Hot News

Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर लगाये कई आरोप, कहा- मुझे हाउस अरेस्ट कर रखा है

कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट Mamata Banerjee: दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने दावा किया कि वह पीड़ित परिवार से मिलने बारुईपुर जाना चाहती थीं, लेकिन उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल व सीएपीएफ तैनात कर उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया है. बारुईपुर की घटना ने तोड़ा धैर्य का बांध वीडियो संदेश जारी कर ममता ने कहा कि बारुईपुर की घटना से वह बेहद चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, दिनहाटा और पानीहाटी समेत राज्य के कई हिस्सों में स्त्रीओं के साथ अत्याचार की घटनाएं हुई हैं. बारुईपुर की घटना ने लोगों के धैर्य का बांध तोड़ दिया है. ममता के घर के आगे पुलिस बल तैनात ममता ने आरोप लगाया कि वह अकेले पीड़ित परिवार के पास जाना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस, सीआरपीएफ, आरपीएफ और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के कर्मियों की तैनाती कर दी गयी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इलाके में धारा 144 लागू नहीं है तो उनके घर के आसपास सुरक्षा बलों का रूट मार्च क्यों कराया जा रहा है. उनका आरोप है कि विपक्षी दलों को छूट दी जा रही है, जबकि उनकी पार्टी के नेताओं को रोका जा रहा है. ममता की हुई पीड़ित परिवार से बात ममता बनर्जी ने कहा कि वह स्वयं घटनास्थल नहीं पहुंच सकीं, लेकिन पीड़ित परिवार के सदस्यों से उनकी बातचीत हुई है और उन्होंने हरसंभव मदद तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया. उल्लेखनीय है कि बारुईपुर के धपधपी-2 ग्राम पंचायत क्षेत्र में शनिवार से लापता नाबालिग लड़की का शव रविवार सुबह एक तालाब से बोरे में बंद मिला था. परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्षेत्र में तनाव, पुलिस कर रही मामले की जांच घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया. आक्रोशित भीड़ ने पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की, सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी. पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि भीड़ द्वारा की गयी हत्या की घटना की अलग से जांच शुरू कर दी है. Also Read: गाड़ी पर लटकने का मामला: अभिषेक बनर्जी के जवाब से कोलकाता पुलिस संतुष्ट नहीं, फिर भेजेगी नोटिस The post ममता बनर्जी ने भाजपा प्रशासन पर लगाये कई आरोप, कहा- मुझे हाउस अरेस्ट कर रखा है appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

पूजा में भगवान को अक्षत क्यों चढ़ाए जाते हैं? जानें धार्मिक महत्व और मान्यताएं

Puja Samagri: सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान देवी-देवताओं को अक्षत (साबुत चावल) अर्पित करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. तिलक, हवन, कलश स्थापना, यज्ञ और भगवान के श्रृंगार जैसे लगभग सभी धार्मिक अनुष्ठानों में अक्षत का विशेष महत्व माना जाता है. शास्त्रों में इसे पवित्रता, पूर्ण समर्पण और समृद्धि का प्रतीक बताया गया है. आइए जानते हैं पूजा में अक्षत अर्पित करने का धार्मिक महत्व.  अक्षत का महत्व संस्कृत में ‘अक्षत’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है- ‘अ’ (नहीं) और ‘क्षत’ (खंडित). अर्थात जो टूटा या खंडित न हो. भगवान को अक्षत अर्पित करने का अर्थ है कि भक्त बिना किसी छल, कपट या कमी के अपना संपूर्ण समर्पण ईश्वर के चरणों में अर्पित कर रहा है. इसलिए पूजा में हमेशा साबुत चावल का ही उपयोग किया जाता है.  पूजा में अक्षत चढ़ाने के मुख्य कारण पूर्णता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक शास्त्रों के अनुसार, भगवान को टूटी हुई या खंडित वस्तुएं अर्पित करना वर्जित माना गया है. अक्षत अखंडता और पूर्णता का प्रतीक है. इसे अर्पित करते समय भक्त प्रार्थना करता है कि उसका जीवन, परिवार और ईश्वर के प्रति उसकी श्रद्धा भी अक्षत की तरह अटूट और पूर्ण बनी रहे. सबसे शुद्ध अन्न पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पृथ्वी पर सबसे पहले उत्पन्न होने वाले प्रमुख अनाजों में धान (चावल) का विशेष स्थान है. जब तक चावल धान के छिलके के भीतर रहता है, तब तक वह किसी पक्षी या जीव द्वारा जूठा या अशुद्ध नहीं होता. इसी प्राकृतिक शुद्धता के कारण इसे देव-अन्न माना गया है और भगवान को अर्पित किया जाता है. संपन्नता और प्रचुरता का प्रतीक चावल को समृद्धि, उर्वरता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. पूजा में अक्षत अर्पित करने का उद्देश्य घर में धन, धान्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की निरंतर वृद्धि की कामना करना होता है. यह भी पढें: Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास, जानें चार सावन सोमवार और शिव पूजा का महत्व The post पूजा में भगवान को अक्षत क्यों चढ़ाए जाते हैं? जानें धार्मिक महत्व और मान्यताएं appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

