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Author name: Vinod Jha

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LPU Protest: आखिर रात में कैंपस में क्या हुआ? छात्रों ने बताया आंखों देखा हाल

LPU Students Experience: बीते दिनों LPU कैंपस में हुई घटना के बाद यूनिवर्सिटी की ओर से जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं. इसके तहत नियमित कक्षाओं को 10 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि Mid-Term Exam को अगली सूचना तक पोस्टपोन किया गया है. साथ ही, जो स्टूडेंट्स इस दौरान अपने घर जाना चाहते हैं, उन्हें इसकी अनुमति दी गई है. ऐसे में घर लौट रहे कई छात्रों ने कैंपस में हुई घटना के दौरान अपने अनुभव साझा किए हैं. आइए जानते हैं, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्या कहा है. LPU Incident Update: मास्क पहने थे कई प्रदर्शनकारी LPU के छात्र विशाल कुमार ने कैंपस से घर जाते समय मीडिया को बताया कि सुबह तक सब नाॅर्मल था, स्टूडेंट्स सड़कों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. हालांकि जैसे ही रात हुई, बाहर से बड़ी संख्या में लोग मास्क पहनकर आए और स्थिति हिंसक हो गई. इसके बाद कैंपस में तोड़-फोड़ शुरू हाे गई. वे एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक जा रहे थे और हर चीज को तोड़-फोड़ रहे थे. रात के समय स्थिति काफी गंभीर हो गई थी. घटना के बाद कॉलेज अथॉरिटी ने क्लासेस सस्पेंड कर दी है. ये भी पढ़ें: 2000 छात्र, एक रात और तबाह हुआ पूरा कैंपस, LPU की पूरी इनसाइड स्टोरी LPU Notice For Students: काॅलेज की छात्रा ने बताया आंखों देखा हाल LPU कैंपस में चल रहा प्रोटेस्ट लड़कियों की सेफ्टी को लेकर था, मगर स्थिति ऐसी हो गई है की काॅलेज कैंपस में खुद लड़कियां ही सेफ नहीं हैं. यह बात काॅलेज की एक छात्रा खुशी चतुर्वेदी ने कही है. ANI की ओर से X पर जारी एक वीडियो पोस्ट में छात्रा ने कहा कि जो छात्र घर नहीं जा रहे हैं, वे अपने हॉस्टल के अंदर ही रहें. अगर वे विरोध करना चाहते हैं, तो शांतिपूर्ण तरीके से कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: LPU Students Protest: गैंगरेप की अफवाह से LPU में हंगामा, हजारों छात्र जुटे, जमकर की तोड़फोड़ LPU Students Reaction: बिल्डिंग में लगाई आग और किया तोड़-फोड़ काॅलेज के एक स्टूडेंट ने आखों देखा हाल बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि CS बिल्डिंग में आग लगाया गया और एडमिशन ब्लॉक को तोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि हंगामा अब थम गया है और काॅलेज कैंपस में शांति का माहौल है. पुलिस ने कैंपस को सुरक्षित कर लिया है. अभी तो हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन हमें पक्का नहीं पता कि 10 दिन बाद सब कुछ सामान्य होगा या नहीं. ऑनलाइन क्लास होंगी या नहीं, क्योंकि कल रात क्लासरूम में काफी तोड़-फोड़ की गई थी. LPU Room No. 504 Girls Comment: क्या कहा हाॅस्टल की छात्राओं ने? LPU ने हाॅस्टल के रूम नंबर 504 की छात्राओं का एक वीडियो जारी करके दावा किया था कि इसमें छात्राएं विवाद के बारे में सीधे तौर पर बात कर रही थीं और यह वीडियो उनकी “साफ मंजूरी” से पब्लिश किया गया था. हालांकि मीडिया में उन्ही लड़कियों के वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें आरोप लगाते देखा जा रहा है कि उनके बयानों को एडिट किया गया है. उन्हें बताया गया कि क्या बोलना है और वीडियो उनकी मंजूरी के बिना पब्लिश किया गया. Note: नया विचार इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है. ये भी पढ़ें: LPU Classes Suspended: 10 दिन बंद रहेंगी कक्षाएं, Mid-Term Exams भी पोस्टपोन The post LPU Protest: आखिर रात में कैंपस में क्या हुआ? छात्रों ने बताया आंखों देखा हाल appeared first on Naya Vichar.

