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Author name: Vinod Jha

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कौन हैं Bittu Tabahi? जिन्होंने अकेले ही साफ कर डाली नदी, पद्मश्री देने की उठ रही मांग

Who Is Bittu Tabahi: बिट्टू तबाही, जिसका असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा का रहने वाला है. बिट्टू बीएससी (B.Sc) का छात्र है और सोशल मीडिया क्रिएटर भी है. उसने अपने इंस्टाग्राम के बायो में खुद को Environmental Activist (पर्यावरण कार्यकर्ता) भी बताया है. क्यों हो रही बिट्टू तबाही की इतनी चर्चा? बिट्टू तबाही की सोशल मीडिया पर इस समय सबसे अधिक चर्चा हो रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वायरल होने से पहले इंस्टाग्राम पर उसके केवल 2.8 से 3 लाख फॉलोअर्स थे, लेकिन दो से तीन दिनों में ही उसके फॉलोअर्स की संख्या बढ़कर 1.87 मिलियन (Million) से अधिक हो गई. अब आपको बताते हैं कि आखिर बिट्टू इतना फेमस क्यों हो गया. दरअसल, बिट्टू ने अजनार नदी को अकेले ही साफ कर डाला. उसने 26 जनवरी 2026 को नदी की सफाई का अभियान शुरू किया. गणतंत्र दिवस के दिन उसने संकल्प लिया कि कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे समाज को फायदा हो. शुरुआत में उसका साथ उसके दोस्तों ने दिया, लेकिन दिन बीतने के साथ उनका साथ छूटता चला गया. इसके बावजूद बिट्टू का हौसला नहीं टूटा. उसने सफाई अभियान जारी रखा—वह खुद नदी में उतरता और घंटों सफाई करता. View on Instagram सफाई में बिट्टू के खर्च हुए 30 हजार से अधिक रुपये मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नदी की सफाई के दौरान बिट्टू तबाही को अपनी जेब से भी पैसे खर्च करने पड़े. रिपोर्ट्स की मानें तो बिट्टू के 30 हजार रुपये से अधिक नदी को साफ करने में लग गए. बिट्टू को ताने भी सहने पड़े नदी की सफाई के दौरान बिट्टू को लोगों की तारीफ तो मिली ही, साथ में तानों और आरोपों का भी सामना करना पड़ा. बिट्टू ने नदी को साफ करते हुए अपनी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डाले, लेकिन कुछ लोगों ने उस पर महज व्यूज और लाइक्स पाने के लिए सफाई करने का आरोप लगा दिया. हालांकि, लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों (Negative comments) के बावजूद बिट्टू ने अपना इरादा नहीं बदला और अंततः नदी को पूरी तरह साफ कर दिया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी हुए मुरीद, सीएम आवास बुलाकर किया सम्मानित अकेले दम पर नदी की सफाई करके बिट्टू ने न केवल अपने राज्य में, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई. मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव भी उसके मुरीद हो गए और उसे सीएम आवास बुलाकर सम्मानित किया. सीएम ने बिट्टू से मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया और अपनी पोस्ट में लिखा: “भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर ‘ब्यावरा’ के बेटे सुरेंद्र सिंह चौधरी ‘बिट्टू तबाही’ के साथ एक आत्मीय मुलाकात हुई. अपने अटूट संकल्प और दृढ़ निश्चय से बिट्टू ने न केवल अजनार नदी की सफाई की, बल्कि अपनी कोशिशों से समाज को यह संदेश भी दिया कि बदलाव के लिए किसी बड़ी भीड़ की जरूरत नहीं होती—बस एक सच्ची पहल ही काफी है. आपकी यह पहल ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की भावना को भी मजबूत करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-भागीदारी से जल स्रोतों का संरक्षण और पुनरुद्धार करना है. मुझे पूरा भरोसा है कि अजनार नदी से शुरू हुआ आपका यह संकल्प राज्य के युवाओं को अपने आस-पास के जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए प्रेरित करेगा. पूरे राज्य को आप पर गर्व है.” नीदरलैंड्स से मिला ऑफर बिट्टू अपने काम से इतना फेमस हो गया कि उसे नीदरलैंड्स से नौकरी का ऑफर मिल गया. नीदरलैंड्स की मशहूर पर्यावरण संस्था ‘द ओशियन क्लीनअप’ (The Ocean Cleanup) के सीईओ बॉयन स्लैट (Boyan Slat) ने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर देखकर सीधे लिखा— “Come work for us” (आओ हमारे साथ काम करो). बिट्टू तबाही को पद्मश्री देने की मांग उठी बिट्टू तबाही के काम की तारीफ सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है. कोई उसकी तुलना ‘दशरथ मांझी’ से कर रहा है, तो कोई उसे पद्मश्री देने की मांग कर रहा है. Being Political नाम के इंस्टा यूजर ने बिट्टू के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “आप पद्मश्री के हकदार हैं.” वहीं Jay Bhosale 🇮🇳 ने लिखा, “महाराष्ट्र से ढेर सारा प्यार छोटे, तुम पर गर्व है.” The post कौन हैं Bittu Tabahi? जिन्होंने अकेले ही साफ कर डाली नदी, पद्मश्री देने की उठ रही मांग appeared first on Naya Vichar.

