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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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एक और करोड़ों की डील, विराट कोहली-अनुष्का शर्मा ने खरीदा 18.29 करोड़ का लग्जरी अपार्टमेंट

क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने मुंबई के वर्सोवा इलाके में एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा है. प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इस घर की कीमत 18.29 करोड़ बताई गई हैं. घर का कार्पेट एरिया 2,644 वर्ग फीट है. इसके साथ 316 वर्ग फीट का एक्सक्लूसिव स्पेस और तीन कार पार्किंग की सुविधा शामिल है. Virat Kohli Anushka Sharma Bought New Apartment: विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने खरीदा नया अपॉर्टमेंट पेपर्स के मुताबिक, इस प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2026 को हुई थी. इस दौरान 1.09 करोड़ की स्टांप ड्यूटी और 30,000 की रजिस्ट्रेशन फीस जमा की गई. अगर इस डील की प्रति वर्ग फीट कीमत निकाली जाए, तो यह करीब 69,159 प्रति वर्ग फीट बैठती है. इससे साफ पता चलता है कि मुंबई के वेस्टर्न सबर्ब्स में लग्जरी घरों की डिमांड और प्रीमियम प्रॉपर्टी की वैल्यू लगातार मजबूत बनी हुई है. हालांकि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की ओर से इस डील को लेकर कुछ भी ऑफिशियल नहीं किया गया है. View on Instagram Virat Kohli Luxury Real Estate Portfolio: विराट कोहली का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो है लग्जरी दिल्ली में पले-बढ़े विराट कोहली के पास गुरूग्राम का पॉश डीएलएफ फेज 1 में भी करीब 10,000 वर्ग फीट का बंगला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आलीशान घर की अनुमानित कीमत करीब 80 करोड़ है. इस प्रॉपर्टी में प्राइवेट स्विमिंग पूल, हाई-टेक जिम और कई प्रीमियम सुविधाएं मौजूद हैं. View on Instagram Alibaug Property: अलीबाग में भी है प्रोपर्टी जनवरी 2026 में विराट और अनुष्का ने अलीबाग में आवास बीच के पास स्थित जिराद गांव में 5 एकड़ से ज्यादा जमीन करीब 37.86 करोड़ में खरीदी. प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, यह डील दो साथ लगे हुए लैंड पार्सल्स की थी, जिनका कुल एरिया करीब 21,010 वर्ग मीटर है. इस खरीद की रजिस्ट्रेशन 13 जनवरी 2026 को पूरी की गई थी. View on Instagram Virat Kohli Anushka Sharma Villa In Alibaug: अलीबाग में विला बना चुके हैं विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ये कपल पहले भी अलीबाग में प्रॉपर्टी खरीद चुका है. साल 2022 में दोनों ने करीब 8 एकड़ जमीन 19 करोड़ में खरीदी थी. इसी प्लॉट पर उन्होंने एक लग्जरी विला बनवाया है, जिसमें टेम्परेचर-कंट्रोल्ड स्विमिंग पूल, कस्टम-डिज़ाइन किचन, चार मॉडर्न बाथरूम, जैकूजी, बड़ा गार्डन, कवर पार्किंग और स्टाफ के लिए अलग क्वार्टर्स जैसी प्रीमियम सुविधाएं मौजूद हैं. ये भी पढ़ें: प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे विराट-अनुष्का, वीडियो वायरल ये भी पढ़ें: विराट-अनुष्का की सादगी ने जीता दिल, कीचड़ में नंगे पैर चलकर प्रेमानंद महाराज का लिया आशीर्वाद The post एक और करोड़ों की डील, विराट कोहली-अनुष्का शर्मा ने खरीदा 18.29 करोड़ का लग्जरी अपार्टमेंट appeared first on Naya Vichar.

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जंतर-मंतर आंदोलन पर सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, लाठीचार्ज जायज नहीं