मां दुर्गा से जुड़े इन 10 नामों में छिपे हैं खूबसूरत मतलब, बेटी के लिए हो सकते हैं बेस्ट

Goddess Durga Baby Girl Names: बेटी का नाम चुनना हर माता-पिता के लिए बहुत खास पल होता है. हर कोई चाहता है कि उसकी बेटी का नाम सबसे अलग, सुनने में प्यारा और अच्छे मतलब वाला हो. कई लोग ऐसे नाम पसंद करते हैं, जिनका जुड़ाव देवी-देवताओं से हो. अगर आप भी अपनी लाडली के लिए मां दुर्गा से प्रेरित कोई सुंदर नाम ढूंढ रहे हैं, तो यहां दिए गए नाम आपके काम आ सकते हैं. इन नामों का मतलब भी अच्छा है और आज के समय में काफी पसंद किए जा रहे हैं. स्तुति Photo credit – ai स्तुति का मतलब होता है ‘प्रार्थना’ या ‘ईश्वर की तारीफ’. यह नाम सुनने में बहुत मीठा और सादगी भरा लगता है. अनिका Photo credit – freepik अनिका मां दुर्गा से जुड़ा एक लोकप्रिय नाम माना जाता है. इसका मतलब है ‘सुंदर चेहरा’ और ‘कोमल स्वभाव’. यह नाम मॉडर्न होने के साथ-साथ ट्रेडिशनल टच भी रखता है. आद्या Photo credit – ai आद्या नाम का मतलब होता है ‘सबसे पहली’ या ‘आदि शक्ति’. यह छोटा, सुंदर और काफी पसंद किया जाने वाला नाम है. इशा Photo credit – freepik इशा नाम का अर्थ है ‘रक्षा करने वाली’ या ‘सभी का ध्यान रखने वाली’. यह नाम सुनने में भी बहुत प्यारा लगता है. भव्या Photo credit – social media भव्या का मतलब होता है ‘शानदार’, ‘खूबसूरत’ और ‘अच्छे गुणों वाली’. यह नाम काफी एलिगेंट लगता है. तनवी Photo credit- social media तनवी एक छोटा और प्यारा नाम है. इसका मतलब ‘खूबसूरत’ और ‘नाज़ुक’ माना जाता है. यह नाम आजकल कई माता-पिता पसंद कर रहे हैं. सिद्धि Photo credit – freepik सिद्धि का मतलब है ‘सफलता’ या ‘कामयाबी’. अगर आप चाहते हैं कि आपकी बेटी हमेशा आगे बढ़े, तो यह नाम अच्छा विकल्प हो सकता है. शूलिनी Photo credit – social media शूलिनी मां दुर्गा का एक नाम माना जाता है. यह नाम हिम्मत, आत्मविश्वास और मजबूत सोच की पहचान माना जाता है. नव्या Phto credit – social media नव्या का अर्थ है ‘नई शुरुआत’ या ‘नई ऊर्जा’. यह छोटा, स्टाइलिश और आज के समय का काफी पसंद किया जाने वाला नाम है. काव्या Photo credit – social media काव्या का अर्थ है ‘कविता’ या ‘समझदार’. यह नाम आज भी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले नामों में शामिल है. निशिका Photo credit – social media निशिका एक सुंदर और यूनिक नाम है. इसका मतलब ‘रात की रोशनी’ या ‘सच्चाई पसंद करने वाली’ माना जाता है. यह नाम सुनने में भी बहुत अलग लगता है. यह भी पढ़ें: अपने लिटिल प्रिंस के लिए चाहिए यूनिक नाम? ये 8 ऑप्शंस आ सकते हैं पसंद The post मां दुर्गा से जुड़े इन 10 नामों में छिपे हैं खूबसूरत मतलब, बेटी के लिए हो सकते हैं बेस्ट appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का दावा- अमेरिका ही नहीं, भारत भी हमारे साथ

बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार (5 जुलाई) को कहा कि उनके देश को हिंदुस्तान से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. Fox News को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं. हिंदुस्तान भी उनमें से एक है. 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. नेतन्याहू ने यह भी कहा कि उन्हें हिंदुस्तान से सोशल मीडिया (खासकर फेसबुक पर) पर भारी समर्थन मिलता है. उन्होंने कहा कि फेसबुक पर मेरे कई समर्थक हैं. हिंदुस्तान और इजरायल के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं. बेंजामिन नेतन्याहू  और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भी अच्छी दोस्ती मानी जाती है. इसी साल नेतन्याहू ने मोदी को अपना पर्सनल फ्रेंड बताया था. साथ ही हिंदुस्तान को एक ग्लोबल पावर कहा था. क्या कहा था जेडी वेंस ने? नेतन्याहू के इस बयान के पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने इजरायल को लेकर सख्त टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय दुनिया के ऐसे नेता हैं जो इजरायल के साथ खड़े हैं. वेंस ने यह भी कहा कि अगर वह इजरायली प्रशासन में होते, तो अपने इकलौते ताकतवर सहयोगी अमेरिका को लेकर क्रिटिसाइज नहीं करते. यह भी पढ़ें : खामेनेई के जनाजे पर डोनाल्ड ट्रंप का दावा- एक ही शॉट में सबको खत्म कर सकते थे वेंस ने यह भी कहा कि पिछले तीन महीनों से इजरायल की सुरक्षा में इस्तेमाल हो रहे ज्यादातर हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है. उनका कहना था कि ऐसे में इजरायल को अपने सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका की आलोचना करने से बचना चाहिए. पीएम मोदी ने किया था इजरायल का दौरा इसी साल (फरवरी 2025) पीएम मोदी ने इजरायल का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान पूरे विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है. यह बयान उस समय आया था, जब दो दिन बाद इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, जो आगे चलकर बड़े युद्ध में बदल गया. The post इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का दावा- अमेरिका ही नहीं, हिंदुस्तान भी हमारे साथ appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ZEE5 से हटी दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, एक्टर बोले- अंधेरे को चुनौती देता हूं… जानें क्या है पूरा मामला

Diljit Dosanjh On Satluj Removed From ZEE5: पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ 3 जुलाई को जी5 पर स्ट्रीम होनी शुरू हुई थी. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी से प्रेरित इस फिल्म को रिलीज के तीन दिन बाद ही हिंदुस्तान में अब ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है. Diljit Dosanjh Reacts As Satluj Removed From Zee5: जी5 से सतलुज के हटाए जाने पर दिलजीत दोसाझ का रिएक्शन ‘सतलुज’ के जी5 से हटने के बाद दिलजीत दोसांझ ने फर्स्ट रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक सीन शेयर किया. जिसमें लिखा, “मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं.” वहीं कैप्शन पंजाबी में देते हुए लिखा, “#मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं… शहीद जसवंत सिंह खालरा जी… #पंजाब95. सतलुज वही है, जो खालरा साहब के साथ हुआ.” View this post on Instagram A post shared by DILJIT DOSANJH (@diljitdosanjh) ZEE5 Shares Statement For Film Satluj: सतलुज को ओटीटी से हटाने पर जी5 ने जारी किया स्टेटमेंट जी5 ने इंस्टाग्राम पर फिल्म ‘सतलुज’ को मिले प्यार और सपोर्ट के लिए दर्शकों का आभार जताया. प्लेटफॉर्म ने लिखा, “सतलुज को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स हमारे लिए बेहद खास है. इस फिल्म को देखने, सपोर्ट करने और जी5 का हिस्सा बनने वाले हर दर्शक का हम तहेदिल से धन्यवाद करते हैं. हम हमेशा सतलुज और इसके पीछे की क्रिएटिव सोच के साथ मजबूती से खड़े हैं. हमारा मानना है कि दमदार कहानियां सिर्फ एंटरटेन नहीं करतीं, बल्कि लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं, गहरा असर छोड़ती हैं.” प्लेटफॉर्म ने आगे बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अगले आदेश तक ‘सतलुज’ हिंदुस्तान में स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं रहेगी. View this post on Instagram A post shared by Zee 5 (@zee5) Why Satluj Removed From ZEE5: क्यों सतलुज को ओटीटी से हटाया गया जी5 के मुताबिक कानूनी और सेंसरशिप से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सतलुज को फिलहाल ओटीटी से हटाया गया है. प्लेटफॉर्म ने यह भी साफ किया कि बिना किसी कट के फिल्म को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया जारी है. अपने पोस्ट के कैप्शन में ZEE5 ने लिखा, “सतलुज भले ही फिलहाल रुक गई हो, लेकिन इसने जो चर्चा शुरू की है, वो अब भी जारी है. आपके जबरदस्त प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया. उम्मीद है कि हम इसे बहुत जल्द फिर से आपके बीच लेकर आएंगे.” View this post on Instagram A post shared by DILJIT DOSANJH (@diljitdosanjh) About The Film Satluj: सतलुज के बारे में पहले ‘Punjab ’95’ के नाम से चर्चाओं में रही ‘सतलुज’ सिर्फ ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी से प्रेरित एक कहानी है. 2022 तक सेंसरशिप से जुड़े विवादों में फंसी रहने के बाद आखिरकार 3 जुलाई 2026 को फिल्म ने OTT पर दस्तक दी थी. इसमें अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्याण भी हैं. यह भी पढ़ें- ‘जितने झंडे दिखाने हैं दिखाओ’, कॉन्सर्ट में विरोध करने वालों पर भड़के दिलजीत दोसांझ यह भी पढ़ें- पंजाब नेतृत्व में एंट्री पर दिलजीत दोसांझ ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मैं एंटरटेनर ही ठीक हूं The post ZEE5 से हटी दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, एक्टर बोले- अंधेरे को चुनौती देता हूं… जानें क्या है पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

