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Bihar Job: ‘नीतीश कुमार जो कहते हैं, वह करते हैं’, डिप्टी सीएम ने बताया इस कार्यकाल में कितने लोगों को मिली नौकरी

Bihar Job: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रोजगार अहम मुद्दा रहने वाला है. नेता विपक्ष तेजस्वी यादव हर मंच से यह कह रहे हैं कि जब बिहार में महागठबंधन की प्रशासन थी तब युवाओं को खूब रोजगार मिला. लेकिन जब से प्रशासन गई है तब से जॉब क्रिएशन में कमी आई है. उनके इस बयान पर बिहार सियासत जारी है. इस बीच, बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि जहां तक नौकरी देने की बात है राजद अध्यक्ष लालू यादव को बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में कितने लोगों को नौकरी दी गई थी. मौजूदा कार्यकाल में कितनों को मिली नौकरी सम्राट चौधरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2005 से 2020 तक 7.50 लाख लोगों को नौकरी दी गई. वहीं, मौजूदा कार्यकाल में नौ लाख से अधिक लोगों को नौकरी दी गई है. इस बार यह लक्ष्य बढ़ाकर 12 लाख कर दिया गया है.इससे यह बात साबित हो जाती है कि नीतीश कुमार जो कहते हैं, वह करते हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें क्रेडिट नीतीश कुमार को मिले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि लालू यादव और तेजस्वी यादव को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अपने शासनकाल में कितने लोगों को नौकरी दी. कितने लोगों के जीवन स्तर को उठाया. सीएम नीतीश कुमार ने बिहार के लिए क्या किया या उनकी उपलब्धि क्या है वो लोग नहीं जानते हैं. फिलहाल बिहार में जो नौकरियां मिल रही हैं, वह नीतीश कुमार का क्रेडिट है.उन्होंने बिहार का रूप बदल दिया है. ऐसे में लालू यादव को बताना चाहिए कि उन्होंने अपने 15 साल में कितने लोगों को नौकरी दी. बता दें कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी महागठबंधन की पहले की प्रशासन में लोगों को मिली नौकरी का क्रेडिट राजद नेता तेजस्वी यादव खुद को देते हैं. महागठबंधन की प्रशासन में तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री थे. इसे भी पढ़ें: बिहार के पहले स्मार्ट विलेज का सीएम नीतीश ने किया उद्घाटन, बांका को 362 करोड़ की योजनाओं की दी सौगात The post Bihar Job: ‘नीतीश कुमार जो कहते हैं, वह करते हैं’, डिप्टी सीएम ने बताया इस कार्यकाल में कितने लोगों को मिली नौकरी appeared first on Naya Vichar.

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कभी झारखंड के DGP अनुराग गुप्ता को हेमंत सोरेन सरकार ने किया था सस्पेंड, जानें क्या था आरोप

रांची : झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता को हेमंत सोरेन प्रशासन ने स्थायी डीजीपी बना दिया है. इससे पहले उन्हें इसका अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. गृह विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है. इसके साथ ही यह तय हो गया है कि उनके पास अब सीआईडी डीजी और एसीबी चीफ का पद नहीं रहेगा. लेकिन क्या आपको पता है राज्य के वर्तमान पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता को कभी वर्तमान प्रशासन ने निलंबित कर दिया था. वह तकरीबन 26 माह तक निलंबित रहे थे. जबकि 0सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के नियमानुसार राज्य प्रशासन किसी को दो साल से अधिक समय तक निलंबित नहीं रख सकती. क्या था आरोप दरअसल वर्तमान डीजीपी अनुराग गुप्ता पर आरोप था कि साल 2016 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने बड़कागांव से उस वक्त की तत्कालीन विधायक निर्मला देवी को बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने के लिए लालच दिया था. जिसके बाद हेमंत सोरेन प्रशासन ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए साल 2020 में उन्हें सस्पेंड कर दिया था. साल 2022 में जब उन्हें वापस बहाल किया गया तो उन्हें गृह विभाग में योगदान देने को कहा गया. फिर साल 2024 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जब जेल से वापस आए तो उन्होंने उस वक्त के तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह को हटाकर अनुराग गुप्ता को पुलिस महानिदेशक के अतिरिक्त प्रभार दे दिया. उस वक्त वह सीआईडी डीजी और एसीबी चीफ के महत्वपूर्ण पद संभाल रहे थे. कौन हैं अनुराग गुप्ता अनुराग गुप्ता 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उनकी रूझान के सिविल सर्विस के तरफ होने लगा था. इसलिए डिग्री लेने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी. वर्ष 1990 में वे हिंदुस्तानीय पुलिस सेवा में शामिल हुए. अपने कार्यकाल में अनुराग गुप्ता रांची समेत कई जिलों के एसपी रह चुके हैं. बाद में उन्हें रांची का एसएसपी भी बनाया गया. इसके बाद उन्हें प्रोन्नति देकर बोकारो रेंज का डीआईजी बनाया गया. Also Read: मरीज को बेहतर सुविधा मिले, डॉक्टरों की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी : मंत्री The post कभी झारखंड के DGP अनुराग गुप्ता को हेमंत सोरेन प्रशासन ने किया था सस्पेंड, जानें क्या था आरोप appeared first on Naya Vichar.