Jantar Mantar Protest Hearing : NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा. अदालत पहले ही साफ कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और आंदोलन के नाम पर पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता. मंगलवार को होगी अहम सुनवाई उच्चतम न्यायालय मंगलवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाया गया है. इन याचिकाओं में कहा गया है कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की. इसी मामले से जुड़ी एक अलग याचिका, जिसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई मारपीट के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है, उस पर भी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. CJI बोले- प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है हिंदुस्तान के प्रधान न्यायाधीश (CJI) ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान से मिला अधिकार है और सिर्फ यह कहकर इसे नहीं रोका जा सकता कि लोग आंदोलन कर रहे हैं. अदालत ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन का हवाला देकर पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी प्रोटोकॉल जरूर होने चाहिए, लेकिन लोगों के अधिकारों पर अनावश्यक रोक नहीं लगाई जानी चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि अगर प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व शामिल हों तो उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इसका असर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए. जंतर-मंतर से संसद मार्च तक पहुंचा आंदोलन NEET पेपर लीक के विरोध में Cockroach Janata Party (CJP) ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया था. इस आंदोलन का नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे थे. बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े और उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की, जिससे आंदोलन को देशभर में व्यापक समर्थन मिला. 20 जुलाई को CJP ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया, जिसमें देशभर से हजारों छात्र दिल्ली पहुंचे. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई. इसके बाद कई वीडियो सामने आए, जिनमें छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग को लेकर सवाल उठे. दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे और कई मामले दर्ज किए गए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी जारी है कानूनी लड़ाई छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी. लगातार चले आंदोलन, विपक्ष के दबाव और प्रशासन के साथ कई दौर की बातचीत के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल इस्तीफा नहीं था, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की मंगलवार की सुनवाई को इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पुलिस कार्रवाई, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर अदालत का रुख सामने आ सकता है. ये भी पढ़ें : Photos: असम में बाढ़ का कहर जारी, 6.5 लाख लोग अब भी प्रभावित, देखें तबाही की 13 तस्वीरें The post जंतर-मंतर आंदोलन पर सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, लाठीचार्ज जायज नहीं appeared first on Naya Vichar.

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Video : ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारों से गूंजा संसद परिसर, NDA सांसदों ने किया हीरो जैसा स्वागत

Video :  सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान को पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया और फिर अपने साथ संसद भवन के अंदर लेकर गए. इस दौरान संसद परिसर में कुछ देर के लिए उत्साह और नेतृत्वक एकजुटता का माहौल देखने को मिला. इसका वीडियो न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक्स पर जारी किया है. ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के लगे नारे NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के दो दिन बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान जब संसद पहुंचे. यहां NDA सांसदों ने उनका जोरदार ढंग से स्वागत किया. बीजेपी सांसद पहले से ही मकर द्वार पर उनका इंतजार कर रहे थे. जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे, सांसदों ने उनका स्वागत किया. उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया और उनके साथ संसद भवन के अंदर तक गए. इस दौरान ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे भी लगे, जिसके बाद विपक्षी सांसदों के साथ उनकी नोकझोंक भी देखने को मिली. ये भी पढ़ें: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: संसद में गतिरोध खत्म करने का मोदी प्रशासन का मास्टरस्ट्रोक, विपक्ष की रणनीति पर वार ‘शिक्षा चोरी’ के नारे लगाए विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत के तुरंत बाद विपक्ष ने भी संसद परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया. विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं ने ‘शिक्षा चोरी’ के नारे लगाए और आरोप लगाया कि प्रशासन ने देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर दिया है. ‘छात्रों पर लाठी-गोली क्यों?’ संसद के बाहर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी सांसदों ने सोमवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया. उन्होंने 20 जुलाई को नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने का विरोध किया और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा. संसद के ‘मकर द्वार’ के पास हुए इस प्रदर्शन में विपक्षी सांसदों के हाथों में एक बड़ा बैनर था, जिस पर लिखा था- ‘वोट चोरी, पेपर चोरी, चंदा चोरी’ The post Video : ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारों से गूंजा संसद परिसर, NDA सांसदों ने किया हीरो जैसा स्वागत appeared first on Naya Vichar.

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‘अगर छात्रों को रिहा नहीं किया तो NDA को महंगा पड़ेगा’, गिरफ्तारी और AK-47 से फायरिंग मामले में तेजस्वी यादव की चेतावनी

FIR On Students: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक बार फिर एक्टिव मोड में आ गए हैं. 25 जुलाई को हुए प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और उन पर फायरिंग किए जाने को लेकर वे भड़क गए हैं. तेजस्वी यादव ने एक्स के जरिए एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने प्रशासन पर तंज कसने के साथ-साथ चेतावनी भी दे दी है. तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में क्या लिखा? नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लिखा, ‘तमाम लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग देश में पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 से गोली चलवाई गई है’. आगे उन्होंने यह भी लिखा कि ‘छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हजारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है, परिजनों को प्रताड़ित किया जा रहा है. अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो NDA प्रशासन को महंगा पड़ेगा’. प्रदर्शनकारियों को मिला तेजस्वी का सपोर्ट इस तरह से तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारियों का पूरा सपोर्ट कर दिया है. उन्होंने सीधा-सीधा प्रशासन को चेतावनी भी देते हुए खामियाजा भुगतने की बात कह दी है. इधर, सीवान जिले में एक जवान की वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें देखा गया कि वह एके-47 से फायरिंग कर रहा है. इसके बाद मामले की जांच की गई और उसे निलंबित कर दिया गया. पटना लौटते ही दी थी चेतावनी तेजस्वी यादव लंबे समय के बाद रविवार को पटना लौटे. इस दौरान एयरपोर्ट पर मीडियाकर्मियों से बातचीत के वक्त उन्होंने प्रशासन पर तंज कसा था. तेजस्वी यादव ने कहा था, छात्र अपने भविष्य को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसे लेकर दिल्ली में छात्रों की मांग पर सहमति बन चुकी है. साथ ही आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे को वापस लेने का फैसला लिया गया. इसके बावजूद छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है. इस दौरान तेजस्वी यादव ने प्रशासन को सोमवार यानी कि आज तक के लिए अल्टीमेटम भी दिया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि सोमवार तक अगर केस वापस नहीं किया जाता है और छात्रों को रिहा नहीं किया जाता है तो विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा. Also Read: ‘बर्थडे के लिए केक लेकर लौट रहा था, तभी हुई फायरिंग’, बिहार में प्रदर्शन को लेकर 400 से अधिक गिरफ्तार The post ‘अगर छात्रों को रिहा नहीं किया तो NDA को महंगा पड़ेगा’, गिरफ्तारी और AK-47 से फायरिंग मामले में तेजस्वी यादव की चेतावनी appeared first on Naya Vichar.

