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Author name: Vinod Jha

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महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक से मिलते हैं अद्भुत फल

Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. इस वर्ष महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। चूंकि तिथि की शुरुआत 15 फरवरी की शाम से हो रही है, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को ही मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना गया है. रुद्राभिषेक क्या है? अभिषेक शब्द का अर्थ होता है स्नान कराना. रुद्राभिषेक का मतलब है भगवान रुद्र यानी भगवान शिव का पवित्र वस्तुओं से अभिषेक करना. इसमें जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल आदि से शिवलिंग का स्नान कराया जाता है. क्यों करते हैं रुद्राभिषेक? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. इससे मन शांत रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और वे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. साथ ही व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास भी होता है. रुद्राभिषेक का धार्मिक महत्व शास्त्रों में कहा गया है –“रुतम् दुखम् द्रावयति इति रुद्र:”अर्थात भगवान शिव सभी दुखों को नष्ट करने वाले हैं. मान्यता है कि हमारे दुखों का कारण हमारे पिछले कर्म होते हैं. रुद्राभिषेक और रुद्रार्चन करने से पाप कर्मों का नाश होता है और साधक में शिव तत्व का विकास होता है. रुद्रहृदयोपनिषद में कहा गया है कि भगवान रुद्र सभी देवताओं की आत्मा हैं और सभी देवताओं में शिव का ही स्वरूप विद्यमान है. रुद्राभिषेक का फल शीघ्र प्राप्त होता है. कालसर्प दोष, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में बाधा जैसी समस्याओं से मुक्ति के लिए यह पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है. रुद्राभिषेक करने से मिलने वाले प्रमुख लाभ नकारात्मकता और पुराने कर्मों से मुक्ति रुद्राभिषेक से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है. बार-बार आ रही रुकावटें और परेशानियां दूर होने लगती हैं. धन और करियर में स्थिरता आर्थिक समस्याएं, नौकरी में रुकावट या व्यापार में नुकसान हो रहा हो, तो रुद्राभिषेक से शुभ परिणाम मिलने की मान्यता है. स्वास्थ्य सुधार और ग्रह दोष शांति ग्रह दोषों के कारण होने वाली मानसिक और शारीरिक समस्याओं में राहत मिलती है. रिश्तों में मधुरता और शांति वैवाहिक जीवन और पारिवारिक संबंधों में प्रेम और समझ बढ़ती है. ये भी पढ़ें:  महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का है विशेष महत्व, जानें सही तिथि आध्यात्मिक उन्नति और शिव कृपा महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयों से रक्षा होती है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा15+ वर्षों का अनुभव | ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञConsultation: 8080426594 / 9545290847 The post महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक से मिलते हैं अद्भुत फल appeared first on Naya Vichar.

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बीपीएससी 70वीं परीक्षा का फाइनल रिजल्ट कब होगा जारी?

BPSC 70th Final Result 2026: बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) का नया कैलेंडर जारी होते ही कई बड़ी परीक्षाओं की तारीख और रिजल्ट की डेट सामने आ गई है. बिहार में 70वीं कंबाइंड परीक्षा के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में इस परीक्षा के लिए फाइनल रिजल्ट (BPSC 70th Final Result 2026) जारी होने की टेंटेटिव डेट घोषित कर दी गई है. ऑफिशियल वेबसाइट- bpsc.bihar.gov.in पर नया कैलेंडर चेक कर सकते हैं. बिहार में 70वीं कंबाइंड परीक्षा के लिए प्रीलिम्स परीक्षाएं 13 दिसंबर 2024 और 4 जनवरी 2025 को आयोजित हुई थी. इसका रिजल्ट 23 जनवरी 2025 को जारी हुआ था. इसके बाद मेन्स परीक्षा का आयोजन 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 तक हुआ था, जिसका रिजल्ट दिसंबर 2025 में जारी हुआ. अब परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी होने वाला है. BPSC 70th Final Result 2026 कब होगा जारी? बीपीएससी 70वीं कंबाइंड परीक्षा के माध्यम से कुल 2035 पदों पर भर्तियां होनी हैं. इसके रिजल्ट का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है. जारी कैलेंडर के अनुसार, फाइनल रिजल्ट (BPSC 70th Final Result 2026) की घोषणा अप्रैल या मई महीने में हो सकती है. BPSC Calendar 2026 जारी BPSC (Bihar Public Service Commission) Exam Calendar #BPSC #BPSCExamCalendar #BPSCExam #ExamCalendar pic.twitter.com/Ml4FQrhjJy — Bihar Public Service Commission (@BPSCOffice) February 2, 2026 बिहार में 70वीं कंबाइंड मेन्स परीक्षा में पास होने वाले कैंडिडेट्स के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 21 जनवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक इंटरव्यू होगा. पटना में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के ऑफिस में इंटरव्यू का आयोजन हो रहा है. इंटरव्यू के बाद फाइनल रिजल्ट तैयार किया जाएगा. अन्य परीक्षाओं की डेट जारी बीपीएससी की तरफ से 70वीं कंबाइंड परीक्षा के अलावा 71वीं कंबाइंड एग्जाम के लिए मेन्स परीक्षा की टेंटेटिव डेट जारी की गई है. कैलेंडर के अनुसार, 71वीं कंबाइंड के लिए मेन्स का आयोजन अप्रैल महीने में हो सकता है. इस परीक्षा के माध्यम से 1298 खाली पदों पर भर्तियां होंगी. वहीं, 72वीं कंबाइंड परीक्षा इस साल जुलाई महीने में आयोजित की जा सकती है. यह भी पढ़ें: बिहार में 72वीं कंबाइंड परीक्षा जुलाई में, TRE 4 पर सस्पेंस बरकरार, देखें नया कैलेंडर The post बीपीएससी 70वीं परीक्षा का फाइनल रिजल्ट कब होगा जारी? appeared first on Naya Vichar.

