर रहा था. हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता में भी इस बात का जिक्र किया है कि भीम राम इस घटना को कई तरह की दिशा देने की कोशिश की. बार-बार वह पुलिस को गुमराह कर रहा था. जांच एजेंसियों को भी गुमराह करने का प्रयास करता रहा. अंधविश्वास का जाल और भगताइन का बहकावा इस पूरे मामले की जड़ में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की कुप्रथा है. गांव की एक कथित भगताइन शांति देवी ने इस हत्या की साजिश रची. उसने मृतका की मां रेशमी देवी को यह यकीन दिलाया कि उसके बेटे की परेशानी दूर करने के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी. रेशमी देवी पिछले एक साल से अपने बेटे की समस्याओं को लेकर शांति देवी के पास जा रही थी. भगताइन ने पहले भी उसके घर पर तंत्र-मंत्र करने का दावा किया था, जिससे स्त्री का विश्वास और गहरा हो गया. धीरे-धीरे यह विश्वास एक खतरनाक साजिश में बदल गया. घटना की रात कैसे रची गई खौफनाक साजिश 24 मार्च की रात रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान बच्ची लापता हो गई. उसी रात करीब आठ बजे रेशमी देवी अपनी छोटी बेटी को लेकर शांति देवी के घर पहुंची. भगताइन ने बताया कि रात नौ बजे के बाद “देवास” आएगा और वही बलि का सही समय होगा. इसके बाद भगताइन ने रेशमी देवी से कहा कि वह किसी पुरुष को साथ लाए, ताकि बलि के समय मदद मिल सके. इस पर रेशमी देवी गांव के ही भीम राम को साथ लेकर आई. तीनों ने मिलकर इस घिनौनी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की. इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य भगताइन शांति देवी ने अपने घर के पास स्थित मनसा मंदिर में तंत्र-मंत्र शुरू किया. इसके बाद बच्ची को बांसबाड़ी ले जाया गया, जहां कथित तौर पर “भूत बांधने” की बात कही गई. वहां बच्ची को जमीन पर सुलाया गया. भगताइन ने बांस की छड़ी घुमाते हुए मंत्र पढ़े और कहा कि “देवास आ गया है” और उसे कुंवारी लड़की का खून चाहिए. इसके बाद भीम राम ने बच्ची का गला घोंटना शुरू किया. जब बच्ची छटपटाने लगी, तो उसकी मां रेशमी देवी ने खुद उसके पैर पकड़ लिए. जब बच्ची अचेत हो गई, तब भीम राम ने उसके सिर पर पत्थर से वार किया, जिससे उसका सिर फट गया और खून बहने लगा. इस खून का इस्तेमाल भगताइन ने जमीन पर लिपाई-पुताई और पूजा के लिए किया. अपराधियों तक कैसे पहुंची पुलिस 25 मार्च की सुबह मिडिल स्कूल के पीछे मैदान से बच्ची का शव बरामद हुआ. परिजनों के बयान के आधार पर अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. प्रशिक्षु आईपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में बनी इस टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की. जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिससे पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ. भीम राम की चालबाजी और पुलिस को किया गुमराह हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता में बताया कि भीम राम लगातार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था. वह घटना को अलग-अलग दिशा देने की कोशिश करता रहा, ताकि जांच भटक जाए. भीम राम का रेशमी देवी के साथ पिछले करीब 10 वर्षों से अवैध संबंध भी था. हालांकि, पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है. यह साफ है कि भीम राम ने न केवल इस अपराध में भाग लिया, बल्कि पूरे सिस्टम को भ्रमित करने की भी कोशिश की. इसे भी पढ़ें: विष्णुगढ़ दरिंदगी मामले में हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, डीजीपी और एसपी को नोटिस जारी सजा दिलाने की होगी कोशिश: पुलिस एसआईटी ने तीनों आरोपी भीम राम, रेशमी देवी और शांति देवी को गिरफ्तार कर

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ट्रंप की भतीजी ने खोली परिवार की पोल, सुप्रीम कोर्ट में कानून की सुनवाई के लिए खुद पहुंचे थे US प्रेसिडेंट

