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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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5 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 550 अंक चढ़ा, निफ्टी 23900 के पार

5 दिन की लगातार गिरावट के बाद सोमवार, 27 जुलाई को हिंदुस्तानीय शेयर बाजार ने दमदार शुरुआत की. कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी, बैंकिंग समेत बड़े शेयरों में खरीदारी और पश्चिम एशिया में सैन्य हमलों पर रोक की समाचारों ने इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ाया. इसी का असर बाजार पर भी दिखा और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी 23,900 के स्तर के पार पहुंच गया. बाजार की शुरुआत कैसी रही? नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुताबिक, सुबह 9:15 बजे NIFTY50 160 अंक यानी 0.68% की बढ़त के साथ 23,928.40 पर खुला. पिछले कारोबारी सत्र में यह 23,767.45 पर बंद हुआ था. वहीं BSE Sensex करीब 550 अंक यानी 0.71% की तेजी के साथ 76,608.98 पर खुला. इससे पहले यह 76,059.77 पर बंद हुआ था. सुबह 9:35 बजे तक निफ्टी करीब 23,938 और सेंसेक्स 76,663 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. बाजार में तेजी की वजह क्या रही? इस तेजी के पीछे कई अहम कारण रहे. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बड़े और इंडेक्स हैवीवेट शेयरों में खरीदारी बैंकिंग सेक्टर में रिकवरी पश्चिम एशिया में सैन्य हमलों पर रोक की समाचारों से निवेशकों का भरोसा बढ़ना बाजार खुलने से पहले GIFT NIFTY (अगस्त कॉन्ट्रैक्ट) भी 0.66% की बढ़त के साथ 23,964 पर कारोबार कर रहा था. इससे पहले पिछले सप्ताह कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने और अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के चलते बाजार पर दबाव बना था. ये भी पढ़ें: ₹1.44 लाख पहुंचा सोना, चांदी ₹2.39 लाख, खरीदारी से पहले देखें 27 जुलाई के रेट इन्वेस्टर्स की नजर अब किन बातों पर रहेगी? इस सप्ताह मार्केट की दिशा तय करने में कुछ अहम फैक्टर भूमिका निभा सकते हैं. कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते या नए सीजफायर से जुड़े संकेत घरेलू कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के नतीजे इन घटनाक्रमों के आधार पर आने वाले दिनों में बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है. आज कौन से शेयर चमके और कौन फिसले? शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी वाले शेयरों में शामिल रहे: बढ़त वाले शेयर बढ़त इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) +3.4% इन्फोसिस +3.3% एशियन पेंट्स +2.5% इटर्नल +2.5% TCS +2.4% बजाज फाइनेंस +2.3% मैक्स हेल्थ +2.2% टेक महिंद्रा +2.1% वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में: गिरावट वाले शेयर गिरावट ONGC -1.9% SBI लाइफ इंश्योरेंस -0.38% बजाज ऑटो -0.27% ICICI बैंक -0.15% सुबह के कारोबार में NIFTY50 के 50 में से 46 शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल 4 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ है कि सोमवार को बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला. ये भी पढ़ें: 5% टूटा कच्चा तेल, ब्रेंट $87.84 पर पहुंचा, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? The post 5 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 550 अंक चढ़ा, निफ्टी 23900 के पार appeared first on Naya Vichar.

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Algorithm War : जानिए कैसे Social Media बदल रहा है देशों की राजनीति

