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Author name: Vinod Jha

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बाबा बागेश्वर की दुर्गा पूजा में मांसाहार पर प्रतिबंध की अपील से कांग्रेस नाराज, 2 थानों में शिकायत, कार्रवाई की मांग

कोलकाता से श्रीकांत शर्मा की रिपोर्ट कोलकाता के भवानीपुर पुलिस स्टेशन में कांग्रेस की ओर से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) के खिलाफ 2 थानों में शिकायतें दर्ज करायी हैं. दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के साथ-साथ मध्य कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी ने अलग-अलग शिकायतें दर्ज करवायी हैं. दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस ने भवानीपुर थाने में और मध्य कोलकाता जिला कांग्रेस ने मोचीपाड़ा थाने में बाबा बागेश्वर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवायी है. बाबा बागेश्वर ने हावड़ा जिले के लिलुआ में एक कार्यक्रम के दौरान दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय मांस-मछली (नॉन-वेज) नहीं खाने की अपील की थी. बंगाली समुदाय की भावनाओं को पहुंची ठेस : कांग्रेस कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उनके इस तरह के बयानों और टिप्पणियों से बंगाली समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है. साथ ही यह भी आशंका जतायी गयी है कि बाबा बागेश्वर की इस टिप्पणी से समाज में वैमनस्य व विभाजन पैदा हो सकता है. कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से इस मामले में तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. बाबा की अपील के बाद गरमायी बंगाल की नेतृत्व धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की इस अपील के बाद पश्चिम बंगाल में नेतृत्व गरमा गयी. नेतृत्वक दलों ने इस पर आपत्ति जतायी. यहां तक कि हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी कहा कि बाहर से आया हुआ कोई व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि बंगाल के लोग क्या खायें और क्या पहनें. पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा था कि हमारे लिए स्वामी विवेकानंद से बड़ा कोई संत नहीं है. उन्होंने कभी मांसाहार का विरोध नहीं किया. हमारी देवी को बकरे की बलि चढ़ती है. अष्टमी के दिन लुची यानी पूरी और नवमी के दिन मटन (मांस) खाने की परंपरा है. इसे कोई बंद नहीं कर सकता. ये भी पढ़ें: Video: बाबा बागेश्वर के बयान पर बोले शमिक भट्टाचार्य- बाहरी लोग तय न करें बंगाली क्या खायेंगे, अष्टमी पर लुची और नवमी पर मटन हमारी परंपरा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का मांसाहार पर बैन से इनकार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि खान-पान लोगों का व्यक्तिगत मामला है. उन्होंने कहा कि मांसाहार पर प्रतिबंध लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता. अगर कोई शाकाहारी भोजन करना चाहता है, तो वह उसकी इच्छा है. अगर कोई मांसाहारी भोजन पसंद करता है, तो उसे रोका नहीं जायेगा. शमिक भट्टाचार्य और सीएम शुभेंदु अधिकारी के इस बयान के एक दिन बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से कोलकाता के 2 थानों में शिकायतें दर्ज करवायी गयी हैं. The post बाबा बागेश्वर की दुर्गा पूजा में मांसाहार पर प्रतिबंध की अपील से कांग्रेस नाराज, 2 थानों में शिकायत, कार्रवाई की मांग appeared first on Naya Vichar.

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PM मोदी के कार्यक्रम से पहले सिक्योरिटी ब्रीच, फर्जी PMO ID लेकर पहुंचे 2 लोग, बॉडीगार्ड के पास मिली बंदूक

मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले सुरक्षा में सेंध की कोशिश का मामला सामने आया है. मुंबई पुलिस ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर से दो लोगों को हिरासत में लिया है. PMO का फर्जी आईडी मिला इंडिया टुडे के मुताबिक, हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की पहचान रोहन पारिख के रूप में हुई है. आरोप है कि वह खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बता रहा था. सुरक्षा जांच के दौरान उसके पास कथित तौर पर फर्जी PMO पहचान पत्र मिला. जांच में आईडी फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया. बॉडीगार्ड के पास से बंदूक बरामद उसके साथ मौजूद बॉडीगार्ड के पास से बंदूक भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है. मुंबई क्राइम ब्रांच अब यह जांच कर रही है कि दोनों फर्जी पहचान पत्र और हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने की कोशिश क्यों कर रहे थे. ये भी पढ़ें: Video: वडोदरा से विपक्ष पर पीएम मोदी का तंज- “अब तो नाराज फूफा को भी काम मिल गया” यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के BKC स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में Global Fintech Fest 2026 के कार्यक्रम में पहुंचने से पहले हुई. फिलहाल मामले की जांच जारी है. The post PM मोदी के कार्यक्रम से पहले सिक्योरिटी ब्रीच, फर्जी PMO ID लेकर पहुंचे 2 लोग, बॉडीगार्ड के पास मिली बंदूक appeared first on Naya Vichar.