Trump Supreme Court: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मौखिक बहस के दौरान उपस्थित हुए. ऐसा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए. अदालत ट्रंप के उस अहम मामले की सुनवाई कर रही है, जो जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को खत्म करने से जुड़ा है. कोर्ट इस कानून की एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की वैधता (लीगालिटी) पर सुनवाई कर रहा है.   यह राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला आदेश था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि अमेरिका में अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वीजा पर रह रहे माता-पिता के बच्चों को अमेरिकी नागरिक नहीं माना जाएगा. बर्थराइट सिटिजनशिप खत्म करने वाला यह आदेश 20 जनवरी 2025 को हस्ताक्षरित किया गया था. यह आदेश ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की इमिग्रेशन नीति का एक प्रमुख हिस्सा है, लेकिन इसे लगातार कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.  सुप्रीम कोर्ट में  जज यह सुनवाई कर रहे हैं कि क्या उनका यह निर्देश संविधान का उल्लंघन करता है! ट्रंप इस सुनवाई के दौरान पब्लिक गैलरी में बैठे थे. इस मामले के केंद्र में 14वें संशोधन की सिटिजनशिप क्लॉज है. यह कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर, पारंपरिक रूप से अमेरिका में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को नागरिकता की गारंटी देता है. 14वां संशोधन 1868 में लागू किया गया था. यह मूल रूप से पूर्व दासों को नागरिकता की गारंटी देने के लिए बनाया गया था. तब से यह अमेरिकी संवैधानिक कानून का हिस्सा है. निचली अदालतों ने पहले ही ट्रंप के आदेश को रोक दिया है. उन्होंने इसे संविधान और संघीय कानून दोनों के खिलाफ बताया. इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने इस पर आगे बढ़ते रहने का फैसला किया है, यह कहते हुए कि नागरिकता माता-पिता की कानूनी स्थिति और अमेरिका के प्रति ‘प्राथमिक निष्ठा’ (प्राइमरी एलीजिएंस) पर निर्भर होनी चाहिए. अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर जून तक बहस हो रही और जून के अंत तक इस मामले पर वह अपना फैसला सुनाएगा. खुद ट्रंप के पिता इसी कानून की वजह से अमेरिकी नागरिक बने हालांकि, ट्रंप भले ही इस कानून के जरिए लोगों की नागरिकता छीनने वाला कानून पास कर चुके हैं. लेकिन कभी ट्रंप के पिता भी इसी तरह अमेरिका के नागिरक बने थे. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भतीजी मैरी ट्रंप ने कहा है कि उनके दादा (डोनाल्ड ट्रंप के पिता) एक एंकर बेबी थे. उन्होंने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता के खिलाफ सबसे बड़ा उदाहरण खुद राष्ट्रपति ट्रंप हैं.  आगे चर्चा किए गए नामों से आप कन्फ्यूज न हों, इसलिए हम बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के पिता का नाम फ्रेडरिक क्राइस्ट ट्रंप (1905-1999) था, जबकि उनके दादा का नाम फ्रेडरिक ट्रंप (1869-1918). यानी दोनों का नाम एक ही था, बस मिडिल नेम में क्राइस्ट का फर्क है.  मैरी ट्रंप राष्ट्रपति की मुखर आलोचक हैं. मैरी ने डोनाल्ड ट्रंप के पिता फ्रेडरिक क्राइस्ट ट्रंप का जिक्र किया. फ्रेडरिक ट्रंप का जन्म न्यूयॉर्क सिटी में जर्मन इमिग्रेंट माता-पिता के घर हुआ था. डोनाल्ड ट्रंप के दादा-दादी दोनों जर्मनी से आए थे.  