Jantar Mantar Protest : जोहार. आज है 27 जुलाई. आप सोचते होंगे कि Instagram, Facebook, Youtube और सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन के साधन हैं. कुछ रील्स देख लीं, कुछ मीम्स शेयर कर दिए और दिन खत्म. लेकिन अगर कोई कहे कि आज के दौर में टैंक, मिसाइल और बंदूक से ज्यादा ताकतवर हथियार एक मोबाइल स्क्रीन बन चुकी है, तो शायद यकीन करना मुश्किल होगा. मगर दुनिया की नेतृत्व बदल चुकी है. पहले देशों को कमजोर करने के लिए सीमाओं पर युद्ध लड़े जाते थे. अब युद्ध लोगों के दिमाग में लड़े जाते हैं. पहले सैनिक सीमा पार करते थे, अब नैरेटिव सीमा पार करते हैं. पहले बम गिरते थे, अब एल्गोरिदम गिरते हैं. यही कारण है कि पूरी दुनिया सोशल मीडिया को सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में देखने लगी है. हिंदुस्तान की कहानी: क्या आपकी फीड किसी और ने तय की थी? हाल के वर्षों में हिंदुस्तान ने कई छात्र और युवा आंदोलनों को देखा. शुरुआत शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों से हुई. लेकिन सोशल मीडिया पर जो तस्वीर दिखाई गई, उस पर कई सवाल उठे. कई लोगों ने दावा किया कि उनके इंस्टाग्राम और फेसबुक फीड अचानक एक जैसे वीडियो से भर गए. हर वीडियो में लगभग एक जैसी भाषा, एक जैसा संगीत और एक जैसी भावनात्मक अपील थी. लेकिन जिन वीडियो में हिंसा, पत्थरबाजी, प्रशासनी संपत्ति को नुकसान या पुलिस पर हमले दिखाई देते थे, वे अपेक्षाकृत कम लोगों तक पहुंचे. यहीं से सवाल शुरू होता है- क्या सोशल मीडिया वही दिखाता है जो सच है? या फिर वही दिखाता है जो उसका एल्गोरिदम सबसे ज्यादा वायरल करना चाहता है? एल्गोरिदम कैसे तय करता है कि आप क्या देखेंगे? तकनीकी विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तटस्थ नहीं होते. उनका बिजनेस मॉडल लोगों को अधिक समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर आधारित है. इसलिए एल्गोरिदम उन पोस्टों को प्राथमिकता देते हैं जो गुस्सा, डर, भावनात्मक प्रतिक्रिया और विवाद पैदा करें. यानी सच से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है—एंगेजमेंट यदि कोई वीडियो आपको क्रोधित करता है, तो उसके वायरल होने की संभावना बढ़ जाती है. यदि कोई पोस्ट आपको भावुक बनाती है, तो वह ज्यादा लोगों तक पहुंचती है. और यदि कोई नैरेटिव समाज को दो हिस्सों में बांटता है, तो प्लेटफॉर्म का ट्रैफिक भी बढ़ता है. यहीं से एल्गोरिदम केवल तकनीक नहीं, बल्कि जनमत निर्माण का साधन बन जाता है. रंग क्रांति क्या है? दुनिया में एक शब्द काफी चर्चित रहा है- कलर रिवोल्यूशन. इसका अर्थ है ऐसा नेतृत्वक परिवर्तन जिसमें सेना नहीं, बल्कि जनभावनाओं को हथियार बनाया जाता है. इस मॉडल में सोशल मीडिया, डिजिटल अभियान, एनजीओ नेटवर्क और भावनात्मक नैरेटिव के माध्यम से प्रशासनों के खिलाफ व्यापक माहौल तैयार किया जाता है. कई विशेषज्ञ इसे आधुनिक दौर का सूचना युद्ध (Information Warfare) भी कहते हैं. अरब स्प्रिंग: जब फेसबुक बना क्रांति का मंच 2011 में दुनिया ने पहली बार सोशल मीडिया की नेतृत्वक शक्ति को बड़े स्तर पर देखा. ट्यूनीशिया की एक घटना देखते ही देखते फेसबुक और ट्विटर के जरिए पूरे अरब क्षेत्र में फैल गई. फिर मिस्र, लीबिया और सीरिया में बड़े आंदोलन हुए. उस समय सोशल मीडिया को लोकतंत्र का नया हथियार कहा गया. लेकिन वर्षों बाद तस्वीर