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Author name: Vinod Jha

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Bihar Land Survey: सरकारी कार्यालय से गायब हो रहा खतियान , बंदोबस्ती कैसे दिखाएं रैयत

Bihar Land Survey: पटना. बिहार में एक पुरानी कहावत है,”उलटा चोर कोतवाल को डांटे”. आजकल बिहार भूमि व राजस्व विभाग में यही हो रहा है. प्रशासनी कार्यालय से जमीन के दस्तावेज गायब हो रहे हैं और प्रशासन उन दस्तावेजों के गायब होने की जांच कराने के बदले, उलटा दस्तावेज नहीं रखने के लिए रैयतों को जिम्मेदार ठहरा रही है. बिहार में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान एक दो नहीं बल्कि सैंकड़ों गांव का खतियान प्रशासनी कार्यालय से गायब मिला है. अब तक 250 गांव के खतियानों का कोई रिकॉर्ड प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है. सर्वे और दाखिल खारिज के लिए इन गांवों के रैयत दर दर भटक रहे हैं. वैसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संदर्भ में अधिकारियों को फटकार लगायी है, लेकिन अब तक दस्तावेज गायब होने की प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है. मुजफ्फरपुर के 40 गांवों का खतियान गायब जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले के 40 गांवों और पूरे बिहार राज्य के लगभग 250 गांवों का खतियान गायब होने की समाचारें सामने आई हैं. मुजफ्फरपुर जैसे बड़े जिले में 40 गांवों का खतियान प्रशासनी कार्यालयों से गायब होना स्थानीय रैयतों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर दी है. मुजफ्फरपुर जिले में तो शहर के सरैयागंज, सिकंदरपुर, शहबाजपुर, कन्हौली विशुनदत्त, बाड़ा जगनाथ समेत शहरी क्षेत्र के मुशहरी अंचल के ही सर्वाधिक 15 गांवों के खतियान गायब हैं, जबकि, अन्य 25 गांव भी बोचहां, कोटी, कुढ़नी, सकरा, सरैया, औराई, मौनापुर, मोतीपुर, पारू, साहेबगंज अंचलों के हैं, जो शहरी क्षेत्र या शहर से सटे इलाकों में ही हैं. इन इलाकों के खतियान प्रशासनी कार्यालय से कौन उठा ले गया, इसकी अब तक कोई जांच नहीं हुई है. रोकी गयी दस्तावेजों की स्कैनिंग बिहार का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जमीन के खतियानों का डिजिटलाइ‌जेशन कर उन्हें ऑनलाइन कर रहा है. इसके लिए राज्य के सभी जिलों के रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध जमीन के सभी दस्तावेजों की स्कैनिंग की जा रही है. लेकिन, खतियान गायब होने से स्कैनिंग रुक गई है. यानी, दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम रुका हुआ है. दस्तावेजों की स्कैनिंग कर रही एजेंसी एमएस कैपिटल बिजनेस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड ने इसकी सूचना दी, तो राजस्व विभाग की भी नींद हराम हो गई है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों से दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा है. मुजफ्फरपुर के डीएम सुबत सेन से जिले के 11 अंचलों के 40 मौजा-गांवों का अभिलेख मांगा गया है. रिकार्ड रूम के कर्मचारी पर संदेह एजेंसी ने जो विभाग को जो सूचना दी है उसके अनुसार राजस्व कर्मियों व रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों द्वारा जमीन के मूल कागजात में छेड़छाड़ की गई है. साथ ही रखरखाव नहीं होने से भी कई खतियान नष्ट या गायब हो गए हैं. इस कारण जहां भूमि के रैयत परेशान हैं, वहीं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की परेशानी भी बढ़ गई है. खतियान भूमि रिकॉर्ड का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें किसी क्षेत्र की जमीन का विवरण, मालिकाना हक, सीमाएं और अन्य संबंधित जानकारी दर्ज होती है. यह दस्तावेज़ भूमि विवादों को सुलझाने और प्रशासनी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. वहीं खतियान विशेष रूप से जमीन की माप, सीमांकन और स्वामित्व की जानकारी प्रदान करता है. यह दस्तावेज़ ऐतिहासिक रूप से हिंदुस्तान में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान तैयार किए गए थे और आज भी भूमि प्रबंधन प्रणाली का आधार हैं. Also Read: Bihar Jobs: बिहार प्रशासन को नहीं मिल रहे कॉलेजों के लिए प्रिंसिपल, 173 पदों के लिए आये केवल 156 अभ्यर्थी The post Bihar Land Survey: प्रशासनी कार्यालय से गायब हो रहा खतियान , बंदोबस्ती कैसे दिखाएं रैयत appeared first on Naya Vichar.

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Waqf Bill : वक्फ विधेयक को लेकर विपक्ष क्यों नहीं मोदी सरकार के साथ?

