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Author name: Vinod Jha

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18 अगस्त से पटना में आमरण अनशन करेंगे छात्र, TRE-4, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा समेत कई हैं मांगें

BPSC TRE-4 Teacher Protest: बिहार में Bpsc TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज होने जा रहा है. TRE-4 का विज्ञापन जारी करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने 18 अगस्त 2026 से पटना में आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है. आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में TRE-4 का विज्ञापन तत्काल जारी करना और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग शामिल है. TRE-4 के विज्ञापन में देरी से अभ्यर्थियों में नाराजगी छात्र नेता दिलीप के नेतृत्व में अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के चौथे चरण TRE-4 के विज्ञापन में लगातार देरी हो रही है. लंबे समय से अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है. मई में भी पटना में हुआ था प्रदर्शन TRE-4 के विज्ञापन की मांग को लेकर मई 2026 में भी पटना में अभ्यर्थियों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ था. इसके बाद भी अभ्यर्थियों की ओर से भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग लगातार उठायी जाती रही है. 25 जुलाई तक BPSC को अधियाचना भेजने का दिया गया था निर्देश जुलाई में शिक्षा विभाग की ओर से TRE-4 की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही गयी थी. 7 जुलाई को हुई समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को 25 जुलाई तक बीपीएससी को अधियाचना भेजने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि TRE-4 का विज्ञापन अब तक जारी नहीं किया गया है. 18 अगस्त से पटना में आमरण अनशन अभ्यर्थियों ने अब अपनी मांगों को लेकर 18 अगस्त से पटना में आमरण अनशन शुरू करने का निर्णय लिया है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक TRE-4 का विज्ञापन जारी करने समेत प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती है, तब तक आंदोलन जारी रखा जायेगा. अभ्यर्थियों की ओर से शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग भी उठायी जा रही है. उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी को लेकर प्रशासन को जवाब देना चाहिए. दिल्ली और झारखंड के बाद बिहार में आंदोलन की तैयारी TRE-4 से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों की आवाज अब बिहार के बाहर भी उठ रही है. दिल्ली और झारखंड में प्रदर्शन के बाद अब बिहार में आंदोलन तेज करने की तैयारी है. अभ्यर्थियों ने 18 अगस्त से पटना में आमरण अनशन का ऐलान किया है. आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रशासन को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए और रिक्त पदों की जानकारी के साथ जल्द से जल्द TRE-4 का विज्ञापन जारी करना चाहिए. 46 हजार पदों को लेकर भी सवाल TRE-4 में संभावित रिक्तियों को लेकर भी अभ्यर्थियों में असंतोष है. पहले करीब 46 हजार पदों पर भर्ती की चर्चा हुई थी. अब पदों की संख्या को लेकर भी अभ्यर्थियों की ओर से सवाल उठाये जा रहे हैं. अभ्यर्थियों की मांग है कि प्रशासन रिक्त पदों की स्पष्ट संख्या सार्वजनिक करे और पारदर्शी तरीके से भर्ती का पूरा कार्यक्रम जारी करे. आमरण अनशन के ऐलान से बढ़ सकता है दबाव TRE-4 को लेकर पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं. मई में पटना में हुए प्रदर्शन के बाद अब 18 अगस्त से आमरण अनशन के ऐलान ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ा दिया है. अब सभी की नजर 18 अगस्त से शुरू होने वाले आंदोलन और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर रहेगी. इसे भी पढ़ें: Bihar Prohibition Success Story: शराब ने छीना सब कुछ, जीविका दीदी की मदद और नशामुक्ति से यूं बदली ललन सिंह की जिंदगी The post 18 अगस्त से पटना में आमरण अनशन करेंगे छात्र, TRE-4, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा समेत कई हैं मांगें appeared first on Naya Vichar.