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बम-बारूद के बीच बचपन, कलम ने बदली जिंदगी, पूर्व नक्सली की बेटी ने इंजीनियर बन रचा इतिहास

Ex Maoists Daughter Become Engineer: बचपन से आपके हाथ में कलम पकड़ाई गई है और आप बड़े होकर लिखना पढ़ना शुरू कर देते हैं, ये सुनने में बहुत नॉर्मल लगता है. लेकिन अगर सोचिए कि आपका बचपन बम, गोली और बंदूकों के बीच बीता हो. क्या फिर भी ऐसा मुमकिन है कि आप कलम की मदद से मिसाल पेश कर सकें. कुछ ऐसा ही किया है महाराष्ट्र की बेटी अरविंदा बरसगड़े ने, जिनके पिता महज चार महीने की उम्र में माओवादी संगठन ‘सिरोंचा दलम’ से जुड़ गए. ऐसे में अरविंदा बरसगड़े का बचपन गढ़चिरौली में गोलियों और धमाकों की गूंज के बीच बीता. लेकिन अरविंदा ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया और अब हेदरी गांव स्थित ‘लायड्स मेटल्स’ एंड एनर्जी में बतौर ट्रेनी काम कर रही हैं. पिता बने माओवादी तो बदली पूरे परिवार की जिंदगी अरविंदा के पिता राजबाबू (उर्फ किरण या समय्या) शुरू से ही माओवादी नहीं थे. वे नारायणपुर गांव के पंचायत में चपरासी के रूप में काम करते थे. हालांकि, कर (Tax) और सामाजिक अपमान बढ़ने के कारण, उन्होंने 2005 में सिरोंचा दलम में शामिल होन का फैसला लिया है. ये फैसला मजबूरी में लिया गया था लेकिन इसने राजबाबू और उसके परिवार की जिंदगी बदल दी. आइए, जानते हैं अरविंदा की सक्सेस स्टोरी. 2010 में पिता ने पुलिस के सामने किया सरेंडर 2010 में राबाबू ने माओवादी संगठन छोड़ने का मन बनाया और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. तब से परिवार पुलिस मुख्यालय के पास रहने लगा. ऐसे में अरविंदा ने अपनी पढ़ाई लिखाई जारी रखी और हाई स्कूल पास कर लिया. इंजीनियरिंग की दुनिया में रखा कदम अरविंदा ने 12वीं की पढ़ाई के बाद गढ़चिरौली के प्रशासनी पॉलिटेक्निक से 2025 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया. अरविंदा को पढ़ाई के लिए सुरक्षित माहौल मिले इसके लिए वहां की स्थानीय पुलिस ने भी योगदान दिया. अब वो ‘लायड्स मेटल्स’ एंड एनर्जी में बतौर ट्रेनी काम कर रही हैं. दिलचस्प बात ये है कि अब वो आगे BTech की डिग्री हासिल करना चाहती हैं. ट्रेनी के रूप में हुई थी करियर की शुरुआत दिसंबर 2025 में अरविंदा ने हेदरी गांव में ही ‘एलटी गोंडवाना स्किल हब’ में ट्रेनी के रूप में काम शुरू किया था. अरविंदा का सपना है कि वो आत्मनिर्भर बनें और अपने गांव के युवाओं को स्किल ट्रेनिंग दें. गढ़चिरौली जिले में माओवादी संगठन लगभग खत्म हो चुकी है गढ़चिरौली महाराष्ट्र के प्रमुख जिलों में से एक है. चंद्रपुर से इस जिले को 1982 में अलग किया गया था. इस जिले को महाराष्ट्र का ग्रीन जोन भी कहा जाता है, क्योंकि यहां का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है. पहले इस जिले में माओवादी संगठन का प्रभाव था, जोकि समय के साथ लगभग खत्म हो चुका है. एक आम जानकारी के अनुसार, यहां अब तक कुल 819 माओवादी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं. ये भी पढ़ें: पंजाब यूनिवर्सिटी में ABVP की जीत, अंकित बिधान बने अध्यक्ष The post बम-बारूद के बीच बचपन, कलम ने बदली जिंदगी, पूर्व नक्सली की बेटी ने इंजीनियर बन रचा इतिहास appeared first on Naya Vichar.

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बच्चा कब भूखा और कब उसका पेट भर चुका है, क्या आप जानते हैं? जानें सही Feeding Routine

