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क्या राहुल गांधी को गिरफ्तार कर परिसीमन विधेयक पास कराने की तैयारी कर रही है मोदी सरकार?

क्या राहुल गांधी की गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है? नेतृत्वक गलियारों में यह चर्चा इन दिनों जोर पकड़ रही है. इसकी वजह पिछले कुछ दिनों में सामने आए कई अहम घटनाक्रम हैं. इनमें राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR, सितंबर में संसद के संभावित विशेष सत्र की चर्चा और परिसीमन को लेकर प्रशासन की सक्रियता शामिल है. इन घटनाओं को एक साथ रखकर देखें तो एक सवाल जरूर खड़ा होता है. क्या कानूनी कार्रवाई के जरिए राहुल गांधी और विपक्ष को नेतृत्वक रूप से कमजोर कर परिसीमन से जुड़े विधेयक को आसानी से पारित कराने की तैयारी है? या फिर यह सिर्फ नेतृत्वक अटकल है? राहुल गांधी के खिलाफ FIR से बढ़ी हलचल राहुल गांधी की गिरफ्तारी को लेकर लगाई जा रही अटकलों के पीछे उत्तराखंड में दर्ज FIR अहम वजह मानी जा रही है. उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर विवाद हुआ था. इसी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत कुछ अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. इसके बाद सवाल उठने लगा कि क्या जांच आगे बढ़ने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, अभी उनकी गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है. परिसीमन को लेकर क्या है प्रशासन की तैयारी इसी बीच लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर केंद्र प्रशासन की सक्रियता भी चर्चा में है.कई मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि प्रशासन सितंबर में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है. इस दौरान स्त्री आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो यह दूसरा मौका होगा जब प्रशासन स्त्री आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को लेकर संसद में विधेयक लाने की कोशिश करेगी. इससे पहले बजट सत्र में भी प्रशासन इस दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन विधेयक पारित नहीं हो सका था. परिसीमन इसलिए बड़ा मुद्दा है क्योंकि इसका असर आने वाले समय में लोकसभा की सीटों और राज्यों के नेतृत्वक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है. यही वजह है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान लगातार बनी हुई है. ये भी पढ़ें: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया राघव चड्ढा का नाम, जानें SIR के बाद कैसे चेक कर सकते है अपना नाम विपक्ष के लिए क्यों है अहम राहुल गांधी ? परिसीमन के मुद्दे पर राहुल गांधी प्रशासन के मुखर आलोचक रहे हैं और वो लोकसभा में मौजूदा नेता विपक्ष है. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी के लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच नेतृत्वक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या किसी कानूनी कार्रवाई के जरिए जानबूझ कर राहुल गांधी को इस अहम नेतृत्वक बहस से दूर करने की कोशिश हो सकती है? परिसीमन से जुड़े संवैधानिक बदलावों के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत पड़ती है. ऐसे में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. यही वजह है कि उत्तराखंड की एफआईआर को भी अब परिसीमन से जुड़े संभावित घटनाक्रम के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, दोनों के बीच किसी सीधी प्रशासनी रणनीति का कोई ठोस सबूत फिलहाल सामने नहीं आया है. UNGA की बैठक और परिसीमन का क्या कनेक्शन? सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र भी शुरू होने जा रहा है. इसकी शुरुआत 8 सितंबर से होगी और 28 सितंबर तक चलेगा. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों में हिंदुस्तान से भी कई प्रतिनिधि और नेता भी शामिल होंगे है. नतीजा अगर संसद का विशेष सत्र होता है तो सांसदों की संख्या में कमी रह सकती है. ऐसे में यह सवाल उठाया रहा है कि इसी दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाकर प्रशासन इस समय का इस्तेमाल परिसीमन से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहती है? हालांकि, यह कहना कि यूएनजीए के कारण संसद में सांसदों की संख्या कम होगी और प्रशासन को विधेयक पारित कराने में सीधा फायदा मिलेगा, फिलहाल एक अनुमान है. राहुल गांधी के आवास के पास बैरिकेडिंग का क्या मतलब? राहुल गांधी के आवास के आसपास दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग की समाचारों ने भी इन अटकलों को हवा दी है. कुछ लोग इसे संभावित कानूनी कार्रवाई से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि, एक दूसरा दावा यह भी है कि गृह मंत्री अमित शाह के आवास के घेराव की आशंका और उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए यह एहतियाती व्यवस्था की गई है. इसलिए सिर्फ बैरिकेडिंग के आधार पर राहुल गांधी की गिरफ्तारी की तैयारी का निष्कर्ष निकालना फिलहाल सही नहीं होगा. क्या गिरफ्तारी और परिसीमन के बीच कोई कड़ी है? पूरी तस्वीर में एक तरफ राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर है और दूसरी तरफ परिसीमन को लेकर प्रशासन की संभावित तैयारी. इसी बीच संसद के विशेष सत्र और सितंबर में होने वाले यूएनजीए कार्यक्रम की चर्चा भी है. इन घटनाओं को जोड़कर अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें और विपक्ष को नेतृत्वक रूप से कमजोर करना चाहती है, ताकि परिसीमन से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने में विरोध की चुनौती कम हो जाए? फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब नहीं है. राहुल गांधी की गिरफ्तारी की भी पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए इसे अभी एक नेतृत्वक आशंका और अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. आने वाले दिनों में प्रशासन और जांच एजेंसियों के कदम ही बताएंगे कि इन घटनाओं के बीच वास्तव में कोई कड़ी है या नहीं. ये भी पढ़ें: पाकिस्तान और चीन की हरकतों पर नजर रखेगा हिंदुस्तान का ‘नॉटी बॉय’, जानिए EOS-05 की क्या है खासियत The post क्या राहुल गांधी को गिरफ्तार कर परिसीमन विधेयक पास कराने की तैयारी कर रही है मोदी प्रशासन? appeared first on Naya Vichar.