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जंतर-मंतर ने दुनिया को दिखाया नया भारत, हमारा जेन-जी सबसे अलग

नई दिल्ली से संदीप सावर्ण की रिपोर्ट 36 दिनों के लंबे धरने के बाद जब जंतर-मंतर से तिरंगे समेटे गए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ छात्र आंदोलन समाप्त हुआ, तो यह प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ, बल्कि हिंदुस्तानीय लोकतंत्र में विरोध की नेतृत्व का एक नया और अनोखा अध्याय शुरू हुआ. दुनिया के जेन-जी आंदोलनों से कितना अलग था हिंदुस्तान पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के अनेक देशों में जेन-जी ने बड़े आंदोलन किए हैं. कई जगह इन आंदोलनों ने सत्ता को चुनौती दी, लेकिन अनेक स्थानों पर वे व्यापक हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान में भी बदल गए. इन अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों की तुलना में जंतर-मंतर का आंदोलन एक अलग तस्वीर पेश करता है. यहां आंदोलनकारियों ने विरोध और अनुशासन को साथ लेकर चलने की कोशिश की. आंदोलन के दौरान स्वयं सफाई करना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और सांस्कृतिक गतिविधियों, कविता, संगीत, व्यंग्य और रचनात्मक पोस्टरों के माध्यम से अपनी बात रखना इसकी विशिष्ट पहचान बन गया. ये भी पढ़ें : इंडियन एग्जाम सिस्टम में बदलाव की तैयारी: नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी 6 सदस्यीय टास्क फोर्स; जानिए कौन-कौन हैं शामिल मास्क के पीछे छिपी एक और कहानी इस आंदोलन की एक दिलचस्प परत वह भी थी, जहां कुछ छात्र चेहरे पर मास्क या हेलमेट लगाकर धरने में शामिल हुए. कारण सुरक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक दबाव था. कई छात्रों का कहना था कि उनके परिवार सत्तारूढ़ दल के समर्थक हैं और वे घर में अनावश्यक विवाद नहीं चाहते थे. यह दृश्य बताता है कि हिंदुस्तानीय लोकतंत्र में नेतृत्वक मतभेद अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं, बल्कि परिवारों के भीतर भी मौजूद हैं. जंतर-मंतर ने दुनिया को दिखाया नया हिंदुस्तान, हमारा जेन-जी अलग देश के सामान्य नहीं, सबसे मेधावी छात्र सड़क पर थे. यह भी कोई सामान्य छात्र आंदोलन नहीं था. यहां देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थी मौजूद थे—आईआईटी, एम्स, आईआईएम, एनआईटी, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, मिरांडा हाउस और अनेक केंद्रीय विश्वविद्यालयों के छात्र. इनमें बड़ी संख्या उन युवाओं की थी जिन्होंने जेईई एडवांस्ड, नीट, कैट, क्लैट और सीयूईटी जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था. इसलिए आंदोलन के पोस्टर, नारे, रणनीति और सोशल मीडिया अभियान में भी एक अलग बौद्धिक परिपक्वता दिखाई दी. सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके विरोध की नई हिंदुस्तानीय भाषा हिंदुस्तानीय छात्र आंदोलनों का इतिहास लंबा रहा है. जेपी आंदोलन से लेकर मंडल आंदोलन और नागरिकता कानून विरोध तक. लेकिन जंतर-मंतर का यह आंदोलन एक नई प्रवृत्ति लेकर आया. यहां नारे थे, लेकिन घृणा कम थी. व्यंग्य था, लेकिन हिंसा नहीं. गुस्सा था, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति के प्रति सम्मान भी था. सोशल मीडिया था, लेकिन जमीन पर संगठन भी था. यह आंदोलन बताता है कि हिंदुस्तानीय जेन-जी डिजिटल मीम्स बना सकता है और संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ सकता है. वह सत्ता से सवाल पूछ सकता है और प्रदर्शन स्थल की सफाई भी कर सकता है. ये भी पढ़ें : Photos: असम में बाढ़ का कहर जारी, 6.5 लाख लोग अब भी प्रभावित, देखें तबाही की 13 तस्वीरें दुनिया के प्रमुख जेन-जी आंदोलन और उनका स्वरूप फ्रांस (2023): राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पेंशन सुधार नीति और बाद में 17 वर्षीय नाहेल की पुलिस गोलीबारी में मौत के बाद युवा सड़कों पर उतरे. हजारों गाड़ियां जलाई गईं, प्रशासनी इमारतों और दुकानों में तोड़फोड़ हुई. पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. चिली (2019): मेट्रो किराया बढ़ाए जाने के विरोध में शुरू हुआ छात्र आंदोलन जल्द ही राष्ट्रीय जनआंदोलन बन गया. राजधानी सैंटियागो समेत कई शहरों में मेट्रो स्टेशनों को आग लगा दी गई, सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा और कई लोगों की जान गई. हांगकांग (2019-20): प्रत्यर्पण विधेयक के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन मुख्य रूप से युवाओं और विश्वविद्यालय के छात्रों के नेतृत्व में चला. कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक संघर्ष, पेट्रोल बम, बैरिकेड और व्यापक गिरफ्तारियां देखने को मिलीं. संयुक्त राज्य अमेरिका (2024): गाजा युद्ध के विरोध में हार्वर्ड, कोलंबिया, यूसीएलए सहित कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने प्रदर्शन किए. अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ परिसरों में पुलिस कार्रवाई, झड़पें और गिरफ्तारियां हुईं. बांग्लादेश (2024): प्रशासनी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध में शुरू हुआ छात्र आंदोलन बेहद हिंसक हो गया. राजधानी ढाका सहित कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़, पुलिस से हिंसक संघर्ष और सैकड़ों लोगों की मौत हुई. इंटरनेट सेवाएं भी कई दिनों तक प्रभावित रहीं. नेपाल (2024-25): शिक्षा सुधार, भ्रष्टाचार और नेतृत्वक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विश्वविद्यालयों और युवाओं ने कई चरणों में प्रदर्शन किए. अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, हालांकि कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ झड़पें, पथराव और बल प्रयोग की घटनाएं भी सामने आईं. श्रीलंका (2022): आर्थिक संकट के दौरान अरगलया आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया. आंदोलन लंबे समय तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में राष्ट्रपति भवन पर कब्जा, प्रशासनी संपत्तियों में घुसने और कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाएं भी हुईं. जर्मनी और ब्रिटेन: जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर जेन-जी के नेतृत्व में कई आंदोलन हुए. अधिकांश प्रदर्शन अहिंसक रहे, हालांकि कुछ मौकों पर सड़क जाम, पुलिस से हल्की झड़पें और सार्वजनिक व्यवधान की घटनाएं दर्ज की गईं. The post जंतर-मंतर ने दुनिया को दिखाया नया हिंदुस्तान, हमारा जेन-जी सबसे अलग appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग करने वाला जवान सस्पेंड, पुलिस हेडक्वार्टर से मिला आदेश