Responsive Feeding: शिशु को खाना खिलाना सिर्फ उसके सामने प्लेट रखने या हर कुछ घंटे में कुछ खिला देने तक सीमित नहीं है. खासकर 6 महीने के बाद जब शिशु की डाइट में धीरे-धीरे ठोस और अर्ध-ठोस खाना शामिल किया जाता है, तब माता-पिता के लिए यह समझना भी जरूरी हो जाता है कि बच्चा कब भूखा है और कब उसका पेट भर चुका है.  इसी तरीके को रिस्पॉन्सिव फीडिंग कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो इसमें शिशु को घड़ी देखकर या जबरदस्ती खिलाने के बजाय उसके भूख और पेट भरने के संकेतों को समझकर खाना दिया जाता है. WHO भी 6-23 महीने के बच्चों के लिए responsive feeding को उचित कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग का अहम हिस्सा मानता है शिशु के भूख और पेट भरने के संकेत कैसे पहचानें हर बार बच्चा रोए तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे भूख लगी है. इसी तरह प्लेट में खाना छोड़ देना भी हमेशा खाने की पसंद न होने का संकेत नहीं होता. शिशु के व्यवहार को देखकर धीरे-धीरे उसके भूख और पेट भरने के संकेत समझे जा सकते हैं. भूख लगने पर बच्चा खाने की तरफ हाथ बढ़ा सकता है, मुंह खोल सकता है, चम्मच या खाने को देखकर उत्साहित हो सकता है या खाने की ओर झुक सकता है. वहीं पेट भरने पर वह मुंह बंद कर सकता है, सिर दूसरी तरफ कर सकता है, खाने को दूर कर सकता है या खाने में रुचि कम कर सकता है. ऐसे संकेतों को समझना जरूरी है क्योंकि responsive feeding में शिशु की भूख और पेट भरने के संकेतों पर प्रतिक्रिया देने की सलाह दी जाती है.  6 महीने के बाद Solid Food शुरू करने का सही तरीका क्या है WHO और UNICEF के अनुसार, पहले 6 महीने तक शिशु को सिर्फ मां का दूध देने की सलाह दी जाती है. करीब 6 महीने की उम्र में शिशु की ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ने लगती है, जिसे केवल ब्रेस्ट मिल्क से पूरा करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए इस उम्र के आसपास कॉम्प्लीमेंट्री फूड्स शुरू किए जाते हैं और ब्रेस्टफीडिंग जारी रखी जाती है.  शुरुआत में शिशु को बहुत ज्यादा खाना खिलाने की जरूरत नहीं होती.  WHO के अनुसार 6-8 महीने की उम्र में complementary foods की शुरुआत छोटे हिस्सों से की जा सकती है और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाई जाती है. इस उम्र में नरम, अच्छी तरह मैश किए हुए या semi-solid foods से शुरुआत की जा सकती है.  Responsive Feeding: 6 से 23 महीने के बच्चों के लिए एज-वाइज फीडिंग रूटीन  उम्र  भोजन की आवृत्ति (Frequency) खाने की बनावट  6 से 8 महीने दिन में 2-3 बार खाना + ब्रेस्टफीडिंग  • नरम  • मैश किया हुआ  • सेमी-सॉलिड  9 से 11 महीने दिन में 3-4 बार खाना + 1 बार न्यूट्रिशियस स्नैक • थोड़ा गाढ़ा और बारीक कटा हुआ • सॉफ्ट फिंगर फूड्स  12 से 23 महीने दिन में 3-4 बार खाना + 1-2 बार हेल्दी स्नैक्स • परिवार का सामान्य खाना • हल्का मैश किया या बारीक कटा हुआ शिशु को खाना खिलाते समय ये गलतियां न करें सबसे आम गलती है शिशु के मना करने के बावजूद उसे जबरदस्ती खाना खिलाते रहना. Responsive feeding का मतलब ही है कि शिशु के संकेतों को समझा जाए. WHO की जानकारी में भी शिशु को धीरे और धैर्य से खिलाने तथा उसे जबरदस्ती खाना न खिलाने पर जोर दिया गया है.  कुछ और बातों का ध्यान रखें: बच्चा खाना मना करे तो हर बार उसे जबरदस्ती न खिलाएं.  खाना खिलाते समय शिशु को अकेला न छोड़ें.  उसकी उम्र के हिसाब से ही खाने का टेक्स्चर रखें.  खाना बनाने और खिलाने से पहले हाथ और बर्तन साफ रखें.  खाने को सुरक्षित तरीके से तैयार और स्टोर करें.  शिशु को खाते समय पर्याप्त समय दें.  PC: AI Generated स्क्रीन के सामने खिलाना क्यों सही नहीं माना जाता? शिशु को मोबाइल या टीवी दिखाकर खाना खिलाना कई घरों में आसान तरीका लग सकता है, लेकिन इससे माता-पिता का ध्यान शिशु के वास्तविक खाने के संकेत से हट सकता है. Responsive feeding में  खिलाते समय शिशु के साथ बातचीत करना, उसे देखना और उसके संकेतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण माना जाता है.  WHO के मुताबिक, शिशु को खाना खिलाने का समय सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि इस दौरान बच्चा बहुत कुछ सीखता भी है. इसलिए खाना खिलाते समय उससे बात करें, उसकी तरफ देखें और उसके साथ प्यार से interact करें. इससे बच्चा खाने के साथ-साथ आपके साथ जुड़ना भी सीखता है.  यह भी पढ़ें: मानसून के बाद किचन में न करें ये गलतियां, फल-सब्जी और बचे खाने को लेकर रहें सावधान The post बच्चा कब भूखा और कब उसका पेट भर चुका है, क्या आप जानते हैं? जानें सही Feeding Routine appeared first on Naya Vichar.

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BCCI ने रोहित पर लगाया दो साल का बैन, अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम से हुए बाहर; इन 2 खिलाड़ियों की एंट्री

