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Author name: Vinod Jha

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सुदिव्य सोनू के पिता के आगे झुके थे गुरु जी, कहा था- आपका बेटा ले जा रहे हैं, कुछ बनाकर देंगे

रांची : झारखंड प्रशासन के मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक हुए निधन से नेतृत्वक गलियारे में शोक का माहौल है. इस घटना ने हर किसी को सदमे में डाल दिया. झारखंड आंदोलन से उपजे सुदिव्य सोनू ने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपनी नेतृत्वक यात्रा शुरू की थी और अपनी लगन व जनसेवा के बल पर राज्य कैबिनेट में मंत्री पद तक पहुंचे. हालांकि बहुत सारे लोग उनके नेतृत्वक करियर और प्रशासन में उनके कद से भली भांति वाकिफ हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सुदिव्य सोनू किस परिस्थिति में और कैसे नेतृत्व के मैदान में उतरे थे. आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि कैसे वे नेतृत्व के मैदान में उतरे थे. ये सारी बातें उन्होंने खुद एक निजी यू-ट्यूब चैनल से बातचीत के दौरान 6 माह पहले कही थी. 80-90 के दशक में साथी मारते थे ताना सुदिव्य कुमार सोनू के परिवार का नेतृत्व से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था. उनकी चार-पांच पीढ़ियों से लोग केवल प्रशासनी नौकरियों में ही रहे थे. जब वे उत्तर बिहार में पढ़ाई कर रहे थे, तब 80 और 90 के दशक में झारखंड अलग राज्य का आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था. उस दौर में उनके सहपाठी और अन्य लोग “अलग राज्य बना लोगे?” कहकर उन पर तंज कसते और प्रताड़ित करते थे. यह बात उनके मन में गहराई से बैठ गई थी और उनके भीतर अपने क्षेत्र व माटी के प्रति एक टीस पैदा हो गई थी. ये भी पढ़ें: सुदिव्य कुमार सोनू ही नहीं, हेमंत प्रशासन में इससे पहले भी 3 मंत्रियों का हो चुका है निधन; जानें कौन थे वे नेता 1989 में शिबू सोरेन से मुलाकात बनी टर्निंग पॉइंट साल 1989 में डीएसपी बरनाड कीचिया के आवास पर उनकी मुलाकात झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन से हुई. शिबू सोरेन ने जब उनके पढ़े-लिखे होने के बारे में जाना, तो उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा- “अगर तुम्हारे जैसे पढ़े-लिखे लोग इस अलग राज्य के आंदोलन में नहीं आएंगे, तो आंदोलन का विस्तार कैसे होगा?” गुरु जी के इन शब्दों और कंधे पर रखे उस हाथ ने युवा सुदिव्य सोनू के जीवन को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने किसी करियर या पेशे के रूप में नहीं, बल्कि माटी के हक-अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए नेतृत्व का रास्ता चुना और आंदोलन में कूद पड़े. जब गुरु जी ने पिता से कहा-‘आपका बेटा ले जा रहे हैं’ नेतृत्व में आने पर मध्यमवर्गीय परंपरा के मुताबिक सुदिव्य सोनू को अपने घर में भारी विरोध का सामना करना पड़ा. उनके पिता इस बात से काफी नाराज रहते थे कि बेटे ने अपना जीवन बर्बाद कर लिया. लेकिन 2004-05 के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने पारिवारिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. शिबू सोरेन खुद सुदिव्य सोनू के गिरिडीह स्थित घर चाय पीने पहुंचे. वहां जब सुदिव्य के तेज स्वभाव वाले पिताजी अनमने ढंग से कमरे से बाहर निकले, तो दिशोम गुरु ने आगे बढ़कर उनके पैर छुए और हाथ थामकर कहा- “आपका बेटा मांग के ले जा रहे हैं, कुछ बना के देंगे.” गुरु जी के इस व्यवहार और विश्वास के बाद उनके पिता का मन बदल गया. सुदिव्य सोनू अक्सर कहते थे कि गुरु जी ने बिना कहे उनके पारिवारिक तनाव को भांप लिया था और उस दिन के बाद उनके पिता ने कभी उनके नेतृत्व में रहने पर सवाल नहीं उठाया. ये भी पढ़ें: ‘आप हमेशा याद आएंगे भैया…’, सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर भावुक हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन The post सुदिव्य सोनू के पिता के आगे झुके थे गुरु जी, कहा था- आपका बेटा ले जा रहे हैं, कुछ बनाकर देंगे appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