Student Protest Police Suspend: 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच झड़प हुई. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उन पर लाठीचार्ज किया गया. सीवान जिले की बात करें तो, यहां जवान ने एके-47 से फायरिंग की थी. अब इस मामले में कार्रवाई की गई है. एके-47 से फायरिंग करने वाले जवान को सस्पेंड कर दिया है. यह कार्रवाई पुलिस हेडक्वार्टर से मिले आदेश के बाद किया गया है. प्रदर्शन के दौरान का एक वीडियो सामने आया, इसमें एक जवान को एके-47 से प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करते देखा गया, इसके बाद ही उन्हें सस्पेंड किया गया. वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, बिहार के अलग-अलग जिलों से जुड़े कई वीडियो और फोटो वायरल हुए थे. इसी तरह सीवान जिले से जुड़ा वीडियो भी वायरल हुआ. इसमें देखा गया कि प्रदर्शनकारियों पर एके-47 से फायरिंग की गई. इस मामले को पुलिस हेडक्वार्टर ने गंभीरता से लिया और फायरिंग करने वाले जवान को सस्पेंड कर दिया गया. कहा जा रहा है कि पुलिस की जिम्मेदारी होती है कानून-व्यवस्था को बनाए रखना. ऐसे अगर कहीं भी नियम का उल्लंघन होता है तो उसके खिलाफ विभाग कार्रवाई करेगा. साथ ही पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि मामले में जांच अभी और की जाएगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. गोलीबारी में घायल 3 प्रदर्शनकारियों की हालत स्थिर दूसरी तरफ, पटना के जयप्रभा मेदांता अस्पताल में भर्ती सीवान में गोलीबारी के शिकार तीन प्रदर्शनकारियों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है. 15 साल के मो. आरिफ घायलों में सबसे कम उम्र का है. वह एक दुकान में काम करता है. परिजनों ने बताया कि बंद के दौरान वह दुकान बंद कर घर लौट रहा था, तभी अचानक हुई गोलीबारी में एक गोली उसकी गर्दन में जा लगी. डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गर्दन से गोली निकाल दी है और अब उसकी हालत स्थिर है. Also Read: सम्राट चौधरी को दादी का इमोशनल लेटर, ‘मेरे पोते को बिना गलती गिरफ्तार किया गया’, लगाई गुहार- छात्रों को जेल नहीं भेजे The post बिहार में प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग करने वाला जवान सस्पेंड, पुलिस हेडक्वार्टर से मिला आदेश appeared first on Naya Vichar.

