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अमेरिका में कौन करा रहा भारतीयों की जासूसी? एशियन लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत से खतरे में ट्रम्प की इमिग्रेशन पॉलिटिक्स

अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले इमिग्रेशन को लेकर एक बार फिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नेतृत्व केंद्र में है. लेकिन इस बार बहस सिर्फ अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर या अवैध प्रवास तक सीमित नहीं है. हिंदुस्तानीय और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ ICE की कार्रवाई, इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर डर और बढ़ती एंटी-साउथ एशियन नफरत को लेकर चिंता बढ़ रही है. ICE की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि एशियाई समुदाय भी ट्रम्प प्रशासन के इमिग्रेशन एनफोर्समेंट से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं. ICE की कार्रवाई में हिंदुस्तानीयों पर निशाना ICE के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जनवरी 2025 से 6 अगस्त 2026 के बीच एशियाई लोगों के खिलाफ 21,078 गिरफ्तारियां, 18,769 हिरासत और 9,590 डिपोर्टेशन हुए. पिछली अवधि के मुकाबले गिरफ्तारियां 436% और डिपोर्टेशन 1,103% बढ़े हैं. इनमें हिंदुस्तानीय और चीनी नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है. जुलाई 2026 में ही करीब 1,950 एशियाई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में एक महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इससे हिंदुस्तानीय समुदाय में डर बढ़ा है. न्यूयॉर्क के क्वींस में लंबे समय से रेस्तरां चला रहे एक हिंदुस्तानीय कारोबारी के हवाले से दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रम्प समर्थक कुछ श्वेत समूह हिंदुस्तानीय रेस्तरां और कारोबारियों पर नजर रखते हैं और संदिग्ध प्रवासियों की जानकारी ICE तक पहुंचाते हैं. ऐसे में समुदाय की चिंता सिर्फ अवैध प्रवासियों को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर भी है कि ICE की कार्रवाई का असर वैध दस्तावेज वाले हिंदुस्तानीयों, उनके परिवारों और कारोबार पर पड़ रहा है. यानी इमिग्रेशन एनफोर्समेंट का असर सिर्फ बॉर्डर या अवैध प्रवास के सवाल तक सीमित नहीं दिख रहा. हिंदुस्तानीय और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदाय के लोगों को यह चिंता सता रही है, कि इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प प्रशासन की बढ़ती सख्ती और नेतृत्वक बयानबाजी का उन पर भविष्य में क्या असर होगा. ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात से दुनिया को ₹580 लाख करोड़ का नुकसान! जानिए हिंदुस्तान पर क्या होगा असर? ऑनलाइन एंटी-साउथ एशियन हेट में 109% वृद्धि Stop AAPI Hate की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच ऑनलाइन एंटी-साउथ एशियन स्लर्स के इस्तेमाल में 109% की वृद्धि हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 के बीच ऑनलाइन दर्ज एंटी-एशियन हिंसा की धमकियों में 71% दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाया गया. 2025 के एक सर्वे में 48% दक्षिण एशियाई वयस्कों ने बताया कि उन्होंने अपनी नस्ल, जातीयता या राष्ट्रीयता के कारण किसी हेट एक्ट का अनुभव किया. वहीं 55% ने कहा कि उन्होंने खुद या अपने समुदाय के किसी व्यक्ति पर बदलती इमिग्रेशन नीतियों या एंटी-इमिग्रेंट का असर देखा. हालांकि ICE की कार्रवाई और एंटी-साउथ एशियन हेट दो अलग-अलग मुद्दे हैं, लेकिन इसको लेकर चल रही नेतृत्वक बहस का असर पूरे समुदाय की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति पर पड़ रहा है? क्या हिंदुस्तानीयों को ‘इमिग्रेंट’ मानकर निशाना बनाया जा रहा? अमेरिका में रहने वाले हिंदुस्तानीयों में बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों की है. वहीं कई लोग H-1B जैसे वर्क वीजा, ग्रीन कार्ड या दूसरे इमिग्रेशन स्टेटस पर रहते हैं. नतीजा इमिग्रेशन और विदेशी कामगारों को लेकर चल रही नेतृत्वक बहस का असर पूरे हिंदुस्तानीय और दक्षिण एशियाई समुदाय पर पड़ रहा है. ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा पर भी सख्ती बढ़ाई है. नए H-1B आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस वाली व्यवस्था को सितंबर 2026 में एक साल और बढ़ाया गया. हिंदुस्तान के लोग H-1B वीजा के बड़े लाभार्थियों में हैं. यानी हिंदुस्तानीयों के लिए इमिग्रेशन का मुद्दा सिर्फ डिपोर्टेशन तक सीमित नहीं है. इसका सीधा असर नौकरी, वीजा और अमेरिका में भविष्य पर भी पड़ सकता है. यानी इमिग्रेशन का मुद्दा सिर्फ ICE कार्रवाई या डिपोर्टेशन तक सीमित न होकर इन समुदाय के लोगों की नौकरी, वीजा और अमेरिका में भविष्य से जुड़ा हुआ है. और यही वजह है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले यह बहस नेतृत्वक रूप से भी महत्वपूर्ण हो रही है. ट्रम्प की इमिग्रेशन पॉलिसी पर बढ़ रहा दबाव मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति को लेकर नेतृत्वक दबाव बढ़ता दिख रहा है. ICE की बढ़ती कार्रवाई और दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ हेट की रिपोर्टों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है. 21 सितंबर के Reuters/Ipsos सर्वे में ट्रम्प की कुल अप्रूवल रेटिंग 32% रही. वहीं, सिर्फ 36% लोगों ने उनकी इमिग्रेशन नीति को मंजूरी दी. कांग्रेस चुनाव के लिए 43% लोगों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और 35% ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन बताया. सर्वे 1,277 अमेरिकी वयस्कों पर किया गया था. ये आंकड़े चुनाव का नतीजा या भविष्यवाणी नहीं हैं, लेकिन यह जरूर दिखाते हैं कि इमिग्रेशन अब ट्रम्प के लिए सिर्फ नीतिगत मुद्दा नहीं, बल्कि नेतृत्वक दबाव का भी विषय बन गया है. इमिग्रेशन को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी मतभेद हैं. कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. फ्लोरिडा की रिपब्लिकन सांसद मारिया एलविरा सालाजार ने ट्रम्प की नीति पर चिंता जताई और कहा कि बहुत ज्यादा सख्ती से उन लैटिनो वोटरों से दूरी बढ़ सकती है, जिन्होंने 2024 में ट्रम्प का समर्थन किया था. यानी इमिग्रेशन सिर्फ डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच बहस नहीं है. रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी इस नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इन तमाम बहसों के बीच हिंदुस्तानीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इमिग्रेशन नीति कितनी सख्त है, बल्कि यह भी है कि इन नीतियों और उनसे जुड़ी नेतृत्वक बहस का असर समुदाय पर किस तरह पड़ रहा है. ये भी पढ़ें: MPO से लोगों को डरा रहा पाकिस्तान? इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, कानून पर क्यों उठ रहे सवाल हिंदुस्तानीय समुदाय के लिए मिडटर्म चुनाव क्यों है अहम? हिंदुस्तानीय-अमेरिकी मतदाता संख्या में अपेक्षाकृत छोटा समूह हैं, लेकिन कई राज्यों और शहरी इलाकों में उनका आर्थिक और नेतृत्वक प्रभाव बढ़ा है. ऐसे में ICE कार्रवाई, H-1B वीजा, नस्लीय भेदभाव और हेट क्राइम जैसे मुद्दे समुदाय की नेतृत्वक प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं. Stop AAPI Hate के आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ हेट और ICE कार्रवाई दोनों