प्रभारी सचिव ने कंट्रोल रूम में बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की

प्रत्येक व्यवस्था के लिए पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर– प्रभारी सचिव, समस्तीपुर-सह-सचिव, भवन निर्माण विभाग श्री प्रणव कुमार द्वारा जिलाधिकारी, समस्तीपुर श्री रोशन कुशवाहा, अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन श्री राजेश सिंह एवं अन्य संबंधित पदाधिकारियों के साथ रसूलपुर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के उपरांत कंट्रोल रूम में सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ से उत्पन्न संभावित परिस्थितियों एवं उससे निपटने की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई। बैठक में विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित लोगों के विस्थापन की स्थिति में आश्रय स्थलों की तैयारी, वहां मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा कम्युनिटी किचन के सुचारू संचालन एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था की समीक्षा की गई। निर्देश दिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा आश्रय स्थलों पर पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की देरी न हो। आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के क्रम में उपलब्ध संसाधनों, मानव बल एवं त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था की जानकारी ली गई। सभी आवश्यक संसाधनों को कार्यशील एवं तैयार अवस्था में रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत जीवन रक्षक एवं अन्य महत्वपूर्ण दवाओं के पर्याप्त स्टॉक की समीक्षा की गई। सिविल सर्जन को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने एवं जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इसी प्रकार पशुओं के लिए चारा एवं आवश्यक पशु चिकित्सा दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की गई। पशुपालन पदाधिकारी को पर्याप्त चारा एवं दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में वितरण की व्यवस्था करने को कहा गया। बैठक में पॉलिथीन शीट्स की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। जरूरतमंद परिवारों को समय पर पॉलिथीन शीट उपलब्ध कराने तथा उपलब्ध स्टॉक का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। प्रभारी सचिव ने राहत एवं बचाव से संबंधित प्रत्येक महत्वपूर्ण कार्य के लिए संबंधित पदाधिकारी की स्पष्ट जवाबदेही निर्धारित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी पदाधिकारी अपने निर्धारित दायित्वों की नियमित समीक्षा करें और किसी भी कमी की स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। जलस्तर की स्थिति की समीक्षा करते हुए अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन श्री राजेश सिंह एवं बाढ़ प्रमंडल के अधिकारियों को जलस्तर पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यक सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। संवेदनशील स्थलों एवं तटबंधों पर भी लगातार निगरानी रखने को कहा गया। अनुमंडल पदाधिकारी को अनुमंडल स्तरीय कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत निगरानी रखने तथा जिला स्तर पर 24×7 कार्यरत जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) के माध्यम से स्थिति की निरंतर मॉनिटरिंग एवं विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन श्री राजेश सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित एवं संभावित प्रभावित क्षेत्रों में माइकिंग के माध्यम से आमजनों को लगातार जागरूक किया जा रहा है तथा आवश्यक सावधानियों एवं प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है। प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में तत्परता, समन्वय और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए आमजनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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दिवाली-छठ पर ट्रेन का कंफर्म टिकट पाना हुआ आसान: आईआरसीटीसी के इन 3 हैक्स से झटपट बुक करें अपनी सीट