Waqf Bill: प्रशासन संशोधित वक्फ विधेयक को संसद में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह जानकारी संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने दी है. उन्होंने कुछ नेतृत्वक दलों और संगठनों पर समाज में अशांति फैलाने का आरोप लगाया है. इसके प्रावधानों को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी रीजीजू ने लगाया है. मंगलवार को संसद की बैठक फिर से शुरू होने वाली है. बिल पर हंगामा देखने को मिल सकता है. वक्फ विधेयक को लेकर विपक्ष क्यों नहीं दे रहा साथ? यदि सत्तापक्ष की बात करें तो उनका कहना है, वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे में आसानी होगी. वक्फ की संपत्ति का अच्छी तरह से इस्तेमाल हो सकेगा. मुस्लिम समाज की स्त्रीओं को भी मदद पहुंचेगी. बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी 14 संशोधनों के साथ अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर चुकी है. विपक्ष की ओर से प्रस्तावित किए गए 44 संशोधनों को जेपीसी खारिज कर चुकी है. वक्फ बिल पर आपत्तियां क्या है? 1. वक्फ के किसी संपत्ति विवाद पर अब फैसले के लिए खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम माना जाता था. 2. अब दान किए बिना किसी संपत्ति पर वक्फ अपना अधिकार नहीं जता सकता. इससे पहले ठीक उलट था. दावे के साथ ही कोई भी संपत्ति वक्फ का अधिकार हो जाती थी. 3. वक्फ बोर्ड में स्त्री के अलावा अन्य धर्म से दो सदस्य होने चाहिए. पहले बोर्ड में ऐसा प्रावधान नहीं था. 4. कलेक्टर को वक्फ की संपत्ति के सर्वेक्षण का अधिकार मिलेगा. उसे संपत्ति का निर्धारण करने का अधिकार भी होगा. यह भी पढ़ें : Video : मैं हिंदू हूं, मैं मुसलमान हूं, ईद की नमाज के दौरान ममता बनर्जी ने कहा किरेन रीजीजू ने कहा कि विधेयक को पेश करने का समय संसद की बैठक के बाद विचार-विमर्श के पश्चात तय किया जाएगा, लेकिन वह चाहते हैं कि इसे जल्द से जल्द पारित किया जाए. संसद का चालू बजट सत्र चार अप्रैल को समाप्त होना है. इस विधेयक को कानून बनाने के लिए लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में पारित कराना होगा.  The post Waqf Bill : वक्फ विधेयक को लेकर विपक्ष क्यों नहीं मोदी प्रशासन के साथ? appeared first on Naya Vichar.

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Waqf Bill: क्या कहता है संसद का नंबर गेम, कितने सांसदों का लेना होगा समर्थन

Waqf Bill: संसद में बजट सत्र अभी चल रहा है. केंद्र प्रशासन इसी सत्र में वक्फ बिल लाने की तैयारी में है. उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन कल सदन में बिल पेश कर सकती है. संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने 8 अप्रैल 2024 को पेश किया था. बाद में इसको जेपीसी में भेज दिया गया था. जेपीसी की अगुआई बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने किया था. उसके बाद संशोधित बिल को बाद में कैबिनेट से मंजूरी दी गई. क्या कहता है संसद का नंबर गेम लोकसभा में 542 सांसदों में से 240 सदस्य बीजेपी के हैं वहीं एनडीए के कुल सांसदों की संख्या 293 है. बिल को पास करने के लिए 272 का नंबर होना जरूरी है. विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस के पास 99 सांसद हैं. वहीं विपक्ष की कुल संख्या 233 है. शिरोमणि अकाली दल और आजाद पार्टी के पास एक-एक सांसद हैं. इसके अलावा कुछ निर्दलीय सांसद भी हैं जो अभी तक अपना रुख सामने नहीं रखे हैं. इसके अलावा राज्यसभा की बात करें तो अभी वहां 236 सदस्यों की संख्या है. जिसमें बीजेपी के पास 98 सांसद हैं. एनडीए गठबंधन के पास कुल 115 सांसद हैं. इसके अलावा 6 मनोनीत सांसद हैं जो लगभग प्रशासन के साथ रहते हैं. ऐसे में एनडीए यहां 121 की संख्या में है. बिल पास करने के लिए 119 की संख्या जरूरी है. हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सबसे सुरक्षित हैं : रिजिजू किरेन रिजिजू ने कहा, “भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि प्रशासन मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है. कुछ लोगों द्वारा फैलाई जा रही झूठी बातें हमारे समाज और राष्ट्र के लिए बहुत हानिकारक हैं. मैं सभी से अनुरोध करना चाहूंगा कि कृपया उन नेताओं की पहचान करें जो झूठ बोल रहे हैं. ये वे लोग हैं जिन्होंने सीएए के दौरान देश को गुमराह किया. मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सबसे सुरक्षित हैं और अल्पसंख्यकों को हिंदुस्तान में स्वतंत्रता के सबसे अच्छे अधिकार प्राप्त हैं.” The post Waqf Bill: क्या कहता है संसद का नंबर गेम, कितने सांसदों का लेना होगा समर्थन appeared first on Naya Vichar.