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Aaj Ka Mausam: 4 सितंबर को UP-MP से Bihar और Delhi-NCR तक भारी बारिश का अलर्ट, जानें देशभर में कैसा रहेगा मौसम

Aaj Ka Mausam: सितंबर की शुरुआत के साथ देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है. हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 सितंबर को मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में बारिश की चेतावनी जारी की है. वहीं पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल-सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है. MP में भारी बारिश का दौर जारी मध्य प्रदेश में 4 सितंबर को मौसम खास तौर पर सक्रिय रहने वाला है. IMD के मुताबिक प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बहुत भारी बारिश हो सकती है. साथ ही कई जगह गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है. मौसम विभाग ने MP में 5 सितंबर को भी बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. यानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सतना, सागर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में रहने वाले लोगों को आज मौसम पर नजर रखनी होगी. लगातार बारिश वाले इलाकों में जलभराव और निचले स्थानों पर पानी बढ़ने की स्थिति बन सकती है. दिल्ली-NCR से उत्तराखंड तक बारिश दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 4 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट है. IMD ने इन इलाकों के लिए 5 सितंबर को भी भारी बारिश की चेतावनी दी है. राजधानी दिल्ली में बारिश के साथ मौसम सुहावना हो सकता है, लेकिन तेज बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव की परेशानी भी बढ़ सकती है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी आज भारी बारिश की चेतावनी है. उत्तराखंड में 10 सितंबर तक अलग-अलग दिनों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बारिश के साथ गरज-चमक की भी संभावना है. पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत है. पश्चिमी यूपी और राजस्थान में भी अलर्ट उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 4 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है. IMD ने पश्चिमी यूपी के लिए अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है, जबकि पूर्वी यूपी में आज कोई अलग भारी बारिश चेतावनी नहीं है. राजस्थान में पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना है. वहीं पश्चिमी राजस्थान में आंधी-गरज और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है. पूर्वोत्तर और बंगाल में भी बरसेंगे बादल पूर्वोत्तर हिंदुस्तान में भी बारिश का दौर बना हुआ है. IMD ने असम और मेघालय में 4 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक की चेतावनी दी है. इन दोनों राज्यों में आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने का अनुमान है. वहीं पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 4 सितंबर को भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना है. IMD के मुताबिक इन इलाकों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है. दक्षिण हिंदुस्तान में बारिश कुछ सीमित दक्षिण हिंदुस्तान के कई हिस्सों में फिलहाल बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है. हालांकि कर्नाटक के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है. IMD ने उत्तर और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान जैसी स्थिति की चेतावनी दी है. 4 सितंबर का मौसम एक नजर में 🌧️ इलाका ⚠️ IMD का अलर्ट मध्य प्रदेश 🌧️ बहुत भारी बारिश पश्चिमी उत्तर प्रदेश 🌧️ भारी बारिश दिल्ली-NCR, हरियाणा, चंडीगढ़ 🌧️ भारी बारिश उत्तराखंड 🌧️ भारी बारिश + ⚡ गरज-चमक हिमाचल प्रदेश 🌧️ भारी बारिश जम्मू-कश्मीर व लद्दाख 🌧️ भारी बारिश + ⚡ गरज-चमक पूर्वी राजस्थान 🌧️ भारी बारिश + ⚡ गरज-चमक असम-मेघालय 🌧️ भारी बारिश + ⚡ गरज-चमक पश्चिम बंगाल-सिक्किम 🌧️ भारी बारिश + ⚡ गरज-चमक कर्नाटक के कुछ हिस्से ⚡ गरज-चमक और तेज हवाएं ये भी पढ़ें: MP Weather Aaj Ka Mausam: 4 सितंबर को इन जिलों में बारिश के आसार, कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल The post Aaj Ka Mausam: 4 सितंबर को UP-MP से Bihar और Delhi-NCR तक भारी बारिश का अलर्ट, जानें देशभर में कैसा रहेगा मौसम appeared first on Naya Vichar.

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Disha Salian केस में CBI जांच का आदेश: वकील Nilesh Ojha का दावा – ‘हमारे पास डिजिटल सबूत, अब बच नहीं पाएंगे आरोपी’