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5 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 550 अंक चढ़ा, निफ्टी 23900 के पार

5 दिन की लगातार गिरावट के बाद सोमवार, 27 जुलाई को हिंदुस्तानीय शेयर बाजार ने दमदार शुरुआत की. कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी, बैंकिंग समेत बड़े शेयरों में खरीदारी और पश्चिम एशिया में सैन्य हमलों पर रोक की समाचारों ने इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ाया. इसी का असर बाजार पर भी दिखा और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी 23,900 के स्तर के पार पहुंच गया. बाजार की शुरुआत कैसी रही? नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुताबिक, सुबह 9:15 बजे NIFTY50 160 अंक यानी 0.68% की बढ़त के साथ 23,928.40 पर खुला. पिछले कारोबारी सत्र में यह 23,767.45 पर बंद हुआ था. वहीं BSE Sensex करीब 550 अंक यानी 0.71% की तेजी के साथ 76,608.98 पर खुला. इससे पहले यह 76,059.77 पर बंद हुआ था. सुबह 9:35 बजे तक निफ्टी करीब 23,938 और सेंसेक्स 76,663 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. बाजार में तेजी की वजह क्या रही? इस तेजी के पीछे कई अहम कारण रहे. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बड़े और इंडेक्स हैवीवेट शेयरों में खरीदारी बैंकिंग सेक्टर में रिकवरी पश्चिम एशिया में सैन्य हमलों पर रोक की समाचारों से निवेशकों का भरोसा बढ़ना बाजार खुलने से पहले GIFT NIFTY (अगस्त कॉन्ट्रैक्ट) भी 0.66% की बढ़त के साथ 23,964 पर कारोबार कर रहा था. इससे पहले पिछले सप्ताह कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने और अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के चलते बाजार पर दबाव बना था. ये भी पढ़ें: ₹1.44 लाख पहुंचा सोना, चांदी ₹2.39 लाख, खरीदारी से पहले देखें 27 जुलाई के रेट इन्वेस्टर्स की नजर अब किन बातों पर रहेगी? इस सप्ताह मार्केट की दिशा तय करने में कुछ अहम फैक्टर भूमिका निभा सकते हैं. कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते या नए सीजफायर से जुड़े संकेत घरेलू कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के नतीजे इन घटनाक्रमों के आधार पर आने वाले दिनों में बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है. आज कौन से शेयर चमके और कौन फिसले? शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी वाले शेयरों में शामिल रहे: बढ़त वाले शेयर बढ़त इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) +3.4% इन्फोसिस +3.3% एशियन पेंट्स +2.5% इटर्नल +2.5% TCS +2.4% बजाज फाइनेंस +2.3% मैक्स हेल्थ +2.2% टेक महिंद्रा +2.1% वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में: गिरावट वाले शेयर गिरावट ONGC -1.9% SBI लाइफ इंश्योरेंस -0.38% बजाज ऑटो -0.27% ICICI बैंक -0.15% सुबह के कारोबार में NIFTY50 के 50 में से 46 शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल 4 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ है कि सोमवार को बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला. ये भी पढ़ें: 5% टूटा कच्चा तेल, ब्रेंट $87.84 पर पहुंचा, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? The post 5 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 550 अंक चढ़ा, निफ्टी 23900 के पार appeared first on Naya Vichar.

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Algorithm War : जानिए कैसे Social Media बदल रहा है देशों की राजनीति