त्योहारी सीजन में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार और उत्तर प्रदेश की तरफ जाने वाली ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. इस साल 8 नवंबर 2026 को मनाए जाने वाले दिवाली के पावन पर्व और उसके बाद शुरू होने वाले छठ पूजा के त्योहार को देखते हुए हिंदुस्तानीय रेलवे ने अग्रिम टिकट बुकिंग की शुरुआत कर दी है. 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) नियम के तहत सुबह 8 बजे से आईआरसीटीसी (IRCTC) पर टिकट बुकिंग की होड़ मच गई है. दिल्ली-पटना, मुंबई-कटिहार और वाराणसी जैसी व्यस्त रेल लाइनों पर लंबी वेटिंग लिस्ट से बचने के लिए रेलवे द्वारा घोषित 15 स्पेशल ट्रेनों की सेवा के साथ-साथ सही डिजिटल रणनीति अपनाना बेहद जरूरी है. 1. ‘मास्टर लिस्ट’ फीचर से बचाएं कीमती सेकंड जब सुबह 8 बजे तत्काल या एडवांस टिकट बुकिंग की खिड़की खुलती है, तब एक-एक सेकंड की समय सीमा मायने रखती है. आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करके अपने ‘My Profile’ सेक्शन में जाकर ‘Master List’ पहले ही तैयार कर लें. इसमें यात्रियों के नाम, उम्र, जेंडर और बर्थ प्रेफरेंस (जैसे लोअर या साइड लोअर) को प्री-सेव करके रखा जाता है. बुकिंग विंडो ओपन होते ही डेटा मैन्युअली टाइप करने के बजाय सिर्फ पैसेंजर सेलेक्ट करना होता है. इससे फॉर्म भरने का समय बचता है और टिकट कंफर्म होने के चांस कई गुना बढ़ जाते हैं. 2. एडवांस लॉगिन और प्री-सर्च रूट से बचाएं सर्वर टाइम पीक आवर्स के दौरान लाखों लोग एक साथ आईआरसीटीसी के सर्वर पर लॉगिन करते हैं, जिससे साइट स्लो होने का डर रहता है. इस स्थिति से निपटने के लिए टिकट बुकिंग खुलने से ठीक 5 मिनट पहले अपने अकाउंट में लॉगिन कर लें. जिस रूट पर यात्रा करनी है, उसका स्टेशन कोड, ट्रेन नंबर और क्लास (Sleeper, 3AC या 2AC) पहले से स्क्रीन पर सेलेक्ट करके तैयार रखें. समय से पहले लॉगिन रहने से आखिरी वक्त पर होने वाली तकनीकी खराबी और सेशन टाइम-आउट जैसी दिक्कतों से बचा जा सकता है. 3. फास्ट पेमेंट मोड्स का इस्तेमाल करके बचाएं ट्रांजैक्शन टाइम अक्सर देखा जाता है कि फॉर्म भरने के बाद बैंक के ओटीपी (OTP) का इंतजार करने या डेबिट/क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स डालने में काफी समय लग जाता है, और जब तक पेमेंट पूरा होता है तब तक सीटें फुल हो जाती हैं. इससे बचने के लिए सबसे तेज पेमेंट विकल्पों जैसे UPI (Google Pay, PhonePe, Paytm), QR कोड स्कैनर या IRCTC iMudra वॉलेट का उपयोग करें. डिजिटल वॉलेट या यूपीआई ऑटो-पे के जरिए ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के तुरंत पूरा होता है, जिससे सीट हाथ से निकलने का जोखिम खत्म हो जाता है. त्योहारों पर रेलवे का राहत पैकेज: 15 स्पेशल ट्रेनों की सौगात यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए हिंदुस्तानीय रेलवे ने उत्तर और पूर्व हिंदुस्तान के रूट्स पर 15 नई स्पेशल ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है. इनमें मुंबई सेंट्रल-कटिहार (09189/09190), कानपुर सेंट्रल-गुवाहाटी (04127/04128), कटिहार-अमृतसर (05736/05735), डिब्रूगढ़-कोलकाता (05932/05931), और आनंद विहार-मुजफ्फरपुर (04028/04027) जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं. यदि नियमित ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट बहुत लंबी हो चुकी है, तो इन स्पेशल ट्रेनों के फेरों में अपनी सीट बुक करके आरामदायक सफर का आनंद लिया जा सकता है. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) {“type”:”faq”,”question”:”Q1: आईआरसीटीसी में मास्टर लिस्ट (Master List) कैसे बनाई जाती है?”,”answer”:”उत्तर: IRCTC ऐप या वेबसाइट में लॉगिन करने के बाद ‘My Account’ सेक्शन में जाएं और ‘My Master List’ विकल्प चुनें. यहां यात्रा करने वाले यात्रियों का विवरण पहले से जोड़कर सुरक्षित कर लें.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q2: दिवाली 2026 के लिए एडवांस ट्रेन टिकट बुकिंग कब से शुरू हुई है?”,”answer”:”उत्तर: 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन नियम (ARP) के तहत 6 सितंबर 2026 से सुबह 8 बजे से दिवाली और छठ पूजा की यात्रा के लिए टिकटों की बुकिंग शुरू कर दी गई है.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q3: पेमेंट फेल होने की समस्या से बचने के लिए कौन सा पेमेंट मोड सबसे अच्छा है?”,”answer”:”उत्तर: पेमेंट फेलियर और समय की बर्बादी से बचने के लिए IRCTC iMudra वॉलेट या सीधे UPI/QR कोड से भुगतान करना सबसे सुरक्षित और तेज माना जाता है.”} ये भी पढ़ें: IRCTC की नई वेबसाइट या पुरानी? ट्रेन टिकट बुक करने के लिए कौन सा पोर्टल चुनें, यहां जानें The post दिवाली-छठ पर ट्रेन का कंफर्म टिकट पाना हुआ आसान: आईआरसीटीसी के इन 3 हैक्स से झटपट बुक करें अपनी सीट appeared first on Naya Vichar.