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21 साल बाद फेसबुक वीडियो ने मिलाया बिछड़े बेटे को, मां बोलीं- ‘ये तो शंकरवा है’

कभी ट्रेन की सवारी का शौक एक किशोर को घर से दूर ले गया था. 21 साल बाद उसी परिवार को एक फेसबुक वीडियो ने फिर से जोड़ दिया. बिहार के मधुबनी जिले के राम शंकर कुशवाहा 15 साल की उम्र में ट्रेन में बैठकर लापता हो गए थे. अब 36 साल की उम्र में वे अपने गांव लौट आए हैं. उनकी मां ने वीडियो देखते ही पहचान लिया और कहा, “ये तो मेरा शंकरवा है.” कैसे हुए थे लापता द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2005 में राम शंकर कुशवाहा मधुबनी के महेशपुरा गांव से ट्रेन में सवार हुए. ट्रेन का शौक उन्हें घर से दूर ले गया. परिवार ने सालों तक तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. धीरे-धीरे उम्मीदें कम होने लगीं. शंकर ग्वालियर के एक आश्रम में रहने लगे थे, जहां बेसहारा और लापता लोगों को रखा जाता है. फेसबुक वीडियो बना माध्यम ग्वालियर के डीएसपी संतोष पटेल ने आश्रम का दौरा किया और वहां मौजूद लोगों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक पर डाला. वीडियो में शंकर कुशवाहा पारंपरिक पोशाक में नजर आ रहे थे. उन्होंने अपना नाम और बिहार से होने की बात कही. जन्माष्टमी के दिन उनके बड़े भाई ललित की नजर इस वीडियो पर पड़ी. उन्होंने मां को वीडियो दिखाया तो मां तुरंत पहचान गईं. भावुक हुआ परिवार का मिलन परिवार ने डीएसपी से संपर्क किया. पहचान की पुष्टि के बाद 7 सितंबर को शंकर को घर लाया गया. गांव में उनका जोरदार स्वागत हुआ. मां लक्ष्मी देवी ने बेटे को गले लगाया तो आंखें नम हो गईं. परिवार के लिए यह पल दोबारा जन्म जैसा था. सोशल मीडिया की एक छोटी सी कोशिश ने दो दशक का इंतजार खत्म कर दिया. सोशल मीडिया की भूमिका यह घटना दिखाती है कि सही इस्तेमाल होने पर सोशल मीडिया कितना प्रभावी साबित हो सकता है. पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा किए गए वीडियो ने न सिर्फ एक परिवार को जोड़ा, बल्कि कई अन्य लापता लोगों के लिए भी उम्मीद जगाई है. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल सवाल 1: राम शंकर कुशवाहा कितने साल बाद परिवार से मिले? जवाब: वे 21 साल बाद अपने परिवार से मिल सके. सवाल 2: उनकी पहचान कैसे हुई? जवाब: ग्वालियर के डीएसपी संतोष पटेल के फेसबुक वीडियो से परिवार ने उन्हें पहचान लिया. सवाल 3: वे कहां रह रहे थे? जवाब: मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित एक आश्रम में रह रहे थे. ये भी पढ़ें: मार्क जकरबर्ग ने दिखाया AI का नया अवतार, जानिए क्या है कीचेन जैसा दिखने वाला Muse Charm The post 21 साल बाद फेसबुक वीडियो ने मिलाया बिछड़े बेटे को, मां बोलीं- ‘ये तो शंकरवा है’ appeared first on Naya Vichar.

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होल्डिंग सेंटर से भागा रोहिंग्या युवक झाड़ियों में छिपा मिला, वन विभाग के खोजी कुत्ते ने ढूंढ़ निकाला

होल्डिंग सेंटर की दीवार फांदकर भागे रोहिंग्या युवक को आखिरकार पुलिस ने पकड़ लिया. पुलिस के अनुसार, जलपाईगुड़ी-सिलीगुड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथी मोड़ इलाके में झाड़ियों के पीछे छिपे युवक का पता गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के खोजी कुत्ते ‘ऑरलैंडो’ ने लगाया. इसके बाद राजगंज थाने की पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. 19 सितंबर को पकड़ाये थे 4 रोहिंग्या जानकारी के अनुसार, 19 सितंबर को एनजेपी स्टेशन से रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने चार रोहिंग्या नागरिकों को पकड़ा था. बाद में उन्हें राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के माध्यम से राजगंज पुलिस को सौंप दिया गया. चारों को राजगंज के फाटापुकुर स्थित होल्डिंग सेंटर में रखा गया था. रविवार सुबह फरार हुआ मोहम्मद सलाम रविवार सुबह पुलिस की नजर से बचकर म्यांमार निवासी रोहिंग्या युवक मोहम्मद सलाम वहां से भाग गया. युवक के भागने की जानकारी मिलते ही पुलिस ने आसपास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया. तलाशी के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और वन विभाग के खोजी कुत्ते की भी मदद ली गयी. ये भी पढ़ें: NJP स्टेशन पर त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस से पकड़े गए 4 संदिग्ध, पूछताछ में खुला म्यांमार से पंजाब तक का कनेक्शन खोजी कुत्ते ने युवक का पता लगाया तलाशी के दौरान गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के खोजी कुत्ते ‘ऑरलैंडो’ को युवक का सुराग मिला. पुलिस के अनुसार, भागने के बाद मोहम्मद सलाम हाथी मोड़ इलाके में एक झाड़ी के पीछे छिपा हुआ था. आशंका जतायी जा रही है कि वह वहां बस पकड़कर आगे जाने की योजना बना रहा था. ऑरलैंडो की मदद से पुलिस ने झाड़ी से उसे पकड़ लिया. ये भी पढ़ें: बंगाल के हर जिले में बनेगा ‘होल्डिंग सेंटर’, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर सख्त हुई प्रशासन The post होल्डिंग सेंटर से भागा रोहिंग्या युवक झाड़ियों में छिपा मिला, वन विभाग के खोजी कुत्ते ने ढूंढ़ निकाला appeared first on Naya Vichar.