India U19 vs Australia: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी घरेलू सीरीज से पहले हिंदुस्तानीय अंडर-19 टीम में बड़ा बदलाव हुआ है. बंगाल के लेग स्पिनर रोहित यादव को उम्र संबंधी फ्रॉड के चलते हिंदुस्तान की U19 टीम से हटा दिया गया है. BCCI ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए वनडे और मल्टी-डे दोनों टीमों में उनके रिप्लेसमेंट का ऐलान किया. BCCI ने जारी किया अपडेट BCCI के मुताबिक, जूनियर क्रिकेट कमेटी ने रोहित यादव की जगह वनडे टीम में सौराष्ट्र के आर्यन सावसानी को शामिल किया है. वहीं, मल्टी-डे टीम में हरियाणा के तनय बलोदा को मौका दिया गया है. BCCI ने अपने बयान में कहा कि ऑस्ट्रेलिया U19 के खिलाफ राजकोट और अहमदाबाद में होने वाले मुकाबलों के लिए चुने गए रोहित यादव को उम्र संबंधी फ्रॉड के कारण टीम से बाहर कर दिया गया है. इसके साथ ही रोहित पर दो साल का बैन भी लगाया गया है. श्रीलंका के खिलाफ भी स्पोर्ट्स चुके हैं रोहित रोहित यादव हाल ही में हिंदुस्तान की U19 टीम का हिस्सा रहे थे. उन्होंने जुलाई 2026 में श्रीलंका के खिलाफ एक यूथ टेस्ट और दो यूथ वनडे मुकाबले स्पोर्ट्से थे. यूथ टेस्ट में रोहित ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट हासिल किए थे. इसके अलावा श्रीलंका के खिलाफ स्पोर्ट्से गए दो यूथ वनडे मैचों में उन्हें एक विकेट मिला था. ये भी पढ़ें: Duleep Trophy: तिलक वर्मा बोले- करुण नायर बदकिस्मत हैं, बल्लेबाज ने एक लाइन में दिया करारा जवाब द्रविड़ और सहवाग के बेटे भी टीम में हिंदुस्तान की U19 टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर वनडे और मल्टी-डे मुकाबले स्पोर्ट्सने हैं. इसी सीरीज के लिए BCCI ने अब अपडेटेड स्क्वॉड जारी किया है. हिंदुस्तान की U19 टीम में इस बार पूर्व हिंदुस्तानीय कप्तान और कोच राहुल द्रविड़ के बड़े बेटे अन्वय द्रविड़ और पूर्व हिंदुस्तानीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग भी शामिल हैं. अन्वय द्रविड़ विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जबकि आर्यवीर सहवाग टॉप ऑर्डर बल्लेबाज हैं. आर्यवीर हाल ही में दिल्ली प्रीमियर लीग में सेंट्रल दिल्ली किंग्स की ओर से स्पोर्ट्सते हुए नजर आए थे. India U19 की अपडेटेड वनडे टीम लक्ष्य रायचंदानी (कप्तान), यशवर्धन चौहान (उपकप्तान), रजत बघेल (विकेटकीपर), आर्यवीर सहवाग, वी.के. विनीत, कुशाग्र ओझा, अर्जुन राजपूत, मनाल चौहान, अन्वय द्रविड़ (विकेटकीपर), वी. यशवीर, शाविन विनोद, मोहित उलवा, चिगुरुपति वेंकट, काव्या पटेल, आर्यन सावसानी. India U19 की अपडेटेड मल्टी-डे टीम यशवर्धन चौहान (कप्तान), लक्ष्य रायचंदानी (उपकप्तान), सागर विर्क, कुशाग्र ओझा, मनाल चौहान, कुश पटेल, मानव कृष्णा (विकेटकीपर), अभिप्राय बिस्वास (विकेटकीपर), ईशान ओम, अयान अकरम, प्रणव राघवेंद्र, प्रियांशु सिंह, मोहित उलवा, आर्यन यादव और तनय बलोदा. ये भी पढ़ें: BCCI Ban: रोहित ने उम्र कम दिखाने के लिए बनवा रखे थे 3-3 बर्थ सर्टिफिकेट, BCCI ने लगाया 2 साल का बैन The post BCCI ने रोहित पर लगाया दो साल का बैन, अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम से हुए बाहर; इन 2 खिलाड़ियों की एंट्री appeared first on Naya Vichar.

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450Km से ज्यादा रेंज और 1.1 टन पेलोड, नई Mahindra Veero CNG हुई लॉन्च, डीजल मॉडल में भी मिले कई फीचर्स

महिंद्रा ने अपनी Veero गाड़ी का नया CNG मॉडल लॉन्च किया है. यह गाड़ी 1.1 टन तक सामान लेकर चल सकती है. इसकी शुरुआती कीमत 8.25 लाख रुपये, एक्स-शोरूम है. वहीं, कंपनी ने Veero के डीजल मॉडल को भी अपडेट किया है, जिसकी शुरुआती कीमत 8.29 लाख रुपये रखी गई है. आइए इनके बारे में जरा डिटेल में जानते हैं. 1.1 टन पेलोड के साथ मिलेगी 450 km से ज्यादा की रेंज नई Mahindra Veero 1.1 XXL CNG को खासतौर पर शहर में सामान की डिलीवरी करने वालों के लिए बनाया गया है. इसमें एक बार में 1.1 टन तक सामान रखा जा सकता है. गाड़ी में सामान रखने के लिए 9.5 फीट लंबी जगह भी मिलती है, जिससे ज्यादा सामान आसानी से रखा जा सकता है. माइलेज की बात करें तो कंपनी का कहना है कि यह गाड़ी 1 किलो CNG में 21.4 km तक चल सकती है. इसमें पेट्रोल और CNG दोनों का यूज किया जा सकता है. कंपनी के मुताबिक, दोनों फ्यूल को मिलाकर यह गाड़ी एक बार में 450 km से ज्यादा चल सकती है. ये भी पढ़ें: टाटा कार ऑफर्स सितंबर 2026: Harrier और Nexon सहित इन 5 इलेक्ट्रिक कारों पर ₹3.35 लाख तक छूट, फटाफट देखें लिस्ट Mahindra Veero CNG की कीमत नई Veero CNG की डिलीवरी 20 सितंबर से शुरू होगी. CNG मॉडल को V2 और V4 वेरिएंट में खरीदा जा सकता है. V2 की कीमत 8.25 लाख रुपये और V4 की कीमत 8.55 लाख रुपये है. अगर आप Pastel Riversand कलर लेना चाहते हैं, तो इसके लिए 5,000 रुपये अलग से देने होंगे. वेरिएंट V2 V4 1.1 XXL SD ₹8.25 लाख ₹8.55 लाख बड़े टचस्क्रीन और क्रूज कंट्रोल से लैस हुआ Veero डीजल डीजल मॉडल में अब 26.03cm का बड़ा टचस्क्रीन मिलता है, जो Android Auto और Apple CarPlay को सपोर्ट करता है. इसके अलावा वॉयस कमांड और कई भाषाओं का ऑप्शन भी दिया गया है. कंपनी ने अब इसमें क्रूज कंट्रोल भी शामिल कर दिया है. डीजल रेंज के सभी मॉडल में अब पावर विंडो और फास्ट चार्जिंग पोर्ट स्टैंडर्ड तौर पर मिलेंगे. केबिन में AC के साथ हीटर, एडजस्टेबल हेडरेस्ट वाली रिक्लाइनिंग ड्राइवर सीट और D+2 सीटिंग का इंतजाम है. खास बात यह है कि सीटों को फ्लैट फोल्ड करके आराम करने या सफर के दौरान सोने के लिए भी जगह बनाई जा सकती है. पिक-अप को स्मार्ट बनाने के लिए Mahindra का iMAXX कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम भी दिया गया है, जिसमें 50 से ज्यादा फीचर्स मिलते हैं. इसकी मदद से व्हीकल ट्रैकिंग, जियोफेंसिंग, रूट प्लानिंग, गाड़ी की हेल्थ मॉनिटरिंग और फ्यूल ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं का यूज किया जा सकता है. अब इसमें रिमोट AC ऑपरेशन का फीचर भी जोड़ दिया गया है. अपडेटेड Veero डीजल 8 सितंबर से बिक्री के लिए उपलब्ध है. Mahindra Veero डीजल की कीमत वेरिएंट V2 V4 V6 1.5 XL SD ₹8.29 लाख – – 1.5 XXL SD ₹8.49 लाख ₹8.82 लाख ₹9.45 लाख 1.5 XXL HD ₹8.75 लाख – – 1.5 XXL CBC ₹8.35 लाख ₹8.68 लाख – 1.6 XXL SD ₹8.49 लाख – ₹9.45 लाख 1.6 XXL HD ₹8.75 लाख – – ग्रे कलर के लिए ऊपर दी गई कीमतों के अलावा 5,000 रुपये एक्स्ट्रा आपको देने होंगे. ये भी पढ़ें: त्योहारी सीजन से ठीक पहले Maruti Suzuki ने बढ़ाए दाम, चुनिंदा कार मॉडल्स पर होगी ₹20 हजार तक की बढ़ोतरी The post 450Km से ज्यादा रेंज और 1.1 टन पेलोड, नई Mahindra Veero CNG हुई लॉन्च, डीजल मॉडल में भी मिले कई फीचर्स appeared first on Naya Vichar.