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Ravivar Ke Upay: सूर्य देव की कृपा पाने के लिए रविवार को करें ये उपाय, इन 3 कामों से तुरंत बना लें दूरी

Ravivar Ke Upay: ज्योतिष शास्त्र में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है. सूर्यदेव को सफलता, मान-सम्मान, आरोग्य और नेतृत्व क्षमता का कारक माना जाता है. मान्यता है कि कुंडली में सूर्य मजबूत होने पर व्यक्ति को सफलता और प्रसिद्धि मिलती है. वहीं, सूर्य कमजोर होने पर करियर और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां आ सकती हैं. ज्योतिषार्चाय संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, यदि आपके जीवन में भी तरक्की की राह में रुकावटें आ रही हैं या आप लंबे समय से आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो रविवार के दिन कुछ सरल ज्योतिषीय उपाय करके सूर्य देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.  रविवार को क्या करें? आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, करियर में पद-प्रतिष्ठा मिलती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. लाल रंग की वस्तुओं का दान करें रविवार को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन, लाल कपड़े या लाल चंदन का दान करें. मान्यता है कि इससे कुंडली में सूर्य मजबूत होता है. माथे पर चंदन का तिलक लगाएं जरूरी काम के लिए घर से निकलते समय माथे पर लाल चंदन या रोली का तिलक लगाएं. मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और कार्यों में सफलता मिलती है. ये भी पढ़ें: नीम करोली बाबा के 5 अनमोल वचन, बदल देंगे जिंदगी को देखने का नजरिया रविवार को बरतें ये सावधानियां नमक का सेवन कम करें रविवार के दिन नमक का सेवन कम से कम करने की मान्यता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. तांबे के बर्तन न बेचें इस दिन तांबे के बर्तन न बेचें. ज्योतिष शास्त्र में तांबे का संबंध सूर्य देव से बताया गया है. मान्यता है कि रविवार के दिन तांबे की वस्तुएं बेचने से कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो सकती है.  बाल और नाखून काटने से बचें रविवार के दिन विशेषकर संध्या के समय बाल और नाखून काटने से बचने की मान्यता है. ऐसा करना अशुभ माना जाता है और कहा जाता है कि इससे कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं. ये भी पढ़ें: Bhagavad Gita Sikh: जब जिंदगी में आए मुश्किल दौर, श्रीकृष्ण की 7 सीख दिखाएंगी सही रास्ता The post Ravivar Ke Upay: सूर्य देव की कृपा पाने के लिए रविवार को करें ये उपाय, इन 3 कामों से तुरंत बना लें दूरी appeared first on Naya Vichar.

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Live : गिरिडीह में दोपहर 3 बजे होगा सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार, विदाई देने पहुंचेंगे CM हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन

झारखंड प्रशासन के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और JMM के प्रमुख नेता सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया. The post Live : गिरिडीह में दोपहर 3 बजे होगा सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार, विदाई देने पहुंचेंगे CM हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन appeared first on Naya Vichar.

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सुदिव्य कुमार सोनू ही नहीं, हेमंत सरकार में इससे पहले भी 3 मंत्रियों का हो चुका है निधन; जानें कौन थे वे नेता