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Pitru Paksha 2026: तर्पण और श्राद्ध को एक न समझें, जानें दोनों में क्या है अंतर

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का समय है. इस दौरान लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं. मान्यता है कि इन कर्मों से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते है. पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और श्राद्ध शब्दों का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है. कई लोग इन दोनों को एक ही मानते हैं, जबकि धार्मिक परंपराओं में इनके स्वरूप और विधि में अंतर है. तर्पण में मुख्य रूप से जल अर्पित किया जाता है, जबकि श्राद्ध में संकल्प, पिंडदान, भोजन और दान आदि कर्म शामिल हो सकते हैं. आइए जानते हैं तर्पण और श्राद्ध में क्या अंतर है. श्राद्ध क्या होता है? तर्पण करते हुए सांकेतिक तस्वीर (एआई) ‘तर्पण’ का अर्थ तृप्त करना या संतुष्ट करना होता है. तर्पण में पितरों को जल अर्पित किया जाता है. इसमें आमतौर पर जल के साथ काले तिल और कुश का इस्तेमाल किया जाता है. तर्पण करते समय पितरों का ध्यान करके उनकी तृप्ति और शांति की प्रार्थना की जाती है. सरल शब्दों में समझें तो तर्पण में मुख्य रूप से जल अर्पित करके पितरों को याद किया जाता है. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha Dwitiya Shradh: आज द्वितीया श्राद्ध पर इस मुहूर्त में करें तर्पण, जानें सही विधि और पंचबलि नियम The post Pitru Paksha 2026: तर्पण और श्राद्ध को एक न समझें, जानें दोनों में क्या है अंतर appeared first on Naya Vichar.

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उज्जैन: शाही मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन से पहले पथराव, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस; क्यों ढहाई जा रही 100 साल पुरानी इबादतगाह?

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच शाही मस्जिद को लेकर विवाद सोमवार को और बढ़ गया. सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के कुछ हिस्से को हटाने की प्रशासन की योजना का विरोध कर रहे लोगों और पुलिस के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है. मौके पर जुटी भीड़ की ओर से पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा है मस्जिद का हिस्सा विवाद उज्जैन के गोपाल मंदिर क्षेत्र की शाही मस्जिद से जुड़ा है. सिंहस्थ-2028 को देखते हुए कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है. प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य आने वाले समय में यातायात और भीड़ प्रबंधन को बेहतर करना है. इस प्रस्तावित सड़क के हिस्से में कई धार्मिक स्थल आ रहे हैं. प्रशासन के अनुसार, इनमें से कई जगहों पर कार्रवाई या बदलाव आपसी सहमति से किए जा चुके हैं. लेकिन शाही मस्जिद के उस हिस्से को लेकर विवाद बना हुआ है, जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहा है. रविवार रात से ही जुटने लगे थे लोग मस्जिद को हटाए जाने की आशंका के बीच रविवार रात बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मुस्लिम समाज के लोग वहां जुट गए थे. पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने लोगों से बातचीत कर स्थिति संभालने की कोशिश की. पुलिस का कहना है कि फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही थी और तत्काल तोड़फोड़ आगे नहीं बढ़ाई गई थी. सोमवार सुबह भी बड़ी संख्या में लोग इलाके में जमा रहे. हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव भी हुआ. 100 साल पुरानी है उज्जैन की शाही मस्जिद मस्जिद की ऐतिहासिकता को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं. मस्जिद के इमाम ने इसे करीब 636 साल पुराना बताते हुए 1390 से जुड़ा होने का दावा किया है. वहीं हाल की अदालती रिपोर्टों में इसे करीब 100 साल पुरानी संरचना के रूप में भी दर्ज किया गया है. The post उज्जैन: शाही मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन से पहले पथराव, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस; क्यों ढहाई जा रही 100 साल पुरानी इबादतगाह? appeared first on Naya Vichar.

