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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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‘फोर्स 3’ की शूटिंग शुरू, जॉन अब्राहम का एक्शन अवतार फिर आया सामने

Force 3: बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम एक बार फिर अपने दमदार एक्शन अवतार के साथ बड़े पर्दे पर लौटने की तैयारी में हैं. उनकी मच अवेटेड फिल्म ‘फोर्स 3’ की शूटिंग शुरू हो चुकी है. मेकर्स ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इस बात की जानकारी दी, जिसमें जॉन के साथ हर्षवर्धन राणे की झलक भी देखने को मिली है. वीडियो में दिखा एक्शन का दम जारी किए गए वीडियो में जॉन अब्राहम अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहे हैं. हाथ में बंदूक लिए उनका इंटेंस लुक फैंस को काफी पसंद आ रहा है. वहीं, हर्षवर्धन राणे के साथ उनका आमना-सामना कहानी में जबरदस्त टकराव की ओर इशारा करता है. दोनों सितारे शानदार फिजिक और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ एक्शन सीन्स के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं. View this post on Instagram A post shared by John Abraham (@thejohnabraham) वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है कि जब एक अडिग शख्स का सामना एक अडिग ताकत से होता है, तो एक बड़ा तूफान खड़ा होता है. इसी के साथ फिल्म की रिलीज डेट भी सामने आई है. ‘फोर्स 3’ 19 मार्च 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. फ्रेंचाइजी का रहा है शानदार रिकॉर्ड गौरतलब है कि ‘फोर्स’ फ्रेंचाइजी की शुरुआत साल 2011 में हुई थी. पहली फिल्म Force को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था. इसके बाद 2016 में रिलीज हुई Force 2 ने भी बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक प्रदर्शन किया और एक्शन प्रेमियों को खूब पसंद आई. दमदार टीम के साथ लौट रही फिल्म ‘फोर्स 3’ को खुद जॉन अब्राहम प्रोड्यूस कर रहे हैं, जबकि निर्देशन की कमान भाव धूलिया संभाल रहे हैं. फिल्म की कहानी सीमाब हाशमी ने लिखी है. मेकर्स का दावा है कि इस बार फिल्म पहले से ज्यादा बड़े स्केल और हाई-ऑक्टेन एक्शन के साथ दर्शकों के सामने आएगी. फैंस को अब इस फिल्म के अगले अपडेट का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि वीडियो ने पहले ही एक्साइटमेंट बढ़ा दी है. यह भी पढ़ें: 27वें दिन भी नहीं थमी ‘धुरंधर 2’ की रफ्तार, 1100 करोड़ क्लब से बस एक कदम दूर The post ‘फोर्स 3’ की शूटिंग शुरू, जॉन अब्राहम का एक्शन अवतार फिर आया सामने appeared first on Naya Vichar.

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सऊदी-पाकिस्तान के ‘सीक्रेट वॉर पैक्ट’ का खुलासा: क्या ईरान से युद्ध में कूदेगा इस्लामाबाद?