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Premanand Ji Maharaj ने बताया किस अंगुली में पहनें चांदी की अंगूठी, इससे दूर होता है चंद्र दोष

Premanand Ji Maharaj Sayings, Chandra Dosh Remedies: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए रत्न को किसी धातु की अंगूठी में पहनने की सिफारिश की जाती है. सभी नवग्रहों का किसी न किसी रत्न या धातु से संबंध होता है. उदाहरण के लिए, सोने को गुरु ग्रह से जोड़ा जाता है, जबकि चांदी का संबंध शुक्र और चंद्रमा से होता है. कुछ लोग ज्योतिषीय उपायों के तहत चांदी की अंगूठी पहनते हैं, लेकिन कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि चांदी की अंगूठी किस अंगुली में पहननी चाहिए. आइए, जानते हैं इस विषय में आध्यात्मिक गुरु की क्या सलाह है. प्रेमानंद महाराज ने बताया चांदी की अंगूठी के फायदे आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के अनुसार, चांदी की अंगूठी को बाएं हाथ की छोटी अंगुली (कनिष्ठा) में पहनना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इस प्रक्रिया से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और भाग्य में सुधार की संभावना बढ़ती है. कई आध्यात्मिक गुरु भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि चांदी की अंगूठी को बाएं हाथ की कनिष्ठा में पहनना उचित है. बाएं हाथ को ग्रहण करने वाला (रीसेप्टिव) हाथ माना जाता है, जबकि दाएं हाथ को सक्रियता का प्रतीक माना जाता है. बायाँ हाथ मानसिक और भावनात्मक लाभ के लिए अधिक उपयुक्त है. इसके अतिरिक्त, चांदी चंद्रमा का प्रतीक है, जो मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है. इसे पहनने से आत्मविश्वास और मनोबल में वृद्धि होती है. इन राशियों में होती है मेनिफेस्ट करने की तगड़ी क्षमता, यहां जानें  हालांकि सभी गुरु इसे कनिष्ठा अंगुली में पहनने की सलाह नहीं देते, कुछ गुरु इसे अनामिका अंगुली (रिंग फिंगर) में पहनने की सलाह देते हैं, विशेष रूप से चंद्र दोष के निवारण के लिए. ज्योतिष में अनामिका अंगुली को सूर्य और शुक्र से संबंधित माना जाता है. चांदी की अंगूठी पहनने से शुक्र की ऊर्जा संतुलित होती है, जिससे समृद्धि, सौंदर्य और संबंधों में सुधार होता है. The post Premanand Ji Maharaj ने बताया किस अंगुली में पहनें चांदी की अंगूठी, इससे दूर होता है चंद्र दोष appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Land Survey : सर्वे में रैयतों की क्या है जिम्मेदारी? विभाग ने शेयर की जानकारी…