क्या 2026 फीफा विश्व कप के बाद संन्यास लेंगे रोनाल्डो? स्टार फुटबॉलर ने किया खुलासा

Cristiano Ronaldo: पुर्तगाल के कप्तान ने यह बात अपने देश के एक बड़े मुकाबले से ठीक पहले कही, जिससे उनके संन्यास को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है. रोनाल्डो ने यह तो साफ कर दिया कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कब तक स्पोर्ट्सना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने क्लब स्तर पर अपने पेशेवर फुटबॉल से संन्यास लेने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है. उन्होंने बहुत ही संयमित अंदाज में कहा है कि वे इस बारे में कोई भी निर्णय ‘सही समय आने पर’ लेंगे, जिससे यह साफ है कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान अपने स्पोर्ट्स को जारी रखने पर है और वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करने वाले हैं. 🇵🇹 The legends we grew up watching are taking their final bows. Cristiano Ronaldo: “It’s going to be my last World Cup.” End of an era. Writer: Daniyalpic.twitter.com/aNiTXtFmpr — Mario Nawfal (@MarioNawfal) July 6, 2026 6 वर्ल्ड कप स्पोर्ट्सने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बने रोनाल्डो क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 2026 में एक नया इतिहास रच दिया है. वे दुनिया के पहले ऐसे पुरुष फुटबॉल खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने अपने करियर में 6 फीफा वर्ल्ड कप स्पोर्ट्से हैं. यह उपलब्धि साबित करती है कि रोनाल्डो इतने लंबे समय से फुटबॉल की दुनिया में अपनी फिटनेस और बेहतरीन प्रदर्शन को बनाए रखने में कितने सफल रहे हैं. यह उनके शानदार करियर का एक और यादगार पल है. रोनाल्डो के नाम दर्ज हैं फुटबॉल की हर बड़ी उपलब्धि पिछले दो दशकों में रोनाल्डो ने खुद को फुटबॉल के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में स्थापित किया है. वह पाँच बार बैलन डी’ओर विजेता रहे हैं और उन्होंने इंग्लैंड, स्पेन और इटली में लीग खिताब जीते हैं. इसके अलावा उन्होंने यूईएफए चैंपियंस लीग में भी कई बार सफलता हासिल की है और पुर्तगाल के सर्वकालिक शीर्ष गोलस्कोरर और सबसे ज्यादा मैच स्पोर्ट्सने वाले खिलाड़ी बने हैं. रोनाल्डो की कप्तानी में पुर्तगाल का सुनहरा दौर पुर्तगाल के कप्तान के रूप में रोनाल्डो ने देश को ऐतिहासिक सफलता दिलाई. उनकी अगुवाई में पुर्तगाल ने 2016 में अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब UEFA यूरो कप जीता और 2019 में UEFA नेशंस लीग का पहला संस्करण भी अपने नाम किया. इसके बावजूद, फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी अब भी उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि बनी हुई है. नॉकआउट दौर में रोनाल्डो की अग्निपरीक्षा पुर्तगाल अब नॉकआउट दौर में है, जिसका मतलब है कि अब हर मैच ‘करो या मरो’ जैसा है. हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी, इसलिए दबाव बहुत ज्यादा है. माना जा रहा है कि यह रोनाल्डो का आखरी वर्ल्ड कप हो सकता है. ऐसे में उनकी पूरी कोशिश वर्ल्ड कप की ट्रॉफी जीतकर अपने सुनहरे करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा करने की है. अब हर मैच उनके लिए एक फाइनल की तरह है, जिसे जीतकर वे फुटबॉल की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करना चाहेंगे. रोनाल्डो के आइकॉनिक सेलिब्रेशन की अनसुनी कहानी रोनाल्डो ने इंटरव्यू में अपने आइकॉनिक “Siuuu” सेलिब्रेशन के पीछे की दिलचस्प कहानी साझा करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत पूरी तरह से स्वाभाविक थी. उन्होंने खुलासा किया कि यह जश्न पहली बार 2013 में अमेरिका में चेल्सी के खिलाफ स्पोर्ट्से गए एक मैच के दौरान सामने आया था. रोनाल्डो के अनुसार, पुर्तगाली शब्द ‘Sí’ (जिसका अर्थ “हां” होता है) से निकले इस सेलिब्रेशन को उन्होंने गोल करने की खुशी में जोश के साथ चिल्लाया था. देखते ही देखते यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया उनका ट्रेडमार्क बन गई और समय के साथ फुटबॉल की दुनिया का सबसे प्रसिद्ध जश्न बन गई. जिसे आज न केवल रोनाल्डो, बल्कि दुनिया भर के प्रशंसक और खिलाड़ी अपने गोल का जश्न मनाने के लिए अपनाते हैं. इसे भी पढ़े- फीफा वर्ल्ड कप 2026: इंग्लैंड-मेक्सिको मुकाबले पर मौसम की मार, भारी बारिश के कारण मैच एक घंटे देरी से शुरू The post क्या 2026 फीफा विश्व कप के बाद संन्यास लेंगे रोनाल्डो? स्टार फुटबॉलर ने किया खुलासा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

