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क्या आपके बच्चे की उम्र 10 से 13 साल के बीच है? भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, वरना आपसे दूर होने लगेगा बच्चा

Parenting Tips: जब शिशु की उम्र 10 से 13 साल के बीच होती है, तो यह उनकी जिंदगी का एक ऐसा दौर होता है जिसमे वे न तो बहुत छोटे रह जाते हैं और न ही पूरी तरह से बड़े होते हैं. इस समय शिशु के शरीर, सोच और इमोशंस में बहुत सारे बदलाव आने लगते हैं. यह उम्र ऐसी होती है जिसमे वे खुद को समझने की कोशिश कर रहे होते हैं और कई बार तो छोटी छोटी बातों पर भी हद से ज्यादा इमोशनल हो जाते हैं. अगर आपके घर पर भी ऐसे शिशु हैं जिनकी उम्र 10 से 13 साल के बीच है, तो आपको उनका खास ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए. कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप अपने शिशु की भलाई के लिए या फिर अनजाने में ही कुछ ऐसी बातें कह देते हैं, जो सीधे जाकर उनके दिल पर चोट करती हैं. ऐसे में बच्चा ऊपर से तो शांत दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर हर समय परेशान और उदास रहने लगता है. आज के इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी 5 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको कभी भी इस उम्र में अपने शिशु से नहीं कहनी चाहिए. चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं. things you must not say to your kids दूसरों से कंपेयर करना अगर आपके शिशु की उम्र 10 से 13 साल के बीच है, तो आपको कभी भी उसकी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए. कई बार माता पिता अपने शिशु से कह देते हैं “देखो उस लड़के के कितने अच्छे मार्क्स आए हैं” या फिर “तुम्हारा दोस्त कितना समझदार है, तुम कब उससे कुछ सीखोगे?”. इस तरह की बातें आपके शिशु के कॉन्फिडेंस को पूरी तरह से खत्म कर देती हैं. जब आप अपने शिशु की तुलना किसी और से करते हैं, तो उसे ऐसा लगने लगता है कि वह कभी आपकी नजरों में परफेक्ट नहीं बन पाएगा. आपके ऐसा कहने की वजह से आपके शिशु के मन में अपने ही दोस्तों या फिर भाई बहनों के लिए जलन और खुद के लिए निराशा भर जाती है. ये भी पढ़ें: मां की ये 5 आदतें तय करती हैं बेटी का भविष्य, इन्हीं से बनती है उसकी सोच और पर्सनालिटी उनकी प्रॉब्लम को छोटा समझना या इग्नोर करना कई बार जब बच्चा स्कूल या फिर दोस्तों से जुड़ी कोई प्रॉब्लम लेकर पैरेंट्स के पास आता है, तो उसे अक्सर यह सुनने को मिलता है कि “अरे, यह तो कोई बड़ी बात नहीं है” या फिर “तुम बिना किसी बात के ओवररियेक्ट कर रहे हो”. हो सकता है कि आपके लिए यह बहुत ही छोटी बात हो, लेकिन एक 10 से 13 साल के शिशु के लिए यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रॉब्लम हो सकती है. जब आप अपने शिशु की बातों को सीरियसली नहीं लेते हैं, तो वह अकेला महसूस करने लगता है और आपसे अपने दिल की बातों को शेयर करना भी बंद कर देता है. दोस्तों या सबके सामने डांटना या मजाक उड़ाना इस उम्र में बच्चों के अंदर सेल्फ रिस्पेक्ट की भावना आने लगती है. अगर आप सबके सामने, खासकर उनके दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने उनकी गलती बताते हैं, डांटते हैं या मजाक उड़ाते हैं, तो उन्हें बहुत ज्यादा शर्मिंदगी महसूस होती है. यह शर्मिंदगी आगे चलकर गुस्से या चिड़चिड़ेपन में बदल जाती है और बच्चा पैरेंट्स से दूरी बनाने लगता है. ये भी पढ़ें: सिर्फ पढ़ाई नहीं, 5 से 10 साल की उम्र में बच्चों को जरूर सिखाएं ये आदतें, जो बनाएंगी उन्हें जिंदगी में सफल और जिम्मेदार हर बात पर ओवर कंट्रोल करना और भरोसा न करना एक पैरेंट होने के नाते अपने शिशु का ख्याल रखना बहुत ही अच्छी बात है, लेकिन हर छोटी-छोटी चीज पर रोक-टोक करना जैसे कि, “वहां क्यों जा रहे हो?”, “उससे बात मत करो”, या “तुमसे यह काम ठीक से नहीं हो पाएगा” कहना शिशु को अंदर से परेशान कर देता है. जब पैरेंट्स हर बात पर शक करते हैं या कम भरोसा दिखाते हैं, तो बच्चों को लगता है कि वे किसी काम के नहीं हैं. इस उम्र में बच्चों को थोड़ा स्पेस देना और छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना बहुत जरूरी होता है. हर समय सिर्फ पढ़ाई और मार्क्स का प्रेशर बनाना आज के समय में बच्चों पर पढ़ाई करने का और अच्छे मार्क्स लाने का प्रेशर वैसे ही बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में अगर आप घर पर भी उसे हर समय सिर्फ “पढ़ाई कर लो” या “मार्क्स कम लाओगे तो क्या होगा?” जैसी बातें कहेंगे, तो आपका बच्चा मेंटली थक जाएगा. बच्चों की तारीफ सिर्फ उनके रिजल्ट से मत कीजिए, बल्कि उन्होंने कितनी मेहनत की है इसकी भी कद्र कीजिए. जब पैरेंट्स सिर्फ मार्क्स पर फोकस करते हैं, तो शिशु को लगने लगता है कि उनका प्यार सिर्फ अच्छे रिजल्ट्स से जुड़ा है. ये भी पढ़ें: क्या आपका बच्चा नए लोगों के सामने चुप हो जाता है? उसकी झिझक दूर करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके The post क्या आपके शिशु की उम्र 10 से 13 साल के बीच है? भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, वरना आपसे दूर होने लगेगा बच्चा appeared first on Naya Vichar.