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PM मोदी ने सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर से फोन पर जाना हाल

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर बृहस्पतिवार (13 अगस्त) को महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित एक गुरुद्वारे में हमला हुआ. जानकारी के मुताबिक, एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया, जिसमें उनके हाथ में गंभीर चोट आई. घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. PM मोदी ने जाना हाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुखबीर बादल की पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल से फोन पर बात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. प्रधानमंत्री ने सुखबीर बादल के जल्द स्वस्थ होने की कामना की. परिवार के साथ पहुंचे थे बताया जा रहा है कि सुखबीर सिंह बादल अपने परिवार के साथ गुरुद्वारे पहुंचे थे. इसी दौरान आरोपी ने उन पर हमला कर दिया. घटना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. ये भी पढ़ें: सुखबीर सिंह बादल पर किसने किया हमला ? सीएम फडणवीस ने दिया जांच का आदेश The post PM मोदी ने सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर से फोन पर जाना हाल appeared first on Naya Vichar.

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Air India का फैसला, अब उड़ान से पहले सभी पायलटों का होगा ड्रग टेस्ट

एयर इंडिया ने बृहस्पतिवार( 13 अगस्त) को अहम फैसला लेते हुए अपने सभी पायलटों की ड्रग और प्रतिबंधित पदार्थों की स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, यह कदम पायलट का मारिजुआना (गांजा) टेस्ट पॉजिटिव आने की पुष्टि 11 अगस्त 2026 को सामने आई थी बाद उठाया गया है. इसके बाद एयर इंडिया की ओर से यह कदम उठाया गया. 4 अगस्त को फुकेत-दिल्ली जा रही AI2379 फ्लाइट क्रूज के दौरान अचानक करीब 300 फीट नीचे गिर गई थी. इस घटना में चार क्रू सदस्यों समेत 24 लोग घायल हुए थे.एयर इंडिया ने शुरुआती बयान में इसके पीछे टर्बुलेंस (हवा या पानी की वह अशांत और अनियमित गति है जो दबाव और वेग (स्पीड) में अचानक बदलाव के कारण पैदा होती है) को वजह बताया था. कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव घटना के बाद फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड (PIC) का ड्रग टेस्ट कराया गया. कन्फर्मेटरी टेस्ट में कैप्टन के शरीर में मारिजुआना की मौजूदगी की पुष्टि हुई. इसके बाद एयरलाइन ने पायलटों की सुरक्षा जांच को और सख्त करने का फैसला किया. DGCA के नियमों से भी आगे जाएगी एयरलाइन एयर इंडिया ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा कि वह नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के मौजूदा नियमों का पूरी तरह पालन करती है, लेकिन अब सुरक्षा के लिए उससे भी आगे जाने की जरूरत महसूस हुई है. एयरलाइन का कहना है कि यात्रियों का भरोसा उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. 13 अगस्त से शुरू हुई अनिवार्य जांच एयर इंडिया ने कहा कि 13 अगस्त 2026 से सभी ग्रुप पायलटों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है. इसमें ऐसे पदार्थों या दवाओं की जांच होगी, जिनकी मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है. यह टेस्ट अनिवार्य होगा. अलग-अलग जगहों पर होगी स्क्रीनिंग पायलटों की जांच गुरुग्राम एकेडमी में ट्रेनिंग के दौरान, उड़ान के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर या एयर इंडिया ऑफिस में, अथवा संबंधित बेस पर तय स्थानों पर की जाएगी. एयरलाइन ने कहा कि इसका उद्देश्य सुरक्षा और पेशेवर मानकों को और मजबूत करना है. यात्रियों का भरोसा सबसे अहम एयर इंडिया ने कहा कि उसके पायलटों की प्रोफेशनल क्षमता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने दशकों से लाखों यात्रियों का भरोसा कायम किया है. एयरलाइन अब हर संभव कदम उठाकर इस भरोसे को बनाए रखना चाहती है. कंपनी ने साफ किया कि यात्रियों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है. ये भी पढ़ें: 1 लाख करोड़ का डिफेंस एग्रिमेंट: 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदेगा हिंदुस्तान; टाटा, महिंद्रा और HAL रेस में The post Air India का फैसला, अब उड़ान से पहले सभी पायलटों का होगा ड्रग टेस्ट appeared first on Naya Vichar.

