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Author name: Vinod Jha

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प्रणव मुखर्जी और पीएम मोदी के संबंध थे बहुत खास, शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया 2014 के चुनाव का किस्सा

Pranab Mukherjee PM Modi 2014 Election: 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने थे. और अब तक हैं. तीन बार पीएम पद की शपथ ले चुके नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड भी बना चुके हैं. जब पहली बार उन्होंने जीत दर्ज की थी, तब देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी थे, उन्होंने ही पीएम मोदी को शपथ दिलाई थी. इसके बाद वह उनसे मिलने पहुंचे. इस दौरान हुई चर्चा का जिक्र पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने एक हालिया लेख में किया है. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने पीएम मोदी से 2014 के चुनाव की खासियत पूछी थी, जिस पर एक जवाब के बाद वह (पीएम मोदी) चुप हो गए, फिर खुद प्रणव मुखर्जी ने खुद इसे एक्सप्लेन किया.  इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने आलेख में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, हिंदुस्तान के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुझे अपने दिवंगत पिता प्रणब मुखर्जी की एक दिलचस्प बात याद आती है. यह उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के बाद कही थी. उस समय बाबा हिंदुस्तान के 13वें राष्ट्रपति थे. अलग-अलग नेतृत्वक विचारधाराओं से होने के बावजूद दोनों के बीच बेहद अच्छे संबंध थे, जो शायद एक सच्चे लोकतंत्र की पहचान भी है. चुनाव नतीजे आने के बाद मोदी जी राष्ट्रपति भवन में बाबा से मिलने गए थे. बातचीत के दौरान बाबा ने उनसे चुनाव परिणाम के बारे में उनकी राय पूछी. मोदी जी ने जवाब दिया कि तीन दशक बाद किसी नेतृत्वक दल को पूर्ण बहुमत मिला है. बाबा ने अपने खास प्रोफेसर वाले अंदाज में फिर पूछा, ‘और क्या?’ जब मोदी जी कुछ नहीं बोले तो बाबा ने बताया कि 2014 का चुनाव लोकसभा चुनावों के इतिहास में अनोखा था, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री पद के लिए एक घोषित नया चेहरा सामने था. शर्मिष्ठा आगे लिखती हैं, भाजपा को जनता का मिला विशाल जनादेश केवल पार्टी के लिए नहीं था, बल्कि यह सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी को हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री चुनने का जनादेश था. इससे पहले के चुनावों में प्रधानमंत्री का चेहरा या तो माना जाता था लेकिन आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया जाता था, या फिर चुनाव के बाद निर्वाचित सांसद परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री चुनते थे, या गठबंधन की नेतृत्व के समीकरणों के आधार पर फैसला होता था. पीएम मोदी और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी. फोटो- एक्स. पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री बने मोदी शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि 2014 से पहले नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय नेतृत्व में नए थे. हालांकि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी मजबूत पहचान बनाई थी, लेकिन 2014 उनका पहला लोकसभा चुनाव था. उन्होंने इसे हिंदुस्तानीय नेतृत्व की दुर्लभ घटना बताया कि कोई व्यक्ति पहली बार सांसद बना और सीधे देश का प्रधानमंत्री बन गया. संसद भवन की सीढ़ियों पर पहुंचकर मोदी का झुककर प्रणाम करना भी उन्होंने एक भावनात्मक क्षण बताया. भाजपा की रणनीति और मोदी की छवि को बताया बड़ी वजह शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि चुनावी जीत के पीछे कई कारण होते हैं. भाजपा का मजबूत संगठन, अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति और समय के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करने की क्षमता उसकी सफलता के बड़े कारण रहे. उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत छवि भाजपा की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन गई है और कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जिन्होंने मेहनत और संघर्ष के जरिए अपनी पहचान बनाई. ये भी पढ़ें:- मोदी प्रशासन फिलिस्तीन पर चुप क्यों? सोनिया गांधी ने 20 हजार बच्चों की मौत पर उठाए सवाल ‘ब्रांड मोदी’ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि किसी नेता की नीतियों से असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और जनता से उनके जुड़ाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि 2019 और 2024 के चुनावों में भी यह प्रभाव दिखाई दिया. उनके शब्दों में, ‘आप मोदी को पसंद करें या नापसंद, लेकिन ब्रांड मोदी को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.’ जनादेश के साथ न्याय करें पीएम मोदी; देश को और ऊंचा ले जाएं उनके आलेख के इमेज में एक कुर्सी है, जिसे हाथों ने उठा रखा है. पीछे जनता है. इस इमेज का कैप्शन भी बेहद खास है. शर्मिष्ठा ने लिखा है, बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है. एक आम नागरिक के तौर पर मेरी प्रार्थना है कि वह जनता की ओर से मिले इस विशाल जनादेश के साथ पूरा न्याय करें और देश को और भी ऊंचाइयों तक लेकर जाएं. इन्हीं बातों से उन्होंने अपनी बातों का अंत भी किया है. The post प्रणव मुखर्जी और पीएम मोदी के संबंध थे बहुत खास, शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया 2014 के चुनाव का किस्सा appeared first on Naya Vichar.