Disha Salian Death Case: दिवंगत  एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की  सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला करीब छह साल बाद एक बार फिर सुर्खियों में है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा की मौत की जांच सेंट्रल जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है. कोर्ट ने CBI को इस मामले में FIR दर्ज करने और दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद सतीश सालियान ने उम्मीद जताई है कि अब उनकी बेटी की मौत से जुड़े सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे. क्या कहा दिशा सालियान के वकील ने? कोर्ट से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत में दिशा सालियान के वकील नीलेश ओझा ने मामले को लेकर कई बातें कहीं. उन्होंने दावा किया कि FIR में आदित्य ठाकरे, डीनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, परमवीर सिंह, उद्धव ठाकरे, सचिन वाजे और रोहन राय समेत कई लोगों के नाम आरोपी के तौर पर शामिल हैं. View on Instagram नीलेश ओझा ने कहा कि FIR दर्ज होने के बाद अब मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू होगी. उनके मुताबिक, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सतीश सालियान का बयान दर्ज करने के बाद FIR के आधार पर जांच की जाए. जांच के दौरान जिन लोगों के खिलाफ सबूत मिलेंगे, उन्हें आरोपी बनाया जाएगा और जिनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलेंगे, उनके खिलाफ आगे कार्रवाई नहीं होगी. ‘फांसी की सजा तक पहुंचाने के लिए जितने सबूत चाहिए, उतने हमारे पास हैं’- नीलेश ओझा मीडिया ने जब पूछा कि मामले में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, वे बड़े चेहरे हैं और घटना को करीब छह साल हो चुके हैं। ऐसे में क्या उनके पास पर्याप्त सबूत हैं? इस पर नीलेश ओझा ने दावा किया कि उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. नीलेश ओझा ने दावा किया कि जिन लोगों पर शक है, उनके खिलाफ एक सूची तैयार की गई है. उन्होंने कहा कि मामले को आगे बढ़ाने के लिए उनके पास पर्याप्त सबूत हैं. वकील के मुताबिक, उनके पास डिजिटल सबूत भी हैं, जिन्हें कथित तौर पर आरोपी पक्ष के लिए नकारना आसान नहीं होगा. क्या सभी नाम FIR में शामिल होंगे? मीडिया ने वकील से पूछा कि जब याचिका दायर की गई थी, तब आदित्य ठाकरे समेत करीब 20 लोगों के खिलाफ रेप और हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की गई थी. ऐसे में क्या इन सभी लोगों के नाम FIR में रहेंगे? View on Instagram इस पर नीलेश ओझा ने कहा कि इन्हीं नामों के आधार पर FIR की मांग की गई है. उन्होंने कहा कि कई बार प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला दिखाई देता है, लेकिन FIR में सभी नाम दर्ज नहीं होते. हालांकि, उनका दावा है कि इस मामले में वह एफिडेविट में दिए गए नामों के साथ कोर्ट पहुंचे हैं. कब शुरू होगी जांच? जांच की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस सवाल पर वकील ने कहा कि पहले कोर्ट का आदेश अपलोड होगा. इसके बाद आदेश को पढ़कर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी. उन्होंने बताया कि इसके बाद सतीश सालियान को लेकर उनकी टीम CBI के पास जाएगी. कोर्ट ने किन सबूतों पर सवाल उठाए? मीडिया ने वकील से पूछा कि कोर्ट ने किन प्रमुख सबूतों को गंभीरता से देखा है. इस पर नीलेश ओझा ने कुछ बिंदुओं का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस के रिकॉर्ड में दिशा की बॉडी पर कपड़े नहीं होने की बात दर्ज थी. उनके मुताबिक, दिशा 14वीं मंजिल से गिरी थीं, लेकिन उनके चेहरे पर चोटों को लेकर सवाल उठे. वकील ने कहा कि सामने के दांत टूटे हुए थे, जबकि होंठ बंद थे और नाक पर कोई गंभीर चोट नहीं थी. उनके मुताबिक, इन्हीं बातों को लेकर कोर्ट ने मामले को संदिग्ध माना. View on Instagram वकील ने आगे दावा किया कि दिशा की मौत 8 जून को हुई थी और उनके अनुसार यह हत्या का मामला था. उन्होंने सचिन वाजे की एंट्री के बाद मामले की कहानी बदलने का भी आरोप लगाया. उनका दावा है कि आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए नई कहानी तैयार की गई. नीलेश ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े कुछ दस्तावेजों में झूठी जानकारी दी गई थी, जिसे जज ने पहचान लिया। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. क्या है दिशा सालियान केस  मुंबई के मलाड इलाके में 8 जून 2020 को दिशा सालियन की एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी. उस समय मुंबई पुलिस ने उनकी मौत के मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की थी. मौत से कुछ समय पहले दिशा सालियन ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मैनेजर के तौर पर काम किया था. दिशा की मौत के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई. उनके निधन की अलग से जांच की गई, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच भी शामिल थी. दिशा सालियान डेथ केस (Photo AI) बाद में CBI ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. रिपोर्ट में कहा गया कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या थी. हालांकि, इस क्लोजर रिपोर्ट पर संबंधित अदालत को अभी फैसला लेना बाकी है. यह भी पढ़ें: दिशा केस में आदित्य ठाकरे का दर्द छलका- 6 साल से बदनाम कर रहे… पिता बोले- बेटी-सुशांत की मौत का है 100% कनेक्शन The post Disha Salian केस में CBI जांच का आदेश: वकील Nilesh Ojha का दावा – ‘हमारे पास डिजिटल सबूत, अब बच नहीं पाएंगे आरोपी’ appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood : ‘घबराओ मत, हम बचाने आए हैं…’ त्रिशूली टनल में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिश तेज

