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Author name: Vinod Jha

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सतीश पूनिया बने पंजाब के प्रभारी, जानिए कौन हैं BJP के ये चर्चित नेता

बीजेपी ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए राजस्थान के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है. 17 अगस्त को उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया और अब 18 अगस्त को वे पंजाब के प्रभारी बनाए गए हैं. राष्ट्रीय महासचिव पूनिया के सामने अब पंजाब में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी होगी. कौन हैं सतीश पूनिया? सतीश पूनिया ने नेतृत्व की शुरुआत अखिल हिंदुस्तानीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी. इसके बाद वह हिंदुस्तानीय जनता युवा मोर्चा और राजस्थान बीजेपी में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालते रहे. 2018 में वह पहली बार आमेर से विधायक बने और 2019 में उन्हें राजस्थान बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने 2019 से 2023 तक पार्टी की कमान संभाली. हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आमेर सीट से हार का सामना करना पड़ा. ये भी पढ़ें: आजादी के बाद UP की पहली विधानसभा कैसी थी? 1952 में ऐसे शुरू हुआ था प्रदेश की लोकतांत्रिक नेतृत्व का पहला अध्याय हरियाणा में बदली थी तस्वीर राजस्थान चुनाव के बाद बीजेपी ने पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया. 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने हरियाणा में लगातार तीसरी बार प्रशासन बनाई. इसके बाद 2026 में पूनिया को राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया और अब उन्हें पंजाब की जिम्मेदारी दी गई है. ये भी पढ़ें: पुराने चेहरों के साथ नई पीढ़ी का गठजोड़, BJP की नई टीम में युवा, स्त्री और डिजिटल नेतृत्व पर फोकस पंजाब में होगी अगली परीक्षा! पंजाब में बीजेपी के सामने अपना संगठन और जनाधार मजबूत करने की चुनौती है. पूनिया के पास राजस्थान और हरियाणा में संगठन संभालने का अनुभव है. अब देखना होगा कि वह इस अनुभव का इस्तेमाल पंजाब के अलग नेतृत्वक समीकरण में किस तरह करते हैं. The post सतीश पूनिया बने पंजाब के प्रभारी, जानिए कौन हैं BJP के ये चर्चित नेता appeared first on Naya Vichar.

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किस रास्ते झारखंड पहुंचे थे अंग्रेज? JSSC परीक्षा के लिए जानें ऐसे महत्वपूर्ण GK के सवाल-जवाब