बदली हुई दिखाई दी. लीबिया लंबे समय तक अस्थिरता से जूझता रहा. सीरिया गृहयुद्ध में फंस गया. लाखों लोग विस्थापित हुए. इसलिए आज सवाल पूछा जाता है कि क्या सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों का परिणाम हमेशा लोकतंत्र को मजबूत करता है, या कभी-कभी अराजकता भी पैदा करता है? हिंदुस्तान के पड़ोस में क्या हुआ? हिंदुस्तान के तीन पड़ोसी देश अक्सर इस बहस में उदाहरण के रूप में सामने आते हैं. श्रीलंका में आर्थिक संकट के दौरान सोशल मीडिया ने व्यापक जनसंगठन में बड़ी भूमिका निभाई. बांग्लादेश में डिजिटल अभियान और नेतृत्वक ध्रुवीकरण लगातार चर्चा का विषय रहे. नेपाल में भी नेतृत्वक अस्थिरता के दौरान ऑनलाइन नैरेटिव का प्रभाव देखा गया. इन तीनों उदाहरणों में एक समान बात थी- डिजिटल प्लेटफॉर्म नेतृत्वक संघर्ष का प्रमुख मैदान बन चुके थे. विदेशी फंडिंग का विवाद यहीं एक और बड़ा विवाद सामने आता है. कई विश्लेषक अमेरिका स्थित संस्थाओं- USAID, National Endowment for Democracy (NED) और George Soros समर्थित Open Society Foundations की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं. इन संस्थाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य लोकतंत्र, मानवाधिकार और नागरिक समाज को मजबूत करना है. दूसरी ओर, आलोचकों का आरोप है कि कुछ देशों में ये संस्थाएं स्थानीय नेतृत्व और प्रशासन विरोधी अभियानों को अप्रत्यक्ष समर्थन देती हैं. इसी वजह से कई देशों ने इनके संचालन पर कड़े नियम बनाए हैं. यह विषय आज भी अंतरराष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना हुआ है. नया विचार UPSC पर खास कवरेज कर रहा है, ताकि आपको एक्सपर्ट गाइडेंस के लिए कहीं और न जाना पड़े. UPSC परीक्षाओं से जुड़ी सभी ताजा जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें. नया विचार UPSC Exclusive : UPSC : एक ख्वाब, कई इम्तिहान नया विचार UPSC Exclusive Interview : आखिर UPSC इतना डरा क्यों रहा है? पटना वाले Eduteria का Exclusive Interview नया विचार UPSC Exclusive Interview : UPSC : ‘Tina Dabi जहां भी होती, उसी समर्पण के साथ मेहनत करती’- Khan Sir का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू क्या सोशल मीडिया कंपनियां वास्तव में निष्पक्ष हैं? मेटा सहित कई बड़ी टेक कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में विवादों के केंद्र में रही हैं. अलग-अलग देशों में उन पर आरोप लगे कि उन्होंने कुछ कंटेंट को सीमित किया, कुछ को बढ़ावा दिया और कई बार प्रशासनी अनुरोधों के आधार पर सामग्री हटाई. कंपनियों का कहना है कि वे स्थानीय कानूनों का पालन करती हैं। लेकिन आलोचक पूछते हैं- यदि कुछ निजी कंपनियां अरबों लोगों की सूचना नियंत्रित करती हों, तो क्या उनके एल्गोरिदम लोकतंत्र को भी प्रभावित नहीं करेंगे? चीन का मॉडल: डिजिटल संप्रभुता या सेंसरशिप? चीन ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे कई पश्चिमी प्लेटफॉर्म पर वर्षों पहले प्रतिबंध लगा दिया. इसके स्थान पर उसने वीचैट, वीबो और अन्य घरेलू प्लेटफॉर्म विकसित किए. चीन का तर्क है कि सूचना व्यवस्था पर राष्ट्रीय नियंत्रण भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है. आलोचक इसे सेंसरशिप कहते हैं. समर्थक इसे डिजिटल आत्मनिर्भरता. इसी वजह से हिंदुस्तान में भी समय-समय पर यह बहस