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अब मसाले वाली सब्जी नहीं, फटाफट बना लें स्वादिष्ट लौकी फ्राई

Lauki Fry Recipe: रोजाना अधिक तेल मसाले वाली सब्जी खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है. अगर आप भी अधिक मसालों वाली सब्जी खाना पसंद नहीं करते हैं तो यहां हम बहुत कम मसालों में बनने वाली स्वादिष्ट डिश की रेसिपी लेकर आए हैं. जी हां, आज हम आपको लौकी फ्राई बनाने की रेसिपी बताएंगे. यह लौकी फ्राई खाने में तो मजेदार होता ही है, इसे बनाना भी बहुत सिंपल है. यह डिश मात्र कुछ मिनटों में बनकर तैयार हो जाती है. तेल मसाले कम होने की वजह से यह लौकी फ्राई पचने में भी आसान होता है. आइए अब आपको इसे बनाने की रेसिपी बताते हैं. लौकी फ्राई बनाने की सामग्री लौकी – 1 कद्दू – 1/4 हल्दी पाउडर – 1 बड़ा चम्मच वड़ी – 1 कप हरी मिर्च – 1 छोटा चम्मच कलौंजी – 1 छोटा चम्मच नमक और चीनी – स्वादानुसार तेल और धनिया पत्ता – आवश्यकतानुसार यह भी पढ़ें: Peanut Rice Recipe: बचे हुए चावल से बनाएं टेस्टी पीनट राइस, नोट कर लें सिंपल रेसिपी लौकी फ्राई बनाने की विधि लौकी फ्राई बनाने के लिए पहले लौकी और कद्दू के टुकड़े करके रख लें. अब तेल गरम करके उसमें वड़ी को तल लें. फिर इसमें आप हरी मिर्च और कलौंजी को डालें. अब कड़ाही में लौकी, कद्दू, नमक और हल्दी पाउडर डालकर अच्छे से भूनें. अब इन्हें आप नरम होने तक ढक कर पकाएं.   अंत में इसमें चीनी मिलाकर गैस बंद कर दें. अब इन्हें धनिया पत्ती से सजाकर आप सर्व कर सकते हैं.   यह भी पढ़ें: Hare Matar ka Paratha Recipe: ब्रेकफास्ट में बनाएं हरे मटर के पराठे, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का करेगा दिल यह भी पढ़ें: Peanut Curry Recipe: खाने में चाहिए कुछ नया, तो फटाफट बना लें स्वादिष्ट पीनट करी यह भी पढ़ें: Batkar Curry Recipe: स्वाद में बेमिसाल है छत्तीसगढ़ की बटकर करी, बार-बार खाने का करेगा दिल The post अब मसाले वाली सब्जी नहीं, फटाफट बना लें स्वादिष्ट लौकी फ्राई appeared first on Naya Vichar.