Jharkhand History GK For JSSC CGL: अगर आप JPSC और JSSC या अन्य प्रतियोगिता परीक्षा देते हैं तो झारखंड के इतिहास से जुड़े सवाल आपके लिए बहुत जरूरी हैं. इन्हीं में एक महत्वपूर्ण सवाल है, अंग्रेज सबसे पहले झारखंड के किस क्षेत्र में पहुंचे थे? अगर आप भी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो सिंहभूम और अंग्रेजों के झारखंड आगमन से जुड़ी यह जानकारी आपके लिए बेहद उपयोगी हो सकती है. झारखंड में अंग्रेजों का प्रवेश कैसे हुआ? एक आम जानकारी के अनुसार, 1765 में इलाहाबाद की संधि के बाद अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई. इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने प्रभाव का विस्तार करते हुए झारखंड के अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ना शुरू किया. झारखंड और राज्य का मैप इसी क्रम में 1767 ईस्वी के आसपास अंग्रेज सबसे पहले सिंहभूम क्षेत्र के धालभूम इलाके में पहुंचे. यह झारखंड में अंग्रेजों के प्रवेश का शुरुआती दौर माना जाता है. सिंहभूम क्षेत्र रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, इसलिए अंग्रेजों ने यहां अपना प्रभाव स्थापित करने का प्रयास किया. क्यों महत्वपूर्ण है सिंहभूम? सिंहभूम झारखंड का एक ऐतिहासिक और खनिज संपदा से भरपूर क्षेत्र है. ब्रिटिश शासन के दौरान यह बंगाल प्रेसीडेंसी के अंतर्गत एक प्रमुख जिला था. वर्तमान में यह क्षेत्र पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में विभाजित है. पुराने सिंहभूम जिले का मुख्यालय चाईबासा था. यह क्षेत्र अपने घने जंगलों, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के लिए प्रसिद्ध रहा है. सारंडा वन और खनिज संपदा ने दिलाई पहचान सिंहभूम का सारंडा वन एशिया के सबसे बड़े साल वनों में गिना जाता है. ‘सारंडा’ का अर्थ स्थानीय भाषा में ‘सात सौ पहाड़ियां’ माना जाता है. यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है. इसके अलावा सिंहभूम लौह अयस्क सहित कई महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार है. यही कारण है कि हिंदुस्तान के औद्योगिक विकास में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. जमशेदपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में भी सिंहभूम की खनिज संपदा का बड़ा योगदान माना जाता है. आइए, अब JPSC और JSSC से जुड़े झारखंड के कुछ जनरल नॉलेज के सवाल-जवाब जानते हैं. ये भी पढ़ें: JSSC CGL रद्द हुई, जाएगी किसकी नौकरी? समझें पूरा गणित सिंहभूम और अंग्रेजों के आगमन से जुड़े 20 GK सवाल-जवाब 1. प्रश्न: अंग्रेज सबसे पहले झारखंड के किस क्षेत्र में पहुंचे थे? उत्तर: सिंहभूम (धालभूम क्षेत्र). 2. प्रश्न: झारखंड में अंग्रेजों का प्रवेश लगभग किस वर्ष हुआ था? उत्तर: 1767 ईस्वी. 3. प्रश्न: इलाहाबाद की संधि कब हुई थी? उत्तर: 1765 ईस्वी. 4. प्रश्न: इलाहाबाद की संधि के बाद अंग्रेजों को किसकी दीवानी मिली थी? उत्तर: बंगाल, बिहार और उड़ीसा की. 5. प्रश्न: झारखंड में अंग्रेजों ने सबसे पहले किस इलाके में कदम रखा था? उत्तर: धालभूम. 6. प्रश्न: पुराने सिंहभूम जिले का मुख्यालय क्या था? उत्तर: चाईबासा. 7. प्रश्न: वर्तमान में सिंहभूम क्षेत्र कितने जिलों में विभाजित है? उत्तर: तीन जिलों में. 8. प्रश्न: सिंहभूम के तीन वर्तमान जिले कौन-कौन से हैं? उत्तर: पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां. 9. प्रश्न: सारंडा वन किस जिले में स्थित है? उत्तर: पश्चिमी सिंहभूम. 10. प्रश्न: सारंडा वन किस प्रकार के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध है? उत्तर: साल के पेड़ों के लिए. 11. प्रश्न: सारंडा का अर्थ क्या माना जाता है? उत्तर: सात सौ पहाड़ियां. 12. प्रश्न: सिंहभूम किस खनिज के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है? उत्तर: लौह अयस्क. 13. प्रश्न: ब्रिटिश काल में सिंहभूम किस प्रेसीडेंसी का हिस्सा था? उत्तर: बंगाल प्रेसीडेंसी. 14. प्रश्न: झारखंड का प्रमुख इस्पात नगर कौन-सा है? उत्तर: जमशेदपुर. 15. प्रश्न: जमशेदपुर किस जिले में स्थित है? उत्तर: पूर्वी सिंहभूम. 16. प्रश्न: सिंहभूम क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व किस कारण बढ़ा? उत्तर: अंग्रेजों के प्रथम प्रवेश और खनिज संपदा के कारण. 17. प्रश्न: झारखंड का कौन-सा क्षेत्र लौह अयस्क उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है? उत्तर: सिंहभूम क्षेत्र. 18. प्रश्न: चाईबासा किस जिले का मुख्यालय है? उत्तर: पश्चिमी सिंहभूम. 19. प्रश्न: अंग्रेजों के हिंदुस्तान में व्यापार का प्रमुख माध्यम कौन-सी कंपनी थी? उत्तर: ईस्ट इंडिया कंपनी. 20. प्रश्न: झारखंड के इतिहास में अंग्रेजों के प्रवेश का पहला द्वार किसे माना जाता है? उत्तर: धालभूम-सिंहभूम क्षेत्र. ये भी पढ़ें: ‘झारखंड का शिमला’ किसे कहते हैं? JSSC और राज्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए रट लें ये 15 जरूरी सवाल The post किस रास्ते झारखंड पहुंचे थे अंग्रेज? JSSC परीक्षा के लिए जानें ऐसे महत्वपूर्ण GK के सवाल-जवाब appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC मामला : अभय तिवारी ने कहा- सेटिंग से मैं भी हुआ पास, रिमोट एक्सेस से सॉल्वर ग्रुप हल करता था पेपर