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पूड़ी-पकौड़े बनाने के बाद बचा तेल दोबारा इस्तेमाल करते हैं? पहले जान लें इसके बड़े नुकसान

Reused Cooking Oil: घरों में अक्सर तली-भुनी चीजें बनाने के बाद बचा हुआ तेल दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है. कई लोगों को लगता है कि इससे तेल की बर्बादी नहीं होती और पैसे भी बच जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बार-बार गर्म किया गया तेल धीरे-धीरे सेहत के लिए नुकसानदायक बन सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे तेल में कई हानिकारक तत्व पैदा होने लगते हैं, जो शरीर पर बुरा असर डाल सकते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बचा हुआ तेल कितने समय तक सुरक्षित रहता है और किन परिस्थितियों में उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. बार-बार गर्म करने पर तेल में क्या बदलाव आते हैं? जब किसी तेल को बार-बार तेज आंच पर गर्म किया जाता है, तो उसकी क्वालिटी धीरे-धीरे खराब होने लगती है. इस प्रक्रिया के दौरान तेल में कई ऐसे तत्व बनने लगते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक माने जाते हैं. लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन करने से हृदय रोग, लिवर संबंधी समस्याएं और शरीर में सूजन जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है. बचा हुआ तेल कितने दिन तक इस्तेमाल करना चाहिए? यदि तेल का दोबारा उपयोग करना जरूरी हो, तो पहले उसे अच्छी तरह छान लेना चाहिए ताकि उसमें मौजूद खाने के जले हुए कण निकल जाएं. ये कण तेल को जल्दी खराब करने का काम करते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, बचा हुआ तेल 1 से 2 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लेना बेहतर माना जाता है. साथ ही इसे केवल एक बार दोबारा उपयोग करना अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है. तेल को स्टोर करते समय किन बातों का रखें ध्यान? बचा हुआ तेल हमेशा किसी साफ और एयरटाइट कंटेनर में भरकर रखना चाहिए. इसे ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करना बेहतर होता है. खुले बर्तन में रखा तेल जल्दी ऑक्सीकृत हो सकता है, जिससे उसकी गुणवत्ता और खराब हो सकती है. कैसे पहचानें कि तेल खराब हो चुका है? कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो बताते हैं कि तेल अब उपयोग के लायक नहीं रहा. यदि तेल से बासी या अजीब गंध आने लगे, उसका रंग जरूरत से ज्यादा गहरा हो जाए, उसमें झाग बनने लगे या वह सामान्य से ज्यादा गाढ़ा दिखाई दे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. ऐसे तेल का सेवन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है. दोबारा तेल इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी तेल का दोबारा उपयोग करते समय उसकी गंध, रंग और बनावट पर जरूर ध्यान दें. अगर तेल को लेकर जरा भी संदेह हो कि वह खराब हो चुका है, तो उसे इस्तेमाल करने से बचें. स्वस्थ रहने के लिए हमेशा ताजा और अच्छी गुणवत्ता वाले तेल का उपयोग करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. यह भी पढ़ें: बारिश में बच्चों को भूलकर भी न खिलाएं ये चीजें, बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा The post पूड़ी-पकौड़े बनाने के बाद बचा तेल दोबारा इस्तेमाल करते हैं? पहले जान लें इसके बड़े नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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Madhubani: मुहर्रम जुलूस में तलवारबाजी के दौरान युवक के सिर में घुसी तलवार, घंटों चला ऑपरेशन