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Hanuman Ansh Box Office: ₹2 करोड़ से ₹156 करोड़ तक, ‘हनुमान अंश’ ने रचा कमाल, प्रीति जिंटा भी हुईं फिल्म की दीवानी

निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की लो-बजट धार्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’ इस समय देश के सिनेमाघरों में कमाई के नए झंडे गाड़ रही है. बिना किसी भारी-भरकम प्रमोशन के रिलीज हुई इस फिल्म ने अपने दमदार कंटेंट से हर किसी को हैरान कर दिया है. पब्लिक के मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद अब बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे भी इसके समर्थन में उतर आए हैं. वरुण धवन और आदित्य धर के बाद अब बॉलीवुड की ‘डिंपल गर्ल’ प्रीति जिंटा ने भी यह फिल्म देखी और फैंस से थिएटर्स जाने की खास अपील की. ₹10 लाख से शुरू होकर ₹156 करोड़ तक का सफर सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, महज ₹2.00 करोड़ के मामूली बजट में बनी इस हिट फिल्म ने पहले दिन सिर्फ ₹10 लाख की मामूली ओपनिंग ली थी. लेकिन जनता के वर्ड-ऑफ-माउथ के दम पर इसने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि इतिहास रच दिया. फिल्म ने रिलीज के 32वें दिन भी ₹10.00 करोड़ का रिकॉर्डतोड़ कलेक्शन किया है. इसके साथ ही हिंदुस्तान में फिल्म का नेट कलेक्शन ₹132.13 करोड़ और ग्रॉस कलेक्शन ₹156.20 करोड़ तक पहुंच गया है, जिससे यह हिंदुस्तानीय सिनेमा की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में से एक बन गई है. View on Instagram ‘सीता राम… इसे मिस मत करना’ प्रीति जिंटा ने की तारीफ प्रीति जिंटा ने अपने इंस्टाग्राम पर थिएटर के अंदर की तस्वीरें पोस्ट करते हुए फिल्म की जमकर तारीफ की. उन्होंने स्क्रीन की फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में “सीता राम” और “Wow” लिखा. वहीं दूसरी तस्वीर में उन्होंने फैंस से आग्रह करते हुए लिखा-लोगो, इस फिल्म को सिनेमाघरों में बिल्कुल मिस मत करना .” प्रीति से पहले ‘धुरंधर’ के डायरेक्टर आदित्य धर भी फिल्म के मेकर्स की तारीफ कर चुके हैं. प्रीति जिंटा की इंस्टाग्राम स्टोरी ये भी पढ़ें: Hanuman Ansh Song: ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ गाने वाले दृष्टिबाधित गायक Sunil Lodhi कौन हैं? जानें कैसे मिली उन्हें बड़े पर्दे पर एंट्री वरुण धवन बोले- “यह सिर्फ फिल्म नहीं, ईश्वर का आशीर्वाद है” इससे पहले एक्टर वरुण धवन अपनी मां के साथ यह फिल्म देखने पहुंचे थे और उन्होंने एक वीडियो शेयर कर लोगों से इसे देखने का आग्रह किया था. वरुण ने कहा था: “प्लीज हॉल में जाकर ‘हनुमान अंश’ जरूर देखें. मैं अपनी मम्मी के साथ गया था और यह वाकई कमाल का अनुभव था. अपने परिवार और दोस्तों को भी साथ ले जाएं. मुझे किसी ने यह वीडियो बनाने को नहीं कहा, बजरंगबली से मेरा बचपन का नाता है. यह बहुत ही सच्चे दिल से बनाई गई फिल्म है… सच कहूं तो यह कोई आम फिल्म नहीं बल्कि एक दिव्य अनुभव है.” नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित है कहानी डॉ. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी ‘हनुमान अंश’ मशहूर संत और आध्यात्मिक गुरु नीम करौली बाबा के जीवन और उनके भक्ति मार्ग पर आधारित है. फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता शोभिनव सत्या की एक्टिंग की चारों तरफ सराहना हो रही है. ये भी पढ़ें: EXCLUSIVE: ‘हनुमान अंश’ को लेकर बिहार के CM सम्राट चौधरी का बुलावा, योगी आदित्यनाथ से आज मुलाकात; कई राज्यों से आ रहे इनवाइट The post Hanuman Ansh Box Office: ₹2 करोड़ से ₹156 करोड़ तक, ‘हनुमान अंश’ ने रचा कमाल, प्रीति जिंटा भी हुईं फिल्म की दीवानी appeared first on Naya Vichar.