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LPU Protests: 10 दिन क्लास सस्पेंड, इंटरनेट बंद; CM मान बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

LPU Protests: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रों के प्रदर्शन के कारण 15 घंटे से अधिक समय तक बाधित रहा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर यातायात बहाल कर दिया गया है. पुलिस के मुताबिक, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और विश्वविद्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. तनावपूर्ण हालात के बीच इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गई हैं. LPU के छात्रों ने रविवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा एक छात्रा से कथित दुष्कर्म किए जाने के दावे को लेकर प्रदर्शन किया था. इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ हुई और छात्रों ने परिसर के बाहर नयी दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग के एक हिस्से को भी जाम कर दिया. CM भगवंत मान ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश मामले को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. साथ ही पंजाब के DGP गौरव यादव को खुद LPU पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने को कहा है. मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, DGP को मौके पर जाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने और स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है. रात में बहाल हुआ NH-44 पर ट्रैफिक जालंधर के पुलिस आयुक्त सतिंदर सिंह ने बताया कि रविवार और सोमवार की मध्यरात्रि के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया गया. उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है. सोमवार सुबह भी LPU के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती रही. सुरक्षा व्यवस्था के बीच कई छात्र विश्वविद्यालय से अपने घरों के लिए रवाना होते दिखाई दिए. इंटरनेट सेवा भी बंद प्रदर्शन और तनावपूर्ण स्थिति के बीच इलाके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गई हैं. सोशल मीडिया पर अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है. 10 दिन तक कक्षाएं बंद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार से नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दी हैं. इसके अलावा मिड-टर्म परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक टाल दिया गया है. LPU ने छात्रों को इस अवधि में अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह लेकर घर जाने की अनुमति दी है. वहीं, परिसर में रहने वाले छात्रों को हॉस्टल या अपने आवास में रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है. पुलिस से झड़प और पथराव के बाद बिगड़े हालात अधिकारियों के मुताबिक, रविवार शाम पुलिस ने NH-44 से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की. प्रदर्शनकारी सुबह करीब आठ बजे से सड़क पर बैठे थे. पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुछ छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतलें फेंकीं. इसके बाद झड़प हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया. छात्र परिसर की ओर चले गए, लेकिन अधिकारियों के अनुसार वहां पहुंचने के बाद कुछ छात्रों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचा. इसके बाद ADGP एम. एफ. फारूकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी देर रात विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे. वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च भी किया. ये भी पढ़ें: पंजाब: दुष्कर्म के दावे पर LPU में बवाल, FIR दर्ज; SIT करेगी पूरे मामले की जांच 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात ADGP के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. दुष्कर्म के दावे की SIT कर रही जांच पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है. मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में ऐसी घटना होने के दावे को अफवाह बताया है. पुलिस ने भी अभी कथित घटना की पुष्टि नहीं की है और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है. सोशल मीडिया वीडियो में तोड़फोड़ और आगजनी घटना से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं. इनमें प्रदर्शनकारी परिसर में खिड़कियों के शीशे और गमले तोड़ते तथा कुछ वस्तुओं में आग लगाते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में ‘हम न्याय चाहते हैं’ के नारे भी सुनाई दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. चितकारा यूनिवर्सिटी की घटना के एक दिन बाद LPU में बवाल LPU में हिंसा की घटना से एक दिन पहले पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय में भी अपुष्ट समाचारों को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था. वहां प्रदर्शनकारियों द्वारा एक पुलिस वाहन में आग लगाए जाने की घटना सामने आई थी. फिलहाल LPU परिसर और आसपास पुलिस की भारी तैनाती है. NH-44 पर यातायात बहाल हो चुका है और पुलिस के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है. वहीं, SIT की जांच के बाद ही कथित दुष्कर्म मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. The post LPU Protests: 10 दिन क्लास सस्पेंड, इंटरनेट बंद; CM मान बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO: इंद्रावती की बाढ़ में कच्चे मकान की छत पर फंसे थे 12 लोग, गरुड़ कमांडो ने ऐसे किया खतरनाक रेस्क्यू