मधुबनी से उदय सिंह की रिपोर्ट Madhubani Muharram Talwar Bazi: मधुबनी जिले के राजनगर में मुहर्रम जुलूस के दौरान पारंपरिक तलवारबाजी का प्रदर्शन अचानक दर्दनाक हादसे में बदल गया. प्रदर्शन के दौरान एक युवक के हाथ से तलवार फिसल गई और जुलूस में शामिल 16 वर्षीय किशोर के सिर में जा घुसी. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और जुलूस कुछ देर के लिए रोकना पड़ा. गंभीर रूप से घायल किशोर का कई घंटे तक ऑपरेशन चला, जिसके बाद डॉक्टरों ने तलवार निकालने में सफलता हासिल की. घायल युवक की तस्वीर, फोटो- नया विचार तलवारबाजी के दौरान हुआ हादसा घटना शुक्रवार देर शाम राजनगर बाजार के चट्टी रोड की है. जानकारी के अनुसार मुहर्रम जुलूस में पारंपरिक तलवारबाजी का प्रदर्शन चल रहा था. इसी दौरान एक युवक के हाथ से तलवार फिसल गई और सीधे जुलूस में शामिल एक किशोर के सिर में जा धंसी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तलवार करीब ढाई इंच तक सिर में घुस गई, जिससे मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए. हादसे के बाद तलवारबाजी कर रहा युवक मौके से फरार हो गया. यह भी पढ़ें: शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादी को मिला नींबू शरबत, बेतिया के नए एसपी की पहल जीत रही लोगों का दिल घायल किशोर की हुई पहचान घायल किशोर लहेरी बाजार का रहने वाला बताया जा रहा है. घटना के तुरंत बाद जुलूस में मौजूद लोगों ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजनगर पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद किया गया रेफर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निरंजन जायसवाल और अन्य चिकित्सकों ने तलवार निकालने की कोशिश की, लेकिन तलवार गहराई तक धंसी होने के कारण उसे निकालना संभव नहीं हो सका. इसके बाद प्राथमिक उपचार देकर किशोर को सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. यह भी पढ़ें: Sitamarhi: इधर बेटी की डोली उठी उधर पिता ने दुनिया को कहा अलविदा, VC पर देखी थी शादी कई घंटे चले ऑपरेशन के बाद निकली तलवार परिजन बाद में घायल किशोर को सकरी स्थित रामशिला हॉस्पिटल ले गए. वहां डॉक्टरों ने कई घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद उसके सिर से तलवार सफलतापूर्वक निकाल दी. चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल किशोर की हालत स्थिर है और उसे आईसीयू में निगरानी में रखा गया है. हादसे के बाद दहशत का माहौल इस घटना के बाद जुलूस स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. स्थानीय लोग पारंपरिक हथियार प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. The post Madhubani: मुहर्रम जुलूस में तलवारबाजी के दौरान युवक के सिर में घुसी तलवार, घंटों चला ऑपरेशन appeared first on Naya Vichar.

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घर आते ही मन हो जाता है उदास और चिड़चिड़ा? ये 4 वास्तु गलतियां हो सकती हैं कारण

Vastu Tips: दिनभर की भागदौड़, ऑफिस का काम और बाहर की टेंशन के बाद हर इंसान घर आकर सुकून चाहता है. घर को हम शांति और पॉजिटिव एनर्जी की जगह मानते हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बाहर हम ठीक महसूस कर रहे होते हैं, पर जैसे ही घर में आते हैं, मूड अचानक खराब हो जाता है. मन में बिना किसी वजह के उदासी, घबराहट, गुस्सा या चिड़चिड़ापन आने लगता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसे सिर्फ थकान न समझें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मौजूद कुछ गलत चीजें या दोष आपकी मानसिक शांति को प्रभावित कर सकते हैं और नेगेटिव एनर्जी बढ़ा सकते हैं.  मुख्य द्वार पर अंधेरा या गंदगी होना वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यहीं से खुशियां और सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती हैं. यदि आपके घर के मेन गेट पर पहुंचते ही आपको चप्पलों का ढेर, पुराना कबाड़ या अंधेरा दिखाई देता है, तो वहीं से नकारात्मकता आपके साथ घर के अंदर प्रवेश कर जाती है. इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखना जरूरी है. बंद या टूटी-फूटी चीजें कई लोगों की आदत होती है कि वे खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक सामान, बंद घड़ियां या टूटे हुए बर्तनों को संभालकर रख लेते हैं. घर के कोनों में या बेड के नीचे कबाड़ जमा करके रखना वास्तु शास्त्र में अशुभ माना गया है. विशेषकर बंद घड़ियां समय के रुकने और तरक्की में बाधा का प्रतीक हैं. यह रुकी हुई ऊर्जा पैदा करती हैं, जिससे विचारों में भारीपन आता है और व्यक्ति बिना वजह चिड़चिड़ा हो सकता है. घर में धूप और ताजी हवा की कमी एक ऐसा घर जो हमेशा बंद रहता है और जहां प्राकृतिक रोशनी नहीं पहुंचती, वहां नकारात्मक ऊर्जा जल्दी घर बना लेती है. कई लोग दिन के समय भी खिड़कियों और दरवाजों को भारी पर्दों से ढककर रखते हैं. माना जाता है कि घर में रोशनी और ताजी हवा की कमी से उमस और भारीपन बढ़ता है, जो व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है और उदासी की भावना पैदा कर सकता है. बेडरूम और लिविंग रूम में गलत रंगों का चयन रंगों का हमारे मनोविज्ञान पर गहरा प्रभाव पड़ता है. वास्तु के अनुसार, घर की दीवारों के रंग हमारे मूड को प्रभावित करते हैं. लिविंग रूम या बेडरूम में बहुत ज्यादा गहरे, डार्क या चमकीले रंगों का इस्तेमाल करना अच्छा नहीं माना जाता है. घर के इन हिस्सों में हमेशा हल्के और शांत रंगों का चयन करना चाहिए. यह भी पढ़ें: Vastu Tips for Pooja Room: पूजा घर में भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, वरना बढ़ सकती है नेगेटिव एनर्जी The post घर आते ही मन हो जाता है उदास और चिड़चिड़ा? ये 4 वास्तु गलतियां हो सकती हैं कारण appeared first on Naya Vichar.