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IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या केस, डीन सूर्यनारायण डूला सस्पेंड

मुंबई स्थित IIT बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या के मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला सस्पेंड कर दिया गया है. कॉलेज के बाहर प्रदर्शन मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों ने IIT बॉम्बे के बाहर अपनी नाराजगी जाहिर की. प्रदर्शन में छात्रों और अभिभावकों समेत अन्य लोग भी शामिल हुए. उन्होंने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की. मामले को लेकर बढ़ा दबाव छात्र की आत्महत्या के बाद संस्थान में प्रशासनिक जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मामले में जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. ये भी पढ़ें: IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम क्यों आया? जानें कौन हैं The post IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या केस, डीन सूर्यनारायण डूला सस्पेंड appeared first on Naya Vichar.

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महाराष्ट्र में UCC पर बढ़ा विवाद? जस्टिस आरसी चव्हाण ने पैनल से दिया इस्तीफा, फीडबैक प्रक्रिया पर जताई आपत्ति

Maharashtra UCC: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बनाए गए सात सदस्यीय समिति के सदस्य और बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने UCC पर आम लोगों से राय लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद का हवाला दिया है. साथ ही उन्होंने समिति की बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी और उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाया. जस्टिस चव्हाण ने 19 सितंबर को समिति की ऑनलाइन बैठक के कुछ घंटे बाद अपना इस्तीफा भेजा था. राज्य प्रशासन ने सोमवार को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. यह इस्तीफा समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद आया है. प्रश्नावली को लेकर क्या था विवाद? जस्टिस चव्हाण के अनुसार, बैठक के एजेंडे में UCC पर जनता से फीडबैक लेने के लिए तैयार की जाने वाली प्रश्नावली को अंतिम रूप देना शामिल था. उनका कहना था कि बैठक में कुछ सदस्यों ने प्रश्नावली में बदलाव और विशेषज्ञों से इसकी समीक्षा कराने जैसे सुझाव दिए. हालांकि, उनके मुताबिक समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई पहले ही प्रश्नावली का एक अंतिम प्रारूप सदस्यों के साथ साझा कर चुकी थीं और वेबसाइट तैयार होने के बाद उसे अपलोड करने की बात कही गई थी. इसके बाद जस्टिस चव्हाण बैठक से लॉग आउट हो गए. जस्टिस चव्हाण ने अपने ईमेल में कहा कि उन्हें लगा था कि समिति का उद्देश्य महाराष्ट्र के लोगों की राय जानना और विभिन्न सामाजिक एवं कानूनी मुद्दों पर व्यापक सहमति बनाने की दिशा में काम करना है. हालांकि, प्रश्नावली की मौजूदा प्रक्रिया से उन्हें लगा कि लोगों को मुख्य रूप से हां या ना में जवाब देने का अवसर दिया जाएगा, ताकि प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण आसान हो सके. गैर-सदस्य की मौजूदगी पर भी उठाया सवाल जस्टिस चव्हाण ने बैठक में एक ऐसे व्यक्ति की मौजूदगी का भी जिक्र किया, जो समिति का सदस्य नहीं था. उनके मुताबिक, इस व्यक्ति ने राज्य प्रशासन के अधिकारियों की ओर से तैयार की गई वेबसाइट में कुछ बदलाव की जरूरत बताई थी. इसके बाद समिति की अध्यक्ष ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर जरूरी बदलाव करने का निर्देश दिया. जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि समिति की बैठक में उस गैर-सदस्य की भूमिका क्या थी. उन्होंने इसी संदर्भ में समिति से अलग होने का फैसला किया और कहा कि अब प्रशासन इस पद को भर सकती है. जुलाई में हुआ था समिति का गठन महाराष्ट्र प्रशासन ने जुलाई 2026 में UCC के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया था. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं. समिति में जस्टिस आरसी चव्हाण और जस्टिस एसजी मेहरे समेत अन्य सदस्य शामिल किए गए थे. समिति को महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए नियम और सिफारिशों का मसौदा तैयार करना है. समिति की दूसरी बैठक में पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि, UCC पर लोगों से सुझाव लेने वाली वेबसाइट और फीडबैक प्रक्रिया समेत तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई थी. ये भी पढ़ें: BJP के 10 पार्षद: फिर भी प्रत्याशी को मिला ‘0’ वोट, बागी को जिताया; नागौर में चौंकाने वाला चुनावी गणित The post महाराष्ट्र में UCC पर बढ़ा विवाद? जस्टिस आरसी चव्हाण ने पैनल से दिया इस्तीफा, फीडबैक प्रक्रिया पर जताई आपत्ति appeared first on Naya Vichar.

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सुशांत सिंह राजपूत के भाई का दावा, एक्टर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था, लेकिन हो गई हत्या

