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UP राज्यसभा की 10वीं सीट पर सियासी संग्राम, एक सीट, 37 वोट और कई दावेदार, जानिए क्रॉस वोटिंग का गणित

UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10वीं सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. सीट एक है, लेकिन दोनों प्रमुख खेमों के लिए दांव बड़ा माना जा रहा है. मुकाबला अब केवल विधायकों की संख्या और वोटों के गणित तक सीमित नहीं दिख रहा. क्रॉस वोटिंग और सेंधमारी की रणनीति भी चर्चा में है. समाजवादी पार्टी और बीजेपी दोनों एक-दूसरे के विधायकों पर नजर बनाए हुए हैं. विधानसभा की सात सीटें खाली होने के कारण अधिकतम 395 वोट पड़ने की स्थिति है. एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट जरूरी होंगे. तीसरी सीट के लिए सपा को चाहिए अतिरिक्त वोट समाजवादी पार्टी के पास फिलहाल दो राज्यसभा सीटें जीतने के बाद तीसरी सीट के लिए जरूरी संख्या पूरी नहीं है. पार्टी को करीब नौ अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा. सपा का दावा है कि सुहेलदेव हिंदुस्तानीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी और अपना दल एस जैसे सहयोगी दलों के कुछ विधायक संपर्क में हैं. पार्टी बीजेपी के छह से सात विधायकों के संपर्क में होने का भी दावा कर रही है. हालांकि इन दावों की पुष्टि संबंधित विधायकों या बीजेपी की ओर से नहीं हुई है. ऐसे में हर विधायक का वोट अहम हो गया है. बीजेपी के सामने भी संख्या जुटाने की चुनौती राज्यसभा की इस सीट को लेकर बीजेपी खेमे के सामने भी संख्या बल जुटाने की चुनौती बताई जा रही है. सपा के तीसरा उम्मीदवार उतारने के फैसले ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. नेतृत्वक हलकों में माना जा रहा है कि बीजेपी को अपने सहयोगी दलों के विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करना होगा. दूसरी ओर सपा लगातार अपने संपर्क में होने वाले विधायकों का दावा कर रही है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संख्या के आधार पर मौका मिलने की बात कह चुके हैं. इसलिए मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है. उम्मीदवार के नाम और रणनीति पर नजर सपा के तीसरे उम्मीदवार का नाम अभी सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी की तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. नेतृत्वक गलियारों में उम्मीदवार के चयन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला कर सकते हैं. वहीं बीजेपी भी अपने सहयोगी दलों के साथ बातचीत मजबूत कर रही है, ताकि उसके पक्ष में वोटों का गणित बना रहे. दोनों खेमों के दावों के बीच अब नजरें उम्मीदवारों के नाम, विधायकों के समर्थन और मतदान के दौरान होने वाली क्रॉस वोटिंग पर टिकी हैं. पिछले चुनाव में भी दिखा था क्रॉस वोटिंग का असर फरवरी 2024 के यूपी राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने सियासी गणित बदल दिया था. सपा के सात विधायकों ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके चलते सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन चुनाव हार गए थे. वहीं अपना दल (एस) के विधायक नीलरतन सिंह नीलू बीमारी के बावजूद एंबुलेंस से मतदान करने पहुंचे थे, हालांकि उनके क्रॉस वोट करने की पुष्टि नहीं हुई. दूसरी ओर अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने सपा उम्मीदवार रामजी लाल सुमन को वोट देने की बात कही थी. Must Read: मुख्यमंत्री योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 150 लोगों की समस्याएं, बोले- बिना भेदभाव मिलेगा न्याय The post UP राज्यसभा की 10वीं सीट पर सियासी संग्राम, एक सीट, 37 वोट और कई दावेदार, जानिए क्रॉस वोटिंग का गणित appeared first on Naya Vichar.

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Royal Enfield ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 1 महीने में बेच दी 1.34 लाख बाइक्स, 6 महीने तक वेटिंग पीरियड, सितंबर बिक्री का आंकड़ा आया सामने