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Video : अमेरिका के सिएटल में स्पेस नीडल के पास फायरिंग, 2 की मौत

Seattle Shooting Video : सिएटल दमकल विभाग के अधिकारी के मुताबिक, इस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोलीबारी के कारणों का पता लगाया जा रहा है. गोलीबारी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं. सिएटल पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया, “पुलिस गोलीबारी की घटना की जांच कर रही है. कई लोग गोली लगने से घायल हुए हैं. सिएटल सेंटर में गोलियां चलने की सूचना मिली है. आगे की जानकारी जल्द दी जाएगी. कृपया इस इलाके से दूर रहें.” ‘सिएटल सेंटर’ में फूड फेस्टिवल ‘बाइट ऑफ सिएटल’ का आयोजन किया गया था और उसी वक्त यह घटना हुई. इस सालाना फूड फेस्टिवल की शुरुआत 1982 में हुई थी. आयोजकों की वेबसाइट के अनुसार, इस तीन दिवसीय आयोजन में हर वर्ष लगभग 3.5 लाख लोग आते हैं. लोग खाना-पीना का आनंद लेते हैं और मिलकर त्योहार मनाते हैं. सिएटल सेंटर में ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फेस्टिवल के दौरान रविवार (26 जुलाई) शाम करीब 6 बजे (EST) गोलीबारी हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, घटना में घायल लोगों को इलाज के लिए हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर ले जाया गया है. प्रत्यक्षदर्शियों ने CNN से जुड़े चैनल KOMO को बताया, “घटनास्थल के अंदर कम से कम सात से आठ गोलियों की आवाज सुनी गई. इसके बाद लोग हर तरफ भागने लगे और वहां अफरा-तफरी मच गई.” 25 वर्षीय एस्टन वाकोनाबो ने बताया कि जैसे ही गोलियों की आवाज सुनाई दी, लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे. उन्होंने कहा, “वहां पूरी तरह अफरा-तफरी मच गई थी.” एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने सिएटल टाइम्स को बताया, “कार्यक्रम में पहले से ही काफी भीड़ थी. खाने के स्टॉलों की लंबी कतारों के बीच लोगों के लिए चलना भी मुश्किल हो रहा था. इस दौरान ये घटना हुई.” The post Video : अमेरिका के सिएटल में स्पेस नीडल के पास फायरिंग, 2 की मौत appeared first on Naya Vichar.

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TVS Jupiter 125 में क्या मिलता है खास? खरीदने से पहले जानें कीमत से लेकर फीचर्स तक की पूरी डिटेल

125cc स्कूटर सेगमेंट में TVS Jupiter 125 अपनी प्रैक्टिकल डिजाइन और एडवांस्ड फीचर्स की वजह से काफी पॉपुलर है. अगर आप रोजाना ऑफिस, कॉलेज या फैमिली के साथ सफर के लिए एक भरोसेमंद स्कूटर तलाश रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. ऐसे में खरीदने से पहले यहां जानिए इसकी कीमत, इंजन, फीचर्स, स्टोरेज और बाकी सभी जरूरी जानकारी. TVS Jupiter 125 की कीमत कितनी है? TVS Jupiter 125 हिंदुस्तानीय बाजार में चार वेरिएंट में उपलब्ध है. इसमें Drum Alloy, Disc Alloy, DT SXC और SmartXonnect शामिल है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 87,171 रुपये है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत 95,772 रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है. TVS Jupiter 125 में कौन-सा इंजन मिलता है? इस स्कूटर में 124.8cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन दिया गया है. यह इंजन 8.15hp की पावर और 10.5Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इसके साथ CVT ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मिलता है, जिससे शहर में चलाना काफी आसान हो जाता है. फ्यूल टैंक और स्टोरेज कितनी है? TVS Jupiter 125 की सबसे बड़ी खासियत इसका अंडर-फ्लोर फ्यूल टैंक है. इसमें 5.1 लीटर का फ्यूल टैंक दिया गया है, जिससे सीट के नीचे ज्यादा जगह मिलती है. स्कूटर में 33 लीटर की अंडरसीट स्टोरेज मिलती है. कंपनी का दावा है कि इसमें दो फुल-फेस हेलमेट आसानी से रखे जा सकते हैं. इसके अलावा फ्रंट में एक्सटर्नल फ्यूल फिलर दिया गया है, जिससे पेट्रोल भरवाने के लिए सीट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती. TVS Jupiter 125 में कौन-कौन से फीचर्स मिलते हैं? वेरिएंट के अनुसार TVS Jupiter 125 में कई एडवांस्ड फीचर्स दिए गए हैं, जिनमें- डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर Bluetooth कनेक्टिविटी TVS SmartXonnect टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन कॉल और SMS अलर्ट वॉयस असिस्ट Distance to Empty फीचर LED हेडलाइट (हायर वेरिएंट) iGO Assist Emergency Brake Warning (EBW) फ्रंट एक्सटर्नल फ्यूल फिलर शामिल हैं. वजन, सीट हाइट और ग्राउंड क्लीयरेंस TVS Jupiter 125 का वजन वेरिएंट के हिसाब से 108 से 109 किलोग्राम तक है. इसकी सीट हाइट 765mm और ग्राउंड क्लीयरेंस 163mm है. यह सीट हाइट ज्यादातर राइडर्स के लिए आरामदायक मानी जाती है. ब्रेकिंग सिस्टम कैसा है? Drum Alloy वेरिएंट में आगे और पीछे दोनों तरफ ड्रम ब्रेक दिए गए हैं. वहीं Disc Alloy, DT SXC और SmartXonnect वेरिएंट में आगे डिस्क और पीछे ड्रम ब्रेक मिलता है. सभी वेरिएंट में TVS Combi Braking System (CBS) स्टैंडर्ड दिया गया है, जिससे ब्रेकिंग ज्यादा सुरक्षित और बैलेंस्ड होती है. क्या TVS Jupiter 125 खरीदना सही रहेगा? अगर आपकी प्रायोरिटी बड़ा स्टोरेज, आरामदायक राइड, अच्छे फीचर्स और फैमिली के लिए भरोसेमंद स्कूटर है, तो TVS Jupiter 125 एक मजबूत ऑप्शन साबित हो सकता है. इसका बड़ा अंडरसीट स्टोरेज, फ्रंट फ्यूल फिलर और SmartXonnect जैसे फीचर्स इसे 125cc स्कूटर सेगमेंट में अलग पहचान दिलाते हैं. यह भी पढ़ें: River Indie इलेक्ट्रिक स्कूटर में क्या-क्या मिलता है? खरीदने से पहले जानें इसके फीचर्स The post TVS Jupiter 125 में क्या मिलता है खास? खरीदने से पहले जानें कीमत से लेकर फीचर्स तक की पूरी डिटेल appeared first on Naya Vichar.