Sushant Singh Rajput: दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के ताजासुशांत सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था, लेकिन हत्या हो गई… एक्टर के चचेरे भाई का खुलासा, बोले- बिहारवासी को न्याय की उम्मीद आदेश के बाद सुशांत सिंह राजपूत के परिवार और उनके फैंस में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है. हाईकोर्ट ने दिशा की मौत की नए सिरे से CBI जांच के आदेश दिए हैं. दिशा, सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं और 8 जून 2020 को मुंबई की एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी. इसके ठीक छह दिन बाद 14 जून को सुशांत अपने बांद्रा स्थित घर में मृत मिले थे. दोनों घटनाओं के बीच महज छह दिन का अंतर होने की वजह से लंबे समय से इनके बीच संभावित कनेक्शन को लेकर सवाल उठते रहे हैं, सुशांत के चचेरे भाई को अब भी न्याय की है उम्मीद बिहार के पूर्णिया में सुशांत सिंह राजपूत के पैतृक गांव में उनके परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद खुशी जताई है. एक्टर के चचेरे भाई पन्ना सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया सिटी संग बात करते हुए कहा कि परिवार को अब भी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. उन्हें उम्मीद है कि नई जांच से दोनों मौतों से जुड़े हालात को लेकर ज्यादा स्पष्टता सामने आएगी. सुशांत सिंह राजपूत, फोटो- इंस्टाग्राम ये भी पढ़ें: पुराना स्टाफ हटते ही Sushant Singh Rajput अचानक बीमार कैसे पड़े… तनुश्री दत्ता ने उठाए सवाल, अपनी जिंदगी से जोड़ा कनेक्शन क्यों हुई सुशांत सिंह राजपूत की हत्या उन्होंने सुशांत की मौत को हत्या बताते हुए दावा किया कि दिवंगत अभिनेता एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे, जिसमें वह कथित तौर पर कुछ सबूत सामने रखने वाले थे. उन्होंने कहा, “वह निडर लड़का था. वह किसी से नहीं डरता था. सुशांत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था और कुछ सबूत को सामने रखने वाला था. हमारा मानना है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई.” नीरज बाबलू बोले- हमें शुरू से हत्या का शक था बिहार के पूर्व मंत्री और सुशांत के चचेरे भाई नीरज कुमार सिंह बाबलू ने हाईकोर्ट के फैसले को उम्मीद बढ़ाने वाला बताया. उन्होंने आगे कहा, “जब सुशांत की मौत हुई थी, तब हमें लगा था कि यह हत्या है. हम मुंबई गए थे और वहां जो कुछ हुआ, उसके बारे में पता चलने के बाद से हम लगातार कहते रहे हैं कि सुशांत की हत्या हुई थी और सालियान की मौत का संबंध अभिनेता की हत्या से था.” View on Instagram उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की महाराष्ट्र प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की और सबूतों को खत्म या छिपाने के प्रयास किए गए. बाबलू के मुताबिक, हाईकोर्ट की दखल और नई CBI जांच ने सुशांत के परिवार के साथ-साथ बिहार और देशभर में उनके फैंस के बीच भी नई उम्मीद पैदा की है. ये भी पढ़ें: ‘अब खुलेगा सुशांत सिंह राजपूत की मौत का राज’, दिशा सालियान केस में CBI की FIR के बाद एक्टर के भाई बोले- उद्धव प्रशासन ने मामले को दबाया The post सुशांत सिंह राजपूत के भाई का दावा, एक्टर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था, लेकिन हो गई हत्या appeared first on Naya Vichar.

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U Letter Love Life: ‘उ’ नाम वालों की ये खूबियां बनाती हैं उन्हें खास, जानें लव लाइफ का हाल