फ्रेडरिक ट्रंप 1885 में 16 साल की उम्र में अमेरिका आए थे और 1892 में अमेरिकी नागरिक बने. यानी ट्रंप के पिता के 1905 में जन्म से काफी पहले. राष्ट्रपति ट्रंप के दादा-दादी ने 1902 में जर्मनी में शादी की थी, लेकिन रिकॉर्ड्स के अनुसार उन्हें वहां रहने की अनुमति नहीं मिली, माना जाता है कि उन्होंने पहले जर्मनी की अनिवार्य सैन्य सेवा से बचने की कोशिश की थी. इसके बाद वे 1905 में न्यूयॉर्क लौट आए और तीन महीने बाद वहीं ट्रंप के पिता का जन्म हुआ. My grandfather was an anchor baby. It turns out the best case against birthright citizenship is Donald. — Mary L Trump (@MaryLTrump) April 1, 2026 ‘एंकर बेबी’ कौन होता है? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एंकर बेबी’ ऐसे शिशु को कहा जाता है जिसका जन्म गैर-नागरिक माता-पिता से हुआ हो. हिंदुस्तानीय मूल के रिपबल्किन नेता विवेक रामास्वामी को भी अक्सर एंकर बेबी कहा जाता है, लेकिन इस शब्द का कोई आधिकारिक दर्जा नहीं है और यह केवल नेतृत्वक संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है. ये भी पढ़ें:- अमेरिका के एक और स्टेट ने दीपावली उत्सव को दी मान्यता, यहां रहते हैं 9000 हिंदू केस में क्या सुनवाई हुई? ट्रंप प्रशासन की ओर से अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल डी जॉन सॉर ने दलील दी. उन्होंने कहा कि “बिना किसी प्रतिबंध के जन्मसिद्ध नागरिकता” वैश्विक मानकों से मेल नहीं खाती और यह अवैध इमिग्रेशन के लिए आकर्षण का कारण बनती है. उन्होंने अदालत से कहा, “यह अमेरिकी नागरिकता जैसे अनमोल और गहरे महत्व वाले अधिकार को कमतर करता है.” हालांकि, कई जजों ने इस तर्क पर सवाल उठाए. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने ‘उसके क्षेत्राधिकार के अधीन’ वाक्यांश की प्रशासन की व्याख्या पर प्रश्न उठाते हुए इसे अजीब बताया.  उन्होंने कहा कि इसे ऐतिहासिक परंपराओं के साथ जोड़ना मुश्किल है.  ट्रंप के इस कानून के लागू होने पर क्या होगा? इस मामले का फैसला व्यापक असर डाल सकता है. अनुमान है कि अगर अदालत प्रशासन के पक्ष में फैसला देती है, तो हर साल करीब 2.5 लाख बच्चों पर इसका असर पड़ सकता है. इसके अलावा, लाखों परिवारों को नवजात बच्चों की नागरिकता साबित करनी पड़ सकती है. ऐसे में अमेरिका में नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आ सकता है. ये भी पढ़ें:- होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने नहीं आया नाटो, गुस्साए ट्रंप करवाएंगे पुतिन का फायदा, जानें अब क्या कह दिया? कानून का हो रहा विरोध इस नीति के विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे हैं. डेमोक्रेट्स के अनुसार, यह कदम भेदभावपूर्ण है और गृहयुद्ध के बाद किए गए सुधारों पर आधारित एक मूलभूत सिद्धांत को कमजोर करता है.  वहीं, ट्रंप प्रशासन ने इस आदेश का बचाव करते हुए कहा है कि यह ‘बर्थ टूरिज्म’ और नागरिकता कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी है.  ट्रंप की एंटी-इमिग्रेशन नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जन्मसिद्ध नागरिकता का मतलब है कि अवैध प्रवासियों के शिशु वोट देकर आपके बच्चों पर टैक्स लगा सकते हैं और उनकी विरासत पर कब्जा कर सकते हैं. The post ट्रंप की भतीजी ने खोली परिवार की पोल, सुप्रीम कोर्ट में