Saudi-Pakistan Secret Defense Pact: ‘ड्रॉप साइट न्यूज’ के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक, इस समझौते में एक ‘कलेक्टिव डिफेंस क्लॉज’ जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि अगर सऊदी अरब पर कोई हमला होता है, तो पाकिस्तान उसे अपने ऊपर हमला मानेगा. रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी सार्वजनिक रूप से ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह सऊदी के साथ हमारे इस समझौते का ध्यान रखे. यह समझौता 1982 के पुराने सैन्य सहयोग का एक बहुत बड़ा और गंभीर विस्तार है. यह 1982 का ‘प्रोटोकॉल ऑन डिफेंस कोऑपरेशन’ समझौता है, जो सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा के लिए अपने लगभग 10,000 सैनिकों को वहां तैनात किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सऊदी राजघराने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था. पाकिस्तान की मजबूरी   हैरानी की बात यह है कि इस समझौते में पाकिस्तान की तरफ से तो सऊदी की रक्षा करने की पूरी गारंटी दी गई है, लेकिन सऊदी अरब पर ऐसी कोई सैन्य मजबूरी नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, यह डील पूरी तरह एकतरफा है. पाकिस्तान अपनी खराब आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सऊदी से मिलने वाली आर्थिक मदद के बदले अपनी सेना देने को तैयार हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसी वजह से इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से परहेज किया था, लेकिन 2025 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच यह डील फाइनल हो गई. शांति वार्ता के बीच सेना की तैनाती जिस वक्त पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए हाई-लेवल बातचीत चल रही थी, ठीक उसी समय सऊदी अरब ने किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और सैनिकों के पहुंचने का ऐलान कर दिया. इस समाचार ने पाकिस्तान की ‘न्यूट्रल’ छवि को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके तुरंत बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच हो रही बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई और अमेरिकी दल वापस लौट गया. इस्लामाबाद में फिर हो सकती है बातचीत एबीसी न्यूज से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह मौजूदा दो हफ्ते के युद्धविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में कुछ बड़ा हो सकता है. ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ और ‘सीएनएन’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत के लिए ‘इस्लामाबाद’ को सबसे मुफीद जगह माना जा रहा है. इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी शामिल हो सकते हैं. ये भी पढ़ें: 49 साल बाद अमेरिका-ईरान के बीच जमी बर्फ पिघलेगी? इस्लामाबाद में दोबारा मिल सकते हैं दोनों देश पाकिस्तान के लिए घरेलू खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान इस जंग में सीधे शामिल होता है, तो उसे देश के अंदर भारी विरोध झेलना पड़ सकता है. पाकिस्तान की जनता में ईरान के प्रति सहानुभूति है, ऐसे में अमेरिका और इजरायल के ब्लॉक के साथ खड़े होना पाकिस्तान के लिए आंतरिक संकट पैदा कर सकता है. हालांकि, ‘ड्रॉप साइट न्यूज’ का कहना है कि फिलहाल यह तैनाती प्रतीकात्मक है, लेकिन समझौते की शर्तों ने पाकिस्तान के हाथ बांध दिए हैं. ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान: जंग अब खत्म होने की कगार पर, जल्द समझौता करना चाहता है तेहरान The post सऊदी-पाकिस्तान के ‘सीक्रेट वॉर पैक्ट’ का खुलासा: क्या ईरान से युद्ध में कूदेगा इस्लामाबाद? appeared first on Naya Vichar.

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AC बंद होते ही कमरा हो जाता है गर्म? अपनाएं ये 5 आसान टिप्स और पाएं लंबी ठंडक

How To Keep Room Cool After AC Is Off: गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर हमारे लिए राहत का सबसे बड़ा साधन बन जाता है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही एयर कंडीशनर बंद किया जाता है, कमरा कुछ ही मिनटों में फिर से गर्म हो जाता है. इसका मुख्य कारण बाहर की गर्म हवा, धूप और कमरे के अंदर मौजूद गर्मी पैदा करने वाले उपकरण होते हैं. सही उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यदि हम कुछ आसान और असरदार टिप्स अपनाएं, तो एयर कंडीशनर बंद होने के बाद भी कमरे में ठंडक लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है और बिजली की बचत भी की जा सकती है. 1. खिड़की-दरवाजे तुरंत बंद करें एयर कंडीशनर बंद करने के बाद सबसे जरूरी काम है कमरे की खिड़कियां और दरवाजे तुरंत बंद करना. अगर इन्हें खुला छोड़ दिया जाए, तो बाहर की गर्म हवा तेजी से अंदर आती है और कुछ ही मिनटों में कमरे का तापमान बढ़ जाता है. इसलिए ठंडक बनाए रखने के लिए कमरे को अच्छी तरह से सील करके रखें. 2. पर्दे या ब्लैकआउट का इस्तेमाल करें धूप कमरे को गर्म करने का सबसे बड़ा कारण होती है. ऐसे में मोटे पर्दे या ब्लैकआउट कर्टेन का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है. ये सूरज की सीधी किरणों को अंदर आने से रोकते हैं और कमरे को लंबे समय तक ठंडा बनाए रखने में मदद करते हैं, खासकर दोपहर के समय. 3. पंखा चालू रखें एयर कंडीशनर बंद करने के बाद पंखा जरूर चलाएं. इससे कमरे में मौजूद ठंडी हवा लगातार घूमती रहती है और आपको ज्यादा देर तक ठंडक महसूस होती है. पंखा हवा को सर्कुलेट करता है, जिससे घुटन भी कम होती है और कमरे का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है. 4. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करें घर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, लैपटॉप, कंप्यूटर और यहां तक कि बल्ब भी गर्मी पैदा करते हैं. जब ये लगातार चलते रहते हैं, तो कमरे का तापमान बढ़ने लगता है. इसलिए जब इनकी जरूरत न हो, तो इन्हें बंद कर दें ताकि अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो. 5. दिन में वेंटिलेशन कंट्रोल करें दिन के समय बाहर की हवा ज्यादा गर्म होती है, इसलिए इस दौरान खिड़कियां बंद रखना बेहतर होता है. वहीं, सुबह जल्दी या रात में जब मौसम थोड़ा ठंडा होता है, तब खिड़कियां खोलकर ताजी हवा अंदर आने दें. इससे कमरे में नेचुरल ठंडक बनी रहती है. यह भी पढ़ें: Fragrant Flowers For Garden: फूलों की खुशबू से महकाएं अपना गार्डन, लगाएं ये पौधे यह भी पढ़ें: गर्मियों में बाइकिंग के लिए चुनें क्रिएटर शशांक के बताए ये चीजें  The post AC बंद होते ही कमरा हो जाता है गर्म? अपनाएं ये 5 आसान टिप्स और पाएं लंबी ठंडक appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीट पर कांटे का मुकाबला, जो जीता वही सिकंदर