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सख्ती और विकास कार्यों से नक्सल प्रभाव घटा है

बीते 21 मार्च को छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में सुरक्षा बलों के हाथों जब तीस नक्सली मारे गये, तभी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में नक्सलवाद के सफाये का ऐलान कर रहे थे. केंद्र प्रशासन ने 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद के सफाये का लक्ष्य रखा है. वर्ष 2025 के अभी तीन महीने ही गुजरे हैं, लेकिन इस बीच नक्सलवाद को लेकर जो आंकड़े सामने हैं, उनसे तो लगता यही है कि नक्सलवाद अब गिने-चुने दिनों की ही बात है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन महीनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 135 नक्सली मारे जा चुके हैं. जबकि बीते साल मुठभेड़ों में 239 नक्सली मारे गये थे. इतने नक्सलियों के मारे जाने और भारी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने का संकेत बिल्कुल साफ है कि अब इनकी कमर टूटती जा रही है. साल 2010 के आंकड़ों के हिसाब से देश के तकरीबन छठवें हिस्से में नक्सलवाद का असर था. झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुल 96 जिलों में आतंकवाद का खूनी पंजा फैला हुआ था. वैसे तो हर प्रशासन नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाती रही है, पर इसमें तेजी केंद्र में मोदी प्रशासन के आने के बाद आयी. नक्सलवाद को ज्यादातर प्रशासनें कानून और व्यवस्था का मामला मानती रहीं. मोदी प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था का मामला तो माना, इसे सामाजिक नजरिये से भी देखना शुरू किया. कहा जाता रहा है कि जहां शोषण की वित्तीय स्थिति रही, वहीं नक्सलवाद को पनपने का ज्यादा मौका मिला. शायद इसी वजह से नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास के पहिये को तेजी से दौड़ाने की तैयारी हुई. सड़कों और रेल लाइन की पहुंच नक्सल प्रभावित इलाकों में बढ़ाने की शुरुआत हुई. बीते आठ साल में 10,718 करोड़ की लागत से नक्सल प्रभावित इलाकों में करीब 9,356 किमी सड़कों का निर्माण किया गया. केंद्रीय बलों द्वारा स्थानीय आबादी के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाये जाने शुरू हुए. पेयजल सुविधा बढ़ाने और सोलर लाइट की सुविधा देने के साथ ही खेती के उपकरण और बेहतर बीज देने की कोशिश तेज हुई. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से अब तक इन मदों में करीब 140 करोड़ रुपये के काम किए जा चुके हैं. डाक विभाग ने नक्सल प्रभावित 90 जिलों में, हर तीन किलोमीटर पर सिर्फ आठ साल में ही 4,903 नये डाकघर खोले हैं. अप्रैल, 2015 से अब तक 30 सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों में 1,258 नयी बैंक शाखाएं और 1,348 एटीएम लगाये गए हैं. संचार सुविधा बढ़ाने के लिए पहले चरण में 4,080 करोड़ की लागत से 2,343 मोबाइल टावर, तो दूसरे चरण में 2,210 करोड़ से 2,542 मोबाइल टावर लगाये जा रहे हैं. वहां 245 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बनाने की तैयारी है, जिनमें से 121 काम शुरू कर चुके हैं. नक्सलवाद वैसे क्षेत्रों में तेजी से पनपा, जहां गरीबी ने जड़ें जमा रखी थी. पर 2014 के बाद हालात बदले. उग्रवादी समूहों को हो रही फंडिंग पर रोक लगाने के लिए चौकसी भी बढ़ायी गयी. इसके तहत नक्सल प्रभावित राज्यों ने जहां 22 करोड़ की संपत्ति जब्त की, वहीं प्रवर्तन निदेशालय ने तीन और एनआइए ने पांच करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की. नक्सली हिंसा की जांच के लिए एनआइए में अलग से एक सेक्शन बनाया गया, जिसे अब तक 55 मामलों की जांच सौंपी जा चुकी है. ऐसे ही, विशेष कार्रवाई के लिए विशेषज्ञ सुरक्षा बलों पर जोर दिया गया और सूचनाएं साझा करने का नेटवर्क विकसित किया गया. नक्सलरोधी ऑपरेशन के लिए केंद्रीय और राज्यों की विशेष ऑपरेशन टीमें गठित की गयीं. सुरक्षा बलों और नक्सलियों पर निगाह के लिए तकनीक को बढ़ावा भी दिया गया. इसके तहत लोकेशन मोबाइल फोन और दूसरी तकनीक सुरक्षा बलों को मुहैया करायी गयी. ड्रोन कैमरों से नक्सलियों पर निगाहबानी शुरू हुई और विशेष ऑपरेशन के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गयी. इस संदर्भ में गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बताया भी कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रमुख जगहों पर सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई ‘कोबरा’ ही माओवादियों से लोहा ले रही है. इन बलों ने ऐसी रणनीति बनायी है, जिसमें नक्सलियों के पास दो ही विकल्प बचे हैं, ‘सरेंडर’ करो या ‘गोली’ खाओ. अब ऐसा कोई इलाका नहीं बचा है, जहां सुरक्षा बलों की पहुंच न हो. वे महज 48 घंटे में ‘फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस’ स्थापित कर आगे बढ़ रहे हैं. नक्सलियों के लिए जंगलों में अधिक दूरी तक पीछे भागना भी संभव नहीं, क्योंकि उनकी सप्लाई चेन कट चुकी है. इतना ही नहीं, नक्सलियों की नयी भर्ती तो पूरी तरह बंद हो चुकी है. इसके अलावा घने जंगलों में स्थित नक्सलियों के ट्रेनिंग सेंटर भी तबाह किये जा रहे हैं. नक्सल प्रभावित इलाकों में अमन-चैन बहाल हो और बिना खून बहाये लोग अपनी शिकायत लोकतांत्रिक ढंग से रख सकें, इसका विरोध शायद ही कोई करेगा. लेकिन व्यवस्था को यह भी देखना होगा कि भविष्य में ऐसे हालात फिर ना बनें, जिससे नक्सलवाद को पनपने को मौका मिले, क्योंकि विचार केंद्रित एक्शन भले ही रुक जाये, लेकिन विचार कभी नहीं मरते.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post सख्ती और विकास कार्यों से नक्सल प्रभाव घटा है appeared first on Naya Vichar.