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सुखबीर सिंह बादल पर किसने किया हमला ? सीएम फडणवीस ने दिया जांच का आदेश

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर एक निहंग ने कृपाण से हमला किया. हमले में सुखबीर बादल के दाएं हाथ में चोट आई है. बादल के साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को मौके पर ही दबोच लिया और आगे की पूछताछ के लिए स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया. सुखबीर बादल पर हमला करने वाला कौन है? हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सुखबीर बादल पर हमला करने वाला नीले रंग का कपड़ा पहने हुए था. उसकी उम्र करीब 60-65 वर्ष बताई गई है. उसकी व्यक्तिगत पहचान अभी उजागर नहीं की गई है. हमलावर पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है. आरोपी निहंग गुरुद्वारे में सेवादार के रूप में कार्यरत था. निहंग क्या है? निहंग सिख धर्म का एक योद्धा संप्रदाय है. इन्हें सिख पंथ के रक्षक के रूप में जाना जाता है. निहंग शब्द फारसी भाषा के शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है निडर. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हमले की जांच का आदेश दिया महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच का आदेश दिया. फडणवीस ने बादल को फोन किया और उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा. मुख्यमंत्री ने पुलिस को इस हमले के पीछे की मंशा का पता लगाने का निर्देश दिया. ये भी पढ़ें: पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती ; आरोपी गिरफ्तार The post सुखबीर सिंह बादल पर किसने किया हमला ? सीएम फडणवीस ने दिया जांच का आदेश appeared first on Naya Vichar.

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चांदीपुरा वायरस: गुजरात में 5 सप्ताह में 25 बच्चों की मौत, जानें इलाज और बचाव के उपाय

गुजरात प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा प्रकोप में अब तक 39 बच्चों में चांदीपुरा वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 25 बच्चों की मौत हो चुकी है. हजारों सैंपल फेल, मुख्य वाहक में नहीं मिला वायरस चांदीपुरा वायरस सैंडफ्लाई (रेत मक्खी या बालू मक्खी) के काटने से फैलता है. जो मुख्य रूप से कच्चे/मिट्टी के घरों की दरारों और मवेशियों के आसपास पाई जाती है. 30 जून से शुरू हुए इस प्रकोप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया. रिसर्च करने वालों ने हजारों की संख्या में सैंडफ्लाई के सैंपल इकट्ठे किए. जब उनमें वायरस नहीं मिला, तो जांच का दायरा बढ़ाते हुए मच्छरों और किल्लियों (Ticks) के भी सैंपल लिए गए. लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आई है. 2024 में भी चांदीपुरा वायरस ने बरपाया था कहर इससे पहले 2024 में भी चांदीपुरा वायरस का प्रकोप देखने को मिला था. उस दौरान भी 78 संदिग्ध बच्चों में से 28 की मौत हो गई थी, और व्यापक जांच के बावजूद वैज्ञानिक वायरस के मुख्य स्रोत को ढूंढने में नाकाम रहे थे. शोधकर्ताओं के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब सभी ज्ञात वाहकों में वायरस मौजूद नहीं है, तो यह मासूम बच्चों तक कैसे पहुंच रहा है और कहां पनप रहा है. फिलहाल राज्य प्रशासन और केंद्रीय स्वास्थ्य टीमों द्वारा निगरानी और शोध का काम तेजी से जारी है. चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बारे में जानें वायरस का परिवार: यह रैबडोविराइडे (Rhabdoviridae) परिवार का सदस्य है. प्रभावित क्षेत्र और समय: हिंदुस्तान के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान यह एईएस (AES) के मामले और आउटब्रेक पैदा करता है. कैसे फैलता है: यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी), मच्छरों और किल्लनी (Ticks) जैसे कीटों के काटने से फैलता है. चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है? इस संक्रमण में मृत्यु दर काफी अधिक (56% से 75%) होती है. वर्तमान में इसका कोई सटीक इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. सही समय पर अस्पताल पहुंचने और सही इंटेन्सिव सपोर्टिव केयर से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है. चांदीपुरा वायरस से बचाव के उपाय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कुछ जरूरी उपाय करने से चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है. कीट नियंत्रण : जमा पानी और गंदगी को साफ रखना ताकि मच्छर और सैंडफ्लाई न पनप सकें. काटने से बचाव: मच्छरों, सैंडफ्लाई और किल्लनी के काटने से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें और रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करें. ये भी पढ़ें: क्या आपका शरीर भी दे रहा है वॉर्निंग? इन 6 संकेतों को समझना है बेहद जरूरी The post चांदीपुरा वायरस: गुजरात में 5 सप्ताह में 25 बच्चों की मौत, जानें इलाज और बचाव के उपाय appeared first on Naya Vichar.