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सम्राट चौधरी को दादी का इमोशनल लेटर, ‘मेरे पोते को बिना गलती गिरफ्तार किया गया’, लगाई गुहार- छात्रों को जेल नहीं भेजे

Patna Student Arrest: ‘मैं रामसखी देवी, पटना की एक साधारण गरीब दादी हूं. उम्र ढल चुकी है, शरीर में ताकत नहीं बची, फिर भी आज थाने के चक्कर काट रही हूं. मेरे पोते को, जो सिर्फ 12वीं कक्षा में पढ़ता है, पुलिस ने बिना किसी अपराध के गिरफ्तार कर लिया है.’ यह बातें एक छात्र की दादी ने सीएम सम्राट चौधरी से कही है. 258 छात्रों को किया गया गिरफ्तार पटना में नीट पेपर लीक के दौरान प्रदर्शन कर रहे लगभग 258 छात्रों को गिरफ्तार किया गया है. गौर करने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई उस समय की गई है जब केंद्र प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने का ऐलान किया है. इसके बावजूद बिहार में बड़ी संख्या में छात्रों को जेल भेजा गया. इसे लेकर 12वीं क्लास के एक छात्र की दादी ने सीएम सम्राट चौधरी को लेटर लिखकर गुहार लगाई है. लेटर में क्या-क्या लिखा? 12वीं के छात्र की दादी रामसखी देवी ने अपने लेटर में लिखा, बच्चा खाना लेने दुकान पर गया था. लेकिन अचानक वहां भगदड़ मच गई. इस दौरान लोग डरकर भागने लगे. मेरा पोता भी घबरा गया. उसी बीच पुलिस वाले जबरन दुकान में घुस आए और जो भी सामने दिखा, उसे पकड़ने लगे. मेरे पोते ना कोई प्रदर्शन किया, न कोई नारा लगाया और न ही कोई पत्थर फेंका. वो तो सिर्फ अपना खाना लेने गया था. लेकिन पुलिस ने उसे धक्के मारकर, मार-पीटकर गिरफ्तार कर लिया. थाने में बैठे अधिकारी उसे छोड़ने का नाम नहीं ले रहे. सम्राट चौधरी से की ये अपील आगे अपने लेटर में उन्होंने सीएम सम्राट चौधरी से छात्रों को छोड़ देने की अपील की. लेटर में लिखा- सम्राट चौधरी जी, आप खुद एक संवेदनशील नेता हैं. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जब कोई दादी अपने पोते के लिए थाने के चक्कर काटे और रात को नींद न आए, तो उस परिवार की क्या हालत होती है? मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं. कृपया कर तुरंत ही इस मामले में हस्तक्षेप करें. मेरे पोते को निर्दोष साबित कर छोड़ दिया जाए. निर्दोष बच्चों को अपराधियों की तरह न पकड़ा जाए. मैं और मेरा पूरा परिवार आपकी इस मदद का हमेशा आभारी रहेगा. रविवार आधी रात हुई कार्रवाई इस मामले में रविवार रात को पटना पुलिस ने कार्रवाई की. छज्जू बाग स्थित जजेज आवास छात्रों को लाया गया था. यहां सुनवाई के बाद 87 छात्रों को बेऊर जेल भेजा गया. जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 24 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें 285 नामजद और करीब 6 हजार अज्ञात आरोपित हैं. Also Read: पटना में गिरफ्तार छात्रों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज, रात में जज के सामने पेशी फिर जेल, जानिए क्या-क्या हुआ The post सम्राट चौधरी को दादी का इमोशनल लेटर, ‘मेरे पोते को बिना गलती गिरफ्तार किया गया’, लगाई गुहार- छात्रों को जेल नहीं भेजे appeared first on Naya Vichar.