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Ganesh Chaturthi Special: क्यों कहलाए भगवान गणेश ‘एकदंत’? जानें टूटे दांत की पूरी कहानी

Ganesh Chaturthi Special: गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. नया विचार की ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज की पहली कड़ी में आपने भगवान गणेश के जन्म और उनके गजानन बनने की कहानी जानी. अब सीरीज की अगली कड़ी में जानिए कि भगवान गणेश का एक दांत कैसे टूटा और वे ‘एकदंत’ क्यों कहलाए. भगवान गणेश को गजानन, लंबोदर, विघ्नहर्ता और गणपति जैसे कई नामों से जाना जाता है. इन्हीं में एक नाम ‘एकदंत’ भी है. एकदंत का मतलब है- एक दांत वाला. भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में भी उनका एक दांत पूरा और दूसरा टूटा हुआ दिखाई देता है. लेकिन गणेश जी का दांत आखिर टूटा कैसे? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इसे लेकर अलग-अलग कथाएं मिलती हैं. इनमें एक कथा भगवान परशुराम से जुड़ी है, जबकि दूसरी कथा महाहिंदुस्तान के लेखन से संबंधित बताई जाती है. परशुराम और गणेश जी के बीच हुआ विवाद गणेश जी के एकदंत बनने की एक प्रमुख कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में मिलती है. इसके अनुसार, एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पहुंचे. उस समय गणेश जी माता पार्वती के कहने पर द्वार पर पहरा दे रहे थे. परशुराम भगवान शिव के भक्त थे और उनसे मिलने के लिए अंदर जाना चाहते थे. लेकिन गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने उन्हें द्वार की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी है. परशुराम ने गणेश जी को समझाने की कोशिश की, लेकिन गणेश जी अपनी बात पर अड़े रहे. देखते ही देखते दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और बात युद्ध तक पहुंच गई. शिव के दिए फरसे से टूटा गणेश जी का दांत परशुराम के पास भगवान शिव का दिया हुआ दिव्य अस्त्र था, जिसे परशु या फरसा कहा जाता है. युद्ध के दौरान परशुराम ने उसी फरसे से गणेश जी पर वार किया. गणेश जी जानते थे कि यह फरसा उनके पिता भगवान शिव ने ही परशुराम को दिया है. इसलिए उन्होंने उस अस्त्र का सम्मान किया. उन्होंने फरसे के वार को रोकने के बजाय उसे अपने एक दांत पर ले लिया. फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दांत टूट गया. इसके बाद से ही उन्हें ‘एकदंत’ कहा जाने लगा. इस कथा में गणेश जी के धैर्य और संयम को खास महत्व दिया जाता है. उनके पास शक्ति होने के बावजूद उन्होंने भगवान शिव के दिए अस्त्र का अपमान नहीं किया. दांत टूटने पर क्रोधित हुईं माता पार्वती जब माता पार्वती को पता चला कि उनके पुत्र गणेश का दांत टूट गया है, तो वे बहुत क्रोधित हो गईं. इस प्रसंग से जुड़ी कथाओं में बताया जाता है कि बाद में परशुराम ने गणेश जी से क्षमा मांगी और मामला शांत हुआ. इस पूरी कथा में गणेश जी के साहस के साथ उनके धैर्य और अपनी जिम्मेदारी के प्रति समर्पण को भी देखा जाता है. उन्होंने माता पार्वती की दी हुई जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए किसी के सामने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया. ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी क्या महाहिंदुस्तान लिखने के लिए गणेश जी ने अपना दांत तोड़ा था? गणेश जी के एकदंत स्वरूप से जुड़ी एक दूसरी बहुत प्रसिद्ध कथा महाहिंदुस्तान के लेखन से संबंधित है. लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, महर्षि वेदव्यास महाहिंदुस्तान की रचना कर रहे थे. उन्होंने भगवान गणेश से इसे लिखने में मदद करने का अनुरोध किया. गणेश जी इसके लिए तैयार हो गए. कहा जाता है कि महाहिंदुस्तान लिखते समय उनकी कलम टूट गई. लेखन रुक न जाए, इसलिए गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़ लिया और उसे लेखनी की तरह इस्तेमाल करते हुए महाहिंदुस्तान लिखना जारी रखा. हालांकि, इस कथा को लेकर एक बात ध्यान देने वाली है. महाहिंदुस्तान के आदि पर्व में वेदव्यास और गणेश जी के लेखन से जुड़ा प्रसंग मिलता है, लेकिन इसमें गणेश जी के अपना दांत तोड़कर लेखनी बनाने की बात नहीं कही गई है. इसलिए इसे बाद की लोकप्रिय धार्मिक परंपरा और मान्यता के रूप में देखना ज्यादा उचित माना जाता है. ‘एकदंत’ नाम का क्या मतलब है? ‘एकदंत’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘एक’ और ‘दंत’. इसका सीधा अर्थ है- एक दांत वाला. भगवान गणेश की मूर्तियों में एक दांत पूरा और दूसरा टूटा हुआ दिखाया जाता है. इसी वजह से उनका एक नाम ‘एकदंत’ पड़ा. गणेश जी के इस स्वरूप का धार्मिक परंपरा में खास महत्व माना जाता है. गणेश जी का एकदंत स्वरूप क्या सिखाता है? गणेश जी का टूटा हुआ दांत केवल उनकी पहचान नहीं है, बल्कि इससे एक खास सीख भी जुड़ी है. मान्यता है कि जीवन में किसी बड़े काम को पूरा करने के लिए कई बार त्याग करना पड़ता है. परशुराम से जुड़ी कथा में यह प्रसंग धैर्य और सम्मान से जुड़ा दिखाई देता है. वहीं, महाहिंदुस्तान से जुड़ी लोकप्रिय कथा में इसे ज्ञान और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. गणेश जी का एकदंत स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि जीवन में मुश्किलें कितनी भी आएं, हमें धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए. किसी कमी या परेशानी को अपनी कमजोरी नहीं बनने देना चाहिए. मजबूत इरादे और सही सोच के साथ व्यक्ति बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना कर सकता है. अगली कड़ी में जानिए: भगवान गणेश को चंद्रमा ने क्यों बनाया उपहास का पात्र और गणेश जी ने चंद्रमा को क्यों दिया श्राप? जानें गणेश जी और चंद्रदेव से जुड़ी यह रोचक पौराणिक कथा. The post Ganesh Chaturthi Special: क्यों कहलाए भगवान गणेश ‘एकदंत’? जानें टूटे दांत की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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बशीरहाट लोकसभा सीट पर उपचुनाव में देरी क्यों? इलेक्शन कमीशन ने बतायी वजह