रांची : JPSC-JSSC मामले में सीआइडी के समक्ष टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने परीक्षा में गड़बड़ी की पूरी प्रक्रिया बतायी है. उसके अनुसार एजेंट पहले अभ्यर्थियों का चयन करते थे और उनसे मोटी रकम लेते थे. इसके बाद कुछ परीक्षा केंद्र तय किये जाते थे, जहां सॉफ्टवेयर में हेराफेरी कर बाहर बैठे सोल्वर अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र हल करते थे. अभय तिवारी ने कहा कि रांची के भव्या, सरला-बिड़ला के समीप संस्कार आइटी, बूटी मोड़ के पास स्थित एक केंद्र और बोकारो के दौ केंद्रों पर इस तरह की गड़बड़ी की जाती थी. कुछ अन्य अभ्यर्थियों ने भी सीआइडी को इसी तरह की जानकारी दी है. इसके बाद जेएसएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच तेज कर दी गयी है. संस्था के सचिव से भी पूछताछ की जा रही है. PGTTCE 2023 में सेटिंग से पास कराने का खुलासा अभय तिवारी ने बताया कि बूटी मोड़ स्थित परीक्षा केंद्र का संचालक अजय संग्राम था. वह सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले फोन कर कपड़े के रंग और केंद्र पर किस लाइन में खड़ा होना है, इसकी जानकारी देता था. केंद्र पर पहचान के बाद उन्हें तय कंप्यूटर पर बैठाया जाता था. इन कंप्यूटरों का रिमोट एक्सेस दूसरे कमरे में ले लिया जाता था, जहां मौजूद सोल्वर प्रश्नपत्र हल करते थे. अभ्यर्थी केवल माउस चलाता रहता था. तिवारी ने बताया कि उसने भी अजय संग्राम के संपर्क से सेटिंग कर परीक्षा पास की थी. ये भी पढ़ें: JSSC CGL मामला: पत्थलगड्डा के BSO को पुलिस ने लिया हिरासत में, CID के निर्देश पर पूछताछ शुरू अभय तिवारी ने एजेंटों के नाम भी बताये अभय तिवारी ने बताया कि परीक्षा में पास कराने के लिए कई एजेंटों से संपर्क किया गया था. उसने जिन एजेंटों के नाम लिये हैं उनमें शामिल पटना के इमरान और अली, गिरिडीह के राजेश, बोकारो के शंकर, मनोज और हजारीबाग के सुनील कुमार शामिल हैं. शंकर को अजय संग्राम का करीबी बताया गया है. तिवारी ने कहा कि वह अजय संग्राम के लगातार संपर्क में था और उसने चार परीक्षा केंद्रों को मैनेज कर रखा था. JSSC CGL की परीक्षा भी TDPL ने ही करायी थी जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षा भी इसी एजेंसी ने करायी थी जनवरी 2024 में हुई जेएसएससी सीजीएल परीक्षा भी इसी एजेंसी से जुड़ी थी. पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गयी थी. परीक्षार्थी श्वेता प्रधान के दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि शिवा इंफोटेक रांची, श्रेया डिजिटल बोकारो, आरआर टेक्नोलॉजी बोकारो, फ्यूचर ब्राइट रांची, धनवाद डिजिटल और तीस्ता टेक्नोलॉजी बोकारो केंद्रों से करीब 90 प्रतिशत प्रतिभागी पास हुए थे. इस मामले में जेएसएससी की ओर से 29 जनवरी 2024 को नामकुम थाना में हिंदुस्तानीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 420 और 120बी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 तथा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 12 के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. इसके बाद परीक्षा आयोजित कराने वाली चेन्नई की कंपनी सत्वत इंफोसोल प्राइवेट लिमिटेड को 12 फरवरी 2024 को समन भेजा गया. ये भी पढ़ें: तिलैया में बैंक लूट की साजिश नाकाम, पुलिस मुठभेड़ में एक अपराधी घायल; तीन गिरफ्तार The post JPSC-JSSC मामला : अभय तिवारी ने कहा- सेटिंग से मैं भी हुआ पास, रिमोट एक्सेस से सॉल्वर ग्रुप हल करता था पेपर appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC Protest: धरना-प्रदर्शन के दौरान सदर अस्पताल में भर्ती हुए सभी स्टूडेंट्स आज होंगे डिस्चार्ज

रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में घायल स्टूडेंट्स का उपचार सदर अस्पताल में चल रहा था. अस्पताल प्रबंधन छात्र नेता देवेंद्र महतो के साथ ही सभी स्टूडेंट्स को आज डिस्चार्ज करने की योजना तैयार कर रही है. अस्पताल में इलाजरत इन सभी की हालत बेहतर बताई जा रही है. धरना-प्रदर्शन के दौरान हुए थे भर्ती ज्ञात हो कि पिछले दिनों हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान पलामू निवासी छात्र राहुल क्रांति, मनीष कुमार सिंह और उम्मे हबीबा नाम की छात्रा को अस्पताल में एडमिट किया गया था. इनमें से हबीबा को पिछले मंगलवार को भर्ती किया गया था. ये भी पढ़ें: JSSC CGL cancelled: छात्रों में जश्न, खुशी से छलके आंसू, मांगें माने जाने पर भावुक हुए अभ्यर्थी स्टूडेंट्स स्थिति पहले से बेहतर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश सिंह ने सोमवार देर रात को सभी स्टूडेंट्स से मिलकर उनके हेल्थ बुलेटिन के बारे में जानकारी जुटाई. उन्होंने कहा कि सभी स्टूडेंट्स पहले से कहीं बेहतर स्थिति में हैं और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सकता है. ये भी पढ़ें: JPSC-JSSC मामला : अभय तिवारी ने कहा- सेटिंग से मैं भी हुआ पास, रिमोट एक्सेस से सॉल्वर ग्रुप हल करता था पेपर क्रांति | Naya Vichar Network The post JPSC-JSSC Protest: धरना-प्रदर्शन के दौरान सदर अस्पताल में भर्ती हुए सभी स्टूडेंट्स आज होंगे डिस्चार्ज appeared first on Naya Vichar.

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खरमास में बंटे थे जेएसएससी सीजीएल के नियुक्ति पत्र, अब पूरी परीक्षा ही रद्द, क्या यह महज इत्तेफाक है या कुछ और?

JSSC CGL Exam Cancelled: झारखंड में जेएसएससी सीजीएल को लेकर 17 अगस्त 2026 को बड़ा फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया. परीक्षा को लेकर लंबे समय से विवाद और अभ्यर्थियों की ओर से विरोध चल रहा था. मुख्यमंत्री ने खुद परीक्षा रद्द करने की आधिकारिक घोषणा की. 30 दिसंबर 2025 को बांटे गए थे नियुक्ति पत्र जेएसएससी सीजीएल से जुड़ी चर्चा में एक बात खास तौर पर सामने आ रही है. चयनित अभ्यर्थियों को 30 दिसंबर 2025 को रांची के मोरहाबादी मैदान में जॉइनिंग लेटर दिए गए थे. यह तारीख खरमास की अवधि में आती है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर खरमास में नौकरी मिलना या नियुक्ति पत्र प्राप्त करना शुभ माना जाता है या नहीं. खरमास में नौकरी मिलना अशुभ है क्या? ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य के धनु या मीन राशि में रहने की अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और कुछ अन्य मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है. हालांकि, नौकरी मिलना, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता या प्रशासनी नियुक्ति पत्र प्राप्त करना अशुभ नहीं माना जाता. ये भी पढ़ें: JSSC CGL परीक्षा रद्द, 15 भर्ती परीक्षाओं पर संकट; छात्रों का प्रदर्शन जारी प्रशासनी नौकरी के लिए मुहूर्त जरूरी नहीं प्रशासनी नौकरी की चयन प्रक्रिया विभागीय नियमों के अनुसार निर्धारित होती है. परीक्षा, परिणाम, नियुक्ति और योगदान की तारीख अभ्यर्थी अपनी इच्छा से तय नहीं करता. इसलिए अगर विभाग की ओर से खरमास के दौरान नियुक्ति पत्र दिया गया है, तो इसे अशुभ मानने की जरूरत नहीं है. नौकरी से जुड़ी प्रक्रिया की वैधता प्रशासनिक नियमों से तय होती है. खरमास में शुभ माने जाते हैं ये काम धार्मिक मान्यताओं में खरमास को पूजा-पाठ, भगवान विष्णु और सूर्य उपासना, दान-पुण्य, जप और धार्मिक कार्यों के लिए अच्छा समय माना गया है. इसलिए इस अवधि में नौकरी मिलना व्यक्ति के लिए उपलब्धि ही है. हां, विवाह या गृह प्रवेश जैसे व्यक्तिगत मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा है. ये भी पढ़ें: जिस परीक्षा से मिली नौकरी, वही रद्द; JSSC CGL के 1975 चयनित कर्मचारियों का भविष्य संकट में जेएसएससी मामले में आगे क्या? जेएसएससी सीजीएल मामले में फिलहाल सबसे अहम मुद्दा खरमास नहीं, बल्कि परीक्षा रद्द होने के बाद भर्ती प्रक्रिया का भविष्य है. नियुक्ति पा चुके और परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों से जुड़ी स्थिति प्रशासन के अगले फैसलों और आधिकारिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी. इसलिए खरमास को नौकरी की सफलता या असफलता से जोड़ना उचित नहीं होगा. The post खरमास में बंटे थे जेएसएससी सीजीएल के नियुक्ति पत्र, अब पूरी परीक्षा ही रद्द, क्या यह महज इत्तेफाक है या कुछ और? appeared first on Naya Vichar.