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महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बीस साबित हुई भाजपा

Maharashtra Politics :नेतृत्व जज्बात से नहीं, हालात के हिसाब से चलती है. महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार का शपथ ग्रहण इसका उदाहरण है. सुनेत्रा के आंसू अभी सूखे भी नहीं, पति अजित पवार के निधन के शोक से उबरना तो दूर की बात है. फिर भी उन्होंने सियासी तकाजे को ही प्राथमिकता दी और महाराष्ट्र की पहली स्त्री उप मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया. पर प्रश्न यह है कि सुनेत्रा की ताजपोशी से महाराष्ट्र की नेतृत्व पर क्या प्रभाव पड़ने जा रहा है? आखिर क्या वजह रही कि सुनेत्रा ने आनन-फानन में शपथ ले ली. महाराष्ट्र के राजभवन में जनवरी महीने के आखिरी दिन जो नेतृत्वक इतिहास रचा गया, उसकी कहानी किसने लिखी थी. महाराष्ट्र में भले ही शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में सफलता नहीं मिली हो, पर राज्य की नेतृत्व के सबसे मंजे हुए खिलाड़ी शरद पवार ही हैं. यह बात छुपी हुई नहीं है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों के बीच सुलह और एकीकरण की बात चल रही थी. पर अजित के न रहने से समीकरण बदल गये. अजित के साथ गये अहम नेताओं- प्रफुल्ल पटेल, आरआर पाटिल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं की आशंकाएं बढ़ गयीं. उन्हें डर था कि यदि विलय हुआ, तो शरद पवार का पार्टी पर नियंत्रण बढ़ जायेगा. इसके चलते सुप्रिया सुले की पार्टी पर पकड़ बढ़ जायेगी. सुप्रिया के नियंत्रण में इन नेताओं का काम करना असहज होता. प्रफुल्ल कभी शरद पवार के बेहद नजदीकी होते थे. अजित के साथ जाकर एक तरह से उन्होंने शरद पवार के साथ दगाबाजी ही की है. उन्हें ज्यादा आशंका थी कि विलय के बाद पार्टी पर पकड़ होने के चलते शरद के बहाने सुप्रिया का चाबुक उन पर चल सकता है. पर यदि पार्टी अलग रहती है और सुनेत्रा के हाथ कमान रहती है, तो इन नेताओं की सियासी सेहत बनी और बची रह सकती है. इसी कारण अजित के निधन के चलते हुए आधिकारिक शोक की मियाद खत्म होते ही प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे जैसे नेता सक्रिय हो गये. विधायक दल की बैठक बुलायी गयी और सुनेत्रा को तत्काल उसका नेता चुनकर उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार कर लिया गया. शरद पवार भले ही इस सियासी पटकथा का लेखक सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को मानते हों, पर महाराष्ट्र के सियासी हलकों में कहा जा रहा है कि असल में यह पटकथा राज्य की बीजेपी ने लिखी है. पटेल और तटकरे जैसे नेताओं ने सिर्फ इसे अमल में लाने में भूमिका निभायी है. यदि सुनेत्रा शपथ नहीं लेतीं, तो क्या बीजेपी की सियासी सेहत गड़बड़ा सकती थी? क्योंकि राज्य में बीजेपी के 132 और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के 57 विधायक हैं. राज्य में बहुमत के लिए महज 145 सीटें चाहिए होती हैं. इस लिहाज से देखें, तो बीजेपी की अगुवाई वाली प्रशासन को कोई खतरा नहीं होने जा रहा था. अजित समेत एनसीपी के 41 विधायक पिछले चुनाव में चुने गये हैं. पर बीजेपी की चिंता दूसरी है. शरद पवार की नेतृत्वक स्थिति भले ही ठीक न हो, पर जैसे ही दोनों एनसीपी का विलय होता, शरद ताकतवर हो जाते और बीजेपी के लिए नयी सिरदर्दी खड़ी हो जाती. वे शिवसेना के गुटों को भी एक करने की कोशिश कर सकते थे. भले ही यह सोच कल्पना लग रही हो, पर एकबार स्वीकार कर लें कि ऐसा होता, तो महाराष्ट्र की नेतृत्व कैसी होती. महाराष्ट्र में जिला परिषदों के चुनाव हो रहे हैं. पहले विधानसभा और बाद में स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी को सफलता नहीं मिली. अजित पवार के न रहने के चलते कांग्रेस को सक्रिय होना चाहिए था. अजित बेशक सत्ता में थे, लेकिन उन्हें विपक्षी खेमे के लिए अब भी हसरत भरी निगाह से ताकतवर नेता के रूप में देखा जा रहा था. अजित के न रहने से विपक्षी नेतृत्व के लिए आसमान खुल गया है. शरद के बाहर जाने के बाद से ही कांग्रेस राज्य में कमजोर हुई है. सुप्रिया सुले का नेतृत्व ऐसा नहीं है कि वह राज्यव्यापी प्रभाव हासिल कर पायें. ऐसे माहौल में कांग्रेस को अपने ताकतवर नेतृत्व को स्थानीय स्तर पर आगे लाना चाहिए था. पर वह ऐसा करती नहीं दिख रही. रणनीतिक लिहाज से देखें, तो महाराष्ट्र में बीजेपी सभी दलों पर एक बार फिर बीस पड़ती नजर आ रही है. उसने सुनेत्रा पवार को अपने खेमे में लाकर एक तीर से दो निशाने साध लिये हैं. एनसीपी की ओर से निश्चिंतता हासिल कर ली है, शरद पवार को एक बार फिर किनारे रखने में सफल हुई है और अपने लिए खतरा बनने की शरद की आशंकाओं को एक तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है. मुंबई देश की आर्थिक राजधानी भी है. इसी कारण केंद्रीय सत्ता के बाद सबसे प्रभावशाली महाराष्ट्र की सत्ता मानी जाती है. महाराष्ट्र की सत्ता पर पकड़ देश की आर्थिक ताकतों की नब्ज पर पकड़ बनाती है. बीजेपी अपनी इस पकड़ को कमजोर होते नहीं देखना चाहती. इसलिए उसने सुनेत्रा को साधने में देर नहीं लगायी. सुनेत्रा के साथ से एकनाथ शिंदे के लिए महायुति से बाहर निकलने की सोचना या बीजेपी पर दबाव बढ़ाने का मौका खत्म हो जाता है. कुछ ऐसी ही स्थिति शिंदे के साथ के चलते सुनेत्रा की भी रहेगी. बीजेपी सुनेत्रा के जरिये शिंदे को संतुलित करेगी, तो शिंदे के जरिये सुनेत्रा को काबू में रखेगी. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post महाराष्ट्र की नेतृत्व में फिर बीस साबित हुई भाजपा appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तानी फौज ने बलूचिस्तान के आगे टेके घुटने? रक्षा मंत्री का संसद में कबूलनामा- ‘विद्रोहियों के पास हमसे बेहतर हथियार’ 