Lok Sabha By Poll: चुनाव आयोग ने अलग-अलग समय पर खाली हुई असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी. पश्चिम बंगाल की बशीरहाट और मेघालय की शिलांग लोकसभा सीटें भी रिक्त हैं. इन दोनों संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने मंगलवार को इसकी वजह भी बता दी है. SIR और चुनावी याचिका की वजह से उपचुनाव में देरी इलेक्शन कमीशन ने कहा है कि चुनावी याचिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चलते लोकसभा की 2 सीटों पर उपचुनाव में देरी हुई है, जबकि एक अन्य संसदीय सीट पर उपचुनाव की घोषणा की जा चुकी है. आयोग ने बताया है कि पश्चिम बंगाल की बशीरहाट, मेघालय की शिलांग और असम की नौगांव लोकसभा सीटें अलग-अलग तिथियों पर रिक्त हुई थीं. असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग ने सोमवार को नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की, लेकिन अन्य 2 सीटों के लिए कार्यक्रम घोषित नहीं किया. शिलांग और बशीरहाट लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा नहीं किये जाने के कारण के बारे में पूछे जाने पर निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मेघालय में जारी एसआईआर और कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित चुनावी याचिका इसकी मुख्य वजह हैं. ये भी पढ़ें: बंगाल विधानसभा उपचुनाव : नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को वोट, 9 को आयेगा रिजल्ट 25 सितंबर 2024 को हुआ बशीरहाट के सांसद का निधन बशीरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के एसके नूरुल इस्लाम के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनावी याचिका दायर की गयी थी. हालांकि, लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के कुछ महीने बाद 25 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया. इसके बावजूद उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका लंबित है. कोर्ट में लंबित है चुनावी याचिका चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के भीतर संबंधित हाईकोर्ट में किसी उम्मीदवार की जीत को चुनौती देते हुए चुनावी याचिका दायर की जा सकती है. आयोग के अधिकारियों ने बताया कि ‘दूसरी गुहार’ वाली एक चुनावी याचिका अभी लंबित है. चुनावी याचिका में दूसरी बार गुहार आमतौर पर याचिकाकर्ता या किसी अन्य उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित करने के लिए की जाती है. पहली गुहार में निर्वाचित उम्मीदवार के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की मांग की जाती है. ये भी पढ़ें: बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ी नंदीग्राम सीट, वोटरों से किया ये खास वादा 15 फरवरी को हुआ शिलांग के सांसद का निधन शिलांग लोकसभा सीट 19 फरवरी को वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी के सांसद रिकी एंड्रयू सिंगकॉन के निधन के बाद रिक्त हुई थी. आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मेघालय में एसआईआर प्रक्रिया जारी है और अंतिम मतदाता सूची 21 अक्टूबर को प्रकाशित की जायेगी. प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे से रिक्त हुई थी नौगांव सीट एकमात्र लोकसभा उपचुनाव असम की नौगांव सीट पर होगा, जो कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी. इस सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जायेगी. 2024 में जीते थे बोरदोलोई बोरदोलोई ने वर्ष 2024 में कांग्रेस के टिकट पर नौगांव लोकसभा सीट जीती थी, लेकिन इस साल मार्च में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और असम विधानसभा चुनाव से पहले हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गये. इसके बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया तथा दिसपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. The post बशीरहाट लोकसभा सीट पर उपचुनाव में देरी क्यों? इलेक्शन कमीशन ने बतायी वजह appeared first on Naya Vichar.

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MP Kisan Yojana: किसानों को सालाना मिलते हैं ₹6000, 14वीं-16वीं किस्त को लेकर क्या है अपडेट? ऐसे करें चेक