सितंबर वाहन बिक्री के आंकड़े सामने आ चुके हैं और त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ऑटोमोबाइल बाजार में रौनक आ गई है. दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Royal Enfield ने सितंबर 2026 में बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कंपनी ने इस महीने कुल 1.34 लाख मोटरसाइकिलें बेची हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 8% ज्यादा है. इस शानदार ग्रोथ में कंपनी की 350cc तक की बाइक्स और इलेक्ट्रिक मॉडल्स की अहम भूमिका रही है. देश और विदेश में बढ़ी मांग हिंदुस्तानीय बाजार में Royal Enfield का दबदबा कायम है. सितंबर 2026 में घरेलू बाजार में 1.21 लाख बाइक बिकीं, जो पिछले साल के 1.14 लाख के मुकाबले 7% ज्यादा है. वहीं, विदेशी बाजारों में भी कंपनी की बाइक्स खूब पसंद की जा रही हैं. सितंबर में कंपनी ने 12,600 बाइक्स एक्सपोर्ट कीं, जिसमें 17% का तगड़ा उछाल दर्ज किया गया. अप्रैल से सितंबर 2026 की बात करें, तो कंपनी अब तक 7.09 लाख बाइक बेच चुकी है, जो पिछले साल की इसी अवधि से करीब 20% ज्यादा है. ये भी पढ़ें: Royal Enfield की 5 सबसे सस्ती बाइक्स… 350cc से ज्यादा का इंजन और ₹1.37 लाख की शुरुआती कीमत, देखें लिस्ट सितंबर 2026 के बिक्री आंकड़े (सालाना आधार पर) कैटेगरी सितंबर 2025 सितंबर 2026 बदलाव कुल बिक्री 1.24 लाख 1.34 लाख +8% घरेलू बिक्री 1.14 लाख 1.21 लाख +7% एक्सपोर्ट 10,800 12,600 +17% 350cc तक + EV 1.07 लाख 1.21 लाख +13% 350cc से ज्यादा 16,900 12,500 -26%  350cc बाइक्स बनीं ग्रोथ का इंजन Royal Enfield की पहचान बन चुके 350cc सेगमेंट ने बिक्री को बड़ा बूस्ट दिया है. सितंबर में 350cc और उससे कम क्षमता वाली 1.21 लाख यूनिट्स बिकीं. हालांकि, 350cc से ज्यादा दमदार इंजन वाली बाइक्स की मांग में कमी आई है. इनकी बिक्री 26% गिरकर 12,500 यूनिट्स रह गई है. 6 महीने के लिए फुल हुई नई Himalayan 440 Himalayan सीरीज के 10 साल पूरे होने के जश्न में कंपनी ने हाल ही में लद्दाख बेसकैंप से Himalayan 440 को लॉन्च किया था. 443cc के लॉन्ग-स्ट्रोक इंजन और 6-स्पीड गियरबॉक्स वाली इस एडवेंचर बाइक को ग्राहकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है. आलम यह है कि लॉन्च होते ही यह बाइक अगले 6 महीने के लिए पूरी तरह बुक हो चुकी है. यह बाइक सेला ब्लैक, मस्टैंग ब्राउन और नेलोंग व्हाइट जैसे आकर्षक रंगों में उतारी गई है. छमाही आंकड़े (अप्रैल से सितंबर 2026) कैटेगरी अप्रैल-सितंबर 2025 अप्रैल-सितंबर 2026 बदलाव कुल बिक्री 5.92 लाख 7.09 लाख +20% घरेलू बिक्री 5.21 लाख 6.42 लाख +23% एक्सपोर्ट 70,600 67,100 -5% 350cc तक + EV 5.10 लाख 6.34 लाख +24% 350cc से ज्यादा 82,300 74,800 -9% Classic 350 का नया ‘सिग्नेचर व्हाइट’ अवतार ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनी ने 2026 Classic 350 Signature White वेरिएंट भी बाजार में उतारा है. इसे पहले से ज्यादा एडवांस बनाया गया है. इसमें अब: ब्राउन टूरिंग सीट्स असिस्ट और स्लिपर क्लच एडजस्टेबल क्लच और ब्रेक लीवर USB टाइप-C फास्ट चार्जिंग और ट्रिपर पॉड (स्टैंडर्ड फीचर) दिए गए हैं. यूरोप में दौड़ेगी इलेक्ट्रिक C6 ग्लोबल मार्केट पर नजर गड़ाए Royal Enfield ने अपने इलेक्ट्रिक ब्रांड Flying Flea के जरिए यूरोप में भी कदम रख दिया है. कंपनी ने अपनी C6 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को पेरिस, बार्सिलोना, रोम, बर्लिन और लंदन में पेश किया है. ग्राहकों को इसकी डिलीवरी अक्टूबर 2026 से मिलनी शुरू हो जाएगी. इसके अलावा, कंपनी एशिया-पैसिफिक क्षेत्र (फिलीपींस और कंबोडिया) में Guerrilla 450 Apex, Goan Classic 350 और Bullet 650 जैसे मॉडल्स के जरिए अपना विस्तार कर रही है. 1.5 लाख राइडर्स ने मिलाया हाथ सितंबर का महीना कंपनी के मेगा इवेंट ‘One Ride 2026’ के लिए भी खास रहा. 2011 में शुरू हुए इस इवेंट का यह अब तक का सबसे बड़ा एडिशन था, जिसमें 60 देशों के 1.5 लाख से ज्यादा राइडर्स ने हिस्सा लिया. कंपनी ने इस आयोजन के जरिए स्नो लेपर्ड (हिम तेंदुआ) संरक्षण के लिए फंड देने का भी संकल्प लिया है. ये भी पढ़ें: Himalayan 440 vs Speed 400: 2-2.5 लाख रुपये के बजट में कौन सी बाइक बेहतर? फेस्टिव सीजन में जानें क्या खरीदें The post Royal Enfield ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 1 महीने में बेच दी 1.34 लाख बाइक्स, 6 महीने तक वेटिंग पीरियड, सितंबर बिक्री का आंकड़ा आया सामने appeared first on Naya Vichar.

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जन सुराज के अनुज सिंह के नामांकन में JDU विधायक अनंत सिंह का शक्ति प्रदर्शन, खुली जीप में साथ आए; बोले- ‘500 परसेंट जीत तय’

Bihar MLC Chunav Nomination: बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. पटना स्नातक सीट से जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किया. इस दौरान मोकामा से जनता दल यूनाइटेड (JDU) विधायक अनंत सिंह भी उनके साथ नजर आए. दोनों नेता खुली जीप में साथ निकले. अनंत सिंह ने इस दौरान अनुज सिंह की जीत को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि उन्हें अनुज की जीत 500 परसेंट तय है. पटना स्नातक सीट पर अनुज सिंह का मुकाबला JDU के प्रत्याशी और मौजूदा MLC नीरज कुमार से है. खुली जीप में निकले अनंत सिंह और अनुज अनुज सिंह के नामांकन के दौरान अनंत सिंह का अलग अंदाज देखने को मिला. दोनों नेता खुली जीप में साथ नजर आए. उनके साथ समर्थकों की भारी भीड़ थी. अनंत सिंह पहले ही अनुज सिंह को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं. अब नामांकन के दिन उनके साथ खुलकर सामने आने से पटना स्नातक सीट का मुकाबला और चर्चा में आ गया है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें अनंत सिंह बोले- जनता मालिक है मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि उनका मालिक जनता है और वही उनका भगवान है. अनंत सिंह ने कहा कि जनता वोट देगी और उन्हें भरोसा है कि अनुज सिंह जीतेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कोई नहीं हरा पाएगा. उन्होंने चुनाव को लेकर कहा कि यह कोई दुकान की चीज नहीं है कि जिसे चाहेंगे, उसे ले आएंगे. जनता ही मालिक है. इसलिए उन्हें जीत का पूरा भरोसा है. नीरज कुमार पर भी बोले अनंत सिंह जब अनंत सिंह से जदयू के प्रत्याशी नीरज कुमार को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि चुनाव में बहुत उम्मीदवार हैं और वे सभी हारेंगे. अनंत सिंह ने कहा कि यह पार्टी का चुनाव नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि इस चुनाव में पार्टी का कोई चुनाव चिह्न नहीं होता है. नीरज कुमार को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने उनके खिलाफ चार चुनावों में काम किया है. इसी वजह से दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से नेतृत्वक खींचतान चर्चा में रही है. नामांकन से पहले बांटे गए रसगुल्ले अनुज सिंह के नामांकन से पहले अनंत सिंह के यहां रसगुल्ले भी तैयार करवाए गए. इन्हें नामांकन में शामिल होने वाले समर्थकों और आम लोगों के बीच बांटने की तैयारी थी. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह के आवास पर करीब 50 हजार रसगुल्ले तैयार करवाए गए थे. नामांकन के दौरान इन्हें समर्थकों के बीच बांटा गया. अनंत सिंह की ओर से इसे चुनावी उत्साह और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया. अनुज सिंह को समर्थन देने के बाद से ही अनंत सिंह लगातार उनके पक्ष में प्रचार की बात कहते रहे हैं. पटना स्नातक सीट पर मुकाबला दिलचस्प पटना स्नातक सीट पर इस बार मुकाबला खास है. जदयू ने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है. वहीं जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को मैदान में उतारा है. अनुज सिंह को अनंत सिंह का खुला समर्थन मिला है. अब नामांकन के दौरान दोनों का साथ दिखना चुनावी चर्चा का नया विषय बन गया है. बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव होना है. मतदान 23 अक्टूबर को होगा. मतगणना 27 अक्टूबर को प्रस्तावित है. Also Read: बिहार की बाढ़ पर 2020 से अब तक खर्च हुए 5 हजार करोड़ से ज्यादा, फिर भी हर साल डूब रहे गांव और उजड़ रहे आशियाने, 1987 से अब तक कितनी तबाही? The post जन सुराज के अनुज सिंह के नामांकन में JDU विधायक अनंत सिंह का शक्ति प्रदर्शन, खुली जीप में साथ आए; बोले- ‘500 परसेंट जीत तय’ appeared first on Naya Vichar.