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी में आई बाढ़ के बीच कच्चे मकान की छत पर फंसे 12 लोगों को हिंदुस्तानीय वायुसेना ने सुरक्षित बाहर निकाला. इनमें स्त्रीएं और शिशु भी शामिल थे. जानकारी मिलने के बाद हिंदुस्तानीय वायुसेना के सेंट्रल एयर कमांड की एक टीम ने डोंगाघाट गांव के पास इंद्रावती नदी के उत्तरी तट पर फंसे लोगों की तलाश शुरू की. बताया गया था कि इलाके में 10 से 12 लोग कच्ची झोपड़ियों में फंसे हुए हैं. छत पर फंसे थे लोग इलाके की गहन तलाशी के दौरान वायुसेना के दल को सभी लोग एक कच्चे मकान की छत पर नजर आए. बाढ़ का पानी तेज बहाव के साथ बढ़ रहा था और जिस मकान की छत पर लोग खड़े थे, उसके किसी भी वक्त ढहने का खतरा था. रेस्क्यू से जुड़ी अहम बातें इंद्रावती नदी के उत्तरी तट पर लोग फंसे थे सभी लोग कच्चे मकान की छत पर जमा थे तेज बहाव के कारण मकान के ढहने का खतरा था रेस्क्यू के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली गई छत पर उतारा गया गरुड़ कमांडो हालात को देखते हुए वायुसेना ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. हेलीकॉप्टर को हवा में स्थिर रखते हुए एक गरुड़ कमांडो को रस्सी के जरिए कमजोर छत पर उतारा गया. कमांडो ने वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की. इसके बाद सभी लोगों को एक-एक कर हेलीकॉप्टर में विन्च के जरिए ऊपर खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला गया. ऑपरेशन में 12 लोगों की जान बचाई गई कुल 12 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया इनमें स्त्रीएं और शिशु भी शामिल थे लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाके से बाहर निकाला गया वायुसेना के इस अभियान के दौरान समय बेहद सीमित था, क्योंकि तेज बहाव के कारण कच्चे मकान के ढहने का खतरा लगातार बना हुआ था. ऐसे में टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी 12 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया. ये भी पढ़ें: गंडक ने बढ़ाई बिहार की टेंशन, बराज से छोड़ा गया 5.43 लाख क्यूसेक पानी, चंपारण के गांवों में घुसा पानी The post VIDEO: इंद्रावती की बाढ़ में कच्चे मकान की छत पर फंसे थे 12 लोग, गरुड़ कमांडो ने ऐसे किया खतरनाक रेस्क्यू appeared first on Naya Vichar.

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शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 890 अंक टूटा, क्रूड और बॉन्ड यील्ड ने बिगाड़ा खेल

Indian Stock Market: सुबह 9:41 बजे तक सेंसेक्स 891 अंक गिरकर 73,005 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 270 अंक टूटकर 22,867 पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 896 अंक तक लुढ़का. निफ्टी50 ने 23,000 का अहम स्तर तोड़ दिया और 22,856 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंचा. बाजार क्यों गिरा? इसकी दो बड़ी वजहें हैं: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5.2% पर पहुंच गई, जो करीब 20 साल का सबसे ऊंचा स्तर है. कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% से ज्यादा चढ़कर 105.64 डॉलर प्रति बैरल हो गया. अमेरिकी यील्ड बढ़ने से हिंदुस्तान पर असर क्यों? आसान भाषा में समझें तो जब अमेरिकी प्रशासनी बॉन्ड पर ज्यादा कमाई मिलने लगती है, तो निवेशक कम जोखिम में अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं. ऐसे में पैसा हिंदुस्तान जैसे उभरते बाजारों के शेयरों से निकलकर अमेरिकी बॉन्ड में जाने लगता है. विश्लेषकों के मुताबिक इससे हिंदुस्तानीय एसेट्स कम आकर्षक लगने लगते हैं. तेल की कीमतों के पीछे मिडिल-ईस्ट का तनाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया, जिसका मकसद दोनों देशों का विवाद सुलझाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना था. ईरान ने यह प्रस्ताव पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा था और कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया था. हालांकि रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने रविवार को एक्सियोस से कहा कि इस हफ्ते अमेरिकी वार्ताकार और बातचीत करेंगे. किन सेक्टर और शेयरों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी? गिरावट हर तरफ दिखी. एनएसई के सभी बड़े सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में रहे. इंडेक्स गिरावट निफ्टी बैंक 1.3% निफ्टी मिडकैप 100 1.06% निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.12% निफ्टी मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी 0.8% से 1.5% तक टूटे. निफ्टी50 के बड़े नुकसान वाले शेयर: हिंडाल्को सबसे बड़ा लूजर रहा। यह 2.5% गिरकर ₹952 पर आ गया. मैक्स हेल्थकेयर, कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, अदाणी एंटरप्राइजेज, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान इलेक्ट्रॉनिक्स 1.5% से 2.2% तक फिसले. राहत देने वाले शेयर: डॉ. रेड्डीज लैब्स, कोल इंडिया, टीसीएस, एसबीआई लाइफ और एचसीएल टेक्नोलॉजीज बढ़त में रहे. आम निवेशक के लिए इसका क्या मतलब है? बाजार में डर का माहौल साफ दिख रहा है. इंडिया वीआईएक्स, यानी बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीद मापने वाला पैमाना, 11.5% उछलकर 13.54 पर पहुंच गया. एनएसई पर 2,360 शेयर गिर रहे थे, जबकि सिर्फ 708 चढ़ रहे थे. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.1% टूटा, जबकि जापान का निक्केई मामूली 0.02% फिसला. आगे बाजार की चाल पर इन बातों पर नजर रखना काम आएगा: अमेरिका-ईरान की बातचीत में क्या प्रगति होती है कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर के ऊपर टिकती है या नहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ऊपर जाती है या नहीं ये भी पढ़ें: शेयर बाजार में IPO की बंपर बहार, इस हफ्ते आ रहे 20 नए इश्यू, देखें पूरी लिस्ट The post शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 890 अंक टूटा, क्रूड और बॉन्ड यील्ड ने बिगाड़ा स्पोर्ट्स appeared first on Naya Vichar.