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Chanakya Niti: जो अपने लिए नियम नहीं बनाते उन्हें दूसरों के नियमों पर चलना पड़ता है

Chanakya Niti:  आचार्य चाणक्य, जीवन में अनुशासन और आत्मनियंत्रण को सर्वोपरि मानते थे. उन्होंने कहा है – “जो अपने लिए नियम नहीं बनाते, उन्हें दूसरों के नियमों पर चलना पड़ता है.” इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति खुद के जीवन को अनुशासित नहीं करते, उन्हें परिस्थितियों और समाज के बनाए नियमों का पालन करना पड़ता है. ऐसा व्यक्ति स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ होता है और जीवन में संघर्ष का सामना करता है. Make Your Own Rules: स्वनिर्मित नियम जीवन में क्यों आवश्यक हैं? Make your own rules chanakya niti: स्वनिर्मित नियम जीवन में क्यों आवश्यक हैं? आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता:जो व्यक्ति अपने जीवन के नियम स्वयं बनाता है, वह दूसरों की इच्छाओं और दबाव से मुक्त रहता है. ऐसे लोग जीवन में अपनी राह खुद तय करते हैं और आत्मनिर्भर बनते हैं. लक्ष्य प्राप्ति में सहायक:जीवन में सफलता उन्हीं को मिलती है जो अपने लिए नियम बनाकर अनुशासन का पालन करते हैं. समय पर काम करना, सही दिशा में मेहनत करना और तय लक्ष्यों पर केंद्रित रहना, ये सभी नियम ही व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचाते हैं. अनावश्यक दबाव से बचाव:जो लोग जीवन में कोई नियम नहीं बनाते, उन्हें परिस्थितियों के अनुसार दूसरों के बनाए नियमों का पालन करना पड़ता है. इससे जीवन में अस्थिरता और असंतोष उत्पन्न हो सकता है. Chanakya Niti on Self-Discipline: दूसरों के नियमों पर चलने से क्या नुकसान हो सकते हैं? Chanakya niti on self-discipline: दूसरों के नियमों पर चलने से क्या नुकसान हो सकते हैं? स्वतंत्र सोच का अभाव:जो लोग दूसरों के नियमों का पालन करते हैं, वे अपने जीवन में रचनात्मक और स्वतंत्र विचार नहीं रख पाते. ऐसे लोग केवल दूसरों के निर्देशों पर चलते हैं और अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाते. आत्मसम्मान की कमी:दूसरों के बनाए नियमों पर चलने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो जाता है. वह स्वयं के निर्णयों पर भरोसा नहीं कर पाता और दूसरों की अपेक्षाओं के बोझ तले दब जाता है. सफलता में रुकावट:बिना आत्मनियंत्रण और अनुशासन के व्यक्ति का लक्ष्य से भटकना तय है. अगर आप अपने लिए नियम नहीं बनाएंगे तो दूसरों के बनाए नियम आपको अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचने देंगे. Follow Your Own Rules in Life: कैसे बनाएं जीवन में नियम? समय का सदुपयोग:दिनचर्या में समय का प्रबंधन करना सबसे पहला नियम होना चाहिए. काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है. आत्मनिरीक्षण और सुधार:अपने जीवन का आकलन करें और जानें कि किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है. नियम बनाकर उन कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करें. संयम और अनुशासन:इच्छाओं पर नियंत्रण और अनुशासन में रहना ही व्यक्ति को सफलता के पथ पर अग्रसर करता है. आचार्य चाणक्य की यह नीति हमें सिखाती है कि जीवन में अनुशासन और आत्मनिर्णय की कितनी महत्ता है. यदि हम अपने जीवन में सही नियम बनाकर चलते हैं तो हम दूसरों के बनाए नियमों के बंधनों से मुक्त रह सकते हैं और अपने लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. इसलिए जीवन में समय रहते सही नियम बनाएं और सफलता की ओर कदम बढ़ाएं. Also Read: Jaya Kishori Quotes: किसी की नजरों से उतार जाना है जीवन की सबसे बड़ी सजा Also Read: Chanakya Niti: स्त्री इसलिए नहीं बताती अपनी उम्र और पुरुष अपनी कमाई The post Chanakya Niti: जो अपने लिए नियम नहीं बनाते उन्हें दूसरों के नियमों पर चलना पड़ता है appeared first on Naya Vichar.