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कटा हाथ, खून से लथपथ कैप्टन, नीचे गिरने लगा विमान तो प्लंबर और दुश्मन देशों के पायलटों ने संभाली कमान, ऐसे बची 174 लोगों की जान

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में बुधवार को जो हुआ, उसने विमान में सवार लोगों को कुछ देर के लिए मौत के बेहद करीब पहुंचा दिया था. सऊदी अरब के नेशनल ट्रांसपोर्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट में करीब 174 यात्री मौजूद थे. फ्लाइट में उस समय अफरा-तफरी मच गई,जब को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया और कॉकपिट से मारपीट की आवाजें आने लगी. को-पायलट के हमले से कैप्टन गंभीर रूप से घायल हो गए और विमान तेजी से नीचे आने लगा. रिपोर्टों के मुताबिक, विमान कुछ ही समय में करीब 14 हजार फीट नीचे आ गया. चाकू के हमले में कैप्टन मच्छार बुरी तरह घायल हो गए थे. उनके सिर और हाथ पर हमले किए गए थे, जिससे काफी खून बह रहा था. खून से लथपथ कैप्टन स्मित मच्छार कॉकपिट में थे. लेकिन खतरा सिर्फ उनकी जान पर नहीं था. विमान में मौजूद हर शख्स की जिंदगी दांव पर थी. इसलिए गंभीर चोटों के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की और वे कामयाब हो गए. यही वह पल था, जिसने विमान में मौजूद दूसरे लोगों को अंदर पहुंचने का रास्ता दिया. चीखें सुनकर यात्री कॉकपिट की ओर दौड़े कॉकपिट से चीखने और मारपीट की आवाजें आने के बाद आगे बैठे यात्रियों को कुछ गड़बड़ होने का अंदाजा हुआ. जैसे ही कॉकपिट का दरवाजा खुला, कुछ यात्री अंदर पहुंचे. वहां उन्होंने घायल कैप्टन को खून से लथपथ देखा, जो फर्श पर था. जबकि हमलावर पायलट विमान के कंट्रोल के पास था. इसके बाद यात्रियों और क्रू ने मिलकर हमलावर को काबू किया. किसी के हाथ में हथियार नहीं था, न ही आसमान में कोई सुरक्षा बल उनकी मदद के लिए मौजूद था. उस वक्त यात्रियों ने ही आगे बढ़कर एक-दूसरे की मदद की और हमलावर को कॉकपिट से बाहर निकाला. डेंटिस्ट ने घायल कैप्टन की मदद की The Guardian के मुताबिक कॉकपिट में अफरा-तफरी के बीच विमान में मौजूद डेंटिस्ट डॉ. शोटा मुसायेव भी मदद के लिए दौड़कर पहुंचे. उन्होंने बताया कि मच्छआर के सिर और हाथों पर गहरे कट थे, काफी खून बह रहा था और उनका ब्लड प्रेशर तेजी से गिर रहा था. मुसायेव ने मौके पर ही प्राथमिक चिकित्सा देते हुए खून रोकने और कैप्टन की हालत स्थिर करने की कोशिश की. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ देर बाद कैप्टन बेहोश हो गए थे और उस वक्त उन्हें डर था कि अगर कुछ और मिनट निकल जाते तो उनकी जान जा सकती थी. प्लबंर ने विमान संभालने में की अहम मदद इस पूरी घटना में विमान में सवार यात्री यानिव हायून की भूमिका भी सामने आई है, जो पेशे से प्लंबर हैं. ABC की रिपोर्ट के अनुसार हमले के बाद जब कॉकपिट का दरवाजा खुला, तो हायून दूसरे यात्रियों के साथ अंदर पहुंचे और हमलावर को काबू करने में मदद की. उन्होंने बताया कि उस वक्त विमान तेजी से नीचे जा रहा था और उन्होंने कंट्रोल स्टिक को पीछे खींचकर विमान को संभालने की कोशिश की. बाद में ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान की कमान संभाली. हायून के मुताबिक, उन्होंने विमान उड़ाने की जानकारी किसी औपचारिक प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि टीवी पर ‘एयर क्रैश इन्वेस्टिगेशन’ कार्यक्रम देखकर सीखी थी. ये भी पढ़ें: फ्लाईदुबई के हिंदुस्तानीय पायलट को PM मोदी ने बताया ‘हीरो’, बोले-हिंदुस्तान को कैप्टन मच्छार पर गर्व है विमान की कमान संभालने के लिए आगे आए 2 दुश्मन देश के पायलट मुश्किल अभी खत्म नहीं हुई थी. कैप्टन घायल थे और विमान को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी. Ukr Media News के मुताबिक इसी दौरान विमान में यात्री के तौर पर मौजूद (ऑफ-ड्यूटी यात्रा कर रहे फ्लाईदुबई के अन्य अतिरिक्त/रिजर्व पायलटों) दो पायलटों ने आगे आकर कमान संभाली. रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने विमान को स्थिर करने में मदद की और आखिरकार फ्लाइट को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया. इस्राइल हयोम’ की रिपोर्ट के अनुसार जिन दो पायलटों ने संकट के समय फ्लाइट की कमना संभाली उसमें एक रूस और दूसरा यूक्रेन का नागरिक है. खास बात यह है कि ये दोनों देश युद्ध के मैदान में एक दूसरे से टकरा रहे हैं, लेकिन विमान में लोगों को बचाने के लिए एक साथ काम किया. हालांकि दोनों पायलटों की राष्ट्रीयता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी. हिंदुस्तानीय कैप्टन की बहादुरी को दुनिया ने किया सलाम कैप्टन स्मित मच्छार हिंदुस्तानीय हैं और इस घटना के बाद उनकी बहादुरी की दुनियाभर में तारीफ हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “हीरो” बताते हुए कहा कि हिंदुस्तान को कैप्टन मच्छार पर गर्व है. वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनकी बहादुरी की सराहना की है. फिलहाल गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छार का सऊदी अरब के ताबूक शहर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है और हिंदुस्तानीय दूतावास के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है. मोदी ने उनके परिवार से बात कर हरसंभव मदद का भरोसा भी दिया है. वहीं, उन पर हमला करने वाला सह-पायलट ओमान का नागरिक बताया गया है, जिसे घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. The post कटा हाथ, खून से लथपथ कैप्टन, नीचे गिरने लगा विमान तो प्लंबर और दुश्मन देशों के पायलटों ने संभाली कमान, ऐसे बची 174 लोगों की जान appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL: फाइनल में पहुंची टीम इंडिया, श्रीलंका को 124 रन से रौंदकर मेडल किया कन्फर्म