Pakistan Balochistan Crisis: पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधनों से भरे सूबे ‘बलूचिस्तान’ पर अब उसकी पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. हैरानी की बात यह है कि यह दावा किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद (नेशनल असेंबली) में किया है. उनके बयान से ऐसा लग रहा है जैसे पाकिस्तान ने इस बगावत के आगे घुटने टेक दिए हैं. इलाका बहुत बड़ा है, कंट्रोल करना नामुमकिन रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में खुलकर अपनी लाचारी जाहिर की. उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत हिस्सा है. इतने बड़े इलाके पर पूरी तरह कंट्रोल करना लगभग नामुमकिन है. उनके अनुसार, हालांकि सैनिक वहां गश्त लगा रहे हैं, लेकिन शारीरिक रूप से पूरे प्रांत को सुरक्षित करना फौज की क्षमता से बाहर है. पाकिस्तानी फौज से ज्यादा हाई-टेक हैं बलूच विद्रोही बलूच विद्रोहियों मंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया कि बलूच बागी पाकिस्तानी सेना से कहीं ज्यादा बेहतर हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेजर गन्स: विद्रोहियों के पास 4 से 5 हजार डॉलर वाले हीट-डिटेक्टिंग लेजर हैं, जो पाकिस्तानी फौज के पास भी नहीं हैं. महंगी राइफलें: बागी करीब 20 लाख पाकिस्तानी रुपये की राइफलें और 20 हजार डॉलर (करीब 16-17 लाख रुपये) के फुल कॉम्बैट गियर किट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इलाके का फायदा: उन्होंने यह भी माना कि बलूचिस्तान के पहाड़ बागियों को छिपने में मदद करते हैं, जबकि पंजाब और सिंध के मैदानों में ऐसा नहीं है. ” We can’t manage Balochistan. They have more advanced weapons than us” Pakistanis have already surrendered 😂 pic.twitter.com/SXynZE77FB — BALA (@erbmjha) February 3, 2026 बीएलए (BLA) का हमला और फौज की ‘भागती’ तस्वीरें हाल के दिनों में ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) ने कई जिलों में एक साथ बड़े हमले किए हैं. इन हमलों में दर्जनों नागरिकों और सैनिकों की जान गई है. सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि हमले के वक्त पाकिस्तानी सैनिक अपनी चौकियां छोड़कर भाग रहे हैं. हालांकि इन वीडियो की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इनसे पाकिस्तान की साख को भारी धक्का लगा है. खरबों का खजाना, फिर भी सबसे गरीब ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में तांबा, सोना, कोयला और क्रोमाइट जैसे खनिजों का भंडार है जिनकी कीमत खरबों डॉलर है. अकेले ‘रेको डिक’ प्रोजेक्ट में ही 5.9 अरब टन तांबा और सोना है.  लेकिन स्थानीय लोगों में गुस्सा इस बात का है कि उन्हें अपनी ही जमीन के इन संसाधनों का फायदा नहीं मिलता. स्थानीय लोगों को इन बड़े प्रोजेक्ट्स से महज 2% रॉयल्टी मिलती है, जबकि सारा मुनाफा इस्लामाबाद और विदेशी कंपनियां ले जाती हैं. चीन के प्रोजेक्ट्स पर भी संकट बलूच अब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और माइनिंग साइट्स को निशाना बना रहे हैं. जानकारों का मानना है कि अगर यह हिंसा नहीं रुकी, तो पाकिस्तान अपने हाथ से 6 से 8 ट्रिलियन डॉलर की रेयर अर्थ मेटल्स (महंगे खनिज) खो देगा, जो आज की ग्लोबल टेक्नोलॉजी के लिए बहुत जरूरी हैं. ये भी पढ़ें: व्हाइट हाउस प्रेस सचिव लीविट का दावा! हिंदुस्तान रूसी तेल की खरीद रोकेगा, ट्रेड डील के तहत अमेरिका से खरीदेगा क्रूड ऑयल ये भी पढ़ें: रूस से तेल खरीदेगा या नहीं हिंदुस्तान? ट्रंप के ‘सीक्रेट’ समझौते वाले दावे पर पुतिन के ऑफिस से आया जवाब The post पाकिस्तानी फौज ने बलूचिस्तान के आगे टेके घुटने? रक्षा मंत्री का संसद में कबूलनामा- ‘विद्रोहियों के पास हमसे बेहतर हथियार’  appeared first on Naya Vichar.