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Astro Tips: सूर्यास्त के बाद इन चीजों का दान करने से बचें, ज्योतिष में मानी जाती है ये बड़ी वजहें

Astro Tips: हिंदू धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र में दान को पुण्य का कार्य माना गया है. हालांकि, कुछ वस्तुओं का दान सूर्यास्त के बाद करने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि संध्या के समय मां लक्ष्मी का आगमन होता है और इस दौरान कुछ चीजें घर से बाहर देने पर बरकत प्रभावित हो सकती है. धन और आभूषण का दान क्यों न करें? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद किसी को धन उधार देना, रुपये देना या आभूषण बाहर करना शुभ नहीं माना जाता. माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है और धन से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इस समय लेन-देन से बचना बेहतर माना जाता है. दूध और दही देने से क्यों बचें? ज्योतिष में दूध का संबंध चंद्रमा से माना जाता है. चंद्रमा मन, भावनाओं और पारिवारिक सुख का कारक माना जाता है. इसलिए रात में दूध का दान करने से बचने की मान्यता है. वहीं दही का संबंध शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है, जो सुख-सुविधा और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करता है. ये भी पढ़ें: Cardamom Remedy: सिर्फ स्वाद नहीं, धन बढ़ाने में भी सहायक है इलायची; जानें उपाय नमक का दान बढ़ा सकता है परेशानी? धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में नमक का संबंध राहु-केतु से भी जोड़ा जाता है. सूर्यास्त के बाद नमक का दान करने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे घर में नकारात्मकता, आपसी विवाद और आर्थिक रुकावटों की स्थिति बन सकती है. हल्दी का दान क्यों माना जाता है अशुभ? हल्दी को गुरु ग्रह से संबंधित माना जाता है. ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, सम्मान, समृद्धि और शुभता का कारक माना गया है. इसी वजह से सूर्यास्त के बाद हल्दी का दान करने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे गुरु का सकारात्मक प्रभाव कमजोर हो सकता है. संध्या काल में किन बातों का रखें ध्यान? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान घर में दीपक जलाना, पूजा-पाठ करना और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना शुभ माना जाता है. हालांकि, इन मान्यताओं का पालन व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है. नोट: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है और नया विचार इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है. The post Astro Tips: सूर्यास्त के बाद इन चीजों का दान करने से बचें, ज्योतिष में मानी जाती है ये बड़ी वजहें appeared first on Naya Vichar.

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‘क्राइम पेट्रोल’ देखकर रचा खौफनाक खेल : चेहरे पर डाला तेजाब, पेट्रोल से जलाई लाश ; जानिए बागपत के इस ब्लाइंड मर्डर का सच