मुख्य बातें 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हुई हार-जीत कम अंतर वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में कूचबिहार में केवल 57 वोटों से हुई थी जीत ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें Bengal Election: कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीटों कड़ा मुकाबला है. पिछले चुनावों में भी इन सीटों पर जीत हार का फासला बेहद कम था. राज्य में हुए SIR के बाद यहां समीकरण बदल सकते हैं और परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा, इस बार का चुनाव बड़े मुद्दों और नारों के साथ-साथ बूथ मैनेजमेंट पर भी टिका है. 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल ने 213 और भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में भाजपा और तृणमूल दोनों पार्टियां अपने-अपने वोटरों को बूथ तक ले जाने की जी भर कोशिश कर रही हैं. दोनों पार्टियां एक-एक वोट के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हुई हार-जीत 2021 के चुनावों की बात करें तो 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था. इस बार भी इन्हीं सीटों पर सभी की नजरें टिकी हैं. इन सीटों पर वोट प्रतिशत का थोड़ा बदलाव जीत हार में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है. पिछली बार इन 57 में से 29 सीटें ममता बनर्जी और 28 सीटें नरेंद्र मोदी के पाले में गई थीं. इनमें से 19 सीटें ऐसी थीं, जहां प्रत्याशियों की हार-जीत का अंतर 3,000 से भी कम वोटों का रहा था. उन 19 में से 12 भाजपा और 7 सीट तृणमूल के खाते में गई. यानी पिछले मुकाबले में भाजपा का प्रदर्शन बढ़िया रहा. कम अंतर वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में कम अंतर से जीतने वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में हैं. उत्तरी बंगाल में ऐसी केवल 10 सीटें हैं. दक्षिण को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ है. भाजपा इस बार दक्षिण में थोड़ी ज्यादा मेहनत कर रही है. SIR के तहत जिन तीन जिलों में सबसे अधिक नाम काटे गये हैं, वो जिले भी दक्षिण बंगाल में ही आते हैं. ममता बनर्जी के सामने कम मार्जिन वाली सीटों पर बढ़त बरकरार रखने की चुनौती है. सत्ता बचाने के लिए इन सीटों को हर हाल में जीतना होगा. असल परीक्षा इन्हीं सीटों पर होगी और जो इन सीटों को जीत लेगा वही बंगाल की सत्ता का सिकंदर बनेगा. कूचबिहार में केवल 57 वोटों से हुई थी जीत पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव में कई ऐसी सीटें थीं, जहां प्रत्याशियों के जीत-हार का अंतर हजार वोटों का ही रहा. बांकुड़ा सीट से भाजपा प्रत्याशी ने 1,468 वोटों से जीत हासिल की थी. कुल्टी में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा और अंत में भाजपा के उम्मीदवार 679 वोटों से विजयी हुए. तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पूर्व प्रमुख ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था. कूचबिहार में रोमांचक मुकाबला हुआ था. भाजपा के निशीथ प्रमाणिक ने सिर्फ 57 वोटों से जीत दर्ज की थी. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें विधानसभा के इन सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबलों से अलग है, लेकिन कांग्रेस भी कुछ गैर-भाजपा वोटों में सेंधमारी कर सकती है. इससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ेंगी. हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी अब बेसर हो चुकी है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी का असर देखना होगा. कुछ हजार वोटों से जीत-हार तय होने वाली सीटों पर ये छोटे-छोटे फैक्टर बड़ा असर दिखा सकते हैं. खास कर तब जब वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटे गये हों. Also Read: दिल्ली और बिहार में वोट देनेवाले को बंगाल में नहीं डालने देंगे वोट, अभिषेक बनर्जी की आयोग को खुली चेतावनी The post पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीट पर कांटे का मुकाबला, जो जीता वही सिकंदर appeared first on Naya Vichar.