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हाजीपुर ठेकेदार हत्याकांड की पूरी कहानी, दो बाइक से पहुंचे थे आरोपी, 10 सेकेंड में मारी 5 गोलियां, तस्वीरों से समझिए पूरा घटनाक्रम

Hajipur Contractor Murder Case : हाजीपुर के दीग्गी इलाके में सुबह 5:12 बजे ठेकेदार रामनरेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई. दो बाइक पर सवार पांच हमलावरों ने 10 सेकेंड में 5 गोलियां दागी. यह घटनाक्रम तस्वीरों के जरिए बयां किया गया है. The post हाजीपुर ठेकेदार हत्याकांड की पूरी कहानी, दो बाइक से पहुंचे थे आरोपी, 10 सेकेंड में मारी 5 गोलियां, तस्वीरों से समझिए पूरा घटनाक्रम appeared first on Naya Vichar.

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एनआरएस अस्पताल के शौचालय में मिला नर्स का शव, पति ने जतायी गड़बड़ी की आशंका

NRS Hospital Nurse Death Kolkata: कोलकाता के नीलरतन सरयकार (NRS) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ऑन-ड्यूटी नर्स रूपाली दास (30) की मौत हो गयी. मृतका के पति राहुल दास ने मौत के कारणों पर संदेह जताते हुए अस्पताल प्रशासन से गुहार लगायी है कि रूपाली के शव का पोस्टमार्टम एनआरएस अस्पताल में न करवाकर किसी अन्य प्रशासनी अस्पताल में कराया जाये. अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि परिजन जहां चाहेंगे, पोस्टमार्टम वहीं कराया जायेगा. रूपाली दास (30) बुधवार रात करीब 8 बजे ड्यूटी पर आयी थी. रात करीब 10:30 बजे स्त्री रोग विभाग भवन के प्रसव-पूर्व वार्ड (Ante-natal Ward) के स्टाफ टॉयलेट में गयी. काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो सहकर्मियों ने शौचालय का दरवाजा तोड़ा शौचालय में फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ी थी रूपाली दास डॉक्टरों ने जांच के बाद रूपाली दास को मृत घोषित कर दिया रूपाली के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं, एनेस्थेटिक दवा के ओवरडोज की आशंका रूपाली दास के पास से नहीं मिला है कोई सुसाइडल नोट स्वास्थ्य मंत्री और शीर्ष पुलिस अधिकारी पहुंचे एनआरएस गुरुवार दोपहर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी एनआरएस अस्पताल पहुंचे. स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल प्रशासन, वरिष्ठ डॉक्टरों और बुधवार रात ड्यूटी पर मौजूद अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से बात कर पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ली. मंत्री के साथ कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल भी मौके पर मौजूद था. लालबाजार की होमीसाइड शाखा (Homicide Squad) ने जांच शुरू कर दी है. कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल और डीसी (ईस्ट सब-अर्बन) सुविमल पाल ने भी घटनास्थल का दौरा किया. ये भी पढ़ें: कोलकाता में अस्पताल के लिफ्ट में फंसने से एक व्यक्ति की मौत, पांचवीं मंजिल पर भर्ती था बेटा 3 क्राइम सीन किये गये सील, सीसीटीवी फुटेज की जांच अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल ने बताया कि घटना से जुड़े कुल 3 स्थानों (क्राइम सीन) को सील कर दिया गया है. पुलिस को मौके से एक स्ट्रेचर मिला है. अस्पताल के प्रसव-पूर्व वार्ड (HDU) व आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. फेंटानिल के 3 वायल लेकर शौचालय में गयी थी नर्स अस्पताल और पुलिस सूत्रों ने बताया है कि दमदम की रहने वाली रूपाली की बुधवार रात 8 बजे एनआरएस के स्त्री रोग विभाग के एचडीयू (HDU) में नाइट ड्यूटी शुरू हुई थी. रात करीब 10:20 बजे वह टॉयलेट में गयी. काफी देर तक बाहर न आने पर 10:27 बजे सहकर्मियों ने दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब न मिलने पर दरवाजा तोड़ दिया. वह अंदर अचेत पड़ी थी. डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. ये भी पढ़ें: आरजी कर अस्पताल की लिफ्ट में मौत पर बवाल, शुभेंदु अधिकारी का ममता बनर्जी प्रशासन पर वार एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेने की आशंका अस्पताल सूत्रों का कहना है कि ड्यूटी पर आने के बाद रूपाली अपने साथ फेंटानिल (Fentanyl) की 3 वायल लेकर टॉयलेट में गयी थी. यह दवा मरीजों को बेहोश करने या नींद के लिए इस्तेमाल की जाती है. डॉक्टरों का अनुमान है कि यह दवा उसकी कोहनी की नस में इंजेक्ट की गयी थी. हालांकि, उसने फेंटानिल की 3 वायल खुद ली या मामला कुछ और है, इसका पता नहीं चल पाया है. मृतका के पास से उसका मोबाइल बरामद हुआ है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा. The post एनआरएस अस्पताल के शौचालय में मिला नर्स का शव, पति ने जतायी गड़बड़ी की आशंका appeared first on Naya Vichar.