चंदा चोरी मामला : राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक आज, चंपत राय और अनिल की विदाई पर लगेगी मुहर

अयोध्या राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच के बीच सोमवार (6 जुलाई) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होगी. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से समाचार दी है कि बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के भविष्य पर चर्चा हो सकती है. दोनों के सौंपे गए इस्तीफों के साथ SIT की अंतरिम जांच रिपोर्ट भी बैठक का प्रमुख मुद्दा रहेगी. यह बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के मठ मणिराम छावनी में होगी. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने सभी नियमित और पदेन सदस्यों को बैठक में शामिल होकर अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है. ऐसे में उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होने की संभावना है. वहीं, उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन भी वर्चुअली बैठक में हिस्सा ले सकते हैं. अब आगे क्या? 1. ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार, ट्रस्ट के कार्यालयों के प्राधिकारी ट्रस्ट के हितों के खिलाफ कार्य करने वाले ट्रस्टी को दो-तिहाई बहुमत से हटा सकते हैं. हालांकि, किसी भी ट्रस्टी को हटाने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस देना और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर प्रदान करना अनिवार्य है. 2. ट्रस्टी कम-से-कम एक महीने का लिखित नोटिस देकर अपना इस्तीफा दे सकता है. ट्रस्ट अगली बैठक में उस इस्तीफे पर विचार कर उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय ले सकता है. वहीं, सोमवार को होने वाली बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर भी विचार करते हुए उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है. 3. वर्तमान में बचे हुए 12 ट्रस्टी निर्णय लेंगे. दो तिहाई बहुमत यानी 8 सदस्यों का किसी एक बिंदु पर सहमत होना जरूरी होगा. यह भी पढ़ें : राम मंदिर चंदा विवाद : VHP अध्यक्ष की मांग- केजरीवाल और प्रियंका गांधी के बयान हों दर्ज करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई : आलोक कुमार इस बीच राम मंदिर चंदा गबन मामले को लेकर जारी विवाद के बीच VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि इस मामले से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के लिए वीएचपी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उनके मुताबिक, ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके फैसले वही खुद लेता है. The post चंदा चोरी मामला : राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक आज, चंपत राय और अनिल की विदाई पर लगेगी मुहर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

नयी दिल्ली में समीक्षा बैठक : अमित शाह का आदेश- अवैध कोयला खनन रोकें, सीआइएसएफ करे शक्तियों का इस्तेमाल