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कार की छत पर लगा ये छोटा सा पार्ट क्या करता है? जानिए इसका असली काम

Shark Fin Antenna: आजकल गाड़ियां सिर्फ चलाने के लिए नहीं, बल्कि स्मार्ट फीचर्स से भरपूर बनाने पर जोर दिया जा रहा है. कार के अंदर ही नहीं, बाहरी हिस्सों में भी कई ऐसे एलिमेंट्स होते हैं जो दिखने में छोटे लगते हैं, लेकिन काम बड़े करते हैं. इनमें से एक है रूफ पर लगा शार्क फिन एंटीना. अक्सर लोग इसे सिर्फ स्टाइल बढ़ाने वाला हिस्सा मान लेते हैं. लेकिन इसका रोल इससे कहीं ज्यादा जरूरी होता है. आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि ये शार्क फिन एंटीना किस-किस काम आता है. क्यों इस एंटीना का डिजाइन शार्क फिन जैसा है? कारों में एंटीना को शार्क फिन जैसा डिजाइन यूं ही नहीं दिया जाता. इसका लुक भले स्टाइलिश लगता हो, लेकिन इसके पीछे काम की वजह छुपी होती है. ये डिजाइन काफी स्लीक और एयरोडायनामिक होता है. इससे तेज स्पीड पर भी ये मजबूती से टिका रहता है. इंस्टॉल करना आसान होता है और IP67 रेटिंग के साथ पानी-धूल से भी ये सेफ रहता है. किस काम आता है ये एंटीना? रेडियो सिग्नल पकड़ता है गाड़ी में लगा एंटीना बाहर से आने वाले FM और AM रेडियो सिग्नल को पकड़ता है, ताकि सफर के दौरान आपके पसंदीदा गाने और शो बिना रुकावट चलते रहें. GPS नेविगेशन आजकल की मॉडर्न कारों में GPS नेविगेशन एक बेहद काम का फीचर बन चुका है. दरअसल, कार में लगा एंटीना सैटेलाइट से सिग्नल लेकर आपकी सटीक लोकेशन और दिशा तय करता है. इससे सफर और भी आसान हो जाता है. की-लेस एंट्री और स्टार्ट आजकल कई कारों में की-लेस एंट्री और स्टार्ट का फीचर मिल जाता है. इसमें आपकी कार की चाबी से सिग्नल ऑटोमैटिक तरीके से कनेक्ट हो जाता है, जिससे आपको चाबी निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती. इससे आप बिना चाबी डाले ही दरवाजे खोल सकते हैं और गाड़ी स्टार्ट कर सकते हैं. टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम कार में लगा यह एंटेना TPMS यानी टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम का अहम हिस्सा होता है. यह हर टायर में लगे सेंसर से सिग्नल लेकर आपको रियल-टाइम में टायर का प्रेशर दिखाता रहता है. इससे आप समय रहते हवा कम होने जैसी समस्या पकड़ सकते हैं. ब्लूटूथ  आजकल कारों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती है. इससे आप अपने फोन को कनेक्ट कर सकते हैं. कार का सिस्टम खुद ही सिग्नल पकड़कर आपको एक स्मूद और हैंड्स-फ्री एक्सपीरियंस देता है. यह भी पढ़ें: आपकी ऑटोमैटिक कार में ये छोटा सा बटन आखिर इतना जरूरी क्यों है? जानें इसके फायदे The post कार की छत पर लगा ये छोटा सा पार्ट क्या करता है? जानिए इसका असली काम appeared first on Naya Vichar.