U Letter Love Life: नया विचार डिजिटल की हिंदी नेम एस्ट्रोलॉजी सीरीज के अगले भाग में आज बात ‘उ’ यानी ‘U’ अक्षर से नाम शुरू होने वाले लोगों की लव लाइफ की. नाम अंक ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार, इन लोगों के व्यक्तित्व में इमोशन और सेंसिटिविटी और डिसीजन मेकिंग पर भरोसा देखने को मिलता है. प्यार और शादी के मामले में इनका रवैया कैसा होता है, ये पार्टनर से कितना जुड़ाव रखते हैं और रिश्तों में इनकी क्या खासियत होती है? आइए जानते हैं. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा बताते हैं कि पाइथागोरस अंकशास्त्र पद्धति में अंग्रेजी अक्षर U को अंक 3 से जोड़ा जाता है. इस पद्धति में 1 से 9 तक के अंक क्रमशः अक्षरों को दिए जाते हैं और फिर नाम के अक्षरों से अलग-अलग अंक निकाले जाते हैं. इस चार्ट में C, L और U का संबंध अंक 3 से माना जाता है. अंक 3 से जुड़े माने जाते हैं ये गुण न्यूमेरोलॉजी की मान्यताओं में अंक 3 को अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और संवाद से जोड़ा जाता है. इसलिए ‘U’ से जुड़े नामों के बारे में भी आमतौर पर माना जाता है कि ऐसे लोगों में अपनी बात रखने, बातचीत करने और सामाजिक रूप से घुलने-मिलने की प्रवृत्ति हो सकती है. लव लाइफ में कैसे होते हैं ‘उ’ अक्षर वाले? अगर इसी न्यूमेरोलॉजी मान्यता को रिश्तों से जोड़ें, तो ‘उ’ अक्षर वाले लोगों को भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने वाला, संवाद को महत्व देने वाला और रिश्ते में अपनापन चाहने वाला माना जा सकता है. हालांकि, केवल नाम का पहला अक्षर देखकर किसी व्यक्ति की लव लाइफ के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. ये भी पढ़ें: E Name Love Astrology: ‘ई’ नाम वालों की कौन-सी आदत उन्हें रिश्तों में खास बनाती है? नाम के पहले अक्षर से जानें इनके लिए रिश्ता सिर्फ आकर्षण तक सीमित नहीं होता. भावनात्मक जुड़ाव और आपसी समझ इनके लिए काफी मायने रख सकती है. प्यार में ईमानदारी को देते हैं महत्व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ‘उ’ नाम वाले लोग रिश्ते में ईमानदारी और भरोसे को महत्व देने वाले माने जाते हैं. पार्टनर से भी यही उम्मीद रखते हैं. अगर उन्हें रिश्ते में अपनापन और विश्वास महसूस हो, तो वे अपने पार्टनर का साथ मजबूती से निभाने की कोशिश कर सकते हैं. थोड़े संवेदनशील हो सकते हैं इन लोगों की एक खासियत उनकी संवेदनशीलता मानी जाती है. पार्टनर की छोटी-सी बात भी इनके दिल पर असर डाल सकती है. कई बार इसी वजह से ये ज्यादा सोचने लगते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है और सिर्फ नाम के अक्षर से किसी की भावनाओं को तय नहीं किया जा सकता. रिश्ते में चाहते हैं सम्मान और स्पेस ‘उ’ अक्षर वाले लोगों के बारे में यह भी माना जाता है कि वे रिश्ते में प्यार के साथ-साथ सम्मान और व्यक्तिगत स्पेस को भी महत्व देते हैं. उन्हें ऐसा पार्टनर पसंद आ सकता है जो उनकी बात सुने और उनकी भावनाओं को समझे. शादी और रिश्तों को लेकर गंभीर लव लाइफ में ये लोग जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं. एक बार रिश्ता मजबूत होने के बाद उसे निभाने की कोशिश करना इनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता मानी जाती है. हालांकि, रिश्ते की सफलता आपसी समझ, संवाद और विश्वास पर ज्यादा निर्भर करती है. डिस्क्लेमर: दिए गए कंटेंट में अंक ज्योतिष से जुड़ी मान्यताएं हैं. नया विचार इन मान्यताओं और दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है. The post U Letter Love Life: ‘उ’ नाम वालों की ये खूबियां बनाती हैं उन्हें खास, जानें लव लाइफ का हाल appeared first on Naya Vichar.

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NCERT Textbooks 2026-27: कक्षा 9 की दो नई किताबों को लेकर नया अपडेट, जानें कब और कहां मिलेंगी

NCERT Textbooks 2026-27: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 के दो नए पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर जानकारी जारी की है. यह जानकारी NCERT की ओर से LinkedIn पर पोस्ट जारी करके दी गई है. ये नई किताबें गणित और सामाजिक सोशल साइंस के लिए हैं. दोनों पाठ्यपुस्तकें संशोधित स्कूली पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार की गई हैं. आइए इस बारे में और अधिक डिटेल में जानते हैं. NCERT Books: जानिए कब से मिलेगी यह किताब NCERT की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कक्षा 9 में गणित की नई पाठ्यपुस्तक ‘Ganita Manjari – Part 2’ की प्रिंटिंग पूरी हो चुकी है. यह किताब 21 सितंबर 2026 से बिक्री के लिए उपलब्ध करा दी गई है. वहीं कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society: India & Beyond – Part 2’ की बिक्री 30 सितंबर 2026 से शुरू होगी. ये भी पढ़ें: बिहार के किस हिस्से में पड़ता है जमुई जिला? जानें इतिहास और 20 जरूरी GK सवाल-जवाब How to Buy NCERT Book: कहां से मिलेगी ये किताबें? NCERT के अनुसार, कक्षा 9 की ये दोनों नई पाठ्यपुस्तकें NCERT Sales Counters, NCERT की ऑफिशियल वेबसाइट और Amazon के माध्यम से उपलब्ध होंगी. स्टूडेंट्स और स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार इन अधिकृत माध्यमों से किताबें खरीद सकते हैं. ये भी पढ़ें: IBPS RRB ग्रामीण बैंक क्लर्क और पीओ भर्ती की लास्ट डेट बढ़ी, अब इस दिन तक भरें फॉर्म NEP 2020 और NCF-SE 2023 के अनुरूप तैयार हुईं किताबें NCERT ने बताया कि नई पाठ्यपुस्तकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और National Curriculum Framework for School Education (NCF-SE) 2023 के अनुरूप विकसित किया गया है. इन किताबों को तैयार करने का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में लागू किए जा रहे नए पाठ्यचर्या दृष्टिकोण के अनुरूप स्टूडेंट्स की बदलती सीखने की जरूरतों को पूरा करना है. Note: इस बारे में और अधिक जानकारी आप NCERT की ऑफिशियल वेबसाइट ncert.nic.in पर विजिट करके देख सकते हैं. ये भी पढ़ें: Bihar STET 2026: आवेदन की लास्ट डेट बेहद नजदीक, तुरंत भरें फॉर्म The post NCERT Textbooks 2026-27: कक्षा 9 की दो नई किताबों को लेकर नया अपडेट, जानें कब और कहां मिलेंगी appeared first on Naya Vichar.