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इयू से रक्षा समझौते का लाभ समुद्री सुरक्षा में

India and European Union deal : हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग समकालीन भू-नेतृत्व के सबसे महत्वपूर्ण, किंतु अपेक्षाकृत कम चर्चित, परिवर्तनों में से एक है. हाल ही में नयी दिल्ली में आयोजित हिंदुस्तान-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में अधिकांश ध्यान व्यापार समझौते और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रहा, लेकिन इसी दौरान एक और उतना ही महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया. यह था हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर. यह समझौता न केवल दोनों पक्षों के बीच बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, बल्कि उस अस्थिर और अनिश्चित वैश्विक सुरक्षा वातावरण के प्रति साझा प्रतिक्रिया भी है, जिसमें पारंपरिक व्यवस्थाएं और स्थापित नियम लगातार कमजोर पड़ रहे हैं. वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों गहरे दबाव में है. क्षेत्रीय संघर्षों के साथ-साथ बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा और बदलती प्राथमिकताओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर बना दिया है. अमेरिकी रवैये के कारण यूरोप की सुरक्षा चिंताएं फिर उभरकर सामने आयी हैं. नाटो सहयोगियों पर लगातार बढ़ता अमेरिकी दबाव, कि वे अपनी रक्षा जिम्मेदारियां स्वयं उठायें, और वाशिंगटन की अप्रत्याशित विदेश नीति ने यूरोप को अपनी रणनीतिक निर्भरता पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है. ऐसे समय में, हिंदुस्तान एक ऐसे भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभरता है, जो न तो किसी सैन्य गुट का हिस्सा है और न ही जिसकी रणनीतिक सोच किसी एक शक्ति पर निर्भर है. हिंदुस्तान के लिए यह साझेदारी यूरोपीय संघ द्वारा उसकी बदलती वैश्विक भूमिका की औपचारिक स्वीकृति है. लंबे समय तक हिंदुस्तान-यूरोपीय संघ संबंध मुख्यतः व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित रहे. नेतृत्वक और सुरक्षा सहयोग अपेक्षाकृत हाशिये पर रहा. नयी रक्षा साझेदारी इस प्रवृत्ति से स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है. शांति, सुरक्षा और रक्षा को द्विपक्षीय संबंधों का केंद्रीय स्तंभ बनाकर दोनों पक्ष यह स्वीकार करते हैं कि आज उनके हित समुद्री सुरक्षा, वैश्विक साझा संसाधनों की रक्षा, आतंकवाद से मुकाबले और उभरती प्रौद्योगिकियों के नियमन जैसे क्षेत्रों में तेजी से एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं. इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे अनेक क्षेत्र शामिल हैं. हिंद महासागर, अदन की खाड़ी और गिनी की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक गतिविधियां दिखाती हैं कि यह साझेदारी व्यावहारिक और संचालन आधारित सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रही है. हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ ने नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र केंद्रित बहुपक्षीय प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है. जब एकतरफा रवैया, दबाव की नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय कानून की चयनात्मक व्याख्या बढ़ रही है, तब यह साझा दृष्टिकोण विशेष महत्व रखता है. यद्यपि हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ के दृष्टिकोण सभी मुद्दों पर पूरी तरह समान नहीं हैं, फिर भी संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और संस्थागत वैधता को लेकर दोनों की रणनीतिक सोच में स्पष्ट सामंजस्य है. रक्षा औद्योगिक सहयोग इस समझौते का शायद सबसे परिवर्तनकारी पहलू है. यूरोप की पुनःसशस्त्रीकरण की प्रक्रिया और रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की उसकी जरूरत ने हिंदुस्तानीय रक्षा उद्योग के लिए नये अवसर खोल दिये हैं. हिंदुस्तान-यूरोपीय संघ रक्षा उद्योग मंच की स्थापना का निर्णय, जिसमें प्रशासनें पर्यवेक्षक की भूमिका में होंगी, एक व्यावहारिक और भविष्यदर्शी कदम है. इससे रक्षा कंपनियों के बीच प्रत्यक्ष साझेदारी, संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. हिंदुस्तान के लिए यह केवल बाजार तक पहुंच का प्रश्न नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर भी है. हिंदुस्तानीय