Jharkhand Ministers Death: झारखंड की नेतृत्व से रविवार 6 सितंबर को सुबह एक ऐसी समाचार आई है, जिसने पूरे राज्य को सन्न कर दिया है. हेमंत सोरेन प्रशासन में मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हो गया है. महज 54 साल की उम्र में एक हार्ट अटैक ने झारखंड से उसका एक मजबूत और जमीनी नेता छीन लिया. जगरनाथ महतो इसके बाद नाम आता है जगरनाथ महतो का. जगरनाथ महतो डुमरी से विधायक और हेमंत सोरेन प्रशासन में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे. कोरोना संक्रमण के बाद उनकी तबीयत काफी खराब हुई थी. उनका इलाज लंबे समय तक चला और फेफड़े का ट्रांसप्लांट भी हुआ था. लेकिन 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. जगरनाथ महतो झारखंड की नेतृत्व में एक मजबूत और जमीनी नेता के तौर पर पहचाने जाते थे. उनके निधन के बाद डुमरी सीट पर उपचुनाव हुआ और उनकी पत्नी बेबी देवी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं. सुदिव्य कुमार सोनू अब, साल 2026 में फिर वही दुखद सिलसिला चर्चा में है. सुदिव्य कुमार सोनू. गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन प्रशासन में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. इसके अलावा उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, स्पोर्ट्सकूद एवं युवा कार्य और नगर विकास एवं आवास जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी थी. लेकिन सुदिव्य कुमार सोनू की कहानी सिर्फ मंत्री बनने तक की नहीं है. उनका नेतृत्वक सफर एक साधारण JMM कार्यकर्ता के तौर पर शुरू हुआ था. कभी वह दीवार लेखन करते थे, पोस्टर लगाते थे और पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव घूमते थे. साल 1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ली और संगठन के लिए काम करना शुरू किया. बाद में 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया और फिर पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए वह गिरिडीह जिला अध्यक्ष तक पहुंचे. चुनावी नेतृत्व में भी उनका सफर आसान नहीं था. 2009 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. 2014 में वह फिर मैदान में उतरे और दूसरे नंबर पर रहे. फिर 2019 में JMM ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और इस बार उन्होंने गिरिडीह सीट जीत ली. 2024 में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी और दूसरी बार विधायक बने. इसके बाद हेमंत सोरेन प्रशासन में उन्हें मंत्री बनाया गया. यानी जिस नेता ने कभी पार्टी के लिए दीवारों पर नारे लिखे, गांव-गांव जाकर संगठन का काम किया, वही नेता आगे चलकर झारखंड प्रशासन में मंत्री बना, लेकिन आज उनका सफर अचानक खत्म हो गया. हेमंत प्रशासन में अब तक चार मंत्रियों का निधन हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अब तक चार मंत्रियों का निधन हो चुका है. इनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं. इनमें जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से जुड़े रहे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. यानी करीब साढ़े तीन साल के भीतर झारखंड प्रशासन के शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है. यह किसी तरह का दावा या किसी कारण को बताने की बात नहीं है, बल्कि झारखंड की नेतृत्व में सामने आया एक बेहद दुखद संयोग है। एक तरफ जेएमएम ने अपना एक वरिष्ठ और जमीनी नेता खो दिया है, तो दूसरी ओर हेमंत सोरेन प्रशासन के लिए भी यह एक बड़ा नेतृत्वक और व्यक्तिगत झटका है. सुदिव्य कुमार सोनू को अंतिम विदाई देने के लिए आज गिरिडीह में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं और पूरे झारखंड में शोक की लहर है. कैमरे पर अब सुदिव्य कुमार सोनू नहीं होंगे, लेकिन एक साधारण कार्यकर्ता से मंत्री तक का उनका सफर और पार्टी के लिए उनका लंबा संघर्ष झारखंड की नेतृत्व में हमेशा याद किया जाएगा. ये भी पढ़ें- ‘आप हमेशा याद आएंगे भैया…’, सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर भावुक हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन The post सुदिव्य कुमार सोनू ही नहीं, हेमंत प्रशासन में इससे पहले भी 3 मंत्रियों का हो चुका है निधन; जानें कौन थे वे नेता appeared first on Naya Vichar.

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Duleep Trophy 2026 Final Live: ईस्ट जोन ने जीता टॉस, ईशान किशन की टीम पहले करेगी बल्लेबाजी

दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच स्पोर्ट्सा जाएगा. 13 साल बाद खिताब का सूखा खत्म करने उतरे ईस्ट जोन के लिए यह एक बड़ा मुकाबला है. देखें क्या ईशान किशन अपनी टीम को जीत दिला पाते हैं. The post Duleep Trophy 2026 Final Live: ईस्ट जोन ने जीता टॉस, ईशान किशन की टीम पहले करेगी बल्लेबाजी appeared first on Naya Vichar.