Bihar Land Survey : बिहार में चल रही विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त की प्रक्रिया को लेकर राज्य प्रशासन के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है. जिसमें बताया गया है कि ‘बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त’ में रैयतों की क्या जिम्मेदारी है और उन्हें क्या करना है. रैयतों की क्या जिम्मेदारी है? किस्तवार और खानापूरी से पहले रैयतों को अपनी जमीन का सीमांकन कर लेना चाहिए और उचित तरीके से बाउंड्री बनवा लेनी चाहिए. अपनी जमीन का विवरण बाउंड्री (चौहद्दी) सहित फॉर्म-2 में भरकर वेबसाइट पर अपलोड करना होगा या शिविर में व्यक्तिगत रूप से जमा करना होगा. यदि भूमि पुश्तैनी/खतियान है तो आपसी सहमति से उसका बंटवारा कर स्वयं द्वारा तैयार वंशावली के साथ वेबसाइट या शिविर में जमा करना होगा. खरीदी गई भूमि का दस्तावेज लगान रसीद के साथ स्वघोषणा पत्र (फॉर्म-2) भरकर जमा करना होगा. पुश्तैनी जमीन के साथ वंशावली, बंटवारा, लगान-रशीद, खतियान, कोर्ट का आदेश आदि सबूत के तौर पर जमा किए जाएंगे. भूमि सर्वेक्षण पूरा होने तक शिविर के संपर्क में रहें या वेबसाइट को नियमित रूप से देखें. खानापूरी, पर्चा वितरण, प्रारूप प्रकाशन और अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशन में प्रदर्शित जानकारी की जांच करें, यदि कोई गलती मिले तो तुरंत आपत्ति दर्ज कराएं. Bihar land survey : सर्वे में रैयतों की क्या है जिम्मेदारी? विभाग ने शेयर की जानकारी… 12 खतियान की नकल कैसे प्राप्त करें? खतियान की नकल प्राप्त करने के लिए ‘भू-अभिलेख पोर्टल’ खोलें तथा प्रति पेज 10 रुपए का भुगतान कर स्कैन की हुई कॉपी प्राप्त करें. Also Read: पटना को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने का प्लान हो गया तैयार, इन सड़कों पर सबसे पहले होगा सुधार कहां मिलेगी जमीन सर्वे की जानकारी? भूमि सर्वेक्षण से संबंधित नियमित जानकारी प्राप्त करने के लिए ‘बिहार सर्वेक्षण ट्रैकर’ ऐप डाउनलोड करें या dlrs.bihar.gov.in पर जाकर ‘भूमि सर्वेक्षण’ टैब पर क्लिक करें. किसी भी समस्या, शिकायत या सुझाव के लिए टोल फ्री नंबर 18003456215 पर संपर्क कर सकते हैं. Also Read: Bihar Crime: बेटिंग एप के जरिए 304 करोड़ की ठगी, पुलिस ने 24 लोगों को दबोचा The post Bihar Land Survey : सर्वे में रैयतों की क्या है जिम्मेदारी? विभाग ने शेयर की जानकारी… appeared first on Naya Vichar.

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इन राशियों में होती है मेनिफेस्ट करने की तगड़ी क्षमता, यहां जानें