India-Sri Lanka Semifinal Result: हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स 2026 में धमाकेदार अंदाज में फाइनल में जगह बना ली है. कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में स्पोर्ट्से गए सेमीफाइनल में हिंदुस्तान ने श्रीलंका को 124 रन से हराया. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 7 विकेट पर 169 रन बनाए. जवाब में हिंदुस्तानीय गेंदबाजों ने श्रीलंकाई बल्लेबाजों को सिर्फ 45 रन पर ढेर कर दिया. हिंदुस्तान की जीत की कहानी दो हिस्सों में लिखी गई. पहले ईशान किशन ने 46 गेंदों पर नाबाद 80 रन बनाकर लड़खड़ाती हिंदुस्तानीय पारी को संभाला और फिर जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल की घातक गेंदबाजी ने श्रीलंका की पूरी बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया. अब फाइनल में हिंदुस्तान की भिड़ंत पाकिस्तान से होगी. खिताबी मुकाबला 3 अक्टूबर को स्पोर्ट्सा जाएगा. वैभव सूर्यवंशी ने स्पोर्ट्सी 38 रन की पारी श्रीलंका ने टॉस जीतकर हिंदुस्तान को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया. टीम इंडिया की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. अभिषेक शर्मा सिर्फ 7 रन बनाकर आउट हुए, जबकि संजू सैमसन भी 7 रन ही बना सके. एक छोर पर वैभव सूर्यवंशी टिके रहे और उन्होंने 38 रन की उपयोगी पारी स्पोर्ट्सी. इसके बाद श्रेयस अय्यर भी 13 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. लगातार विकेट गिरने के कारण एक समय हिंदुस्तानीय टीम दबाव में नजर आ रही थी. जिसके बाद ईशान किशन पारी को संभाला. ईशान किशन ने अकेले बदल दिया मैच का रुख अर्धशतक लगाने के बाद ईशान किशन (फोटो- सोशल मीडिया) मुश्किल परिस्थिति में बल्लेबाजी करने उतरे ईशान किशन ने श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू किया. उन्होंने 46 गेंदों पर नाबाद 80 रन की शानदार पारी स्पोर्ट्सी. ईशान की इस पारी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने एक छोर संभालकर रखा और दूसरे छोर से गिरते विकेटों के बावजूद रन बनाने की रफ्तार बनाए रखी. उनकी पारी के दम पर हिंदुस्तान ने निर्धारित पारी में 7 विकेट पर 169 रन का स्कोर खड़ा कर दिया. ये भी पढ़ें: IND vs SL: गेंदबाज ने फेंकी ऐसी गेंद की संजू सैमसन भी रह गए हैरान, विकेटकीपर की भी छूटी हंसी; VIDEO वायरल बुमराह ने पहले ओवर में ही मचा दी तबाही 170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका को शुरुआत में ही ऐसा झटका लगा, जिससे वह अंत तक उबर नहीं सकी. जसप्रीत बुमराह ने पहले ही ओवर में दो विकेट चटकाकर श्रीलंका के टॉप ऑर्डर को हिला दिया. हिंदुस्तानीय गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में श्रीलंकाई बल्लेबाजों को रन बनाने का कोई मौका नहीं दिया. इसके बाद अक्षर पटेल ने एक ही ओवर में दो विकेट लेकर श्रीलंका के मिडिल ऑर्डर की कमर तोड़ दी. हालात इतने खराब हो गए कि श्रीलंका ने पहले पावरप्ले में ही 6 विकेट गंवा दिए. उसके बाद अभिषेक शर्मा ने 2 और सुंदर ने 1 विकेट लिए. 124 रन से जीता हिंदुस्तान टॉप और मिडिल ऑर्डर के ढहने के बाद श्रीलंका की पारी संभल ही नहीं सकी. हिंदुस्तानीय गेंदबाज लगातार विकेट निकालते रहे और दो बल्लेबाज रन आउट भी हुए. आखिरकार पूरी श्रीलंकाई टीम 45 रन पर ऑलआउट हो गई. हिंदुस्तान ने मुकाबला 119 रन से जीतकर एशियन गेम्स के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली. अब फाइनल में पाकिस्तान से होगी भिड़ंत श्रीलंका को हराने के साथ ही हिंदुस्तान अब गोल्ड मेडल से सिर्फ एक कदम दूर है. फाइनल में उसका सामना पाकिस्तान से होगा. हिंदुस्तान बनाम पाकिस्तान का एशियन गेम्स 2026 क्रिकेट फाइनल 3 अक्टूबर को स्पोर्ट्सा जाएगा. ये भी पढ़ें: रोहित शर्मा के खास सेलिब्रेशन के पीछे क्या था राज? रवि शास्त्री के पूछने पर हिटमैन ने बताई ये वजह The post IND vs SL: फाइनल में पहुंची टीम इंडिया, श्रीलंका को 124 रन से रौंदकर मेडल किया कन्फर्म appeared first on Naya Vichar.

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Ankit Baliyan Murder Case: सिंगर अंकित बालियान का असली कातिल पकड़ा गया, गोगी गैंग का रोहित लाडला गिरफ्तार

Ankit Baliyan Murder Case: प्रसिद्ध हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड में शामली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने मामले के मुख्य साजिशकर्ता और गोगी गैंग से जुड़े बदमाश रोहित उर्फ लाडला को गिरफ्तार कर लिया है. सोनीपत निवासी रोहित पर दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या की पूरी प्लानिंग रचने का आरोप है. 26 अगस्त को जिम से निकलते समय मारी गई थी गोली अंकित बालियान की 26 अगस्त 2026 को शामली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जानकारी के मुताबिक, वह जिम से निकलकर घर की ओर जा रहे थे. इसी दौरान हथियारबंद चार शूटरों ने उन पर हमला कर दिया. दिनदहाड़े हुई इस वारदात में अंकित की मौत हो गई थी. हत्याकांड में चार शूटरों के शामिल होने की बात पुलिस के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने में चार शूटर शामिल थे. इनमें से दो शूटरों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिरा चुकी है, जबकि दो अन्य शूटर अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. उनकी तलाश जारी है. रोहित लाडला पर साजिश रचने का आरोप पुलिस ने अब हत्याकांड की साजिश रचने के आरोप में रोहित उर्फ लाडला को गिरफ्तार किया है. आरोपी के सोनीपत का रहने वाला होने की जानकारी सामने आई है. पुलिस अब उससे पूछताछ कर हत्याकांड में उसकी भूमिका और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है. Must Read- वर्दी तो सिल गई थी पर किस्मत को कुछ और मंजूर था, UP पुलिस की ट्रेनी कांस्टेबल की मौत में आखिर कौन सा राज दफन? The post Ankit Baliyan Murder Case: सिंगर अंकित बालियान का असली कातिल पकड़ा गया, गोगी गैंग का रोहित लाडला गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड भवन की लिफ्ट में 1 घंटे तक फंसा रहा पूर्व सांसद घूरन राम का परिवार, 6 लोग हुए बेहोश; फिर ऐसे बची जान