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‘आप हमेशा याद आएंगे भैया…’, सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर भावुक हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

Sudivya Kumar Sonu Death: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा शोक जताया है. उन्होंने सुदिव्य कुमार सोनू को अपना बड़ा भाई बताते हुए कहा कि उनके निधन की समाचार को स्वीकार कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है. बड़े भाई की तरह हमेशा साथ रहे सोनू भैया: हेमंत सोरेन हेमंत सोरेन ने कहा कि सोनू भैया उनके लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या नेतृत्वक सहकर्मी नहीं थे, बल्कि बड़े भाई की तरह थे. वह हर कठिन समय में स्नेह, मार्गदर्शन और मजबूती से उनका साथ देते रहे. उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा उनके साथ रहेंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही सुदिव्य कुमार सोनू स्मृति-शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे. झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित कर दिया. देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस समाचार को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। सोनू भैया मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या… pic.twitter.com/rXEyPBQULo — Hemant Soren (@HemantSorenJMM) September 6, 2026 “> हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है और उनकी कमी हमेशा महसूस होगी. उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि सोनू भैया के स्नेह, संघर्ष और झारखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को वह जीवनभर अपने साथ लेकर चलेंगे. उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा, “आप हमेशा याद आएंगे भैया….” The post ‘आप हमेशा याद आएंगे भैया…’, सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर भावुक हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन appeared first on Naya Vichar.

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LIVE: मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड में शोक, जानें पल-पल के अपडेट

झारखंड प्रशासन के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और JMM के प्रमुख नेता सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया. The post LIVE: मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड में शोक, जानें पल-पल के अपडेट appeared first on Naya Vichar.

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Earthquake : बंगाल में भूकंप के झटके, भूस्खलन से तबाह मुर्शिदाबाद में रिक्टर स्केल पर 3.7 थी तीव्रता

Earthquake in Murshidabad: मुर्शिदाबाद. मुर्शिदाबाद. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार देर रात भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक भूकंप रात 10 बजकर 24 मिनट पर आया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.7 मापी गई, जबकि भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से करीब 10 किलोमीटर नीचे था. NCS ने इसका केंद्र मुर्शिदाबाद में 24.707 उत्तरी अक्षांश और 87.914 पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया है. हालांकि, अभी तक भूकंप से किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली है. मुर्शिदाबाद में देर रात भूकंप के झटके, दहशत में लोग स्थानीय स्तर पर बताया गया कि झटके धुलियान और फराक्का के बीच के इलाके में महसूस किए गए. भूस्खलन और भारी बारिश की मार झेल रहे मुर्शिदाबाद में भूकंप के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई. हालांकि, अभी तक भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है. भूकंप की तीव्रता कम होने के बावजूद देर रात अचानक आए झटकों ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया. बंगाल में पहले भी महसूस होते रहे हैं बड़े भूकंप के झटके पश्चिम बंगाल और इसके आसपास का बंगाल बेसिन भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र रहा है. इतिहास में कई बड़े भूकंपों का असर बंगाल तक पहुंचा है. विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल बेसिन कई सक्रिय भ्रंश क्षेत्रों के प्रभाव में आता है, इसलिए छोटे-बड़े भूकंपों की गतिविधि को पूरी तरह असामान्य नहीं माना जा सकता. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें प्रमुख घटनाएं 1885: बंगाल भूकंप, जिसकी तीव्रता करीब 6.8 रही. 1897: 8.1 से अधिक तीव्रता वाले महान असम-शिलांग भूकंप के झटके बंगाल में भी महसूस किए गए और कोलकाता में नुकसान हुआ. 1918: श्रीमंगल भूकंप, जिसकी तीव्रता करीब 7.6 थी, का प्रभाव बंगाल क्षेत्र में महसूस हुआ. 1930: धुबरी भूकंप, करीब 7.1 तीव्रता के इस भूकंप के झटके बंगाल के बड़े हिस्से में महसूस किए गए. 1934: बिहार-नेपाल सीमा का 8 से अधिक तीव्रता वाला विनाशकारी भूकंप बंगाल तक महसूस किया गया. 1964: सागर द्वीप क्षेत्र में करीब 5.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. 2011: सिक्किम भूकंप (6.9) का प्रभाव पश्चिम बंगाल और कोलकाता में भी महसूस हुआ. 2015: नेपाल के शक्तिशाली भूकंपों के झटके पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी हिंदुस्तान में महसूस किए गए. Also Read: कोलकाता मेट्रो में धुआं, आग लगने की आशंका के बाद बेलगाछिया स्टेशन पर रोकी गयी ट्रेनें The post Earthquake : बंगाल में भूकंप के झटके, भूस्खलन से तबाह मुर्शिदाबाद में रिक्टर स्केल पर 3.7 थी तीव्रता appeared first on Naya Vichar.

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