Zodiac Signs Traits: कई लोग मेनिफेस्टेशन करना चाहते हैं, लेकिन इच्छाओं को पूरा करने में ब्रह्मांड केवल कुछ ही व्यक्तियों की सहायता करता है. ज्योतिष के अनुसार, कुछ राशियां अपनी भावनाओं, विचारों और अभिव्यक्तियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में विशेष रूप से सक्षम होती हैं. ये राशियां उत्कृष्ट संचार कौशल से संपन्न होती हैं और अपने विचारों के माध्यम से दूसरों पर गहरा प्रभाव डालने की अद्भुत क्षमता रखती हैं. यही कारण है कि ब्रह्मांड इनकी इच्छाओं को स्पष्टता के साथ सुनता और स्वीकार करता है. आइए जानते हैं कि वे राशियां कौन सी हैं, जो मेनिफेस्टेशन में सबसे प्रभावी मानी जाती हैं और इसके पीछे का कारण क्या है. मिथुन मिथुन राशि का स्वामी ग्रह बुध है, जिसे बुद्धि और संचार का प्रतीक माना जाता है. इस ग्रह की विशेषता यह है कि मिथुन के लोग तेज दिमाग वाले और कुशल वक्ता होते हैं. वे किसी भी विषय पर सहजता से बात करने की क्षमता रखते हैं. इस राशि के लोग सोशल मीडिया, लेखन, पत्रकारिता और सार्वजनिक बोलने में विशेष दक्षता रखते हैं. विचारों की सही अभिव्यक्ति मेनिफेस्टेशन के लिए अत्यंत आवश्यक है, और मिथुन इस कार्य में माहिर होते हैं. इसलिए, उनकी इच्छाओं के पूरा होने की संभावना अधिक होती है. सिंह सिंह राशि का ग्रह स्वामी सूर्य है. इस राशि के व्यक्तियों में दूसरों को आकर्षित करने और उन पर प्रभाव डालने की अद्वितीय क्षमता होती है. ये अपनी प्रतिभा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में माहिर होते हैं. सिंह राशि के लोग मंच पर बोलने में दक्ष होते हैं और उनका व्यक्तित्व करिश्माई होता है. इनकी कल्पनाओं और सपनों को साकार करने की शक्ति प्रबल होती है, जिससे ये मेनिफेस्टेशन में भी कुशल होते हैं. तुला तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है. इस राशि के लोग दूसरों के विचारों को समझकर संतुलित उत्तर देने और कूटनीतिक संवाद में निपुण होते हैं. तुला राशि के व्यक्तियों की बातों में आकर्षण होता है, जिससे वे किसी भी बहस को सहजता से संभाल सकते हैं. इनमें ब्रह्मांड की ऊर्जा को आकर्षित करने और अपनी बात को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता होती है. धनु धनु राशि का स्वामी ग्रह गुरु है, जो बड़े विचारों और दृष्टिकोणों को साझा करने की विशेषता रखता है. धनु राशि के जातक अपने अनुभवों और ज्ञान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं. वे उत्कृष्ट कहानीकार और प्रेरणादायक वक्ता होते हैं. धनु राशि के लोग अत्यंत आशावादी होते हैं और उन्हें विश्वास होता है कि वे जो चाहेंगे, उसे प्राप्त कर सकेंगे. उनका यह आत्मविश्वास उनके लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होता है. कुंभ कुंभ राशि के जातकों का स्वामी ग्रह शनि और यूरेनस है. इनमें अनोखे और नवीन विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की क्षमता होती है. ये समाज सुधार और क्रांतिकारी विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं. कुंभ राशि के लोग अपनी बातों के माध्यम से दूसरों के विचारों में परिवर्तन ला सकते हैं और नई सोच को उत्पन्न कर सकते हैं. उनकी यह विशेषता उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करती है. The post इन राशियों में होती है मेनिफेस्ट करने की तगड़ी क्षमता, यहां जानें appeared first on Naya Vichar.

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Numerology: ब्यूटी विद ब्रेन, इस दिन जन्में लोग बनाते हैं परफेक्ट कॉम्बिनेशन

Numerology: लोगों का स्वभाव, बुद्धि और खूबसूरती उनके जन्म के मूलांक के अनुसार निर्धारित होती है. इसी के आधार पर जन्म कुंडली भी तैयार की जाती है जिससे ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव का पता चलता है.अंक शास्त्र की दुनिया में जन्म तिथि के अंकों का विशेष महत्व है. मूलांक की गणना करने के लिए जन्म तिथि के अंकों को जोड़ते हैं ताकि एकल अंक 1 से 9 के बीच प्राप्त हो सके. इन मूलांकों का संबंध 9 ग्रहों से होता है जो हमें व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व के बारे में गहराई से जानकारी प्रदान करते हैं. आज हम आपको ऐसे दो मूलांकों के बारे में बताएंगे जिनके तहत जन्मे लोग न केवल सुंदर होते हैं बल्कि बहुत बुद्धिमान भी होते हैं. मूलांक 2,11, 20, 29 तारीख पर जन्में लोग चांद जैसी खूबसूरती : जिन लोगों का मूलांक 2 होता है उन लोगों की खूबसूरती चांद जैसी होती है जो उनके चेहरे पर एक अनोखी चमक लाती है. दिल की सुंदरता : वे दिल के भी साफ और सुंदर होते हैं और इस वजह से वह जीवन में सफलता को प्राप्त करते हैं. रचनात्मक : मूलांक 2 वाले लोग रचनात्मक होते हैं और किसी भी समस्या का हल बहुत ही आसानी से कर लेते हैं. रोमांटिक स्वाभाव : ये रोमांटिक होते हैं और अपने प्रियजनों के प्रति बहुत ही संवेदनशील होते हैं. मददगार स्वाभाव : ये अपने मददगार स्वाभाव के लिए भी जाने जाते हैं और हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं. भावनात्मकता : मूलांक 2 वाले लोग बहुत ही जल्दी रो देते हैं और उनकी भावनाएं बहुत ही गहरी होती है. Also Read : Numerology Secrets: जानें किस तारीख पर जन्मे शिशु बनते हैं IAS-IPS और क्या है उनके सफलता का राज मूलांक 6, 15, 24 तारीख पर जन्में लोग आकर्षक पर्सनालिटी: मूलांक 6 वाले लोगों की पर्सनालिटी बहुत ही आकर्षक होती है जो उन्हें दूसरों के बीच खड़ा करती है. स्टाइल और फैशन: इन लोगों को स्टाइल की बहुत समझ होती है और वे फैशनेबल भी बहुत होते हैं. ये अपने कपड़ों और एक्सेसरीज का चयन बहुत ही सावधानी से करते हैं. सहज और दयालु: मूलांक 6 वाले लोग बहुत सहज होते हैं और किसी को दुखी नहीं देखना चाहते है. वे दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. रोमांटिक स्वभाव: ये लोग रोमांटिक होते हैं और अक्सर प्यार में पड़ जाते हैं. संगीत में प्रतिभा: मूलांक 6 वाले लोगों में संगीत की प्रतिभा होती है जो उन्हें भाग्यशाली बनाती है. इनपुट : शुभ्रा लक्ष्मी Also Read : Numerology: इस तारीख को जन्म हुआ है तो आपकी भी होगी लव मैरिज, समाज को बदलने की होती है ताकत Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Numerology: ब्यूटी विद ब्रेन, इस दिन जन्में लोग बनाते हैं परफेक्ट कॉम्बिनेशन appeared first on Naya Vichar.