MP Kisan Yojana : मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना काफी अहम प्रशासनी योजना है. इसके तहत पात्र किसानों को राज्य प्रशासन की ओर से साल में कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि तीन समान किस्तों में देने का प्रावधान है. पीएम किसान सम्मान निधि के साथ जोड़ने पर पात्र किसान परिवार को केंद्र और राज्य से मिलाकर सालाना 12 हजार रुपये की सहायता मिल सकती है. फिलहाल किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल योजना की अगली किस्त को लेकर है. पिछली किस्त के बाद 14वीं, 15वीं और 16वीं किस्त को लेकर किसान लगातार जानकारी खोज रहे हैं. मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में कितने रुपये मिलते हैं? मध्य प्रदेश प्रशासन की आधिकारिक योजना जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कुल 6000 रुपये तीन समान किस्तों में दिए जाते हैं. भुगतान राज्य स्तर से सिंगल क्लिक के माध्यम से किया जाता है. जानकारी विवरण योजना मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना राज्य मध्य प्रदेश सालाना सहायता ₹6000 किस्त 3 समान किस्त भुगतान DBT/सिंगल क्लिक पात्रता पीएम किसान के पात्र हितग्राही आवेदन संबंधित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन स्टेटस SAARA पोर्टल पर जांच की सुविधा 14वीं, 15वीं और 16वीं किस्त को लेकर क्या स्थिति है? किसानों के बीच इन किस्तों को लेकर काफी चर्चा है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की पिछली किस्त अगस्त 2026 में आने के बाद अगली किस्तों को लेकर किसानों का इंतजार बना हुआ है. इसलिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि प्रशासन की ओर से किस्त जारी करने की आधिकारिक तारीख सामने आने तक किसी निश्चित तारीख को पक्का न मानें. किन किसानों को मिलता है लाभ? आधिकारिक जानकारी के अनुसार पीएम किसान योजना के पात्र हितग्राही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए भी पात्रता के दायरे में आते हैं. योजना के आवेदन की प्रक्रिया में संबंधित पटवारी के माध्यम से जानकारी ली जाती है. योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में बेहतर तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है. पैसा अटक गया है तो क्या करें? अगर पात्र किसान को योजना की राशि नहीं मिल रही है तो सबसे पहले अपना रिकॉर्ड और बैंक से जुड़ी जानकारी जांचनी चाहिए. किसान को यह भी देखना चाहिए कि उसका पीएम किसान से संबंधित रिकॉर्ड सही है या नहीं. इसके अलावा बैंक खाता, आधार से जुड़ी जानकारी और डीबीटी से संबंधित स्थिति की भी जांच करना जरूरी है. SAARA पोर्टल पर ऐसे चेक करें जानकारी मध्य प्रदेश प्रशासन के SAARA पोर्टल पर मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से जुड़ी हितग्राही जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध है. पोर्टल पर आधार नंबर, बैंक खाता या पीएम किसान आईडी के माध्यम से संबंधित जानकारी खोजने का विकल्प दिया गया है. इसलिए किसान किसी एजेंट या अनधिकृत वेबसाइट पर भरोसा करने के बजाय प्रशासनी पोर्टल से ही अपना स्टेटस जांचें. किसानों के लिए काम की बात अगर आप मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लाभार्थी हैं तो अभी से अपना रिकॉर्ड अपडेट रखें. खासकर बैंक खाता, आधार और पीएम किसान से जुड़ी जानकारी में कोई गलती है तो उसे संबंधित विभाग के माध्यम से ठीक कराएं. The post MP Kisan Yojana: किसानों को सालाना मिलते हैं ₹6000, 14वीं-16वीं किस्त को लेकर क्या है अपडेट? ऐसे करें चेक appeared first on Naya Vichar.

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Bigg Boss 20 Episode 2 Live: गुल्लु, आसिफ और यंग बने कैप्टेंसी टास्क के पहले दावेदार

Bigg Boss 20 Episode 2 Live: बिग बॉस 20 के दूसरे एपिसोड में भी हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. जहां आम्रपाली दुबे और अर्शिफा खान में जबरदस्त लड़ाई हुई. दोनों ने अपना आपा खो दिया. इधर कैप्टेंसी टास्क में किसकी जीत हुई. आइये लाइव के जरिए बताते हैं पल पल की अपडेट्स. The post Bigg Boss 20 Episode 2 Live: गुल्लु, आसिफ और यंग बने कैप्टेंसी टास्क के पहले दावेदार appeared first on Naya Vichar.

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MS Dhoni के फार्म हाउस में कोबरा निकलने से मचा हड़कंप, रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा