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यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; भारत भी बना रहा ऐसी तकनीक

यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस के खिलाफ जारी जंग में रोबोट सैनिकों की मदद से 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए और 3000 सैनिक मारे गए. इसके साथ-साथ रोबोट सैनिकों ने करीब 3,300 टन सामानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भी पहुंचाया. अगर रूस का दावा सही है तो इसका संकेत ये है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब जमीनी रोबोट युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं. यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवरहित जमीनी वाहनों यानी सुसाइड रोबोट का इस्तेमाल किया. इन रोबोट को ड्रोन की मदद से रूसी सेना के कब्जे वाले इलाकों के भीतर पहुंचाया गया और फिर उन्हें अलग-अलग सैन्य अभियानों में लगाया गया. कॉर्प्स का कहना है कि कई इलाकों में रोबोट ने सैनिकों की जगह खतरनाक काम किए. क्या है ऑपरेशन विवाल्डी? यूक्रेन के मुताबिक, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ (Operation Vivaldi) डोनेट्स्क क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में चलाया गया सैन्य अभियान है. इसका मकसद रूसी घुसपैठ को रोकना और कुछ इलाकों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना था. यूक्रेनी कमांडर आंद्री बिलेत्स्की ने इस अभियान में ड्रोन और जमीनी रोबोट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को आधुनिक युद्ध की नई दिशा बताया है. कैसे काम करते हैं सुसाइड रोबोट? सुसाइड रोबोट असल में छोटे मानवरहित जमीनी वाहन (Robot Soldiers) होते हैं. इन्हें ऑपरेटर दूर बैठकर नियंत्रित कर सकता है. रोबोटों में विस्फोटक लगाए जाते हैं, जिन्हें लक्ष्य के पास पहुंचाकर विस्फोट किया जाता है। यूक्रेन में ऐसे रोबोटों को भारी ड्रोन की मदद से रूसी मोर्चे के पीछे पहुंचाने की रणनीति भी सामने आई है. रोबोट में लगे कैमरे आसपास का दृश्य दिखाते हैं. इससे सैनिकों को सीधे खतरनाक इलाके में भेजने की जरूरत कम हो सकती है. जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरी तरह ‘अपने आप लड़ने वाले रोबोट’ नहीं है, इन्हें चलाने, लक्ष्य चुनने और कार्रवाई का फैसला लेने में इंसान की भूमिका होती है. यूक्रेनी थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, रोबोट का इस्तेमाल केवल हमले के लिए नहीं हुआ. इन्हें गोला-बारूद और दूसरे जरूरी सामान की सप्लाई, घायल सैनिकों को निकालने और बारूदी सुरंग वाले इलाकों में रास्ता साफ करने जैसे कामों में भी लगाया गया. कॉर्प्स का दावा है कि कुछ इलाकों में जमीनी रोबोट ने करीब 30 किलोमीटर रास्ते साफ किए. यूक्रेन का कहना है कि इससे सैनिकों का जोखिम कम हुआ. ये भी पढ़ें: UNSC में हिंदुस्तान की परमानेंट सदस्यता को रूस का समर्थन, जापान का किया विरोध, कहा-संगठन में और पश्चिमी देशों की जरूरत नहीं रोबोट्स की सेना तैयार कर रही यूक्रेन! मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,रूस-यूक्रेन जंग में लाखों सैनिक मारे गए है. हालांकि, संख्याओं को लेकर कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं है. ऐसे में,यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में सैनिकों की जान बचाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने ल्वीव में हुए आईटी एरीना कार्यक्रम में ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ शुरू करने का ऐलान किया है. इस योजना के तहत ऐसी मशीनें तैयार की जाएगी, जो युद्ध के दौरान उन कामों को कर सकें, जिनमें सैनिकों की जान को सबसे ज्यादा खतरा रहता है. यह पहला मौका नहीं है जब जंग में यूक्रेन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा. यूक्रेन ने 2022 में आर्मी ऑफ ड्रोन अभियान शुरू किया था. जिसके बाद उसका ध्यान जमीन पर चलने वाले रोबोट पर है. इन रोबोट का इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जा सकता है. मसलन, घायल सैनिकों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाना, गोला-बारूद और जरूरी सामान पहुंचाना, दुश्मन के इलाके की निगरानी करना और बारूदी सुरंगों वाले खतरनाक इलाकों में काम करना.. रोबोट को केवल हमला करने वाली मशीन के तौर पर तैयार नहीं किया जा रहा. यूक्रेन ऐसी तकनीक विकसित करना चाहता है, जो युद्ध के दौरान सैनिकों का जोखिम कम कर सके. मसलन, अगर किसी इलाके में गोलीबारी हो रही है और वहां सामान पहुंचाना मुश्किल है, तो रोबोट वहां भेजा जा सकता है. इसी तरह घायल सैनिक को निकालने के लिए भी मानव रहित वाहन का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये भी पढ़ें: UAPA में गिरफ्तारी से बेल तक…कौन है मैथ्यू? जिसके अमेरिका लौटने पर घिरी मोदी प्रशासन हिंदुस्तान भी बना रहा है सुसाइड रोबोट जमीनी रोबोट की तकनीक पर सिर्फ यूक्रेन ही काम नहीं कर रहा है. उसके अलावा रूस, चीन, इजराइल और हिंदुस्तान भी इस तकनीक पर काम कर रहा है. हिंदुस्तान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO भी मानवरहित जमीनी वाहनों (सुसाइड रोबोट) के लिए एआई आधारित नियंत्रण, स्वचालित नेविगेशन, सेंसर और स्वार्म तकनीक पर काम चल रहा है. डीआरडीओ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक सुसाइड रोबोट को निगरानी, विस्फोटक पहुंचाने और खतरनाक उपकरणों को दूर से नष्ट करने जैसे कामों के लिए डिजाइन किया जा रहा है.  रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान ने ‘एक्सप्लोडर’ नाम का एक ऐसा रोबोट वाहन तैयार किया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने में सक्षम है. इसके साथ-साथ, निगरानी करने और विस्फोटकों से जुड़े खतरनाक काम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. रूस में रोबोट सैनिकों का इस्तेमाल हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए हो रहा है. चीन ऐसे रोबोट पर काम कर रहा है, जो जंग के दौरान हथियार ले जाने और आम सैनिकों के साथ मिलकर काम करने में सक्षम हो तो वहीं, इजराइल रोबोट से चलने वाले लड़ाकू वाहन डेवलप कर रहा है.  The post यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; हिंदुस्तान भी बना रहा ऐसी तकनीक appeared first on Naya Vichar.