रक्षा उद्योग, जो हाल के वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है, यूरोपीय रक्षा आवश्यकताएं पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इससे न केवल ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात रणनीति को बल मिलेगा, यूरोपीय संघ को भी सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यह साझेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह परस्पर लाभ पर आधारित है और किसी एक पक्ष को दूसरे पर हावी नहीं होने देती. वार्षिक हिंदुस्तान-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा संवाद की स्थापना से यह सुनिश्चित होगा कि सहयोग केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे. नियमित समीक्षा, विषयगत परामर्श और संवाद के माध्यम से इस साझेदारी को वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप ढाला जा सकेगा. अतीत में हिंदुस्तान-यूरोपीय संघ संबंधों की एक बड़ी कमजोरी क्रियान्वयन की रही है, यह नया ढांचा वह कमी दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा गतिशीलता के संदर्भ में यह साझेदारी और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है. यूरोपीय संघ की इस क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल होना हिंदुस्तान की दृष्टि के अनुरूप है. हिंदुस्तान के लिए यूरोपीय उपस्थिति किसी एक शक्ति पर निर्भरता कम करती है, जबकि यूरोपीय संघ के लिए हिंदुस्तान एक ऐसा साझेदार है, जो क्षेत्रीय वास्तविकताओं को गहराई से समझता है. यह साझेदारी वैश्विक साझेदारियों के पुनर्संतुलन को भी दर्शाती है. हिंदुस्तान अमेरिका के साथ अपने संबंधों को महत्व देता है और यूरोप भी ट्रांस-अटलांटिक संबंधों से जुड़ा हुआ है, लेकिन दोनों ही अब अधिक रणनीतिक स्वतंत्रता चाहते हैं. हिंदुस्तान-यूरोपीय संघ रक्षा साझेदारी किसी मौजूदा गठबंधन के विरुद्ध नहीं है, बल्कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में विकल्प और लचीलापन प्रदान करती है. कुल मिलाकर, हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी एक शांत लेकिन निर्णायक रणनीतिक परिवर्तन का संकेत है. यह रक्षा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में लाती है, वैश्विक अस्थिरता के दौर में रणनीतिक दृष्टियों का सामंजस्य स्थापित करती है और औद्योगिक सहयोग के नये द्वार खोलती है. जब पारंपरिक सुरक्षा गारंटी कम भरोसेमंद होती दिख रही है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था दबाव में है, तब हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ ने सावधानी के बजाय साझेदारी का रास्ता चुना है. इसकी सफलता अंततः क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, लेकिन इसकी दिशा और मंशा स्पष्ट है- एक अधिक संतुलित, स्थिर और बहुध्रुवीय सुरक्षा व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाना.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) 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एसआईआर के खिलाफ याचिका पर होगी सुनवाई, ममता बनर्जी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ अपनी याचिका पर सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. सूत्रों ने कहा कि एलएलबी की डिग्री धारक मुख्यमंत्री बनर्जी सुनवाई में उपस्थित होकर अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं. बनर्जी ने यह याचिका 28 जनवरी को दायर की थी. इस मामले में उन्होंने निर्वाचन आयोग (ईसी) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्ष बनाया था. बनर्जी ने इससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को पत्र लिखकर चुनाव से पहले राज्य में जारी “मनमाने और खामियों से भरे” एसआईआर को रोकने का आग्रह किया था. VIDEO | Delhi: West Bengal CM Mamata Banerjee reaches Supreme Court for hearing of a plea filed by her challenging the ongoing Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in the state. (Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/bffRWFgBYY — Press Trust of India (@PTI_News) February 4, 2026 पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को विभिन्न निर्देश जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए. The post एसआईआर के खिलाफ याचिका पर होगी सुनवाई, ममता बनर्जी पहुंची सुप्रीम कोर्ट appeared first on Naya Vichar.