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पारसनाथ पहाड़ पर निर्माण वैध है या अवैध? जांच करेगा प्रशासन, हाइकोर्ट ने दिया निर्देश

Jharkhand High Court: जैन धर्म के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पारसनाथ पहाड़ और इसके आसपास के क्षेत्र को संरक्षित करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने ज्योत संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुना. अदालत ने पारसनाथ पहाड़ और आसपास के इलाके में किये जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर गिरिडीह के उपायुक्त को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. निर्माण की वैधता जांचने का निर्देश खंडपीठ ने गिरिडीह के उपायुक्त को पारसनाथ पहाड़ और आसपास के क्षेत्र का स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया जाये कि संबंधित निर्माण कार्य वैध हैं या अवैध. उपायुक्त को निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर 3 सितंबर तक हाइकोर्ट में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट में स्पष्टता नहीं सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि पारसनाथ पहाड़ पर किये गये निर्माण कार्यों को लेकर गिरिडीह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पहले ही रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है. हालांकि, खंडपीठ ने पाया कि रिपोर्ट में निर्माण कार्यों की वैधता को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती है. अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहाड़ और आसपास के इलाके में किये गये निर्माण संबंधित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं. केवल निर्माण का उल्लेख कर देना पर्याप्त नहीं है. निर्माण वैध है या अवैध, इसकी स्पष्ट जानकारी आवश्यक है. इसी वजह से कोर्ट ने अब गिरिडीह के उपायुक्त को स्वयं स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है. स्थल निरीक्षण के बाद देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार गिरिडीह उपायुक्त को पारसनाथ पहाड़ और आसपास के क्षेत्र में जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करना होगा. निरीक्षण के दौरान निर्माण की स्थिति के साथ-साथ उसकी वैधानिकता की भी जांच करनी होगी. उपायुक्त को यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमति और स्वीकृति प्राप्त की गयी है या नहीं. इसके बाद प्रशासन को अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी. रिपोर्ट के आधार पर हाइकोर्ट आगे इस मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है. पारसनाथ की धार्मिक और पर्यावरणीय महत्ता पारसनाथ पहाड़ जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. धार्मिक महत्व के साथ यह क्षेत्र प्राकृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में पहाड़ और उसके आसपास अनियंत्रित या नियमों के विपरीत निर्माण को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. जनहित याचिका के माध्यम से पारसनाथ पहाड़ के संरक्षण और क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों को लेकर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया गया है. अब हाइकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर स्थल निरीक्षण और निर्माण की वैधता की जांच की जायेगी. इसे भी पढ़ें: जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति विवाद में हाईकोर्ट का फैसला: बोर्ड की योजना के अध्ययन के लिए बनाई समिति 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई अदालत ने गिरिडीह उपायुक्त को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी. उस दिन अदालत के समक्ष उपायुक्त की रिपोर्ट रखी जायेगी, जिसके आधार पर पारसनाथ पहाड़ और आसपास के क्षेत्र में निर्माण को लेकर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है. फिलहाल, हाइकोर्ट का निर्देश इस बात पर केंद्रित है कि पारसनाथ पहाड़ जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर किये गये निर्माण की वास्तविक स्थिति और उसकी वैधता स्पष्ट रूप से सामने आये. यानी कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, इस बार कोर्ट ने प्रशासन को मौके पर जाकर हकीकत देखने को कहा है. इसे भी पढ़ें: रांची के मधुकम वाले महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी लगा करारा झटका, आदिवासी जमीन मामले में एसएलपी खारिज The post पारसनाथ पहाड़ पर निर्माण वैध है या अवैध? जांच करेगा प्रशासन, हाइकोर्ट ने दिया निर्देश appeared first on Naya Vichar.