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IMF रिपोर्ट: ग्लोबल सुस्ती के बीच चमक रहा भारत; FY27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% किया

IMF रिपोर्ट: दुनियाभर में आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं के बीच IMF (International Monetary Fund) ने हिंदुस्तान की इकोनॉमी पर अपना भरोसा जताया है. संस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हिंदुस्तान की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) के अनुमान को 6.4% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है. जहां एक ओर ग्लोबल विकास दर के अनुमान को घटाकर 3.1% कर दिया गया है, वहीं हिंदुस्तान की यह मजबूती इसे दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख वित्तीय स्थिति बनाए रखेगी. ग्रोथ बढ़ने के दो मुख्य कारण IMF ने हिंदुस्तान की विकास दर में इस बढ़ोतरी के पीछे दो प्रमुख ‘पॉजिटिव ट्रिगर्स’ बताए हैं. 2025 का शानदार प्रदर्शन: हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति ने पिछले साल उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे आने वाले साल के लिए एक मजबूत आधार (Base) तैयार हुआ है. अमेरिकी टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका द्वारा हिंदुस्तानीय सामानों पर एडिशनल टैरिफ को 50% से घटाकर 10% करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ है. इससे हिंदुस्तानीय कपड़े, ज्वेलरी और आईटी सेवाओं का निर्यात अमेरिका में सस्ता होगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सपोर्ट सेक्टर को मजबूती मिलेगी. महंगाई का ‘अलर्ट’: 4.7% तक पहुंच सकती है दर ग्रोथ की अच्छी समाचार के साथ IMF ने महंगाई को लेकर सतर्क रहने की भी सलाह दी है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 2.1% रहने वाली महंगाई, अगले वित्त वर्ष (2026-27) में उछलकर 4.7% पर पहुंच सकती है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 2027-28 तक इसके वापस RBI के तय लक्ष्य (4%) के करीब आने की उम्मीद है. चीन में भी महंगाई निचले स्तरों से बढ़ना शुरू होगी, लेकिन हिंदुस्तान में यह उतार-चढ़ाव फूड प्राइसेज और ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर करेगा. यूरोप संकट में, हिंदुस्तान-अमेरिका सुरक्षित IMF ने ग्लोबल आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है. यूरोप के देशों और ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति में गिरावट का अनुमान है, जहां ब्रिटेन की ग्रोथ रेट में 0.5% की बड़ी कटौती की गई है. इसके विपरीत, हिंदुस्तान, अमेरिका और चीन इस ग्लोबल सुस्ती से काफी हद तक सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं. Also Read: LPG, CNG, PNG के नए रेट जारी, जानें आपके शहर में आज क्या है कीमत The post IMF रिपोर्ट: ग्लोबल सुस्ती के बीच चमक रहा हिंदुस्तान; FY27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% किया appeared first on Naya Vichar.

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कांटों का ताज या सुनहरा मौका? जानें CM सम्राट चौधरी के सामने क्या-क्या हैं चुनौतियां