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Video: पीएम मोदी ने शेयर किया 30 सेकेंड का वीडियो संदेश, देशवासियों से की खास अपील

अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, “आइये 15 अगस्त को आन-बान-शान के साथ मनाएं. हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें और विकसित हिंदुस्तान का संकल्प लें.” अभियान के मुख्य मंत्र को दोहराते हुए उन्होंने आगे कहा, “हर घर तिरंगा, घर-घर तिरंगा, हर मन तिरंगा. आइये, हर घर पर तिरंगा लहराइये.” गृह मंत्रालय ने दिया ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश दिया. मंत्रालय ने कहा कि हालांकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और स्पोर्ट्स आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने झंडे लहरा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रमों के बाद उन्हें फेंका या जमीन पर नहीं डाला जाना चाहिए. मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएं और इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के जरिए इनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें. गृह मंत्री अमित शाह ने तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकों से तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के माध्यम से इस अभियान में भाग लेने और इसे मनाने तथा हर घर तिरंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की. “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हमारे राष्ट्र की सामूहिक ताकत का प्रतिबिंब है, जो हमें एक ‘विकसित हिंदुस्तान’ के निर्माण के हमारे प्रयास में एकजुट करता है. इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का अवसर इस अभियान के साथ मिलकर हर देशभक्त के लिए इस पल को और भी भावुक और खास बना देता है.” – अमित शाह कैसा होना चाहिए राष्ट्रीय ध्वज? गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और बुना हुआ या मशीन से बना होना चाहिए, और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी की होनी चाहिए. ध्वज संहिता क्या है? ध्वज संहिता में कहा गया, “कोई भी आम नागरिक, निजी संस्था या शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, किसी भी दिन या अवसर पर-चाहे वह औपचारिक हो या कोई अन्य-राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है. 19 जुलाई, 2022 के आदेश के जरिए ‘हिंदुस्तानीय झंडा संहिता, 2002’ में संशोधन किया गया था… यदि तिरंगा खुले स्थान पर या किसी आम नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है तो उसे दिन-रात फहराया जा सकता है.” इसमें स्पष्ट किया गया कि जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए, और फटा हुआ एवं मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित न किया जाए. झंडे को किसी झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाना चाहिए झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाए. इसमें कहा गया, “संहिता के भाग-3 की धारा-9 में उल्लखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि, के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं लगाया जाएगा. किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचाई पर या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए.” ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा, पैलेट गन और छात्रों को लाठियों से पीटने का आदेश किसने दिया? The post Video: पीएम मोदी ने शेयर किया 30 सेकेंड का वीडियो संदेश, देशवासियों से की खास अपील appeared first on Naya Vichar.