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न शादी हुई, न मोहब्बत मुकम्मल… फिर क्यों लता मंगेशकर की मांग में दिखता था सिंदूर?

Lata Mangeshkar की आवाज में दर्द सुनकर करोड़ों लोग रोए होंगे. उन्होंने मोहब्बत के ऐसे नगमे गाए, जिनमें बिछड़ना था, इंतजार था, तड़प थी और किसी अपने के खो जाने का दर्द था. लेकिन उनकी अपनी जिंदगी में भी शायद एक ऐसी कहानी थी, जिसे उन्होंने कभी पूरा शब्द नहीं दिया. एक ऐसी कहानी, जिसमें शादी नहीं थी, लेकिन मांग में सिंदूर था. एक ऐसा रिश्ता था, जिसका नाम दुनिया जानती थी, लेकिन उसकी पूरी सच्चाई शायद सिर्फ दो दिल जानते थे. और एक ऐसा करियर था, जिसने धीरे-धीरे उनकी पूरी जिंदगी को अपने नाम कर लिया. बिना शादी के मांग में सिंदूर, उठने लगे सवाल लता मंगेशकर की मांग में सिंदूर देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता था- आखिर वह किसके नाम का सिंदूर लगाती हैं? शादी तो उन्होंने कभी की नहीं. फिर एक दिन अभिनेत्री तबस्सुम ने सीधे उनसे यही सवाल पूछ लिया. लता जी ने सवाल सुना, मुस्कुराईं और तबस्सुम को प्यार से चपत लगाई. फिर ऐसा जवाब दिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी का राज जैसे एक ही वाक्य में खोल दिया. उनके लिए संगीत ही परमेश्वर था, भगवान था, गॉड था. यानी उनकी मांग का सिंदूर किसी पति के नाम का नहीं, संगीत के नाम का था. जब सिंदूर को संगीत से जोड़ दिया जिस समाज में किसी स्त्री की मांग में सिंदूर देखते ही लोग उसके पति का नाम तलाशने लगते हैं, वहां लता मंगेशकर ने अपने सिंदूर का रिश्ता किसी इंसान से नहीं, अपने संगीत से जोड़ दिया. लेकिन क्या सचमुच उनकी जिंदगी में प्रेम नहीं था? यह सवाल यहीं से और दिलचस्प हो जाता है. वो नाम, जिसे दुनिया प्यार से जोड़ती रही लता मंगेशकर की जिंदगी में राज सिंह डूंगरपुर का नाम लंबे समय तक जुड़ा रहा. राज सिंह डूंगरपुर राजस्थान के राजघराने से थे और हिंदुस्तानीय क्रिकेट से भी उनका गहरा रिश्ता रहा. दोनों की नजदीकियों की चर्चा 1960 के दशक से होती रही. कहा गया कि दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे. शादी की बातें भी हुईं. लेकिन शादी नहीं हुई. अधूरे रिश्ते की वजह क्या थी, सच्चाई कभी सामने नहीं आई इस रिश्ते को लेकर वर्षों तक कई कहानियां सामने आती रहीं. सबसे ज्यादा चर्चित कहानी यही थी कि राज सिंह के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. लेकिन इस दावे पर सार्वजनिक स्रोतों में पूरी तरह एकमत तस्वीर नहीं मिलती. शायद इसलिए लता जी ने भी कभी इस रिश्ते की पूरी कहानी दुनिया के सामने नहीं रखी. ‘कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है’ जब उनसे प्यार के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने एक ऐसी बात कही, जो उनके व्यक्तित्व के बिल्कुल मुताबिक थी. दिल की कुछ बातें सिर्फ दिल जानता है. बस. इतना कहकर उन्होंने उस दरवाजे को फिर बंद कर दिया. न कोई शिकायत. न किसी पर आरोप. न कोई सफाई. सिर्फ एक अधूरा सा जवाब. राज सिंह ने भी माना था- वो चीज बस हो नहीं पाई राज सिंह डूंगरपुर ने भी 2004 