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चाणक्य नीति : इन 5 लोगों की भूलकर भी न करें मदद, वरना बाद में होगा पछतावा

Chanakya Niti Tips: आचार्य चाणक्य के अनुसार, हर किसी की मदद करना आपके लिए सही नहीं होता. कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी भलाई करने के चक्कर में आप खुद बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं. आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे कौन से 5 लोग हैं, जिनकी मदद करने से पहले आपको सौ बार सोचना चाहिए.  1. दुष्ट या बुरे स्वभाव वाले लोग (Chanakya Niti Tips) चाणक्य जी कहते हैं कि जो इंसान जन्म से या आदत से दुष्ट है, उसकी मदद कभी नहीं करनी चाहिए. दुष्ट व्यक्ति की तुलना सांप से की जा सकती है. आप सांप को कितना भी दूध पिला दें, वह अपना जहर उगलना नहीं छोड़ता. ठीक उसी तरह, एक बुरे इंसान की आप जितनी भी मदद कर लें, समय आने पर वह आपको ही नुकसान पहुंचाएगा. ऐसे लोगों की मदद करने का मतलब है खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना.  2. हमेशा दुखी और रोने वाले लोग  कुछ लोगों की आदत होती है कि उनके पास सब कुछ होते हुए भी वे हमेशा रोते रहते हैं. उन्हें अपनी जिंदगी में सिर्फ कमियां ही नजर आती हैं. चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के अनुसार, ऐसे लोगों की मदद करने या उनके साथ रहने से आपकी अपनी पॉजिटिव एनर्जी भी खत्म हो जाती है. ऐसे लोग दूसरों की खुशी से भी जलते हैं. अगर आप इनकी मदद करेंगे, तो ये अपनी कमियों का दोष भी आप पर ही दे देंगे. इसलिए इनसे दूरी बनाना ही बेहतर है.  PC: चाणक्य की सिख (AI Generated) 3. जो अपनी मर्जी से मूर्ख बने रहना चाहते हैं आचार्य चाणक्य जी के अनुसार, जो व्यक्ति अज्ञानी है और अपनी मूर्खता को ही सही मानता है, उसे समझाने या उसकी मदद करने में अपना समय बर्बाद न (Chanakya Niti Tips) करें. ऐसे मूर्ख इंसान को सही बात बताने पर वह आपका ही दुश्मन बन जाएगा. वे आपकी भलाई को भी अपने खिलाफ एक साजिश समझेंगे.  PC: AI Generated 4. चरित्रहीन या गलत रास्ते पर चलने वाले लोग जो लोग समाज के नियमों को नहीं मानते, जिनका चरित्र ठीक नहीं है या जो गलत कामों (जैसे चोरी, सट्टेबाजी या नशा) में लिप्त हैं, उनकी मदद करने से आपको तुरंत पीछे हट जाना चाहिए. ऐसे लोगों की आर्थिक या किसी भी तरह की मदद करने का मतलब है कि आप उनके गलत कामों में उनका साथ दे रहे हैं.  5. एहसान फरामोश या मतलबी इंसान कुछ लोग सिर्फ तब तक आपके आगे-पीछे घूमते हैं जब तक उन्हें आपसे कोई काम होता है. काम निकलते ही वे आपको पहचानते तक नहीं. आचार्य चाणक्य के अनुसार, ऐसे मतलबी लोगों की मदद दोबारा कभी नहीं (Chanakya Niti Tips) करनी चाहिए. ये आपकी मजबूरी का फायदा उठाएंगे और जब आपको उनकी जरूरत होगी, तो सबसे पहले आपका साथ छोड़कर भागेंगे.  यह भी पढ़ें: ये 5 गलतियां इंसान को बना देती हैं गरीब, आज ही सुधार लें अपनी ये आदतें The post चाणक्य नीति : इन 5 लोगों की भूलकर भी न करें मदद, वरना बाद में होगा पछतावा appeared first on Naya Vichar.