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PK का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले- नीतीश कुमार की ना तो दरोगा बात सुनते हैं, ना ही इंस्पेक्टर और ना ही बिहार के शिक्षक और बैंक

नया विचार – जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर उनकी ही प्रशासन के अधिकारियों द्वारा उनकी ही बात नहीं सुनने पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा आज बिहार में मुख्यमंत्री की ना तो दरोगा बात सुनते हैं, ना ही इंस्पेक्टर और ना ही बिहार के शिक्षक और बैंक। आज बिहार के लोगों की मेहनत से जमा किया हुआ पैसा, बैंकों द्वारा तमिलनाडू, गुजरात आदि राज्यों को दिया जा रहा हैं और उसका परिणाम यह हुआ की मजदूर बिहार के, पूँजी बिहार की जनता की लेकिन फैक्ट्री के मालिक तमिलनाडू और गुजरात के हैं। उसके बाद उन राज्यों में बनी वस्तु को बिहार में आयत किया जाता है और लोगों को महंगे दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं। यह उसी तरह है जैसे ब्रिटिश शासनकाल में कपास और नील की खेती बिहार में होती थी पर फैक्ट्री इंग्लैंड में थी जिससे हमारे ही कच्चे माल से बनी वस्तु को हमें ही उच्च दरों पर बेचा जाता था। यह दुर्भाग्य की बात है कि आज भी बिहार की वही स्थिति बनी हुई हैं। यदि बिहार के बैंक बिहार प्रशासन की बात सुनते या फिर RBI के नियमों का पालन करते तो केवल बिहार की जनता के पैसों से हर वर्ष बिहार में 2 लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश होता। जिससे बिहार के लोगों को दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी नहीं करनी पड़ती।

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Business Idea: मखाना की खेती से करें करोड़ों की कमाई, जानें इस शानदार बिजनेस आइडिया के बारे में