Jantar Mantar Protest : जोहार. आज है 27 जुलाई. आप सोचते होंगे कि Instagram, Facebook, Youtube और सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन के साधन हैं. कुछ रील्स देख लीं, कुछ मीम्स शेयर कर दिए और दिन खत्म. लेकिन अगर कोई कहे कि आज के दौर में टैंक, मिसाइल और बंदूक से ज्यादा ताकतवर हथियार एक मोबाइल स्क्रीन बन चुकी है, तो शायद यकीन करना मुश्किल होगा. मगर दुनिया की नेतृत्व बदल चुकी है. पहले देशों को कमजोर करने के लिए सीमाओं पर युद्ध लड़े जाते थे. अब युद्ध लोगों के दिमाग में लड़े जाते हैं. पहले सैनिक सीमा पार करते थे, अब नैरेटिव सीमा पार करते हैं. पहले बम गिरते थे, अब एल्गोरिदम गिरते हैं. यही कारण है कि पूरी दुनिया सोशल मीडिया को सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में देखने लगी है. हिंदुस्तान की कहानी: क्या आपकी फीड किसी और ने तय की थी? हाल के वर्षों में हिंदुस्तान ने कई छात्र और युवा आंदोलनों को देखा. शुरुआत शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों से हुई. लेकिन सोशल मीडिया पर जो तस्वीर दिखाई गई, उस पर कई सवाल उठे. कई लोगों ने दावा किया कि उनके इंस्टाग्राम और फेसबुक फीड अचानक एक जैसे वीडियो से भर गए. हर वीडियो में लगभग एक जैसी भाषा, एक जैसा संगीत और एक जैसी भावनात्मक अपील थी. लेकिन जिन वीडियो में हिंसा, पत्थरबाजी, प्रशासनी संपत्ति को नुकसान या पुलिस पर हमले दिखाई देते थे, वे अपेक्षाकृत कम लोगों तक पहुंचे. यहीं से सवाल शुरू होता है- क्या सोशल मीडिया वही दिखाता है जो सच है? या फिर वही दिखाता है जो उसका एल्गोरिदम सबसे ज्यादा वायरल करना चाहता है? एल्गोरिदम कैसे तय करता है कि आप क्या देखेंगे? तकनीकी विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तटस्थ नहीं होते. उनका बिजनेस मॉडल लोगों को अधिक समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर आधारित है. इसलिए एल्गोरिदम उन पोस्टों को प्राथमिकता देते हैं जो गुस्सा, डर, भावनात्मक प्रतिक्रिया और विवाद पैदा करें. यानी सच से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है—एंगेजमेंट यदि कोई वीडियो आपको क्रोधित करता है, तो उसके वायरल होने की संभावना बढ़ जाती है. यदि कोई पोस्ट आपको भावुक बनाती है, तो वह ज्यादा लोगों तक पहुंचती है. और यदि कोई नैरेटिव समाज को दो हिस्सों में बांटता है, तो प्लेटफॉर्म का ट्रैफिक भी बढ़ता है. यहीं से एल्गोरिदम केवल तकनीक नहीं, बल्कि जनमत निर्माण का साधन बन जाता है. रंग क्रांति क्या है? दुनिया में एक शब्द काफी चर्चित रहा है- कलर रिवोल्यूशन. इसका अर्थ है ऐसा नेतृत्वक परिवर्तन जिसमें सेना नहीं, बल्कि जनभावनाओं को हथियार बनाया जाता है. इस मॉडल में सोशल मीडिया, डिजिटल अभियान, एनजीओ नेटवर्क और भावनात्मक नैरेटिव के माध्यम से प्रशासनों के खिलाफ व्यापक माहौल तैयार किया जाता है. कई विशेषज्ञ इसे आधुनिक दौर का सूचना युद्ध (Information Warfare) भी कहते हैं. अरब स्प्रिंग: जब फेसबुक बना क्रांति का मंच 2011 में दुनिया ने पहली बार सोशल मीडिया की नेतृत्वक शक्ति को बड़े स्तर पर देखा. ट्यूनीशिया की एक घटना देखते ही देखते फेसबुक और ट्विटर के जरिए पूरे अरब क्षेत्र में फैल गई. फिर मिस्र, लीबिया और सीरिया में बड़े आंदोलन हुए. उस समय सोशल मीडिया को लोकतंत्र का नया हथियार कहा गया. लेकिन वर्षों बाद तस्वीर बदली हुई दिखाई दी. लीबिया लंबे समय तक अस्थिरता से जूझता रहा. सीरिया गृहयुद्ध में फंस गया. लाखों लोग विस्थापित हुए. इसलिए आज सवाल पूछा जाता है कि क्या सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों का परिणाम हमेशा लोकतंत्र को मजबूत करता है, या कभी-कभी अराजकता भी पैदा करता है? हिंदुस्तान के पड़ोस में क्या हुआ? हिंदुस्तान के तीन पड़ोसी देश अक्सर इस बहस में उदाहरण के रूप में सामने आते हैं. श्रीलंका में आर्थिक संकट के दौरान सोशल मीडिया ने व्यापक जनसंगठन में बड़ी भूमिका निभाई. बांग्लादेश में डिजिटल अभियान और नेतृत्वक ध्रुवीकरण लगातार चर्चा का विषय रहे. नेपाल में भी नेतृत्वक अस्थिरता के दौरान ऑनलाइन नैरेटिव का प्रभाव देखा गया. इन तीनों उदाहरणों में एक समान बात थी- डिजिटल प्लेटफॉर्म नेतृत्वक संघर्ष का प्रमुख मैदान बन चुके थे. विदेशी फंडिंग का विवाद यहीं एक और बड़ा विवाद सामने आता है. कई विश्लेषक अमेरिका स्थित संस्थाओं- USAID, National Endowment for Democracy (NED) और George Soros समर्थित Open Society Foundations की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं. इन संस्थाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य लोकतंत्र, मानवाधिकार और नागरिक समाज को मजबूत करना है. दूसरी ओर, आलोचकों का आरोप है कि कुछ देशों में ये संस्थाएं स्थानीय नेतृत्व और प्रशासन विरोधी अभियानों को अप्रत्यक्ष समर्थन देती हैं. इसी वजह से कई देशों ने इनके संचालन पर कड़े नियम बनाए हैं. यह विषय आज भी अंतरराष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना हुआ है. नया विचार UPSC पर खास कवरेज कर रहा है, ताकि आपको एक्सपर्ट गाइडेंस के लिए कहीं और न जाना पड़े. UPSC परीक्षाओं से जुड़ी सभी ताजा जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें. नया विचार UPSC Exclusive : UPSC : एक ख्वाब, कई इम्तिहान नया विचार UPSC Exclusive Interview : आखिर UPSC इतना डरा क्यों रहा है? पटना वाले Eduteria का Exclusive Interview नया विचार UPSC Exclusive Interview : UPSC : ‘Tina Dabi जहां भी होती, उसी समर्पण के साथ मेहनत करती’- Khan Sir का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू क्या सोशल मीडिया कंपनियां वास्तव में निष्पक्ष हैं? मेटा सहित कई बड़ी टेक कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में विवादों के केंद्र में रही हैं. अलग-अलग देशों में उन पर आरोप लगे कि उन्होंने कुछ कंटेंट को सीमित किया, कुछ को बढ़ावा दिया और कई बार प्रशासनी अनुरोधों के आधार पर सामग्री हटाई. कंपनियों का कहना है कि वे स्थानीय कानूनों का पालन करती हैं। लेकिन आलोचक पूछते हैं- यदि कुछ निजी कंपनियां अरबों लोगों की सूचना नियंत्रित करती हों, तो क्या उनके एल्गोरिदम लोकतंत्र को भी प्रभावित नहीं करेंगे? चीन का मॉडल: डिजिटल संप्रभुता या सेंसरशिप? चीन ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे कई पश्चिमी प्लेटफॉर्म पर वर्षों पहले प्रतिबंध लगा दिया. इसके स्थान पर उसने वीचैट, वीबो और अन्य घरेलू प्लेटफॉर्म विकसित किए. चीन का तर्क है कि सूचना व्यवस्था पर राष्ट्रीय नियंत्रण भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है. आलोचक इसे सेंसरशिप कहते हैं. समर्थक इसे डिजिटल आत्मनिर्भरता. इसी वजह से हिंदुस्तान में भी समय-समय पर यह बहस