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असम चुनाव: राहुल गांधी बोले- हिमंता भारत के सबसे भ्रष्ट CM, मोदी-शाह संग चला रहे लैंड ATM

Rahul Gandhi: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को चुनाव प्रचार के लिए असम पहुंचे. उन्होंने कार्बी आंगलोंग में एक चुनावी रैली को संबोधित किया. रैली में राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने सीएम हिमंता को हिंदुस्तान का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताया. सीएम सरमा के परिवार पर भी भ्रष्टाचार के मामले में नंबर वन होने का आरोप लगाया. राहुल ने कहा कि सीएम हिमंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर राज्य में लैंड एटीएम चला रहे हैं. आम लोगों से जमीन छीनकर बड़े उद्योगपतियों को दी जा रही है. राहुल गांधी ने दावा किया कि असम में तीन बड़े कॉरपोरेट घरानों को कुल 98,400 बीघा जमीन दी गई है. उन्होंने कहा कि असम में कांग्रेस की प्रशासन बनने के बाद सीएम हिमंता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अमेरिका के साथ ट्रेड डील में हिंदुस्तान के हाथ खाली- राहुल गांधी राहुल गांधी ने हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर केंद्र प्रशासन पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस समझौते से हिंदुस्तान को नुकसान ज्यादा है, फायदा कम. उन्होंने यह भी आरोप लगाया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नियंत्रण में हैं. पीएम मोदी ने अमेरिका के साथ ऐसा समझौता किया है, जिससे हिंदुस्तान की कृषि, ऊर्जा सुरक्षा, डेटा और छोटे कारोबार खतरे में पड़ गए हैं. समझौते से बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं हिंदुस्तानीय किसान- राहुल गांधी राहुल ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने सोयाबीन, दाल, फल और कपास जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दिया, जिससे हिंदुस्तानीय किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से अमेरिका को बड़ा फायदा मिला, जबकि हिंदुस्तान को कुछ नहीं मिला. राहुल गांधी ने दावा किया कि यह समझौता दबाव में हुआ है. #WATCH | Assam Elections 2026 | Karbi Anglong: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, “You might ask why is Rahul Gandhi speaking on US-India deal, in Assam election campaigning? You need to understand where the pressure on you is being mounted. Narendra Modi signed the US deal, and he… pic.twitter.com/N9eAxb5He3 — ANI (@ANI) April 2, 2026 100 दिन के भीतर गायक जुबिन गर्ग मौत मामले की होगी जांच चुनावी सभा में राहुल गांधी ने गायक जुबिन गर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि वह पूरे राज्य और उसके लोगों का प्रतिनिधित्व करते थे. असम और उसके लोगों के लिए खड़े थे. कांग्रेस पार्टी राज्य में सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर उनकी मौत के मामले में न्याय दिलाएगी. बता दें, गर्ग की पिछले साल सितंबर महीने में सिंगापुर में डूबने से मौत हो गई थी. The post असम चुनाव: राहुल गांधी बोले- हिमंता हिंदुस्तान के सबसे भ्रष्ट CM, मोदी-शाह संग चला रहे लैंड ATM appeared first on Naya Vichar.

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12वीं के बाद एनीमेशन में करियर कैसे बनाएं, जानें कोर्स और सैलरी डिटेल

Animation Course: आज के डिजिटल दौर में एनीमेशन एक तेजी से आगे बढ़ता हुआ करियर ऑप्शन बन चुका है. फिल्म, गेमिंग, एडवरटाइजिंग और सोशल मीडिया, हर जगह एनीमेशन का यूज हो रहा है. अगर आपको ड्राइंग, क्रिएटिविटी और नई चीजें सीखने और बनाने का शौक है, तो एनीमेशन कोर्स (Animation Course) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. जानें एनीमेशन कोर्स क्या है.   Animation Course: एनीमेशन क्या होता है? एनीमेशन का मतलब होता है स्थिर (Static) तस्वीरों को इस तरह से दिखाना कि वे चलती हुई लगें.  कार्टून, 3D मूवी, गेम कैरेक्टर और एडवर्टाइजमेंट वीडियो  ये सभी एनीमेशन के ही उदाहरण हैं. इस कोर्स में कई तरह की स्किल्स सिखाई जाती हैं: 2D और 3D एनीमेशन ग्राफिक डिजाइनिंग वीडियो एडिटिंग कैरेक्टर डिजाइन VFX (Visual Effects) सॉफ्टवेयर जैसे Adobe After Effects, Maya, Blender एनीमेशन कोर्स के प्रकार एनीमेशन सीखने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं: डिप्लोमा कोर्स: यह कोर्स 12वीं के बाद कर सकते हैं. एनीमेशन के डिप्लोमा में बेसिक से एडवांस तक सिखाया जाता है.  डिग्री कोर्स: इस कोर्स को करने में 3 से 4 साल का समय लगता है. BSc Animation, BA Animation जैसे सब्जेक्ट शामिल होते हैं. डिग्री कोर्स में  थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों शामिल होते हैं.   सर्टिफिकेट कोर्स: इस कोर्स की अवधि 6 महीने से 1 साल तक होती है. यह शॉर्ट टर्म कोर्स, जल्दी स्किल सीखने के लिए बेस्ट है.  करियर और सैलरी डिटेल्स  एनीमेशन कोर्स करने के बाद कई फील्ड में जैसे एनीमेटर, ग्राफिक डिजाइनर, VFX आर्टिस्ट, गेम डिजाइनर और वीडियो एडिटर की नौकरी मिल सकती है. आप फिल्म इंडस्ट्री, टीवी चैनल, एड एजेंसी और गेमिंग कंपनी में काम कर सकते हैं या फ्रीलांसिंग भी कर सकते हैं. शुरुआत में सैलरी 15,000 से 30,000 तक हो सकती है. एक्सपिरियंस बढ़ने पर सैलरी 50,000 से 1 लाख प्रति माह हो सकती है.  हिंदुस्तान के टॉप एनीमेशन कॉलेज  National Institute of Design (NID), अहमदाबाद IIT Bombay Whistling Woods International (WWI), मुंबई यह भी पढ़ें: अमेरिका में इंजीनियरिंग का सपना, देखें ये टॉप 5 कॉलेज की लिस्ट The post 12वीं के बाद एनीमेशन में करियर कैसे बनाएं, जानें कोर्स और सैलरी डिटेल appeared first on Naya Vichar.