Nepal Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच नुवाकोट के त्रिशूली-3A हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट की सुरंग से इंसानी आवाजें सुनाई दी हैं. सुरंग के भीतर फंसे लोगों की आवाजें मिलने के बाद नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स ने अपना रेस्क्यू ऑपरेशन और तेज कर दिया है, जिससे उनके जिंदा बचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं. बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1252 पहुंच गई हैं. वहीं 5 हजार से ज्यादा अब भी लापता बताए जा रहे हैं. अंधेरी सुरंग से आई जिंदा होने की आवाज नेपाल में भीषण बाढ़ और मलबे की मार झेल रहे त्रिशूली-3A हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट से एक राहत भरी समाचार सामने आई है. द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार प्रोजेक्ट की टनल के अंदर फंसे लोगों की आवाजें रेस्क्यू टीम को सुनाई दी हैं. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद और पेशे से इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने ने सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि टनल के भीतर से इंसानों के बोलने की आवाजें साफ सुनी गई हैं, जिसके बाद सेना और पुलिस के जवानों ने सुरंग के भीतर दाखिल होकर राहत काम को दोगुना तेज कर दिया है. ‘घबराओ मत, हम आ गए हैं’… अंदर से आया जवाब- ‘ओके’ सांसद श्रीराम न्यौपाने के मुताबिक, रेस्क्यू टीम को टनल के अंदर एक से ज्यादा लोगों के बोलने की आवाजें सुनाई दी हैं. जब बचाव दल के जवानों ने सुरंग के मुहाने से जोर से आवाज लगाई, “घबराओ मत, हम तुम्हें बचाने के लिए आ गए हैं,” तो अंदर मलबे में फंसे लोगों ने जवाब में कहा, “ओके.” मलबे के बीच से यह आवाज सुनना राहत टीमों के लिए बड़ा हौसला साबित हुआ है. सेना और पुलिस ने झोंकी पूरी ताकत टनल से लोगों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के जवान तेजी से सुरंग के अंदर रास्ता साफ करने में जुट गए हैं. श्रीराम न्यौपाने ने कहा कि बाढ़ के इतने दिनों बाद भी सुरंग से लोगों की आवाजें आना एक बेहद सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाला संकेत है. राहत दल अब बेहद सावधानी से मलबा हटा रहे हैं ताकि अंदर फंसे लोगों को बिना किसी नुकसान के जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. ये भी पढ़ें: MP Weather Aaj Ka Mausam: 4 सितंबर को इन जिलों में बारिश के आसार, कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल The post Nepal Flood : ‘घबराओ मत, हम बचाने आए हैं…’ त्रिशूली टनल में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिश तेज appeared first on Naya Vichar.

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Duleep Trophy Final: केएल राहुल, पडिक्कल और सिराज की वापसी, श्रीलंका सीरीज के बाद इस टीम से खेलेंगे

Duleep Trophy 2026: श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में स्पोर्ट्सने वाले केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल और मोहम्मद सिराज अब दलीप ट्रॉफी के फाइनल में नजर आएंगे. तीनों खिलाड़ी साउथ जोन की टीम का हिस्सा होंगे, जिसका सामना 6 सितंबर से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन से होगा. सितंबर में हिंदुस्तानीय टीम का कोई इंटरनेशनल मुकाबला निर्धारित नहीं होने के कारण इन खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में स्पोर्ट्सने का मौका मिला है. राहुल और पडिक्कल कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि मोहम्मद सिराज घरेलू क्रिकेट में हैदराबाद के लिए स्पोर्ट्सते हैं. श्रीलंका सीरीज के बाद होगी वापसी केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में हिंदुस्तानीय टीम का हिस्सा थे. पडिक्कल ने नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया और अपनी दावेदारी को मजबूत किया. अब दलीप ट्रॉफी का फाइनल उनके लिए एक और बड़ा मौका होगा. खासकर आगामी न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज को देखते हुए पडिक्कल के पास एक और बड़ी पारी स्पोर्ट्सकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने का मौका रहेगा. राहुल और पडिक्कल ने आखिरी बार फरवरी 2026 में कर्नाटक के लिए रणजी ट्रॉफी फाइनल स्पोर्ट्सा था. उस मुकाबले में कर्नाटक का सामना जम्मू-कश्मीर से हुआ था, लेकिन टीम खिताब जीतने में कामयाब नहीं रही थी. ये भी पढ़ें: Abhishek Sharma 26th Birthday: 17 की उम्र में IPL से शुरू हुआ था स्टार बनने का सफर, आज T20I के टॉप बल्लेबाजों में शुमार है नाम राहुल करेंगे ओपनिंग, पडिक्कल को नंबर-3 की जिम्मेदारी साउथ जोन ने नॉर्थ जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में ऋकी भुई और नारायण जगदीशन को ओपनिंग के लिए भेजा था, जबकि शेख रशीद तीसरे नंबर पर उतरे थे. हालांकि, फाइनल में साउथ जोन के टॉप ऑर्डर में बदलाव की उम्मीद है. केएल राहुल के पारी की शुरुआत करने की उम्मीद है, जबकि देवदत्त पडिक्कल नंबर-3 पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में नंबर-3 पर स्पोर्ट्सते हुए पडिक्कल ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसके बाद फाइनल में भी उनसे बड़ी पारी की उम्मीद होगी. वहीं राहुल का अनुभव साउथ जोन के टॉप ऑर्डर को मजबूती देगा. सिराज संभालेंगे तेज गेंदबाजी आक्रमण की कमान साउथ जोन के तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी मोहम्मद सिराज के कंधों पर होगी. नॉर्थ जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में तनय त्यागराजन ने गेंद से अच्छा योगदान दिया था और पहली पारी में दो विकेट हासिल किए थे, लेकिन दूसरी पारी में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली. फाइनल में सिराज की वापसी से साउथ जोन के पेस अटैक को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव और मजबूती मिलेगी. लगातार इंटरनेशनल क्रिकेट स्पोर्ट्सने वाले सिराज का अनुभव ईस्ट जोन के मजबूत बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ काफी अहम हो सकता है. ये भी पढ़ें: स्मृति मंधाना ने तोड़ा मिताली राज का रिकॉर्ड, पूर्व कप्तान ने कहा- ‘गर्व का पल’ तिलक की कप्तानी में फाइनल में पहुंचा साउथ जोन साउथ जोन की कप्तानी हिंदुस्तानीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा कर रहे हैं. टीम ने बुधवार को बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में स्पोर्ट्से गए दूसरे सेमीफाइनल में नॉर्थ जोन को सात विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई. साउथ जोन की टीम अब फाइनल में केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल और मोहम्मद सिराज जैसे इंटरनेशनल खिलाड़ियों की वापसी से और मजबूत नजर आएगी. ईस्ट जोन में ईशान किशन, शमी और वैभव सूर्यवंशी पर नजर पहले सेमीफाइनल में ईस्ट जोन ने डिफेंडिंग चैंपियन सेंट्रल जोन को चार विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी. ईस्ट जोन की टीम में कप्तान ईशान किशन के अलावा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी, अभिमन्यु ईश्वरन, मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार और ऑलराउंडर शाहबाज अहमद जैसे खिलाड़ी शामिल हैं. 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर खास नजरें रहेंगी. वहीं मोहम्मद शमी की मौजूदगी ईस्ट जोन के गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव और मजबूती देती है. हालांकि दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईशान किशन, वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के स्पोर्ट्सने का फैसला गौतम गंभीर की मंजूरी पर निर्भर है. ये भी पढ़ें: MS Dhoni IPL 2027: इम्पैक्ट प्लेयर नहीं बनेंगे एम एस धोनी, बद्रीनाथ ने बताया, क्या है माही की पसंद The post Duleep Trophy Final: केएल राहुल, पडिक्कल और सिराज की वापसी, श्रीलंका सीरीज के बाद इस टीम से स्पोर्ट्सेंगे appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में बारिश कम, फिर भी क्यों उफन रहीं गंगा-गंडक और कोसी? नदियों में कहां से आ रहा इतना पानी, समझिए पूरा खेल