Business Idea: मखाना, जिसे फॉक्स नट्स या कमल के बीज के रूप में भी जाना जाता है, एक अत्यधिक पौष्टिक और लोकप्रिय स्नैक है. यह हिंदुस्तान में व्यापक रूप से उगाया जाता है, विशेष रूप से बिहार में. जहां यह स्थानीय वित्तीय स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. स्वस्थ स्नैक्स की बढ़ती मांग के साथ मखाना खेती एक लाभदायक व्यावसायिक अवसर प्रस्तुत करता है. इस लेख में मखाना खेती के प्रमुख पहलुओं और इसे शुरू करने के तरीके पर चर्चा की गई है. मखाना का बाजार संभावनाएं मखाना की वैश्विक मांग इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण बढ़ गई है. यह प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिससे यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए पसंदीदा स्नैक बन गया है. शाकाहारी और ग्लूटेन-मुक्त आहार की बढ़ती लोकप्रियता ने भी मखाना बाजार के विकास में योगदान दिया है. हिंदुस्तान मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक है, और इसकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग है. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी की स्थिति मखाना मुख्य रूप से तालाबों, झीलों और आर्द्रभूमि में उगाया जाता है. यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में 20-35°C तापमान सीमा के साथ अच्छी तरह से पनपता है. मखाना खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी चिकनी और दोमट होनी चाहिए, जो लंबे समय तक पानी रोक सके. उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन के लिए खेती की प्रक्रिया में स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त जल स्रोत की आवश्यकता होती है. Also Read : Premanand Ji Maharaj Net Worth : कितनी संपत्ति के मालिक हैं प्रेमानंद जी महाराज? जानें उनका खुद का जवाब मखाना खेती शुरू करने के स्टेप्स 1.भूमि और जल स्रोत का चयन मखाना खेती शुरू करने के लिए, आपको अच्छे जल धारण क्षमता वाले तालाब या आर्द्रभूमि की आवश्यकता होगी. पौधों की उचित वृद्धि के लिए जल की गहराई लगभग 1.5 से 2.5 फीट होनी चाहिए. 2.बीज का चयन और बुवाई बेहतर उपज के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मखाना बीजों का चयन किया जाना चाहिए. बीजों को अप्रैल से जून के बीच जल निकायों में बोया जाता है. किसानों को पौधों के सही विस्तार के लिए उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए. 3.खेती और देखभाल मखाना पौधों की नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है. वृद्धि अवधि लगभग छह महीने होती है, जिसके दौरान किसानों को खरपतवार नियंत्रण और जल निकायों का सही वायु संचार सुनिश्चित करना चाहिए. बेहतर उपज के लिए जैविक उर्वरकों और प्राकृतिक कीट नियंत्रण विधियों का उपयोग किया जाना चाहिए. 4. कटाई और प्रोसेसिंग  मखाना आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच काटा जाता है. बीजों को हाथ से एकत्र किया जाता है, धूप में सुखाया जाता है, और फिर अंतिम खाद्य उत्पाद प्राप्त करने के लिए भुना जाता है. भूनने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह मखाना के स्वाद और गुणवत्ता को निर्धारित करती है. 5. निवेश और लाभ मखाना खेती के लिए मध्यम निवेश की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से तालाब की स्थापना, बीज खरीद और श्रम लागत पर आधारित होती है. प्रति एकड़ औसत उपज 15-20 क्विंटल हो सकती है, और प्रसंस्कृत मखाना की बाजार कीमत काफी अधिक होती है. उचित प्रबंधन के साथ, किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं. Also Read : PAN Card की गलतियां भारी पड़ सकती हैं, लग सकता है 10,000 रुपये जुर्माना! जानें बचने के तरीके The post Business Idea: मखाना की खेती से करें करोड़ों की कमाई, जानें इस शानदार बिजनेस आइडिया के बारे में appeared first on Naya Vichar.

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Trade war : चीन ने अमेरिका पर तरेरी लाल आंखें, 15% तक टैरिफ लगाकर डोनाल्ड ट्रंप को दिया जवाब

Trade war : चीन ने अमेरिका पर 15% तक टैरिफ लगाया. ऐसा करके ड्रैगन ने डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब दिया है. चीन के मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ने मंगलवार को घोषणा की कि वह अमेरिका के खिलाफ कई प्रोडक्ट पर जवाबी टैक्स लगा रहा है. मिनिस्ट्री ने कहा, ‘चीन कोयला और एलएनजी प्रोडक्ट पर 15 प्रतिशत शुल्क लागू करेगी. साथ ही कच्चे तेल, कृषि मशीनरी, बड़ी कारों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा.” इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कांग ने टैक्स को लेकर अमेरिकी प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इससे चीन जवाबी कदम उठाने को मजबूर हो सकता है. ट्रेड वार से किसी का भला नहीं होता. कांग ने कहा, ‘‘हम इस वृद्धि का कड़ा विरोध करते हैं. हमारा मानना ​​है कि यह डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) के नियमों का उल्लंघन है.’’ चीन फरवरी महीने के लिए 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है. चीनी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत टैक्स अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा अमेरिका में इम्पोर्ट होने वाली चीनी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है. इस वाल के जवाब में फू ने कहा कि चीन डब्ल्यूटीओ में शिकायत दर्ज करा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको, कनाडा और चीन से इम्पोर्ट होने वाली वस्तुओं पर कड़े शुल्क लगाने संबंधी एक आदेश पर शनिवार को हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने दावा किया था कि ये शुल्क अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है. ये भी पढ़ें : ट्रंप का फिर यूटर्न, कनाडा को मिली 30 दिनों की सांस लेने की छूट! कनाडा और मेक्सिको डोनाल्ड ट्रंप ने दी राहत कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम के साथ अलग-अलग बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों पर शुल्क लगाए जाने के फैसले के इम्प्लीमेंटेशन पर कम से कम एक महीने के लिए रोक लगाने पर सहमति जतायी है. The post Trade war : चीन ने अमेरिका पर तरेरी लाल आंखें, 15% तक टैरिफ लगाकर डोनाल्ड ट्रंप को दिया जवाब appeared first on Naya Vichar.