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Parliament Session Live : पेपर लीक पर कानून और छात्र आंदोलन पर घमासान, संसद के मानसून सत्र में आज सरकार-विपक्ष आमने-सामने

NEET परीक्षा विवाद को लेकर प्रशासन कई कदम उठा रही है. 27 जुलाई को सत्र के दौरान प्रशासन की ओर से पेपर लीक बिल पेश किया जाना है. CJP ने अपनी मांगें माने जाने के बाद आंदोलन खत्म कर दिया है, लेकिन विपक्ष प्रशासन को संसद में घेरने की तैयारी में है. संसद सत्र की हर अपडेट के लिए बने रहें नया विचार के साथ. The post Parliament Session Live : पेपर लीक पर कानून और छात्र आंदोलन पर घमासान, संसद के मानसून सत्र में आज प्रशासन-विपक्ष आमने-सामने appeared first on Naya Vichar.

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CJP मार्च विवाद : राहुल गांधी का अमित शाह से सवाल- छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया?

राहुल गांधी ने अमित शाह पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि शाह को पहले यह बताना चाहिए कि 20 जुलाई को CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया. उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की. उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासन को जवाब देना होगा. राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही अपना अगला निशाना साफ कर दिया था. उन्होंने अब गृह मंत्री अमित शाह को घेरा है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए. उन्होंने कहा कि किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर और किसी की पसली टूट गई. राहुल ने दावा किया कि पेलेट गन जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए. राहुल ने इन घटनाओं की जिम्मेदारी सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह की बताई. इससे पहले भी वह NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर प्रशासन के खिलाफ अभियान चला रहे थे. अब विपक्ष का रुख गृह मंत्री अमित शाह की ओर संसद का मानसून सत्र फिर शुरू होने के साथ ही सियासी टकराव बढ़ने के आसार हैं. धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटने और CJP आंदोलन खत्म होने के बाद भी कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है. 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है. इसी दिन CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान संसद के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. अब विपक्ष ने अपना रुख गृह मंत्री अमित शाह की ओर कर लिया है. आने वाले दिनों में संसद में प्रशासन और विपक्ष के बीच दो बड़े मुद्दों पर टकराव देखने को मिल सकता है. राहुल ने सवाल किया कि दिल्ली में तैनात सुरक्षा बल आखिरकार गृह मंत्रालय के अधीन हैं. ऐसे में क्या छात्रों पर पेलेट गन जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति अमित शाह ने दी थी? अगर नहीं, तो इसकी मंजूरी किसने दी? रविवार को राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर CJP मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन और अन्य बल प्रयोग की मंजूरी खुद गृह मंत्री ने दी थी? राहुल ने पत्र में 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि साहिल पेलेट गन लगने से गंभीर दर्द में है और उसकी एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है. The post CJP मार्च विवाद : राहुल गांधी का अमित शाह से सवाल- छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया? appeared first on Naya Vichar.