Bihar Flood: बिहार में इस साल अगस्त में बारिश सामान्य से काफी कम रही. इसके बावजूद राज्य की कई बड़ी नदियां उफान पर हैं. गंगा, गंडक, कोसी, सोन, पुनपुन, बागमती और बूढ़ी गंडक का जलस्तर बढ़ा है. कई जगह नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बिहार में बारिश कम हुई, तो नदियों में इतना पानी आया कहां से? इसका जवाब सिर्फ बिहार के मौसम में नहीं है. इसके पीछे नेपाल और हिमालयी इलाकों में हुई भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और अलग-अलग नदियों में एक साथ बढ़े पानी की बड़ी भूमिका है. अगस्त में सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश इस साल अगस्त में बिहार में करीब 155 मिलीमीटर बारिश हुई. यह सामान्य से लगभग 33 फीसदी कम है. यानी अगस्त में बिहार में जितनी बारिश आमतौर पर होती है, उससे काफी कम पानी बरसा. कम बारिश का असर तापमान और उमस पर भी पड़ा. कई इलाकों में गर्मी बनी रही. लेकिन बिहार में कम बारिश का मतलब यह नहीं है कि यहां की नदियों में भी पानी कम रहेगा. नेपाल की बारिश से कैसे बढ़ता है बिहार की नदियों का जलस्तर? बिहार की कई बड़ी नदियों का संबंध नेपाल और हिमालयी क्षेत्र से है. नेपाल के पहाड़ी इलाकों में जब अचानक बहुत ज्यादा बारिश होती है, तो वहां फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है. पहाड़ों से पानी तेजी से नीचे की ओर आता है. छोटी नदियां और नाले भी भर जाते हैं. इनका पानी बड़ी नदियों में पहुंचता है. यही पानी आगे चलकर बिहार की नदियों का जलस्तर बढ़ाता है. इसका असर सबसे पहले सीमावर्ती इलाकों में दिख सकता है. इसके बाद पानी नीचे की ओर बढ़ता है और गंगा जैसी बड़ी नदियों पर भी दबाव बढ़ने लगता है. पटना में बारिश कम, फिर गंगा क्यों बढ़ जाती है? इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए पटना में सिर्फ 10 मिलीमीटर बारिश हुई. लेकिन गंगा के ऊपरी हिस्से में भारी बारिश हुई. वहां से निकला पानी अलग-अलग नदियों के जरिए धीरे-धीरे गंगा में पहुंचता रहेगा. गंगा का नदी क्षेत्र बहुत बड़ा है. इसमें कई राज्यों के इलाके शामिल हैं. इसलिए पटना में कम बारिश होने के बावजूद गंगा का जलस्तर बढ़ सकता है. यानी नदी का पानी सिर्फ उस जगह की बारिश पर निर्भर नहीं करता, जहां नदी बह रही है. गंडक ने भी बढ़ाया गंगा पर दबाव गंडक बिहार की प्रमुख नदियों में शामिल है. इसका जलग्रहण क्षेत्र नेपाल तक फैला है. नेपाल में भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद गंडक में अचानक पानी बढ़ सकता है. जब गंडक में पानी बढ़ता है, तो आगे चलकर इसका असर गंगा पर भी पड़ता है. यही वजह है कि गंडक के बढ़ते जलस्तर के साथ गंगा पर भी दबाव बढ़ सकता है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें एक साथ कई नदियां बढ़ें तो खतरा ज्यादा बिहार में इस समय सिर्फ एक नदी की स्थिति चिंता की वजह नहीं है. कई नदियों का जलस्तर एक साथ बढ़ा है. गंगा का जलस्तर बढ़ा है. गंडक में पानी बढ़ा है. कोसी में भी उफान आया है. बागमती का जलस्तर बढ़ा है. बूढ़ी गंडक में भी पानी बढ़ा है. सोन और पुनपुन ने भी चिंता बढ़ाई है. घाघरा समेत अन्य नदियों में भी पानी बढ़ा है. जब कई नदियां एक साथ बढ़ती हैं, तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. पहाड़ों का पानी मैदानों तक कैसे पहुंचता है? नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश का पानी पहाड़ों से तेजी से नीचे आता है. वहां की भौगोलिक स्थिति इसके लिए जिम्मेदार है. जब यही पानी मैदानी इलाकों में पहुंचता है, तो बड़ी नदियों का हिस्सा बन जाता है. इसलिए नेपाल में बारिश रुकने के बाद भी बिहार में कुछ समय तक नदी का जलस्तर बढ़ सकता है. इसका कारण ऊपर से लगातार नीचे आ रहा पानी होता है. बैराज से छोड़े गए पानी का भी पड़ता है असर नदियों के पानी को नियंत्रित करने के लिए कई जगह बैराज बनाए गए हैं. ऊपर से पानी की आवक बढ़ने पर बैराजों पर भी दबाव बढ़ता है. स्थिति के अनुसार बैराज से पानी छोड़ा जाता है. गंडक नदी पर बने वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़ा गया पानी भी बिहार में नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है. यानी बिहार की नदियों में पानी बढ़ने की कहानी सिर्फ स्थानीय बारिश तक सीमित नहीं है. इसके पीछे नेपाल की बारिश, पहाड़ी इलाकों से आने वाला पानी, सहायक नदियों का बढ़ता जलस्तर और बैराजों से पानी छोड़े जाने जैसी कई वजहें एक साथ काम करती हैं. यही कारण है कि बिहार में बारिश कम होने के बावजूद बड़ी नदियां उफान पर पहुंच सकती हैं. Also Read: बिहार के इन 19 जिलों में बिगड़ा रहेगा मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट, तेज हवा और वज्रपात का भी खतरा The post बिहार में बारिश कम, फिर भी क्यों उफन रहीं गंगा-गंडक और कोसी? नदियों में कहां से आ रहा इतना पानी, समझिए पूरा स्पोर्ट्स appeared first on Naya Vichar.