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Numerology: अप्रैल में इस मूलांक के लोगों के बंद किस्मत का खुलेगा ताला, समाज में बढ़ेगा मान-सम्मान, जानें भविष्य

Numerology: साल 2025 का चौथा महीना यानी अप्रैल की शुरुआत आज से हो गई है. अंक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस महीने का मूलांक 4 होता है और इसका ग्रह स्वामी राहु होता है, जिसे छाया ग्रह माना जाता है. राहु के प्रभाव के कारण ही व्यक्ति बहुत ही रहस्यमयी हो जाता है. यही वजह है कि अप्रैल महीने पर राहु की खास दृष्टि होती है, जिसकी वजह से कुछ लोगों पर इसका अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिलता है. ऐसे में अगर अप्रैल, 2025 के ज्योतिष फल की बात करें तो 1, 4 और 8 मूलांक के लोगों के लिए यह महीना काफी सुखमय होने वाला है. इन लोगों को करियर में सफलता मिलने के साथ-साथ मान-सम्मान में बढ़ोतरी भी होगी. मूलांक 1 के लोगों का भविष्य अंक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों का मूलांक 1 है उनके लिए यह महीना बहुत ही खास होने वाला है. मूलांक 1 वाले लोग अपने कार्यक्षेत्र में उन्नति तो हासिल करेंगे. साथ ही उनके मान-सम्मान में भी इजाफा भी होगा. इस महीने में मिलने वाले प्रोजेक्ट्स को आप बहुत ही अच्छे से पूरा करेंगे. इसके अलावा, आर्थिक स्थिति की बात करें, तो यह महीना आपके लिए काफी लाभकारी होने वाला है. इस महीने आपको निवेश से धन लाभ होने वाला है. प्रेम संबंधों की बात करें, तो यह महीना आपको सुखद परिणाम देने वाली साबित होगी. महीने के आखिर तक आप काफी व्यस्त रहेंगे, आपको टीम के साथ मिलकर काम करेंगे, जिसके बहुत ही शानदार परिणाम निकल कर सामने आएंगे. मूलांक 2 के लोगों का भविष्य अंक ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों का जन्म मूलांक 2 में हुआ है उनके लिए इस महीने कार्यक्षेत्र में आपकी उन्नति के अच्छे अवसर बनेंगे, और अप्रैल की शुरुआत में ही आपको अपने प्रोजेक्ट से संबंधित कोई सुखद समाचार प्राप्त हो सकता है. यह माह आपको सफलता की दिशा में आगे बढ़ने का मौका देगा. प्रेम संबंधों में आपसी प्रेम और समझ में वृद्धि होगी, और अप्रैल के पहले हफ्ते में आपको अपने लव लाइफ से संबंधित खुशसमाचारी मिल सकती है. आर्थिक दृष्टि से, धन लाभ तभी होगा जब आप अपनी अंतरात्मा की सुनकर निर्णय लेंगे, तब ही वित्तीय स्थिति में सुधार होगा. एक नई सोच और दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की आपकी इच्छा आपके लिए शुभ परिणाम लेकर आएगी. अप्रैल के अंत तक सुख और समृद्धि के संयोग बनते जाएंगे. यह भी पढ़ें- Numerology: मेहनती और लगनशील होते हैं इन तीन मूलांक में जन्मे लोग, पार्टनर से मिलता है बहुत प्यार यह भी पढ़ें- Numerology: बहुत नखरीली होती हैं इस मूलांक में जन्मी लड़कियां, कूट-कूट कर भरा होता है आत्मविश्वास मूलांक 3 के लोगों का भविष्य मूलांक 3 में जन्म लेने वाले लोगों के लिए इस महीने कार्यक्षेत्र में उन्नति के अच्छे अवसर आएंगे. अप्रैल में आपके प्रोजेक्ट सफलता की दिशा में आगे बढ़ेंगे. आर्थिक मामलों में, संयम और विवेक से लिए गए निर्णय आपके लिए सकारात्मक परिणाम लाएंगे. इस महीने किए गए निवेशों से आपको अच्छे लाभ की संभावना बन सकती है. प्रेम संबंधों में कुछ सीमाएं और बंधन महसूस हो सकते हैं. अप्रैल के अंत में, आपको मानसिक थकावट और थोड़ी सी चिंता का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मन में उदासी और बैचेनी हो सकती है. मूलांक 4 के लोगों का भविष्य अंक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों का जन्म मूलांक 4 में होता है अप्रैल महीने में उनके भविष्य की बात करें तो यह महीना उनके लिए काफी अच्छा साबित होने वाली है. इस महीने आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आपको धन लाभ के कई मौके मिल सकते हैं. प्रेम संबंधों में कुछ तनाव और असहमति हो सकती है, जिससे आपका मन कुछ अशांत रहेगा. अप्रैल के अंत में, आपको अपनी और अपने परिवार की सेहत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है. मूलांक 5 के लोगों का भविष्य मूलांक 5 में जन्म लेने वाले लोगों के लिए साल 2025 का अप्रैल महीना आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगा और धन लाभ के अच्छे अवसर मिलेंगे. हालांकि, उन्हें सोच-समझकर और पूरी रिसर्च के साथ लिए गए निर्णय लेने पड़ेंगे, इसके बाद ही उनके जीवन में अच्छे परिणाम आएंगे. लव लाइफ की बात करें तो जीवनसाथी के साथ आपसी प्रेम बढ़ेगा. हालांकि यह आपकी उम्मीदों से थोड़ा कम हो सकता है, फिर भी लव लाइफ में रोमांस बना रहेगा. अप्रैल के अंत में, किसी विशेष कारण से आपका मन उदास हो सकता है, और आप कुछ मायूस महसूस करेंगे. मूलांक 6 के लोगों का भविष्य अंक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों का मूलांक 6 है, उनके लिए यह महीना काफी अच्छा साबित होने वाला है. जीवनसाथी के साथ आपसी प्रेम और समझ बढ़ेगा और लव लाइफ में सुख-समृद्धि के अच्छे अवसर बनेंगे. यह समय प्रेम संबंधों में एक नई शुरुआत का संकेत दे सकता है, जो आपके जीवन में खुशियां लेकर आएगी. आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और निवेशों से भी लाभ मिलने के योग हैं. कार्यक्षेत्र में धीरे-धीरे उन्नति के रास्ते खुलेंगे. मूलांक 7 के लोगों का भविष्य मूलांक 7 वाले लोगों के लिए अप्रैल का महीना आर्थिक मामले में बहुत ही अच्छा साबित होगा, क्योंकि उन्हें धन लाभ के अच्छे अवसर मिलेंगे. हालांकि, अगर वे लापरवाही बरतेंगे तो उनका जीवन कष्ट के साथ बीतेगा. प्रेम संबंधों में अचानक कुछ राज़ खुलने से आपका मन अशांत रहेगा, जिसकी वजह से मन बहुत बेचैन भी रह सकता है. ऐसी स्थिति में जातक को हौसला से काम लेना होगा. महीने के आखिर तक कुछ कानूनी पचड़ों में भी व्यक्ति फंस सकता है. ऐसे में सूझबूझ के साथ काम करना होगा. मूलांक 8 के लोगों का भविष्य जिन लोगों का मूलांक 8 है, उनके अप्रैल महीने के भविष्य की बात करें तो प्रेम के मामले में उनका जीवन अच्छा रहेगा. हालांकि, किसी बात को लेकर मन में अशांति बनी रह सकती है. कार्यक्षेत्र में कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और आपका मन भावुक रहेगा. आर्थिक मामलों में धीरे-धीरे सुधार होगा और आपको धन लाभ के अवसर मिलेंगे. अप्रैल के अंत तक आपके जीवन में सुधार की स्थिति बनेगी. साझेदारी में किए गए प्रयासों से आपको सुख और समृद्धि के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. महीने के