Samrat Choudhary: बिहार की नेतृत्व में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है. सम्राट चौधरी अब सूबे के मुख्यमंत्री की कमान संभाल चुके हैं, लेकिन सत्ता के इस शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता जितना रोमांचक था, आगे का सफर उतना ही पथरीला नजर आता है. नीतीश कुमार ने भले ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानकर एनडीए की कमान सौंप दी हो, लेकिन 20 साल तक सुशासन बाबू की छवि के साथ राज करने वाले नीतीश की जगह लेना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. भ्रष्टाचार का दीमक बिहार में भ्रष्टाचार एक ऐसी समस्या रही है जो प्रशासनें बदलने के बावजूद जड़ें जमाए बैठी है. हाल के दिनों में बड़े अधिकारियों पर हुई छापेमारी इसका प्रमाण है. सम्राट चौधरी के लिए चुनौती यह है कि वे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को केवल कागजों तक सीमित न रखें.   सम्राट चौधरी ट्रांसपेरेंसी और CSR फंड के सही इस्तेमाल पर जोर देते हैं.  उन्हें एक ऐसा नया मैकेनिज्म तैयार करना होगा जिससे प्रशासनी दफ्तरों में आम आदमी का काम बिना सुविधा शुल्क के हो सके.   कानून-व्यवस्था नीतीश ने 2005 में सुशासन के नाम पर अपराध कम किया था, लेकिन आखिरी 5-6 साल में क्राइम ग्राफ फिर बढ़ गया. चिराग पासवान ने भी कहा था कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है. हत्या, लूट, स्त्री अपराध की घटनाएं बढ़ीं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 2025 में 2,556 हत्याएं हुईं, जो 2024 की तुलना में 8.3% कम थीं. जबकि स्त्री अपराध 2025 में 2,025 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए. अब तक सम्राट चौधरी होम मिनिस्टर थे, पुलिस और आंतरिक सुरक्षा संभाल रहे थे. BJP शासन में जीरो टॉलरेंस नीति लाने की संभावना ज्यादा है. अगर सुधरा तो स्त्रीओं और आम आदमी को राहत मिलेगी और निवेश आएगा. नहीं सुधरा तो NDA की ‘विकास’ वाली छवि खराब होगी और विपक्ष (RJD) हमला करेगा. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की खराब गुणवत्ता बिहार में स्कूल-कॉलेज और अस्पताल भवन तो बने, लेकिन टीचर-डॉक्टर की कमी और यूनिवर्सिटीज खस्ताहाल रहीं. पटना मेडिकल कॉलेज जैसी पुरानी संस्थाएं टॉप पर नहीं रहीं. लड़कियों की साइकिल योजना सफल रही, लेकिन उच्च शिक्षा और अच्छे डॉक्टर नहीं मिले. NDA में केंद्र से फंड और नीति सपोर्ट मिलेगा. वे बड़े प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग करते रहे हैं. गुणवत्ता सुधरी तो बिहार का ह्यूमन कैपिटल मजबूत होगा और युवा बाहर नहीं जाएंगे. नहीं सुधरा तो अगले चुनाव में झूठे वादे का आरोप लगेगा. विवादों का साया सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही उनके अतीत के विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. लालू-राबड़ी प्रशासन के दौरान कम उम्र में मंत्री बनने का मामला हो या उनकी शैक्षणिक डिग्रियों पर उठते सवाल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उनके खिलाफ घेराबंदी तेज कर दी है.   तेजस्वी यादव के पास यह एक ऐसा अस्त्र है जिसे वे सदन से लेकर सड़क तक इस्तेमाल करेंगे. सम्राट के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन व्यक्तिगत हमलों का ठोस जवाब अपने काम के जरिए देना होगा, ताकि जनता का ध्यान विवादों से हटकर विकास पर केंद्रित हो सके. नीतीश की बड़ी लकीर और सुशासन का बोझ नीतीश कुमार ने दो दशकों में बिहार में सुशासन की एक ऐसी लंबी लकीर खींची है, जिसे पार करना तो दूर, उसके बराबर पहुंचना भी बड़ी बात है.  नीतीश के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के व्यक्तिगत आरोपों का न होना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही. सम्राट चौधरी को न केवल अपराध नियंत्रण में अपनी धाक जमानी होगी, बल्कि पुलिस और प्रशासन की छवि को भी बेदाग रखना होगा.  अगर उनके राज में क्राइम ग्राफ जरा भी ऊपर जाता है, तो सीधे तौर पर उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठेंगे. यदि सम्राट चौधरी इन चुनौतियों को पार कर लेते हैं, तो उनका नाम बिहार के नेतृत्वक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता है. लेकिन अगर वे इसमें चूकते हैं, तो बीजेपी के लिए पहली बार मिली यह सत्ता का अवसर हाथ से फिसलने का खतरा भी बना रहेगा Also Read: सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री, विजय-बीजेंद्र को भी राज्यपाल ने दिलाई डिप्टी सीएम की शपथ The post कांटों का ताज या सुनहरा मौका? जानें CM सम्राट चौधरी के सामने क्या-क्या हैं चुनौतियां appeared first on Naya Vichar.

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सुशील मोदी ने सम्राट को दिलाई थी BJP में एंट्री, 9 साल में ऐसे तय किया मुख्यमंत्री पद तक का सफर