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कभी सोचा है बांस क्यों नहीं जलाते? जानिए चौंकाने वाले कारण

Why Bamboo Not Burned: हमारे जीवन में लकड़ी का उपयोग कई शुभ और अशुभ कार्यों में होता है. जैसे घर की पूजा, यज्ञ या अंतिम संस्कार. लेकिन आपने कभी गौर किया है कि बांस की लकड़ी को कहीं भी जलाते नहीं देखा जाता. यह कोई संयोग नहीं, बल्कि इसके पीछे धार्मिक और व्यवहारिक मान्यताएं जुड़ी हैं. शास्त्रों और परंपरा में बांस का स्थान हिंदुस्तानीय संस्कृति में बांस को वंश वृद्धि और जीवन निरंतरता का प्रतीक माना गया है. जन्म के समय नाल को बांस के पास गाड़ने की परंपरा भी इसी भाव से जुड़ी मानी जाती है. अंतिम संस्कार में अर्थी बनाने में बांस का उपयोग होता है, लेकिन चिता में बांस को नहीं जलाया जाता. शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार बांस को जलाना अनुपयुक्त माना गया है. क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? कुछ लोगों का मानना है कि बांस में कुछ हेवी मेटल तत्व पाए जा सकते हैं, और जलने पर उनसे निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. यह भी कहा जाता है कि बांस से बनी अगरबत्तियों में प्रयुक्त रसायन जलने पर श्वास के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. हालाँकि, इन दावों पर वैज्ञानिक समुदाय में एकरूप सहमति नहीं है, इसलिए इन्हें सावधानी से समझना चाहिए. अगरबत्ती बनाम धूप: शास्त्रीय दृष्टि हिंदू शास्त्रों में पूजा विधि के दौरान धूप, दीप और नैवेद्य का उल्लेख मिलता है, लेकिन अगरबत्ती का सीधा वर्णन नहीं है. परंपरागत धूप प्राकृतिक पदार्थों से बनाई जाती थी और उसका उद्देश्य वातावरण को शुद्ध करना माना जाता था. बांस की लकड़ी को न जलाने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक प्रतीकों और व्यवहारिक सोच से जुड़ी है. समय के साथ कई चीजें परंपरा में जुड़ीं, लेकिन किसी भी बात को मानने से पहले उसका अर्थ, संदर्भ और स्वास्थ्य पर प्रभाव समझना जरूरी है. संतुलन और समझ के साथ परंपरा का पालन ही सबसे उचित मार्ग है. The post कभी सोचा है बांस क्यों नहीं जलाते? जानिए चौंकाने वाले कारण appeared first on Naya Vichar.

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पटना के 3 VIP सड़कों के ये प्वाइंट बने ‘एक्सीडेंट जोन’, हादसे में हर साल होती हैं 8-10 मौतें

Patna News: पटना में ट्रैफिक व्यवस्था को आसान बनाने के लिए तीन लाइफलाइन- जेपी गंगा पथ, अटल पथ और अशोक राजपथ स्थित डबल डेकर पुल का निर्माण किया गया. लेकिन इन सड़कों के कई प्वाइंट अब हादसों के ‘हॉट स्पॉट’ बन चुके हैं. इन वीआईपी सड़कों पर आये दिन हो रहे हादसों की मुख्य वजह कहीं गाड़ियों की हाई स्पीड है, तो कहीं ‘रॉन्ग साइड’ ड्राइविंग. हर साल हो रहे इतने हादसे हालात यह हैं कि अटल पथ और जेपी गंगा पथ पर हर साल लगभग 25-30 सड़क हादसे हो रहे हैं. इनमें 8-10 लोगों की मौतें हो रही हैं और 40-50 लोग जख्मी हो जाते हैं. अशोक राजपथ स्थित डबल डेकर पुल की बात करें तो रफ्तार नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी और ‘रॉन्ग साइड’ ड्राइविंग के कारण एक्सीडेंट स्पॉट बन गया है. लोगों की मनमानी बन रही हादसे का कारण गांधी मैदान से पटना यूनिवर्सिटी जाने के लिए कारगिल चौक से ऊपर वाले पुल का इस्तेमाल करना है, जबकि वापसी के लिए नीचे वाले पुल का. लेकिन लोग बीएन कॉलेज के पास ‘रॉन्ग साइड’ से पुल पर चढ़ कर पटना यूनिवर्सिटी की ओर जा रहे हैं. बीएन कॉलेज के पास ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा है, लेकिन इसके बावजूद लोग नियम तोड़ रहे हैं. ई-रिक्शा और बाइक सवार सबसे ज्यादा मनमानी कर रहे हैं. हाल के हादसों पर एक नजर 1 फरवरी: गंगा पथ एलसीटी घाट के पास तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार दंपती और बच्चों को रौंद दिया. इसमें सात साल की बच्ची की मौत हो गई जबकि तीन जख्मी हो गए थे. 4 जनवरीः अटल पथ पर कार और पिकअप की टक्कर में एक कारोबारी के बेटे की मौत हो गई थी. 13 जनवरीः अटल पथ पर शिवपुरी के पास कार और ऑटो में टक्कर से कार पलट गई, जिसमें दो लोग जख्मी हो गए थे. 26 जनवरी: गंगा पथ दीघा थाना इलाके में तेज रफ्तार एंबुलेंस ने फुटपाथी दुकानदार को टक्कर मारी, जिससे उसकी मौत हो गई. 31 दिसंबर: अटल पथ पर अचानक ब्रेक लगने से तीन कारें आपस में टकरा गई. Also Read: Bihar Solar Subsidy: बिहार के 58 लाख परिवारों को सस्ती बिजली, घरों की छत पर लगेंगे सोलर प्लांट, सब्सिडी जानकर हो जायेंगे खुश The post पटना के 3 VIP सड़कों के ये प्वाइंट बने ‘एक्सीडेंट जोन’, हादसे में हर साल होती हैं 8-10 मौतें appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Budget 2026: महिलाओं के लिए हाट-बाजार से मेगा स्किल सेंटर तक, रोजगार और आत्मनिर्भरता पर फोकस