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विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट CM Hemant Soren Statement: झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को JPSC परीक्षाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने सदन में कहा कि 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द किया जाएगा. इसके साथ ही दो बैकलॉग JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही. मुख्यमंत्री ने TDPL के माध्यम से करायी गयी परीक्षा की जांच कराने की भी घोषणा की. छात्रों के आंदोलन और परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर विधानसभा में चल रहे सियासी घमासान के बीच प्रशासन की ओर से यह महत्वपूर्ण घोषणा की गयी. छात्रों से बातचीत पर गंभीरता से प्रशासन कर ही विचार मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बातचीत में सामने आये मुद्दों पर प्रशासन गंभीरता से विचार कर रही है. प्रशासन छात्रों की समस्याओं को समझ रही है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है. हाल के दिनों में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान प्रशासन के रुख में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. JPSC परीक्षा को लेकर सीएम ने सदन में क्या कहा? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में JPSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे पर प्रशासन का पक्ष रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द किया जाएगा. इसके अलावा दो बैकलॉग JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही. उन्होंने TDPL के माध्यम से करायी गयी परीक्षा की जांच कराने की बात भी सदन में कही. प्रशासन के इस फैसले से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. प्रशासन और छात्रों के बीच हाल में हुई बातचीत में भी TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं की जांच का मुद्दा सामने आया था. रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन ने TDPL से करायी गयी परीक्षाओं की जांच के लिए सहमति जतायी है. बीजेपी पर सीएम का तीखा तंज छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष के हमले के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर भी तीखा नेतृत्वक हमला किया. उन्होंने कहा कि पहले बीजेपी के लोग गेरुआ वेश में लोगों को ठगते थे और अब छात्रों के वेश में लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. छात्रों की मांगों और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बीजेपी विधायक लगातार प्रशासन को घेरने की कोशिश कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए प्रशासन की ओर से छात्रों के मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतने की बात कही. छात्रों का आंदोलन अभी जारी विधानसभा में नेतृत्वक बयानबाजी का यह दौर ऐसे समय में हुआ, जब छात्र लंबे समय से JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षाओं की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल रही है. सीपी सिंह ने सदन में दिखाई नोटों की गड्डी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने भी प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने सदन में नोटों की गड्डी दिखायी. इसके जरिए उन्होंने राज्य में प्रशासनी नौकरियों और परीक्षा प्रक्रिया में कथित लेन-देन की ओर इशारा करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाने की कोशिश की. सीपी सिंह के इस कदम का सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने जोरदार विरोध किया. इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच माहौल और गरमा गया. छात्रों की परीक्षा संबंधी मांग पहले से नेतृत्वक विवाद का केंद्र बनी हुई थी, ऐसे में नोटों की गड्डी दिखाने की घटना ने विधानसभा की कार्यवाही को और हंगामेदार बना दिया. प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का दिया भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन छात्रों के मुद्दे पर संवेदनशील है और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात दोहरायी. प्रशासन की ओर से 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने तथा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच की घोषणा को आंदोलन के बीच अहम कदम माना जा रहा है. हालांकि, छात्रों की ओर से पहले से उठायी जा रही सभी मांगों पर अंतिम सहमति बनना अभी अलग विषय है. प्रशासन की घोषणाओं के बाद भी आंदोलन को लेकर छात्रों का रुख पूरी तरह बदलने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है. हाल की वार्ताओं में प्रशासन और छात्रों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन कुछ प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम रहा. हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सदन विधानसभा में हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. सदन की कार्यवाही 12 अगस्त तक प्रस्तावित थी, लेकिन निर्धारित समय से एक दिन पहले ही कार्यवाही समाप्त हो गयी. सत्र के अंतिम दिन विपक्षी विधायक छात्रों के मुद्दे और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन पर हमलावर रहे. वहीं, प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर बातचीत और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया. हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और अंततः अध्यक्ष ने इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. इसे भी पढ़ें: विधानसभा में हेमंत सोरेन का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- छात्रों की आड़ में की जा रही नेतृत्व JPSC परीक्षा विवाद पर प्रशासन के कदमों पर नजर विधानसभा में मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बाद अब JPSC परीक्षा विवाद में प्रशासन के अगले कदम पर नजर रहेगी. खासकर 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की प्रक्रिया तथा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच किस स्तर पर और किस तरीके से होती है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा. छात्रों के आंदोलन के बीच प्रशासन के इन फैसलों से विवाद को शांत करने की कोशिश जरूर दिखती है, लेकिन नेतृत्व में घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच जो लंबा गलियारा होता है, उसमें ही असली परीक्षा होती है. इसे भी पढ़ें: Jharkhand Vidhan Sabha March: छात्रों पर लाठी