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Allu Arjun ‘पुष्पा 2’ की सफलता के बाद बदलेंगे अपना नाम! इस खास मकसद से जोड़ेंगे ये शब्द

Allu Arjun: तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन ‘पुष्पा 2’ की बड़ी सफलता के बाद अपनी सक्सेस का लुत्फ उठा रहे हैं. इस फिल्म ने साल 2024 की आखिरी महीने में रिलीज होकर कई बड़ी फिल्मों के रिकार्ड्स को चकनाचूर किया था. सुकुमार के डायरेक्शन और अल्लू अर्जुन की दमदार परफॉर्मेंस ने दर्शकों से खूब प्यार बटोरा था. अब भी फिल्म को उसके जबरदस्त डायलॉग, एक्शन सीक्वेंस, गाने के लिए याद किया जाता है. थिएटर्स के बाद फिल्म को डिजिटल डेब्यू पर भी बहुत सरहाया गया. इस बीच अब समाचार आ रही है कि फिल्म की बाद पुष्पा भाउ यानी अल्लू अर्जुन अपना नाम बदलने की सोच रहे हैं. हालांकि, इसपर एक्टर की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. आइए बताते हैं पूरा मामला. क्या अपना नाम बदलेंगे अल्लू अर्जुन? कोइमोई और सिने जोश की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल्लू अर्जुन अंक ज्योतिषी (Numerologist) की सिफारिश के आधार पर अपने नाम में जोड़ सकते हैं, जिससे उनके उनका करियर और भविष्य दोनों सफल और अच्छा रहे. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एक्टर अपने नाम में दो ‘U’ और दो ‘N’ जोड़ने सकते हैं. हालांकि, इसपर अल्लू अर्जुन ने कोई पुष्टि नहीं की है. मालूम हो कि अल्लू अर्जुन से पहले भी कई एक्टर्स ने अपने नाम के अक्षर में बदलाव किया है. इनमें रानी मुखर्जी, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव, नुशरत भरुचा, सुनील शेट्टी और तृप्ति डिमरी शामिल हैं. अल्लू अर्जुन का वर्क फ्रंट अल्लू अर्जुन इन दिनों अपनी नई पैन-इंडियन फिल्म ‘AA22’ को लेकर सुर्खियों में हैं. इस फिल्म के निर्देशन की कमान जवान डायरेक्टर एटली संभाल रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अपकमिंग फिल्म का ऐलान अल्लू अर्जुन के जन्मदिन 8 अप्रैल को किया जा सकता है. पिंकविला की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर ने इसके लिए 175 करोड़ की तगड़ी फीस चार्ज की है. वहीं, इसके बाद एक्टर ‘पुष्पा 3’ में भी नजर आएंगे. इसकी अनोउंसमेंट हाल ही में एक्टर ने कर दी है. साथ ही निर्देशक त्रिविक्रम श्रीनिवास के साथ भी एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें वह भगवान कार्तिकेय का रोल निभाएंगे. यह भी पढ़े: Box Office Report: छावा का रिकार्ड तोड़ आगे निकली ‘सिकंदर’, तो मोहनलाल की ‘एल2: एम्पुरान’ ने पांचवें दिन बटोरी खूब ईदी The post Allu Arjun ‘पुष्पा 2’ की सफलता के बाद बदलेंगे अपना नाम! इस खास मकसद से जोड़ेंगे ये शब्द appeared first on Naya Vichar.