पलामू से चंद्रशेखर और गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट पलामू : पलामू के पूर्व सांसद घूरन राम का परिवार दिल्ली स्थित झारखंड भवन में लिफ्ट खराब होने के कारण करीब एक घंटे तक अंदर फंसा रहा. लिफ्ट में ऑक्सीजन की कमी के कारण पूर्व सांसद के तीन बेटे, एक बेटी, बड़ी बहू और एक छोटी बच्ची समेत छह सदस्य बेहोश हो गये. सभी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना 29 सितंबर की रात्रि 12 बजे की है. फिलहाल परिवार के सभी सदस्य खतरे से बाहर है और चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है. परिवार के लोग दो अलग अलग लिफ्टों में थे सवार पूर्व सांसद घूरन राम ने बताया कि परिवार के सदस्य झारखंड भवन में दो अलग-अलग लिफ्टों में सवार हुए थे. जिस लिफ्ट में वह खुद थे, उसमें भी परेशानी आयी, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हो गयी. वहीं, दूसरी लिफ्ट में परिवार के छह सदस्य सवार थे. लिफ्ट नीचे जाने के बाद अचानक लॉक हो गयी और काफी प्रयास के बावजूद उसका दरवाजा नहीं खुला. अंदर फंसे शिशु घबराकर चिल्लाने लगे. उन्होंने बताया कि काफी देर तक लिफ्ट नहीं खुलने पर झारखंड भवन में रेस्टोरेंट में काम करने वाले लोगों ने प्रयास किया. काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट को तोड़कर परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला गया. तब तक सभी छह लोग बेहोश हो चुके थे. पूर्व सांसद के अनुसार, लिफ्ट के अंदर ऑक्सीजन की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई. तत्काल सभी को अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया. ये भी पढ़ें: पारा शिक्षकों को प्रमाण पत्र मामले में एकल पीठ के आदेश को चुनौती देगी शिक्षा परियोजना लिफ्ट में टेक्नीशियन नहीं रहने का आरोप पूर्व सांसद घूरन राम ने झारखंड भवन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाये हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी घटना के दौरान लिफ्ट में किसी तरह की तकनीकी खराबी से निबटने के लिए कोई टेक्नीशियन मौजूद नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि लिफ्ट में फंसे लोगों की मदद के लिए तत्काल कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा. यदि समय रहते लिफ्ट नहीं खुलती, तो बड़ी घटना हो सकती थी. उन्होंने कहा कि झारखंड भवन जैसी महत्वपूर्ण जगह पर इस तरह की व्यवस्था गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लिफ्ट में फंसे लोगों के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता. पूर्व सांसद ने झारखंड भवन के संचालन और वहां उपलब्ध सुविधाओं की भी जांच की मांग की है. घटना की जानकारी मिलने के बाद गढ़वा और पलामू के लोगों में भी चिंता का माहौल है. परिजन दिल्ली में अस्पताल में भर्ती परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं. पूर्व सांसद घूरन राम मूल रूप से गढ़वा जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में भाजपा के वरीय नेता हैं. ये भी पढ़ें: झारखंड में GST फर्जीवाड़े पर ED का शिकंजा, 734 करोड़ के घोटाले में स्क्रैप व्यवसायी और बेटा गिरफ्तार The post झारखंड भवन की लिफ्ट में 1 घंटे तक फंसा रहा पूर्व सांसद घूरन राम का परिवार, 6 लोग हुए बेहोश; फिर ऐसे बची जान appeared first on Naya Vichar.

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फ्लाईदुबई की घटना से याद आया 50 साल पुराना एंटेबे हाइजैक, जब 100 यहूदियों को छुड़ाने दुश्मन देश में घुस गई थी इजरायली सेना, नेतन्याहू के भाई ने संभाला था मोर्चा