में अपने रिश्ते को लेकर बात की थी. उन्होंने कहा था कि दोनों अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आते थे और दोनों अपने-अपने परिवारों से बहुत जुड़े हुए थे. उनके शब्दों में, वह चीज बस हो नहीं पाई. शायद यही इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा है. कुछ रिश्ते टूटते नहीं हैं. बस पूरे नहीं हो पाते. लेकिन लता की कहानी सिर्फ अधूरे प्यार की कहानी नहीं थी लता मंगेशकर की कहानी को सिर्फ एक अधूरी प्रेम कहानी कहना भी उनके साथ नाइंसाफी होगी. क्योंकि उनकी जिंदगी में जिम्मेदारियां प्यार से बहुत पहले आ गई थीं. जब वह सिर्फ 13 साल की थीं, उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया. घर में परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई. 13 की उम्र से ही कंधे पर आया परिवार का बोझ लता ने काम शुरू किया. फिल्मों में अभिनय किया. गाने गाए. स्टूडियो के चक्कर लगाए. और उस उम्र में काम किया, जिस उम्र में बाकी शिशु स्कूल और स्पोर्ट्स की दुनिया में होते हैं. उनकी शुरुआती जिंदगी में पैसे की इतनी कमी थी कि उन्होंने खुद बताया था कि वह बस का किराया बचाने के लिए पैदल चलती थीं. जिंदगी का पहला गाना ही फिल्म से कट गया था जिस आवाज ने आगे चलकर दुनिया को मंत्रमुग्ध किया, उसकी पहली playback recording तक फिल्म से काट दी गई थी. यानी जिस आवाज को बाद में लोग देवी का स्वर कहेंगे, उसे शुरुआत में खुद अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. शायद इसी संघर्ष ने उनकी जिंदगी का रास्ता तय कर दिया. एक तरफ परिवार, दूसरी तरफ संगीत बीच में आया प्यार एक तरफ परिवार था. दूसरी तरफ संगीत. और बीच में शायद प्यार भी आया. लेकिन जिंदगी ने किसी एक चीज को चुनने का आसान विकल्प नहीं दिया. लता मंगेशकर ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने 13 साल की उम्र से काम शुरू कर दिया था और परिवार की जिम्मेदारी इतनी बड़ी थी कि शादी के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें अकेले रहने का अफसोस नहीं था. शादी क्यों नहीं की? लता ने खुद दिया था जवाब दुनिया उनकी जिंदगी में इस सवाल का जवाब तलाशती रही- लता जी ने शादी क्यों नहीं की? लेकिन शायद लता जी के लिए सवाल कुछ और था- क्या हर जिंदगी को पूरा होने के लिए शादी जरूरी है? उन्होंने इस सवाल का जवाब अपने तरीके से दिया. उन्होंने शादी नहीं की. लेकिन उन्होंने करोड़ों लोगों के दिल में ऐसी जगह बनाई, जिसे शायद कोई रिश्ता छीन नहीं सकता था. जिन गानों में दुनिया ने अपना प्यार खोजा, उनमें लता की कहानी भी थी उन्होंने मोहब्बत के हजारों गीत गाए. “अजीब दास्तां है ये…” “लग जा गले…” “आपकी नजरों ने समझा…” “कहीं दीप जले कहीं दिल…” दुनिया ने इन गीतों में अपना प्यार खोजा. लेकिन शायद बहुत कम लोगों ने यह सोचा कि इन गीतों को गाने वाली औरत अपने भीतर क्या लेकर गा रही थी. अधूरी कहानी थी या संगीत ही उनका सबसे बड़ा प्रेम? क्या कोई अधूरी कहानी थी? क्या कोई ऐसा नाम था जिसे उन्होंने कभी सार्वजनिक नहीं किया? या फिर

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