रांची. हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के पूर्व सफल कप्तान MS Dhoni के फार्म हाउस में मंगलवार को कोबरा निकलने से कर्मचारियों में डर फैल गया. यह फार्म हाउस रांची के दलादिली इलाके में स्थित है. सांप निकलने की सूचना मिलने पर स्नेक रेस्क्यू एक्सपर्ट नारायण प्रमाणिक मौके पर पहुंचे. काफी मशक्कत के बाद उन्होंने कोबरा को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया, हालांकि रेस्क्यू के दौरान सांप के शरीर पर हल्की चोट आयी. बताया गया कि प्राथमिक देखभाल के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया. घटना के समय फार्म हाउस में धोनी के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था. सांप निकलने की सूचना पर फार्म हाउस के कर्मचारियों और आसपास के लोगों की भीड़ जुट गयी. स्नेक रेस्क्यू एक्सपर्ट नारायण प्रमाणिक ने बताया कि कोबरा करीब 18 वर्ष पुराना था. उन्होंने लोगों से अपील की कि घर या परिसर में सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू एक्सपर्ट को सूचना दें, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर प्राकृतिक माहौल में छोड़ा जा सके. ऐसी स्थिति में, आप 1800-11-2034 जैसे हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं या अपने इलाके के स्नेक रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की जानकारी ऑनलाइन ढूंढ सकते हैं. The post MS Dhoni के फार्म हाउस में कोबरा निकलने से मचा हड़कंप, रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी के विमान की लखनऊ में पहली लैंडिंग टली, दूसरी कोशिश में सुरक्षित उतरा

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की फ्लाइट मंगलवार (8 सितंबर) को लखनऊ एयरपोर्ट पर तेज हवाओं के कारण पहली बार लैंड नहीं कर सकी. पायलट को विमान को दोबारा ऊपर ले जाना पड़ा. इसके बाद दूसरी कोशिश में विमान सुरक्षित लैंड कर गया. विमान में सवार सभी यात्री सामान्य रूप से बाहर निकले. घटना के बाद किसी यात्री के घायल होने की समाचार नहीं है. इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों के हवाले से समाचार दी कि दिल्ली से लखनऊ जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 ने मंगलवार दोपहर करीब 3:45 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पर पहली बार उतरने की कोशिश रद्द कर दी. फ्लाइट के चालक दल ने मौसम की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया. इसके करीब 10 मिनट बाद, शाम 3:55 बजे विमान ने सुरक्षित लैंडिंग कर ली. ये भी पढ़ें: तमिलनाडु के मंत्री का दावा, 2029 में राहुल गांधी होंगे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार गो-अराउंड क्या होता है? गो-अराउंड विमान में लैंडिंग की एक सामान्य प्रक्रिया है. इसमें पायलट किसी वजह से विमान को रनवे पर उतारने की कोशिश रोक देता है और विमान को दोबारा ऊपर ले जाता है. इसके बाद स्थिति ठीक होने पर फिर से लैंडिंग की जाती है. खराब मौसम, रनवे की स्थिति, ज्यादा हवाई यातायात या लैंडिंग के दौरान किसी खतरे के कारण ऐसा किया जा सकता है. राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली दौरा राहुल गांधी अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं. कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी ने सोमवार (7 सितंबर) को बताया कि राहुल अपने इस दौरे पर ‘दिशा’ (जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, साथ ही कई अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे. The post राहुल गांधी के विमान की लखनऊ में पहली लैंडिंग टली, दूसरी कोशिश में सुरक्षित उतरा appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

बाढ़ प्रभावित 2.33 लाख लोगों तक पहुंच रही राहत, 81 सामुदायिक रसोई में रोज 65 हजार को भोजन

नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर | समस्तीपुर जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है। जिले के तीन प्रभावित प्रखंडों में प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार सक्रिय हैं। वर्तमान में जिले में 2,33,212 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षित आवागमन और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से समन्वित रूप से कार्य किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 81 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों के माध्यम से सुबह और शाम मिलाकर प्रतिदिन करीब 65 हजार लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित परिवारों को तत्काल आश्रय और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए अब तक 32,515 पॉलिथीन शीट्स वितरित की जा चुकी हैं। जरूरत के अनुसार अन्य राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। 18 मेडिकल कैंपों में इलाज की सुविधा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 18 मेडिकल कैंप सक्रिय हैं। यहां लोगों को चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक दवाएं और प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में भ्रमण कर स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का जायजा ले रही हैं। पशुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सुरक्षा के लिए 17 पशु कैंप/शेड संचालित किए हैं। अब तक 490 क्विंटल पशु चारा व भूसा वितरित किया जा चुका है। इसके अलावा 17 पशु चिकित्सा कैंप भी सक्रिय हैं, जहां अब तक 290 पशुओं को दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है। 201 नावों से जारी है आवागमन बाढ़ प्रभावित तीनों प्रखंडों में लोगों के आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए कुल 201 नावों का परिचालन किया जा रहा है। नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का निर्देश दिया है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति और परिवार तक जरूरत के अनुसार राहत एवं सहायता समय पर पहुंचाना प्राथमिकता है।