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मोदी सरकार फिलिस्तीन पर चुप क्यों? सोनिया गांधी ने 20 हजार बच्चों की मौत पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने शनिवार (27 जून) को आर्टिकल शेयर करते हुए लिखा कि इंडिया धीरे-धीरे इजरायल के रणनीतिक प्रभाव के दायरे में जा रहा है, जबकि दुनिया का बड़ा हिस्सा उससे दूरी बना रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा को इतिहास एक चौंकाने वाले रणनीतिक फैसले के रूप में देख सकता है. राहुल गांधी ने गाजा में फिलिस्तीनी बच्चों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों पर चिंता जतायी. उन्होंने आगे लिखा कि हिंदुस्तान की आत्मा और उसकी परंपरा यही कहती है कि हमें अपने फिलिस्तीनी भाइयों-बहनों के साथ खड़ा होना चाहिए. तो अब सवाल उठता है कि सोनिया गांधी ने आखिर इस आर्टिकल में ऐसा क्या लिखा कि राहुल गांधी को ये बातें कहनी पड़ी. तो आइए आपको बताते हैं. सोनिया गांधी ने गाजा के मामले में मोदी प्रशासन की लगातार चुप्पी पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि हिंदुस्तान को फिलिस्तीनियों के समर्थन में स्पष्ट और मुखर रुख अपनाना चाहिए, साथ ही गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर ग्लोबल ओपिनियन को देखते हुए रिएक्ट करना चाहिए. सोनिया ने एक इंग्लिस डेली के लिये लिखे लेख में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया. साथ ही उन्होंने दावा किया कि गाजा में बच्चों को एक प्लान के तहत निशाना बनाया जा रहा है और वहां की मानवीय स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है. किस रिपोर्ट का जिक्र सोनिया गांधी ने किया? सोनिया गांधी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई नरसंहार जैसी है. उन्होंने बताया कि जून 2026 में आयोग ने फिर कहा कि इजरायल की नीतियों और सैन्य कार्रवाई का असर ऐसा है, जिससे गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो रहा है और बच्चों तक को निशाना बनाया जा रहा है. सोनिया गांधी ने कहा कि इस आयोग की अध्यक्षता अब पूर्व न्यायाधीश एस. मुरलीधर कर रहे हैं और 94 पन्नों की इस रिपोर्ट को पढ़ना बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला अनुभव है. यह भी पढ़ें : Gaza : मांगने गए खाना, मिली मौत, गाजा में सस्ती हुई लोगों की जान बच्चों को नुकसान पहुंचना कोई हादसा नहीं सोनिया गांधी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा में हुई तबाही की बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. उनके मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक करीब 20 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार से ज्यादा शिशु घायल हुए हैं. इनमें से कई बच्चों को ऐसी चोटें लगी हैं, जिनके कारण वे पूरी जिंदगी दिव्यांग रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों को नुकसान पहुंचना कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया गया है. सोनिया गांधी के अनुसार, मरने और घायल होने वालों में बड़ी संख्या बच्चों की है. गाजा के लगभग सभी स्कूल बर्बाद हो चुके हैं और अस्पतालों समेत स्वास्थ्य व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे गर्भवती स्त्रीओं और नवजात बच्चों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. यह भी पढ़ें : Israel Gaza Airstrike Video: गाजा फिर दहला, इजरायली हमलों में 60 की मौत, देखें तबाही का वीडियो मोदी प्रशासन ने रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी कांग्रेस नेता ने कहा कि कई वेस्टर्न कंट्री ने फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी है, कई देशों ने इजराइल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा की है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजराइल की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन हिंदुस्तान इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी प्रशासन ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. The post मोदी प्रशासन फिलिस्तीन पर चुप क्यों? सोनिया गांधी ने 20 हजार बच्चों की मौत पर उठाए सवाल appeared first on Naya Vichar.