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रक्षाबंधन पर झारखंड के गांवों में आज भी निभाई जाती हैं ये अनोखी परंपराएं, जानें धार्मिक महत्व

Raksha Bandhan 2026 in Jharkhand: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व है. इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. झारखंड में यह त्योहार सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है. राज्य के कुछ इलाकों में प्रकृति और जंगलों की रक्षा से जुड़ी अनोखी परंपराएं भी इस पर्व को खास बनाती हैं. सुनसुनिया जंगल में पेड़ों को बांधी जाती है राखी पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड स्थित सुनसुनिया जंगल में रक्षाबंधन के मौके पर हर साल खास आयोजन होता है. यहां सैकड़ों स्त्रीएं पारंपरिक वेशभूषा में जंगल पहुंचती हैं और साल के पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेती हैं. इस अनोखी परंपरा का नेतृत्व पद्मश्री जमुना टुडू करती हैं. स्त्रीओं के लिए पेड़ केवल जंगल का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण संसाधन भी हैं. मांदर और धमसे की थाप पर गूंजते हैं पारंपरिक गीत सुनसुनिया जंगल में रक्षाबंधन के दिन उत्सव जैसा माहौल दिखाई देता है. आदिवासी स्त्रीएं पारंपरिक गीत गाते हुए जंगल पहुंचती हैं. मांदर और धमसे की थाप पर स्त्रीएं नृत्य करती हैं और पूरे उत्साह के साथ साल के पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधती हैं. इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है. वन विभाग के अधिकारी भी इस आयोजन में शामिल होते हैं. राखी बांधने के बाद पेड़ों की उतारी जाती है आरती पेड़ों को राखी बांधने के बाद स्त्रीएं उनकी आरती भी उतारती हैं. यह परंपरा पेड़ों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को दर्शाती है. स्त्रीओं का संकल्प सिर्फ एक दिन की रस्म तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे जंगल की सुरक्षा में भी अपनी भूमिका निभाती हैं. यही वजह है कि इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीण समुदाय बेहद सजग रहता है. ये भी पढ़ें: रक्षा बंधन कब है? जानें सही तारीख, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय रक्षा सूत्र सिर्फ भाई की कलाई तक सीमित नहीं धार्मिक दृष्टि से रक्षा सूत्र को मंगलकामना, सुरक्षा और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है. आमतौर पर बहनें भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और उसकी कलाई पर राखी बांधकर सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं. इसी रक्षा भाव का विस्तार झारखंड की इस परंपरा में प्रकृति तक दिखाई देता है. पेड़ों को राखी बांधना पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से भी जुड़ जाता है. पूजा की थाली में शामिल होती हैं ये चीजें ग्रामीण परिवारों में रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है. बहन भाई को तिलक लगाकर आरती करती है और राखी बांधती है. भाई बहन की सुरक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हुए उसे उपहार देता है. इस तरह यह पर्व पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी बनता है. झारखंड की परंपरा देती है प्रकृति बचाने का संदेश झारखंड की पहचान उसके जंगल, आदिवासी संस्कृति और प्रकृति से गहरे जुड़ी जीवनशैली से भी है. इसलिए सुनसुनिया जंगल की रक्षाबंधन परंपरा धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है. यहां पेड़ों को राखी बांधना यह बताता है कि रक्षा का भाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए भी हो सकता है. यही अनोखी परंपरा झारखंड के रक्षाबंधन को देश के अन्य हिस्सों से अलग पहचान देती है. The post रक्षाबंधन पर झारखंड के गांवों में आज भी निभाई जाती हैं ये अनोखी परंपराएं, जानें धार्मिक महत्व appeared first on Naya Vichar.