Bihar Budget 2026: बिहार प्रशासन ने अपने बजट में स्त्रीओं और सामाजिक समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर खास जोर दिया है. मुख्यमंत्री स्त्री रोजगार योजना के तहत अब स्त्रीओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री के लिए गांवों से लेकर शहरों तक हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे. इसका मकसद स्त्रीओं को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार से सीधे जोड़ना है, ताकि उनकी आमदनी स्थायी रूप से बढ़ सके. प्रशासनी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 1.56 करोड़ से अधिक स्त्रीओं को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रति स्त्री 10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है. इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी स्त्रीओं के छोटे-छोटे व्यवसायों को गति मिली है. लखपति दीदी योजना से बदली स्त्रीओं की आर्थिक तस्वीर बिहार में जीविका समूहों से जुड़ी स्त्रीओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. वर्तमान में राज्य की 31.71 लाख जीविका दीदियों को ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिह्नित किया जा चुका है. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि ग्रामीण वित्तीय स्थिति में स्त्रीओं की भागीदारी अब सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका में बदल रही है. हर प्रमंडल में मेगा स्किल सेंटर, फिर जिलों तक विस्तार राज्य प्रशासन आधुनिक उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठा रही है. हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित मेगा स्किल सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई है. पहले चरण में राज्य के सभी प्रमंडलों में एक-एक मेगा स्किल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहां उच्च गुणवत्ता का कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा. दूसरे चरण में यह मॉडल सभी जिलों तक विस्तार पाएगा. इन केंद्रों में युवाओं और स्त्रीओं को रोजगारपरक व्यवसायों में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे इंडस्ट्री 4.0 के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें. आईटीआई से रोजगार तक की सीधी कड़ी बिहार में वर्तमान में 152 आईटीआई संचालित हैं, जिनमें 114 सामान्य और 38 स्त्री आईटीआई शामिल हैं. इनमें से 149 आईटीआई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है. पहले चरण में 60 आईटीआई को अपग्रेड किया गया है, जहां अब तक 7,865 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक नियोजन मेलों के माध्यम से 19,593 और नियोजन कैंपों के जरिए 22,329 आवेदकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. युवाओं को रोजगार सहायता देने के लिए एकीकृत ई-निबंधन और रोजगार पोर्टल का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे नौकरी की प्रक्रिया और पारदर्शी हो सके. नियोजन मेलों ने बदली हजारों की तकदीर वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार में रोजगार के आंकड़ों ने नई ऊंचाई छुई है. विभिन्न नियोजन मेलों और कैंपों के माध्यम से अब तक लगभग 41,922 आवेदकों को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. प्रशासन की योजना है कि कौशल विकास और डायरेक्ट प्लेसमेंट के इस मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि राज्य के युवाओं को पलायन न करना पड़े. Also Read: Bihar Solar Subsidy: बिहार के 58 लाख परिवारों को सस्ती बिजली, घरों की छत पर लगेंगे सोलर प्लांट, सब्सिडी जानकर हो जायेंगे खुश The post Bihar Budget 2026: स्त्रीओं के लिए हाट-बाजार से मेगा स्किल सेंटर तक, रोजगार और आत्मनिर्भरता पर फोकस appeared first on Naya Vichar.

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