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जमुई कांड पर तेज प्रताप यादव का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- जवाब नहीं मिला तो करूंगा भूख हड़ताल

Jamui Viral Video: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद मामला गरमा गया है. घटना 19 सितंबर की बताई जा रही है. वीडियो 20 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की. अब इस घटना को लेकर जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने बिहार प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. तेज प्रताप ने प्रशासन से मांगा जवाब जमुई की घटना पर तेज प्रताप यादव ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि लड़का और लड़की साथ बाहर गए थे. यह उनका निजी मामला है. लेकिन जिस तरह उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई, वह गलत और निंदनीय है. तेज प्रताप ने कहा कि इस मामले में बिहार प्रशासन और मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए. उन्होंने युवाओं, खासकर स्त्रीओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए. ‘जवाब नहीं मिला तो करेंगे भूख हड़ताल’ तेज प्रताप यादव ने प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले पर जवाब नहीं मिलता है, कार्रवाई नहीं होती है तो उनकी पार्टी भूख हड़ताल करेगी. उन्होंने बिहार में विरोध प्रदर्शन शुरू करने की भी बात कही. तेज प्रताप ने कहा कि प्रशासन को घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए. पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल तेज प्रताप ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि मुख्य आरोपितों की जगह किसी निर्दोष व्यक्ति की गिरफ्तारी हो सकती है. उन्होंने कहा कि सिर्फ गिरफ्तारी दिखाना पर्याप्त नहीं है. घटना में शामिल वास्तविक आरोपितों की पहचान होनी चाहिए. उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 19 सितंबर की है घटना पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना 19 सितंबर की शाम की है. एक नाबालिग लड़का और लड़की स्कूटी से जा रहे थे. इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी होती दिखाई देती है. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की. मामले में पुलिस कर रही कार्रवाई पुलिस के अनुसार मामले में सात लोगों की पहचान की गई है. तीन आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है. मामले की जांच के लिए SIT भी गठित की गई है. वहीं, वायरल वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने वाले प्लेटफॉर्म पर भी पुलिस कार्रवाई कर रही है. नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले वीडियो या पोस्ट पर भी कार्रवाई की जा सकती है. Also Read: Jamui Viral Video: जमुई केस में 3 गिरफ्तार, 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टेकडाउन, SIT करेगी जांच The post जमुई कांड पर तेज प्रताप यादव का प्रशासन को अल्टीमेटम, बोले- जवाब नहीं मिला तो करूंगा भूख हड़ताल appeared first on Naya Vichar.

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खनिज संशोधन अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी झारखंड सरकार