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सीएम विजय ने कहा- मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं, जानें क्या हुआ तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा

तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार (17 अगस्त) को पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का बिना सम्मानजनक संबोधन के नाम लेने पर विवाद हो गया. एक मंत्री ने अपने बयान में करुणानिधि का सीधे नाम लिया, जिस पर विपक्षी डीएमके ने तुरंत विरोध जताया. पार्टी ने इसे विधानसभा की मर्यादा के खिलाफ बताया. मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हस्तक्षेप किया और मंत्री की टिप्पणी पर माफी मांगी. मुख्यमंत्री विजय ने तुरंत हस्तक्षेप कर विधानसभा में बढ़ते विवाद को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने माना कि पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि को जिस तरह संबोधित किया गया, वह सही नहीं था. वन मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने अपने बयान में करुणानिधि का नाम लेते समय ‘कलैग्नर’ या ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया था. इसके बाद विजय ने कहा, “मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं.” ये भी पढ़ें: तमिलनाडु: किसानों को तोहफा, 75000 रुपये तक का कर्ज माफ, CM विजय का एलान चर्चा के दौरान क्या कहा मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने यह मामला स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर विधानसभा में चल रही चर्चा के दौरान सामने आया. मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने पुराने समय में वोट के बदले पैसे बांटने की प्रथा पर सवाल उठाया. उन्होंने विवादित ‘तिरुमंगलम फॉर्मूला’ का भी जिक्र किया. मंत्री ने दावा किया कि पिछले चुनावों में कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में एक वोट के बदले 1,500 रुपये तक बांटे गए थे. मंत्री ने पिछली चुनावी व्यवस्था की तुलना मौजूदा प्रशासन से करते हुए कहा कि पहले वोट के बदले पैसे बांटने की शिकायतें सामने आती थीं. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान प्रशासन बिना पैसे बांटे वोट हासिल कर सत्ता में आई है. तमिलनाडु विधानसभा में क्यों मचा हंगामा हालांकि, पुराने चुनावों में अपनाए गए तरीकों का जिक्र करते हुए मंत्री ने डीएमके के वरिष्ठ नेता करुणानिधि का सिर्फ नाम लिया. विधानसभा में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सम्मानित नेताओं को औपचारिक और सम्मानजनक संबोधन के साथ याद किया जाता है. इसी वजह से मंत्री के बयान पर विवाद खड़ा हो गया और डीएमके नेताओं ने आपत्ति जताई. The post सीएम विजय ने कहा- मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं, जानें क्या हुआ तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा appeared first on Naya Vichar.

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कोलकाता हवाई अड्डे के एटीसी बिल्डिंग में लगी आग, मौके पर पहुंची तीन दमकल गाड़ियां

कोलकाता. कोलकाता हवाई अड्डे पर अचानक आग लग गयी. समाचार है कि हवाई अड्डे पर स्थित एटीसी बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर आग लग गई है. तीन दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच चुकी हैं. हवाई अड्डे के सूत्रों के अनुसार, आग पर काबू पा लिया गया है. किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है. दमकल अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आग इमारत की ट्यूनी लाइट से शुरू हुई थी. वास्तव में क्या हुआ? मंगलवार तड़के, सुबह के चार बजे, अचानक कर्मचारियों ने हवाई अड्डे के एटीसी भवन की अटारी से आग की लपटें उठती देखीं. फिर आग की तीव्रता बढ़ती गई. इमारत की तीसरी मंजिल का एक हिस्सा जलने लगा. इसके साथ ही, आसपास का इलाका काले धुएं से भर गया. तुरंत ही हवाई अड्डे से एक दमकल गाड़ी मौके पर पहुंची. पहले आग बुझाने का काम शुरू हुआ. बाद में, आग पर काबू पाने के लिए दो और गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. कैसे लगी आग हवाई अड्डा अधिकारियों और अग्निशमन विभाग के सूत्रों के अनुसार, कुछ मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया. हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि कोई नुकसान नहीं हुआ है. उनका कहना है कि 15 अगस्त के अवसर पर भवन को सजाने के लिए इस्तेमाल की गई बत्तियों में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी. यह प्रारंभिक अनुमान है। आग लगने के कारण की अभी भी जांच की जा रही है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्या होता है एटीसी भवन हवाई यातायात का नियंत्रण एटीसी भवन की आठवीं मंजिल से होता है. यानी, विमान के उड़ान भरने से लेकर गंतव्य पर उतरने तक पायलट एटीसी अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहते हैं. एटीसी अधिकारी ही विमान की उड़ान की ऊंचाई और मार्ग की दिशा-निर्देश निर्धारित करते हैं. पायलटों को संदेश भी भेजे जाते हैं. संक्षेप में, हवाई यातायात का नियंत्रण इसी एटीसी द्वारा किया जाता है. Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में The post कोलकाता हवाई अड्डे के एटीसी बिल्डिंग में लगी आग, मौके पर पहुंची तीन दमकल गाड़ियां appeared first on Naya Vichar.