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Video : अमेरिका के सिएटल में स्पेस नीडल के पास फायरिंग, 2 की मौत

Seattle Shooting Video : सिएटल दमकल विभाग के अधिकारी के मुताबिक, इस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोलीबारी के कारणों का पता लगाया जा रहा है. गोलीबारी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं. सिएटल पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया, “पुलिस गोलीबारी की घटना की जांच कर रही है. कई लोग गोली लगने से घायल हुए हैं. सिएटल सेंटर में गोलियां चलने की सूचना मिली है. आगे की जानकारी जल्द दी जाएगी. कृपया इस इलाके से दूर रहें.” ‘सिएटल सेंटर’ में फूड फेस्टिवल ‘बाइट ऑफ सिएटल’ का आयोजन किया गया था और उसी वक्त यह घटना हुई. इस सालाना फूड फेस्टिवल की शुरुआत 1982 में हुई थी. आयोजकों की वेबसाइट के अनुसार, इस तीन दिवसीय आयोजन में हर वर्ष लगभग 3.5 लाख लोग आते हैं. लोग खाना-पीना का आनंद लेते हैं और मिलकर त्योहार मनाते हैं. सिएटल सेंटर में ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फेस्टिवल के दौरान रविवार (26 जुलाई) शाम करीब 6 बजे (EST) गोलीबारी हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, घटना में घायल लोगों को इलाज के लिए हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर ले जाया गया है. प्रत्यक्षदर्शियों ने CNN से जुड़े चैनल KOMO को बताया, “घटनास्थल के अंदर कम से कम सात से आठ गोलियों की आवाज सुनी गई. इसके बाद लोग हर तरफ भागने लगे और वहां अफरा-तफरी मच गई.” 25 वर्षीय एस्टन वाकोनाबो ने बताया कि जैसे ही गोलियों की आवाज सुनाई दी, लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे. उन्होंने कहा, “वहां पूरी तरह अफरा-तफरी मच गई थी.” एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने सिएटल टाइम्स को बताया, “कार्यक्रम में पहले से ही काफी भीड़ थी. खाने के स्टॉलों की लंबी कतारों के बीच लोगों के लिए चलना भी मुश्किल हो रहा था. इस दौरान ये घटना हुई.” The post Video : अमेरिका के सिएटल में स्पेस नीडल के पास फायरिंग, 2 की मौत appeared first on Naya Vichar.