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VIDEO : पटना में BPSC-BSSC की लापरवाही पर छात्रों का महाआंदोलन, विधायक संदीप सौरभ ने किया ऐलान, सुनिए क्या कह रहे हैं

राजधानी पटना में एक बार फिर छात्र आंदोलन हो सकता है. BPSC-BSSC में लापरवाही को लेकर छात्र आंदोलन कर सकते हैं. माले विधायक संदीप सौरभ ने छात्र आंदोलन का ऐलान किया है. साथ ही प्रशासन और बीपीएससी और बीएसएससी पर गंभीर आरोप भी लगाया है. उन्होंने छात्रों से अपील की है कि वो पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन में शामिल हो. उन्होंने दावा किया कि प्रशासन छात्रों के हित को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है. सुनिए संदीप सौरभ क्या कह रहे हैं? Also Read : PHOTOS : थावे धाम से लेकर भोरे के शिवालय तक, गोपालगंज के इन सात प्रसिद्ध मंदिरों का वैभव देखिए The post VIDEO : पटना में BPSC-BSSC की लापरवाही पर छात्रों का महाआंदोलन, विधायक संदीप सौरभ ने किया ऐलान, सुनिए क्या कह रहे हैं appeared first on Naya Vichar.

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Jharkhand Bandh Live Updates: रामगढ़ के सुभाष चौक पर JCB लगाकर चक्का जाम, BJP बोली- ‘छात्रों पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं’

जेपीएससी नियुक्ति में गड़बड़ी को लेकर झारखंड बीजेपी ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. रांची में पार्टी कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर और रोड ब्लॉक कर अपना विरोध जताया है. The post Jharkhand Bandh Live Updates: रामगढ़ के सुभाष चौक पर JCB लगाकर चक्का जाम, BJP बोली- ‘छात्रों पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं’ appeared first on Naya Vichar.

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सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर को मौत की सजा, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी

सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को दमिश्क की एक आपराधिक अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें देश में चले लंबे गृहयुद्ध के दौरान हुए युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना. दिसंबर 2024 में असद प्रशासन के पतन और उनके रूस भाग जाने के बाद यह मौत की सजा दी गई है. इस फैसले को सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व शासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. 24 साल तक सीरिया पर किया शासन बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद के निधन के बाद सीरिया की सत्ता संभाली थी. उनके पिता करीब तीन दशक तक देश के राष्ट्रपति रहे थे. बशर अल-असद ने करीब 24 वर्षों तक देश पर शासन किया. लेकिन दिसंबर 2024 में इस्लामवादी नेतृत्व वाले विद्रोही गुटों के दमिश्क की ओर बढ़ने के बाद उनकी प्रशासन गिर गई. इसके बाद असद अपने परिवार के साथ रूस चले गए. सत्ता परिवर्तन के बाद अहमद अल-शरा के नेतृत्व में संक्रमणकालीन प्रशासन का गठन हुआ. असद के भाईयों को भी मौत की सजा अदालत ने असद के भाई माहेर अल असद और उनके चचेरे भाई और दक्षिणी प्रांत दारा में नेतृत्वक सुरक्षा निदेशालय के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी मृत्युदंड सुनाया है. नजीब अदालत में मौजूद होकर मुकदमे का सामना कर रहे थे. उन्हें जानबूझकर हत्या और यातना देने का दोषी पाया गया. 2011 में शुरू हुआ था सीरियाई गृहयुद्ध सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत 2011 में दारा शहर से हुई थी. प्रशासन विरोधी प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, जिसके बाद आंदोलन पूरे देश में फैल गया. आगे चलकर यह संघर्ष प्रशासन, सशस्त्र विद्रोही समूहों और विदेशी शक्तियों के बीच बड़े युद्ध में बदल गया. इस संघर्ष में लाखों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. ये भी पढ़ें:- हिंदुस्तान ही नहीं, 15 अगस्त को एक और देश आजाद हुआ था, लेकिन अफसोस… आजादी के बाद वह दो देशों में बंट गया असद प्रशासन पर गंभीर आरोप गृहयुद्ध के दौरान असद प्रशासन पर आम नागरिकों की हत्या, यातना, जबरन गायब करने, मनमानी गिरफ्तारी और रिहायशी इलाकों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने प्रशासनी बलों के साथ-साथ अन्य सशस्त्र गुटों द्वारा किए गए कथित उल्लंघनों को भी दर्ज किया. असद प्रशासन पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप भी लगा. रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जांच तंत्रों ने कई हमलों के लिए सीरियाई प्रशासनी बलों को जिम्मेदार ठहराया. पूर्व शासन के खिलाफ जारी है कानूनी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जांच में सीरिया की जेलों में यातना और हिरासत के दौरान लोगों की मौत के मामले भी सामने आए. यूरोप की कुछ अदालतों में असद प्रशासन से जुड़े पूर्व सुरक्षा अधिकारियों पर भी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर मुकदमे चल चुके हैं. मौत की सजा ऐसे समय आई है जब सीरिया की संक्रमणकालीन प्रशासन पूर्व शासन के अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है. कुछ आरोपी अदालत में पेश हो रहे हैं, जबकि बशर अल-असद जैसे कुछ लोगों का मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चलाया जा रहा है. ये भी पढ़ें:- पहले ईरान को बर्बाद किया, अब उसी से हर्जाना मांग रहे ट्रंप, 50 साल के नुकसान और 52 हजार मौतों का मांगा हिसाब The post सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर को मौत की सजा, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी appeared first on Naya Vichar.

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सूर्य ग्रहण और सावन अमावस्या का महा-संयोग, जानिए अपनी राशि के अनुसार क्या करें दान

Sawan Amavasya 2026 Donation: साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण आज 12 अगस्त को लगेगा. इसी दिन सावन अमावस्या भी है. धार्मिक मान्यता में अमावस्या तिथि पर दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता को विशेष महत्व दिया जाता है. राशि के अनुसार दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति की मान्यता है. हालांकि, ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. मेष राशि मेष राशि के जातक सावन अमावस्या पर लाल मसूर दाल, गुड़ और लाल वस्त्र का दान कर सकते हैं. जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए चावल, दूध, सफेद वस्त्र और चीनी का दान करना शुभ माना जाता है. किसी जरूरतमंद परिवार को राशन देना भी अच्छा विकल्प हो सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातक हरी मूंग, हरी सब्जियां और हरे वस्त्र दान कर सकते हैं. विद्यार्थियों को कॉपी-किताब या लेखन सामग्री देना भी पुण्यकारी माना जाता है. कर्क राशि कर्क राशि वालों को दूध, चावल, सफेद कपड़े और जलपात्र का दान करना चाहिए. किसी जरूरतमंद को भोजन कराने से भी धार्मिक लाभ मिलने की मान्यता है. सिंह राशि सिंह राशि के जातक गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल-पीले वस्त्र का दान कर सकते हैं. किसी गरीब व्यक्ति को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है. कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए हरी मूंग, धनिया, हरी सब्जियां और स्टेशनरी का दान उपयोगी माना जाता है. जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करना भी अच्छा रहेगा. ये भी पढ़ें: सावन अमावस्या और सूर्यग्रहण का दुर्लभ संयोग! जानिए क्यों 12 अगस्त का दिन माना जा रहा है इतना खास? तुला राशि तुला राशि के जातक सफेद वस्त्र, चावल, चीनी और सुगंधित वस्तुओं का दान कर सकते हैं. किसी स्त्री को जरूरत की सामग्री देना भी शुभ माना जाता है. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों को मसूर दाल, लाल वस्त्र, गुड़ और तांबे की वस्तु का दान करना चाहिए. सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को भोजन भी करा सकते हैं. धनु राशि धनु राशि के जातक पीली दाल, हल्दी, केले और पीले वस्त्र दान कर सकते हैं. किसी जरूरतमंद विद्यार्थी को किताबें देना भी शुभ माना जाता है. मकर राशि मकर राशि वालों के लिए काले तिल, उड़द दाल, कंबल या गहरे रंग के वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है. जरूरतमंद श्रमिक की सहायता भी कर सकते हैं. कुंभ राशि कुंभ राशि के जातक काले तिल, सरसों का तेल, कंबल और खाद्य सामग्री का दान कर सकते हैं. किसी गरीब या बुजुर्ग व्यक्ति की सहायता करना भी पुण्यकारी माना जाता है. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए पीली दाल, चने की दाल, हल्दी और पीले वस्त्र का दान शुभ माना जाता है. जरूरतमंद को भोजन कराना विशेष रूप से अच्छा माना जाता है. The post सूर्य ग्रहण और सावन अमावस्या का महा-संयोग, जानिए अपनी राशि के अनुसार क्या करें दान appeared first on Naya Vichar.