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PM Kisan Yojana : किसानों को मिलेंगे ₹10,000 सालाना? वायरल दावे का जानें सच

PM Kisan Yojana : PM Kisan Samman Nidhi @pmkisanofficial नाम के एक्स अकाउंट ने इस दावे पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें कहा गया है कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना को लेकर सोशल मीडिया पर एक समाचार तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि किसानों को अब हर साल 10,000 रुपये मिलेंगे. यह दावा भ्रामक है. प्रशासन की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है. पीएम किसान योजना के तहत अभी भी पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह रकम 2,000-2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है. इसलिए किसान सोशल मीडिया पर वायरल ऐसे दावों पर भरोसा न करें और योजना से जुड़ी सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक प्रशासनी स्रोतों को ही देखें. The post PM Kisan Yojana : किसानों को मिलेंगे ₹10,000 सालाना? वायरल दावे का जानें सच appeared first on Naya Vichar.

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Video : वडोदरा से विपक्ष पर पीएम मोदी का तंज- “अब तो नाराज फूफा को भी काम मिल गया”

पीएम मोदी मंगलवार (8 सितंबर) को गुजरात के वडोदरा में ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम में पहुंचे थे. यहां उन्होंने 35 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इनमें 2,800 किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर भी शामिल है. पीएम मोदी ने इसे 21वीं सदी की बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट देश के विकास को नई गति देगा. कार्यक्रम में पीएम ने प्रशासन के कामकाज और विकास योजनाओं का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने इस फ्रेट कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए बीजेपी और कांग्रेस प्रशासनों के काम करने के तरीके की तुलना की. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी. हालांकि, मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA प्रशासन के दौरान इस पर ज्यादा प्रगति नहीं हुई. पीएम मोदी ने कहा, “फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट की परिकल्पना 2004 में की गई थी, लेकिन 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने तक इस दिशा में कोई काम आगे नहीं बढ़ा.” अब ‘फूफा जी’ के पास भी काम : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि कोई ‘नाराज फूफा जी’ यह पूछते हुए रोएंगे कि ट्रक ड्राइवरों का क्या होगा? पीएम मोदी ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब ‘फूफा जी’ के पास भी काम है. पीएम ने यह बात बिना किसी का नाम लिए कही. पीएम मोदी ने कहा कि फ्रेट कॉरिडोर से उन इलाकों तक भी रेल कनेक्टिविटी पहुंच रही है, जहां आजादी के बाद भी रेल सुविधा नहीं थी. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट देश में मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने की बड़ी योजना का हिस्सा है. इसका मकसद आत्मनिर्भर हिंदुस्तान को और मजबूत करना है. मोदी ने कहा, ‘‘2014 के बाद हिंदुस्तान ने 50,000 आधुनिक रेल कोच बनवाए लेकिन पिछली (कांग्रेस) प्रशासन 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बनवा सकी.’’ पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही पटरी पर चलना पड़ता था : पीएम मोदी पीएम ने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही पटरी पर चलना पड़ता था जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों की रफ्तार धीमी हो जाती थी लेकिन समर्पित माल ढुलाई गलियारे ने इस स्थिति को बदल दिया है. प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पहल पर भी तंज कसते हुए कहा कि युवा सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे और ‘‘झूठ की गूंज’’ से गुमराह नहीं होंगे. उन्होंने कहा, ‘‘आपको हर जगह ऐसे लोग मिलेंगे जो ‘झूठ की गूंज’ के जरिये आपको गुमराह करने की कोशिश करेंगे, लेकिन आज का युवा सच्चाई के साथ खड़ा रहेगा.’’ बता दें कि ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया छात्रों से संवाद का एक अभियान है, जिसके तहत देश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. The post Video : वडोदरा से विपक्ष पर पीएम मोदी का तंज- “अब तो नाराज फूफा को भी काम मिल गया” appeared first on Naya Vichar.

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