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CM बदलने की तारीख FIX! 14 अप्रैल को नीतीश का इस्तीफा, 18 तक नया मुख्‍यमंत्री तय…

Nitish Kumar Resignation Plan : बिहार की सियासत इस वक्त अपने निर्णायक मोड़ पर है. एक तरफ जहां मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. वहीं, बिहार को नया मुख्‍यमंत्री भी मिलने वाला है. ऐसे में बिहार की नेतृत्वक सक्रियता पर पूरे देश की निगाह बनी हुई है.   स्क्रिप्‍ट रेडी? इधर, मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित इस्तीफे और नई प्रशासन के गठन को लेकर जो संभावित शेड्यूल सामने आ रहा है. उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लगभग लिखी जा चुकी है. उधर, दिल्‍ली में भी हलचल बढ़ी हुई है. पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों दस्तूर जारी है. माना जा रहा है सत्‍ता परिवर्तन का पूरा नेतृत्वक घटनाक्रम 6 अप्रैल से शुरू होकर 18 अप्रैल के पहले खत्म हो जाएगा ये 10 -12 दिन बेहद अहम  ऐसे में ये माना जा रहा है कि नई प्रशासन का गठन 14 से 18 के बीच यानी चार दिनों में हो जाएगा. मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के 14 अप्रैल तक इस्तीफा देने की संभावना है. नई प्रशासन के गठन को 10–12 दिन शेष हैं. ऐसे में ये 10 -12 दिन काफी अहम होने वाले हैं. ये होगा सत्‍ता परिवर्तन का घटनाक्रम   6 अप्रैल को जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक मुख्यमंत्री आवास पर हो सकती है.9 अप्रैल को नीतीश कुमार का दिल्ली जाएंगे वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे इसी दिन शाम को Amit Shah से मुलाकात होने की संभावना है.10 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे.उसके बाद 10 अप्रैल को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात संभव है.11 अप्रैल को नीतीश कुमार वापस पटना आएंगे. यहां अपनी पार्टी के नेताओं के साथ अहम बैठक करेंगे.12–13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक होने की संभावना है. जिसके बाद बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर मोहर लगाई जाएगी.14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे सकते हैं.इसके बाद 18 अप्रैल से पहले तक नई प्रशासन का गठन कर लिया जाएगा.   दिल्‍ली से होगी बिहार की नेतृत्व?   इस शेड्यूल से साफ है कि नीतीश कुमार का फोकस अब केंद्र की नेतृत्व की ओर शिफ्ट हो रहा है. राज्यसभा में जाने के बाद उनका दिल्ली की नेतृत्व में सक्रिय होना लगभग तय माना जा रहा है. लेकिन उससे भी अहम बात ये है कि नीतीश कुमार अब दिल्ली से बिहार की नेतृत्व को मॉनिटर करेंगे. ऐसे अब देखने वाली बात ये होगी कि नीतीश कुमार की अगली रणनीति क्या होगी. The post CM बदलने की तारीख FIX! 14 अप्रैल को नीतीश का इस्तीफा, 18 तक नया मुख्‍यमंत्री तय… appeared first on Naya Vichar.

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पंत और संजीव गोयनका का वीडियो वायरल, क्या लखनऊ सुपर जायंट्‌स में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा?