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आयरलैंड की टीम में दिखा राजस्थान के ‘सुपरस्टार’ का जलवा, डेब्यू के बाद मां की बात ने जीता सबका दिल

Rajasthan Superstar Debut Ireland: हिंदुस्तान और आयरलैंड के बीच हुए पहले टी20 मुकाबले में भले ही टीम इंडिया के युवा खिलाड़ियों को डेब्यू का अवसर न मिला हो, लेकिन आयरलैंड की ओर से मैदान पर उतरे हिंदुस्तानीय मूल के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने अपनी गेंदबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. राजस्थान के टोंक जिले के रहने वाले जय ने अपने अंतरराष्ट्रीय पदार्पण पर शानदार प्रदर्शन किया. इस ऐतिहासिक उपलब्धि और बेटे के शानदार प्रदर्शन पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए जय की मां, विद्या मूंदड़ा, ने बड़े भावुक शब्दों में अपनी खुशी जाहिर की है. #WATCH | Tonk, Rajasthan: Jai Moondra’s mother, Vidya Moondra says, “…I am sad that India lost but my son performed so well and brought laurels to his family, Rajasthan and country. I am proud of him. He picked 2 wickets. Everyone who ever watched him play used to tell us to… pic.twitter.com/uhuZY0vFui — ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 27, 2026 टोंक में जश्न का माहौल जैसे ही बेलफ़ास्ट में जय मूंड्रा ने अपनी जादुई गेंदबाजी का प्रदर्शन किया, उनकी तस्वीरें टोंक से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. उनके परिवार ने घर पर ही मैच का सीधा प्रसारण देखा और अपने बेटे की इस कामयाबी का जमकर जश्न मनाया. मां विद्या मूंद्रा ने बेटे की मेहनत पर गर्व जताते हुए कहा कि यह सब उसके अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है. बचपन से ही था क्रिकेट का जुनून जय की मां, विद्या मूंदड़ा ने अपने बेटे की इस उपलब्धि पर खुशी और गर्व व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि जय की प्रतिभा को देखकर लोग बचपन से ही उनसे कहते थे कि इसे क्रिकेटर बनाना चाहिए. वे कहती हैं, “मैं उदास जरूर हूं कि हिंदुस्तान मैच हार गया, लेकिन मेरे बेटे ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने परिवार, राजस्थान और देश का नाम रोशन किया है. मुझे उस पर गर्व है. उसने मैच में 2 विकेट चटकाए.” जय मूंदड़ा की सफलता के पीछे का अनुशासन जय मूंदड़ा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कठोर अनुशासन और स्पष्ट विजन है. उनकी मां, विद्या मूंदड़ा ने इस पर बात करते हुए बताया कि जय की राह में शिक्षा और स्पोर्ट्स का संतुलन हमेशा सर्वोपरि रहा. शिक्षा को दी पहली प्राथमिकता विद्या मूंदड़ा के अनुसार, 10वीं कक्षा के बाद से ही जय ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित कर लिया था. उनके पिता की यह स्पष्ट सोच और सलाह थी कि पहले अपनी शैक्षणिक डिग्री पूरी की जाए, ताकि भविष्य सुरक्षित रहे. परिवार की इस सीख को जय ने न केवल आदरपूर्वक स्वीकार किया, बल्कि पूरी गंभीरता से निभाया भी. जय मूंदड़ा का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने का सफर 28 वर्षीय जय मूंदड़ा की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है. साल 2021 में, जय पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीज़ा पर आयरलैंड गए थे. वहां M.Tech की डिग्री हासिल करने के दौरान उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए नौकरी भी की. इन चुनौतियों के बीच भी उन्होंने अपने क्रिकेट प्रेम को जीवित रखा और स्थानीय स्तर पर स्पोर्ट्सना जारी रखा. उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2025 में उन्हें आयरलैंड की नागरिकता प्राप्त हुई. अपनी आक्रामक गेंदबाज़ी और मज़बूत बल्लेबाज़ी के दम पर उन्होंने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और अंततः आयरलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बना ली. First international appearance. First delivery. First wicket. Some introduction from Jai Moondra! 👏#BackingGreen | #IREvIND | #FáilteSolar pic.twitter.com/nV6IfgWHpZ — Cricket Ireland (@cricketireland) June 26, 2026 संजू और दुबे को बनाया अपना शिकार अपनी आक्रामक गेंदबाज़ी से जय मूंड्रा ने मैच का रुख मोड़ दिया. उन्होंने हिंदुस्तानीय टीम के प्रमुख बल्लेबाज़ों (संजू सैमसन और शिवम दुबे) के विकेट झटककर हिंदुस्तानीय खेमे में खलबली मचा दी. भले ही यह जीत हिंदुस्तान के खिलाफ थी, लेकिन जय के व्यक्तिगत प्रदर्शन और उनकी धारदार गेंदबाजी ने दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों को प्रभावित किया. हिंदुस्तानीय मूल के दूसरे खिलाड़ी जय मूंदड़ा की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि वे आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए स्पोर्ट्सने वाले हिंदुस्तानीय मूल के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं. उनसे पहले, पंजाब में जन्मे सिमी सिंह ने 2017 में आयरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था. अब जय मूंदड़ा ने भी इस सूची में अपना नाम दर्ज कराकर राजस्थान और हिंदुस्तान का मान बढ़ाया है. इसे भी पढ़े- ऐतिहासिक जीत का ऐसा जश्न, आयरिश स्त्री टीम का वीडियो देख दिल हार बैठेंगे आप The post आयरलैंड की टीम में दिखा राजस्थान के ‘सुपरस्टार’ का जलवा, डेब्यू के बाद मां की बात ने जीता सबका दिल appeared first on Naya Vichar.