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नक्सलियों पर नियंत्रण

जिस छत्तीसगढ़ को हाल के वर्षों तक देश में सर्वाधिक नक्सल प्रभावित राज्य बताया जाता रहा है, वहां पिछले कुछ समय से सुरक्षाबलों के सघन अभियानों के साथ योजनाबद्ध विकास कार्यक्रमों ने नक्सलियों को लगभग हाशिये पर ला दिया है. अगले साल मार्च तक देश को नक्सल मुक्त करने की मुहिम के तहत फिलहाल छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज को नक्सल मुक्त करने पर जोर दिखाई देता है. इस सदी के पहले दशक में नक्सलियों की ताकत का व्यापक विस्तार हुआ था, लेकिन अब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की अनुमानित संख्या चार-पांच हजार के आसपास सिमट गयी हो, तो आश्चर्य नहीं. तथ्य यह है कि प्रशासनी सक्रियता से नक्सलियों का आंकड़ा सिमटने के साथ-साथ स्थानीय लोग भी उनके भय से मुक्त हुए हैं. सिर्फ इस साल की बात करें, तो नौ फरवरी, 20 मार्च और 30 मार्च को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ तीन ऑपरेशन किये गये, जिनमें 79 नक्सली मारे गये. इस साल अभी तक कुल मिलाकर 135 नक्सली मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. विगत 30 मार्च को सुकमा में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में 18 नक्सली मारे गये, जिनमें 11 स्त्रीएं थीं. उसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले बीजापुर में 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 10 स्त्रीएं थीं. सिर्फ यही नहीं कि इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने की यह विरल घटना है, बल्कि हथियार सौंपने वालों में अनेक नक्सली शीर्ष स्तर के थे. जबकि अभी तक ज्यादातर निचले स्तर के नक्सली ही आत्मसमर्पण का रास्ता चुनते थे. प्रशासन की नीति है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा. सुरक्षा बलों का ऑपरेशन कितना व्यापक है, इसका पता इसी से चलता है कि शनिवार को सुकमा में हुए ऑपरेशन के दो दिन बाद ही बस्तर रेंज में 25 लाख के इनाम वाली एक स्त्री नक्सली मुठभेड़ में मारी गयी. निश्चित रूप से सुरक्षा बलों की कार्रवाई ज्यादा बड़ी और अनवरत है. लेकिन नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य भी किए जा रहे हैं. ऐसे अनेक गांव हैं, जहां कई दशकों के बाद बिजली और सड़क पहुंची है. वैसे दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में दूरसंचार और बैंकिंग व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है. इससे भी स्थानीय लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है. The post नक्सलियों पर नियंत्रण appeared first on Naya Vichar.

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Free Fire Max पर मिलेंगे फ्री रिवॉर्ड्स, ये हैं लेटेस्ट कोड्स