Operation Thunderbolt : 30 सितंबर 2026 की सुबह दुबई एयरपोर्ट पर एक फ्लाईदुबई के बोइंग 737 MAX 8 विमान उड़ान भरने के लिए तैयार था. यात्री अपने परिजनों से विदा लेकर विमान में सवार हुए. विमान को इजरायल के तेल अवीव पहुंचना था. कुछ ही घंटों बाद विमान के दो पायलटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला चाकूबाजी तक पहुंच गया. को-पायलट ने साथी पायलट पर चाकू से हमला किया और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की. 1 मिनट के अंदर विमान करीब 17 हजार फीट नीचे आ गया. टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की भी कोशिश हुई. हालांकि, पायलट और कुछ यात्रियों ने हाथापाई कर उसे रोक लिया. 180 यात्रियों से भरे इस विमान में 150 यहूदियों को बचाने के लिए इजराइल ने तुरंत फाइटर जेट्स रवाना कर दिए. इन उनकी निगरानी में फ्लाइट का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. यात्रियों के परिजनों को समाचार मिली कि विमान को हाइजैक कर लिया गया है. हालांकि, बाद में सामने आया कि यह हाइजैक की घटना नहीं है. फ्लाईदुबई की यह फ्लाइट हाइजैक होने से तो बच गई, लेकिन इस घटना ने 50 साल पुरानी एंटबे हाइजैक घटना की याद ताजा कर दी है. आज उसी एंटबे हाइजैक की कहानी जानते हैं… तारीख, 29 जून 1976. इजरायल का फेमस बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जहां से फ्लाइट AF 139 को सुबह 9 बजे टेक ऑफ करना था. फ्लाइट का अगला स्टॉपेज था ग्रीस का एथेंस एयरपोर्ट. दो संगठनों ने मिलकर बनाया था प्लान चारों आतंकवादियों में से दो, जैल और फैज, PLFP ग्रुप से थे, जो इजरायल और फिलिस्तीन की लड़ाई में फिलिस्तीन की ओर से अपनी आजादी के लिए लड़ रहे थे. वहीं बाकी दो हाईजैकर ब्रिजिट और विल्फ्रेड जर्मनी के रिवॉल्यूशनरी सेल से थे. ये उन ग्रुप के सदस्य थे, जो जर्मनी और दूसरे देश में चल रहे अमेरिका की मनमानी के खिलाफ लड़ रहे थे. कैद साथियों की रिहाई थी मकसद इजरायल के इस प्लान हाईजैकिंग में इन दोनों ग्रुप का साथ आने का जो लक्ष्य था, वो ये कि ये अपने लोगों को, जो इजरायल की जेल में बंद थे, उन्हें छुड़ाना चाहते थे. करीब 3 बजते-बजते हाईजैक हो चुका प्लेन अब लीबिया के बेनगाजी के एयर स्पेस में पहुंच जाता है. हाईजैकर के दबाव में आकर फ्लाइट कैप्टन लीबिया एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से बात कर के सारा माजरा समझता है. वह बताता है कि प्लेन हाईजैक हो चुका है. कुछ देर की बातचीत के बाद प्लेन को बेनगाजी एयरपोर्ट में लैंड करने की परमिशन मिल जाती है. बेनगाजी में कुछ घंटे रुका विमान लीबिया में लैंड करने के बाद आतंकवादियों से मिलने लीबिया की ओर से ऑफिसर्स आते हैं. आतंकवादी उनसे इतने नाम से बेखौफ होकर मिलते हैं. उनमें से एक हाईजैकर सभी यात्रियों के पासपोर्ट ले लेता है. सारी चीज ऐसी चल रही थी, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. करीब 6 से 7 घंटे बेनगाजी एयरपोर्ट पर रुकने के बाद प्लेन वापस टेक ऑफ कर जाता है. नॉर्मल तरीके से बीच-बीच में हाईजैकर अनाउंसमेंट करते रहते हैं. यात्रियों के बीच एक बार फिर हड़कंप मच जाता है, जब उन्हें पता लगता है कि अब उनका प्लान युगांडा की ओर मोड़ दिया गया है. Yitzhak Rabin, इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री परिवारों के दबाव में इजरायली प्रशासन इन सब के बीच हाईजैक कर लिए गए पैसेंजर्स के परिवार वाले इजरायली प्रशासन पर दबाव बनाने लगे थे. प्रशासन के ऑफिस में घुसकर हल्ला करने लगे थे, कहीं तोड़फोड़ भी की जाने लगी थी. गवर्नमेंट में इस बात का भी प्रेशर था कि अगर वह यात्रियों को छुड़ाने में सफल नहीं होते, तो बात उनकी सत्ता पर आ जाएगी. किसी एक यात्री को भी कुछ हो जाता है, तो जनता कभी माफ नहीं करेगी और दोबारा वह कभी पावर में नहीं आ पाएंगे. उस समय इजरायल के प्रधानमंत्री थे Yitzhak Rabin. प्रधानमंत्री राबिन ने एक मीटिंग बुलाई और यह कहा कि हाईजैकर्स की मांग मान लेनी चाहिए. हम अपने यात्रियों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते. लेकिन इस डिस्कशन में शामिल इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर Shimon Peres अड़ जाते हैं कि बंधक बनाए गए आतंकवादियों को अगर छोड़ दिया जाए, तो अभी जितना डैमेज हो सकता है, यह उससे कहीं अधिक डैमेज पहुंचाएंगे. प्रधानमंत्री और डिफेंस मिनिस्टर के बीच तनातनी जैसा माहौल भी बन जाता है. लेकिन अंत में यह फैसला किया जाता है कि एक प्रॉपर प्लान बनाया जाए, इसके बाद देखें कि क्या हो सकता है. योनातन नेतन्याहू, बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई कमांडो लेकर युगांडा रवाना हुए विमान सारी चीज फाइनल होने के बाद अब चारों प्लेन ऑपरेशन थंडरबोल्ट के लिए उड़ान भरते हैं. जिसके पीछे दो बोइंग के पैसेंजर प्लेन भी चल पड़ते हैं. इन्हें बैकअप के लिए रखा गया था. इन चारों प्लेन में से पहले जो प्लेन था, जिसे सबसे पहले युगांडा में लैंड होना था, उसमें 29 लोगों की टीम थी. जिसे लीड कर रहे थे बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनातन (योनी) नेतन्याहू. बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री बन पाए, इसके पीछे इस ऑपरेशन और उनके बड़े भाई की सफलता बहुत बड़ा रोल निभाती है. Entebbe इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एरियल व्यू सफेद मर्सिडीज ने बढ़ाई परेशानी यहां पर एक बहुत बड़ी दिक्कत यह आ जाती है कि इजरायल के पास यह इनपुट नहीं होता कि ईदी अमीन जिस मर्सिडीज से ट्रेवल कर रहा है, वह ब्लैक नहीं बल्कि व्हाइट कलर की है. फेक काफिले का सामना सबसे पहले दो सैनिकों से होता है. ब्लैक की जगह व्हाइट मर्सिडीज देखकर दोनों में से एक सैनिक को शक हो जाता है कि आज अगर अमीन ब्लैक मर्सिडीज से क्यों नहीं आ रहे हैं. शक की आड़ में ही वह काफिले को रोक देता है. एक दिक्कत और आ जाती है. इजरायल के प्लान के मुताबिक उन्हें किसी भी युगांडा के सैनिकों पर हमला नहीं करना था, ताकि वॉर जैसी सिचुएशन को अवॉइड किया जा सके. लेकिन काफिले में बैठे एक इजरायली कमांडो ने अपनी साइलेंट गन

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ससुराल ने गाने से रोका, ऑडिशन में मिली ठोकर, 76 रुपये से शुरू हुआ सफर… फिर शारदा सिन्हा की आवाज बनी छठ की पहचान