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TVS Jupiter 125 में क्या मिलता है खास? खरीदने से पहले जानें कीमत से लेकर फीचर्स तक की पूरी डिटेल

125cc स्कूटर सेगमेंट में TVS Jupiter 125 अपनी प्रैक्टिकल डिजाइन और एडवांस्ड फीचर्स की वजह से काफी पॉपुलर है. अगर आप रोजाना ऑफिस, कॉलेज या फैमिली के साथ सफर के लिए एक भरोसेमंद स्कूटर तलाश रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. ऐसे में खरीदने से पहले यहां जानिए इसकी कीमत, इंजन, फीचर्स, स्टोरेज और बाकी सभी जरूरी जानकारी. TVS Jupiter 125 की कीमत कितनी है? TVS Jupiter 125 हिंदुस्तानीय बाजार में चार वेरिएंट में उपलब्ध है. इसमें Drum Alloy, Disc Alloy, DT SXC और SmartXonnect शामिल है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 87,171 रुपये है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत 95,772 रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है. TVS Jupiter 125 में कौन-सा इंजन मिलता है? इस स्कूटर में 124.8cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन दिया गया है. यह इंजन 8.15hp की पावर और 10.5Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इसके साथ CVT ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मिलता है, जिससे शहर में चलाना काफी आसान हो जाता है. फ्यूल टैंक और स्टोरेज कितनी है? TVS Jupiter 125 की सबसे बड़ी खासियत इसका अंडर-फ्लोर फ्यूल टैंक है. इसमें 5.1 लीटर का फ्यूल टैंक दिया गया है, जिससे सीट के नीचे ज्यादा जगह मिलती है. स्कूटर में 33 लीटर की अंडरसीट स्टोरेज मिलती है. कंपनी का दावा है कि इसमें दो फुल-फेस हेलमेट आसानी से रखे जा सकते हैं. इसके अलावा फ्रंट में एक्सटर्नल फ्यूल फिलर दिया गया है, जिससे पेट्रोल भरवाने के लिए सीट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती. TVS Jupiter 125 में कौन-कौन से फीचर्स मिलते हैं? वेरिएंट के अनुसार TVS Jupiter 125 में कई एडवांस्ड फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें- डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर Bluetooth कनेक्टिविटी TVS SmartXonnect टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन कॉल और SMS अलर्ट वॉयस असिस्ट Distance to Empty फीचर LED हेडलाइट (हायर वेरिएंट) iGO Assist Emergency Brake Warning (EBW) फ्रंट एक्सटर्नल फ्यूल फिलर शामिल हैं. वजन, सीट हाइट और ग्राउंड क्लीयरेंस TVS Jupiter 125 का वजन वेरिएंट के हिसाब से 108 से 109 किलोग्राम तक है. इसकी सीट हाइट 765mm और ग्राउंड क्लीयरेंस 163mm है. यह सीट हाइट ज्यादातर राइडर्स के लिए आरामदायक मानी जाती है. ब्रेकिंग सिस्टम कैसा है? Drum Alloy वेरिएंट में आगे और पीछे दोनों तरफ ड्रम ब्रेक दिए गए हैं. वहीं Disc Alloy, DT SXC और SmartXonnect वेरिएंट में आगे डिस्क और पीछे ड्रम ब्रेक मिलता है. सभी वेरिएंट में TVS Combi Braking System (CBS) स्टैंडर्ड दिया गया है, जिससे ब्रेकिंग ज्यादा सुरक्षित और बैलेंस्ड होती है. क्या TVS Jupiter 125 खरीदना सही रहेगा? अगर आपकी प्रायोरिटी बड़ा स्टोरेज, आरामदायक राइड, अच्छे फीचर्स और फैमिली के लिए भरोसेमंद स्कूटर है, तो TVS Jupiter 125 एक मजबूत ऑप्शन साबित हो सकता है. इसका बड़ा अंडरसीट स्टोरेज, फ्रंट फ्यूल फिलर और SmartXonnect जैसे फीचर्स इसे 125cc स्कूटर सेगमेंट में अलग पहचान दिलाते हैं. यह भी पढ़ें: River Indie इलेक्ट्रिक स्कूटर में क्या-क्या मिलता है? खरीदने से पहले जानें इसके फीचर्स The post TVS Jupiter 125 में क्या मिलता है खास? खरीदने से पहले जानें कीमत से लेकर फीचर्स तक की पूरी डिटेल appeared first on Naya Vichar.

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