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6 बार हुए फेल, पिता ने बेची जमीन, नवादा के लाल ऐसे बने IPS ऑफिसर

UPSC ऐसी कठिन परीक्षा है, जिसमें कैंडिडेट्स का एक बार में सेलेक्शन नहीं होता है. कैंडिडेट्स को कई-कई साल लग जाते हैं. लेकिन कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है. उन्हें एक दिन सफलता जरूर मिलती है. IPS अधिकारी आलोक राज नारायण की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आइए, जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी.  लगातार 6 अटेंप्ट में मिली असफलता  आलोक ने 2015 में UPSC CSE की तैयारी शुरू की थी. शुरुआत के 6 प्रयास में उन्हें असफलता मिली. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और UPSC CSE 2021 में मेहनत के दम पर AIR 346 हासिल किया. उन्होंने पुलिस सेवा को चुना.  आलोक राज नारायण (PC-इंस्टाग्राम) प्रशासनी स्कूल से की है पढ़ाई  पांचवी तक तो उन्होंने गांव के ही प्रशासनी स्कूल (Sarkari School) से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कई स्कूलों में पढ़ाई की और 12वीं के बाद दिल्ली से BTech की डिग्री हासिल की. आलोक को सिविल सेवा में आना था. इसी ख्याल के कारण उन्होंने बीटेक के बाद पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने क्रिमिनल जस्टिस मैनेजमेंट कोर्स में मास्टर्स डिग्री भी हासिल की.  ये भी पढ़ें: शिक्षक पिता के 3 शिशु बने अफसर, किसी ने UPSC CAPF तो किसी ने CBI में पाई सफलता The post 6 बार हुए फेल, पिता ने बेची जमीन, नवादा के लाल ऐसे बने IPS ऑफिसर appeared first on Naya Vichar.

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Parliament Live: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में बिना चर्चा पास हुआ ‘केरल नाम परिवर्तन विधेयक’

Parliament Live: संसद का मानसून सत्र मंगलवार को भी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है और अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं. मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई. संसद में जारी हलचल, सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रदर्शन और दिनभर की हर बड़ी समाचार से जुड़े अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ. The post Parliament Live: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में बिना चर्चा पास हुआ ‘केरल नाम परिवर्तन विधेयक’ appeared first on Naya Vichar.

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Jharkhand Bandh Live Updates: पाकुड़ में दर्जनों बीजेपी कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

जेपीएससी नियुक्ति में गड़बड़ी को लेकर झारखंड बीजेपी ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. रांची में पार्टी कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर और रोड ब्लॉक कर अपना विरोध जताया है. The post Jharkhand Bandh Live Updates: पाकुड़ में दर्जनों बीजेपी कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में, प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा appeared first on Naya Vichar.

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