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80 से ज्यादा एनकाउंटर, STF-ATS के संस्थापक सदस्य कौन हैं पूर्व IPS राजेश पांडेय, जो राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की रेस में आगे?

Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंगलवार और बुधवार को उम्मीदवारों के इंटरव्यू हुए, जिसमें तीन लोगों का नाम शॉर्टलिस्ट किया गया है. इस पद के दावेदारों में उत्तर प्रदेश के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम भी शामिल है. राजेश पांडेय का पुलिस करियर काफी चर्चित रहा है. उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर जाना जाता है. पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने 80 से ज्यादा एनकाउंटर किए. वह यूपी पुलिस की खास यूनिट STF और ATS के संस्थापक सदस्य अधिकारियों में भी रहे हैं. 32 साल तक यूपी पुलिस में दी सेवा राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के 2003 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं. वह प्रमोशन के जरिए IPS बने थे. इससे पहले वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए उनका चयन PPS अधिकारी के रूप में हुआ था. 21 फरवरी 1989 को उन्हें यूपी पुलिस में DSP के पद पर तैनाती मिली. प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर जिम्मेदारी संभालने के बाद वर्ष 2003 में वह IPS बने. राजेश पांडेय बरेली रेंज के IG भी रहे. करीब 32 साल की पुलिस सेवा के बाद 30 जून 2021 को वह IG-इलेक्शन सेल के पद से रिटायर हुए. लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में 80 से ज्यादा एनकाउंटर राजेश पांडेय की पहचान एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में रही है. लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में SSP रहते हुए उन्होंने 80 से ज्यादा एनकाउंटर किए.वह उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के संस्थापक सदस्य अधिकारियों में भी रहे. आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ अभियानों में उन्हें लंबा अनुभव रहा है. मोबाइल फोन के इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में भी उन्हें विशेषज्ञता हासिल रही है. श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ अभियान रहा चर्चित राजेश पांडेय के पुलिस करियर में कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ चलाया गया अभियान खास तौर पर चर्चित रहा.श्रीप्रकाश शुक्ला पर बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद और पूर्वी उत्तर प्रदेश के माफिया वीरेंद्र कुमार शाही समेत कई लोगों की हत्या में शामिल होने के आरोप थे. उस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप था.राजेश पांडेय ने यूपी में संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ कई अहम अभियानों में भूमिका निभाई. चार बार राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित पुलिस सेवा के दौरान राजेश पांडेय को चार बार राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित किया गया.वर्ष 2005 में उन्हें सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति का IPS पदक मिला. वर्ष 2008 में कोसोवो में शांति स्थापना मिशन के लिए संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया. वर्ष 2018 और 2020 में उन्हें यूपी DGP की सिल्वर कमेंडेशन डिस्क मिली. वर्ष 2021 में उन्हें यूपी DGP की प्लेटिनम डिस्क से सम्मानित किया गया. रिटायरमेंट के बाद UPEIDA से जुड़े रिटायरमेंट के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने राजेश पांडेय को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का नोडल सुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया. वर्ष 2023 में उन्होंने पत्रकार और मीडिया-स्टडीज के प्रोफेसर राकेश गोस्वामी के साथ मिलकर अपनी पहली किताब ‘ऑपरेशन बाजूका’ लिखी. यूट्यूब पर सुनाते हैं पुलिस ऑपरेशन की कहानियां पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद राजेश पांडेय अपने अनुभवों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. वह यूट्यूब के जरिए पुलिस अभियानों और अपने अनुभवों से जुड़ी कहानियां भी साझा करते हैं. अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के उम्मीदवार के रूप में उनका नाम सामने आया है. ऐसे में उनके लंबे पुलिस करियर और प्रशासनिक अनुभव की भी चर्चा हो रही है. Must Read : यूपी के 14 बीघा प्रशासनी जमीन से हटाया गया अवैध कब्जा, अब यहां संवरेगा संभल के बेरोजगारों का भविष्य The post 80 से ज्यादा एनकाउंटर, STF-ATS के संस्थापक सदस्य कौन हैं पूर्व IPS राजेश पांडेय, जो राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की रेस में आगे? appeared first on Naya Vichar.