Garena Free Fire Max: 1 अप्रैल 2025 के लिए नए 100% वर्किंग रिडीम कोड्स, पाएं फ्री इन-गेम रिवॉर्ड्स Garena Free Fire Max दुनियाभर के गेमर्स के बीच हाई-ग्राफिक्स, रोमांचक बैटल रॉयल गेमप्ले और शानदार एक्शन-पैक्ड अनुभव के लिए लोकप्रिय है. इस गेम में खिलाड़ी कैरेक्टर्स, गन स्किन्स, इमोट्स, आउटफिट्स, बंडल्स और लूट क्रेट्स जैसे इन-गेम आइटम्स को खरीदने के लिए डायमंड्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अगर आप बिना कोई डायमंड खर्च किए फ्री इन-गेम रिवॉर्ड्स प्राप्त करना चाहते हैं, तो रिडीम कोड्स आपके लिए सबसे बेहतरीन तरीका हैं. Free Fire Max Redeem Codes क्या हैं? 📌 Garena हर दिन कुछ स्पेशल रेडेम्पशन कोड्स जारी करता है, जिनका उपयोग करके खिलाड़ी फ्री में प्रीमियम इन-गेम आइटम्स पा सकते हैं.📌 ये कोड्स 12 से 16 अक्षरों व संख्याओं के मिश्रण से बने होते हैं.📌 ध्यान रखें:✅ हर कोड केवल एक बार उपयोग किया जा सकता है.✅ पहले 500 खिलाड़ी ही इसे सफलतापूर्वक रिडीम कर सकते हैं.✅ ये कोड्स केवल एक निश्चित समय के लिए मान्य होते हैं. Free Fire Max Redeem Codes कैसे करें रिडीम? अगर आप फ्री रिवॉर्ड्स पाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें: 1️⃣ Garena की आधिकारिक रिडेम्पशन वेबसाइट पर जाएं: https://reward.ff.garena.com2️⃣ अपनी गेम आईडी से लॉगिन करें (Facebook, Google, Twitter, VK या Apple ID के जरिए).3️⃣ रिडीम कोड कॉपी करें और दिए गए बॉक्स में पेस्ट करें.4️⃣ “Confirm” बटन पर क्लिक करें और वेरिफिकेशन पूरा करें.5️⃣ अगर कोड सही है, तो इनाम 24 घंटे के अंदर आपके गेम अकाउंट में भेज दिया जाएगा. महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखें: ⚠ कोड की वैधता सीमित समय तक ही होती है, इसलिए जल्द से जल्द उपयोग करें.⚠ एक बार उपयोग किए गए कोड को दोबारा रिडीम नहीं किया जा सकता.⚠ कोड्स क्षेत्र (Region) आधारित होते हैं, यानी दूसरे सर्वर के कोड आपके सर्वर पर काम नहीं करेंगे. बिना डायमंड खर्च किए बेहतर गेमिंग एक्सपीरिएंस लें! अगर आप फ्री में गन स्किन्स, कैरेक्टर्स और अन्य इन-गेम रिवॉर्ड्स पाना चाहते हैं, तो Free Fire Max के रिडीम कोड्स आपके लिए शानदार मौका हैं. बिना डायमंड खर्च किए अपने गेमिंग अनुभव को बेहतर बनाएं. 🔥 आज के 22 मार्च 2025 के रिडीम कोड्स का जल्दी से इस्तेमाल करें और अपने फेवरेट रिवॉर्ड्स पाएं! 🎮 यह भी पढ़ें: Top Online Games in World: 10 ऐसे गेम्स जिनके दुनियाभर में करोड़ों हैं दीवाने The post Free Fire Max पर मिलेंगे फ्री रिवॉर्ड्स, ये हैं लेटेस्ट कोड्स appeared first on Naya Vichar.

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सुसाइड नहीं यह मर्डर है बच्चों ने लगाया आरोप,पुलिस से हुई नोंकझोंक

प्रयागराज ट्रिपलआईटी संस्थान में शनिवार को दो बच्चों की मौत हो गई जिसमें बच्चों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशाशन के लापरवाही के चलते बच्चों की जान गई है. वहीं कॉलेज प्रशाशन बच्चों की मृत्यु की बात दबाने में लगा हुआ था कॉलेज के बच्चों ने कहा कि एक दिन में दो बच्चों के मृत्यु से पूरा कॉलेज स्तब्ध है और शोक मना रहा है वहीं कॉलेज प्रशाशन की तरफ से दो बच्चों की मृत्यु का कोई आधिकारिक बयान क्यों नहीं आया और आखिर ऐसी क्या वजह थी जो उन्होंने बात को दबाने की कोशिश की. कॉलेज में दो बच्चों की मौत, कॉलेज के डायरेक्टर हैं नदारदबच्चों ने कहा कि हमारे कालेज के डायरेक्टर तो महीने महीने भर कॉलेज ही नहीं आते और जब ऐसे स्थिति में कालेज के डायरेक्टर को हमलोग के बीच उपस्थित होकर संवेदनाएं जतानी चाहिए थी तो आखिर डायरेक्टर साहब के पास ऐसा कौन सा बड़ा काम आ गया कि अपने ही कालेज के 2 बच्चों की मृत्यु हो जाने पर भी डायरेक्टर मौजूद नहीं हो पाएं. बच्चों और पुलिस में हुई नोंकझोंकआत्महत्या करने वाले राहुल के परिजन ने अभी दाह संस्कार करने से मना कर दिया उनका कहना था कि जब तक कालेज के डायरेक्टर स्वयं बात करने नहीं आते तब तक हमलोग यहां से हटने वाले नहीं हैं वहीं बच्चों ने भी प्रदर्शन करना शुरू कर दिया पुलिस भी मौके पर मौजूद रही और बच्चों को वहां से प्रदर्शन करने से रोकने की बात करने लगी जिसको लेकर बच्चों और पुलिस के बीच नोंकझोंक हुई और कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशाशन भी कॉलेज प्रशाशन से मिलकर काम कर रही है एवं बच्चों पर लाठी चार्ज जैसी बातें भी सामने आ रही है. The post सुसाइड नहीं यह मर्डर है बच्चों ने लगाया आरोप,पुलिस से हुई नोंकझोंक appeared first on Naya Vichar.

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