Samrat Choudhary: बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी ने अपनी नेतृत्व की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी. वे राबड़ी देवी की प्रशासन में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे, जो उनके शुरुआती नेतृत्वक कौशल का प्रमाण था. इसके बाद उन्होंने जनता दल यूनाइटेड और फिर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा में भी अपनी भूमिका निभाई. सुशील मोदी ने दिलाई भाजपा में एंट्री साल 2017 में सम्राट चौधरी ने हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का दामन थामा. उन्हें भाजपा में लाने का श्रेय पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को जाता है. उस समय प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय थे और सम्राट चौधरी को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई. यहीं से उनका भाजपा में तेज उभार शुरू हुआ. संगठन और प्रशासन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारी साल 2020 में एनडीए प्रशासन बनने के बाद सम्राट चौधरी को पंचायती राज मंत्री बनाया गया. इसके बाद जब गठबंधन टूटा, तो उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली. इस भूमिका में उन्होंने प्रशासन को कई मुद्दों पर घेरा और अपनी मजबूत छवि बनाई. मार्च 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. इस पद पर रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत किया और विपक्ष पर आक्रामक रणनीति अपनाई. सुशील मोदी के बाद नेतृत्व का खालीपन भरा भाजपा में सुशील कुमार मोदी के बाद जो नेतृत्व का अभाव दिख रहा था, उसे सम्राट चौधरी ने काफी हद तक भर दिया. उनके नेतृत्व में पार्टी ने नई ऊर्जा के साथ काम किया. यही वजह रही कि जनवरी 2024 में एनडीए प्रशासन बनने पर उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया. वित्त मंत्री के रूप में बड़ी घोषणाएं उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ सम्राट चौधरी को वित्त और वाणिज्य कर विभाग की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने अपने बजट भाषण में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिससे उनकी प्रशासनिक पकड़ साफ नजर आई. लोकसभा चुनाव के दौरान भी वे भाजपा के प्रमुख चेहरा बने रहे. गृह मंत्री बनकर बढ़ा कद नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और सबसे बड़े दल के रूप में उभरी. इसके बाद सम्राट चौधरी को दोबारा उपमुख्यमंत्री बनाया गया और साथ ही गृह विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई. यह पहली बार था जब गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास न होकर किसी और के पास गया. गृह मंत्री के रूप में उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े संदेश दिए. अपराधियों को लेकर उनके सख्त बयान भी चर्चा में रहे. बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं सम्राट सम्राट चौधरी अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने एक समय नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने के लिए प्रतीकात्मक तौर पर मुरेठा बांध लिया था. बाद में एनडीए प्रशासन बनने के बाद अयोध्या में मुंडन कर उन्होंने इसे उतार दिया, जो उनके नेतृत्वक संदेश का हिस्सा बना. अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे लगातार मेहनत, संगठन में पकड़ और नेतृत्व क्षमता के दम पर सम्राट चौधरी आज बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर भूमिका को मजबूती से निभाया. Also Read: सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री, विजय-बीजेंद्र को भी राज्यपाल ने दिलाई डिप्टी सीएम की शपथ The post सुशील मोदी ने सम्राट को दिलाई थी BJP में एंट्री, 9 साल में ऐसे तय किया मुख्यमंत्री पद तक का सफर appeared first on Naya Vichar.

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बीजेपी की हाइब्रिड पॉलिटिक्स, नीतीश फैक्टर और जातीय समीकरण को साधा; जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए गए