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पुणे मर्डर केसः सिया के भाई का दोस्त था चेतन, उसी ने कराई थी दोनों की मुलाकात

Pune Murder Case : पुणे के चर्चित लोहागढ़ किला मौत मामले की जांच में नया खुलासा हुआ है. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिया के भाई साहिल गोयल ने कबूल किया है चेतन से उसकी दोस्ती 2024 में हुई थी. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इसी के जरिए वह सिया के घर आने-जाने लगा, फिर चेतन और सिया की दोस्ती हो गई और यही दोस्ती केतन के हत्या की साजिश बन गई. दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदली पुलिस जांच में सामने आया कि क्रिकेट से शुरू हुई पहचान जल्द ही सिया और चेतन की गहरी दोस्ती में बदल गई. इसके बाद चेतन का गोयल परिवार में आना-जाना बढ़ गया. पुलिस का मानना है कि इसी दौरान दोनों के बीच करीबी रिश्ता विकसित हुआ. भाई को पहले से थी रिश्ते की जानकारी पुलिस ने सिया के भाई साहिल से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की. पूछताछ में साहिल ने बताया कि उसे कई महीनों पहले ही सिया और चेतन के रिश्ते की जानकारी मिल गई थी. उसने अपनी बहन को समझाया था कि वह यह रिश्ता खत्म कर दे, क्योंकि उसकी सगाई पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल से हो चुकी थी. शादी की तैयारियां भी करती रही सिया पुलिस जांच के मुताबिक, चेतन से संबंध होने के बावजूद सिया शादी की तैयारियों में पूरी तरह शामिल रही. वह अक्सर केतन के परिवार से मिलने भी जाती थी और शादी की योजनाओं में हिस्सा लेती थी. दोनों ने बाली में प्री-वेडिंग फोटोशूट कराने की भी योजना बनाई थी. अब परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य को इस रिश्ते की जानकारी थी और क्या किसी ने पहले से ऐसे संकेत देखे थे, जिनसे कथित साजिश का अंदेशा लगाया जा सकता था. फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच लगातार जारी है. यह भी पढ़े- राम मंदिर दान चोरी का बड़ा खुलासाः 80 लाख रुपये कैश बरामद, आठों आरोपियों से पूछताछ जारी The post पुणे मर्डर केसः सिया के भाई का दोस्त था चेतन, उसी ने कराई थी दोनों की मुलाकात appeared first on Naya Vichar.

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गुमला में 176 दिन में 311 लोगों की मौत, हर 14 घंटे में बुझ रही एक जिंदगी