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Garena Free Fire MAX Redeem Codes on September 4, 2026: फ्री फायर मैक्स प्लेयर्स के लिए खुशखबरी, आज आजमा सकते हैं नया रिडीम कोड

गरेना फ्री फायर मैक्स स्पोर्ट्सने वाले खिलाड़ियों के लिए सितंबर 2024 की शुरुआत रोमांचक साबित हो रही है. गेम में समय-समय पर मिलने वाले रिडीम कोड्स के जरिए खिलाड़ी मुफ्त में डायमंड्स, हथियार स्किन्स, आउटफिट्स और अन्य आइटम हासिल कर सकते हैं. आज 4 सितंबर 2026 को भी कुछ नए कोड्स की चर्चा हो रही है, हालांकि इनकी उपलब्धता सीमित समय के लिए होती है. रिडीम कोड्स से क्या मिल सकता है फ्री फायर मैक्स में रिडीम कोड्स का इस्तेमाल करके खिलाड़ी अपने अकाउंट में विभिन्न रिवॉर्ड्स जोड़ सकते हैं. इनमें डायमंड्स, कैरेक्टर स्किन्स, वेपन स्किन्स, इमोट्स और अन्य कलेक्टिबल्स शामिल रहते हैं. नियमित खिलाड़ियों के लिए यह एक आसान तरीका है जिससे बिना पैसे खर्च किए गेम का अनुभव और बेहतर बनाया जा सकता है. Garena Free Fire MAX Redeem Codes on September 4, 2026: 4 सितंबर, 2026 को गरेना फ्री फायर मैक्स रिडीम कोड्स FE2R8T6Y4U1I FZ5X1C7V9B2N BR43FMAPYEZZ FA3S7D5F1G9H F7F9A3B2K6G8 FP9O1I5U3Y2T 6KWMFJVMQQYG S9QK2L6VP3MR FK3J9H5G1F7D FU1I5O3P7A9S UPQ7X5NMJ64V FT4E9Y5U1I3O FFR4G3HM5YJN FM6N1B8V3C4X कोड रिडीम करने का तरीका रिडीम कोड का इस्तेमाल करना काफी सरल है. सबसे पहले गरेना की आधिकारिक रिवॉर्ड्स रिडेम्पशन वेबसाइट पर जाएं. अपने फ्री फायर मैक्स अकाउंट से लॉगिन करें. दिए गए बॉक्स में कोड सही-सही टाइप करें. सबमिट बटन दबाने के बाद यदि कोड सक्रिय और वैध है तो रिवॉर्ड आपके इन-गेम अकाउंट में आ जाएगा. कोड डालते समय अक्षरों और नंबरों का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी गलती से कोड काम नहीं करता. कोड्स सीमित समय के लिए ही सक्रिय रहते हैं फ्री फायर मैक्स के रिडीम कोड्स आमतौर पर थोड़े समय के लिए ही उपलब्ध रहते हैं. कई बार इनमें रिडेम्पशन लिमिट भी लगी होती है, जिसके पूरा होते ही कोड बंद हो जाता है. इसलिए खिलाड़ियों को सलाह दी जाती है कि नए कोड्स मिलते ही उन्हें जल्द से जल्द इस्तेमाल कर लें. देर करने पर मौका हाथ से निकल सकता है. आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें इंटरनेट पर कई अनऑफिशियल वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स फर्जी कोड्स फैलाते रहते हैं. गलत कोड डालने से अकाउंट को कोई नुकसान तो नहीं होता, लेकिन समय बर्बाद होता है. इसलिए हमेशा गरेना की आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद गेमिंग पोर्टल्स से ही कोड्स की जानकारी लें. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल सवाल 1: फ्री फायर मैक्स रिडीम कोड कहां से मिलेगा? जवाब: आधिकारिक गरेना रिवॉर्ड्स वेबसाइट या भरोसेमंद गेमिंग न्यूज पोर्टल्स से ही कोड्स चेक करें. अनऑफिशियल साइट्स से बचें. सवाल 2: क्या रिडीम कोड से डायमंड्स जरूर मिलते हैं? जवाब: हर कोड में अलग-अलग रिवॉर्ड्स हो सकते हैं. कभी डायमंड्स तो कभी स्किन्स या अन्य आइटम मिलते हैं. सवाल 3: कोड कितने समय तक सक्रिय रहता है? जवाब: ज्यादातर कोड्स सीमित समय और सीमित उपयोग के लिए जारी किए जाते हैं. जल्द इस्तेमाल करना बेहतर होता है. ये भी पढ़ें: Free Fire के 5 पावरफुल गन्स जो मिनटों में बदल देते हैं पूरा गेम, जानें कौन-सी है आपके स्टाइल के लिए परफेक्ट The post Garena Free Fire MAX Redeem Codes on September 4, 2026: फ्री फायर मैक्स प्लेयर्स के लिए खुशसमाचारी, आज आजमा सकते हैं नया रिडीम कोड appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood : नेपाल के त्रिशूली प्रोजेक्ट में 265 मजदूरों को सुरंग में छोड़ भागा चीनी अधिकारी, अब भारत बना सहारा