LSG vs DC 2026 : आईपीएल 2026 के अपने पहले मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्‌स की टीम को हार का सामना करना पड़ा है. टीम की हार के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें ऋषभ पंत, हेड कोच जस्टिन लैंगर और टीम के मालिक संजीव गोयनका नजर आ रहे हैं. वीडियो देखकर ऐसा लगता है कि पंत और गोयनका के बीच बहस हो रही है, इस वजह से यह चर्चा आम है कि लखनऊ की टीम में सबकुछ ठीक नहीं है. Sanjiv Goenka and Rishabh pant 😭 pic.twitter.com/0RzMSkp0vE — Faiyaz (@FaiyazWhat) April 1, 2026 लखनऊ की टीम ने किया लचर प्रदर्शन लखनऊ की टीम ने अपने पहले मैच में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ बहुत ही लचर प्रदर्शन किया. टीम के सभी खिलाड़ी पूरे 20 ओवर भी नहीं स्पोर्ट्स पाए और 18.4 ओवर में ही उनके 10 विकेट गिर गए और टीम का स्कोर 141 था. जहां इतने कम स्कोर को डिफेंड करना लखनऊ के लिए बहुत टफ टास्क था, वहीं दिल्ली के खिलाड़ियों के लिए यह आसान टारगेट रहा. अक्षर पटेल की अगुवाई वाली दिल्ली कैपिटल्स ने 17.1 ओवर में ही महज चार विकेट खोकर टारगेट अचीव कर लिया. लखनऊ के इस लचर प्रदर्शन पर टीम के सीनियर्स का बातचीत करना और उसपर विचार करना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन उनके बाॅडी लैंग्वेज को देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद टीम में सबकुछ ठीक नहीं है. ऋषभ पंत ने भी मानी गलती मैच के बाद टीम के कप्तान ऋषभ पंत ने भी गलती मानी और कहा कि टीम की हार जरूरत से ज्यादा रन दे दिए जाने की वजह से हुई. उन्होंने कहा कि जब आप 141 जैसा लो स्कोर करते हैं, तो आपकी गेंदबाजी और फील्डिंग बहुत कसी हुई होनी चाहिए. हम यह नहीं कर पाए, यह इतना आसान स्कोर था कि इसे पूरा करना किसी भी टीम के लिए आसान काम था. पंत का मानना था कि अगर पावरप्ले में कुछ और विकेट मिल जाते, तो मैच का परिणाम अलग हो सकता था. शमी ने केएल राहुल को आउट कर कोशिश भी की, लेकिन टारगेट बहुत छोटा था. ये भी पढ़ें : बल्लेबाजों पर फूटा ऋषभ पंत का गुस्सा: दिल्ली से हार के बाद बोले- अच्छी पिच पर रन नहीं बना सके क्या माही भाई के बिना टीम CSK है जीरो, फैंस क्यों जानना चाहते हैं इस सवाल का जवाब? The post पंत और संजीव गोयनका का वीडियो वायरल, क्या लखनऊ सुपर जायंट्‌स में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा? appeared first on Naya Vichar.

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राम नहीं बनना चाहते थे रणबीर कपूर, अचानक क्यों बदला फैसला?

Ramayana Movie: लंबे समय से चर्चा में बनी फिल्म रामायण को लेकर अब हर दिन नई-नई बातें सामने आ रही हैं. हाल ही में यूएस में हुए टीजर लॉन्च इवेंट ने इस फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है. इसी दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ, जिसने फैंस को चौंका दिया. दरअसल, रणबीर कपूर ने खुद बताया कि उन्होंने इस फिल्म के लिए पहली बार हां नहीं कहा था. डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा की फिल्म रामायण का ऑफर जब करीब चार साल पहले उन्हें मिला, तो उन्होंने उसे ठुकरा दिया था. इस वजह से रणबीर ने पहले किया था मना रणबीर के मुताबिक, उस समय उन्हें लगा था कि वह भगवान राम जैसे महान किरदार के लिए सही नहीं हैं और शायद इस रोल के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे. इसलिए उन्होंने शुरुआत में इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली थी. लेकिन वक्त के साथ उनका नजरिया बदला. रणबीर ने बताया कि उनकी जिंदगी में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब उनकी बेटी राहा कपूर का जन्म हुआ. पिता बनने के बाद उन्होंने खुद को और अपनी लाइफस्टाइल को नए तरीके से देखना शुरू किया. भगवान राम का रोल निभाना बेहद खास रणबीर का कहना है कि यही वो मोड़ था, जिसने उन्हें इस किरदार को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया. उनके मुताबिक, भगवान राम का रोल निभाना और पिता बनना दोनों ही चीजें उनके जीवन में एक खास बदलाव लेकर आईं. अब रणबीर कपूर इस फिल्म में भगवान राम के रूप में नजर आने वाले हैं. फिल्म को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा, पहला पार्ट इस साल दिवाली पर और दूसरा पार्ट 2027 की दिवाली पर सिनेमाघरों में आएगा. यह भी पढ़ें: रणबीर कपूर की रामायण में कई बड़े स्टार्स, जानिए कौन निभा रही शूर्पणखा का किरदार? The post राम नहीं बनना चाहते थे रणबीर कपूर, अचानक क्यों बदला फैसला? appeared first on Naya Vichar.

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