एक दुल्हन विदा होने वाली थी. घर में रोने की आवाजें थीं. आंखों में आंसू थे. तभी पिता ने कहा—एक गीत गाओ. दुल्हन ने गाना शुरू किया. वह दुल्हन कोई और नहीं, शारदा सिन्हा थीं. जिस आवाज में उस दिन अपनी विदाई का दर्द था, वही आवाज कुछ सालों बाद हजारों बेटियों की विदाई का गीत बनने वाली थी. और फिर एक दिन ऐसा आया, जब छठ के घाटों पर उगते सूर्य से पहले लोगों को शारदा सिन्हा की आवाज सुनाई देने लगी. लेकिन इस आवाज तक पहुंचना इतना आसान नहीं था. ससुराल में गाने से रोकने की कोशिश हुई. मंच पर जाने को लेकर विरोध हुआ. शुरुआती सफर में कई मुश्किलें आईं. फिर बॉलीवुड का दरवाजा खुला तो ‘कहे तोसे सजना’ के लिए मिले सिर्फ 76 रुपये. रकम छोटी थी, लेकिन कहानी बहुत बड़ी होने वाली थी. क्योंकि यह सिर्फ एक गायिका के मशहूर होने की कहानी नहीं थी. यह उस स्त्री की कहानी थी जिसने परिवार, विरोध और जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज को बचाए रखा—और आखिरकार वही आवाज बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई. आज 1 अक्टूबर को उनकी जयंती पर जब शारदा सिन्हा को याद किया जा रहा है, तो उनकी जिंदगी के ये किस्से बताते हैं कि ‘बिहार कोकिला’ बनने से पहले उन्होंने कितनी लंबी यात्रा तय की थी. जिस घर में बहू के गाने पर आपत्ति थी, वहीं से निकली छठ की आवाज शादी के बाद शारदा सिन्हा के सामने पहली बड़ी चुनौती संगीत को लेकर ही आई. उनकी सास को उनका बाहर जाकर गाना पसंद नहीं था. लेकिन पति ब्रजकिशोर सिन्हा ने उनका साथ दिया. शारदा सिन्हा ने खुद कई मौकों पर बताया था कि उनके पति उनके संगीत के सबसे बड़े समर्थकों में थे. एक वक्त था जब लोग यह तक पूछते थे कि पत्नी को गाने-बजाने की अनुमति देने वाला पति कैसा है. फिर जब शारदा सिन्हा की आवाज लोगों तक पहुंची और उनके गीत लोकप्रिय हुए, वही नजरिया बदलता गया. यानी जिस आवाज को रोकने की कोशिश हो रही थी, वही धीरे-धीरे लोगों की आवाज बनने लगी. 19 साल की उम्र में बेगम अख्तर के सामने पहुंचीं, फिर बदल गई कहानी शारदा सिन्हा का संगीत सफर भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. करीब 19 साल की उम्र में वह लखनऊ में HMV के टैलेंट ऑडिशन के लिए पहुंची थीं. संयोग से उस ऑडिशन में महान गायिका बेगम अख्तर बतौर अतिथि निर्णायक मौजूद थीं. शारदा सिन्हा ने मैथिली का विवाह गीत सुनाया. बेगम अख्तर उनकी आवाज से प्रभावित हुईं और उन्हें रियाज जारी रखने की सलाह दी. यही मौका उनके संगीत सफर की एक बड़ी सीढ़ी बना. आगे चलकर यही आवाज 1500 से ज्यादा गीतों तक पहुंची और मैथिली, भोजपुरी, मगही, हिंदी समेत कई भाषाओं में अपनी पहचान बनाई. अपनी ही विदाई में गाया गीत, फिर बन गईं विदाई के गीतों की आवाज अपनी शादी की विदाई से कुछ घंटे पहले शारदा सिन्हा ने पिता के कहने पर विदाई गीत गाया था. वह खुद याद करती थीं कि माहौल बेहद भावुक था और सभी रो रहे थे, फिर भी उन्होंने गीत गाया. बाद में उनकी आवाज में गाए शादी के गीत घर-घर पहुंचे. यह संयोग कितना खूबसूरत है—जिस लड़की ने अपनी विदाई में गीत गाया था, वही आगे चलकर अनगिनत बेटियों की विदाई की आवाज बन गई. और शायद यही वजह है कि उनके गीतों में सिर्फ सुर नहीं सुनाई देते थे. रिश्तों की कसक भी सुनाई देती थी. बॉलीवुड में पहुंचीं तो 76 रुपये मिले लोकगीतों से अपनी अलग पहचान बना चुकी शारदा सिन्हा की आवाज बॉलीवुड तक पहुंची. सलमान खान और भाग्यश्री की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के गीत ‘कहे तोसे सजना’ में उनकी आवाज सुनाई दी. इस गाने के लिए उन्हें 76 रुपये मिलने की बात कई रिपोर्टों में दर्ज है. इसके बाद ‘हम आपके हैं कौन’ का विदाई गीत ‘बाबुल जो तुमने सिखाया’ और बाद में ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का ‘तार बिजली से पतले’ जैसे गीतों ने उनकी आवाज को फिल्मों में भी अलग पहचान दी. लेकिन फिल्मों की चमक के बावजूद शारदा सिन्हा की असली पहचान लोकगीत ही रहे. फिर छठ आया और शारदा सिन्हा की आवाज घर-घर पहुंच गई उनके करियर का सबसे बड़ा रिश्ता छठ से बना. ‘केलवा के पात पर’, ‘सुनअ छठी माई’, ‘पटना के घाट पर’ जैसे गीतों ने उन्हें छठ के गीतों की सबसे पहचानी जाने वाली आवाजों में शामिल कर दिया. उनके गीतों की लोकप्रियता बिहार से बाहर भी लगातार फैलती गई. और यहां उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत विरोधाभास सामने आता है. जिस पर्व की आवाज वह बन गईं, उसका व्रत उन्होंने खुद नहीं रखा था. वह कहती थीं कि छठ के गीत ही उनका अर्घ्य हैं और इन गीतों के जरिए लोगों को छठ से जोड़ना उनकी जिम्मेदारी है. उनकी आवाज में ‘वाह’ नहीं, ‘आह’ चाहिए थी उनकी गुरु पन्ना देवी ने उनकी आवाज की एक खासियत बहुत पहले पहचान ली थी. उनके मुताबिक शारदा सिन्हा की आवाज में ऐसी कसक थी कि गाते वक्त सिर्फ ‘वाह’ नहीं, ‘आह’ निकलनी चाहिए. यही कसक उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई. उनके गीतों में शादी थी, लेकिन विदाई भी थी. उत्सव था, लेकिन विरह भी था. छठ की आस्था थी, लेकिन परदेस गए अपनों की याद भी थी. इसलिए शायद उनकी आवाज सुनते ही लोगों को सिर्फ गीत नहीं, अपना घर याद आता था. आखिरी वक्त तक नहीं टूटा छठ से रिश्ता जिंदगी के आखिरी दौर में भी शारदा सिन्हा की आवाज छठ से जुड़ी रही. एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अपना अंतिम छठ गीत ‘दुखवा मिटाई छठी मइया’ रिकॉर्ड किया. छठ से कुछ दिन पहले यह गीत सामने आया था. 5 नवंबर 2024 को 72 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ. लेकिन उनकी आवाज वहीं रह गई, जहां से उनका सफर शुरू हुआ था—लोकगीतों में, घरों में और छठ के घाटों पर. आज भी छठ आते ही जब कहीं दूर से शारदा सिन्हा की आवाज सुनाई देती है, तो लगता है जैसे कोई बहुत अपना पुकार रहा हो. ससुराल ने रोकने की कोशिश की थी. सफर में मुश्किलें आईं. बॉलीवुड में शुरुआत 76 रुपये से हुई. लेकिन शारदा सिन्हा

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मलाइका से काजल राघवानी तक तेजू भैया के फैन, परिवार-पार्टी से हुए बाहर, अब सहवाग के शो में छाए… रियलिटी शो से कैसे बने ‘कमबैक किंग’?