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट  Gumla Death Case : साल 2026 के 1 जनवरी से 25 जून तक 176 दिन बीते हैं. इन 176 दिनों के अंदर गुमला जिले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर 311 असामान्य मौतें दर्ज की गई है. आंकड़ों को देखें तो जिले में औसतन हर दिन लगभग दो लोगों की मौत हुई है. जबकि हर 14 घंटे में एक जिंदगी काल के गाल में समा रही है. सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रिकॉर्ड से सामने आये आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं. बल्कि जिले की कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, सामाजिक तनाव और आपदा प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं. सबसे भयावह स्थिति सड़क दुर्घटनाओं की रही है छह माह से भी कम समय में 146 लोगों की जान सड़क हादसों में गई. यानी जिले में हर 29 घंटे में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर मौत के मुंह में समा रहे हैं. यह आंकड़ा कुल मौतों का लगभग 47 प्रतिशत है. 61 लोगों ने आत्महत्या की चिंता की दूसरी बड़ी वजह आत्महत्या है. एक जनवरी से लेकर 25 जून तक 61 लोगों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. इसका मतलब है कि हर तीसरे दिन जिले में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है. मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद, आर्थिक दबाव और सामाजिक कारण इसके पीछे प्रमुख वजह माने जा रहे हैं. नदी और तालाब ने ली 48 जान वहीं नदियों, तालाबों और जलाशयों ने भी 48 लोगों की जान ले ली. डूबने से हुई मौतों का यह आंकड़ा बताता है कि जिले में जल सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है. 21 लोगों की हत्या हुई हत्या के 21 मामले हुए हैं. इसके अलावा, सर्पदंश, हाथी हमला, वज्रपात, हृदयाघात, बिजली करंट, आग में झुलसने और ऊंचाई से गिरने जैसी घटनाओं में भी लोगों की जान गई है. मार्च में 68 लोग मरे माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च सबसे ज्यादा मौतों वाला महीना साबित हुआ, जहां 68 लोगों की मौत हुई. फरवरी में 64, अप्रैल में 65, जनवरी में 59, मई में 30 और जून में 25 जून तक 25 मौतें दर्ज की गई. 1 जनवरी से 25 जून तक मौतों का आंकड़ा सड़क दुर्घटना : 146 आत्महत्या : 61 डूबने से : 48 हत्या : 21 हृदयाघात : 7 सर्पदंश : 4 हाथी हमला : 4 वज्रपात : 3 गिरने से : 4 बिजली करंट : 1 आग से झुलसकर : 1 अन्य कारण : 11 यह भी पढ़ें: रांची में 177 करोड़ में बनेगा पहला शानदार सिक्स लेन का स्मार्ट रोड, फुटपाथ के साथ बनेगा साइकिल ट्रैक यह भी पढ़ें: धनबाद, खरसावां और नोवामुंडी में 28 जून से शुरू होगा पल्स पोलियो अभियान, लाखों बच्चों को पिलाई जाएगी जीवनरक्षक खुराक The post गुमला में 176 दिन में 311 लोगों की मौत, हर 14 घंटे में बुझ रही एक जिंदगी appeared first on Naya Vichar.

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बिहार : बेगूसराय के गढ़पुरा में बोरे में बंद मिली युवती की लाश, तेज दुर्गंध से हुआ खुलासा

बेगूसराय से विकाश मिश्रा की रिपोर्टBegusarai Crime News : जिले के गढ़पुरा थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. रजौड़ पोखर से कोरियामा जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे बोरे में बंद एक अज्ञात युवती का शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. आशंका जताई जा रही है कि युवती की हत्या करने के बाद उसकी पहचान छिपाने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को बोरे में बंद कर सुनसान जगह पर फेंक दिया गया. जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात सड़क से गुजर रहे स्थानीय लोगों को सड़क किनारे एक स्थान से तेज दुर्गंध आने का एहसास हुआ. भूसे से ढंककर बोरे में फेंका गया शव शक होने पर ग्रामीणों ने इसकी सूचना तुरंत गढ़पुरा थाना पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई. सड़क किनारे बंद पड़े बोरे को खोला गया तो उसके अंदर करीब 18 से 20 वर्षीय अज्ञात युवती का शव मिला. शव को ऊपर से भूसे से ढंक दिया गया था, जिससे उसकी पहचान छिपाने की कोशिश की गई थी. घटना की सूचना मिलते ही बखरी डीएसपी कुंदन कुमार भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. प्रारंभिक जांच में शव की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि युवती की हत्या करीब तीन से चार दिन पहले गला दबाकर की गई होगी. घटनास्थल पर जांच करती पुलिस गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सुनसान स्थान पर फेंक दिया गया. फिलहाल पुलिस मृतका की पहचान कराने के प्रयास में जुटी है. वहीं आसपास के थानों से गुमशुदगी की जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस का कहना है कि युवती की पहचान होने के बाद हत्या के कारणों और आरोपियों तक पहुंचने में आसानी होगी. मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है. Also Read : बेगूसराय सामूहिक दुष्कर्म मामला: भाजपा नेता ने पीड़िता से की मुलाकात, न्याय और बेहतर इलाज का दिया भरोसा The post बिहार : बेगूसराय के गढ़पुरा में बोरे में बंद मिली युवती की लाश, तेज दुर्गंध से हुआ खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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