Amit Shah on Illegal Coal Mining : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) को निर्देश दिया कि धनबाद क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए “जीरी कोल लीकेज योजना” लागू की जाए. अमित शाह ने ये निर्देश केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए. नयी दिल्ली में आयोजित बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री और कोयला मंत्री ने संयुक्त रूप से की. इसमें अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय कोयला सचिव तथा कोयला मंत्रालय, सीआइएसएफ, कोल इंडिया लिमिटेड और बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, गृह मंत्री ने धनबाद और आसपास के इलाकों में अवैध कोयला खनन तथा कोयला चोरी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जतायी. कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने गृह मंत्री को बताया कि अक्तूबर 2025 के पहले सप्ताह में हुई समीक्षा के बाद से कई ठोस कदम उठाये गये हैं. यह भी बताया गया कि सीआइएसएफ और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों को “खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957” के तहत कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है. यह अधिकार उन्हें न्यायालय में मामला दर्ज कराने, उन स्थानों पर जाने जहां अवैध कोयले के होने की आशंका हो, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करने और अवैध रूप से निकाले गये खनिजों के साथ-साथ ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किये गये औजारों, उपकरणों और वाहनों को जब्त करने की अनुमति देता है. अधिकारों के इस्तेमाल से सुनिश्चित हो कि उपभोक्ता वैध कोयले का ही इस्तेमाल करें गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीआइएसएफ और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारी एमएमडीआर एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल सख्ती से और आपसी तालमेल के साथ, स्वीकृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार करें. यह सुनिश्चित किया जाये कि उपभोक्ता केवल कानूनी रूप से खनन किये गये कोयले का ही इस्तेमाल करें. अवैध कोयले के परिवहन को रोकने के लिए जीएसटी अधिकारियों को भी इसमें शामिल करना जरूरी है. परिवहन किये जा रहे कोयले के लिए ई-वे बिलों की जांच की व्यवस्था होनी चाहिए. संवेदनशील इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा-व्यवस्था लागू हो केंद्रीय गृह मंत्री ने सीआइएसएफ को विचक रिस्पॉन्स टीमें गठित करने और संवेदनशील इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया. उन्होंने प्रौद्योगिकी के अधिक प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि अवैध खनन गतिविधियों में शामिल इलाकों और लोगों की पहचान करने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटरों में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों का इस्तेमाल किया जाये. ये निर्णय लिये गये  धनबाद में लागू होगी जीरो कोल लीकेज योजना संवेदनशील क्षेत्रों में बनेंगी क्विक रिस्पॉन्स टीमें सभी कोयला परिवहन के ई-वे बिलों की होगी जांच हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से होगी निगरानी जीरो कोल लीकेज प्लान क्या है ? जीरो कोल लीकेज प्लान का उद्देश्य खदान से निकलने वाले कोयले की पूरी निगरानी, अवैध खनन पर रोक और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है. इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, संयुक्त छापेमारी, अवैध मुहानों को बंद करने और कोयले के परिवहन पर नजर रखने जैसे कदमों पर विशेष जोर दिया जा रहा है. क्या है एमएमडीआर एक्ट ? एमएमडीआर एक्ट यानी खान व खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, 1957 एक प्रमुख कानून है. इसके तहत देश में खनिजों के खनन, परिवहन, भंडारण और कारोबार को नियंत्रित किया जाता है. इस कानून के तहत बिना वैध अनुमति के कोयला निकालना, उसका परिवहन या भंडारण करना दंडनीय अपराध है. दोषी पाये जाने पर जुर्माना, खनिज और वाहन की जब्ती और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. एमएमडीआर एक्ट के तहत मिले अधिकार एक्ट के तहत सीआइएसएफ और कोल इंडिया के अधिकारियों को तलाशी और जब्ती का अधिकार है.  संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी, अवैध कोयला, उपकरण और वाहन जब्त करने की शक्ति दी गयी है. अवैध खनन से जुड़े मामलों में न्यायालय में शिकायत दर्ज करने का भी अधिकार है.  ये भी पढ़ें: गैंगस्टर प्रिंस खान के घर पर चला बुलडोजर, सांसद और विधायक के आरोपों से गरमाई सियासत ये भी पढ़ें: धनबाद में ई-रिक्शा चालकों में डर और नाराजगी, मोबाइल ऐप से गाड़ियां बंद करने का आरोप The post नयी दिल्ली में समीक्षा बैठक : अमित शाह का आदेश- अवैध कोयला खनन रोकें, सीआइएसएफ करे शक्तियों का इस्तेमाल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बॉक्स ऑफिस पर वीकेंड टेस्ट में ‘अल्फा’ पास हुई या फेल, देखें संडे की कमाई