UP News: पुलिस के मुताबिक, अमन सागर ने अपनी पत्नी रचना के साथ मिलकर किशोरी की हत्या की और शव को स्कूटी से दिल्ली से बागपत लाकर फेंक दिया. पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर तेजाब डाला गया और पेट्रोल डालकर शव जला दिया गया. मामले में पुलिस ने आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है. 13 अगस्त को कब्रिस्तान की दीवार के पास मिली थी लाश दरअसल, 13 अगस्त 2026 को बागपत के NH-709B दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से सटे काठा गांव के पास कब्रिस्तान की दीवार के नजदीक एक किशोरी का अधजला शव मिला था. शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया. चेहरे को तेजाब और पेट्रोल से जला दिया गया था. मौके से ऐसा कोई सीधा सुराग नहीं मिला, जिससे पुलिस तुरंत हत्यारों तक पहुंच सके. मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर बन चुका था. एसपी ने SWAT टीम को जांच में लगाया मामले की गंभीरता को देखते हुए बागपत एसपी सूरज राय ने SWAT टीम को जांच में लगाया. इसके बाद पुलिस ने इलाके से गुजरने वाले प्रमुख एक्सप्रेसवे और हाईवे पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर एक्सप्रेसवे और NH-709B के आसपास की फुटेज जांची गई. पुलिस ने 2000 से ज्यादा वाहनों को चेक किया और करीब 600 CCTV कैमरों की पड़ताल की. बिना नंबर की सफेद स्कूटी ने बदल दी जांच की दिशा जांच के दौरान पुलिस को CCTV में बिना नंबर की एक सफेद स्कूटी दिखाई दी. स्कूटी पर एक पुरुष, एक स्त्री और करीब दो साल की बच्ची नजर आ रही थी. पुलिस ने इस स्कूटी को जांच की अहम कड़ी बनाया और फुटेज व सर्विलांस के जरिए इसके पीछे तक पहुंचने की कोशिश शुरू कर दी. दिल्ली के किराए के मकान तक पहुंची पुलिस CCTV और सर्विलांस की जांच के बाद पुलिस को पता चला कि संदिग्ध शख्स दिल्ली के शास्त्री पार्क, जीरो पुश्ता और उस्मानपुरी इलाके में किराए के मकान में रहता था. पुलिस वहां पहुंची तो मकान मालिक ने बताया कि मकान अमन सागर ने किराए पर लिया था. वह अपनी पत्नी रचना, दो साल की बेटी और 14 साल की किशोरी परी के साथ रह रहा था. खास बात यह थी कि 13 अगस्त को ही अमन मकान खाली करके वहां से चला गया था. मथुरा से जुड़ा मिला किशोरी का कनेक्शन मकान मालिक से मिले दस्तावेजों की जांच में पता चला कि अमन सागर मूल रूप से मथुरा का रहने वाला है. इसके बाद SWAT टीम और कोतवाली पुलिस मथुरा पहुंची. पुलिस के मुताबिक, वहां पता चला कि 17 अप्रैल 2026 को मथुरा के हाईवे थाने में 14 वर्षीय परी के अपहरण का मुकदमा अमन सागर के खिलाफ दर्ज हुआ था. इस जानकारी के बाद पुलिस ने दिल्ली में अमन के साथ रह रही परी और बागपत में मिली अधजली लाश के बीच कड़ियां जोड़नी शुरू कर दीं. हाथरस से पकड़े गए अमन और रचना जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने अमन सागर और उसकी पत्नी रचना को हाथरस से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का दावा है कि पूछताछ और जांच के बाद बागपत में मिली अधजली लाश की पहचान 14 वर्षीय परी के रूप में हुई. दोनों को गिरफ्तार कर मामले की आगे की कार्रवाई शुरू की गई. मथुरा में कपड़ों की दुकान से हुई थी परी से पहचान पुलिस के मुताबिक, अमन और उसकी पत्नी रचना मथुरा में परी के घर के सामने कपड़ों की दुकान चलाते थे. इसी दौरान अमन की परी से पहचान हुई. पुलिस के अनुसार, परी अमन के दो साल के शिशु की देखभाल में मदद करती थी. अमन ने पत्नी से शिशु की देखभाल के लिए परी को दिल्ली साथ ले जाने की बात कही थी. नजदीकियां बढ़ने के बाद घर में शुरू हुआ विवाद पुलिस का दावा है कि बाद में अमन और परी के बीच नजदीकियां बढ़ गईं और संबंध बन गए. इस बात को लेकर अमन और उसकी पत्नी रचना के बीच विवाद होने लगा. पुलिस के मुताबिक, परी और रचना के बीच भी विवाद की स्थिति बनने लगी. इसी विवाद के चलते अमन और रचना ने परी को रास्ते से हटाने की साजिश रची. गला दबाकर हत्या, फिर बोरे में रखा शव पुलिस के मुताबिक, अमन और रचना ने परी की गला दबाकर हत्या की. इसके बाद शव को बोरे में रखा गया. दोनों शव को स्कूटी पर रखकर दिल्ली के शास्त्री पार्क से निकले और दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के रास्ते बागपत पहुंचे. पहचान मिटाने के लिए चेहरे पर डाला तेजाब पुलिस का कहना है कि आरोपी शव को NH-709B के काठा गांव के पास कब्रिस्तान की दीवार के नजदीक लेकर पहुंचे. वहां शव को फेंकने के बाद चेहरे पर तेजाब डाला गया और पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई, ताकि किशोरी की पहचान न हो सके. वारदात के बाद आरोपी पति-पत्नी वहां से निकलकर हाथरस चले गए और किराए के मकान में रहने लगे. क्राइम शो देखकर पुलिस से बचने का आइडिया आया इस हत्याकांड में पुलिस ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है. एसपी सूरज राय के मुताबिक, अमन ने ‘क्राइम पेट्रोल’, ‘सावधान इंडिया’ और ‘CID’ जैसे क्राइम शो के कुछ एपिसोड देखे थे. पुलिस का कहना है कि इन्हीं कार्यक्रमों से आरोपी ने वारदात के बाद पुलिस से बचने और पहचान मिटाने के तरीके के बारे में सोचा. उसे लगा था कि शव की पहचान नहीं हो पाएगी और पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकेगी. लेकिन एक गलती ने पूरा प्लान फेल कर दिया आरोपी ने पहचान छिपाने के लिए कई कोशिशें कीं, लेकिन बिना नंबर की सफेद स्कूटी उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई. CCTV फुटेज में यही स्कूटी पुलिस को लगातार अहम सुराग देती गई. इसके बाद सर्विलांस और दूसरी जांचों के जरिए पुलिस आरोपी तक पहुंचती चली गई. 600 CCTV और 2000 वाहनों से खुली पूरी कहानी इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने करीब 600 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और 2000 से ज्यादा वाहनों की जांच की. इसी दौरान मिले सुरागों को जोड़ते हुए पुलिस मथुरा और दिल्ली तक पहुंची और आखिरकार आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर

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कौन संभालेगा सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत, श्वेता या कोई और? गिरिडीह में उठने लगे सवाल