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही मची है. शव न मिलने या पहचान न होने की स्थिति में कई परिवार अपने प्रियजनों के शवों को न पाकर, उन्हें खोने के दुख में प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं, जो उनकी पीड़ा को और गहरा रहा है. द स्टेट्समैन के मुताबिक,तिब्बत की सीमा के पास एक बड़ी नदी पर बने जलविद्युत प्रोजेक्ट ‘त्रिशूली-3ए’ से जुड़ा एक गंभीर आरोप सामने आया है. एक कर्मचारी का कहना है कि बाढ़ से पहले चीनी सुपरवाइजर 265 कर्मचारियों को सुरंग के भीतर छोड़कर खुद वहां से निकल गया था. 265 मजदूरों को सुरंग में छोड़ने का आरोप त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी राज छेत्री के मुताबिक, प्रोजेक्ट में तैनात चीनी सुपरवाइजर ने सुरंग में मौजूद 265 कर्मचारियों को वहीं छोड़ दिया. कर्मचारी ने बताया कि सुरंग के अंदर अचानक तेज आवाज सुनाई दी. इसके बाद मजदूरों ने सुपरवाइजर से बाहर निकलने की अनुमति मांगी थी. आरोप है कि इसी दौरान सुपरवाइजर खुद वहां से चला गया. मुश्किल हालात में हिंदुस्तान की रेस्क्यू टीम सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और बचाव के लिए हिंदुस्तान भी नेपाल की मदद कर रहा है. हिंदुस्तानीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में अभियान चला रही है. हिंदुस्तानीय दूत ने स्याब्रूबेसी स्थित रेस्क्यू टीम के बेस कैंप का दौरा भी किया. टीम का कहना है कि हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन हिंदुस्तानीय और नेपाली बचावकर्मी अभियान जारी रखेंगे. 100 मीटर अंदर तक पहुंची टीम बचाव दल ने खास तरह के उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक का जायजा लिया है. अब सुरंग में और आगे जाने के लिए भारी मशीनरी और उपकरण पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. रेस्क्यू टीम के सामने मलबे का ढेर और पानी का बहाव बड़ी चुनौतियां पेश कर रहा है, जिससे बचाव कार्य में काफी दिक्कत आ रही है. फिर बढ़ रहा नदियों का जलस्तर नेपाल में खतरा अभी टला नहीं है. भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका है. भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से गुजरने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं में भी पानी बढ़ सकता है. तिब्बत में ग्लेशियरों को लेकर चीन की चेतावनी इस बीच चीन के एक वरिष्ठ जलवायु अधिकारी ने तिब्बती पठार पर ग्लेशियरों के और अस्थिर होने की आशंका जताई है. उनका कहना है कि इससे तिब्बत-नेपाल सीमा के आसपास हाल में आई अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं. अधिकारी के अनुसार, पिछले 60 वर्षों में तिब्बती पठार का ग्लेशियर क्षेत्र करीब 24 फ़ीसदी घट चुका है और लगभग 7,000 छोटे ग्लेशियर पूरी तरह खत्म हो गए हैं. यह स्थिति भविष्य में और भी गंभीर हो सकती है, ऐसे में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखना बेहद जरूरी है. ये भी पढ़ें: Nepal Flood: नेपाल में एक हफ्ते बाद भी नहीं टला बाढ़ का खतरा, तिब्बत में 21 की मौत, 541 लोग लापता The post Nepal Flood : नेपाल के त्रिशूली प्रोजेक्ट में 265 मजदूरों को सुरंग में छोड़ भागा चीनी अधिकारी, अब हिंदुस्तान बना सहारा appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के इन 19 जिलों में बिगड़ा रहेगा मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट, तेज हवा और वज्रपात का भी खतरा