Alpha Box Office Collection Day 3: यश राज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म अल्फा बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म कर रही है. 3 जुलाई को रिलीज हुई आलिया भट्ट और शरवरी की मूवी को क्रिटिक्स और दर्शकों से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी. आइए देखते हैं कि रविवार को अल्फा ने कितने करोड़ कमाए. Alpha Box Office Day 3: वीकेंड पर अल्फा की कितनी हुई कमाई Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक अल्फा ने रविवार (5 जुलाई) को 7,439 शोज के साथ 13.25 करोड़ की कमाई की. जिसके बाद फिल्म का टोटल कलेक्शन 34 करोड़ पहुंच गया, जबकि इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 40.80 रहा. वहीं, ओवरसीज मार्केट में भी फिल्म ने सपोर्ट हासिल किया. तीसरे दिन 5 करोड़ (ग्रॉस) की कमाई के बाद फिल्म का कुल ओवरसीज कलेक्शन 18 करोड़ हो गया. टोटल वर्ल्डवाइड अल्फा ने 58.80 करोड़ खाते में जोड़ लिए हैं. Alpha box office day 3 Alpha Better Collections Than Mardaani: मर्दानी के मुकाबले अल्फा ने किया बेहतर कलेक्शन दूसरी फीमेल लीड फिल्मों की तुलना में, अल्फा अभी भी ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रही है. यश राज फिल्म्स की ‘मर्दानी 3’ ने 4,940 शो से तीसरे दिन 7.25 करोड़ कमाए थे, जिससे इसका टोटल कलेक्शन 17.50 करोड़ हो गया. Alpha Star Cast: अल्फा में मौजूद हैं ये स्टार्स शिव रावेल की ओर से निर्देशित फिल्म अल्फा में आलिया भट्ट के अलावा शरवरी, बॉबी देओल और अनिल कपूर भी हैं. ऋतिक रोशन फिल्म वॉर के अपने पॉपुलर रोल कबीर के साथ कैमियो कर रहे हैं. अल्फा वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की लेटेस्ट मूवी है, इसकी शुरुआत एक था टाइगर (2012) से हुई थी और तब से इसमें टाइगर जिंदा है (2017), वॉर (2019), पठान (2023), टाइगर 3 (2023) और वॉर 2 (2025) जैसी फिल्में शामिल हो चुकी हैं. यह भी पढ़ें- Bobby Deol: जब फ्लॉप फिल्मों के बाद खत्म होता दिखा करियर, ऐसे बने इंडस्ट्री के खूंखार विलेन, जानिए सेकेंड इनिंग्स की कहानी यह भी पढ़ें- बिहार-झारखंड में आलिया भट्ट की ‘अल्फा’ हिट या फेल, टिकट सेल्स ने खोली पोल, इन थिएटर्स में लगी है फिल्म The post बॉक्स ऑफिस पर वीकेंड टेस्ट में ‘अल्फा’ पास हुई या फेल, देखें संडे की कमाई appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

राष्ट्र की एकता-अखंडता के रक्षक डॉ मुखर्जी, पढ़ें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आलेख