रांची: केंद्र प्रशासनCM Hemant Soren के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को झारखंड प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है. इस संबंध में खान विभाग ने विधि विभाग से राय लेने के बाद संचिका मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजी थी. मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है. राज्य प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के आधार पर ही झारखंड ने खनिजों पर सेस लगाने और उसकी वसूली शुरू की थी. अब केंद्र के संशोधित कानून में राज्यों के खनिज से जुड़े अतिरिक्त कर या सेस लगाने के अधिकार को सीमित किया गया है. राज्य प्रशासन का तर्क है कि इससे झारखंड को राजस्व का बड़ा नुकसान होगा और विकास योजनाओं पर भी असर पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बनाया आधार राज्य प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले को अपनी याचिका का प्रमुख आधार बनाया है. प्रशासन का कहना है कि इसी फैसले के बाद वर्ष 2024 में राज्य ने खनिजों पर सेस लगाकर उसकी वसूली शुरू की थी. अब केंद्र के संशोधन के जरिए इस व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है. प्रशासन का तर्क है कि संसद के संशोधन से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर मिले राज्य के अधिकार प्रभावित नहीं किए जा सकते. ये भी पढ़ें- 31 जवाब देकर निकला अभ्यर्थी, बाकी ओएमआर दफ्तर में भरी; मेंस की कॉपी घर पर लिखी 14 हजार करोड़ के राजस्व का दावा राज्य प्रशासन का अनुमान है कि खनिज सेस से वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 14,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता था. प्रशासन का कहना है कि संशोधित कानून लागू होने से राज्य इस अनुमानित राजस्व से वंचित हो सकता है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी करीब 14,000 करोड़ रुपए के संभावित राजस्व नुकसान की बात कह चुके हैं. 1.36 लाख करोड़ की बकाया राशि का भी मुद्दा राज्य प्रशासन ने विभिन्न कोयला कंपनियों से बकाया राशि का मुद्दा भी उठाया है. प्रशासन के अनुसार, कोल कंपनियों के पास झारखंड की करीब 1,36,042 करोड़ रुपए की बकाया राशि है. राज्य का तर्क है कि संशोधित कानून के कारण इस राशि की वसूली के उसके दावे पर भी असर पड़ेगा. 18 अगस्त से लागू हुआ संशोधित कानून केंद्र के संशोधित कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी 18 अगस्त 2026 को मिली थी. इसके बाद यह कानून लागू हो गया. इसमें राज्यों द्वारा खनिजों पर अतिरिक्त कर या सेस लगाने से संबंधित प्रावधानों को सीमित किया गया है. राज्य प्रशासन का कहना है कि उसने फिलहाल झारखंड में इस संशोधन को लागू नहीं किया है और कोल इंडिया समेत अन्य कंपनियां सेस का भुगतान कर रही हैं. प्रशासन अब इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाने की तैयारी में है. ये भी पढ़ें- रात में क्रेटा ने युवक को कुचला, सुबह मौत से भड़का आक्रोश, शव रखकर लोगों ने सड़क किया जाम The post खनिज संशोधन अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी झारखंड प्रशासन appeared first on Naya Vichar.

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Facebook-Instagram अचानक हुए डाउन, अमेरिका में हजारों यूजर्स परेशान; जानिए क्यों नहीं चल रहे थे Meta के ऐप्स

अमेरिका में रविवार रात Meta के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram अचानक डाउन हो गए. हजारों यूजर्स ने दोनों प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने, कंटेंट लोड करने और ऐप इस्तेमाल करने में परेशानी की शिकायत की. आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट Downdetector पर शिकायतों में अचानक तेज उछाल देखा गया. Facebook पर 17 हजार से ज्यादा रिपोर्ट Downdetector के मुताबिक, रात करीब 9:11 बजे ET तक Facebook से जुड़ी समस्याओं की 17,000 से ज्यादा रिपोर्ट दर्ज हुईं. वहीं Instagram के लिए भी 5,000 से ज्यादा शिकायतें सामने आईं. हालांकि, ये आंकड़े प्रभावित यूजर्स की वास्तविक संख्या नहीं हैं, बल्कि यूजर्स की ओर से दर्ज की गई समस्या रिपोर्ट हैं. Instagram पर भी यूजर्स को परेशानी रिपोर्ट के अनुसार, Instagram पर यूजर्स को ऐप और कंटेंट एक्सेस करने में दिक्कत का सामना करना पड़ा. कुछ रिपोर्टों में Facebook Messenger और WhatsApp को लेकर भी शिकायतों में बढ़ोतरी का जिक्र हुआ, लेकिन मुख्य आउटेज Facebook और Instagram से जुड़ा रहा. आखिर क्यों डाउन हुआ Facebook और Instagram? फिलहाल Facebook और Instagram के डाउन होने की सटीक वजह सामने नहीं आई है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, Meta ने आउटेज को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया था. Meta के स्टेटस पेज पर भी उस दौरान किसी बड़े व्यवधान की स्पष्ट जानकारी नहीं दिखी. करीब एक घंटे में कम होने लगी शिकायतें आउटेज की शुरुआत लगभग 8:55 PM ET के आसपास बताई गई है. रात करीब 10 बजे ET तक Downdetector पर समस्या की रिपोर्टों में तेज गिरावट आने लगी, जिससे संकेत मिला कि Facebook और Instagram की सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं. बाद में दोनों प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर फिर से काम करने लगे. हिंदुस्तान में भी यूजर्स के लिए अपडेट अमेरिका में हुई इस समस्या के बाद दूसरे देशों से भी कुछ आउटेज रिपोर्ट सामने आईं. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हिंदुस्तान में उस समय Facebook और Instagram के किसी बड़े राष्ट्रव्यापी आउटेज का स्पष्ट संकेत नहीं था. इसलिए हिंदुस्तान में किसी यूजर को समस्या आती है तो यह जरूरी नहीं कि पूरे देश में सेवा बंद हो. 2026 में तीसरी बड़ी Meta आउटेज घटना यह 2026 में Meta के प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी एक और उल्लेखनीय आउटेज घटना है. इससे पहले जुलाई में भी Facebook और Instagram पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई थीं. हालांकि, मौजूदा मामले की तरह उस समय भी आउटेज का कोई स्पष्ट सार्वजनिक कारण सामने नहीं आया था. ये भी पढ़ें: ट्रंप का नया टीवी चैनल लॉन्च, 24 घंटे चलेगा ‘Trump TV’; बोले- भाषणों से लेकर प्रशासन के हर अपडेट एक जगह The post Facebook-Instagram अचानक हुए डाउन, अमेरिका में हजारों यूजर्स परेशान; जानिए क्यों नहीं चल रहे थे Meta के ऐप्स appeared first on Naya Vichar.