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महाभारत काल से है भीष्म अष्टमी का संबंध, यहां से जानें

Bhishma Ashtami 2025: हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को एकोदिष्ट श्राद्ध के रूप मे मनाया जाता है.इस शुभ तिथि पर भीष्म अष्टमी मनाई जाती है. सनातन धर्म शास्त्रों में निहित है कि महाहिंदुस्तान के महान योद्धा भीष्म पितामह ने माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन ही अपने सात्विक शरीर का त्याग कर दिया था. इस शुभ अवसर पर भीष्म अष्टमी मनाई जाती है. ज्योतिषी शास्त्र के अनुसार भीष्म अष्टमी पर बड़े अच्छे और मंगलकारी योग बन रहे हैं.इन योग में जगत के पालनहार प्रभु श्री हरि की पूजा अर्चना करने से आपकी हर इच्छा पूर्ण होगी.वहीं आपको पितृ दोष से मोक्ष प्राप्त होगा साथ ही पितरों का तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है. भीष्म अष्टमी 2025 शुभ मुहूर्त भीष्म अष्टमी तिथि: बुधवार, 05 फरवरी 2025तिथि प्रारंभ: 05 फरवरी 2025, दोपहर 02:30 बजेतिथि समाप्ति: 06 फरवरी 2025, दोपहर 12:35 बजेपूजन का शुभ समय: 05 फरवरी 2025, प्रात: काल 11:26 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक बसंत पंचमी पर ऐसे करें मां सरस्वती का विसर्जन, इन मंत्रों का जाप जरूरी भीष्म अष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महाहिंदुस्तान के युद्ध में बुरी तरह घायल होने के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने इच्छामृत्यु के वरदान के कारण अपना सात्विक शरीर का त्याग नहीं किया था उन्होंने अपनी मृत्यु के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार था.हिंदू शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि सूर्यदेव साल में आधे समय दक्षिण दिशा की तरफ उपस्थित होते हैं, जिसे अशुभ समय माना जाता है.इस दौरान कोई भी मंगलकार्य नहीं किया जाता है.जब सूर्य उत्तर दिशा की तरफ बढ़ने लगते हैं, तो इसे उत्तरायण कहा जाता है, और यह मंगलकारी कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त होता है.भीष्म पितामह ने इसी शुभ काल को ध्यान में रखते हुए माघ शुक्ल अष्टमी के दिन शरीर का त्याग करने का संकल्प किया. इस दिन लोग उनकी आत्मा की शांति के लिए एकोदिष्ट श्राद्ध करते हैं और पितरों के उद्धार और मोक्ष के प्राप्ति का तर्पण करते हैं. भीष्म पितामह की अंतिम शिक्षा क्या थी भीष्म पितामह 18 दिनों तक बाणों की शय्या पर सोये रहे और मृत्यु से ठीक पहले धर्मराज युधिष्ठिर को जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत की शिक्षा दी. उन्होंने धर्म, कर्तव्य, न्याय और नीतिशास्त्र के उपदेश की शिक्षा दिया था. जिन्हें आज भी “भीष्म नीति” के रूप में जाना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माघ शुक्ल अष्टमी के दिन, सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश करने के बाद , भीष्म पितामह ने अपने प्राण का त्याग कर दिया था.उनके महान बलिदान और अनुष्ठान को हम याद करते हुए हर वर्ष भीष्म अष्टमी का पर्व मनाते है. The post महाहिंदुस्तान काल से है भीष्म अष्टमी का संबंध, यहां से जानें appeared first on Naya Vichar.

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