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डोनाल्ड ट्रंप को पसंद आया भारत का वोटर आईडी सिस्टम, ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर की तारीफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (18 अगस्त) को अमेरिका में वोटरों के लिए अनिवार्य फोटो पहचान पत्र की मांग दोहराई. इस दौरान उन्होंने हिंदुस्तान की चुनाव व्यवस्था और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र किया. ट्रंप ने हिंदुस्तान की वोटर आईडी व्यवस्था की तारीफ करते हुए इसे मजबूत व्यवस्था बताया. ट्रंप अमेरिका में वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों को और सख्त करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए वह कांग्रेस से SAVE America Act नाम के कानून को मंजूरी देने की मांग कर रहे हैं. इस कानून का मकसद वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में पहचान और नागरिकता से जुड़े नियमों को कड़ा करना है. ट्रंप ने कहा कि इसी महीने हिंदुस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि वैध फोटो आईडी के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराया जा सकता है. ट्रंप ने हिंदुस्तान के पिछले चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि वहां 64.6 करोड़ लोगों ने वोट किया और सभी वोटरों के पास वैध फोटो पहचान पत्र था. उन्होंने इसी आधार पर SAVE America Act को जल्द पास करने की मांग की. गोर ने भी ट्रंप की बात का समर्थन किया डोनाल्ड ट्रंप की यह पोस्ट हिंदुस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और हिंदुस्तान में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मुलाकात के एक हफ्ते बाद आई है. इस मुलाकात में दोनों ने चुनाव प्रबंधन और चुनाव कर्मचारियों की ट्रेनिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी. गोर ने भी ट्रंप की बात का समर्थन करते हुए हिंदुस्तान की वोटर आईडी व्यवस्था की तारीफ की. ये भी पढ़ें: ट्रंप बोले- ‘मुझे फिर चुनाव लड़ना पसंद होगा, लेकिन…’, 2028 को लेकर खुद बताया क्यों नहीं लड़ सकते SAVE America Act पर ट्रंप का जोर ट्रंप प्रशासन SAVE America Act को कानून बनाने पर जोर दे रहा है. इसके तहत वोटर बनने के लिए नागरिकता का दस्तावेज देना और मतदान के समय फोटो पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा. यह बिल इस साल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पास हो चुका है, लेकिन सीनेट में इसे अभी मंजूरी नहीं मिल पाई है. अमेरिका में वोटर आईडी को अनिवार्य करने का मुद्दा लंबे समय से विवादित रहा है. इसके समर्थकों का कहना है कि मतदान के समय पहचान पत्र जरूरी होने से चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी.  The post डोनाल्ड ट्रंप को पसंद आया हिंदुस्तान का वोटर आईडी सिस्टम, ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर की तारीफ appeared first on Naya Vichar.

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UP Election 2027: हैट्रिक के मिशन पर CM योगी का मास्टर प्लान तैयार, एक फैसले से बढ़ सकती है विपक्ष की मुश्किल