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‘मेरी गलती बस ये थी, मेरे अंदर का देशभक्त जाग चुका था’, बेऊर जेल जाते-जाते बोले छात्र- प्लीज बचा लीजिये

Patna Student Arrest: ‘मेरी गलती बस इतनी थी कि मेरे अंदर का देशभक्त जाग चुका था. इसलिए जेल भेजा जा रहा है.’ इस दौरान एक अन्य छात्र ने कहा, सर प्लीज बचा लीजिये. बहुत देर से भूखे हैं. बहुत मारा है. यह जवाब उन छात्रों ने दिया जिन्हें आधी रात बेऊर जेल भेजा गया. पिछले दिनों 22 और 25 जुलाई को पटना में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया था. पटना में आधी रात पुलिस की कार्रवाई इस मामले में अब पटना पुलिस एक्शन मोड में आ गई है. इसके साथ रविवार की आधी रात ही 258 छात्रों को बेऊर जेल भेजा गया. जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 24 प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें 285 नामजद और करीब 6 हजार अज्ञात आरोपित हैं. रविवार की देर छज्जू बाग स्थित जजेज आवास छात्रों को लाया गया था. इन धाराओं के तहत छात्रों को भेजा जेल अंदर में सुनवाई चल रही थी और बाहर बड़ी संख्या में छात्रों के परिजन इंतजार कर रहे थे. बताया जा रहा है कि सभी छात्रों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109 और 121 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. धारा 109 हत्या का प्रयास से संबंधित है, जबकि धारा 121 किसी लोक सेवक (प्रशासनी कर्मचारी या पुलिस) को उसके कर्तव्य का पालन करने से रोकने या डराने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाने या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है. छात्रों ने और क्या कहा? आधी रात को ही बेऊर जेल छात्रों को भेजा गया. कई छात्र फूट-फूटकर रो पड़े. एक छात्र ने यह बताया कि वह गांधी मैदान सिर्फ किताब खरीदने गया था. लेकिन इस दौरान ही पुलिस ने उसे उठा लिया. इसके अलावा एक अन्य छात्र के पिता ने बताया कि उसका बेटा एयरपोर्ट से आ रहा था. लेकिन इसी दौरान रास्ते से उसे पकड़ लिया गया. इस तरह हो रही छात्रों की पहचान छात्रों पर हो रही कार्रवाई को लेकर पुलिस का कहना है कि छात्रों की पहचान सीसीटीवी फुटे़ज, वीडियोज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जो सबूत मौजूद हैं, उसके आधार पर किया जा रहा है. इससे पहले भी 22 जुलाई को जब पटना में प्रदर्शन किए गए थे, तब 117 संदिग्धों के फोटो जारी किए गए थे. Also Read: जंतर-मंतर के बाद बिहार बना हॉटस्पॉट : आधी रात को जज के सामने पेशी, 87 प्रदर्शनकारियों को जेल The post ‘मेरी गलती बस ये थी, मेरे अंदर का देशभक्त जाग चुका था’, बेऊर जेल जाते-जाते बोले छात्र- प्लीज बचा लीजिये appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड : मिसिर बेसरा के बॉडीगार्ड शनिचरवा समेत 18 उग्रवादियों ने किया सरेंडर