गिरिडीह से नवीन शर्मा की रिपोर्ट Sudivya Sonu Political Legacy: सियासत में भावनाओं का कोई लंबा विराम होता है. नेता के जाने का गम अभी ताजा ही होता है कि नेतृत्व के अगले सवाल कुलबुलाने लगते हैं। कहते हैं कि वक्त बड़ा बेरहम होता है. कल तक जिस नाम के साथ चुनावी रणनीति बनती थी, कार्यकर्ताओं की बैठकें होती थीं और गिरिडीह के विकास की बातें होती थीं, आज वही नाम सिर्फ याद बन गया. यह नाम झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कद्दावर नेता और सेकेंड टू सीएम सुदिव्य कुमार सोनू है. इस समय सुदिव्य सोनू की अंतिम विदाई के बाद पूरा शहर शोक में डूबा है, मगर सियासत के पन्ने तेजी से पलटने लगे हैं. शहर के फिजां में तैरने लगा है, ‘कौन होगा सुदिव्य सोनू की विरासत?’ उनकी नेतृत्वक विरासत का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा? इन सवालों पर सवाल अब धीरे-धीरे चर्चा होने लगी है. गिरिडीह में महसूस हो रहा है नेतृत्वक खालीपन सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक जाना सिर्फ एक परिवार, एक पार्टी या एक विधानसभा क्षेत्र के लिए बड़ा सदमा नहीं है, बल्कि गिरिडीह की नेतृत्व में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भरना आसान नहीं होगा. करीब तीन दशक तक झामुमो से जुड़े रहे सुदिव्य ने संगठन की नेतृत्व से लेकर चुनावी मैदान और फिर प्रशासन के शीर्ष स्तर तक अपनी जगह बनाई थी. 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर अपनी नेतृत्वक पकड़ मजबूत की. इसके बाद हेमंत सोरेन प्रशासन में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे. सवाल सिर्फ सीट का नहीं, सियासी विरासत का भी सुदिव्य के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गिरिडीह विधानसभा सीट पर अगला चेहरा कौन होगा? असली सवाल यह है कि गिरिडीह में सुदिव्य ने जो नेतृत्वक जमीन तैयार की, उसे आगे कौन संभालेगा? उनके समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच स्वाभाविक रूप से यह चर्चा है कि पार्टी अब किस चेहरे पर भरोसा करेगी? सुदिव्य की वर्षों की मेहनत से तैयार संगठन, कार्यकर्ताओं का नेटवर्क और जनता के बीच उनकी व्यक्तिगत पकड़ किसी एक दिन में किसी दूसरे नेता को नहीं मिल सकती. क्या परिवार से निकलेगा नया चेहरा? सियासी गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि क्या सुदिव्य कुमार सोनू का परिवार उनकी नेतृत्वक विरासत को आगे बढ़ाएगा? उनकी पत्नी श्वेता शर्मा के नाम को लेकर भी चर्चाएं सामने आने लगी हैं. हालांकि, अभी इसे लेकर न तो कोई औपचारिक फैसला हुआ है और न ही परिवार की ओर से कोई स्पष्ट नेतृत्वक घोषणा सामने आई है. अगर ऐसा होता है, तो हिंदुस्तानीय नेतृत्व में यह कोई नया उदाहरण नहीं होगा. कई बार किसी लोकप्रिय नेता के निधन के बाद परिवार का कोई सदस्य नेतृत्व में उतरकर उनकी विरासत को आगे बढ़ाता रहा है. इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र के दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार थे. अचानक एक भयानक विमान हादसे में निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को नेतृत्वक विरासत सौंपी गई. लेकिन, गिरिडीह में यह फैसला भावनाओं से ज्यादा संगठन, चुनावी समीकरण और स्थानीय नेतृत्व को ध्यान में रखकर लेना होगा. JMM के सामने भी बड़ी चुनौती सुदिव्य कुमार सोनू सिर्फ गिरिडीह के विधायक नहीं थे. झामुमो संगठन में उनकी लंबी पारी रही थी. 1989 में पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं और 2003 में गिरिडीह जिला अध्यक्ष भी बने. पार्टी के सामने चुनौती दोहरी है. पहला, गिरिडीह विधानसभा सीट के लिए मजबूत चेहरा तलाशना है. दूसरा, सुदिव्य के समर्थकों और संगठनात्मक नेटवर्क को एकजुट रखना है. विपक्ष के लिए भी खुला मैदान सुदिव्य के निधन से गिरिडीह की नेतृत्व में विपक्ष के लिए भी नए समीकरण बनने की संभावना है. 2024 में सुदिव्य ने भाजपा प्रत्याशी को करीब 3,838 मतों के अंतर से हराया था. इससे पहले 2019 में उनकी जीत का अंतर 15,884 वोट था. ऐसे में आने वाला चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं होगा. यह सुदिव्य के प्रभाव, झामुमो की संगठनात्मक ताकत और विपक्ष की रणनीति तीनों की परीक्षा भी बन सकता है. इसे भी पढ़ें: आधा हिंदुस्तान नहीं जानता 1991 में सुदिव्य सोनू ने जिस रेलवे लाइन को उड़ाया था, उसे किसने बनवाया? सच जानकर रह जाएंगे हैरान कौन बनेगा ‘सोनू’ के बाद गिरिडीह का चेहरा? फिलहाल, गिरिडीह शोक में डूबा है. सुदिव्य की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके जनाधार की तस्वीर सामने रख दी. लेकिन, नेतृत्व में शोक के बाद संगठन को आगे बढ़ना होता है. चिता की आग ठंडी हो गई, लेकिन सुदिव्य सोनू के जाने से पैदा हुआ सियासी रिक्तता अभी भी खाली है. एक तरफ आंखों में आंसू हैं, तो दूसरी तरफ गिरिडीह की नेतृत्व में भविष्य को लेकर हलचल शुरू हो चुकी है. सवाल सीधा है, जिस गिरिडीह की सियासत को सुदिव्य सोनू ने अपनी पहचान दी, अब उस विरासत को कौन आगे बढ़ाएगा? एक बात तय है कि सुदिव्य कुमार सोनू का नेतृत्वक अध्याय भले ही अचानक खत्म हो गया हो, लेकिन उनकी बनाई सियासी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. असली सवाल अब यह है कि इस कहानी का अगला किरदार कौन होगा? इसे भी पढ़ें: सुदिव्य सोनू को ‘गुरुजी’ ने लिया था ‘गोद’, बना दिया ‘नेतृत्व का धुरंधर’ The post कौन संभालेगा सुदिव्य सोनू की नेतृत्वक विरासत, श्वेता या कोई और? गिरिडीह में उठने लगे सवाल appeared first on Naya Vichar.

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