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती जा रही हैं. चुनाव में अभी समय है, लेकिन सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच नेतृत्वक रणनीति को लेकर हलचल बढ़ गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने लगातार तीसरी बार बीजेपी की प्रशासन बनाने की चुनौती है. इसी को देखते हुए प्रशासन के कामकाज, कानून-व्यवस्था, स्त्री सुरक्षा, विकास और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बनाने की रणनीति पर जोर दिखाई दे रहा है. हर जिले तक पहुंच बनाने पर सीएम योगी का फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रशासन की विकास योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा के लिए लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं. प्रशासन की कोशिश है कि विकास योजनाओं का असर केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव और ब्लॉक स्तर तक इसका संदेश पहुंचे. बिजली, सड़क, पानी, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों के जरिए प्रशासन जनता के बीच अपनी उपलब्धियां रखने की तैयारी में है. कानून-व्यवस्था को बनाया जा सकता है बड़ा चुनावी मुद्दा योगी प्रशासन के नेतृत्वक नैरेटिव में कानून-व्यवस्था शुरू से ही प्रमुख मुद्दा रहा है. मुख्यमंत्री कई मौकों पर अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी प्रशासन की प्राथमिकता बताते रहे हैं. स्त्री सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखती रही है. ऐसे में 2027 के चुनाव में कानून-व्यवस्था और स्त्री सुरक्षा एक बार फिर बीजेपी के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं. बुलडोजर नीति को लेकर भी सियासी बहस बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र अक्सर देखने को मिलता है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र अक्सर देखने को मिलता है. हाल के एक कार्यक्रम में उन्होंने इसी अंदाज में कहा कि वह गलत लोगों पर बुलडोजर चला सकते हैं, जबकि कलाकारों की तरह गा नहीं सकते. इस बयान को भी नेतृत्वक तौर पर कानून-व्यवस्था के मुद्दे से जोड़कर देखा गया. बीजेपी जहां इसे अपराध के खिलाफ सख्त नीति के तौर पर पेश करती है, वहीं विपक्ष लगातार इस पर सवाल उठाता रहा है. राम मंदिर के मुद्दे पर भी सियासी टकराव अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश की नेतृत्व में बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं. मंदिर से जुड़े चढ़ावे और अन्य मामलों को लेकर विपक्ष ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी इस तरह के मुद्दों को सनातन आस्था और धार्मिक भावनाओं से जोड़कर विपक्ष पर पलटवार करते रहे हैं. ऐसे में राम मंदिर और हिंदुत्व का मुद्दा भी आगामी विधानसभा चुनाव में नेतृत्वक बहस का अहम हिस्सा बन सकता है. जातीय नेतृत्व और तुष्टिकरण पर विपक्ष को घेरने की तैयारी बीजेपी की रणनीति में जातीय नेतृत्व और कथित तुष्टिकरण के खिलाफ हमला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने संबोधनों में कानून के समान इस्तेमाल और बिना भेदभाव विकास की बात करते रहे हैं. बीजेपी की कोशिश है कि जनता के बीच यह संदेश मजबूत किया जाए कि प्रशासन विकास और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देती है, जबकि विपक्ष पर जातीय समीकरण और तुष्टिकरण की नेतृत्व करने का आरोप लगाया जाए. 2017 से पहले के दौर की याद दिलाने की रणनीति बीजेपी के चुनावी नैरेटिव में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश का जिक्र लगातार महत्वपूर्ण रहा है. पार्टी कानून-व्यवस्था और अपराध के मुद्दे पर पिछली प्रशासनों को घेरती रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कई बार पुराने दौर की कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हैं. 2027 के चुनाव में भी बीजेपी इस तुलना के जरिए मतदाताओं के सामने अपनी प्रशासन के कार्यकाल की उपलब्धियां रखने की कोशिश कर सकती है. विकास के साथ हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का समीकरण नेतृत्वक जानकारों के मुताबिक, बीजेपी के लिए 2027 का चुनाव केवल कानून-व्यवस्था या हिंदुत्व के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा. पार्टी विकास योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनी योजनाओं के लाभार्थियों को भी अपने पक्ष में मजबूत करने की कोशिश करेगी. इसके साथ राष्ट्रवाद, स्त्री सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और हिंदुत्व जैसे मुद्दों को जोड़कर व्यापक नेतृत्वक संदेश तैयार किया जा सकता है. क्या विपक्ष योगी की पिच पर स्पोर्ट्सने को तैयार है? 2027 के विधानसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प सवाल यही होगा कि विपक्ष किन मुद्दों को चुनाव का केंद्र बनाता है. अगर विपक्ष कानून-व्यवस्था, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर लगातार प्रशासन को घेरता है, तो बीजेपी को अपने पसंदीदा नेतृत्वक मुद्दों पर जवाब देने का मौका मिल सकता है. वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विकास, बेरोजगारी, महंगाई, संविधान और सामाजिक समीकरण जैसे मुद्दों को आगे रखती हैं तो चुनावी मुकाबले का नैरेटिव अलग दिशा ले सकता है. हैट्रिक की राह कितनी आसान होगी? योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी के सामने 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की चुनौती होगी. पार्टी की रणनीति में प्रशासनी योजनाओं और विकास कार्यों को जमीन तक पहुंचाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था, स्त्री सुरक्षा, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व जैसे मुद्दों को मजबूत करने की कोशिश दिखाई दे रही है. हालांकि चुनावी नतीजे कई नेतृत्वक और सामाजिक समीकरणों पर निर्भर करेंगे. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले महीनों में बीजेपी और विपक्ष अपनी-अपनी रणनीति को किस तरह धार देते हैं. यह भी देखें: BJP की नई राष्ट्रीय टीम में यूपी का दबदबा, 8 नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी, OBC से लेकर अल्पसंख्यक चेहरों तक साधा सियासी समीकरण The post UP Election 2027: हैट्रिक के मिशन पर CM योगी का मास्टर प्लान तैयार, एक फैसले से बढ़ सकती है विपक्ष की मुश्किल appeared first on Naya Vichar.

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