Dr Shyama Prasad Mukherjee: आज, 6 जुलाई, उन अनगिनत लोगों के लिए एक विशेष दिन है, जो देशभक्ति और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को मानते हैं. हम डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहे हैं, जिनका जीवन साहस और मां हिंदुस्तानी के प्रति अटूट समर्पण का एक कालातीत उदाहरण है. आधुनिक हिंदुस्तान में ऐसे बहुत कम नेता हुए हैं, जिनमें बुद्धि, जनसेवा और नैतिक दृढ़ता का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला हो. युवा श्यामा प्रसाद का जन्म ऐसे परिवेश में हुआ था, जहां उन्हें आसानी से एक सुरक्षित और आरामदायक जीवन मिल सकता था. उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी अपने समय के प्रमुख शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों में से एक थे. भाग्य ने उन्हें सुख-सुविधाओं का मार्ग दिखाया, इसके बावजूद, उनकी अंतरात्मा ने उन्हें त्याग और राष्ट्र-सेवा के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया. उन्हें पक्का यकीन था कि वे अपने समय की उथल-पुथल भरी परिस्थिति में मूकदर्शक बने नहीं रह सकते- चाहे वह उपनिवेशवाद, सांप्रदायिकता या मानवीय चुनौतियों के खिलाफ लड़ाई ही क्यों न हो. इस यात्रा में उन्होंने गहरी व्यक्तिगत त्रासदियों का सामना किया, जिसमें एक शिशु और बाद में उनकी पत्नी की मौत शामिल है. तथापि, इन त्रासदियों ने केवल उनके संकल्प को और सुदृढ़ किया और सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को मजबूत किया. अगर कोई एक आदर्श था, जो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन को सबसे ज्यादा परिभाषित करता था, तो वह था हिंदुस्तान की अखंडता. विभाजन के उथल-पुथल भरे दौर में वे मजबूती से डटे रहे और सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल हिंदुस्तान का एक अभिन्न अंग बना रहे. कुछ साल बाद, यही विश्वास उन्हें जम्मू और कश्मीर की ओर ले गया. कारावास ने उन्हें हतोत्साहित नहीं किया और अलगाव ने उन्हें कमजोर नहीं किया. उनका जीवन हिरासत में अचानक समाप्त हो गया, उन अनगिनत लोगों से दूर – जिनकी पीड़ा को उन्होंने अपना उद्देश्य बनाया था. इतिहास में ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का अंतिम बलिदान नेतृत्व से परे जाकर राष्ट्रीय स्मृति में शामिल हो जाता है. डॉ मुखर्जी की अंतिम यात्रा भी ऐसा ही एक पल रही. आचार्य विनोबा भावे ने कहा कि डॉ मुखर्जी ने उस मकसद के लिए खुद को बलिदान कर दिया, जिसमें उन्हें विश्वास था. सालों बाद, 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(ए) को रद्द करना उनकी शहादत के प्रति सबसे सच्ची श्रद्धांजलि थी. डॉ मुखर्जी ने हिंदुस्तान और हिंदुस्तानीय मूल्यों को सबसे ऊपर रखा. उन्होंने ऐसे संस्थान बनाये और ऐसी प्रणालियां विकसित कीं, जो उस समय की पारंपरिक सोच को चुनौती देती थीं. वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने. अपने विशिष्ट अंदाज में, उन्होंने ऐसे सकारात्मक बदलाव किए, जो देशभक्तिपूर्ण और भविष्योन्मुखी थे. शिक्षाविदों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, डॉ मुखर्जी ने बहुत अच्छे तरीके से इस बात को व्यक्त किया- ”शैक्षिक संस्थानों को केवल लिपिक और कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों का उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों के रूप में देखना गलत है. हमें ऐसे छात्र तैयार करने होंगे, जो हमारे स्व-शासी संस्थानों- जैसे नगर निगम, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिका- का नेतृत्व कर सकें और साथ ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रों – जैसे वित्तीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक- में कामकाज का संचालन कर सकें.” उनके नेतृत्व में, कलकत्ता विश्वविद्यालय ने अनूठे प्रयास किये, जैसे पुस्तकालय अवसंरचना में सुधार करना, विज्ञान में शोध को बढ़ावा देना, कलाकृतियों के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि में पाठ्यक्रम स्थापित करना, आदि. उन्होंने स्पोर्ट्स, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र कल्याण जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया. छात्रों और पूर्व छात्रों में गर्व की भावना जगाने के लिए, उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत की. उन्होंने स्वयं गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत की रचना करने का आग्रह किया. उनकी इस भावना का एक अन्य उदाहरण, उनके जीवन के बाद के दौर में देखने को मिलता है, जब उन्होंने हिंदुस्तानीय जनसंघ बनाने का फैसला किया. एक ऐसे समय, जब कांग्रेस पार्टी का हर जगह बोलबाला था, उन्हें लगा कि हिंदुस्तान की प्रगति के लिए एक ऐसे वैकल्पिक आवाज बनाने के कारण मौजूद हैं, जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हो. शायद यह उचित ही था कि पार्टी का चुनाव चिह्न ‘दीया’ – मिटटी का दीपक- रखा गया. एक छोटा-सा दीपक साधारण लग सकता है, लेकिन इसमें इतनी ताकत होती है कि यह अपने से बहुत दूर तक अंधकार को दूर कर सकता है. जनसंघ ने भी ठीक यही काम किया- चाहे उनके सक्रिय रहने के दौरान हो या उसके बाद हो. हिंदुस्तान के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के तौर पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का कार्यकाल एक ऐसे राजनेता की छवि पेश करता है, जिनके विकास का दृष्टिकोण बहुत व्यापक और मानवीय था. उन्होंने उद्योग को नव स्वतंत्र राष्ट्र में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने का साधन माना. वे धन सृजन और मूल्य संवर्धन का सम्मान करते थे. दामोदर घाटी निगम, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और एक मजबूत औद्योगिक नीति जैसी महत्वपूर्ण पहलों के माध्यम से आधुनिक औद्योगिक हिंदुस्तान की आधारशिला रखते हुए, उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि हिंदुस्तान की पारंपरिक खूबियों की अनदेखी न हो. हथकरघा, कुटीर उद्योगों, कारीगरों और वस्त्र मजदूरों को डॉ मुखर्जी के रूप में एक ऐसा समर्थक मिला, जो उनके लिए पूरी तरह समर्पित था. यहाँ, मैं एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करना चाहूँगा. सिंदरी संयंत्र, जिसे डॉ. मुखर्जी ने आत्मनिर्भरता की स्पष्ट दृष्टि के साथ स्थापित किया था, को उन लोगों ने नजरअंदाज किया, जो कई दशकों तक राष्ट्र चला रहे थे. मुझे गर्व महसूस होता है कि हमारी प्रशासन को इसके पुनरुद्धार में योगदान देने का अवसर मिला. उस कार्यक्रम में उपस्थिति, वास्तव में मेरे लिए सबसे खास पलों में से एक थी. हिंदुस्तान की सभ्यतागत परंपरा में लंबे समय से संवाद और चर्चा को महत्त्व दिया गया है. डॉ मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के प्रतीक थे. वे पंडित नेहरू की कैबिनेट में शामिल हुए, क्योंकि उनका मानना था कि शुरुआती वर्षों में राष्ट्र-निर्माण का काम नेतृत्वक मतभेदों से कहीं ऊपर था. उन्होंने ईमानदारी और रचनात्मक भावना के साथ सेवा की, लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों के लिए अलग रास्ते की जरूरत है, तो उन्होंने सम्मान के साथ

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top