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रविशंकर प्रसाद का राहुल गांधी पर हमला, कहा- LOP के अहंकार और मनमानी की भेंट चढ़ गया मानसून सत्र

रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा, “राहुल गांधी अपनी बहन के साथ बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रधानमंत्री आवास के गेट पर धरने पर बैठ गए. उनके पिता, दादी और परदादा देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, ऐसे में उन्हें भली-भांति पता होना चाहिए कि प्रधानमंत्री आवास की क्या गरिमा और महत्व होता है.” क्या राहुल गांधी को शासन-प्रशासन की बुनियादी समझ नहीं है? : रविशंकर प्रसाद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए आगे कहा, “NEET पर एक बड़ा कानून आया और सदन में सिर्फ उसी पर बहस हुई. राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. वे बार-बार कहते रहे कि पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए. क्या राहुल गांधी को शासन-प्रशासन की बुनियादी समझ नहीं है? क्या कभी गृह मंत्री के आदेश पर गोली चलाई जाती है? वहां पुलिस अधिकारी होते हैं; उनसे सलाह-मशविरा करने के बाद ही कार्रवाई की जाती है.” लोकतंत्र में भरोसा रखने वाले लोग कांग्रेस और विपक्ष को कभी माफ नहीं करेंगे : बीजेपी बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, “कांग्रेस ने संसद के इतिहास पर एक काला धब्बा लगाया है. पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया. कांग्रेस और विपक्ष ने जिस तरह की हरकतें की हैं, उन्हें लोकतंत्र में भरोसा रखने वाले लोग कभी माफ नहीं करेंगे. कांग्रेस ने जिस तरह एक के बाद एक शर्तें रखीं और विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी ने पूरे विपक्ष को गुमराह किया, उन्होंने संसद को काम नहीं करने दिया.” लोकसभा अनिश्चिकाल के लिए स्थगित लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दी गई. मॉनसून सत्र में निचले सदन में केवल 19 प्रतिशत ही काम हो पाए. वहीं इस बार एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके. अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा में लगातार गतिरोध बना रहा. इसे दूर करने के लिए विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई. मानसून सत्र के दौरान केवल 28 और 29 जुलाई के दौरान सदन में सामान्य माहौल देखने को मिला जब लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई. ये भी पढ़ें: लोकसभा में हुआ 19% काम, लेकिन यह सबसे खराब प्रदर्शन नहीं; 2010 में सिर्फ 5% चली थी कार्यवाही The post रविशंकर प्रसाद का राहुल गांधी पर हमला, कहा- LOP के अहंकार और मनमानी की भेंट चढ़ गया मानसून सत्र appeared first on Naya Vichar.

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