Bihar Rain Alert: बिहार में मानसून एक बार फिर एक्टिव हो गया है. मौसम में बदलाव के साथ कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया है. आज यानी 4 सितंबर को कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने कुछ जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी भी दी है. IMD के अनुसार, बारिश के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वज्रपात का खतरा भी बना रहेगा. ऐसे में लोगों को मौसम खराब होने के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. 19 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने बिहार के 4 जिलों पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सीवान में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. इसके अलावा भी कई अन्य जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इन जिलों में सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, भागलपुर, बांका, खगड़िया, मुंगेर, सारण शामिल हैं. तेज हवा और वज्रपात का खतरा 4 सितंबर को बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. खुले मैदान और पेड़ के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है. मौसम खराब होने पर लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है. इन जिलों में सुहावना रहेगा मौसम बारिश और बादलों के कारण उत्तर-पश्चिम और उत्तर-मध्य बिहार के कई हिस्सों में तापमान नियंत्रित रह सकता है. इससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, समस्तीपुर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रह सकता है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 3 सितंबर को सभी 38 जिलों में हुई बारिश बिहार प्रशासन के जल संसाधन विभाग के 3 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में बारिश दर्ज की गई. हालांकि, बारिश की मात्रा अलग-अलग रही. सबसे ज्यादा बारिश भोजपुर में 35.89 मिमी दर्ज की गई. इसके बाद बांका में 34.35 मिमी, रोहतास में 21.97 मिमी, औरंगाबाद में 21.19 मिमी, मधेपुरा में 20.58 मिमी और पूर्णिया में 20.50 मिमी बारिश हुई. वहीं, सीवान में सबसे कम 0.21 मिमी और गोपालगंज में 0.34 मिमी बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी बिहार के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है. Also Read: जिसके नाम जमीन, उसी को मिलेगा PM Kisan का लाभ, नए नियम से बिहार के 30 लाख से ज्यादा किसानों की बढ़ेगी मुश्किल The post बिहार के इन 19 जिलों में बिगड़ा रहेगा मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट, तेज हवा और वज्रपात का भी खतरा appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान और चीन की हरकतों पर नजर रखेगा भारत का ‘नॉटी बॉय’, जानिए EOS-05 की क्या है खासियत

हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को एक अहम अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने सुबह 2 बजकर 55 मिनट पर उड़ान भरी और EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया. यह GSLV की 19वीं उड़ान है और हिंदुस्तान के लिए इसलिए खास है क्योंकि EOS-05 देश का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है. 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से रखेगा नजर EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में पहुंचने के बाद पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करना है. इस कक्षा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सैटेलाइट पृथ्वी के घूमने के साथ तालमेल बनाए रखता है. ऐसे में हिंदुस्तान और उसके आसपास के बड़े इलाके पर लंबे समय तक लगातार नजर रखना संभव होता है. अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले कई अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अपेक्षाकृत निचली कक्षाओं में घूमते हैं. वे किसी इलाके के ऊपर से गुजरते हैं और फिर दोबारा उसी जगह की तस्वीर लेने में समय लगता है. ईओएस-05 की जियोसिंक्रोनस तैनाती इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में बड़ा कदम है. आपदा से लेकर खेती तक आएगा काम ईओएस-05 का सबसे बड़ा फायदा इसकी लगातार निगरानी की क्षमता होगी. इससे बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बड़े इलाकों की स्थिति पर तेजी से नजर रखने में मदद मिल सकती है. इस तरह के अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा का इस्तेमाल खेती, जल संसाधन, शहरी योजना, जंगलों, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है. किसी बड़े इलाके में तेजी से बदल रही स्थिति की तस्वीर मिलने से प्रशासन और वैज्ञानिकों को फैसले लेने में मदद मिल सकती है. 8 महीने बाद ISRO की वापसी ISRO के इस मिशन की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह 2021 के असफल जीएसएलवी-एफ10 मिशन के बाद उसी तरह की क्षमता को आगे बढ़ाने वाला मिशन है. अगस्त 2021 में GSLV-F10 के जरिए भेजा गया EOS-03 तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था. बाद की जांच में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में दबाव से जुड़ी समस्या सामने आई थी. ईओएस-05 को इसी कार्यक्रम की अगली कड़ी माना जा रहा है. मिशन की सफलता से इसरो के जियोसिंक्रोनस इमेजिंग और भारी उपग्रहों को इस तरह की कक्षा में पहुंचाने के अनुभव को मजबूती मिलेगी. GSLV को नॉटी बॉय क्यों कहा जाता है ? GSLV को कभी-कभी ‘नॉटी बॉय’ यानी शरारती बच्चा भी कहा जाता रहा है. इसकी वजह इसके शुरुआती वर्षों का उतार-चढ़ाव भरा प्रदर्शन और खास तौर पर क्रायोजेनिक चरण से जुड़ी चुनौतियां थीं. हालांकि, यह उपनाम आधिकारिक नाम नहीं है. 2024 में जीएसएलवी-एफ14 की सफल उड़ान के बाद इसरो अधिकारियों ने भी मजाकिया अंदाज में कहा था कि ‘नॉटी बॉय’ अब अनुशासित हो गया है. जीएसएलवी-एफ17 करीब 51.7 मीटर ऊंचा तीन-चरणीय रॉकेट है. इस मिशन में उसने ईओएस-05 को पहले सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाया. अब सैटेलाइट अपने (Onboard Propulsion System) यानी स्पेसक्राफ्ट का इंजन सिस्टम की मदद से आगे की कक्षीय प्रक्रिया पूरी करेगा.  ये भी पढ़ें: Explained : हिंदुस्तान के लिए खतरे की घंटी है अमेरिका की बॉन्ड यील्ड? आसान भाषा में समझिए IMF की चेतावनी का मतलब The post पाकिस्तान और चीन की हरकतों पर नजर रखेगा हिंदुस्तान का ‘नॉटी बॉय’, जानिए EOS-05 की क्या है खासियत appeared first on Naya Vichar.

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