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प्लेयर या मेंटर? CSK ने तय किया धोनी का फ्यूचर, जहीर खान के कोच बनते ही साफ हुआ मामला

MS Dhoni CSK Future: चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL 2027 के लिए अपने नए हेड कोच का ऐलान कर दिया है. पूर्व हिंदुस्तानीय तेज गेंदबाज जहीर खान को स्टीफन फ्लेमिंग की जगह टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जहीर खान के कोच बनते ही अब यह सवाल उठ रहा है कि CSK में महेंद्र सिंह धोनी का रोल क्या होगा. CSK ने धोनी के रोल से भी पर्दा उठा दिया है. टीम के मैनेजिंग डायरेक्टर काशी विश्वनाथन ने कहा है कि धोनी खिलाड़ी के तौर ही IPL 2027 स्पोर्ट्सेंगे. यह तो साफ हो गया है कि अभी आधिकारिक रूप से धोनी को मेंटर या कोच की जिम्मेदारी नहीं दी है. जहीर खान को लाने में धोनी की अहम भूमिका दिलचस्प बात यह है कि धोनी खुद भले ही आधिकारिक तौर पर कोचिंग भूमिका में नहीं हैं, लेकिन CSK के नए कोच के चयन में उनकी भूमिका काफी अहम रही. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लेमिंग के उत्तराधिकारी को चुनने की जिम्मेदारी धोनी को दी गई थी. उन्होंने अलग-अलग विकल्पों पर बात की और जहीर खान के नाम को आगे बढ़ाया. इसके बाद टीम मैनेजमेंट और मालिकों के साथ चर्चा के बाद जहीर की नियुक्ति पर मुहर लगी. ये भी पढ़ें: CSK ने धोनी की हिस्सेदारी पर तोड़ी चुप्पी, 1 लाख से ज्यादा शेयरों के मालिक हैं माही; करोड़ों में है कीमत IPL 2026 में नहीं स्पोर्ट्से थे एक भी मैच धोनी IPL 2026 में CSK के साथ खिलाड़ी के तौर पर जुड़े हुए थे, लेकिन वह एक भी मुकाबला नहीं स्पोर्ट्स सके. रिपोर्ट के मुताबिक, वह चोट की वजह से पूरे सीजन से बाहर रहे. अब IPL 2027 से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या धोनी फिर से CSK की प्लेइंग इलेवन में नजर आएंगे. हालांकि, यह तो साफ हो गया है धोनी बतौर खिलाड़ी ही अगला आईपीएल स्पोर्ट्सेंगे. जहीर के सामने होगी बड़ी जिम्मेदारी जहीर खान के लिए CSK के साथ यह पहली बार होगा जब वह किसी IPL फ्रेंचाइजी के हेड कोच की भूमिका निभाएंगे. इससे पहले वह मुंबई इंडियंस के क्रिकेट ऑपरेशंस और मेंटरिंग सेटअप का हिस्सा रह चुके हैं और लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ भी मेंटर के तौर पर काम कर चुके हैं. अब उनकी सबसे बड़ी चुनौती CSK को दोबारा मजबूत टीम के रूप में तैयार करना होगी. टीम IPL 2026 में प्लेऑफ तक नहीं पहुंच सकी थी और पहली बार अंक तालिका में आखिरी स्थान पर रही. ऐसे में IPL 2027 के लिए टीम में बदलाव, खिलाड़ियों की भूमिका तय करना और नए संयोजन तैयार करना जहीर की प्राथमिकताओं में शामिल होगा. ये भी पढ़ें: CSK Head Coach: चेन्नई सुपर किंग्स के नए हेड कोच का हुआ ऐलान, विदेशी कोच नहीं बल्कि इस हिंदुस्तानीय तेज गेंदबाज को मिली जिम्मेदारी The post प्लेयर या मेंटर? CSK ने तय किया धोनी का फ्यूचर, जहीर खान के कोच बनते ही साफ हुआ मामला appeared first on Naya Vichar.

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