टूटी शादी से सोशल मीडिया तक, अपनी पार्टी बनाने से लेकर अध्यात्म की राह तक… तेज प्रताप यादव ने हर बड़े झटके के बाद खुद को नए अंदाज में पेश किया, अब रियलिटी शो में उसी ‘तेजू भईया’ अंदाज का जलवा देखने को मिल रहा है. ‘राइज ऐंड फॉल 2’ OTT पर आते ही चर्चा में है. सोशल मीडिया पर शो की क्लिप्स, मीम्स और कंटेस्टेंट्स की केमिस्ट्री खूब वायरल हो रही है. लेकिन इन सबके बीच तेज प्रताप यादव का अंदाज सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है. कभी हंसी-मजाक, कभी बेबाक बातें, कभी अचानक पंचलाइन और कभी बेहद शांत रहकर पूरा माहौल पढ़ना—तेज प्रताप धीरे-धीरे शो के उन चेहरों में शामिल होते दिख रहे हैं, जिन पर कैमरे की नजर बार-बार जाती है. मनीष कश्यप के साथ उनकी जुगलबंदी हो, शहजाद पूनावाला के साथ नेतृत्वक बातचीत या काजल राघवानी और इरीना के साथ उनकी फ्लर्टिंग—तेज प्रताप इस बार सिर्फ नेतृत्व से आए कंटेस्टेंट नहीं लग रहे, बल्कि एक एंटरटेनर के तौर पर भी अपनी जगह बनाते दिख रहे हैं. लेकिन तेज प्रताप का यह ‘तेजू भईया’ वाला अंदाज अचानक नहीं आया है. उनकी जिंदगी को थोड़ा पीछे जाकर देखें तो पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई बड़े झटके देखे हैं. और दिलचस्प बात यह है कि हर बार झटका लगने के बाद उन्होंने खुद को किसी नए रूप में पेश किया. पहला झटका: निजी जिंदगी में उथल-पुथल और फिर सोशल मीडिया का रास्ता तेज प्रताप की शादी और निजी जिंदगी लंबे समय तक सुर्खियों में रही. शादीशुदा जिंदगी में विवाद और तलाक की समाचारों ने उन्हें लगातार समाचारों में बनाए रखा. इस पूरे दौर में सोशल मीडिया उनके लिए एक नया मंच बनकर सामने आया. वह कभी छत पर रील बनाते दिखे, कभी गाना गाते और कभी अपने बिल्कुल अलग अंदाज में वीडियो शेयर करते. शुरुआत में खूब ट्रोलिंग हुई, memes बने और उनका मजाक भी उड़ाया गया. लेकिन तेज प्रताप ने इसी चीज को धीरे-धीरे अपनी ताकत में बदल लिया. लोग उनकी निजी जिंदगी की चर्चा करने के बजाय उनकी रील्स और वीडियो की बात करने लगे. यहीं से एक नेता के साथ-साथ ‘सोशल मीडिया वाले तेजू भईया’ की पहचान भी बनने लगी. फिर आया दूसरा मोड़: नेतृत्वक झटका और अपनी राह सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने के बाद तेज प्रताप की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया. 2025 में RJD से निष्कासन के बाद उनके सामने नेतृत्वक भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ. लेकिन यहां भी तेज प्रताप ने पीछे हटने के बजाय अपनी अलग राह चुनी. उन्होंने अपनी नेतृत्वक पार्टी जन शक्ति जनता दल बनाई और अपने दम पर नेतृत्वक जमीन तैयार करने की कोशिश की. चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात जरूर दिखा दी—जिस मंच से उन्हें अलग किया गया, उसी के बाहर उन्होंने अपना नया मंच खड़ा करने की कोशिश की. तीसरा मोड़: नेतृत्व से ज्यादा भारी पड़ा परिवार लेकिन नेतृत्वक लड़ाई के बीच एक और मोर्चा था, जो शायद ज्यादा निजी था—परिवार. RJD से निष्कासन के साथ लालू प्रसाद यादव की ओर से तेज प्रताप से पारिवारिक संबंध खत्म करने की बात भी सामने आई. इसके बाद तेजस्वी यादव के साथ उनके रिश्ते भी चर्चा में रहे. दोनों भाइयों से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और लोगों ने उनके बीच की दूरी और भावनाओं को अपने-अपने तरीके से देखा. हालांकि नेतृत्वक मतभेद अपनी जगह रहे, लेकिन कई मौकों पर तेज प्रताप पारिवारिक रिश्तों और जिम्मेदारियों से जुड़े नजर आए. यही वह phase था, जहां सियासत और परिवार की लड़ाई अलग-अलग नहीं रही—दोनों एक-दूसरे में घुलती चली गईं. और चौथा मोड़: जब जवाब देने के बजाय अध्यात्म चुना निजी रिश्तों और वैवाहिक विवादों से जुड़े आरोपों ने भी तेज प्रताप को लंबे समय तक घेरा. उनके खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए, लेकिन उन्होंने हर आरोप का जवाब सार्वजनिक बहस में देने के बजाय खुद को धीरे-धीरे पीछे खींच लिया. इसके बाद उनका झुकाव अध्यात्म की तरफ बढ़ा. वृंदावन जाना, धार्मिक गतिविधियों से जुड़ना और आध्यात्मिक जीवन की तरफ बढ़ना उनके public persona का नया हिस्सा बन गया. यानी एक दौर में जब हर तरफ उनके बारे में बातें हो रही थीं, तेज प्रताप ने इस बार शोर का जवाब शोर से नहीं दिया. उन्होंने रास्ता ही बदल लिया. और अब पांचवां पड़ाव—Rising & Fall का कैमरा यही वजह है कि आज ‘राइज ऐंड फॉल 2’ में तेज प्रताप को देखना सिर्फ एक रियलिटी शो देखने जैसा नहीं है. यह उस शख्स का एक और नया version है, जिसने जिंदगी में हर बड़े मोड़ के बाद खुद को नए मंच पर खड़ा किया. निजी जिंदगी में मुश्किल आई तो सोशल मीडिया का सहारा लिया. नेतृत्वक झटका लगा तो अपनी पार्टी बना ली. परिवार से दूरी हुई तो भी अपने तरीके से रिश्तों को संभालते दिखे. आरोपों और विवादों के बीच अध्यात्म की तरफ चले गए. और अब जब सामने रियलिटी शो का मंच आया है, तो यहां भी तेज प्रताप ने वही अपना अंदाज पकड़ लिया है—थोड़ा शांत, थोड़ा मजेदार और जरूरत पड़ने पर एकदम punchy. शायद यही वजह है कि फैंस उन्हें ‘तेजू पगलू’ कहकर बुला रहे हैं. काजल राघवानी और इरीना के साथ उनकी chemistry हो या मनीष कश्यप के साथ दोस्ताना अंदाज, तेज प्रताप ने शो में अपने लिए एक अलग space बना लिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि जिंदगी के इन चार बड़े पड़ावों के बाद ‘तेजू भईया’ का यह पांचवां chapter उन्हें कहां ले जाता है. क्योंकि तेज प्रताप की कहानी में एक चीज बार-बार दोहराती है—झटका आया, मंच बदला और तेज प्रताप फिर एक नए अंदाज में सामने आ गए. The post मलाइका से काजल राघवानी तक तेजू भैया के फैन, परिवार-पार्टी से हुए बाहर, अब सहवाग के शो में छाए… रियलिटी शो से कैसे बने ‘कमबैक किंग’? appeared first on Naya Vichar.

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