रांची से पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट  Jharkhand Maoist Surrender: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है. सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के बीच राज्य के 18 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिये हैं. सूत्रों के मुताबिक इनमें एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा का करीबी बॉडीगार्ड बताया जाने वाला सनिचरवा भी है. उसने डेढ़ दर्जन साथियों के साथ एके-47 सहित सरेंडर किया है. इनमें 12 से अधिक बड़े हथियार शामिल हैं. हालांकि इस आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पायी है. 18 नक्सलियों के सरेंडर से मिसिर बेसरा को झटका  सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को जल्द ही रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में लाकर औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कराया जायेगा. अगले 48 घंटे पुलिस इसका खुलासा कर सकती है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से अधिकांश कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय थे और मिसिर बेसरा के दस्ते से जुड़े बताये जा रहे हैं. वहीं कुछ पलामू और लातेहार क्षेत्र के हैं. सूत्रों का कहना है कि अपने दस्ते के इतनी बड़ी संख्या में साथियों के सरेंडर करने से मिसिर बेसरा की ताकत काफी कमजोर पड़ चुकी है. चाईबासा की मुरूम्बुरा गांव के पास मिला था मिसिर का लोकेशन 15 दिन पहले तक मिले लोकेशन के अनुसार मिसिर बेसरा चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र स्थित मुरूम्बुरा गांव की पहाड़ी के पास मौजूद था. उसके साथ 15 लाख के इनामी नक्सली वीरेंद्र हांसदा और मेहनत उर्फ मोछू भी थे. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि मिसिर बेसरा अब भी पश्चिम सिंहभूम के जंगली इलाकों में ही डेरा डाले हुए है. हालांकि लगातार हो रहे सरेंडर से उसकी सक्रियता और नेटवर्क दोनों सिमटते जा रहे हैं. मई में 25 नक्सलियों ने किया था सरेंडर इससे पहले मई महीने में भी मिसिर बेसरा के दस्ते के 25 नक्सलियों समेत कुल 27 उग्रवादियों ने सरेंडर किया था. इनमें 25 लाख के इनामी सागेन अंगरिया, गांदी मुंडा, नागेंद्र मुंडा, रेखा मुंडा और सुलेमान हांसदा जैसे हार्डकोर नक्सली शामिल थे, जिन्होंने 16 हथियार और 2857 गोलियां पुलिस के हवाले की थीं. वहीं दूसरी ओर एक करोड़ का इनामी असीम मंडल उर्फ आकाश अब सुरक्षाबलों के लिए नयी चुनौती बनकर उभरा है. सूत्रों के मुताबिक वह अपने कुछ साथियों के साथ पूर्वी सिंहभूम जिले लौट आया है और बोड़ाम थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में उसकी गतिविधि देखी जा रही है. ये भी पढ़ें: हुसैनाबाद में ट्रक से 320 किलो गांजा बरामद, डेढ़ करोड़ से अधिक की खेप जब्त ये भी पढ़ें: JSSC-JPSC नियुक्तियों की CBI जांच हो, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को मिले सजा : चंपाई सोरेन The post झारखंड : मिसिर बेसरा के बॉडीगार्ड शनिचरवा समेत 18 उग्रवादियों ने किया सरेंडर appeared first on Naya Vichar.

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इंडियन एग्जाम सिस्टम में बदलाव की तैयारी: नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी 6 सदस्यीय टास्क फोर्स; जानिए कौन-कौन हैं शामिल

Exam reform task force : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए 6 सदस्यीय टास्क फोर्स का ऐलान किया है. इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के को-फाउंडर और आधार परियोजना के प्रमुख चेहरों में रहे नंदन नीलेकणी करेंगे. प्रशासन का कहना है कि यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव देगी. नंदन नीलेकणी करेंगे अगुआई तकनीक के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाले नंदन नीलेकणी इस टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे. उन्होंने आधार (AADHAAR) जैसी बड़ी डिजिटल परियोजना में अहम भूमिका निभाई थी. प्रशासन चाहती है कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल हो, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके. ISRO, IB और IIT के विशेषज्ञ भी शामिल इस टास्क फोर्स में ISRO के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ को भी शामिल किया गया है. अंतरिक्ष और बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स का उनका अनुभव परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करेगा. पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक तपन डेका सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक रोकने से जुड़े सुझाव देंगे. इसके अलावा IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी भी समिति का हिस्सा हैं. वे साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर सिस्टम के विशेषज्ञ हैं. उनसे परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से और सुरक्षित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. शिक्षा और प्रशासन के अनुभवी अधिकारी भी पैनल में समिति में पूर्व CBSE अध्यक्ष और पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल को भी शामिल किया गया है. उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (National Curriculum Framework) को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी. वहीं, बिहार के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ IAS अधिकारी अमृत लाल मीणा भी इस टास्क फोर्स का हिस्सा हैं. उन्हें प्रशासन और बड़े स्तर पर व्यवस्थाओं के संचालन का लंबा अनुभव है. क्या होगा टास्क फोर्स का काम? प्रशासन के मुताबिक, यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक और तकनीकी सुधारों पर काम करेगी. समिति यह सुझाव देगी कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा कैसे बढ़ाई जाए, परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी कैसे बनाया जाए और NTA को किस तरह मजबूत किया जाए. हाल के वर्षों में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों के बाद प्रशासन परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. टास्क फोर्स की सिफारिशें भविष्य की परीक्षा प्रणाली और नए नियम तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी. ये भी पढ़ें : जंतर-मंतर के बाद बिहार बना हॉटस्पॉट : आधी रात को जज के सामने पेशी, 87 प्रदर्शनकारियों को जेल The post इंडियन एग्जाम सिस्टम में बदलाव की तैयारी: नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी 6 सदस्यीय टास्क फोर्स; जानिए कौन-कौन हैं शामिल appeared first on Naya Vichar.

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