samrat Choudhary : बिहार की नेतृत्व में यह सत्ता परिवर्तन एक सोची-समझी रणनीति का परिणाम है. इस सत्ता परिवर्तन के जरिए बिहार की नेतृत्व में बीजेपी अपनी पैठ और बढ़ाना तो चाहती है,लेकिन वह नीतीश कुमार के अनुभवों और उनकी रणनीति का भी पूरा फायदा उठाना चाहती है. बीजेपी ने जिस तरह सम्राट चौधरी को सीएम और विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया है, उसके पीछे की रणनीति को इस तरह डिकोड किया जा सकता है. बिहार की नेतृत्व में जातीय समीकरण को साधा अति पिछड़ा वर्ग कुशवाहा जाति के सम्राट चौधरी को सीएम बनाकर बीजेपी ने बड़ा सामाजिक संदेश दिया है कि वह पिछड़ों की हितैषी है.बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी बहुत ज्यादा है और नीतीश कुमार ने हमेशा उन्हें साथ रखा. बीजेपी ने नीतीश कुमार की इस रणनीति से सीख ली और अति पिछड़ों को अपने गुडविल में रखने की कोशिश की है. विजय कुमार चौधरी को डिप्टी सीएम बनाकर अगड़ी जातियों को भी खुश करने की कोशिश की गई है, विजय कुमार चौधरी भूमिहार जाति के हैं. विजेंद्र यादव पिछड़ा वर्ग से आते हैं यानी बिहार की सामाजिक संरचना का पूरा ध्यान रखा गया है. नीतीश के करीबियों को डिप्टी सीएम बनाकर बीजेपी ने दिया सुशासन जारी रखने का संदेश विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव दोनों बहुत अनुभवी और नीतीश के राइटहैंड माने जाने वाले नेता हैं. इन दोनों को साथ रखकर बीजेपी ने यह साबित करने की कोशिश की है कि वे नीतीश की विदाई के बाद भी प्रदेश में सुशासन कायम रखना चाहते हैं. बीजेपी एक तरह से यह मैसेज देना चाहती है कि शासन का चेहरा बदला है, पूरा ढांचा नहीं. ट्रांजिशन मॉडल की नेतृत्व कर रही है बीजेपी बिहार में सत्ता परिवर्तन जिस तरह से किया गया है, उसे नेतृत्व का ट्रांजिशन मॉडल कहा जाता सकता है. बीजेपी ने नेतृत्व संभाल लिया है, लेकिन बिहार के नेता जिस नीतीश कुमार पर इतना भरोसा करते थे, उन्हें दरकिनार नहीं किया गया है. उनके नेटवर्क और अनुभवों को साथ रखकर बीजेपी धीरे-धीरे परिवर्तन करना चाहती है. जनता के भरोसे को तोड़ने या उन्हें किसी तरह का झटका देने के मूड में पार्टी नहीं है. बीजेपी भविष्य की नेतृत्व कर रही है, लेकिन वह वर्तमान में कोई ऐसी गलती नहीं करना चाहती है, जो उसके लिए नुकसानदेह हो. बिहार में जूनियर पार्टनर अब सीनियर बन चुका है, लेकिन वह सीनियर के अनुभवों को दरकिनार करके जनता के 21 साल के भरोसे को खोना नहीं चाहती है. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें विपक्ष को गंभीर संदेश देने के मूड में है बीजेपी बीजेपी ने बिहार में जो सत्ता परिवर्तन किया है, उसके जरिए वह अपने सबसे कट्टर विरोधी राजद को मजबूत संदेश देना चाहती है. बीजेपी राजद को यह बताना चाहती है कि वह प्रदेश में अब इस स्थिति में है कि वह सामाजिक समीकरणों को साध सकती है. अब बिहार में जो डबल इंजन की प्रशासन है, उसमें केंद्र और राज्य का नेतृत्व बीजेपी के पास है, लेकिन नीतीश कुमार और जदयू की भागीदारी भी उसमें बहुत अहम है. यह एक मिश्रित नेतृत्व (Hybrid Politics) है, जिसमें परिणाम बेहतर आने की पूरी उम्मीद है. बीजेपी बिहार में अपनी शक्ति और बढ़ाना चाहती है, जिसमें वह नीतीश फैक्टर का बखूबी इस्तेमाल कर रही है. ये भी पढ़ें : बिहार के सीएम पद पर पहली बार बीजेपी का राज, बदलेगी बिहार की नेतृत्व? The post बीजेपी की हाइब्रिड पॉलिटिक्स, नीतीश फैक्टर और जातीय समीकरण को साधा; जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए गए appeared first on Naya Vichar.

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गढ़वा: विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के पैतृक घर में चोरी, घर का ताला तोड़कर घुसे चोर

गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले से चोरी की घटना सामने आई है. गढ़वा के विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के बेलहारा गांव स्थित पैतृक आवास को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया है. मंगलवार की रात चोरों ने घर का ताला तोड़कर अंदर घुसे और जमकर उत्पात मचाया. सुबह जब स्थानीय लोगों को घटना की भनक लगी, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.  खाली घर का उठाया फायदा मिली जानकारी के अनुसार, घटना के वक्त घर में कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था. घर खाली होने का फायदा उठाते हुए अज्ञात चोरों ने ताला तोड़ा और भीतर घुस गए. चोरों ने घर के कमरों में रखे सामान को पूरी तरह तितर-बितर कर दिया है. फिलहाल नुकसान के सटीक आकलन की प्रक्रिया जारी है घटनास्थल पर पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलते ही गढ़वा सदर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची. पुलिस टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.  क्या कहते हैं एसपी  एसपी अमन कुमार ने घटना की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि विधायक के पैतृक आवास में चोरी की सूचना मिलते ही एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष टीम को मौके पर भेजा गया है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घर में कोई सदस्य नहीं रहता था, जिसका फायदा चोरों ने उठाया. घर का ताला टूटा पाया गया है और सामान बिखरा हुआ है. पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. बताया गया कि पुलिस अब आसपास के इलाकों में संदिग्धों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है.  सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है. क्षेत्र के लोगों ने इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्ती पर भी सवाल उठाए हैं. यह भी पढ़ें: गुमला में ‘ब्लैक मंडे’: 2 घंटे के भीतर तीन सड़क हादसों में चार की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल यह भी पढ़ें: झारखंड 11वीं बोर्ड में 99.12% छात्र सफल, छात्राओं ने फिर मारी बाजी, गुमला और गिरिडीह जिला रहा टॉपर The post गढ़वा: विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के पैतृक घर में चोरी, घर का ताला तोड़कर घुसे चोर appeared first on Naya Vichar.

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